NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 3- सवैया कवित्त हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 3- सवैया कवित्त

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पृष्ठ संख्या: 23

प्रश्न अभ्यास 


1. कवि ने ‘श्रीबज्रदूलह’ किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें ससांर रूपी मंदिर का दीपक क्यों कहा है?

उत्तर

देव जी ने ‘श्रीबज्रदूलह’ श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त किया है। कवि उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक इसलिए कहा है क्योंकि जिस प्रकार एक दीपक मंदिर में प्रकाश एवं पवित्रता का सूचक है, उसी प्रकार श्रीकृष्ण भी इस संसार-रूपी मंदिर में ईश्वरीय आभा का प्रकाश एवं पवित्रता का संचार करते हैं। उन्हीं से यह संसार प्रकाशित है।

2. पहले सवैये में से उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए जिनमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है?

उत्तर

अनुप्रास अलंकार
कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई। (कटि किंकिनि कै में ‘क’ वर्ण की आवृत्ति)
साँवरे अंग लसै पट पीत, (पट पीत में ‘प’ वर्ण की आवृत्ति)
हिये हुलसै बनमाल सुहाई। (हिये हुलसै में ‘ह’ वर्ण की आवृत्ति)

रुपक अलंकार
मंद हँसी मुखचंद जुंहाई, जय जग-मंदिर-दीपक सुन्दर। (मुख रूपी चंद्र)
जै जग-मंदिर दीपक सुन्दर| (संसार रूपी मंदिर)

3. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -पाँयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

उत्तर

इन पंक्तियों में कृष्ण के अंगों एवं आभूषणों की अभूतपूर्व सुंदरता का चित्रण किया गया है। कृष्ण के पैरों की पायल से मधुर ध्वनि बज रही है| कमर में बँधी करधनी की ध्वनि में भी मधुरता है। कृष्ण के साँवले शरीर पर पीले रंग का वस्त्र सुशोभित हो रहा है| उनके गले में विराजमान सुंदर बनमाला की सुंदरता भी अद्भुत है|

शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है जो इसे कोमल औरमधुर बनाता है। कटि किंकिनि, पट पीत, हिये हुलसै में अनुप्रास का प्रयोग है| पंक्तियों में लयात्मकता और संगीतात्मकता है| तत्सम शब्दों का सुन्दर प्रयोग हुआ है|


4. दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।

उत्तर
वसंत के परंपरागत वर्णन में कवि चारों ओर हरियाली, मौसम की अद्भुत छटा, फूलों का खिलना, शीतल हवाओं का बहना, झूले झूलना, नायक-नायिकाओं का मेल मिलाप आदि को दर्शाते हैं| परन्तु दूसरे कवित्त में ऋतुराज वसंत को कामदेव के बालक के रूप में चित्रित किया गया है| उनके साथ प्रकृति वह सब करती है जैसा एक नन्हे शिशु के साथ किया जाता है| प्रकृति उन्हें वृक्षों को पलना, पत्तों की शय्या, फूलों का वस्त्र, वायु द्वारा झूला झुलाना, मोर, तोते और कोयल द्वारा मनोरंजन करते दिखाया गया है|

5. ‘प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै’ – इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर 
इस पंक्ति में कवि ने बताया है कि शिशु रूपी वसंत को प्रातःकाल गुलाब चुटकी बजाकर जगाते हैं| सुबह-सुबह फूल खिलते समय जो चट की आवाज आती हैं उसे कवि चुटकी बजना कहते हैं|

6. चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है? 
उत्तर

कवि देव चाँदनी रात की सुंदरता को निम्नलिखित रूप में देखते हैं –
• आकाश में फैली चाँदनी को स्फटिक (क्रिस्टल) नामक शिला से बने मंदिर के रूप में देखते हैं|
• चारों ओर फैली चाँदनी को देखकर ऐसा लगता है मानों दही का सागर उमड़ता चला आ रहा हो| 
• पूरे आकाश में फैली चाँदनी को देखकर ऐसा लग रहा है मानों आकाश रूपी आँगन में दूध का झाग फ़ैल गया हो|
• चाँदनी रात रूपी मंदिर में झिलमिलाते तारे ऐसे लग रहे हैं मानो वे सब सजी-धजी युवतियाँ हों जिनकी आभषूणों की आभा मल्लिका फूल के रस से मिली ज्योति की समान है|

7. ‘प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद’ – इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन-सा अलंकार है?
उत्तर

कवि को आकाश में चमकता हुआ चन्द्रमा उन्हें प्यारी राधिका के प्रतिबिम्ब के समान प्रतीत हो रहा है। यहाँ राधा को चाँद से श्रेष्ठ बताया गया है और चाँद केवल उनका परछाई मात्र है| इसलिए यहाँ व्यतिरेक अलंकार है, उपमा अलंकार नहीं है।
8. तीसरे कवित्त के आधार पर बताइए कि कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है?

उत्तर

कवि देव ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए स्फटिक शीला से निर्मित मंदिर का, दही के समुद्र का, दूध के झाग का, मोतियों की चमक का और दर्पण की स्वच्छ्ता आदि जैसे उपमानों का प्रयोग किया है।

9. पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तर

रीतिकालीन कवियों में देव को अत्यंत प्रतिभाशाली कवि माना जाता है। देव की काव्यगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
• देवदत्त ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि हैं चूँकि उनकी भाषा कोमलता और मधुरता पूर्ण रूप से झलकती है।
• छंद का प्रयोग कवित्त एवं सवैया में किया गया है।
• अनेक जगह जैसे कटि किंकिनि, हिय हुलसै आदि में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है|
• तत्सम शब्दों का प्रयोग पंक्तियों को शोभा प्रदान करता है|
• मानवीकरण, उपमा, रूपक आदि अलंकारों का प्रयोग भी अनूठे ढंग से हुआ है|
• उन्होंने प्रकृति का सजीव चित्रण किया है|

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Short Summary- पाठ 3- सवैया कवित्त

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 2- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 2- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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पृष्ठ संख्या: 14
प्रश्न अभ्यास 


1. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?

उत्तर

परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने पर निम्नलिखित तर्क दिए -• श्री राम ने इसे नया और मजबूत समझ कर सिर्फ छुआ था परन्तु धनुष बहुत पुराना और कमजोर होने के कारण हाथ लगाते ही टूट गया|
• बचपन में भी उनलोगों ने कई धनुहियाँ तोड़ी हैं, तब परशुराम क्रोधित नहीं हुए?
• हमें ये धनुष साधारण धनुष लगा|
• इस धनुष के टूटने पर उन्हें कोई लाभ-हानि नहीं दिखती|

2. परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर

राम बहुत शांत और धैर्यवान हैं| परशुराम के क्रोध करने पर राम विनम्रता के साथ कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला कोई उनका दास ही होगा| वे मृदुभाषी होने का परिचय देते हुए अपनी मधुर वाणी से परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास करते हैं| अंत में आँखों से संकेत कर लक्ष्मण को शांत रहने को कहते हैं|
दूसरी ओर लक्ष्मण का स्वभाव उग्र है| वह व्यंग्य करते हुए परशुराम को इतनी छोटी सी बात पर हंगामा नहीं करने के लिए कहते हैं| वे परशुराम के क्रोध की चिंता किये बिना अपशब्दों को प्रयोग ना करने को कहते हैं| वह उनके क्रोध को अन्याय समझते हैं इसीलिए पुरजोर विरोध करते हैं|

पृष्ठ संख्या: 15

3. लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

उत्तर

परशुराम – शिवजी का धनुष तोड़ने का दुस्साहस किसने किया है?
राम – हे नाथ! इस शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला अवश्य ही आपका कोई दास ही होगा|
परशुराम – सेवक वह होता है जो सेवा का कार्य करे| किन्तु जो सेवक शत्रु के सामने व्यवहार करे उससे तो लड़ना पड़ेगा| जिसने भी धनुष तोड़ा है वह मेरे लिए दुश्मन है और तुरंत सभा से बाहर चला जाए अन्यथा यहाँ उपस्थित सभी राजा मारे जायेंगें|


4. परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए -बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही||
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही||
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा||
मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर||

उत्तर

परशुराम ने अपने विषय में ये कहा कि वे बाल ब्रह्मचारी हैं और अतिक्रोधी स्वभाव के हैं। सारा संसार उन्हें क्षत्रियकुल के नाशक के रूप में जानता है। उन्होंने कई बार भुजाओं की ताकत से इस धरती को क्षत्रिय राजाओं से मुक्त किया है और ब्राह्मणों को दान में दिया है| लक्ष्मण वे अपना फरसा दिखाकर कहते हैं कि इस फरसे से उन्होंने सहस्त्रबाहु के बाहों को काट डाला था। इसलिए वह अपने माता-पिता चिंतित ना करे| उनका फरसा गर्भ में पल रहे शिशुओं का नाश कर देता है।

5. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई?

उत्तर

लक्ष्मण ने वीर योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई है -• वीर योद्धा स्वयं अपनी वीरता का बखान नहीं करते अपितु दूसरे लोग उसकी वीरता का का बखान करते हैं|
• वे युद्धभूमि में अपनी वीरता का परिचय साहसपूर्वक देते हैं|
• वीर योद्धा शांत, विनम्र, क्षमाशील, धैर्यवान, बुद्धिमान होते हैं|
• वे खुद पर अभिमान नहीं करते हैं|
• वह दूसरों को आदर देते हैं|

6. साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर
साहस और शक्ति द्वारा हम अनेक काम पूरा कर सकते हैं| हालांकि इसमें अगर विनम्रता भी जुड़ जाए तो बेहद कारगर साबित होता है| विनम्रता हमें संयमित बनाती है जिससे व्यक्ति को आंतरिक ख़ुशी मिलती है| विनम्रता के भाव से विपक्षी भी उस व्यक्ति का आदर करते हैं| यह व्यक्ति कार्य को और सुगम बनती है|

7. भाव स्पष्ट कीजिए –

(क) बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी||
       पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू||

उत्तर

इन पंक्तियों में लक्ष्मण अभिमान में चूर परशुराम स्वभाव पर व्यंग्य किया है| लक्ष्मण मुस्कुराते हुए कहते हैं कि आप मुझे बार-बार इस फरसे को दिखाकर डरा रहे हैं| ऐसा लगता है मानो आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हों|

(ख) इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं||
      देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना||

उत्तर

इन पंक्तियों में लक्ष्मण ने परशुराम के अभिमान को चूर करने के लिए अपनी वीरता को बताया है| वे कहते हैं कि हम कुम्हड़े के कच्चे फल नहीं हैं जो तर्जनी के दिखाने से मुरझा जाता है| यानी वे कमजोर नहीं हैं जो धमकी से भयभीत हो जाएँ| वह यह बात उनके फरसे को देखकर बोल रहे हैं| उन्हें स्वयं पर विश्वास है|

(ग) गाधिसू नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।
     अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ||

उत्तर

इन पंक्तियों में विश्वामित्र मन ही मन मुस्कराते हुए सोच रहे हैं कि परशुराम ने सामन्य क्षत्रियों को युद्ध में हराया है तो इन्हें हरा-ही-हरा नजर आ रहा है| राम-लक्ष्मण को साधारण क्षत्रिय नहीं हैं| परशुराम इन्हें गन्ने की बनी तलवार के समान कमजोर समझ रहे हैं पर असल में ये लोहे की बनी तलवार हैं| परशुराम के अहंकार और क्रोध ने उनकी बुद्धि को अपने वश में ले लिया है|

8. पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।

उत्तर

• यह काव्यांश तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरितमानस के बालकांड से ली गयी जो अवधी भाषा में लिखी गई है। • इसमें तत्सम शब्दों का प्रयोग भरपूर मात्रा में किया गया है|
• इसमें दोहा, छंद, चौपाई का अच्छा प्रयोग किया है।
• भाषा में लयबद्धता है|
• प्रचलित मुहावरे और लोकक्तियाँ ने काव्य को सजीव बनाया है|
• वीर और रौद्र रस का प्रयोग मुख्य से रूप किया गया|
• कहीं-कहीं शांत रस का भी उपयोग हुआ है|
• अनुप्रास, उपमा, रुपक, उत्प्रेक्षा व पुनरुक्ति अलंकार का सुयोजित ढंग से प्रयोग हुआ है|
• व्यंग्यों का प्रयोग अनूठा है|
• प्रसंगानुकूल भाषा का प्रयोग किया गया है|

9. इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

तुलसीदास द्वारा रचित परशुराम – लक्ष्मण संवाद मूल रूप से व्यंग्य काव्य है। उदाहरण के लिए –

• बहु धनुही तोरी लरिकाईं।
कबहुँ न असि रिसकीन्हि गोसाईं||

लक्ष्मण परशराम से कहते हैं कि हमने बचपन में भी इस जैसी कई धनुहियाँ तोड़ीं हैं परन्तु तब आप हम पर इतने क्रोधित नहीं हुए|

• मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर॥

परशुराम जी क्रोधित होकर लक्ष्मण से कहते हैं कि अरे राजा के बालक! तू अपने माता-पिता के बारे में सोच| यह जो मेरा फरसा बहुत भयानक है, यह गर्भ में पल रहे बच्चों का भी नाश कर देता है|

• अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी|
बार अनेक भाँति बहु बरनी||

परशुराम द्वारा की जा रही खुद की बड़ाई को लक्ष्मण अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनाना कहते हैं|

• मिले न कबहूँ सुभट रन गाढ़े|
द्विजदेवता घरहि के बाढ़े||

लक्ष्मण कहते हैं कि आपका सामना कभी योद्धाओं से नहीं हुआ इसीलिए आप घर के शेर हैं|
10. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए –
(क) बालकु बोलि बधौं नहि तोही।

अनुप्रास अलंकार – ‘बालकु बोलि बधौं’ में ‘ब’ वर्ण की एक से अधिक बार आवृत्ति हुई है।

(ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।

• अनुप्रास अलंकार – कोटि कुलिस में ‘क’ वर्ण की एक से अधिक बार आवृत्ति हुई है।
• उपमा अलंकार – कोटि कुलिस सम बचनु में उपमा अलंकार है चूँकि परशुराम जी के वचनों की तुलना वज्र से की गयी है और वाचक शब्द ‘सम’ का प्रयोग किया गया है|
(ग) तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा।
       बार बार मोहि लागि बोलावा||
• उत्प्रेक्षा अलंकार – ‘काल हाँक जनु लावा’ में उत्प्रेक्षा अलंकार है। यहाँ ‘जनु’ वाचक शब्द है।
• पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार – ‘बार-बार’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। क्योंकि बार शब्द की दो बार आवृत्ति हुई पर अर्थ भिन्नता नहीं है।
(घ)लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु।
     बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु||
• उपमा अलंकार
→ लक्ष्मण के उत्तर आहुति के समान और वाचक शब्द ‘सरिस’ के कारण ‘आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु’ में उपमा अलंकार है।
(ii) जल सम बचन में भी उपमा अलंकार है क्योंकि भगवान राम के मधुर वचन जल के समान कार्य रहे हैं और वाचक शब्द ‘सम’ का प्रयोग हुआ है।
2. रुपक अलंकार – रघुकुलभानु में रुपक अलंकार है चूँकि श्री राम के गुणों की समानता सूर्य से की गई है।

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Short Summary- पाठ 2- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 1- पद हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 1- पद

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पृष्ठ संख्या: 7

प्रश्न अभ्यास 


1. गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?

