गिरिधर कविराय की कुंडलिया
पूरे पाठ के सभी प्रश्नों के विस्तृत हल — मूल कविता, अर्थ, और हर गतिविधि के उत्तर।
अठारहवीं सदी में जन्मे गिरिधर कविराय अपनी लोकप्रचलित कुंडलियों के लिए याद किए जाते हैं। उनकी रचनाओं में ऐसे अनेक नीतिपरक पद मिलते हैं जिन्हें लोग कहावत की तरह प्रयोग करते हैं — जैसे “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय” या “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” वे लोकनीति और घर-गृहस्थी के साधारण व्यवहार की बातें सीधे और सरल शब्दों में कहने के लिए जाने जाते हैं।
📜 मूल कुंडलिया एवं भावार्थ
काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥
जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै।
खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥
कह गिरिधर कविराय दुःख कछु टरत न टारे।
खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥
जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ॥
ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै।
दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै॥
कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती।
आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती॥
पाठ से
Intext — पाठ के भीतर दी गई सभी गतिविधियाँ(क) पाठ के आधार पर सही उत्तर के सामने तारा (★) लगाया गया है। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं।
(ख) अलग-अलग उत्तर क्यों चुने?
यह चर्चा का प्रश्न है। अपने मित्रों के साथ बात कीजिए कि आपने वही उत्तर क्यों चुना — कविता की किस पंक्ति ने आपको वह उत्तर सुझाया। इस पर विचार करने से पता चलता है कि एक ही कविता को अलग-अलग लोग अपने अनुभव के अनुसार थोड़ा भिन्न भी समझ सकते हैं, और चर्चा से हमारी समझ और गहरी होती है।
इन पंक्तियों में कवि कहते हैं कि जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई कार्य करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। ऐसा व्यक्ति अपना काम तो बिगाड़ ही लेता है, साथ ही संसार में उसका मज़ाक भी उड़ता है। संदेश यह है कि कोई भी कार्य आरंभ करने से पहले उसके परिणामों पर भली-भाँति विचार कर लेना चाहिए। (जैसे चित्र में व्यक्ति उसी डाल को काट रहा है जिस पर वह स्वयं बैठा है — यही “बिना बिचारे” किया गया काम है।)
इनका अर्थ है कि बीती हुई बातों को भुलाकर आगे (भविष्य) की चिंता करनी चाहिए। जो काम सहजता से बन पड़े, उसी में मन लगाना चाहिए। अनावश्यक रूप से कठिन या असंभव कार्यों के पीछे भागने के बजाय सहज-सरल जीवन जीना ही अच्छा है, क्योंकि इसी से मन शांत रहता है और भविष्य सुखमय बनता है।
स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 के सही अर्थ से मिलान:
- बाद में पछताना पड़ता है।
- अपना काम बिगड़ जाता है।
- संसार में हँसी / मज़ाक होता है।
- मन में चैन (शांति) नहीं रहता।
- अच्छा खान-पान, सम्मान और राग-रंग भी अच्छा नहीं लगता।
- यह दुख टालने पर भी नहीं टलता — मन में हमेशा खटकता रहता है।
हाँ, ये बातें आज भी उतनी ही उपयोगी हैं। बिना सोचे-समझे किया गया कार्य हर युग में हानि पहुँचाता है। उदाहरण:
- बिना तैयारी या बिना प्रश्न पढ़े परीक्षा देने पर असफलता मिलती है।
- बिना जाँचे किसी अनजान लिंक/संदेश पर भरोसा करके ऑनलाइन ठगी का शिकार हो जाना।
- सोशल मीडिया पर बिना पुष्टि किए कोई खबर आगे भेज देना — भ्रम फैलता है।
अतः “सोच-समझकर काम करो” की यह सीख आज भी पूरी तरह प्रासंगिक है।
| शब्द | अर्थ | उदाहरण वाक्य |
|---|---|---|
| सन्मान (सम्मान) | आदर, इज़्ज़त, प्रतिष्ठा | हमें बड़ों का सन्मान करना चाहिए। |
| मनहिं | मन को / मन में | यह बात उसके मनहिं (मन में) नहीं भाती। |
| राग-रंग (बोनस) | आमोद-प्रमोद, मनोरंजन | त्योहार पर सब राग-रंग में डूबे थे। |
नमूना कहानी: मेरे मित्र रोहन को किसी ने फोन पर बताया कि एक विशेष स्कीम में पैसा लगाओ तो एक महीने में दुगना हो जाएगा। रोहन ने न घरवालों से पूछा, न किसी समझदार से सलाह ली, और जल्दबाजी में अपनी सारी बचत उसमें लगा दी। कुछ ही दिनों में वह वेबसाइट बंद हो गई और उसके सारे पैसे डूब गए। बाद में उसे बहुत पछताना पड़ा — ठीक वैसे ही जैसे कुंडलिया कहती है “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” प्रभाव: रोहन ने ठान लिया कि अब कोई भी बड़ा निर्णय सोच-समझकर और बड़ों की सलाह लेकर ही लेगा।
