Class 9 Hindi (Ganga) Chapter 2 | Kya Likhoon? | NCERT Solutions क्या लिखूं?

क्या लिखूँ? — संपूर्ण प्रश्नोत्तर हल | EduGrown
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क्या लिखूँ?

संपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं व्याकरण हल · कक्षा गंगा (हिंदी)

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
लेखक — पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी जन्म: 1894, खैरागढ़ (छत्तीसगढ़) · निधन: 1971 · कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार व हास्य-व्यंग्यकार
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मेरे उत्तर मेरे तर्क

सटीक उत्तर चुनिए और कारण भी समझिए
1“हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी काम दे सकती है… असली वस्तु है हैट, खूँटी नहीं।” ‘हैट’ और ‘खूँटी’ का उल्लेख किस भाव को सबसे अधिक उजागर करता है?
  • (क) विषय से अधिक लेखक के भावों की प्रधानता को दर्शाना
  • (ख) विचार से अधिक तथ्य आधारित सामग्री को प्रमुख बताना
  • (ग) शैली से अधिक भाषा व्यवस्था की उपयोगिता बताना
  • (घ) उदाहरण से अधिक सिद्धांत आधारित लेखन का समर्थन करना
🧠 तर्क — यह उत्तर उपयुक्त क्यों है

गार्डिनर के इस उदाहरण में हैट = मन के सच्चे भाव (असली वस्तु) और खूँटी = विषय (केवल आधार/माध्यम) का प्रतीक है। जैसे हैट टाँगने के लिए कोई भी खूँटी चल जाती है, वैसे ही अपने मनोभावों को व्यक्त करने के लिए कोई भी विषय उपयुक्त है। इससे स्पष्ट होता है कि निबंध में विषय गौण है और लेखक के हृदय के भाव प्रधान हैं।

शेष विकल्प इसलिए गलत हैं — (ख) यहाँ तथ्य नहीं, भाव की बात है; (ग) भाषा-व्यवस्था की चर्चा नहीं; (घ) सिद्धांत बनाम उदाहरण का प्रसंग नहीं है।

2“उनमें लेखक की सच्ची अनुभूति रहती है… उसका उल्लास रहता है।” मानटेन की पद्धति लेखक के लिए किस निर्णय का आधार बनती है?
  • (क) शैली और स्पष्ट-सहज भाषा को महत्व न देना
  • (ख) परंपरागत निबंधकारों को अस्वीकार करना
  • (ग) अध्ययन के बिना अपने विचार प्रस्तुत कर देना
  • (घ) अनुभव आधारित स्वच्छंद लेखन को अपनाना
🧠 तर्क — यह उत्तर उपयुक्त क्यों है

मानटेन ने जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में उतार दिया। ऐसे निबंध मन की स्वच्छंद रचनाएँ हैं जिनमें लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास रहता है। इसी से प्रेरित होकर लेखक भी अपने अनुभव के आधार पर स्वतंत्र/स्वच्छंद लेखन करने का निर्णय लेता है — “तब इसी पद्धति का अनुसरण कर मैं भी क्यों न निबंध लिखूँ।”

अन्य विकल्प गलत — (क) यह पद्धति सहज भाषा को महत्व देती है; (ख) लेखक परंपरा को पूरी तरह नकारता नहीं, केवल भिन्न मार्ग चुनता है; (ग) यह पद्धति अनुभव पर आधारित है, ‘बिना अध्ययन’ पर नहीं।

3“तरुणों के लिए भविष्य उज्ज्वल… वृद्धों के लिए अतीत सुखद…” यह तुलना किस पर आधारित है?
  • (क) तर्क और भावना
  • (ख) ज्ञान और शिक्षा
  • (ग) परिश्रम और उपलब्धि
  • (घ) अभिलाषा और अनुभव
🧠 तर्क — यह उत्तर उपयुक्त क्यों है

तरुण भविष्य की ओर देखते हैं — यह उनकी अभिलाषा/आकांक्षा है; वृद्ध अतीत की ओर देखते हैं — यह उनका अनुभव/स्मृति है। दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं, पर एक सपने (अभिलाषा) के सहारे और दूसरा बीते अनुभव के सहारे। इसलिए यह तुलना अभिलाषा (तरुण) और अनुभव (वृद्ध) पर आधारित है।

4निबंध में अमीर खुसरो की कहानी का उल्लेख किस संदर्भ में किया गया है?
  • (क) कविता लेखन की कला को समझाने के लिए
  • (ख) एक साथ कई विषयों को संबोधित करने की प्रतिभा दिखाने के लिए
  • (ग) ढोल के महत्व को दर्शाने के लिए
  • (घ) सामाजिक सुधार के उदाहरण के रूप में
🧠 तर्क — यह उत्तर उपयुक्त क्यों है

