Chapter-15 शब्दरूपाणि (Shabdarupani) Quick Revision Notes | Class 9th Sanskrit (Sharada) Summary

📌 परिशिष्टम् ४ · कक्षा ९ संस्कृत

शब्दरूपाणि — Chapter Summary

Handwritten-style Quick Notes ✍️ (सारे शब्दरूप एक जगह याद करें)

1️⃣ इस अध्याय में क्या है?

इस Appendix में असाधारण/विशेष शब्दों के रूप दिए गए हैं जो सामान्य अकारान्त शब्दों (जैसे रामः) से अलग चलते हैं। इन्हें व्यंजनान्त (हलन्त) शब्द कहते हैं।

2️⃣ पुंलिङ्ग शब्द (10 शब्द)

अन्तशब्दप्रथमा ए.व.याद रखने की पहचान
न्-कारान्तब्रह्मन्ब्रह्मातीनों वचनों में मूर्धन्य ण होता है — ब्रह्मणा, ब्रह्मणे
न्-कारान्तगुणिन्गुणीइकारान्त की तरह सरल — गुणिनौ, गुणिनः
न्-कारान्तपथिन्पन्थाःअनोखा रूप — पन्थानौ, पथः, पथि
स्-कारान्तविद्वस्विद्वान्विद्वांसौ, विदुषा, विद्वत्सु
स्-कारान्तचन्द्रमस्चन्द्रमाःचन्द्रमसा, चन्द्रमोभ्याम् (स→ओ)
स्-कारान्तपुंस्पुमान्पुंसा, पुंभ्याम्/पुम्भ्याम् (दो रूप)
स्-कारान्तवेधस्वेधाःवेधसा, वेधोभ्याम्
द्-कारान्तसुहृद्सुहृद्/सुहृत्सुहृदा, सुहृद्भिः
ज्-कारान्तवणिज्वणिग्/वणिक्वणिजा, वणिग्भ्याम्
ज्-कारान्तभिषज्भिषग्/भिषक्भिषजा, भिषग्भ्याम्

3️⃣ स्त्रीलिङ्ग शब्द (8 शब्द)

अन्तशब्दप्रथमा ए.व.अर्थ
च्-कारान्तवाच्वाग्/वाक्वाणी
च्-कारान्तत्वच्त्वग्/त्वक्त्वचा
ज्-कारान्तस्रज्स्रग्/स्रक्माला
ज्-कारान्तरुज्रुग्/रुक्रोग
त्-कारान्तसरित्सरिद्/सरित्नदी
त्-कारान्तविद्युत्विद्युद्/विद्युत्बिजली
व्-कारान्तदिव्द्यौःआकाश (अनोखा — दिवा, द्युभ्याम्)
श्-कारान्तदिश्दिग्/दिक्दिशा
पैटर्न पहचानें: ज्/च्/श् अंत वाले शब्दों में प्रथमा-द्वितीया एकवचन में अंतिम व्यंजन ग् या क् बनता है (वाग्/वाक्, दिग्/दिक्), और तृतीया से शुरू “भ्याम्/भिः” के पहले भी ग् आता है।

4️⃣ नपुंसकलिङ्ग शब्द (10 शब्द)

अन्तशब्दप्रथमा ए.व.विशेष
त्-कारान्तजगत्जगद्/जगत्जगती (द्वि.व.), जगन्ति (ब.व.)
न्-कारान्तनामन्नामनाम्ना, नाम्ने, नामानि
न्-कारान्तकर्मन्कर्मकर्मणा, कर्माणि
न्-कारान्तचर्मन्चर्मचर्मणा, चर्माणि
स्-कारान्तमनस्मनःमनसा, मनांसि
स्-कारान्ततपस्तपःतपसा, तपांसि
स्-कारान्तपयस्पयःपयसा, पयांसि
स्-कारान्तशिरस्शिरःशिरसा, शिरांसि
स्-कारान्तछन्दस्छन्दःछन्दसा, छन्दांसि
ष्-कारान्तचक्षुष्चक्षुःचक्षुषा, चक्षूंषि
पैटर्न: नपुंसकलिङ्ग में प्रथमा और द्वितीया विभक्ति के रूप हमेशा एक जैसे होते हैं — यह नियम हर नपुंसक शब्द पर लागू होता है।

5️⃣ सुप्-प्रत्यय तालिका (सभी लिंगों के लिए मूल विभक्ति-चिह्न)

विभक्तिएकवचनद्विवचनबहुवचन
प्रथमासुजस्
द्वितीयाअम्औट्शस्
तृतीयाटाभ्याम्भिस्
चतुर्थीङेभ्याम्भ्यस्
पञ्चमीङसिभ्याम्भ्यस्
षष्ठीङस्ओस्आम्
सप्तमीङिओस्सुप्

इन्हीं मूल प्रत्ययों (सुप्-प्रत्यय) के धातु/प्रातिपदिक से जुड़ने पर ऊपर के सभी शब्दरूप बनते हैं।

Exam Tip: इन शब्दों के तृतीया-बहुवचन, चतुर्थी-बहुवचन व पञ्चमी-बहुवचन में मूल व्यंजन बदलकर भ्याम्/भिः/भ्यः से पहले “sandhi” होती है (जैसे मनस् → मनोभिः, चन्द्रमस् → चन्द्रमोभ्यः)। यही सबसे ज़्यादा पूछा जाता है!

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