पाठ 6: गिरिधर कविराय की कुंडलिया (Giridhar Kaviray Ki Kundaliya) Class 8th Hindi (Malhar) NCERT Solution

गिरिधर कविराय की कुंडलिया — प्रश्न-उत्तर
06 ✦ कक्षा 7 · मल्हार · अध्याय 6

गिरिधर कविराय की कुंडलिया

पूरे पाठ के सभी प्रश्नों के विस्तृत हल — मूल कविता, अर्थ, और हर गतिविधि के उत्तर।

बच्चे और शिक्षिका
गिरिधर कविराय
✍ कवि से परिचय

अठारहवीं सदी में जन्मे गिरिधर कविराय अपनी लोकप्रचलित कुंडलियों के लिए याद किए जाते हैं। उनकी रचनाओं में ऐसे अनेक नीतिपरक पद मिलते हैं जिन्हें लोग कहावत की तरह प्रयोग करते हैं — जैसे “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय” या “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” वे लोकनीति और घर-गृहस्थी के साधारण व्यवहार की बातें सीधे और सरल शब्दों में कहने के लिए जाने जाते हैं।

📜 मूल कुंडलिया एवं भावार्थ

कुंडलिया 1
बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।
काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥
जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै।
खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥
कह गिरिधर कविराय दुःख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥
भावार्थ: जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई काम करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। वह अपना काम बिगाड़ लेता है और संसार में उसकी हँसी होती है। हँसी होने पर मन में चैन नहीं रहता; अच्छा खान-पान, सम्मान और राग-रंग भी उसे अच्छे नहीं लगते। गिरिधर कविराय कहते हैं — यह दुख टालने पर भी नहीं टलता, बिना विचारे किया गया काम मन में सदा खटकता रहता है।
कुंडलिया 2
बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।
जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ॥
ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै।
दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥
कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।
आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती॥
भावार्थ: बीती हुई बातों (अतीत के दुखों-गलतियों) को भुलाकर आगे यानी भविष्य की सुध लेनी चाहिए। जो काम सहज रूप से बन पड़े, उसी में मन लगाना चाहिए। ऐसा करने पर न कोई दुर्जन हँसेगा और न मन में कोई खटक/दोष रहेगा। गिरिधर कविराय कहते हैं — मन में यह विश्वास रखो कि ‘बीती सो बीती’ समझकर आगे बढ़ने से ही भविष्य में सुख मिलेगा।

पाठ से

Intext — पाठ के भीतर दी गई सभी गतिविधियाँ
मेरी समझ से

(क) पाठ के आधार पर सही उत्तर के सामने तारा () लगाया गया है। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं।

(1) “बिना बिचारे” काम करने के क्या परिणाम होते हैं?
दूसरों से प्रशंसा मिलती है।
मन में शांति बनी रहती है।
अपना काम बिगड़ जाता है।
खान-पान सम्मान मिलता है।
क्यों? “काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय” — बिना सोचे किए काम से अपना काम बिगड़ता है, पछतावा होता है और हँसी होती है। शांति या प्रशंसा नहीं मिलती।
(2) “चित्त में चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?
प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुख
बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता
खान-पान, सम्मान और राग-रंग का अभाव
दुनिया द्वारा की जाने वाली निंदा और उपहास
क्यों? “जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै” तथा “दुःख कछु टरत न टारे … खटकत है जिय माहिं” — उपहास, बिना विचारे कार्य की असफलता, और न टलने वाला दुख — ये तीनों कारण मन की शांति छीन लेते हैं। यहाँ खान-पान/सम्मान का अभाव नहीं है, बल्कि वे अच्छे नहीं लगते — इसलिए वह विकल्प सही नहीं है।
(3) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ” पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है?
भविष्य की सफलता के लिए अतीत की गलतियों से सीखने की
अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की
अतीत और भविष्य दोनों घटनाओं को समान रूप से याद रखने की
अतीत और भविष्य दोनों को भूलकर केवल वर्तमान में जीने की
क्यों? “बीती” = अतीत को भुला दो, और “आगे की सुधि लेइ” = भविष्य की चिंता करो। अतः सलाह है — बीती असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देना।
(4) “जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ” पंक्ति का क्या अर्थ है?
हमें कठिनाइयों और चुनौतियों से बचना चाहिए।
हमें आराम की तलाश करने में मन लगाना चाहिए।
हमें असंभव और कठिन कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए।
क्यों? “सहज में” का अर्थ है — जो काम स्वाभाविक/सरल रूप से बन पड़े। कवि कहते हैं कि उसी में मन लगाना चाहिए, अर्थात् सहज-सरल जीवन जीना श्रेष्ठ है।

(ख) अलग-अलग उत्तर क्यों चुने?