अमीर खुसरो ने एक ही पद्य में चार स्त्रियों की चार भिन्न इच्छाएँ (खीर, चरखा, कुत्ता, ढोल) पूरी कर दीं। लेखक के सामने भी दो विषय थे — ‘दूर के ढोल सुहावने’ और ‘समाज-सुधार’। खुसरो की इसी पद्धति को अपनाकर वह दोनों विषयों को एक ही निबंध में समेट लेता है। अतः कहानी का उद्देश्य एक साथ कई विषयों को संभालने की प्रतिभा दिखाना है।

“खीर पकाई जतन से, चरखा दिया चला।
आया कुत्ता खा गया, तू बैठी ढोल बजा।।”
5निबंध में समाज-सुधार के संदर्भ में क्या कहा गया है?
  • (क) सुधारों की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।
  • (ख) सुधार केवल बड़े विचारकों द्वारा संभव हैं।
  • (ग) सुधार केवल आधुनिक युग की देन हैं।
  • (घ) सुधारों का कोई अंत नहीं, लेकिन दोष समाप्त हो जाते हैं।
🧠 तर्क — यह उत्तर उपयुक्त क्यों है

लेखक कहता है कि मनुष्य-जाति के इतिहास में ऐसा कोई काल नहीं हुआ जब सुधारों की आवश्यकता न रही हो। समाज में नए-नए दोष उत्पन्न होते रहते हैं और नए-नए सुधार होते रहते हैं — “न दोषों का अंत है और न सुधारों का।” इसलिए सुधार की आवश्यकता हर युग में बनी रहती है।

विकल्प (घ) गलत है क्योंकि दोष कभी समाप्त नहीं होते; जो आज सुधार है वही कल दोष बन जाता है — यही जीवन को प्रगतिशील बनाता है।

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मेरी समझ मेरे विचार

चर्चा कीजिए और उत्तर लिखिए
1निबंध लेखन के विषय में ए.जी. गार्डिनर और लेखक के विचारों में क्या अंतर है?
✒️ उत्तर
आधारए.जी. गार्डिनरलेखक (बख्शी जी)
लेखन का स्रोतलिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती हैऐसी मानसिक स्थिति का अनुभव ही नहीं किया
भावों का उठनामन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति, मस्तिष्क में आवेग स्वयं उठता है; भाव अपने आप उत्पन्नभाव अपने आप नहीं आते — सोचना, चिंता व परिश्रम करना पड़ता है
विषय की चिंताविषय की चिंता नहीं रहती — कोई भी विषय चल जाता हैविषय व सामग्री दोनों के लिए विशेष परिश्रम करना पड़ता है
प्रकृतिलेखन स्वतःस्फूर्त (सहज)लेखन श्रमसाध्य (प्रयत्नपूर्वक)

संक्षेप में — गार्डिनर के लिए निबंध-लेखन भीतरी आवेग से सहज ही हो जाता है, जबकि लेखक के लिए वह सोच-विचार और मेहनत माँगता है।

2वृद्ध और तरुण दोनों ही वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं — दोनों की असंतुष्टि के क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
✒️ उत्तर

तरुणों की असंतुष्टि के कारण —

  • वे भविष्य को वर्तमान में लाना चाहते हैं; वर्तमान उनकी आकांक्षाओं के अनुरूप नहीं लगता।
  • उनमें जोश व अधीरता होती है; वे क्रांति व परिवर्तन के समर्थक हैं और धीमी गति से असंतुष्ट रहते हैं।
  • पुरानी परंपराएँ व बंधन उन्हें रुकावट लगते हैं।

वृद्धों की असंतुष्टि के कारण —

  • उन्हें अतीत का गौरव वर्तमान में दिखाई नहीं देता; वे अतीत को खींचकर वर्तमान में देखना चाहते हैं।
  • वे अतीत-गौरव के संरक्षक हैं; नए परिवर्तन उन्हें मूल्यों का ह्रास लगते हैं।
  • अनुभव की कसौटी पर वर्तमान उन्हें अपूर्ण व बदला हुआ प्रतीत होता है।

मेरे विचार से दोनों पीढ़ियों के बीच यह असंतोष — तेज़ी से बदलते समाज, अपेक्षाओं के पूरा न होने और पुराने-नए मूल्यों के टकराव के कारण भी होता है।

3नमिता और अमिता किन विषयों पर निबंध लिखवाना चाहती हैं? उनके सुझाए विषयों पर लिखने में लेखक को क्या-क्या कठिनाइयाँ आईं?
✒️ उत्तर

