📌
परिशिष्टम् ३ · कक्षा ९ संस्कृत
वाच्यम् — Chapter Summary
Handwritten-style Quick Notes ✍️ (कर्तृ / कर्म / भाव वाच्य पूरा एक जगह)
1️⃣ वाच्य के 3 प्रकार (प्रयोग)
कर्तरि प्रयोग
(कर्तृवाच्य)
(कर्तृवाच्य)
कर्मणि प्रयोग
(कर्मवाच्य)
(कर्मवाच्य)
भावे प्रयोग
(भाववाच्य)
(भाववाच्य)
2️⃣ कर्तृवाच्यम्
- कर्ता → प्रथमा विभक्ति
- कर्म → द्वितीया विभक्ति
- क्रियापद कर्तृपद के अनुसार (वचन व पुरुष दोनों में)
बालः चित्रं पश्यति । बालौ चित्रं पश्यतः । बालाः चित्रं पश्यन्ति ।
पुरुष व्यवस्था (कर्तरि प्रयोग में)
| पुरुष | कर्तृपद | उदाहरण |
|---|---|---|
| उत्तमपुरुषः | अहम्/आवाम्/वयम् | अहं श्लोकं पठामि |
| मध्यमपुरुषः | त्वम्/युवाम्/यूयम् | त्वं श्लोकं पठसि |
| प्रथमपुरुषः | बाकी सभी (सः/सा/ते आदि) | सः श्लोकं पठति |
3️⃣ कर्मवाच्यम् (कर्मणि प्रयोग)
- कर्ता → तृतीया विभक्ति
- कर्म → प्रथमा विभक्ति
- क्रियापद कर्मपद के अनुसार
- धातु से यक् (य) प्रत्यय लगता है, फिर आत्मनेपद प्रत्यय — वर्तमानकाल में “ति” के स्थान पर “ते”
गम् + य + ते = गम्यते । पठ् + य + ते = पठ्यते ।
| कर्तरि | कर्मणि | कर्तरि | कर्मणि |
|---|---|---|---|
| पठति | पठ्यते | करोति | क्रियते |
| खादति | खाद्यते | वदति | उच्यते |
| पश्यति | दृश्यते | ददाति | दीयते |
| गच्छति | गम्यते | पिबति | पीयते |
बालकः श्लोकं पठति। → बालकेन श्लोकः पठ्यते। (कर्तरि → कर्मणि)
4️⃣ भूतकाल में क्तवतु/क्त प्रत्यय
भूतकाल कर्तरि में “क्तवतु” और कर्मणि में “क्त” प्रत्यय जुड़ता है। कर्मणि में क्त-प्रत्यय कर्मपद के लिंग-वचन के अनुसार बदलता है।
बालकः श्लोकं पठितवान् → बालकेन श्लोकः पठितः
सा कवितां लिखितवती → तया कविता लिखिता
5️⃣ विधिलिङ् लकार में तव्यत्/अनीयर्
विधिलिङ् के भाव में कर्मणि में “तव्यत्” और “अनीयर्” प्रत्यय जुड़ते हैं — ये भी कर्मपद के लिंग-वचन अनुसार चलते हैं।
महेशः आपणं गच्छेत् → महेशेन आपणः गन्तव्यः / गमनीयः
6️⃣ भावे प्रयोगः (भाववाच्यम्)
- यह केवल अकर्मक धातुओं (जिनका कर्म नहीं होता) के साथ बनता है
- क्रियापद हमेशा प्रथमपुरुष एकवचन में — कर्मणि जैसा रूप
- क्त/तव्यत्/अनीयर् प्रत्ययान्त रूप सदैव नपुंसकलिङ्ग, प्रथमाविभक्ति, एकवचन में
ते हसन्ति → तैः हस्यते | सः उत्तिष्ठति → तया उत्थीयते
अकर्मक धातु उदाहरण: क्रीडति, भषति, स्फुरति, रोदिति, भवति, शोभते, मोदते, वर्तते, कम्पते, स्पर्धते, विकसति, उपविशति, नश्यति, गर्जति आदि।
7️⃣ तीनों वाच्यों की Quick Comparison Table
| बिंदु | कर्तृवाच्य | कर्मवाच्य | भाववाच्य |
|---|---|---|---|
| प्रधान | कर्ता | कर्म | भाव (क्रिया स्वयं) |
| कर्ता की विभक्ति | प्रथमा | तृतीया | तृतीया |
| कर्म की विभक्ति | द्वितीया | प्रथमा | — (कर्म नहीं) |
| क्रिया का पद | परस्मैपद/आत्मनेपद | आत्मनेपद (यक्+ते) | आत्मनेपद, सदा एकवचन |
याद रखने की Trick:
कर्तरि में कर्ता राजा है (प्रथमा), कर्मणि में कर्म राजा है (प्रथमा), भावे में न कोई कर्म, न कर्ता प्रधान — क्रिया ही सब कुछ, इसलिए सदा एकवचन!
कर्तरि में कर्ता राजा है (प्रथमा), कर्मणि में कर्म राजा है (प्रथमा), भावे में न कोई कर्म, न कर्ता प्रधान — क्रिया ही सब कुछ, इसलिए सदा एकवचन!