उत्तर

गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में यह व्यंग्य निहित है कि उद्धव वास्तव में भाग्यवान न होकर अति भाग्यहीन हैं। वे कृष्णरूपी सौन्दर्य तथा प्रेम-रस के सागर के सानिध्य में रहते हुए भी उस असीम आनंद से वंचित हैं। वे प्रेम बंधन में बँधने एवं मन के प्रेम में अनुरक्त होने की सुखद अनुभूति से पूर्णतया अपरिचित हैं।

2. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?

उत्तर

गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना निम्नलिखित उदाहरणों से की है -• गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना कमल के पत्ते से की है जो जल में रहते हुए भी उससे प्रभावित नहीं होता है|
• वह जल में रखे तेल के मटके के समान हैं, जिस पर जल की एक बूँद भी टिक नहीं पाती।

3. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं?

उत्तर

गोपियों ने अनेक उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं-
• गोपियाँ उद्धव के व्यवहार को कमल के पत्ते के समान बताती हैं जो पानी में रहकर भी उससे अछूता रहता है यानी वे प्रेम के मूरत कृष्ण के संग रहकर भी उसका अर्थ नहीं जान पाए हैं|
• गोपियाँ उन्हें ‘बड़भागी’ कहती हैं जो कृष्ण के संग रहकर भी प्रेम के बंधनों से मुक्त है| उन्हें प्रेम के मायने नहीं पता हैं|
• वे उद्धव के योग सन्देश को कड़वी ककड़ी के समान बताती हैं जो उनसे नहीं खाई जाती यानी वे उन बातों को नहीं समझ सकतीं|

4. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?

उत्तर

गोपियाँ श्रीकृष्ण के आगमन की आशा में बैचैन थीं। वे एक-एक दिन गिन रही थी और अपने तन-मन की व्यथा को चुपचाप सहती हुई कृष्ण के प्रेम रस में डूबी हुई थीं। परन्तु कृष्ण ने स्वयं ना आकर योग का संदेश देने के लिए उद्धव को भेज दिया। विरह की अग्नि में जलती हुई गोपियों को जब उद्धव ने कृष्ण को भूल जाने और योग-साधना करने का उपदेश देना प्रारम्भ किया, तब गोपियों की विरह वेदना और भी बढ़ गयी । इस प्रकार उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरह अग्नि में घी का काम किया।

5. ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है?

उत्तर

‘मरजादा न लही’ के माध्यम से प्रेम की मर्यादा न रहने की बात की जा रही है। कृष्ण के मथुरा चले जाने पर गोपियाँ उनके वियोग में जल रही थीं। कृष्ण के आने पर ही उनकी विरह-वेदना मिट सकती थी, परन्तु कृष्ण ने स्वयं न आकर उद्धव को योग संदेश के साथ भेज दिया जिसने गोपियों के उनकी मर्यादा का त्याग करने पर आतुर कर दिया है|

6. कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है ?

उत्तर

गोपियों ने कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को विभिन्न प्रकार से दिखाया है-
• गोपियों ने अपनी तुलना उन चीटियों के साथ की है जो गुड़ (श्रीकृष्ण भक्ति) पर आसक्त होकर उससे चिपट जाती है और फिर स्वयं को छुड़ा न पाने के कारण वहीं प्राण त्याग देती है।
• उन्होंने खुद को हारिल पक्षी व श्रीकृष्ण को लकड़ी की भाँति बताया है। जिस प्रकार हारिल पक्षी सदैव अपने पंजे में कोई लकड़ी अथवा तिनका पकड़े रहता है, उसे किसी भी दशा में नहीं छोड़ता। उसी प्रकार गोपियों ने भी मन, कर्म और वचन से कृष्ण को अपने ह्रदय में दृढ़तापूर्वक बसा लिया है।
• वे जागते, सोते स्वप्नावस्था में, दिन-रात कृष्ण-कृष्ण की ही रट लगाती रहती हैं।

7.  गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है ?

उत्तर

गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा ऐसे लोगों को देने की बात कही है जिनका मन चंचल है और इधर-उधर भटकता है। उद्धव अपने योग के संदेश में मन की एकाग्रता का उपदेश देतें हैं, परन्तु गोपियों का मन तो कृष्ण के अनन्य प्रेम में पहले से ही एकाग्र है। इस प्रकार योग-साधना का उपदेश उनके लिए निरर्थक है। योग की आवश्यकता तो उन्हें है जिनका मन स्थिर नहीं हो पाता, इसीलिये गोपियाँ चंचल मन वाले लोगों को योग का उपदेश देने की बात कहती हैं।

8. प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।

उत्तर
गोपियों ने योग साधना को निरर्थक बताया है| उनके अनुसार यह उन लोगों के लिए हैं जिनका मन अस्थिर है परन्तु गोपियों का हृदय तो श्रीकृष्ण के लिए स्थिर है| वे उनकी भक्ति में पूरी तरह से समर्पित हैं| योग ज्ञान उनके लिए कड़वी ककड़ी के समान है जिसे खाना बहुत ही मुश्किल है। यह ज्ञान गोपियों के लिए बिमारी से अधिक कुछ नहीं है|

9. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए ?

उत्तर

गोपियों के अनुसार राजा का धर्म है कि वह प्रजा को ना सताए और प्रजा के सुखों का ख्याल रखे|

10. गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन सा परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं ?

उत्तर

गोपियों को लगता है कि कृष्ण ने अब राजनीति सिख ली है। उनकी बुद्धि पहले से भी अधिक चतुर हो गयी है। पहले वे प्रेम का बदला प्रेम से चुकाते थे, परंतु अब प्रेम की मर्यादा भूलकर योग का संदेश देने लगे हैं। कृष्ण पहले दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित रहते थे, परंतु अब अपना भला ही देख रहे हैं। उन्होंने पहले दूसरों के अन्याय से लोगों को मुक्ति दिलाई है, परंतु अब नहीं। श्रीकृष्ण गोपियों से मिलने के बजाय योग के शिक्षा देने के लिए उद्धव को भेज दिए हैं। श्रीकृष्ण के इस कदम से गोपियों के मन और भी आहत हुआ है। कृष्ण में आये इन्ही परिवर्तनों को देखकर गोपियाँ अपनों को श्रीकृष्ण के अनुराग से वापस लेना चाहती है।

11. गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य के आधार पर ज्ञानी उद्धव को परास्त कर दिया, उनके वाक्चातुर्य की विशेषताएँ लिखिए?

उत्तर

गोपियों के वाक्चातुर्य की विशेषताएँ इस प्रकार है –
• साहसी – गोपियों पूरी तरह से निडर हैं| वह उद्धव को कोसने से परहेज नहीं करतीं| वह उनके योग साधना के सन्देश को कड़वी ककड़ी और बिमारी बताती हैं|
• व्यंग्यात्मकता – गोपियों ने बड़े ही प्रभावशाली ढंग से व्यंग्य करती हैं| वे उद्धव को ‘बड़भागी’ कहती हैं चूँकि वह श्रीकृष्ण के पास रहकर भी प्रेम से अछूते रहे| यह कहकर वह उद्धव का उपहास करती हैं|
• स्पष्टता – वे स्पष्ट शब्दों में उद्धव को बताती हैं कि वे कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह से लीन हैं इसलिए उनके योग सन्देश का उनपर कुछ असर नहीं पड़ने वाला है|

12. संकलित पदों को ध्यान में रखते हुए सूर के भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएँ बताइये।

उत्तर

भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएँ हैं-
• निर्गुण और निराकार भक्ति से ज्यादा सगुण और साकार भक्ति को ज्यादा महत्व दिया गया है|
• योगसाधना का महत्व प्रेम की एकनिष्ठाता के सामने कम है|
• गोपियों विरह वेदना झेल रही हैं|
• गोपियों ने सरलता, मार्मिकता, उपालंभ, व्यगात्म्कथा, तर्कशक्ति आदि के द्वारा उद्धव के ज्ञान योग को तुच्छ सिद्ध किया है।
• गोपियों ने खुद को हारिल पक्षी व श्रीकृष्ण को लकड़ी की भाँति बताकर अनन्य प्रेम का परिचय दिया है|
• अनुप्रास, उपमा, दृष्टांत, रूपक, व्यतिरेक, विभावना, अतिशयोक्ति आदि अनेक अलंकारों का सुन्दर प्रयोग किया है।
• शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है।
• इसमें भी संगीतात्म्कता का गुण सहज ही दृष्टिगत होता है।

रचना और अभिव्यक्ति 


13. गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए|
उत्तर

गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, हम निम्न तर्क दे सकते हैं –
• प्रेम कर विरह की वेदना के साथ योग साधना की शिक्षा देना कहाँ का न्याय है?
• अपनी बात पूरी ना कर पाने वाले कृष्ण एक धोखेबाज हैं|
•  कृष्ण अपने अन्य प्रेम करने वाले सगों को योग साधना का पाठ क्यों नहीं पढ़ाते?

14. उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे; गोपियों के पास ऐसी कौन-सी शक्ति थी जो उनके वाक्चातुर्य में मुखिरत हो उठी?

उत्तर 
गोपियों के पास उनके मन श्री कृष्ण के लिए प्रेम तथा भक्ति की अद्भुत शक्ति थी जिस कारण उद्धव जैसे ज्ञानी को भी उन्होंने अपने तर्कों से हरा दिया|

15. गोपियों ने यह क्यों कहा कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं? क्या आपको गोपियों के इस कथन का विस्तार समकालीन राजनीति में नज़र आता है, स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

गोपियों ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि श्री कृष्ण ने सीधी उनसे प्रेम को भूलाने की बात ना कर उन्हें उद्धव द्वारा योग संदेश का माध्यम अपनाने को कह रहे हैं|
गोपियों का कथन कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं, आज की राजनीति में नजर आ रहा है। आज के राजनीति में नेता भी मुद्दों के बारे में साफ़-साफ़ नहीं कहते और मुद्दों को घुमा-फिराकर पेश करते हैं|

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Short Summary- पाठ 1- पद

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 17- कारतूस हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 17- कारतूस

NCERT Solutions for Class 10 will help the students in learning complex topics and problems in an easy way. Class 10 Sparsh NCERT Solutions will help students in understanding the topics in the most simple manner and grasp them easier to perform better. You can study in an organized manner and set a good foundation for your future goals

पृष्ठ संख्या: 133
प्रश्न अभ्यास 
मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –


1. कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था?

उत्तर

कर्नल कांलिज ने वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए जंगल में खेमा लगाये हुए था।

2. वज़ीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे?
उत्तर 
वज़ीर अली ने कई वर्षों से अंग्रेज़ों की आँख में धूल झोंककर उनकी नाक में दम कर रखा था। इसलिए वे वज़ीर अली से तंग आ चुके थे।

3. कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए क्यों कहा?

उत्तर

कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए इसलिए कहा क्योंकि धूल के उड़ने से उसने अंदाज लगाया कि लोग ज़्यादा हैं और वज़ीर को ढूंढ़ रहे हैं।

4. सवार ने क्यों कहा कि वज़ीर अली की गिरफ़्तारी बहुत मुश्किल है?

उत्तर

सवार खुद वज़ीर अली था जो कि बहुत बहादुर था और शत्रुओं को ललकार रहा था।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

1. वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी?

उत्तर

वज़ीर अली रॉबिनहुड की तरह साहसी, हिम्मतवाला और बहादुर था। वह भी रॉबिनहुड की तरह किसी को भी चकमा देकर भाग जाता था। वह अंग्रेज़ी सरकार की पकड़ में नहीं आ रहा था। कम्पनी के वकील को उसने मार डाला था। उसकी बहादुरी के अफ़साने सुनकर ही कर्नल को रॉबिनहुड की याद आती थी।

2. सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा?
उत्तर 
सआदत अली वज़ीर अली का चाचा और नवाब आसिफउदौला का भाई था। जब तक आसिफउदौला के कोई सन्तान नहीं थी,सआदत अली की नवाब बनने की पूरी सम्भावना थी। इसलिए उसे वज़ीर अली की पैदाइश उसकी मौत लगी।

3. सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?

उत्तर

सआदत अली आराम पसंद अंग्रेज़ों का पिट्ठू था। अंग्रेज़ कर्नल को उसे तख्त पर बिठाने का मकसद अवध की धन सम्पत्ति पर अधिकार करना था। उसने अंग्रेज़ों को आधी सम्पत्ति और दस लाख रूपये दिए। इस तरह सआदत अली को गद्दी पर बैठने से उन्हें लाभ ही लाभ था।

4. कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त कैसे की?

उत्तर

कंपनी के वकील की हत्या करने के बाद वज़ीर अली आजमगढ़ भाग गया और वहाँ के नवाब ने उसकी सहायता की और उसे सुरक्षित घागरा पहुँचा दिया। तब से वह वहाँ के जंगलों में रहने लगा।

5. सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?

उत्तर

बड़ी चतुराई से वजीर अली कारतूस लेने कर्नल के खेमे में सवार बनकर आया था। जाते समय कर्नल ने नाम पूछा तो उसने वज़ीर अली बताया। उसे सामने देखकर कर्नल हक्का-बक्का रह गया।

(ख) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −


1. लेफ़्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है?
उत्तर 
लेफ़्टीनेंट को जब कर्नल ने बताया कि कंपनी के खिलाफ़ केवल वज़ीर अली ही नहीं बल्कि दक्षिण में टीपू सुल्तान, बंगाल में नवाब का भाई शमसुद्दौला भी है। इन्होंने अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहेज़मा को आक्रमण के लिए निमत्रंण दिया है। यह सब देखकर लेफ़्टीनेंट को आभास हुआ कि कंपनी के खिलाफ़ पूरे हिन्दूस्तान में लहर दौड़ गई है।

2. वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?