विषय — नमिता चाहती है ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं’ पर निबंध; अमिता का आग्रह है ‘समाज-सुधार’ पर। दोनों विषय परीक्षा में आ चुके हैं।

लेखक नमिता और अमिता को निबंध समझाते हुए
लेखक (मास्टर) नमिता और अमिता को निबंध-रचना का रहस्य समझाते हुए

कठिनाइयाँ —

  • लेखक को वह स्वतःस्फूर्त मानसिक स्थिति नहीं आती जिसमें भाव अपने आप उठें — उसे श्रम करना पड़ता है।
  • ‘दूर के ढोल’ जैसे विषय पर पाँच पेज लिखना और उसकी रूपरेखा बनाना कठिन — वह सोच ही नहीं पाता कि रूपरेखा कैसी हो।
  • ‘समाज-सुधार’ अनादि काल से विवादास्पद है; बड़े-बड़े विज्ञों में भी मतभेद है — इसे पाँच पेज में समेटना कठिन।
  • समय की कमी — दो घंटे में दो निबंध तैयार करने हैं।
  • पास में विश्वकोश/संदर्भ ग्रंथ/पुस्तकालय नहीं — केवल अपने ज्ञान पर भरोसा करना पड़ा।

समाधान — लेखक ने अमीर खुसरो की पद्धति अपनाकर दोनों विषयों को एक ही निबंध में समेट लिया।

4निबंधशास्त्र के आचार्यों ने आदर्श निबंध लिखने की कौन-सी युक्तियाँ सुझाई हैं? आप निबंध लिखने से पहले कैसी तैयारी करते हैं?
✒️ उत्तर

आचार्यों की युक्तियाँ —

  • निबंध छोटा होना चाहिए; छोटे निबंध में रचना की सुंदरता बनी रहती है।
  • निबंध के दो प्रधान अंग हैं — सामग्री और शैली
  • पहले सामग्री/विचार एकत्र करना चाहिए (मनन व अध्ययन से)।
  • लिखने से पहले निबंध की रूपरेखा बना लेनी चाहिए।
  • भाषा में प्रवाह हो — वाक्य छोटे-छोटे पर एक-दूसरे से संबद्ध हों।

मेरी तैयारी — सबसे पहले विषय को अच्छी तरह समझता/समझती हूँ, फिर जानकारी व मुख्य बिंदु एकत्र करता हूँ, एक रूपरेखा बनाता हूँ (भूमिका → विषय-विस्तार → उपसंहार), सरल व प्रवाहपूर्ण भाषा में लिखता हूँ, उपयुक्त उदाहरण व लोकोक्तियाँ जोड़ता हूँ और अंत में पुनरावलोकन करता हूँ।

5मानटेन ने “जो कुछ देखा, सुना और अनुभव किया, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर दिया।” निबंध लेखन के लिए देखने, सुनने और अनुभव करने की क्या उपयोगिता हो सकती है?
✒️ उत्तर
  • देखे-सुने-अनुभूत अनुभव लेखन को जीवंत, सजीव और विश्वसनीय बनाते हैं।
  • लेखक को उधार के विचारों के बजाय वास्तविक जीवन से मौलिक सामग्री मिलती है।
  • सच्ची अनुभूति से निबंध में आत्मीयता और उल्लास आता है, जिससे पाठक सीधे जुड़ जाता है।
  • ऐसा लेखन स्वाभाविक व प्रभावशाली होता है — उसमें न दिखावटी ज्ञान की गरिमा होती है, न केवल कल्पना की महिमा।
  • अनुभव लेखक की दृष्टि को व्यापक बनाता है और विषय को गहराई से समझने में मदद करता है।
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निबंध लेखन की कला (आरेख)

दिए गए आरेख को देखिए और इसके आधार पर निबंध लिखिए
📌 ‘निबंध’ का अर्थ

‘निबंध’ का शाब्दिक अर्थ है — ‘बाँधना’ (नि + बंध), अर्थात् भली-भाँति बँधा या गठा हुआ। यह गद्य की वह विधा है जिसमें रचनाकार किसी विषय पर अपने अनुभव, विचार, दृष्टिकोण व भावनाओं को तार्किक, भावनात्मक, क्रमबद्ध और साहित्यिक रूप से प्रस्तुत करता है। शैली का अर्थ है — अभिव्यक्ति का ढंग।

निबंध-लेखन प्रक्रिया का आरेख —

प्रेरणा विषय चयन सामग्री संग्रह रूपरेखा निर्माण भाव-विस्तार शैली निर्धारण लेखन औरसमापन प्रेरणा-स्रोत विषय