यह चर्चा का प्रश्न है। अपने मित्रों के साथ बात कीजिए कि आपने वही उत्तर क्यों चुना — कविता की किस पंक्ति ने आपको वह उत्तर सुझाया। इस पर विचार करने से पता चलता है कि एक ही कविता को अलग-अलग लोग अपने अनुभव के अनुसार थोड़ा भिन्न भी समझ सकते हैं, और चर्चा से हमारी समझ और गहरी होती है।

पंक्तियों पर चर्चा
(क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥”
बिना बिचारे — जिस डाल पर बैठा है उसी को काटना
“बिना बिचारे” किया गया काम — जिस डाल पर बैठा है उसी को काट रहा है।

इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई कार्य करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। ऐसा व्यक्ति अपना काम तो बिगाड़ ही लेता है, साथ ही संसार में उसका मज़ाक भी उड़ता है। संदेश यह है कि कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले उसके परिणामों पर भली-भाँति विचार कर लेना चाहिए। (जैसे चित्र में व्यक्ति उसी डाल को काट रहा है जिस पर वह स्वयं बैठा है — यही “बिना बिचारे” किया गया काम है।)

(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ। जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ॥”

इनका अर्थ है कि बीती हुई बातों को भुलाकर आगे (भविष्य) की चिंता करनी चाहिए। जो काम सहजता से बन पड़े, उसी में मन लगाना चाहिए। अनावश्यक रूप से कठिन या असंभव कार्यों के पीछे भागने के बजाय सहज-सरल जीवन जीना ही अच्छा है, क्योंकि इसी से मन शांत रहता है और भविष्य सुखमय बनता है।

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 के सही अर्थ से मिलान:

1. जग में होत हँसाय … खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥
(2) बिना विचार के किए गए कार्य से मन अशांत रहता है; अच्छा खान-पान, सम्मान भी सुख नहीं दे पाते।
2. कह गिरिधर कविराय दुख कछु टरत न टारे … खटकत है जिय माहिं …॥
(1) बिना विचार किया कार्य लंबे समय तक मन में खटकता रहता है, उसकी पीड़ा से छुटकारा कठिन है।
3. ताही में चित देइ … दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥
(4) ऐसे कार्य कीजिए कि किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले और मन में दोष/अपराधबोध न हो।
4. कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती … आगे को सुख होइ …॥
(3) भविष्य की खुशी समझते हुए अतीत के दुखों को भुलाकर आगे बढ़ने पर मन को विश्वास दिलाना चाहिए।
संक्षेप में मिलान — 1 → 2,   2 → 1,   3 → 4,   4 → 3
सोच-विचार के लिए
(क) कविता में बिना विचार किए कार्य करने के क्या नुकसान बताए गए हैं?
  • बाद में पछताना पड़ता है।
  • अपना काम बिगड़ जाता है।
  • संसार में हँसी / मज़ाक होता है।
  • मन में चैन (शांति) नहीं रहता।
  • अच्छा खान-पान, सम्मान और राग-रंग भी अच्छा नहीं लगता।
  • यह दुख टालने पर भी नहीं टलता — मन में हमेशा खटकता रहता है।
(ख) सैकड़ों साल पहले कही ये बातें क्या आज भी उपयोगी हैं? उदाहरण देकर समझाइए।

हाँ, ये बातें आज भी उतनी ही उपयोगी हैं। बिना सोचे-समझे किया गया कार्य हर युग में हानि पहुँचाता है। उदाहरण:

  • बिना तैयारी या बिना प्रश्न पढ़े परीक्षा देने पर असफलता मिलती है।
  • बिना जाँचे किसी अनजान लिंक/संदेश पर भरोसा करके ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाना।
  • सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि किए कोई खबर आगे भेज देना — भ्रम फैलता है।