उत्तर

वज़ीर अली को उसके नवाबी पद से हटा दिया गया और बनारस भेज दिया गया। फिर कलकत्ता बुलाया तो वज़ीर अली ने कंपनी के वकील, जोकि बनारस में रहता था, उससे शिकायत की परन्तु उसने शिकायत सुनने की जगह खरीखोटी सुनाई। इस पर वज़ीर अली को गुस्सा आ गया और उसने वकील का कत्ल कर दिया।

3. सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए?

उत्तर
सवार वज़ीर अली अकेला ही घोड़े पर सवार होकर अंग्रेज़ों के खेमे में पहुँच गया और कर्नल को दिखाया कि वह भी वज़ीर अली के खिलाफ़ है। उसने कर्नल से अकेले में मिलने के लिए कहा। कर्नल मान गया और वज़ीर अली के दस कारतूस माँगने पर उसने दे दिए। इस तरह सवार ने कर्नल से कारतूस हासिल किए।

4. वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

वज़ीर अली को अंग्रेज़ों ने अवध के तख्ते से हटा दिया पर उसने हिम्मत नहीं हारी। वज़ीफे की रकम में मुश्किल डालने वाले कंपनी के वकील की भी हत्या कर दी। अंग्रेज़ों को महीनों दौड़ाता रहा परन्तु फिर भी हाथ नहीं आया। अंग्रेज़ों के खेमे में अकेले ही पहुँच गया,कारतूस भी ले आया और अपना सही नाम भी बता गया। इस तरह वह एक जाँबाज़ सिपाही था।

पृष्ठ संख्या: 134

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −


1. मुट्ठीभर आदमी और इतना दमखम।

उत्तर

इस पंक्ति में वज़ीर अली के साहस और वीरता का परिचय है। वह थोड़े से सैनिकों के साथ जंगल में रह रहा था। अंग्रेज़ों की पूरी फ़ौज उसका पीछा कर रही थी फिर भी उसे पकड़ नहीं पा रही थी।

2. गर्द तो ऐसे उड़ रही है जैसे कि पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नज़र आता है।

उत्तर

यह कथन लेफ़्टीनेंट का है। जब वज़ीर अली अंग्रेज़ों के खेमे में अकेला ही आ रहा था परन्तु इतनी तेज़ी से आ रहा था, इतनी धूल उड़ रही थी कि मानों कई सैनिक आ रहे हो, पूरा एक काफ़िला आ रहा हो। लेफ़्टीनेंट कहता है सैनिक तो एक ही नज़र आ रहा है।

भाषा अध्यन

1. निम्नलिखित शब्दों का एक-एक पर्याय लिखिए −
खिलाफ़, पाक, उम्मीद, हासिल, कामयाब, वजीफ़ा, नफ़रत, हमला, इंतेज़ार, मुमकिन।

उत्तर

खिलाफ़विरूद्ध
पाकपवित्र
उम्मीदआशा
हासिलप्राप्त
कामयाबसफल
वजीफ़ाछात्रवृति
नफ़रतघृणा
हमलाआक्रमण
इंतेज़ारप्रतीक्षा
मुमकिनसंभव

2. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए −
आँखों में धूल झोंकना, कूट-कूट कर भरना, काम तमाम कर देना, जान बख्श देना, हक्का बक्का रह जाना।

उत्तर

(क) आँखों में धूल झोंकना −चोर ने पुलिस के आँखों में धूल झोंककर चोरी कर ली।
(ख) कूट-कूट कर भरना − झाँसी की रानी में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी।
(ग) काम तमाम कर देना − बिल्ली ने चूहे का काम तमाम कर दिया।
(घ) जान बख्श देना − देश के दुशमनों की जान नहीं बख्शनी चाहिए।
(ङ) हक्का-बक्का रह जाना − अचानक चाचाजी को सामने देखकर सब हक्के-बक्के रह गए।

3. कारक वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताता है। निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम लिखिए −

(क) जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है।
(ख) कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई।
(ग) वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया।
(घ) फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।
(ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था।

उत्तर

(क) जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है।
संबंध कारक
(ख) कंपनी के खिलाफ़ सारे हिन्दुस्तान में एक लहर दौड़ गई।
संबंध कारक, अधिकरण कारक
(ग) वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया।
कर्म कारक, अपादान कारक
(घ) फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।
सप्रंदान कारक, संबंध कारक
(ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था।
अधिकरण कारक

4. नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए − (क) घोड़ा पानी पी रहा था।
(ख) बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
(ग) रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।
(घ) देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।

उत्तर

(क) घोड़े ने पानी पिया। (ख) बच्चों ने दशहरे का मेला देखा।
(ग) रॉबिनहुड ने गरीबों की मद्द की।
(घ) देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।

पृष्ठ संख्या: 135

5. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए − (क) कर्नल ने कहा सिपाहियों इस पर नज़र रखो ये किस तरफ़ जा रहा है
(ख) सवार ने पूछा आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है इतने लावलश्कर की क्या ज़रूरत है
(ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बाते कर रहे थे चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे एक व्यक्ति कह रहा था दुशमन कभी भी हमला कर सकता है

उत्तर

(क) कर्नल ने कहा, “सिपाहियों इस पर नज़र रखो ये किस तरफ़ जा रहा है?”
(ख) सवार ने पूछा, “आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है? इतने लावलशकर की क्या ज़रूरत है?”
(ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे। चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे। एक व्यक्ति कह रहा था, “दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।”

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Short Summary- पाठ 17- कारतूस

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 16- पतझर में टूटी पत्तियाँ हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 16- पतझर में टूटी पत्तियाँ

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पृष्ठ संख्या: 122
प्रश्न अभ्यास 
मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –


1. शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?

उत्तर

शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नही की जाती अगर इसी में थोड़ा-सा ताँबा मिला दिया जाए तो यह गिन्नी बन जाता है। ऐसा करने से सोने की मजबूती और चमक दोनों बढ़ जाती है। 

2. प्रेक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?

उत्तर

जो लोग आदर्श बनते हैं और व्यवहार के समय उन्हीं आर्दशों को तोड़ मरोड़ कर अवसर का लाभ उठाते हैं, उन्हें प्रेक्टिकल आइडियालिस्ट कहते हैं।

3. पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?

उत्तर

जिसमें लाभ हानि सोचने की गुजांइश नहीं होती है उसे शुद्ध आदर्श कहते हैं।

4. लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात क्यों कही है?

उत्तर

जापानी लोग उन्नति की होड़ में सबसे आगे हैं। वे महीने का काम एक दिन में करने का सोचते हैं। इसलिए लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात कही है।

5. जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?

उत्तर

जापानी में चाय पीने की विधि को चा-नो-यू कहते हैं।

6. जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?

उत्तर

जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, वहाँ की सजावट पारम्परिक होती है। वहाँ अत्यन्त शांति और गरीमा के साथ चाय पिलाई जाती है। शांति उस स्थान की मुख्य विशेषता है।


लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

1. शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?

उत्तर

शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जा सकती। ताँबे से सोना मजबूत हो जाता है परन्तु शुद्धता समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार व्यवहारिकता में शुद्ध आर्दश समाप्त हो जाते हैं। सही भाग में व्यवहारिकता को मिलाया जाता है तो ठीक रहता है।

2. चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?

उत्तर

चाजीन द्वारा अतिथियों का उठकर स्वागत करना, आराम से अँगीठी सुलगाना, चायदानी रखना, चाय के बर्तन लाना, तौलिए सेपोछ कर चाय डालना आदि सभी क्रियाएँ गरिमापूर्ण, अच्छे व सहज ढंग से कीं।

3. टी-सेरेमनी में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?

उत्तर

इसमें केवल तीन आदमियों को प्रवेश दिया जाता था क्योंकि भाग-दौड़ की ज़िदंगी से दूर भूत-भविष्य की चिंता छोड़कर शांतिमय वातावरण में कुछ समय बिताना इस जगह का उद्देश्य होता है।

4. चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?

उत्तर

चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उसका दिमाग सुन्न होता जा रहा है, उसकी सोचने की शक्ति धीरे-धीरे मंद हो रही है। इससे सन्नाटे की आवाज भी सुनाई देने लगी। उसे लगा कि भूत-भविष्य दोनों का चिंतन न करके वर्तमान में जी रहा हो। उसे बहुत सुख मिलने लगा।

(ख) निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –

1. गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए?

उत्तर

गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। यह आन्दोलन व्यावहारिकता को आदर्शों के स्वर पर चढ़ाकर चलाया गया। इन्होंने कई आन्दोलन चलाए − भारत छोड़ो आन्दोलन, दांडी मार्च, सत्याग्रह, असहयोग आन्दोलन आदि। उनके साथ भारत की सारी जनता थी। उन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलकर पूर्ण स्वराज की स्थापना की। भारतीयों ने भी अपने नेता के नेतृत्व में अपना भरपूर सहयोग दिया और हमें आज़ादी मिली।

2. आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रांसगिकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

ईमानदारी, सत्य, अहिंसा, परोपकार, परहित, कावरता, सहिष्णुता आदि ऐसे शाश्वत मूल्य हैं जिनकी प्रांसगिकता आज भी है। इनकी आज भी उतनी ही ज़रूरत है जितनी पहले थी। आज के समाज को सत्य अहिंसा की अत्यन्त आवश्यक है। इन्हीं मूल्यों पर संसार नैतिक आचरण करता है। यदि हम आज भी परोपकार, जीवदया, ईमानदारी के मार्ग पर चलें तो समाज को विघटन से बचाया जा सकता है।

4. शुद्ध सोने में ताबे की मिलावट या ताँबें में सोना, गाँधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है?स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

गाँधीजी ने जीवन भर सत्य और अहिंसा का पालन किया। वे आदर्शों को उंचाई तक ले जाते हैं अर्थात वे सोने में ताँबा मिलाकर उसकी कीमत कम नही करते थे बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ा देते थे। गाँधीजी व्यवहारिकता की कीमत जानते थे। इसीलिए वे अपना विलक्षण आदर्श चला सके। लेकिन अपने आदर्शों को व्यावहारिकता के स्वर पर उतरने नहीं देते थे।

5. गिरगिट कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ का संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘अवसरवादिता’ और ‘व्यवहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्व है?

उत्तर

गिरगिट कहानी में स्वार्थी इंस्पेक्टर पल-पल बदलता है। वह अवसर के अनुसार अपना व्यवहार बदल लेता है। ‘गिन्नी का सोना’ कहानी  में इस बात पर बल दिया गया है कि आदर्श शुद्ध सोने के समान हैं। इसमें व्यवाहिरकता का ताँबा मिलाकर उपयोगी बनाया जा सकता है। केवल व्यवहारवादी लोग गुणवान लोगों को भी पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। यदि समाज का हर व्यक्ति आदर्शों को छोड़कर आगे बढ़ें तो समाज विनाश की ओर जा सकता है। समाज की उन्नति सही मायने में वहीं मानी जा सकती है जहाँ नैतिकता का विकास,जीवन के मूल्यों का विकास हो।

पृष्ठ संख्या: 123

6. लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर 
लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के कारण बताएँ हैं कि मनुष्य चलता नहीं दौड़ता है, बोलता नहीं बकता है, एक महीने का काम एक दिन में करना चाहता है, दिमाग हज़ार गुना अधिक गति से दौड़ता है। अतरू तनाव बढ़ जाता है। मानसिक रोगों का प्रमुख कारण प्रतिस्पर्धा के कारण दिमाग का अनियंत्रित गति से कार्य करना है।

7. लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

लेखक के अनुसार सत्य वर्तमान है। उसी में जीना चाहिए। हम अक्सर या तो गुजरे हुए दिनों की बातों में उलझे रहते हैं या भविष्य के सपने देखते हैं। इस तरह भूत या भविष्य काल में जीते हैं। असल में दोनों काल मिथ्या हैं। वर्तमान ही सत्य है उसी में जीना चाहिए।


(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –

1. समाज के पास अगर शाश्वत मुल्यों जैसा कुछ है तो वह आर्दशवादी लोगों का ही दिया हुआ है।

उत्तर

आदर्शवादी लोग समाज को आदर्श रूप में रखने वाली राह बताते हैं। व्यवहारिक आदर्शवाद वास्तव में व्यवहारिकता ही है। उसमें आदर्शवाद कहीं नहीं होता है।

2. जब व्यवहारिकता का बखान होने लगता है तब प्रेक्टिकल आइडियालिस्टों के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यवहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है?

उत्तर

जहाँ व्यवहारिकता होती है वहां आदर्श टिक नही पाते। वास्तव में व्यवहारिकता ही अवसरवादिता का दूसरा नाम है।
3. हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।

उत्तर

जीवन की भाग-दौड़, व्यस्तता तथा आगे निकलने की होड़ ने लोगों का चैन छीन लिया है। हर व्यक्ति अपने जीवन में अधिक पाने की होड़ में भाग रहा है। इससे तनाव व निराशा बढ़ रही है।

4. सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों। 

उत्तर

चाय परोसने वाले ने बहुत ही सलीके से काम किया। झुककर प्रणाम करना, बरतन पौंछना, चाय डालना सभी धीरज और सुंदरता से किए मानो कोई कलाकार बड़े ही सुर में गीत गा रहा हो।

भाषा अध्यन

1. नीचे दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग किजिए −व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वत

उत्तर

(क) व्यावहारिकता − दादाजी की व्यावहारिकता सीखने योग्य है।
(ख) आदर्श − आज के युग में गाँधी जैसे आदर्शवादिता की ज़रूरत है।
(ग) सूझबूझ − उसकी सूझबूझ ने आज मेरी जान बचाई।
(घ) विलक्षण − महेश की अपने विषय में विलक्षण प्रतिभा है।
(ङ) शाश्वत − सत्य, अहिंसा मानव जीवन के शाश्वत नियम हैं।

2. नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए −

(क)माता-पिता=……………….
(ख)पाप-पुण्य=……………….
(ग)सुख-दुख=……………….
(घ)रात-दिन=……………….
(ङ)अन्न-जल=……………….
(च)घर-बाहर=……………….
(छ)देश-विदेश=……………….