आरेख के अनुसार निबंध-लेखन के चरण —

  1. प्रेरणा — लिखने की भीतरी या बाहरी प्रेरणा का जागना।
  2. विषय चयन — रुचि व जानकारी के अनुसार उपयुक्त विषय चुनना।
  3. सामग्री संग्रह — विषय से जुड़े विचार, तथ्य व उदाहरण एकत्र करना।
  4. रूपरेखा निर्माण — मुख्य बिंदुओं का क्रम (भूमिका, मध्य, उपसंहार) तय करना।
  5. भाव-विस्तार — बिंदुओं को विचार व भावों के साथ विस्तार देना।
  6. शैली निर्धारण — सरल, प्रवाहपूर्ण व प्रभावी भाषा-शैली चुनना।
  7. लेखन और समापन — क्रमबद्ध लेखन और सुंदर उपसंहार के साथ समाप्ति।

📝 इस प्रक्रिया पर आधारित आदर्श लघु-निबंध — “समय का महत्व”

(प्रेरणा व विषय चयन) जीवन में सबसे मूल्यवान वस्तु यदि कोई है, तो वह है समय। धन खोकर फिर कमाया जा सकता है, पर बीता हुआ समय कभी लौटकर नहीं आता।

(भाव-विस्तार) समय निरंतर बहती नदी के समान है। जो व्यक्ति इसका सदुपयोग करता है, वही जीवन में सफलता पाता है। महापुरुषों की उपलब्धियों के पीछे समय का अनुशासन ही छिपा रहता है। इसके विपरीत, आलस्य में समय गँवाने वाला बाद में केवल पछताता है।

(उपसंहार/समापन) अतः हमें प्रत्येक क्षण का सदुपयोग करना चाहिए। आज का काम कल पर न टालना ही समय के प्रति सच्चा सम्मान है — यही उन्नति का मूल मंत्र है।

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भाव-विस्तार

नीचे दिए वाक्यों का अपने शब्दों में भाव-विस्तार
1“जो तरुण संसार के जीवन-संग्राम से दूर हैं, उन्हें संसार का चित्र बड़ा ही मनमोहक प्रतीत होता है।”
🌿 भाव-विस्तार

जिन युवाओं ने अभी जीवन के वास्तविक संघर्ष व कठिनाइयों का सामना नहीं किया, उन्हें यह संसार अत्यंत सुंदर व आकर्षक लगता है। दूरी से देखने पर हर चीज़ मनोहर दिखती है, क्योंकि यथार्थ की कठोरता का अनुभव अभी उन्हें नहीं हुआ होता। जैसे ‘दूर के ढोल सुहावने’ लगते हैं, वैसे ही अनुभवहीन तरुण को संसार स्वप्न-सा रमणीय प्रतीत होता है।

2“मनुष्य जाति के इतिहास में कोई ऐसा काल ही नहीं हुआ, जब सुधारों की आवश्यकता न हुई हो।”
🌿 भाव-विस्तार

मानव-समाज में हर युग में कोई न कोई दोष या कमी रही है, इसलिए सुधार की आवश्यकता सदा बनी रही। समय के साथ नए दोष जन्म लेते हैं और उनके निवारण के लिए नए सुधारक आते हैं। सुधार एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है — इसी से समाज जीवित व प्रगतिशील बना रहता है। यही कारण है कि सुधारकों की परंपरा कभी समाप्त नहीं होती।

3“आज जो तरुण हैं, वही वृद्ध होकर अतीत के गौरव का स्वप्न देखेंगे।”
🌿 भाव-विस्तार

समय एक चक्र है। आज का युवा कल वृद्ध होगा, और तब उसका आज का वर्तमान उसके लिए ‘अतीत’ बन जाएगा। तब वह भी अपने बीते दिनों को गौरवमय मानकर उनका स्मरण करेगा, ठीक जैसे आज के वृद्ध अपने अतीत को सुखद मानते हैं। इस प्रकार हर पीढ़ी अपने समय में भविष्य के सपने देखती है और वृद्ध होकर अतीत के गौरव में डूब जाती है।

4“निबंध छोटा होना चाहिए। छोटा निबंध बड़े की अपेक्षा अधिक अच्छा होता है।”
🌿 भाव-विस्तार

संक्षिप्त निबंध में विचारों की कसावट और रचना की सुंदरता बनी रहती है। छोटे निबंध में लेखक केवल आवश्यक व सारगर्भित बातें ही रखता है, जिससे वह सुगठित व प्रभावशाली बनता है। इसके विपरीत बड़ा निबंध प्रायः बिखर जाता है और उसमें अनावश्यक विस्तार आ जाता है, जिससे उसकी सुंदरता घट जाती है। अतः छोटा व कसा हुआ निबंध श्रेष्ठ माना जाता है।