अतः “सोच-समझकर काम करो” की यह सीख आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है।

(ग) “खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै” — रेखांकित शब्दों के अर्थ व एक-एक उदाहरण।
शब्दअर्थउदाहरण वाक्य
सन्मान (सम्मान)आदर, इज़्ज़त, प्रतिष्ठाहमें बड़ों का सन्मान करना चाहिए।
मनहिंमन को / मन मेंयह बात उसके मनहिं (मन में) नहीं भाती।
राग-रंग (बोनस)आमोद-प्रमोद, मनोरंजनत्योहार पर सब राग-रंग में डूबे थे।
अनुमान और कल्पना से
(क) कल्पना कीजिए कि आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे बड़ा निर्णय लिया — रोचक कहानी।

नमूना कहानी: मेरे मित्र रोहन को किसी ने फोन पर बताया कि एक विशेष स्कीम में पैसा लगाओ तो एक महीने में दुगना हो जाएगा। रोहन ने न घरवालों से पूछा, न किसी समझदार से सलाह ली, और जल्दबाजी में अपनी सारी बचत उसमें लगा दी। कुछ ही दिनों में वह वेबसाइट बंद हो गई और उसके सारे पैसे डूब गए। बाद में उसे बहुत पछताना पड़ा — ठीक वैसे ही जैसे कुंडलिया कहती है “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” प्रभाव: रोहन ने ठान लिया कि अब कोई भी बड़ा निर्णय सोच-समझकर और बड़ों की सलाह लेकर ही लेगा।

(ख) “बीती ताहि बिसारि दे…” कविता यदि इनके लिए लिखी गई हो — इनकी समस्याएँ क्या होंगी? कविता कैसे प्रेरित करेगी?
परीक्षा से जुड़े बच्चे
के लिएसंभावित समस्याकविता कैसे प्रेरित करेगी
आपपिछली परीक्षा में कम अंक आने का दुखबीती बात भूलकर अगली पढ़ाई पर ध्यान दो।
सहपाठीदोस्त से झगड़ा/नाराज़गीपुरानी कड़वाहट भुलाकर आगे बढ़ो, मेल कर लो।
परिजनव्यापार/काम में हुए नुकसान का दुखबीता समय भुलाकर नए सिरे से मेहनत करो।
शिक्षककिसी वर्ष का परिणाम अच्छा न रहनाअगली कक्षा को बेहतर बनाने पर ध्यान दें।
पक्षीघोंसला तूफ़ान में उजड़ जानादुख भुलाकर नया घोंसला बनाओ।
पशुपुराने स्थान/साथी का बिछोहनई जगह में सहजता से रम जाओ।

सभी को यह कविता ‘बीती सो बीती’ समझकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।

(ग) जो व्यक्ति हमेशा बीती बातों में खोया रहता है, उसे समझाने के लिए आप क्या-क्या कहेंगे?
  • जो बीत गया उसे बदला नहीं जा सकता, इसलिए उसमें उलझे रहना व्यर्थ है।
  • बीती बातें बार-बार याद करने से केवल दुख बढ़ता है और वर्तमान भी बिगड़ता है।
  • अतीत की गलती से सीख लो, पर उसका बोझ मत ढोओ।
  • भविष्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दो — तभी आगे सुख मिलेगा: “आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती।”
शब्द से जुड़े शब्द

कुंडलियों में से ‘चित्त’ या ‘मन’ से जुड़े शब्द चुनकर रिक्त स्थानों में भरे गए हैं (‘चैन’ पहले से दिया गया था):

चित्त चैन जिय
मन परतीती खता चित (देइ)
मन (चित्त)
ये सभी शब्द दोनों कुंडलियों से लिए गए हैं — जैसे “चित्त में चैन न पावै”, “खटकत है जिय माहिं”, “करु मन परतीती”, “चित्त में खता न पावै”, “ताही में चित देइ”।
कविता की रचना