उत्तर

(क)माता-पिता=माता और पिता
(ख)पाप-पुण्य=पाप और पुण्य
(ग)सुख-दुख=सुख और दुख
(घ)रात-दिन=रात और दिन
(ङ)अन्न-जल=अन्न और जल
(च)घर-बाहर=घर और बाहर
(छ)देश-विदेश=देश और विदेश

3. नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए −

(क)सफल=……………..
(ख)विलक्षण=……………..
(ग)व्यावहारिक=……………..
(घ)सजग=……………..
(ङ)आर्दशवादी=……………..
(च)शुद्ध=……………..

उत्तर

(क)सफल=सफलता
(ख)विलक्षण=विलक्षणता
(ग)व्यावहारिक=व्यावहारिकता
(घ)सजग=सजगता
(ङ)आर्दशवादी=आर्दशवादिता
(च)शुद्ध=शुद्धता

पृष्ठ संख्या: 124

4. नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए − शुद्ध सोना अलग है।
बहुत रात हो गई अब हमें सोना चाहिए।
ऊपर दिए गए वाक्यों में ‘सोना’ का क्या अर्थ है? पहले वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है धातु ‘स्वर्ण’। दुसरे वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है ‘सोना’ नामक क्रिया। अलग-अलग संदर्भों में ये शब्द अलग अर्थ देते हैं अथवा एक शब्द के कई अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए −
उत्तर, कर, अंक, नग

उत्तर

(क)उत्तरमैंने सभी प्रश्नों के उत्तर लिख लिए हैं।
तुम्हें उत्तर दिशा में जाना है।
(ख)करहमने सभी कर चुका दिए हैं।
मंत्री जी ने अपने कर कमलों से दीप प्रज्ज्वलित किया।
(ग)अंकराम के परीक्षा में अच्छे अंक आए हैं।
बच्चा अपनी माँ की अंक में बैठा है।
(घ)नगहीरा एक कीमती नग है।
हिमालय एक बड़ा नग है।

5. नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए − (क) 1. अँगीठी सुलगायी।
2. उस पर चायदानी रखी।
(ख) 1. चाय तैयार हुई।
2. उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) 1. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया।
2. तौलिये से बरतन साफ़ किए।

उत्तर

(क) अँगीठी सुलगायी और उसपर चायदानी रखी।
(ख) चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) बगल के कमरे में जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिए से बरतन साफ़ किए।

6. नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए − (क) 1. चाय पीने की यह एक विधि है।
2. जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) 1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था।
2. उसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) 1. चाय तैयार हुई।
2. उसने वह प्यालों में भरी।
3. फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।

उत्तर

(क) यह चाय पीने की एक विधि है जिसे जापानी चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) बाहर बेढब सा एक मिट्टी का बरतन था जिसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) जब चाय तैयार हुई तो उसने प्यालों में भरकर हमारे सामने रख दी।

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Short Summary- पाठ 16- पतझर में टूटी पत्तियाँ

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 15- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 15- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले

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पृष्ठ संख्या: 114
प्रश्न अभ्यास
मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों दीजिए –


1. बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?

उत्तर

आबादी बढ़ने के कारण स्थान का अभाव हो रहा था इसलिए बिल्डर नई-नई इमरातें बनाने के लिए बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे।

2.  लेखक का घर किस शहर में था?

उत्तर

लेखक का घर ग्वालियर शहर में था।

3. जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?

उत्तर

एकल परिवारों का चलन होने के कारण जीवन डिब्बों जैसे फलैटों में सिमटने लगा है।

4. कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?

उत्तर

कबूतर के घोंसले में दो अंडे थे। एक बिल्ली ने तोड़ दिया था दूसरा बिल्ली से बचाने के चक्कर में माँ से टूट गया। कबूतर इससे परेशान होकर इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –

1. अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?

उत्तर

अरब में लशकर को नूह के नाम से इसलिए याद करते हैं क्योंकि वे हमेशा दूसरों के दुःख में दुखी रहते थे। नूह को पैगम्बर या ईश्वर का दूत भी कहा गया है। उनके मन में करूणा होती थी।

2. लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?

उत्तर

लेखक की माँ दिन छिपने या सूरज ढलने के बाद पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं क्योंकि उस समय वे रोते हैं, रात में फूल तोड़ने पर वे श्राप देते हैं।

3. प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?

उत्तर

प्रकृति में आए असंतुलन का परिणाम भूकंप, अधिक गर्मी, वक्त बेवक्त की बारिश, अतिवृष्टि, साइकलोन आदि और अनेक बिमारियाँ हैं।

4. लेखक की माँ ने पूरे दिन रोज़ा क्यों रखा?

उत्तर

लेखक के घर एक कबूतर का घोंसला था जिसमें दो अंडे थे। एक अंडा बिल्ली ने झपट कर तोड़ दिया, दूसरा अंडा बचाने के लिए माँ उतारने लगीं तो टूट गया। इस पर उन्हें दुख हुआ। माँ ने प्रायश्चित के लिए पूरे दिन रोज़ा रखा और नमाज़ पढ़कर माफी माँगती रहीं।

5. लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

लेखक पहले ग्वालियर में रहता था। फिर बम्बई के वर्साेवा में रहने लगा। पहले घर बड़े-बड़े होते थे, दालान आंगन होते थे अब डिब्बे जैसे घर होते हैं, पहले सब मिलकर रहते थे अब सब अलग-अलग रहते हैं, इमारतें ही इमारतें हैं पशु-पक्षियों के रहने के लिए स्थान नहीं रहे,पहले अगर वे घोंसले बना लेते थे तो ध्यान रखा जाता था पर अब उनके आने के रास्ते बंद कर दिए जाते हैं।

6. डेरा डालने से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

डेरा डालने का अर्थ है कुछ समय के लिए रहना। बड़ी-बड़ी इमारतें बनने के कारण पक्षियों को घोंसले बनाने की जगह नहीं मिल रही है। वे इमारतों में ही डेरा डालने लगे हैं।

7. शेख अयाज़ के पिता अपने बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़ कर क्यों उठ खड़े हुए?

उत्तर

शेख अयाज़ के पिता जब कुँए से नहाकर लौटे तो काला च्योंटा चढ़ कर आ गया। भोजन करते वक्त उन्होंने उसे देखा और भोजन छोड़कर उठ खड़े हुए। वे पहले उसे घर छोड़ना चाहते थे।

पृष्ठ संख्या: 115

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −

1. बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर

बढ़ती हुई आबादी के कारण पर्यावरण असंतुलित हो गया है। आवासीय स्थलों को बढ़ाने के लिए वन, जंगल यहाँ तक कि समुद्रस्थलों को भी छोटा किया जा रहा है। पशुपक्षियों के लिए स्थान नहीं है। इन सब कारणों से प्राकृतिक का सतुंलन बिगड़ गया है और प्राकृतिक आपदाएँ बढ़ती जा रही हैं। कहीं भूकंप, कहीं बाढ़, कहीं तूफान, कभी गर्मी, कभी तेज़ वर्षा इन के कारण कई बिमारियाँ हो रही हैं। इस तरह पर्यावरण के असंतुलन का जन जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा है।

2. लेखक की पत्नी को खिड़की मे जाली क्यों लगवानी पड़ी?

उत्तर

लेखक के घर में कबतूर ने घोंसला बना लिया था जिसमें दो बच्चे थे उनको दाना खिलाने के लिए कबूतर आया जाया करते थे, सामान तोड़ाकरते थे। इससे परेशान होकर लेखक की पत्नी ने मचान के आगे घोंसला सरका दिया और वहाँ जाली लगवानी पड़ी।

3. समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?

उत्तर

कई सालों से बिल्डर समुद्र को पीछे धकेल रहे थे और उसकी ज़मीन हथिया रहे थे। समुद्र सिमटता जा रहा था। उसने पहले टाँगें समेटी फिर उकडू बैठा फिर खड़ा हो गया। फिर भी जगह कम पड़ने लगी जिससे वह गुस्सा हो गया। उसने गुस्सा निकालने के लिए तीन जहाज फेंक दिए। एक वार्लीके समुद्र के किनारे, दूसरा बांद्रा मे कार्टर रोड के सामने और तीसरा गेट वे ऑफ इंडिया पर टूट फूट गया।

4. मट्टी से मट्टी मिले,खो के सभी निशान,
किसमें कितना कौन है,
कैसे हो पहचान
इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

इन पंक्तियों में बताया गया है कि सभी प्राणी एक ही मिट्टी से बने हैं और अंत में हमारा शरीर व्यक्तिगत पहचान खोकर उसी मिट्टी में मिल जाता है। यह पता नही रहता कि उस मिट्टी में कौन-कौन से मिट्टी मिली हुई है यानी मनुष्य में कितनी मनुष्यता है और कितनी पशुता यह किसी को पता नहीं होता।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −

1. नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है। नेचर के गुस्से का एक नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था।

उत्तर

प्रकृति के साथ मनुष्य खिलवाड़ करता रहा है परन्तु प्रकृति की भी एक हद तक सहने की शक्ति होती है। इसके गुस्से का नमूना कुछ साल पहले बंबई में देखने को मिला था। इसने तीन जहाजों को गेंद की तरह उछाल दिया था। 
2. जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।

उत्तर

महान तथा बड़े लोगों में क्षमा करने की प्रधानता होती है। किसी भी व्यक्ति की महानता क्रोध कर दण्ड देने में नहीं होती है बल्कि किसी की भी गलती को क्षमा करना ही महान लोगों की विशेषता होती है। समुद्र महान है। वह मनुष्य के खिलवाड़ को सहन करता रहा। पर हर चीज़ की हद होती है। एक समय उसका क्रोध भी विकराल रूप में प्रदर्शित हुआ। वैसे तो महान व्यक्तियों की तरह उसमें अथाह गहराई,शांति व सहनशक्ति है।

3. इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है। इनमें से कुछ शहर छोड़कर चले गए हैं। जो नहीं जा सके हैं उन्होंने यहाँ-वहाँ डेरा डाल लिया है।

उत्तर

बस्तियों के फैलाव से पेड़ कटते गए और पक्षियों के घर छिन गए। कुछ की तो जातियाँ ही नष्ट हो गईं। कुछ पक्षियों ने यहाँ इमारतों में डेरा जमा लिया।

4. शेख अयाज़ के पिता बोले, नहीं, यह बात नहीं हैं। मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ। इन पंक्तियों में छिपी हुई उनकी भावना को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

शेख अयाज़ के पिता बोले, नहीं, यह बात नहीं हैं। मैने एक घर वाले को बेघर कर दिया है। उस बेघर को कुएँ पर उसके घर छोड़ने जा रहा हूँ। इन पंक्तियों में उनकी यह भावना छिपी हुई थी कि वे पशु-पक्षियों की भावनाओं को समझते थे। वे चीटें को भी घर पहुँचाने जा रहे थे। उनके लिए मनुष्य पशु-पक्षी एक समान थे। वे किसी को भी तकलीफ नहीं देना चाहते थे।

भाषा अध्यन

1. उदारण के अनुसार निम्नलिखित वाक्यों में कारक चिह्नों को पहचानकर रेखांकित कीजिए और उनके नाम रिक्त स्थानों में लिखिए; जैसे −

(क)माँ ने भोजन परोसा।कर्ता
(ख)मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।………………….
(ग)मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया।………………….
(घ)कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।………………….
(ङ)दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।………………….

उत्तर

(क)माँ ने भोजन परोसा।कर्ता
(ख)मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।संप्रदान
(ग)मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया।कर्म
(घ)कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।अधिकरण
(ङ)दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।अधिकरण

2. नीचे दिए गए शब्दों के बहुवचन रूप लिखिए − चींटी, घोड़ा, आवाज़, बिल, फ़ौज, रोटी, बिंदु, दीवार, टुकड़ा।

उत्तर

चींटीचीटियाँ
घोड़ाघोड़ें
आवाज़आवाज़ें
बिलबिल
फ़ौजफ़ौजें
रोटीरोटियाँ
बिंदुबिंदु (बिदुओ को)
दीवारदीवारें
टुकड़ाटुकड़े

3. निम्नलिखित वाक्यों में उचित शब्द भरकर वाक्य पूरे किजिए − (क) आजकल ……………… बहुत खराब है। (जमाना/ज़माना)
(ख) पूरे कमरे को ……………… दो। (सजा/सज़ा)
(ग) माँ दही …………… भूल गई। (जमाना/ज़माना)
(घ) …………. चीनी तो देना (जरा/ज़रा)
(ङ) दोषी को ………… दी गई। (सजा/सज़ा)
(च) महात्मा के चेहरे पर……………. था। (तेज/तेज़)

उत्तर

(क) आजकल ….ज़माना…… बहुत खराब है।
(ख) पूरे कमरे को ….सजा…… दो।
(ग) माँ दही ….जमाना… भूल गई।
(घ) …ज़रा…. चीनी तो देना
(ङ) दोषी को ..सज़ा…. दी गई।
(च) महात्मा के चेहरे पर ..तेज.. था।

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Short Summary- पाठ 15- अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 13 – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 13 – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

NCERT Solutions for Class 10 will help the students in learning complex topics and problems in an easy way. Class 10 Sparsh NCERT Solutions will help students in understanding the topics in the most simple manner and grasp them easier to perform better. You can study in an organized manner and set a good foundation for your future goals

पृष्ठ संख्या: 94
प्रश्न अभ्यास 

मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –


1. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को कौन-कौन से पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है?

उत्तर

‘तीसरी कसम’ फिल्म को राष्ट्रपति द्वारा स्वर्णपदक मिला तथा बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का अवार्ड दिया। इस फ़िल्म को मास्को फ़िल्म फेस्टिवल में भी पुरस्कृत किया गया।

2. शैलेंद्र ने कितनी फ़िल्में बनाईं?

उत्तर

शैलेन्द्र ने मात्र एक फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ बनाई।

3. राजकपूर द्वारा निर्देशित कुछ फ़िल्मों के नाम बताइए।

उत्तर

राजकपूर ने संगम, मेरा नाम जोकर, बॉबी, श्री 420, सत्यम् शिवम् सुन्दरम्, आदि फ़िल्में निर्देशित की।

4. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म के नायक व नायिकाओं के नाम बताइए और फ़िल्म में इन्होंने किन पात्रों का अभिनय किया है?

उत्तर

इस फ़िल्म में राजकपूर ने ‘हीरामन’ और ‘वहीदा रहमान’ ने हीराबाई की भूमिका निभाई है।

5. फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ का निर्माण किसने किया था?

उत्तर

‘तीसरी कसम’ फ़िल्म का निर्माण शैलेन्द्र ने किया था?

6. राजकपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ के निर्माण के समय किस बात की कल्पना भी नहीं की थी?