📎 उदाहरण (पाठ में दिया गया)
“तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत गौरव के संरक्षक” → युवा पीढ़ी में किसी समस्या को लेकर आक्रोश व त्वरित निर्णय की भावना प्रबल होती है, जबकि वृद्ध पीढ़ी समस्या के समाधान के लिए अनुभव और परंपरागत ढंग पर विश्वास करती है।
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मेरा अनुभव

आपको किन विषयों पर लिखना सरल/कठिन लगा?
✒️ नमूना उत्तर

मुझे उन विषयों पर लिखना सरल लगा जिनसे मैं रोज़ के जीवन में जुड़ा/जुड़ी रहती हूँ — जैसे ‘मेरा प्रिय त्योहार’, ‘मेरा विद्यालय’ या ‘वर्षा ऋतु’। इनमें मेरे पास देखे-अनुभव किए हुए सजीव चित्र पहले से मौजूद थे, इसलिए विचार सहज ही आते गए।

वहीं कठिन वे विषय लगे जो अमूर्त या विवादास्पद थे — जैसे ‘समाज-सुधार’ या ‘विज्ञान वरदान या अभिशाप’। इनमें तथ्य व उदाहरण जुटाने और संतुलित विचार रखने में अधिक परिश्रम करना पड़ा, क्योंकि इनसे मेरा सीधा अनुभव कम था।

निष्कर्ष — जिस विषय का अनुभव या अध्ययन अधिक होता है, उस पर लिखना उतना ही सहज हो जाता है।

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विषयों से संवाद

जानकारी एकत्र कीजिए और लिखिए
1बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक आदि महान व्यक्तियों ने अपने समय में समाज के लिए क्या-क्या कार्य किए?
✒️ उत्तर (संक्षेप में)
महापुरुषसमाज के लिए योगदान
गौतम बुद्धअहिंसा, करुणा, मध्यम मार्ग व अष्टांगिक मार्ग का उपदेश; जाति-भेद का विरोध; बौद्ध धर्म की स्थापना।
महावीर स्वामीअहिंसा, सत्य, अपरिग्रह व अनेकांतवाद का प्रचार; जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर; जीव-दया का संदेश।
नागार्जुनबौद्ध दार्शनिक; ‘शून्यवाद/माध्यमिक’ दर्शन के प्रवर्तक; तर्क व ज्ञान-परंपरा को समृद्ध किया।
आदि शंकराचार्यअद्वैत वेदांत का प्रतिपादन; चार मठों की स्थापना; भारत की आध्यात्मिक एकता को सुदृढ़ किया।
कबीरनिर्गुण भक्ति के संत; जाति-पाँति, आडंबर व बाह्य कर्मकांड का विरोध; हिंदू-मुस्लिम एकता व सादगी का संदेश।
गुरु नानकसिख धर्म के संस्थापक; ‘एक ओंकार’ का संदेश; जाति-भेद व पाखंड का विरोध; ‘कीरत करो, नाम जपो, वंड छको’।
2अपने आस-पास स्त्री-शिक्षा, पर्यावरण, असमानता, दिव्यांगजन आदि के लिए कार्य करने वाले व्यक्ति व संस्थाओं के विषय में पता लगाकर लिखिए।
✒️ नमूना उत्तर
  • स्त्री-शिक्षा — सावित्रीबाई फुले (प्रेरणा-स्रोत); ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ अभियान; अनेक एनजीओ बालिकाओं को निःशुल्क शिक्षा देते हैं।
  • पर्यावरण — सुंदरलाल बहुगुणा (चिपको आंदोलन); ‘ग्रीन/पर्यावरण मित्र’ संस्थाएँ वृक्षारोपण व स्वच्छता का कार्य करती हैं।
  • असमानता/समाज-सेवा — मदर टेरेसा, बाबा आम्टे; अनेक स्वयंसेवी संस्थाएँ गरीबों व वंचितों की सहायता करती हैं।
  • दिव्यांगजन — अनेक विशेष विद्यालय व पुनर्वास केंद्र दिव्यांग बच्चों को शिक्षा, कौशल व आत्मनिर्भरता प्रदान करते हैं।

आप अपने नगर/गाँव की किसी ऐसी संस्था या व्यक्ति का नाम जोड़कर इस उत्तर को और सजीव बना सकते हैं।