(क) दोनों कुंडलियों की विशेषताओं की सूची

जो विशेषताएँ दोनों कुंडलियों में हैंजो किसी एक में हैं
• छह-छह पंक्तियों का कुंडलिया छंद है।
• जिस शब्द से आरंभ, उसी से अंत (बिना बिचारे…बिना बिचारे; बीती…बीती सो बीती)।
• एक पंक्ति का अंत अगली पंक्ति के आरंभ में दोहराया गया (श्रृंखला/पुनरुक्ति)।
• कवि (गिरिधर कविराय) के नाम का उल्लेख।
• लय व तुक — दोनों को बोलने में बराबर समय लगता है।
• संवाद/उपदेश शैली — मानो कोई हमसे बात कर रहा हो।
पहली में एक ही वर्ण से आरंभ वाले शब्द अधिक (खान-पान, राग-रंग) — अनुप्रास।

दूसरी में परस्पर विपरीत विचार साथ आए हैं (बीती × आगे = अतीत × भविष्य)।

(ख) कविता की विशेषताओं का पंक्तियों से मिलान

1. पंक्ति के अंतिम शब्दों की ध्वनि आपस में मिलती-जुलती है (तुक)।
(2) ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै … चित्त में खता न पावै
2. कवि के नाम का उल्लेख किया गया है।
(1) कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती॥
3. एक-दूसरे के विपरीत विचार एक साथ आए हैं।
(4) बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ। (अतीत × भविष्य)
4. एक ही वर्ण से आरंभ वाले अनेक शब्द एक ही पंक्ति में (अनुप्रास)।
(3) बिना बिचारे जो करै सो पाछे छिताय।
संक्षेप में मिलान — 1 → 2,   2 → 1,   3 → 4,   4 → 3
काल से जुड़े शब्द

“बीती” भूतकाल को, “आगे” भविष्य को और “आज” जैसे शब्द वर्तमान को बताते हैं।

(क) दिए गए शब्दों से तीनों काल के तीन-तीन वाक्य

भूतकालवर्तमान कालभविष्य काल
कल मैंने गृहकार्य पूरा किया।आज मैं विद्यालय जा रहा हूँ।कल हम पिकनिक पर जाएँगे।
परसों हम मेले में गए थे।अभी-अभी वर्षा हो रही है।परसों परीक्षा होगी।
मैं पहले गाँव में रहता था।अब मुझे भूख लग रही है।अगले साल मैं नई कक्षा में जाऊँगा।

(ख) काल बताने वाले शब्द रेखांकित

ऊपर पीले रंग में चिह्नित शब्द ही बताते हैं कि कार्य किस काल में हुआ — भूतकाल: कल, परसों, पहले; वर्तमान: आज, अभी-अभी, अब; भविष्य: कल, परसों, अगले साल। ध्यान दें कि ‘कल’ और ‘परसों’ शब्द भूत और भविष्य दोनों में प्रयोग हो सकते हैं — अर्थ वाक्य की क्रिया से स्पष्ट होता है।

पाठ से आगे

Exercise — पाठ से आगे की सभी गतिविधियाँ व अभ्यास
आपकी बात
(क) “खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे” — बिना सोचे किए कार्य मन में चुभते रहते हैं। क्या आपने ऐसा अनुभव किया है?

नमूना उत्तर: हाँ। एक बार मैंने गुस्से में अपने छोटे भाई से कठोर शब्द कह दिए। जब वह उदास हो गया तो मुझे बहुत बुरा लगा। वह बात कई दिनों तक मेरे मन में खटकती रही, जब तक मैंने उससे माफ़ी नहीं माँग ली। तब समझ आया कि बिना सोचे कही/की गई बात सचमुच काँटे की तरह मन में चुभती रहती है।

(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ” — अतीत को भूलना और भविष्य पर ध्यान देना। क्या आप सहमत हैं? क्यों?

हाँ, मैं सहमत हूँ। अतीत के दुखों में उलझे रहने से न अतीत बदलता है और न वर्तमान/भविष्य सँवरता है। उदाहरण: पिछली परीक्षा में कम अंक आने पर शोक मनाने के बजाय अगली परीक्षा की तैयारी में जुट जाना बुद्धिमानी है — तभी सफलता मिलेगी। हाँ, अतीत की गलतियों से सीख लेना ज़रूरी है; ‘भूलने’ का अर्थ है दुख का बोझ छोड़ना, अनुभव नहीं।