उत्तर

राजकपूर ने ‘मेरा नाम जोकर’ बनाते समय यह सोचा भी नहीं था कि इस फ़िल्म का एक ही भाग बनाने में छह वर्षों का समय लग जाएगा।

7. राजकपूर की किस बात पर शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया?

उत्तर

तीसरी कसम की कहानी सुनने के बाद जब राजकपूर ने मेहनताना माँगा तो शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया क्योंकि उन्हें ऐसी उम्मीद न थी।

8. फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को किस तरह का कलाकार मानते थे?

उत्तर

फ़िल्म समीक्षक राजकपूर को उत्कृष्ट कलाकार और आँखों से बात करने वाले कलाकार मानते थे।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में ) लिखिए –

1. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को सेल्यूलाइट पर लिखी कविता क्यों कहा गया है?

उत्तर

‘तीसरी कसम’ फणीश्वरनाथ रेनू द्वारा लिखी साहित्यिक रचना है। सेल्यूलाइट का अर्थ होता है किसी दृश्य को हु-ब-हु कैमरे पर उतार देना, उसका चित्रांकन करना। यह फ़िल्म भी कविता के समान भावुकता, संवेदना, मार्मिकता से भरी हुई कैमरे की रील पर उतरी हुई फ़िल्म है। इसलिए इसे सेल्यूलाइट पर लिखी कविता कहा गया है।

2. ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?

उत्तर

‘तीसरी कसम’ एक भावना प्रधान फ़िल्म थी। इस फ़िल्म की संवेदना को एक आम आदमी नही समझ सकता था जिस कारण लाभ मिलने की उम्मीद बहुत कम थी इसलिए इसे खरीददार नहीं मिल रहे थे।

3. शैलेन्द्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य क्या है?

उत्तर

शैलेन्द्र के अनुसार कलाकार का उद्धेश्य दर्शकों की रूची की आड़ में उथलेपन को थोपना नहीं चाहिए बल्कि उनका परिष्कार करना चाहिए। कलाकार का दायित्व स्वस्थ एवं सुंदर समाज की रचना करना है, विकृत मानसिकता को बढ़ावा देना नहीं है।

4. फ़िल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्लोरिफ़ाई क्यों कर दिया जाता है?

उत्तर

फ़िल्मों में त्रासद को इतना ग्लोरिफ़ाई कर दिया जाता है जिससे कि दर्शकों का भावनात्मक शोषण किया जा सके। उनका उद्देश्य केवल टिकट-विंडो पर ज़्यादा से ज़्यादा टिकटें बिकवाना और अधिक से अधिक पैसा कमाना होता है। इसलिए दुख को बहुत बढ़ा-चढ़ा कर बताते हैं जो वास्तव में सच नहीं होता है। दर्शक उसे पूरा सत्य मान लेते हैं। इसलिए वे त्रासद स्थितियों को ग्लोरिफ़ाई करते हैं।

5. ‘शैलेन्द्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्द दिए हैं’ − इस कथन से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

राजकपूर अभिनय में मंझे हुए कलाकार थे और शैलेन्द्र एक अच्छे गीतकार थे। राजकपूर की छिपी हुई भावनाओं को शैलेन्द्र ने शब्द दिए। राजकूपर भावनाओं को आँखों के माध्यम से व्यक्त कर देते थे और शैलेंद्र उन भावनाओं को अपने गीतों से तथा संवाद से पूर्ण कर दिया करते थे।

6. लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्या समझते हैं?

उत्तर

शोमैन का अर्थ है अपनी कला के प्रदर्शन से ज़्यादा से ज़्यादा जन समुदाय इकट्ठा कर सके। वह दर्शकों को अंत तक बांधे रखता है तभी वह सफल होता है। राजकपूर भी महान कलाकार थे। जिस पात्र की भूमिका निभाते थे उसी में समा जाते थे। इसलिए उनका अभिनय सजीव लगता था। उन्होंने कला को ऊँचाइयों तक पहुँचाया था।
7. फ़िल्म ‘श्री 420’ के गीत ‘रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ’ पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की?

उत्तर

‘रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ’ पर संगीतकार जयकिशन को आपत्ति थी क्योंकि सामान्यत: दिशाएँ चार होती हैं। वे चार दिशाएँ शब्द का प्रयोग करना चाहते थे लेकिन शैलेन्द्र तैयार नहीं हुए। वे कलाकार का दायित्व मानते थे, उथलेपन पर विश्वास नहीं करते थे।

पृष्ठ संख्या: 95

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में ) लिखिए –

1.राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों के आगाह करने पर भी शैलेन्द्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?

उत्तर

शैलेन्द्र एक कवि थे। उन्हें फणीश्वर नाथ रेणु की मूल कथा की संवेदना गहरे तक छू गई थी। उन्हें फ़िल्म व्यवसाय और निर्माता के विषय में कुछ भी ज्ञान नहीं था। फिर भी उन्होंने इस कथावस्तु को लेकर फ़िल्म बनाने का निश्चय किया। उन्हें धन तथा लाभ का लालच नहीं था। राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों के आगाह करने पर भी अपनी आत्मसंतुष्टि के लिए उन्होंने यह फ़िल्म बनाई थी।
2. ‘तीसरी कसम’ में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया। स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

राजकपूर अभिनय में प्रवण थे वे पात्र को अपने ऊपर हावी नही होने देते थे बल्कि उसको जीवंत कर देते थे। तीसरी कसम में भी हीरामन पर राजकपूर हावी नही था बल्कि राजकपूर ने हीरामन की आत्मा दे दी थी। उसका डकडू बैठना, नौंटकी की बाई में अपनापन खोजना, गीतगाता गाडीवान, सरल देहाती मासमियत को चरम सीमा तक ले जाते हैं। इस तरह उनका महिमामय व्यक्तित्व हीरामन की आत्मा में उतर गया।

3. लेखक ने ऐसा क्यों लिखा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्याय किया है?

उत्तर

तीसरी कसम फ़िल्म फणीश्वर नाथ रेणु की पुस्तक मारे गए गुलफाम पर आधारित है। शैलेंद्र ने पात्रों के व्यक्तित्व, प्रसंग,  घटनाओं में कहीं कोई परिवर्तन नहीं किया है। कहानी में दी गई छोटी-छोटी बारीकियाँ, छोटी-छोटी बातें फ़िल्म में पूरी तरह उतर कर आईं हैं। शैलेंद्र ने धन कमाने के लिए फ़िल्म नहीं बनाई थी। उनका उद्देश्य एक सुंदर कृति बनाना था। उन्होंने मूल कहानी को यथा रूप में प्रस्तुत किया है। उऩके योगदान से एक सुंदर फ़िल्म तीसरी कसम के रूप में हमारे सामने आई है। लेखक ने इसलिए कहा है कि तीसरी कसम ने साहित्य-रचना के साथ शत-प्रतिशत का न्याय किया है।

4. शैलेन्द्र के गीतों की क्या विशेषताएँ हैं। अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर

शैलेन्द्र के गीत भावपूर्ण थे। उन्होंने धन कमाने की लालसा में गीत कभी नहीं लिखे। उनके गीतों की विशेषता थी कि उनमें घटियापन या सस्तापन नहीं था। उनके द्वारा रचित गीत उनके दिल की गहराइयों से निकले हुए थे। अतः वे दिल को छू लेने वाले गीत थे। यही कारण है कि उनके लिखे हर गीत अत्यन्त लोकप्रिय भी हुए। उनके गीतों में करूणा, संवेदना, आदि के भाव बिखरे हुए थे।
5. फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेन्द्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए?

उत्तर

फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेन्द्र की पहली और आखिरी फ़िल्म ‘तीसरी कसम’ थी। उनकी फ़िल्म यश और धन की इच्छा से नही बनाई गई थी। शैलेन्द्र ने साहित्यिक रचना को बेहद ईमानदारी के साथ पर्दे पर उतारा। शैलेन्द्र ने न केवल कहानी को पर्दे पर उकेरा बल्कि हीरामन और हीराबाई की भावनाओं को शब्द भी दिए। उनकी संवेदनशीलता पुरे फिल्मे में नज़र आती है। बेशक इस फ़िल्म को खरीददार नही मिले पर शैलेन्द्र को अपनी पहचान और फ़िल्म को अनेकों पुरस्कार मिले और लोगो ने इसे सराहा भी।

6. शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है−कैसे? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

शैलेंद्र के निजी जीवन की छाप उनकी फ़िल्म में झलकती है। शैलेन्द्र ने झूठे अभिजात्य को कभी नहीं अपनाया। उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरुह नहीं। उनका कहना था कि कलाकार का यह कर्त्तव्य है कि वह उपभोक्ता की रुचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे। उनके लिखे गए गीतों में बनावटीपन नहीं था। उनके गीतों में शांत नदी का प्रवाह भी था और गीतों का भाव समुद्र की तरह गहरा था। यही विशेषता उनकी ज़िंदगी की थी और यही उन्होंने अपनी फिल्म के द्वारा भी साबित किया।

7. लेखक के इस कथन से कि ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था, आप कहाँ तक सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

लेखक के अनुसार ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म कोई सच्चा कवि-हृदय ही बना सकता था। लेखक का यह कथन बिलकुल सही है क्योंकि इस फिल्म की कलात्मकता काबिल-ए-तारीफ़ है। शैलेन्द्र एक संवेदनशील तथा भाव-प्रवण कवि थे और उनकी संवेदनशीलता इस फ़िल्म में स्पष्ट रुप से मौजूद है। यह संवेदनशीलता किसी साधारण फ़िल्म निर्माता में नहीं होती है।

(ग) निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए –

1. ….. वह तो एक आदर्शवादी भावुक कवि था, जिसे अपार संपत्ति और यश तक की इतनी कामना नहीं थी जितनी आत्म-संतुष्टि के सुख की अभिलाषा थी।

उत्तर

इन पंक्तियों में लेखक का आशय है कि शैलेन्द्र एक ऐसे कवि थे जो जीवन में आदर्शों और भावनाओं को सर्वोपरि मानते थे। जब उन्होंने भावनाओं, संवेदनाओं व साहित्य की विधाओं के आधार पर ‘तीसरी कसम’ फ़िल्म का निर्माण किया तो उनका उद्देश्य केवल आत्मसंतुष्टि था न कि धन कमाना।

2. उनका यह दृढ़ मतंव्य था कि दर्शकों की रूचि की आड़ में हमें उथलेपन को उन पर नहीं थोपना चाहिए। कलाकार का यह कर्त्तव्य भी है कि वह उपभोक्ता की रूचियों का परिष्कार करने का प्रयत्न करे।
उत्तर

फ़िल्म “श्री 420” के एक गाने में शैलेंद्र ने दसों दिशाओं शब्द का प्रयोग किया तो संगीतकार जयकिशन ने उन्हें कहा कि दसों दिशाओं नहीं चारों दिशाओं होना चाहिए चूँकि लोग चार दिशाएं जानते हैं देश दिशाएं नही। लेकिन शैलेन्द्र का कहना था कि फ़िल्म निर्माताओं को चाहिए कि दर्शकों की रूचि को ठीक करें। उथलेपन उन पर थोपना नहीं चाहिए।

3. व्यथा आदमी को पराजित नहीं करती, उसे आगे बढ़ने का संदेश देती है।

उत्तर

यह पंक्ति लेखक ने शैलेन्द्र के गीतों के सन्दर्भ में लिखी है। शैलेन्द्र के गीत केवल मनोरंजन के लिए नही बल्कि जिंदगी से जूझने का संदेश भी देते हैं। अपनी गीतों द्वारा वह सन्देश देना चाहते थे की थक-हारकर बैठ जाना उचित नही होता अपितु बार-बार प्रयास करनी चाहिए। हर व्यथा और गलतियों से सबक लेनी चाहिए।

4. दरअसल इस फ़िल्म की संवेदना किसी दो से चार बनाने वाले की समझ से परे है।

उत्तर

‘तीसरी कसम’ फ़िल्म की संवेदना किसी आम आदमी के समझ के परे थी। अन्य फिल्मों की तरह जिनका उद्देश्य सिर्फ लाभ कमाना होता है की तरह इसमें सस्ते लोक-लुभावन मसालों को नही डाला गया था।

5. उनके गीत भाव-प्रवण थे − दुरूह नहीं।

उत्तर

शैलेन्द्र के गीत सीधी साधी भाषा में सरसता व प्रवाह लिए हुए थे। इनके गीत भावनात्मक गहन विचारों वाले तथा संवेदनशील थे।

पृष्ठ संख्या: 96

भाषा अध्यन

3. पाठ में आए निम्नलिखित मुहावरों से वाक्य बनाइए − चेहरा मुरझाना, चक्कर खा जाना, दो से चार बनाना, आँखों से बोलना

उत्तर

चेहरा मुरझाना – अपना रिजल्ट सुनते ही उसका चेहरा मुरझा गया।
चक्कर खा जाना – बहुत तेज़ धूप में घूमकर वह चक्कर खाकर गिर गया।
दो से चार बनाना – धन के लोभी हर समय दो से चार बनाने में लगे रहते हैं।
आँखों से बोलना – उसकी आँखें बहुत सुन्दर हैं लगता है वह आँखों से बोलती है।

4. निम्नलिखित शब्दों के हिन्दी पर्याय दीजिए −

(क)शिद्दत—————
(ख)याराना—————
(ग)बमुश्किल—————
(घ)खालिस—————
(ङ)नावाकिफ़—————
(च)यकीन—————
(छ)हावी—————
(ज)रेशा—————

उत्तर

(क)शिद्दतप्रयास
(ख)यारानादोस्ती, मित्रता
(ग)बमुश्किलकठिन
(घ)खालिसमात्र
(ङ)नावाकिफ़अनभिज्ञ
(च)यकीनविश्वास
(छ)हावीभारी पड़ना
(ज)रेशातंतु

5. निम्नलिखित का संधिविच्छेद कीजिए −

(क)चित्रांकन—————+—————
(ख)सर्वोत्कृष्ट—————+—————
(ग)चर्मोत्कर्ष—————+—————
(घ)रूपांतरण—————+—————
(ङ)घनानंद—————+—————

उत्तर

(क)चित्रांकनचित्र + अकंन
(ख)सर्वोत्कृष्टसर्व + उत्कृष्ट
(ग)चर्मोत्कर्षचरम + उत्कर्ष
(घ)रूपांतरणरूप + अतंरण
(ङ)घनानंदघन + आनंद

6. निम्नलिखित का समास विग्रह कीजिए और समास का नाम लिखिए −

(क)कला-मर्मज्ञ—————
(ख)लोकप्रिय—————
(ग)राष्ट्रपति—————

उत्तर

(क)कला-मर्मज्ञकला का मर्मज्ञ(तत्पुरूष समास)
(ख)लोकप्रियलोक में प्रिय(तत्पुरूष समास)
(ग)राष्ट्रपतिराष्ट्र का पति(तत्पुरूष समास)

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Short Summary- पाठ 13 – तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 12- तताँरा-वामीरो कथा हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 12- तताँरा-वामीरो कथा

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पृष्ठ संख्या: 83
प्रश्न अभ्यास 

मौखिक

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो-पंक्तियों में दीजिए –

1. तताँरा-वामीरो कहाँ की कथा है?