3आपको ‘समाज-सुधार’ का अवसर मिले तो आप क्या-क्या सुधार करना चाहेंगे और कैसे?
✒️ नमूना उत्तर
  • शिक्षा — हर बच्चे, विशेषकर बालिकाओं, के लिए निःशुल्क व समान शिक्षा; निरक्षरता उन्मूलन के लिए प्रौढ़ शिक्षा शिविर।
  • स्वच्छता व पर्यावरण — वृक्षारोपण, कचरा-प्रबंधन व जल-संरक्षण के लिए जन-जागरूकता।
  • सामाजिक कुरीतियाँ — जाति-भेद, दहेज-प्रथा व बाल-विवाह के विरुद्ध जागरूकता व कानून का पालन।
  • कैसे — स्वयं उदाहरण बनकर, ‘नुक्कड़ नाटक’, पोस्टर व सोशल मीडिया द्वारा जागरूकता, और स्वयंसेवी समूह बनाकर निरंतर प्रयास से।
4भारतीय ज्ञान-साहित्य में नैतिक, आध्यात्मिक व व्यावहारिक जीवन में संतुलन की बात — शिक्षक के साथ चर्चा।
✒️ चर्चा-बिंदु

भारतीय ज्ञान-परंपरा में ‘धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष’ चार पुरुषार्थों के द्वारा जीवन में संतुलन का आदर्श रखा गया। गीता का निष्काम कर्म, उपनिषदों का आत्मज्ञान तथा लोक-व्यवहार की नीति — ये सब मिलकर नैतिक, आध्यात्मिक व व्यावहारिक जीवन में संतुलन सिखाते हैं। शिक्षक के साथ इन उदाहरणों पर चर्चा कीजिए।

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सृजन

रचनात्मक लेखन
1लोकोक्ति ‘आम के आम गुठलियों के दाम’ और ‘जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास’ विषय को मिलाकर एक संक्षिप्त लेख तैयार कीजिए।
✒️ नमूना लेख

जैविक खाद की निर्मिति में हमारा प्रयास

‘आम के आम गुठलियों के दाम’ — अर्थात् एक ही प्रयास से दोहरा लाभ। हमारी पाठशाला ने इसी सिद्धांत को अपनाते हुए रसोई व बगीचे के कचरे से जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया। सब्ज़ियों के छिलके, सूखी पत्तियाँ व बचा हुआ भोजन — जो पहले व्यर्थ फेंका जाता था — अब गड्ढे में डालकर खाद में बदला जाता है।

इससे दोहरा लाभ हुआ — एक ओर कचरे का निपटान हुआ और स्वच्छता बढ़ी, दूसरी ओर बिना पैसे खर्च किए उपजाऊ खाद मिल गई, जिससे विद्यालय का बगीचा हरा-भरा हो गया। रासायनिक खाद से बचाव हुआ और मिट्टी की उर्वरता भी बनी रही। सचमुच यह ‘आम के आम और गुठलियों के दाम’ वाली कहावत को चरितार्थ करता है।

2ढोल के पास व दूर बैठे व्यक्ति के लिए ध्वनि का अनुभव भिन्न है — ऐसी कोई घटना अपनी डायरी में लिखिए जब दूर से अनुमान कुछ और रहा हो पर निकट से अनुभव अलग।
✒️ नमूना डायरी प्रविष्टि

दिनांक: ……   दिन: ……

आज मुझे एक रोचक अनुभव हुआ। दूर से मुझे लगा कि पड़ोस के मैदान में कोई उत्सव हो रहा है — ढोल की मधुर थाप व रोशनी देखकर मन उत्साह से भर गया। मैं सोचने लगा कि वहाँ कितनी रौनक होगी।

परंतु जब मैं पास पहुँचा तो अनुभव बिल्कुल अलग था। ढोल की आवाज़ इतनी तीव्र थी कि कान सुन्न हो गए, भीड़ का धक्का-मुक्की भरा शोर सिर चकरा देने वाला था। दूर से जो ‘सुहावना’ लग रहा था, निकट से वह कष्टदायक निकला।

इस घटना से मैंने सीखा कि — ‘दूर के ढोल सुहावने होते हैं।’ किसी भी वस्तु या स्थिति का दूर से किया अनुमान और निकट का यथार्थ अनुभव अक्सर भिन्न होते हैं।

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गतिविधियाँ

संकलन व वाद-विवाद
1अमीर खुसरो की अनमेली, मुकरियों व पहेलियों का शिक्षक की सहायता से संकलन कीजिए।
✒️ मार्गदर्शन व उदाहरण

अमीर खुसरो हास्य-व्यंग्यपूर्ण ‘अनमेली’, ‘मुकरी’ व ‘पहेली’ रचने में निपुण थे। ‘अनमेली’ में असंगत बातों को जोड़कर मनोरंजन किया जाता है, ‘मुकरी’ में सखी अपनी बात कहकर अंत में मुकर जाती है, और ‘पहेली’ में किसी वस्तु का गुप्त वर्णन रहता है। कुछ प्रसिद्ध उदाहरण —