(ग) दोनों कुंडलियों के आधार पर आप अपने जीवन में कौन-कौन से बदलाव लाना चाहेंगे?
  • कोई भी काम सोच-समझकर करूँगा, जल्दबाजी नहीं।
  • बीती असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान दूँगा।
  • जो काम सहजता से बन सके उसी में मन लगाऊँगा, अकारण कठिन के पीछे नहीं भागूँगा।
  • ऐसा आचरण करूँगा कि किसी को मुझ पर हँसने या उँगली उठाने का मौका न मिले।
(घ) “खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै” — खान-पान, सम्मान और राग-रंग में से आप किसे सबसे आवश्यक मानते हैं? कारण सहित।

नमूना विचार: मेरे मत में सम्मान सबसे आवश्यक है। खान-पान और राग-रंग शरीर तथा मन को क्षणिक सुख देते हैं, जबकि सम्मान व्यक्ति की पहचान और आत्म-गौरव से जुड़ा है। सम्मान खो जाने पर अच्छे खान-पान और मनोरंजन में भी मन नहीं लगता — यही कविता कहती है। (यह व्यक्तिगत उत्तर है; आप कारण सहित कोई भी विकल्प चुन सकते हैं।)

हँसी — “जग में होत हँसाय”
(क) कुछ ऐसी स्थितियों की सूची जब किसी को आप पर या आपको किसी पर हँसी आई।
  • कक्षा में उत्तर देते समय गलत बोल जाने पर सब हँसे।
  • खेलते समय अचानक गिर जाने पर।
  • नई-नई साइकिल सीखते समय बार-बार गिरना।
  • किसी दोस्त का कपड़े उल्टे पहन लेना।
  • किसी का मज़ाकिया अंदाज़ में बात करना।
(ख) ऐसी दोनों स्थितियों में आपको और दूसरों को कैसा लगता है?

जब हम पर हँसी हो: बुरा लगता है, शर्मिंदगी व लज्जा होती है, कभी गुस्सा भी आता है और आत्मविश्वास घट जाता है।

जब हम किसी पर हँसें: उस समय मज़ा आता है, पर बाद में सोचने पर लगता है कि सामने वाले को दुख पहुँचा होगा — इसलिए पछतावा भी हो सकता है।