उत्तर

तताँरा-वामीरो अंदमान निकोबार द्वीप समुह की लोक कथा है।

2. वामीरो अपना गाना क्यों भूल गई?

उत्तर

अचानक समुद्र की ऊँची लहर ने वामीरो को भिगो दिया, इसी हड़बडाहट में वह गाना भूल गई।

3. तताँरा ने वामीरो से क्या याचना की?

उत्तर

तताँरा ने वामीरो से याचना की कि वह कल उसी समुद्री चट्टान पर आए।

4. तताँरा और वामीरो के गाँव की क्या रीति थी?

उत्तर

तताँरा और वामीरो के गाँव की रीति थी कि विवाह संबंध बाहर के किसी गाँव वाले से नहीं हो सकता था।

5. क्रोध में तताँरा ने क्या किया?

उत्तर

क्रोध में तताँरा का हाथ कमर पर लटकी तलवार पर चला गया और उसने तलवार निकाल कर ज़मीन में गाड़ दी।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) दीजिए –

1. तताँरा की तलवार के बारे में लोगों का क्या मत था?

उत्तर

तताँरा की तलवार लकड़ी की थी औऱ हर समय तताँरा की कमर पर बँधी रहती थी। वह इसका प्रयोग सबके सामने नहीं करता था। लोगों का मानना था कि उसमे अद्भुत दैवीय शक्ति थी। वास्तव में वह तलवार एक विलक्षण रहस्य थी।

2. वामीरों ने तताँरा को बेरूखी से क्या जवाब दिया?

उत्तर

वामीरों ने तताँरा को बेरूखी से जवाब दिया कि पहले वह बताए कि वह कौन है जो इस तरह प्रश्न पूछ रहा है।

पृष्ठ संख्या: 84

3. तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु से निकोबार में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर

तताँरा-वामीरो की त्यागमयी मृत्यु की घटना के बाद निकोबारी दूसरे गांवों में भी आपसी वैवाहिक संबंध रखने लगे।

4. निकोबार के लोग तताँरा को क्यों पसंद करते थे?

उत्तर

निकोबार के लोग तताँरा को उसके आत्मीय स्वभाव के कारण पसन्द करते थे। वह नेक ईमानदार और साहसी था। वह मुसीबत के समय भाग भागकर सबकी मदद करता था।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) दीजिए –

1. निकोबार द्वीप समूह के विभक्त होने के बारे में निकोबारियों का क्या विश्वास है?

उत्तर

निकोबारियों का विश्वास था कि पहले अडंमान निकोबार दोनों एक ही द्वीप थे। इनके दो होने के पीछे तताँरा-वामीरो की लोक कथा प्रचलित है। ये दोनों प्रेम करते थे। दोनों एक गाँव के नहीं थे। इसलिए रीति अनुसार विवाह नहीं हो सकती थी। रूढ़ियों में जकड़ा होने के कारण वह कुछ कर भी नहीं सकता था। उसे अत्यधिक क्रोध आया और उसने क्रोध में अपनी तलवार धरती में गाड़ दी और उसे खींचते खींचते वह दूर भागता चला गया। इससे ज़मीन दो भागों में बँट गई – एक निकोबार और दूसरा अंडमान।

2. तताँरा खूब परिश्रम करने के बाद कहाँ गया? वहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

उत्तर

तताँरा दिनभर खूब परिश्रम करने के बाद समुद्र के किनारे टहलने निकल गया। शाम का समय था और समुद्र से ठंडी हवाएँ आ रही थी। पक्षियों की चहचहाट धीरे-धीरे कम हो रही थी। डुबते हुए सूरज़ की किरणें समुद्र के पानी पर पड़कर सतरंगी छटा बिखेर रही थी। समुद्र का पानी बहते हुए आवाज़ कर रहा था मानो कोई गीत गा रहा हो। पूरा वातावरण बहुत मोहक लग रहा था।

3. वामीरो से मिलने के बाद तताँरा के जीवन में क्या परिवर्तन आया?

उत्तर

वामीरो से मिलने के बाद तताँरा बहुत बैचेन रहने लगा। वह अपनी सुधबुध खो बैठा। वह शाम की प्रतिक्षा करता जब वह वामीरो से मिल सके। वह दिन ढलने से पहले ही लपाती की समुद्री चट्टान पर पहुँच गया। उसे एक-एक पल पहाड़ जैसा लग रहा था।

4. प्राचीन काल में मनोरंजन और शक्ति प्रदर्शन के लिए किस प्रकार के आयोजन किए जाते थे?

उत्तर

प्राचीन काल में हष्ट पुष्ट पशुओं के साथ शक्ति प्रदर्शन किए जाते थे। लड़ाकू साँडों, शेर, पहलवानों की कुश्ती, तलवार बाजी जैसे शक्ति प्रदर्शन के कार्यक्रम होते थे। तीतर, बटेर की लड़ाई, पंतगबाजी, पैठे लगाना जिसमें विशिष्ठ सामग्रियाँ बिकती। खाने पीने की दुकाने, जानवरों की नुमाइश, ये सभी मनोरंजन के आयोजन होते थे।

5. रूढ़ियाँ जब बंधन बन बोझ बनने लगें तब उनका टूट जाना ही अच्छा है। क्यों? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

रूढ़ियां और बंधन समाज को अनुशासित करने के लिए बनते हैं परन्तु जब इन्हीं के द्वारा मनुष्य की भावना आहत होने लगे, बंधन बनने लगे और बोझ लगने लगे तो उसका टूट जाना ही अच्छा होता है। इस कहानी के सन्दर्भ में देखा जाए तो तांतरा-वामीरो का विवाह एक रूढ़ि के कारण नही हो सकता था जिसके कारण उन्हें जान देनी पड़ती है। इस तरह की रूढ़ियाँ किसी भला करने की जगह नुकसान करती हैं। समयानुसार समाज में परिवर्तन आते रहते हैं और रूढ़ियाँ आडम्बर प्रतीत होती हैं इसलिए इनका टूट जाना बेहतर होता है।

(ग) निम्नलिखित का आशय  स्पष्ट कीजिए –

1. जब कोई राह न सूझी तो क्रोध का शमन करने के लिए उसमें शक्ति भर उसे धरती में घोंप दिया और ताकत से उसे खींचने लगा।

उत्तर

तताँरा-वामीरो को पता लग गया था कि उनका विवाह नहीं हो सकता था। फिर भी वे मिलते रहे। एक बार पशु पर्व मे वामीरो तताँरा से मिलकर रोने लगी। इस पर उसकी माँ ने क्रोध किया और तताँरा को अपमानित किया। तताँरा को भी क्रोध आने लगा। अपने गुस्से को शान्त करने के लिए अपनी तलवार को ज़मीन में गाड़ कर खींचता चला गया। इस कारण धरती दो हिस्सों में बंट गयी।

2. बस आस की एक किरण थी जो समुद्र की देह पर डूबती किरणों की तरह कभी भी डूब सकती थी।

उत्तर

तताँरा ने वामीरो से मिलने के लिए कहा और वह शाम के समय उसकी प्रतीक्षा भी कर रहा था। जैसे-जैसे सूरज डूब रहा था, उसको वामीरो के न आने की आशंका होने लगती। जिस प्रकार सूर्य की किरणें समुद्र की लहरों में कभी दिखती तो कभी छिप जाती थी, उसी तरह तताँरा के मन में भी उम्मीद बनती और डूबने लगती थी।

भाषा अध्यन

1. निम्नलिखित वाक्यों के सामने दिए कोष्ठक में (✓) का चिह्न लगाकर बताएँ कि वह वाक्य किस प्रकार का है −

(क) निकोबारी उसे बेहद प्रेम करते थे। (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक)(ख) तुमने एकाएक इतना मधुर गाना अधूरा क्यों छोड़ दिया? (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक)
(ग) वामीरो की माँ क्रोध में उफन उठी। (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक)
(घ) क्या तुम्हें गाँव का नियम नहीं मालूम? (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक)
(ङ) वाह! कितना सुदंर नाम है। (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक)
(च) मैं तुम्हारा रास्ता छोड़ दूँगा। (प्रश्नवाचक, विधानवाचक, निषेधात्मक, विस्मयादिबोधक)

उत्तर

(क)निकोबारी उसे बेहद प्रेम करते थे।विधानवाचक
(ख)तुमने एकाएक इतना मधुर गाना अधूरा क्यों छोड़ दिया?प्रश्नवाचक
(ग)वामीरो की माँ क्रोध में उफन उठी।विधानवाचक
(घ)क्या तुम्हें गाँव का नियम नहीं मालूम?प्रश्नवाचक
(ङ)वाह! कितना सुदंर नाम है।विस्मयादिबोधक
(च)मैं तुम्हारा रास्ता छोड़ दूँगा।विधानवाचक

2. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए −(क) सुध-बुध खोना
(ख) बाट जोहना
(ग) खूशी का ठिकाना न रहना
(घ) आग बबूला होना
(ङ) आवाज़ उठाना

उत्तर

(क) सुध-बुध खोना – अचानक बहुत से मेहमानों को देखकर गीता ने अपनी सुधबुध खो दी। (ख) बाट जोहना – शाम होते ही माँ सबकी बाट जोहने लगती।
(ग) खुशी का ठिकाना न रहना – आई. ए. एस. की परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर मोहन का खुशी का ठिकाना न रहा।
(घ) आग बबूला होना – शैतान बच्चों को देखकर अध्यापक आग बबूला हो गए।
(ङ) आवाज़ उठाना – प्रगतीशील लोगों ने रूढ़ियों के खिलाफ आवाज़ उठाई।

पृष्ठ संख्या: 85

3. नीचे दिए गए शब्दों में से मूल शब्द और प्रत्यय अलग करके लिखिए −

शब्दमूल शब्दप्रत्यय
चर्चित——————-——————-
साहसिक——————-——————-
छटपटाहट——————-——————-
शब्दहीन——————-——————-

उत्तर

शब्दमूल शब्दप्रत्यय
चर्चितचर्चाइत
साहसिकसाहसइक
छटपटाहटछटपटआहट
शब्दहीनशब्दहीन

4. नीचे दिए गए शब्दों में उचित उपसर्ग लगाकर शब्द बनाइए −

——————+आकर्षक=——————
——————+ज्ञात=——————
——————+कोमल=——————
——————+होश=——————
——————+घटना=——————

उत्तर

अन+आकर्षक=अनाकर्षक
+ज्ञात=अज्ञात
सु+कोमल=सुकोमल
बे+होश=बेहोश
दुर्+घटना=दुर्घटना

5. निम्नलिखित वाक्यों को निर्देशानुसार परिवर्तित कीजिए −(क) जीवन में पहली बार मैं इस तरह विचलित हुआ हूँ। (मिश्रवाक्य)
(ख) फिर तेज़ कदमों से चलती हुई तताँरा के सामने आकर ठिठक गई। (संयुक्त वाक्य)
(ग) वामीरो कुछ सचेत हुई और घर की तरफ़ दौड़ी। (सरल वाक्य)
(घ) तताँरा को देखकर वह फूटकर रोने लगी। (संयुक्त वाक्य)
(ङ) रीति के अनुसार दोनों को एक ही गाँव का होना आवश्यक था। (मिश्रवाक्य)

उत्तर

(क) जीवन में ऐसा पहली बार हुआ है जब मैं विचलित हुआ हूँ।
(ख) फिर तेज़ कदमों से चलती हुई आई और तताँरा के सामने आकर ठिठक गई।
(ग) वामीरो कुछ सचेत होकर घर की तरफ़ दौड़ी।
(घ) उसने तताँरा को देखा और वह फूटकर रोने लगी।
(ङ) रीति के अनुसार यह आवश्यक था कि दोनों एक ही गाँव के हों।

7. नीचे दिए गए शब्दों के विलोम शब्द लिखिए − भय, मधुर, सभ्य, मूक, तरल, उपस्थिति, सुखद।

उत्तर

भयअभय
मधुरकर्कश
सभ्यअसभ्य
मूकवाचाल
तरलठोस
उपस्थितिअनुपस्थिति
दुखदसुखद

8. नीचे दिए गए शब्दों के दो-दो पर्यायवाची शब्द लिखिए − समुद्र, आँख, दिन, अँधेरा, मुक्त।

उत्तर

समुद्रसागर, जलधि
आँखनेत्र, चक्षु
दिनदिवस, वासर
अँधेरातम, अंधकार
मुक्तआज़ाद, स्वतंत्र

पृष्ठ संख्या: 86

9. नीचे दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए − किंकर्तव्यविमूढ़, विह्वल, भयाकुल, याचक, आकंठ।

उत्तर

किंकर्तव्यविमूढ़ − बहुत परेशानी में ठाकुर साहब से ढेरो पैसे इनाम मिलने पर वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया।
विह्वल − गीता बूढ़ी माँ के अंतिम क्षणों में विह्वल हो गई।
भयाकुल − वह अकेले अंधेरे घर में भयाकुल हो गया।
याचक − दरवाज़े पर एक याचक खड़ा था।
आकंठ − वह बहुत ही मधुर आकंठ से गीत गा रही थी।

10. ‘किसी तरह आँचरहित एक ठंडा और ऊबाऊ दिन गुज़रने लगा’ वाक्य में दिन के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया गया है? आप दिन के लिए कोई तीन विशेषण और सुझाइए।

उत्तर

(क) ठंडा, ऊबाऊ (ख) सुदंर, शुभ, ठंडा।

12. वाक्यों के रेखांकित पदबंधों का प्रकार बताइए − (क) उसकी कल्पना में वह एक अद्भुत साहसी युवक था।
(ख) तताँरा को मानो कुछ होश आया।
(ग) वह भागा-भागा वहाँ पहुँच जाता।
(घ) तताँरा की तलवार एक विलक्षण रहस्य थी।
(ङ) उसकी व्याकुल आँखें वामीरों को ढूँढने में व्यस्त थीं।

उत्तर

(क) विशेषण पदबंध (ख) क्रिया पदबंध
(ग) क्रिया विशेषण पदबंध
(घ) संज्ञा पदबंध
(ङ) संज्ञा पदबंध

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Short Summary- पाठ 12- तताँरा-वामीरो कथा

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DNCERT Solutions for Class 10th: पाठ 11- डायरी का एक पन्ना हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 11- डायरी का एक पन्ना

NCERT Solutions for Class 10 will help the students in learning complex topics and problems in an easy way. Class 10 Sparsh NCERT Solutions will help students in understanding the topics in the most simple manner and grasp them easier to perform better. You can study in an organized manner and set a good foundation for your future goals

पृष्ठ संख्या: 73
प्रश्न अभ्यास
मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए −

1. कलकत्ता वासियों के लिए 26 जनवरी 1931 का दिन क्यों महत्वपूर्ण था?