पहेली — “एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा।
चारों ओर वह थाली फिरे, मोती उससे एक न गिरे।।”  (उत्तर — आकाश व तारे)

अपनी कक्षा में शिक्षक की सहायता से ऐसी और मुकरियों व पहेलियों को ढूँढ़कर एक सुंदर संकलन तैयार कीजिए।

2‘युवा और वृद्ध — दो पीढ़ियों का पीढ़ीगत अंतर’ पर कक्षा में वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।
✒️ वाद-विवाद के सहायक बिंदु

पक्ष (युवा पीढ़ी श्रेष्ठ) —

  • नवीन सोच, तकनीकी कुशलता व परिवर्तन का साहस।
  • ऊर्जा, उत्साह व जोखिम लेने की क्षमता।

विपक्ष (वृद्ध पीढ़ी श्रेष्ठ) —

  • जीवन का गहरा अनुभव व धैर्य।
  • परंपरा, मूल्य व सोच-समझकर निर्णय लेने की परिपक्वता।

निष्कर्ष — दोनों पीढ़ियों का सामंजस्य (युवा का जोश + वृद्ध का अनुभव) ही समाज को संतुलित प्रगति देता है। वाद-विवाद के नियम कक्षा 7–8 की पाठ्यपुस्तक ‘मल्हार’ से देखकर तय करें।

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व्याकरण — समास

परिभाषा, भेद व पाठ से उदाहरण
📖 परिभाषा

समास का अर्थ है — संक्षेप। दो या अधिक शब्दों के मेल से बने नए शब्द को समास कहते हैं; जैसे — गंगा + जल = गंगाजल, देश + भक्ति = देशभक्ति। समास से बने शब्द को समस्त पद कहते हैं। पहले पद को पूर्वपद व दूसरे को उत्तरपद कहते हैं। समस्त पद के अंगों को अलग करना समास-विग्रह कहलाता है — जैसे गंगाजल = गंगा + जल (गंगा का जल)।

समास के छह प्रमुख भेद —

भेदपहचानउदाहरण
1. तत्पुरुषउत्तरपद प्रधान; बीच के परसर्ग (का, से, के लिए) का लोपरसोईघर = रसोई के लिए घर
2. कर्मधारयपूर्वपद विशेषण व उत्तरपद विशेष्य; या उपमेय-उपमान संबंधनीलकमल = नीले रंग का कमल
3. द्विगुपूर्वपद संख्यावाची; अर्थ प्रायः समूहवाचीतिरंगा = तीन रंगों का समाहार
4. बहुव्रीहिदोनों पद गौण; मिलकर किसी अन्य (प्रधान) पद की ओर संकेतपीतांबर = पीला है अंबर जिसका (कृष्ण/विष्णु)
5. द्वंद्वदोनों पद प्रधान; योजक अव्यय (और) का लोपभाई-बहन = भाई और बहन
6. अव्ययीभावपूर्वपद अव्यय; समस्त पद भी अव्यय (क्रिया-विशेषण) का काम करेयथाशक्ति = शक्ति के अनुसार; धीरे-धीरे
पाठ ‘क्या लिखूँ?’ से चुने गए सामासिक शब्द — समास-विग्रह व नाम
सामासिक पदसमास विग्रहसमास का नाम
निबंधशास्त्रनिबंध का शास्त्रतत्पुरुष
निबंध-रचनानिबंध की रचनातत्पुरुष
समाज-सुधारसमाज का सुधारतत्पुरुष
विश्वकोशविश्व का कोशतत्पुरुष
जीवन-संग्रामजीवन रूपी संग्रामकर्मधारय
अतीत-गौरवअतीत का गौरवतत्पुरुष
विवाहोत्सवविवाह का उत्सवतत्पुरुष
लोकजीवनलोक का जीवनतत्पुरुष
नव-वधूनई वधूकर्मधारय
नगर-नगरप्रत्येक नगरअव्ययीभाव
गाँव-गाँवप्रत्येक गाँवअव्ययीभाव
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उपसर्ग एवं प्रत्यय

परिभाषा व अभ्यास हल
📖 परिभाषा

उपसर्ग — भाषा के सार्थक व लघुतम खंड जो स्वतंत्र रूप से प्रयोग नहीं होते; ये शब्दों के आरंभ में लगकर नया शब्द बनाते हैं। जैसे — दुर्+बोध = दुर्बोध, अन्+आदि = अनादि।

प्रत्यय — ऐसे सार्थक लघुतम खंड जो शब्दों के अंत में लगकर नया शब्द बनाते हैं। जैसे — सुधार+ = सुधारक, कठिन+आई = कठिनाई।

