समासः — Chapter Summary
1️⃣ समास किसे कहते हैं?
समसनं समासः भवति — अर्थात् दो, तीन या अनेक अर्थयुक्त पदों का मिलकर एक पद बन जाना ही “समास” है।
उदा. — महा + पुरुष = महापुरुषः
2️⃣ पूर्वपद और उत्तरपद
समास में पहले प्रयुक्त पद पूर्वपद और बाद में प्रयुक्त पद उत्तरपद कहलाता है। समास बनने पर दोनों पद प्रातिपदिक रूप में जुड़ते हैं, फिर पूरे समस्त पद पर एक ही विभक्ति लगती है।
सीतायाः + पतिः → सीता + पति + सु → सीतापतिः
3️⃣ विग्रहवाक्य (दो प्रकार)
समास के अपने ही पदों से अर्थ स्पष्ट होना।
राष्ट्रस्य नायकः = राष्ट्रनायकः
समास के पदों के अलावा अन्य पदों से अर्थ बताना (नित्यसमास में)।
मतिम् अनतिक्रम्य = यथामति
4️⃣ समास के मुख्य भेद (2 प्रकार)
| प्रकार | अर्थ |
|---|---|
| केवलसमासः | तत्पुरुषादि संज्ञाओं से रहित, केवल समास-संज्ञा मात्र युक्त — उदा. पूर्वं भूतः = भूतपूर्वः |
| विशेषसमासः | 4 उपभेद — तत्पुरुष, द्वन्द्व, बहुव्रीहि, अव्ययीभाव |
5️⃣ समास-निर्णय का नियम (सबसे ज़रूरी 🔑)
| समास | कौन-सा पद प्रधान | उदाहरण |
|---|---|---|
| तत्पुरुष | उत्तरपद प्रधान | रामस्य दूतः = रामदूतः (दूतः गच्छति) |
| द्वन्द्व | दोनों पद प्रधान | राजेशश्च सुरेशश्च = राजेशसुरेशौ |
| बहुव्रीहि | अन्यपद (तीसरा पद) प्रधान | पीतम् अम्बरं यस्य सः = पीताम्बरः (विष्णुः) |
| अव्ययीभाव | पूर्वपद प्रधान | नगरस्य समीपम् = उपनगरम् |
6️⃣ तत्पुरुष समास — विस्तार से
प्रायः उत्तरपदार्थप्रधान। इसके कई उप-भेद हैं:
(अ) विभक्ति तत्पुरुष — षड्विध (6 प्रकार)
| प्रकार | विग्रह | समास |
|---|---|---|
| द्वितीयातत्पुरुषः | गृहं गतः | गृहगतः |
| तृतीयातत्पुरुषः | नखैः भिन्नः | नखभिन्नः |
| चतुर्थीतत्पुरुषः | गवे हितम् | गोहितम् |
| पञ्चमीतत्पुरुषः | चोरात् भयम् | चोरभयम् |
| षष्ठीतत्पुरुषः | वृक्षस्य मूलम् | वृक्षमूलम् |
| सप्तमीतत्पुरुषः | कार्ये कुशलः | कार्यकुशलः |
(ब) कर्मधारय समास (9 प्रकार)
यह भी तत्पुरुष का ही भेद है — विशेषण-विशेष्य / उपमान-उपमेय का सम्बन्ध होता है।
नीलो मेघः → नीलमेघः | मेघ इव श्यामः → मेघश्यामः | शाकप्रियः पार्थिवः → शाकपार्थिवः
(स) द्विगु समास (3 प्रकार)
त्रयाणां लोकानां समाहारः → त्रिलोकी (समाहारद्विगु)
(द) नञ्-तत्पुरुष (5 प्रकार) — निषेधार्थक
न धर्मः → अधर्मः
7️⃣ द्वन्द्व समास
प्रायः उभयपदार्थप्रधान। दो मुख्य भेद:
रामश्च कृष्णश्च = रामकृष्णौ (द्विपद)
रामश्च कृष्णश्च सुरेशश्च गिरीशश्च = रामकृष्णसुरेशगिरीशाः (बहुपद)
संज्ञा च परिभाषा च = संज्ञापरिभाषम्
पाणी च पादौ च = पाणिपादम् (नित्यसमाहार)
8️⃣ बहुव्रीहि समास
प्रायः अन्यपदार्थप्रधान — यानी समास का अर्थ किसी तीसरे (बाहरी) पद की ओर संकेत करता है।
पुस्तकं हस्ते यस्य सः = पुस्तकहस्तः (बालकः)
दो भेद — सामान्यबहुव्रीहि (6 प्रकार, विभक्ति के अनुसार) और विशेषबहुव्रीहि (9 प्रकार — व्यधिकरण, संख्योत्तरपद, सहपूर्वपद, नञर्थ, उपमानपूर्वपद आदि)।
9️⃣ अव्ययीभाव समास
प्रायः पूर्वपदार्थप्रधान। समस्तपद स्वयं अव्यय बन जाता है — अनव्ययम् अव्ययं भवति इति अव्ययीभावः
नगरस्य समीपम् = उपनगरम् (उपनगरं नदी प्रवहति)
इसके 33 भेद शास्त्रों में हैं, जिनमें से कुछ मुख्य: समीपार्थे (उपग्रामम्), अभावार्थे (निर्मशकम्), वीप्सार्थे (प्रतिदिनम्), मर्यादार्थे (आमुक्तिः), मध्येशब्दयुक्तः (मध्येगङ्गम्) आदि।
“तत्पुरुष का बाद वाला, द्वन्द्व में दोनों, बहुव्रीहि में बाहर वाला, अव्ययीभाव में शुरू वाला” प्रधान होता है।