उत्तर

26 जनवरी 1930 को गुलाम भारत में पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था जिसमे कलकत्ता वासियों की भागीदारी साधरण थी। 26 जनवरी 1931 को उसकी पुनरावृत्ति थी परन्तु इस बार कलकत्ता में इसकी तैयारियाँ जोरो पर थी। इसीलिए कलकत्ता वासियों के लिए यह दिन महत्वपूर्ण था।

2. सुभाष बाबू के जुलूस का भार किस पर था?

उत्तर

सुभाष बाबू के जुलूस का भार पूर्णोदास पर था।

3. विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू के झंडा गाड़ने पर क्या प्रतिक्रिया हुई?

उत्तर

बंगाल प्रांतीय विद्यार्थी संघ के मंत्री अविनाश बाबू ने जैसे ही झंडा गाड़ा, पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया और लोगों पर लाठियाँ चलाई।

4. लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर किस बात का संकेतदेना चाहते थे?

उत्तर

लोग अपने-अपने मकानों व सार्वजनिक स्थलों पर राष्ट्रीय झंडा फहराकर बताना चाहते थे कि वे अपने को आज़ाद समझ कर आज़ादी मना रहे हैं। उनमें जोश और उत्साह है।

5. पुलिस ने बड़े-बड़े पार्कों और मैदानों को क्यों घेर लिया था?

उत्तर

आज़ादी मनाने के लिए पूरे कलकत्ता शहर में जनसभाओं और झंडारोहण उत्सवों का आयोजन किया गया। इसलिए पार्कों और मैदानों को घेर लिया था।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) दीजिए –

1. 26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए क्या-क्या तैयारियाँ की गईं ?

उत्तर

26 जनवरी 1931 के दिन को अमर बनाने के लिए काफी तैयारियाँ की गयी थीं। केवल प्रचार पर दो हजार रूपए खर्च किये गए थे। कार्यकर्ताओं को उनका कार्य घर घर जाकर समझाया गया था। कलकत्ता शहर में जगह-जगह झंडे लगाए गए थे। कई स्थानों पर जुलूस निकाले गए तथा झंड़ा फहराया गया था। टोलियाँ बनाकर भीड़ उस स्थान पर जुटने लगी जहाँ सुभाष बाबू का जुलूस पहुँचना था।

2. ‘आज जो बात थी वह निराली थी’− किस बात से पता चलरहा था कि आज का दिन अपने आप में निराला है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

आज का दिन निराला इसलिए था क्योंकि स्वतंत्रता दिवस मनाने की प्रथम पुनरावृत्ति थी। पुलिस ने सभा करने को गैरकानूनी कहा था किंतु सुभाष बाबू के आह्वान पर पूरे कलकत्ता में अनेक संगठनों के माध्यम से जुलूस व सभाओं की जोशीली तैयारी थी। पूरा शहर झंडों से सजा था तथा कौंसिल ने मोनुमेंद के नीचे झंडा फहराने और स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ने का सरकार को खुला चैलेंज दिया हुआ था। पुलिस भरपूर तैयारी के बाद भी कामयाब नहीं हो पाई।

3. पुलिस कमिश्नर के नोटिस और कौंसिल के नोटिस में क्या अंतर था?

उत्तर

पुलिस कमिश्नर ने नोटिस निकाला था कि कोई भी जनसभा करना या जुलूस निकालना कानून के खिलाफ़ होगा। सभाओं में भाग लेने वालों को दोषी माना जाएगा। कौंसिल ने नोटिस निकाला था कि मोनुमेंट के नीचे चार बजकर चौबीस मिनट पर झंडा फहराया जाएगा तथा स्वतंत्रता की प्रतिज्ञा पढ़ी जाएगी। इस प्रकार ये दोनों नोटिस एक दुसरे के खिलाफ़ थे।

4. धर्मतल्ले के मोड़ पर आकर जुलूस क्यों टूट गया?

उत्तर

जब सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया तो स्त्रियाँ जुलूस बनाकर चलीं परन्तु पुलिस ने लाठी चार्ज से उन्हें रोकना चाहा जिससे कुछ लोग वहीं बैठ गए, कुछ घायल हो गए और कुछ पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए इसलिए जुलूस टूट गया।
5. डा. दासगुप्ता जुलूस में घायल लोगों की देख-रेख तो कर रहे थे, उनके फ़ोटो भी उतरवा रहे थे। उन लोगों के फ़ोटो खींचने की क्या वजह हो सकती थी? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

डा. दास गुप्ता लोगों की फ़ोटो खिचवा रहे थे। इससे अंग्रेज़ों के जुल्म का पर्दाफ़ाश किया जा सकता था, दूसरा यह भी पता चल सकता था कि बंगाल में स्वतंत्रता की लड़ाई में बहुत काम हो रहा है।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) दीजिए –

1. सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की क्या भूमिका थी?

उत्तर

सुभाष बाबू के जुलूस में स्त्री समाज की महत्वपूर्ण भुमिका रही थी। भारी पुलिस व्यवस्था के बाद भी जगह-जगह स्त्री जुलूस के लिए टोलियाँ बन गई थीं। मोनुमेंट पर भी स्त्रियों ने निडर होकर झंडा फहराया, अपनी गिरफ्तारियाँ करवाई तथा उनपर लाठियाँ बरसाई। इसके बाद भी स्त्रियाँ लाल बाज़ार तक आगे बढ़ती गईं।

2. जुलूस के लाल बाज़ार आने पर लोगों की क्या दशा हुई?

उत्तर
जुलूस के लाल बाज़ार आने पर भीड़ बेकाबू हो गई। पुलिस डंडे बरसा रही थी, लोगों को लॉकअप में भेज रही थी। स्त्रियाँ भी अपनी गिरफ़तारी दे रही थीं। दल के दल नारे लगा रहे थे। लोगों का जोश बढ़ता ही जा रहा था। लाठी चार्ज से लोग घायल हो गए थे। खून बह रहा था। चीख पुकार मची थी फिर भी उत्साह बना हुआ था।

3. ‘जब से कानून भंग का काम शुरू हुआ है तब से आज तक इतनी बड़ी सभा ऐसे मैदान में नहीं की गई थी और यह सभा तो कहना चाहिए कि ओपन लड़ाई थी।’ यहाँ पर कौन से और किसके द्वारा लागू किए गए कानून को भंग करने की बात कही गई है? क्या कानून भंग करना उचित था? पाठ के संदर्भ में अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर

यहाँ पर अंग्रेजी राज्य द्वारा सभा न करने के कानून को भंग करने की बात कही गई है। वात्सव में यह कानून भारतवासियों की स्वाधीनता को दमन करने का कानून था इसलिए इसे भंग करना उचित था। इस समय देश की आज़ादी के लिए हर व्यक्ति अपना सर्वस्व लुटाने को तैयार था। अंग्रेज़ों ने कानून बनाकर आन्दोलन, जुलूसों को गैर कानूनी घोषित किया हुआ था परन्तु लोगों पर इसका कोई असर नहीं था। वे आज़ादी के लिए अपना प्रदर्शन करते रहे, गुलामी की जंजीरों को तोड़ने का प्रयास करते रहे थे।

4. बहुत से लोग घायल हुए, बहुतों को लॉकअप में रखा गया, बहुत-सी स्त्रियाँ जेल गईं, फिर भी इस दिन को अपूर्व बताया गया है। आपके विचार में यह सब अपूर्व क्यों है? अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर

सुभाष चन्द्र बोस के नेतृत्व में कलकत्ता वासियों ने स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी ज़ोर-शोर से की थी। पुलिस की सख्ती, लाठी चार्ज, गिरफ़तारियाँ, इन सब के बाद भी लोगों में जोश बना रहा। लोग झंडे फहराते, वंदे मातरम बोलते हुए, खून बहाते हुए भी जुलूस निकालने को तत्पर थे। जुलूस टूटता फिर बन जाता। कलकत्ता के इतिहास में इतने प्रचंड रूप में लोगों को पहले कभी नहीं देखा गया था।

पृष्ठ संख्या: 74

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –

1. आज तो जो कुछ हुआ वह अपूर्व हुआ है। बंगाल के नाम या कलकत्ता के नाम पर कलंक था कि यहाँ काम नहीं हो रहा है वह आज बहुत अंश में धुल गया।

उत्तर

हजारों स्त्री पुरूषों ने जुलूस में भाग लिया, आज़ादी की सालगिरह मनाने के लिए बिना किसी डर के प्रदर्शन किया। पुलिस के बनाए कानून कि, जुलूस आदि गैर कानूनी कार्य, आदि की भी परवाह नहीं की। पुलिस की लाठी चार्ज होने पर लोग घायल हो गए। खून बहने लगे परन्तु लोगों में जोश की कोई कमी नहीं थी। बंगाल के लिए कहा जाता था कि स्वतंत्रता के लिए बहुत ज़्यादा योगदान नहीं दिया जा रहा है। आज की स्थिति को देखकर उन पर से यह कंलक मिट गया।

2. खुला चैलेंज देकर ऐसी सभा पहले नहीं की गई थी?

उत्तर

पुलिस ने कोई प्रदर्शन न हो इसके लिए कानून निकाला कि कोई जुलूस आदि आयोजित नहीं होगा परन्तु सुभाष बाबू की अध्यक्षता में कौंसिल ने नोटिस निकाला था कि मोनुमेंट के नीचे झंडा फहराया जाएगा और स्वतंत्रता की प्रतिक्षा पढ़ी जाएगी। सभी को इसके लिए आंमत्रित किया गया, खूब प्रचार भी हुआ। सारे कलकत्ते में झंडे फहराए गए थे। सरकार और आम जनता में खुली लड़ाई थी।

भाषा अध्यन

1. निम्नलिखित वाक्यों को सरल वाक्यों में बदलिए – 
I. (क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार गया और वहाँ पर गिरफ़्तार हो गया।
(ख) मैदान में हज़ारों आदमियों की भीड़ होने लगी और लोग टोलियाँ बना-बनाकर मैदान में घूमने लगे।
(ग) सुभाष बाबू को पकड़ लिया गया और गाड़ी में बैठाकर लालबाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।

II . ‘बड़े भाई साहब’ पाठ में से भी दो-दो सरल, संयुक्त और मिश्र वाक्य छाँटकर लिखिए।

उत्तर

I. (क) दो सौ आदमियों का जुलूस लालबाज़ार पहुँच कर गिरफ़्तार हो गया।
(ख) हज़ारों लोगों की भीड़ मैदान में टोलियाँ बनाकर घूमने लगी।
(ग) सुभाष बाबू को पकड़कर गाड़ी में लाल बाज़ार लॉकअप भेज दिया गया।

II. सरल वाक्य − (क) वह स्वभाव से बड़े अध्ययनशील थे।
(ख) उनकी रचनाओं को समझना छोटे मुँह बड़ी बात है।
संयुक्त वाक्य (क) अभिमान किया और दीन दुनिया दोनों से गया।
(ख) मुझे अपने ऊपर कुछ अभिमान हुआ और आत्मसम्मान भी बढ़ा।
मिश्र वाक्य (क) मैंने बहुत चेष्टा की कि इस पहेली का कोई अर्थ निकालूँ लेकिन असफल रहा।
(ख) मैं कह देता कि मुझे अपना अपराध स्वीकार है।

2. नीचे दिए गए शब्दों की संधि कीजिए −

श्रद्धा+आंनद=…………
प्रति+एक=…………
पुरूष+उत्तम=…………
झंडा+उत्सव=…………
पुन:+आवृत्ति=…………
ज्योति:+मय=…………

उत्तर

श्रद्धा+आंनद=श्रद्धानंद
प्रति+एक=प्रत्येक
पुरूष+उत्तम=पुरूषोत्तम
झंडा+उत्सव=झंडोत्सव
पुन:+आवृत्ति=पुनरावृत्ति
ज्योति:+मय=ज्योतिर्मय

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Short Summary- पाठ 11- डायरी का एक पन्ना

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 14- गिरगिट हिंदी हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 14- गिरगिट

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पृष्ठ संख्या: 105
प्रश्न अभ्यास 
मौखिक 
निम्लिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –


1. काठगोदाम के पास भीड़ क्यों इकट्ठी हो गई थी?

उत्तर

ख्यूक्रिन नामक एक सुनार को कुत्ते ने काट लिया। उसने गिरते-पड़ते कुत्ते की टांग को पकड़ा और चीखा “मत जाने दो” उसके चीखने की आवाज़ सुनकर भीड़ इकट्ठी हो गई।

2. उँगली ठीक न होने की स्थिति में ख्यूक्रिन का नुकसान क्यों होता?

उत्तर

ख्यूक्रिन का काम पेचीदा था। बिना उँगुली के कोई काम नहीं हो पाता और इससे उसका नुकसान होता।

3. कुत्ता क्यों किकिया रहा था?

उत्तर

ख्यूक्रिन ने कुत्ते की टांग पकड़ ली थी और वह उसे घसीट रहा था इसलिए कुत्ता किकिया रहा था।

4. बाज़ार के चौराहे पर खामोशी क्यों थी?

उत्तर

बाजार के चौराहे पर ख़ामोशी इसलिए थी क्योंकि उस रास्ते एक भ्रष्ठ पुलिस इंस्पेक्टर ओचुमेलॉव गुजर रहा था जो की जबरन वसूली करने के लिए प्रसिद्ध था।

5. जनरल साहब के बावर्ची ने कुत्ते के बारे में क्या बताया?

उत्तर

बावर्ची ने कुत्ते के बारे में बताया कि कुत्ता जनरल साहब के भाई का है।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए –

1. ख्यूक्रिन ने मुआवज़ा पाने की क्या दलील दी?