1निबंध से उपसर्ग व प्रत्यय वाले शब्द ढूँढ़कर लिखिए।
✒️ उत्तर

उपसर्ग वाले शब्द —

दुर् → दुर्बोध, दुर्बोधताअन् → अनादिअनु → अनुभव, अनुसंधान, अनुसरणप्र → प्रसिद्ध, प्रबल, प्रमुखवि → विश्वास, विरोध, विशेषसम् → संचार, समावेशअति → अत्यंत

प्रत्यय वाले शब्द —

क → सुधारकआई → कठिनाईता → मधुरता, यथार्थता, सुंदरता, विद्वताअक → लेखक, पाठकशील → प्रगतिशील

2वाक्यों को उचित उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर पूरा कीजिए।
✒️ हल
  • निबंध लिखना बड़ी कठिनाई (कठिन + आई) की बात है।
  • वर्तमान से दोनों को असंतोष (अ + संतोष) होता है।
  • वाक्यों में कुछ अस्पष्टता (अ + स्पष्ट + ता) भी चाहिए, क्योंकि यह अस्पष्टता या दुर्बोधता (दुर् + बोध + ता) गांभीर्य ला देती है।
3दिए शब्दों में उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाइए।
✒️ हल
मूल शब्दनए शब्द
मधुरमधुरता, मधुरमय, सुमधुर (उदाहरण)
सुधारसुधारक, सुधारवादी, सुधारात्मक
सुंदरसुंदरता, सौंदर्य, सुंदरतम
गतिगतिशील, गतिमान, प्रगति, अगति
समाजसामाजिक, समाजसेवी, असामाजिक
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भाव एक · शब्द अनेक

मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द व वाक्य-प्रयोग
✒️ पाठ से शब्द-समूह
शब्द-समूहवाक्य-प्रयोग
विचार · मनन · चिंतनगहरे चिंतनमनन के बाद ही अच्छे विचार मन में आते हैं।
सुहावने · मधुर · मनमोहकदूर के ढोल सुहावने लगते हैं, उनकी ध्वनि मधुर व दृश्य मनमोहक प्रतीत होता है।
आवेग · उमंग · स्फूर्तिलिखते समय मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग उठता है।
विषाद · अवसाद · उदासीअसफलता से उसके मन में विषाद, अवसाद व गहरी उदासी छा गई।
कोलाहल · शोर · हंगामाबाज़ार के कोलाहल और शोरहंगामे में बात सुनना कठिन था।
यथार्थ · सत्य · वास्तविकदूर रहने से जीवन के यथार्थ, सत्यवास्तविक रूप का अनुभव नहीं होता।
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भाषा संगम

‘निबंध’ शब्द विभिन्न भारतीय भाषाओं में
✒️ ‘निबंध’ शब्द — भाषावार
भाषाशब्दभाषाशब्द
हिंदीनिबंधमराठीनिबंध
संस्कृतनिबंधःगुजरातीनिबंध
पंजाबीनिबंधबांग्लानिबंध, प्रबंध
उर्दूमज़मूनअसमियानिबंध-रचना
कश्मीरीमज़मूनओड़िआप्रबंध, रचना
सिंधीमज़्मूनु, निबंधुतेलुगुव्यासम्
कोंकणीनिबंधतमिलकट्टुरै
नेपालीनिबंधमलयालमउपन्यासम्
मणिपुरीनिबंध, वाड़्ङ्कन्नड़लेख, प्रबंध

अन्य भाषाओं में — अंग्रेज़ी: Essay। आप अपनी मातृभाषा में भी ‘निबंध’ का शब्द व यह वाक्य लिखिए: “निबंध लिखने से पहले उसकी रूपरेखा बना लेनी चाहिए।”

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झरोखे से व खोजबीन

आगे की पढ़ाई के लिए
📎 संकेत
निबंध लिखता हुआ लेखक
लेखन में लीन रचनाकार — “मैं क्यों लिखता हूँ?”

‘मैं क्यों लिखता हूँ?’ — सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ का यह लेख कहता है कि लेखक इसलिए लिखता है क्योंकि वह स्वयं जानना चाहता है कि वह क्यों लिखता है; लिखकर ही वह अपनी भीतरी विवशता को पहचानता और उससे मुक्त होता है। सच्चा लेखन भीतरी प्रेरणा का फल होता है, बाहरी दबाव कभी-कभी भीतरी उन्मेष का निमित्त भर बन जाता है।

खोजबीन — पाठ में आए साहित्यकारों — बाणभट्ट, श्रीहर्ष, अमीर खुसरो, सेनापति, महात्मा गांधी, ए.जी. गार्डिनर, शेक्सपीयर व मानटेन — के विषय में पुस्तकालय या इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।

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