(ग) कोई आपकी भूल पर हँस रहा हो — आप क्या कहेंगे/करेंगे ताकि उसे एहसास हो कि हँसना ठीक नहीं?
  • शांति से कहूँगा कि गलती हर किसी से होती है; हँसने के बजाय सही रास्ता बताना बेहतर है।
  • पूछूँगा — “यदि यही भूल तुमसे होती और मैं हँसता, तो तुम्हें कैसा लगता?”
  • समझाऊँगा कि किसी की भूल पर हँसना नहीं, बल्कि उसकी मदद करनी चाहिए।
सोच-समझकर — “बिना बिचारे जो करै…”
ठग द्वारा भेजा गया संदेश
(क) कुछ ऐसी स्थितियाँ जहाँ जल्दबाजी में निर्णय लेना या कार्य करना हानिकारक हो सकता है।
  • सड़क पार करते समय बिना देखे दौड़ना — दुर्घटना।
  • बिना जाँचे किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना — ठगी/वायरस।
  • गुस्से में जल्दबाजी में कोई कठोर निर्णय लेना — रिश्ते बिगड़ना।
  • प्रश्न ठीक से पढ़े बिना उत्तर लिखना — गलत उत्तर।
  • बिना हेलमेट जल्दी में बाइक चलाना — चोट व चालान।
(ख) आपको या आपके परिजन को नीचे दिए संदेश मिलें तो आप क्या करेंगे?
#संदेशआप करें (सही कदम)
1आपका बैंक खाता बंद होने वाला है।O.T.P. किसी को न दें। तुरंत कॉल काट दें और अपने बैंक से संपर्क करें।
2बधाई! आपने 10 लाख की लॉटरी जीती, सत्यापन हेतु ₹5000 भेजें।संदिग्ध वेबसाइट पर कोई भुगतान न करें। इसे साइबर क्राइम सेल में रिपोर्ट करें।
3गलती से ₹1000 रिफंड भेजा है, कृपया वापस भेजें।किसी अनजान को पैसा न भेजें। बैंक ऐप में लेन-देन जाँचें; पैसा कटा हो तो बैंक को सूचित करें।
4सिम बंद होने वाला है, KYC हेतु आधार-पैन की फोटो भेजें।ऐसे कॉल तुरंत काटें। बैंक से सीधे संपर्क करें; फोन पर आधार/पैन/निजी जानकारी साझा न करें।
570% तक छूट, ऑफर खत्म होने से पहले यहाँ पेमेंट करें।संदिग्ध छूट/मुफ्त के झाँसे में न फँसें। ऐसे लिंक पर क्लिक न करें।
6“मैं तुम्हारा चाचा हूँ, ट्रेन में फँसा हूँ, ₹5000 भेजो।”व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करें; तुरंत पैसे न भेजें; परिवार के अन्य सदस्यों से बात करें।
7यह ऐप डाउनलोड करें और ₹1000 कैशबैक पाएँ।अनजानी वेबसाइट से ऐप डाउनलोड न करें; रेटिंग जाँचें; संदिग्ध ऐप हटा दें।
8मुफ्त गिफ्ट का मौका — लिंक पर क्लिक कर जानकारी दर्ज करें।संदिग्ध विज्ञापन पर क्लिक न करें; ब्राउज़र में पॉप-अप ब्लॉकर चालू करें।
9बिना गारंटी ₹50,000 का ऋण, अभी प्रोसेसिंग फीस भरें।केवल अधिकृत बैंकों से संपर्क करें; फीस के नाम पर पैसा न भेजें; 1930 पर सूचित करें।
10इस लिंक पर क्लिक करें और ₹100 का फ्री मोबाइल रिचार्ज पाएँ।ऐसी लॉटरी/लालच पर भरोसा न करें; साइबर सेल को सूचित करें।
11ATM कार्ड की वैधता समाप्त हो रही, अपडेट हेतु पिन बताएँ।ATM/पिन की जानकारी किसी को न दें; बैंक के असली हेल्पलाइन पर संपर्क करें; पिन तुरंत बदलें।
12पेमेंट फँसा है, रिफंड हेतु यह QR कोड स्कैन करें।अज्ञात व्यक्ति का भेजा QR कोड स्कैन न करें; संदिग्ध गतिविधि तुरंत बैंक व पुलिस को रिपोर्ट करें।
याद रखें: राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग हेल्पलाइन नंबर 1930 तथा पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर शिकायत की जा सकती है। किसी भी संदेश में जल्दबाजी न करें — “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय”।
(ग) इन स्थितियों में बिना सोचे-समझे कार्य करने के क्या परिणाम हो सकते हैं?
  • सोशल मीडिया पर झूठा संदेश फैलाना: लोग भ्रमित होते हैं, अफ़वाह फैलती है, और कभी-कभी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
  • बिना हेलमेट बाइक चलाना: पुलिस चालान काटती है और दुर्घटना में गंभीर चोट लग सकती है।
  • माता-पिता से बिना पूछे ऑनलाइन गेम पर पैसे खर्च करना: आर्थिक नुकसान होता है और विश्वास टूटता है।
आज की पहेली — “खान पान सन्मान”

इस पंक्ति के तीनों शब्दों में केवल ‘आ’ की मात्रा का बार-बार प्रयोग हुआ है। इसी तरह एक-एक मात्रा वाले वाक्य: “नीली नदी धीमी थी।”, “चींटी चीनी जीम गई।”

चींटी चीनी जीम गई

विभिन्न मात्राओं के अर्थपूर्ण वाक्य

मात्रावाक्य
चाचा काका बाग़ जा।
दिनभर किरन खिल।
नीली नदी सीधी बही।
सुखद धुन सुन।
फूल-फूल झूम।
मृग तृण चर।
पेड़ पे बेल।
पैदल सैर कर।
रोज़ ढोल बोल।
कौन चौक दौड़?
नियम: एक वाक्य में केवल एक ही मात्रा बार-बार आए या बिना मात्रा वाले शब्द हों, और वाक्य का कोई-न-कोई अर्थ अवश्य निकले।
खोजबीन के लिए

इस पाठ में पढ़ी कुंडलिया “बिना बिचारे जो करै…” से मिलती-जुलती एक और कहानी “बिना विचारे करो न काम” आप इस इंटरनेट कड़ी पर सुन सकते हैं:

▶ बिना विचारे — youtube.com/watch?v=9zEP4YEP-rs

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