Chapter-16 धातुरूपाणि (Dhaturupani) Quick Revision Notes | Class 9th Sanskrit (Sharada) Summary

📌 परिशिष्टम् ५ · कक्षा ९ संस्कृत

धातुरूपाणि — Chapter Summary

Handwritten-style Quick Notes ✍️ (पञ्चलकार + णिच् + विशिष्ट आत्मनेपदी धातु)

1️⃣ णिच्-प्रत्यय (प्रेरणार्थक धातु)

जब किसी धातु से “करवाना/प्रेरित करना” का भाव लाना हो तो णिच् प्रत्यय जोड़ते हैं। इससे धातु में गुण/वृद्धि होकर नई प्रेरणार्थक धातु बनती है।

पठ् + णिच् = पठि (पाठयति, पाठयसि, पाठयामि…)

याद रखें ये प्रेरणार्थक रूप: लेखयति (लिखवाना), खादयति (खिलाना), हासयति, चालयति, स्मारयति, पाययति, क्रीडयति, नाययति, दर्शयति, गमयति, भोजयति, दापयति, श्रावयति, ज्ञापयति, गणयति आदि।

2️⃣ पाँच लकार (पञ्चलकार) — पठ् धातु (परस्मैपदी)

लकारअर्थप्र.पु. ए.व.पहचान
लट्वर्तमानकालपठतिअभी हो रहा है
लृट्भविष्यत्कालपठिष्यति“स्य” जुड़ता है
लङ्भूतकाल (सामान्य)अपठत्आगे “अ” (अडागम) लगता है
लोट्आज्ञा/अनुरोधपठतु“करो/करे” का भाव
विधिलिङ्चाहिए/विधि/उचितपठेत्“चाहिए” जैसा भाव

प्रत्येक लकार में तीनों पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और तीनों वचन (एक, द्वि, बहु) में अलग-अलग रूप बनते हैं — कुल 9 रूप प्रति लकार।

3️⃣ आत्मनेपदी धातु — वृधु व लभ् (लट्-लकार)

पुरुषवृधु (बढ़ना)लभ् (पाना)
प्रथमपुरुषः (ए.व.)वर्धतेलभते
मध्यमपुरुषः (ए.व.)वर्धसेलभसे
उत्तमपुरुषः (ए.व.)वर्धेलभे
पहचान: आत्मनेपदी धातुओं के अंत में ते/से/ए आता है (परस्मैपदी में ति/सि/मि)।

एवमेव — भाषते, वर्तते, कम्पते, स्पर्धते, सेवते, स्पन्दते, यतते, रोचते, एधते, मोदते, वन्दते, रमते, शोभते, सहते, ईक्षते, शिक्षते

4️⃣ विशिष्ट आत्मनेपदी धातु — शीङ् (सोना) व भुज् (खाना)

शीङ् (लट्)
शेते, शयाते, शेरते
शेषे, शयाथे, शेध्वे
शये, शेवहे, शेमहे
भुज् (लट्)
भुङ्क्ते, भुञ्जाते, भुञ्जते
भुङ्क्षे, भुञ्जाथे, भुङ्ग्ध्वे
भुञ्जे, भुञ्जवहे, भुञ्जमहे

यह दोनों धातु सभी 5 लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्) में अभ्यास के लिए दी गई हैं — इनका पैटर्न याद रखें, प्रश्नपत्र में इन्हीं से रूप पूछे जाते हैं।

Quick Trick:
• परस्मैपद पहचान: ति, तः, न्ति / सि, थः, थ / मि, वः, मः
• आत्मनेपद पहचान: ते, एते, न्ते / से, एथे, ध्वे / ए, वहे, महे
• लङ् (भूतकाल) में हमेशा शुरुआत में (अडागम) जुड़ता है — अपठत्, अवर्धत, अलभत

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