उत्तर

ख्यूक्रिन ने मुआवज़ा पाने के लिए स्वयं को कामकाज़ी बताते हुए दलील दी कि उसका काम पेचीदा है। हफ़्ते भर तक वह काम नहीं कर पाएगा, उसका नुकसान होगा। इसलिए कुत्ते के मालिक से उसे हरज़ाना दिलवाया जाए।

2. ख्यूक्रिन ने ओचुमेलॉव को उँगली ऊपर उठाने का क्या कारण बताया?

उत्तर

ख्यूक्रिन ने ओचुमेलॉव को उँगली उठाने का कारण बताया कि वह लकड़ी लेकर अपना कुछ काम निपटाने जा रहा था तब अचानक एक पिल्ले ने आकर उसकी उँगली काट ली।

3. येल्दीरीन ने ख्यूक्रिन को दोषी ठहराते हुए क्या कहा?

उत्तर

येल्दीरीन ने ख्यूक्रिन को दोषी ठहराते हुए कहा कि यह शैतान किस्म का व्यक्ति है। जरूर इसी ने जलती सिगरेट कुत्ते की नाक में  डाली होगी, बिना कारण कुत्ता किसी को काटता नहीं है।

4. ओचुमेलॉव ने जनरल साहब के पास यह संदेश क्यों भिजवाया होगा कि ‘उनसे कहना कि यह मुझे मिला और मैंने इसे वापस उनके पास भेजा है’?

उत्तर

ओचुमेलॉव एक चापलूस किस्म का सिपाही था। उसने यह संदेश भिजवाया ताकि वह जनरल साहब को खुश कर सके, वे उसे एक बेहतर इंस्पेक्टर माने और साथ ही वह यह भी बताना चाहता था कि उसे जनरल साहब और उनके कुत्ते का कितना ख्याल है।

5. भीड़ ख्यूक्रिन पर क्यों हँसने लगती है?

उत्तर

भीड़ ख्यूक्रिन की हालत पर हँसने लगती है क्योंकि वह मुआवजे की बात कर रहा था पर यहाँ इंस्पेक्टर ओचुमेलॉव उसे डरा धमकाकर भगाने का प्रयास  कर रहा था। साथ ही ओचुमेलॉव की पल-पल रंग बदल रहा था।

(ख) निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –

1. किसी कील-वील से उँगली छील ली होगी−ऐसा ओचुमेलॉव ने क्यों कहा?

उत्तर

ओचुमेलॉव चापलूस सिपाही है। जब ख्यूक्रिन की उँगली कटती है तो कुत्ते के मालिक को भला बुरा कहता है, उसे मज़ा चखाने तक की बात करता है परन्तु जैसे ही उसे पता चलता है कुत्ता जनरल साहब या उनके भाई का है। वह एकदम बदल गया और ख्यूक्रिन को ही दोषी ठहराने लगा कि किसी कील-वील से उँगली छील ली होगी और इल्ज़ाम कुत्ते पर लगा रहा है। ऐसा कहकर अपने अफसरों को खुश करने का तथ्य सामने आता है।

2. ओचुमेलॉव के चरित्र की विशेषताओं को अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर

ओचुमेलाव अत्यंत भ्रष्टाचारी, चालाक, स्वार्थी, मौकापरस्त, दोहरे व्यक्तित्व, चापलूस और अस्थिर प्रकृति का व्यक्ति है। वह अवसर वादी भी है। दुकानदारों से जबरन चीज़ें ऐठता है। कर्त्तव्य निष्ठ नहीं है फिर भी लोगों पर रोब डालता है। अपने लाभ के लिए किसी के साथ भी अन्याय कर सकता है। अपने पद का लाभ उठाने के लिए वह ख्यूक्रिन पर दोष लगाता है और कुत्ते को ज़बरदस्ती जनरल साहब के घर भिजवाता है।

पृष्ठ संख्या: 106

3. यह जानने के बाद कि कुत्ता जनरल साहब के भाई का है−ओचुमेलॉव के विचारों में क्या परिवर्तन आया और क्यों?

उत्तर

ओचुमेलॉव पहले तो कुत्ते को मरियल, आवारा, भद्दा कहता है और गोली मारने की बात करता है परन्तु जैसे ही उसे पता चलता है कि यह जनरल साहब के भाई का है – उसके व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। वह उसे वह ‘सुंदर डॉगी’ लगने लगता है। वह उस ‘खूबसूरत नन्हे पिल्ले’ को जनरल साहब तक पहुँचाने के लिए कहने लगा। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह जानता था कि यह खबर जनरल साहब तक पहुँचेगी और वे खुश होंगे।

4. ख्यूक्रिन का यह कहना कि ‘मेरा एक भाई भी पुलिस में है…..।’ समाज की किस वास्तविकता की ओर संकेत करता है?

उत्तर

ख्यूक्रिन का यह कथन कि ‘मेरा एक भाई भी पुलिस में है’ यह बतलाता है कि अगर आपके परिचित किसी उच्चे पद पर कार्यरत हों तो आप अपनी बात प्रभावशाली ढंग से रख सकते हैं। ये समाज में पहले जिसकी लाठी उसकी भैंस वाली लोकक्ति की ओर संकेत करता है। जान-पहचान के बल पर किस तरह लाभ उठाया जा सकता है। इसलिए इस कथन को कहकर इंस्पेक्टर पर वो अपना प्रभाव जमाना चाहता है।

5. इस कहानी का शीर्षक गिरगिट क्यों रखा होगा? क्या आप इस कहानी के लिए कोई अन्य शीर्षक सुझा सकते हैं? अपने शीर्षक का आधार भी स्पष्ट कीजिए?

उत्तर

इस कहानी का शीर्षक गिरगिट रखा गया है क्योंकि गिरगिट समय के अनुसार अपने को बचाने के लिए रंग बदल लेता है। उसी प्रकार इंस्पेक्टर भी मौका परस्त है। पहले तो कुत्ते को भला बुरा कहता है, गोली मारने की बात करता है परन्तु जनरल के भाई के कुत्ते होने का पता लगते ही वह बदल जाता है। वह मरियल कुत्ता सुन्दर डॉगी हो जाता है और ख्यूक्रिन को बुरा भला कहने लगता है।
इसका नाम चापलूसी आदि भी रखा जा सकता है।

6. गिरगिट कहानी के माध्यम से समाज की किन विसंगतियों पर व्यंग्य किया गया है? क्या आप ऐसी विसगतियाँ अपने समाज में भी देखते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

गिरगिट कहानी के माध्यम से समाज की विसंगतियों जैसे भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, भाई-भतीजावाद, अवसरवादिता आदि पर व्यंग्य किया गया है। लोग सच्चाई का साथ ना देकर उच्चे पद पर आसीन लोगों  चापलूसी करते हैं। पूरी शासन व्यवस्था पक्षपात पर टिकी है। आदर्शों पर चलने वाला व्यक्ति मुसीबतें झेलता है।ऐसी विसगतियाँ हम अपने समाज में भी देखते हैं। समचार पत्रों और न्यूज़ चैनलों में इसी तरह की खबरें छायी रहती हैं जहाँ लोग अवसरवादिता को सच्चाई से ज्यादा महत्व देते हैं।

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –

1. उसकी आँसुओं से सनी आँखों में संकट और आतंक की गहरी छाप थी।

उत्तर

ख्यूक्रिन ने कुत्ते को बुरी तरह पिटा और घसीटा था जिससे वह बहुत डरा और घबराया हुआ था। उसकी आँखों आंसू टपक रहे थे जिससे साफ़ पता चलता था की वह ख्यूक्रिन का आतंक उसमे समाया हुआ है।

2. कानून सम्मत तो यही है….. कि सब लोग अब बराबर हैं।
उत्तर 
ख्यूक्रिन एक आम आदमी था। जब यह पता चला कि यह कुत्ता जनरल का है तो वह कानून की दुहाई देने लगा कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए। गरीब और अमीर सबके लिए बराबर होना चाहिए तथा सबको न्याय मिलना चाहिए।

3. हुज़ूर ! यह तो जनशांति भंग हो जाने जैसा कुछ दिख रहा है।

उत्तर

बाज़ार में सन्नाटा छाया हुआ था। ख्यूक्रिन के चीखने पर भीड़ इकट्ठी हो गई। ऐसा लग रहा था मानो कोई दंगा हो गया है। इस स्थिति को निपटाने के लिए चापलूस सिपाही ने इंस्पेक्टर से कहा कि जैसे जनशांति भंग होती है उसी तरह उस समय शांति भंग होती दिखाई दे रही थी।

भाषा अध्यन

1. नीचे दिए गए वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए −(क) माँ ने पूछा बच्चों कहाँ जा रहे हो
(ख) घर के बाहर सारा सामान बिखरा पड़ा था
(ग) हाय राम यह क्या हो गया
(घ) रीना सुहेल कविता और शेखर खेल रहे थे(ङ) सिपाही ने कहा ठहर तुझे अभी मजा चखाता हूँ

उत्तर

(क) माँ ने पूछा “बच्चों कहाँ जा रहे हो।”
(ख) घर के बाहर सारा सामान बिखरा पड़ा था।
(ग) हाय राम! यह क्या हो गया।
(घ) रीना, सुहेल, कविता और शेखर खेल रहे थे।
(ङ) सिपाही ने कहा ‘ठहर तुझे अभी मज़ा चखाता हूँ।’

2. ही, भी, तो, तक आदि निपातों का प्रयोग करते हुए पाँच वाक्य बनाइए।

उत्तर

ही − तुम ही सिर्फ़ वहाँ जाना।
भी − आप भी हमारे साथ चलिए।
तो − मैनें तो पहले ही इसकी सूचना दे दी थी।
तक − रात तक वह वहाँ रहा।

3. पाठ में आए मुहावरों में से पाँच मुहावरे छाँटकर उनका वाक्य में प्रयोग कीजिए।

उत्तर

1. ज़मीन फाड़कर निकल आना − अभी तक वहाँ कोई नहीं था। अचानक सब लोग इकट्ठे हो गए मानो ज़मीन फाड़कर निकल आए हो।
2. घेरकर खड़े होना − अभिनेता को लोग घेर कर खड़े हो गए।
3. ज़िंदगी नरक होना − उसका सब कुछ खत्म हो गया और उसकी ज़िंदगी नरक हो गई।
4. मत्थे मढ़ देना − सिपाही ने सारा दोष मोहन के मत्थे मढ़ दिया।
5. मज़ा चखाना − वह बहुत अकड़ रहा था सबने उसे अच्छा मज़ा चखाया।

पृष्ठ संख्या: 107

4. नीचे दिए गए शब्दों में उचित उपसर्ग लगाकर शब्द बनाइए −

(क)……………..+भाव=……………..
(ख)……………..+पसंद=……………..
(ग)……………..+धारण=……………..
(घ)……………..+उपस्थित=……………..
(ङ)……………..+लायक=……………..
(च)……………..+विश्वास=……………..
(छ)……………..+परवाह=……………..
(ज)……………..+कारण=……………..

उत्तर

(क)दुर्+भाव=दुर्भाव
(ख)ना+पसंद=नापसंद
(ग)सा+घारण=साधारण
(घ)अनु+उपस्थित=अनुपस्थित
(ङ)ना+लायक=नालायक
(च)+विश्वास=अविश्वास
(छ)ला+परवाह=लापरवाह
(ज)+कारण=अकारण

5. नीचे दिए गए शब्दों में उचित प्रत्यय लगाकर शब्द बनाइए −

मदद+……………..=……………..
बुद्धि+……………..=……………..
गंभीर+……………..=……………..
सभ्य+……………..=……………..
ठंड+……………..=……………..
प्रदर्शन+……………..=……………..

उत्तर

मदद+गार=मद्दगार
बुद्धि+मान=बुद्धिमान
गंभीर+ता=गंभीरता
सभ्य+ता=सभ्यता
ठंड+=ठंडा
प्रदर्शन+कारी=प्रदर्शनकारी

6. नीचे दिए गए वाक्यों के रेखांकित पदबंध का प्रकार बताइए −
(क) दुकानों में ऊँघते हुए चेहरे बाहर झाँके।
(ख) लाल बालोंवाला एक सिपाही चला आ रहा था।
(ग) यह ख्यूक्रिन हमेशा कोई न कोई शरारत करता रहता है।
(घ) एक कुत्ता तीन टाँगों के बल रेंगता चला आ रहा है।

उत्तर

(क)दुकानों में ऊँघते हुए चेहरे बाहर झाँके।संज्ञा पदबंध
(ख)लाल बालोंवाला एक सिपाही चला आ रहा था।विशेषण पदबंध
(ग)यह ख्यूक्रिन हमेशा कोई न कोई शरारात करता रहता है।संज्ञा पदबंध
(घ)एक कुत्ता तीन टाँगों के बल रेंगता चला आ रहा है।क्रिया पदबंध

7. आपके मोहल्ले में लावारिस/आवारा कुत्तों की संख्या बहुत ज़्यादा हो गई है जिससे आने-जाने वाले लोगों को असुविधा होती है। अत: लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नगर निगम अधिकारी को एक पत्र लिखिए।

उत्तर 

पताः ………………..
दिनांकः …………….

सेवा में,
नगर निगम अधिकारी,
क.ख.ग. ।
विषयः  आवारा कुत्तों के कारण उपजी समस्या को दर्शाने हेतु पत्र।
माननीय महोदय,
सविनय निवेदन यह है कि मैं आपके क्षेत्र क.ख.ग. मोहल्ले का निवासी हूँ।  हमारे इस क्षेत्र में आवारा कुत्तों की आबादी बहुत बढ़ गई है। ये यहाँ-वहाँ समूह बनाकर घूमते रहते हैं। आने-जाने वाले लोग इनके कारण बहुत परेशान है। ये राह चलते लोगों को काट लेते हैं या उन पर अचानक भौंकने लगते है। इस कारण से कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यहाँ के लोगों का जीवन इनके कारण अस्त-व्यस्त हो गया है। आए दिन कुत्तों द्वारा काटने के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। हमने इस विषय में कई बार आपके विभाग को सूचित किया है। परन्तु उनकी ओर से इस विषय पर सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। अतः हारकर हम आपको पत्र लिखकर रहे हैं।
आपसे विनम्र अनुरोध है कि उक्त समस्या के निदान के लिए तुरंत उचित कदम उठाने की कृपा करें। हम सारे क्षेत्रवासी आपके आभारी रहेंगे।
धन्यवाद
भवदीय
क.ख.ग.

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Short Summary- पाठ 14- गिरगिट

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