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परिशिष्टम् ५ · कक्षा ९ संस्कृत
धातुरूपाणि — Chapter Summary
Handwritten-style Quick Notes ✍️ (पञ्चलकार + णिच् + विशिष्ट आत्मनेपदी धातु)
1️⃣ णिच्-प्रत्यय (प्रेरणार्थक धातु)
जब किसी धातु से “करवाना/प्रेरित करना” का भाव लाना हो तो णिच् प्रत्यय जोड़ते हैं। इससे धातु में गुण/वृद्धि होकर नई प्रेरणार्थक धातु बनती है।
पठ् + णिच् = पठि (पाठयति, पाठयसि, पाठयामि…)
याद रखें ये प्रेरणार्थक रूप: लेखयति (लिखवाना), खादयति (खिलाना), हासयति, चालयति, स्मारयति, पाययति, क्रीडयति, नाययति, दर्शयति, गमयति, भोजयति, दापयति, श्रावयति, ज्ञापयति, गणयति आदि।
2️⃣ पाँच लकार (पञ्चलकार) — पठ् धातु (परस्मैपदी)
| लकार | अर्थ | प्र.पु. ए.व. | पहचान |
|---|---|---|---|
| लट् | वर्तमानकाल | पठति | अभी हो रहा है |
| लृट् | भविष्यत्काल | पठिष्यति | “स्य” जुड़ता है |
| लङ् | भूतकाल (सामान्य) | अपठत् | आगे “अ” (अडागम) लगता है |
| लोट् | आज्ञा/अनुरोध | पठतु | “करो/करे” का भाव |
| विधिलिङ् | चाहिए/विधि/उचित | पठेत् | “चाहिए” जैसा भाव |
प्रत्येक लकार में तीनों पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और तीनों वचन (एक, द्वि, बहु) में अलग-अलग रूप बनते हैं — कुल 9 रूप प्रति लकार।
3️⃣ आत्मनेपदी धातु — वृधु व लभ् (लट्-लकार)
| पुरुष | वृधु (बढ़ना) | लभ् (पाना) |
|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः (ए.व.) | वर्धते | लभते |
| मध्यमपुरुषः (ए.व.) | वर्धसे | लभसे |
| उत्तमपुरुषः (ए.व.) | वर्धे | लभे |
पहचान: आत्मनेपदी धातुओं के अंत में ते/से/ए आता है (परस्मैपदी में ति/सि/मि)।
एवमेव — भाषते, वर्तते, कम्पते, स्पर्धते, सेवते, स्पन्दते, यतते, रोचते, एधते, मोदते, वन्दते, रमते, शोभते, सहते, ईक्षते, शिक्षते
4️⃣ विशिष्ट आत्मनेपदी धातु — शीङ् (सोना) व भुज् (खाना)
शीङ् (लट्)
शेते, शयाते, शेरते
शेषे, शयाथे, शेध्वे
शये, शेवहे, शेमहे
शेते, शयाते, शेरते
शेषे, शयाथे, शेध्वे
शये, शेवहे, शेमहे
भुज् (लट्)
भुङ्क्ते, भुञ्जाते, भुञ्जते
भुङ्क्षे, भुञ्जाथे, भुङ्ग्ध्वे
भुञ्जे, भुञ्जवहे, भुञ्जमहे
भुङ्क्ते, भुञ्जाते, भुञ्जते
भुङ्क्षे, भुञ्जाथे, भुङ्ग्ध्वे
भुञ्जे, भुञ्जवहे, भुञ्जमहे
यह दोनों धातु सभी 5 लकारों (लट्, लृट्, लङ्, लोट्, विधिलिङ्) में अभ्यास के लिए दी गई हैं — इनका पैटर्न याद रखें, प्रश्नपत्र में इन्हीं से रूप पूछे जाते हैं।
Quick Trick:
• परस्मैपद पहचान: ति, तः, न्ति / सि, थः, थ / मि, वः, मः
• आत्मनेपद पहचान: ते, एते, न्ते / से, एथे, ध्वे / ए, वहे, महे
• लङ् (भूतकाल) में हमेशा शुरुआत में अ (अडागम) जुड़ता है — अपठत्, अवर्धत, अलभत
• परस्मैपद पहचान: ति, तः, न्ति / सि, थः, थ / मि, वः, मः
• आत्मनेपद पहचान: ते, एते, न्ते / से, एथे, ध्वे / ए, वहे, महे
• लङ् (भूतकाल) में हमेशा शुरुआत में अ (अडागम) जुड़ता है — अपठत्, अवर्धत, अलभत