| के लिए | संभावित समस्या | कविता कैसे प्रेरित करेगी |
|---|---|---|
| आप | पिछली परीक्षा में कम अंक आने का दुख | बीती बात भूलकर अगली पढ़ाई पर ध्यान दो। |
| सहपाठी | दोस्त से झगड़ा/नाराज़गी | पुरानी कड़वाहट भुलाकर आगे बढ़ो, मेल कर लो। |
| परिजन | व्यापार/काम में हुए नुकसान का दुख | बीता समय भुलाकर नए सिरे से मेहनत करो। |
| शिक्षक | किसी वर्ष का परिणाम अच्छा न रहना | अगली कक्षा को बेहतर बनाने पर ध्यान दें। |
| पक्षी | घोंसला तूफ़ान में उजड़ जाना | दुख भुलाकर नया घोंसला बनाओ। |
| पशु | पुराने स्थान/साथी का बिछोह | नई जगह में सहजता से रम जाओ। |
सभी को यह कविता ‘बीती सो बीती’ समझकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
- जो बीत गया उसे बदला नहीं जा सकता, इसलिए उसमें उलझे रहना व्यर्थ है।
- बीती बातें बार-बार याद करने से केवल दुख बढ़ता है और वर्तमान भी बिगड़ता है।
- अतीत की गलती से सीख लो, पर उसका बोझ मत ढोओ।
- भविष्य को बेहतर बनाने पर ध्यान दो — तभी आगे सुख मिलेगा: “आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती।”
कुंडलियों में से ‘चित्त’ या ‘मन’ से जुड़े शब्द चुनकर रिक्त स्थानों में भरे गए हैं (‘चैन’ पहले से दिया गया था):
(क) दोनों कुंडलियों की विशेषताओं की सूची
| जो विशेषताएँ दोनों कुंडलियों में हैं | जो किसी एक में हैं |
|---|---|
|
• छह-छह पंक्तियों का कुंडलिया छंद है। • जिस शब्द से आरंभ, उसी से अंत (बिना बिचारे…बिना बिचारे; बीती…बीती सो बीती)। • एक पंक्ति का अंत अगली पंक्ति के आरंभ में दोहराया गया (श्रृंखला/पुनरुक्ति)। • कवि (गिरिधर कविराय) के नाम का उल्लेख। • लय व तुक — दोनों को बोलने में बराबर समय लगता है। • संवाद/उपदेश शैली — मानो कोई हमसे बात कर रहा हो। |
• पहली में एक ही वर्ण से आरंभ वाले शब्द अधिक (खान-पान, राग-रंग) — अनुप्रास। • दूसरी में परस्पर विपरीत विचार साथ आए हैं (बीती × आगे = अतीत × भविष्य)। |
(ख) कविता की विशेषताओं का पंक्तियों से मिलान
“बीती” भूतकाल को, “आगे” भविष्य को और “आज” जैसे शब्द वर्तमान को बताते हैं।
(क) दिए गए शब्दों से तीनों काल के तीन-तीन वाक्य
| भूतकाल | वर्तमान काल | भविष्य काल |
|---|---|---|
| कल मैंने गृहकार्य पूरा किया। | आज मैं विद्यालय जा रहा हूँ। | कल हम पिकनिक पर जाएँगे। |
| परसों हम मेले में गए थे। | अभी-अभी वर्षा हो रही है। | परसों परीक्षा होगी। |
| मैं पहले गाँव में रहता था। | अब मुझे भूख लग रही है। | अगले साल मैं नई कक्षा में जाऊँगा। |
(ख) काल बताने वाले शब्द रेखांकित
ऊपर पीले रंग में चिह्नित शब्द ही बताते हैं कि कार्य किस काल में हुआ — भूतकाल: कल, परसों, पहले; वर्तमान: आज, अभी-अभी, अब; भविष्य: कल, परसों, अगले साल। ध्यान दें कि ‘कल’ और ‘परसों’ शब्द भूत और भविष्य दोनों में प्रयोग हो सकते हैं — अर्थ वाक्य की क्रिया से स्पष्ट होता है।
पाठ से आगे
Exercise — पाठ से आगे की सभी गतिविधियाँ व अभ्यासनमूना उत्तर: हाँ। एक बार मैंने गुस्से में अपने छोटे भाई से कठोर शब्द कह दिए। जब वह उदास हो गया तो मुझे बहुत बुरा लगा। वह बात कई दिनों तक मेरे मन में खटकती रही, जब तक मैंने उससे माफ़ी नहीं माँग ली। तब समझ आया कि बिना सोचे कही/की गई बात सचमुच काँटे की तरह मन में चुभती रहती है।
हाँ, मैं सहमत हूँ। अतीत के दुखों में उलझे रहने से न अतीत बदलता है और न वर्तमान/भविष्य सँवरता है। उदाहरण: पिछली परीक्षा में कम अंक आने पर शोक मनाने के बजाय अगली परीक्षा की तैयारी में जुट जाना बुद्धिमानी है — तभी सफलता मिलेगी। हाँ, अतीत की गलतियों से सीख लेना ज़रूरी है; ‘भूलने’ का अर्थ है दुख का बोझ छोड़ना, अनुभव नहीं।
- कोई भी काम सोच-समझकर करूँगा, जल्दबाजी नहीं।
- बीती असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान दूँगा।
- जो काम सहजता से बन सके उसी में मन लगाऊँगा, अकारण कठिन के पीछे नहीं भागूँगा।
- ऐसा आचरण करूँगा कि किसी को मुझ पर हँसने या उँगली उठाने का मौका न मिले।
नमूना विचार: मेरे मत में सम्मान सबसे आवश्यक है। खान-पान और राग-रंग शरीर तथा मन को क्षणिक सुख देते हैं, जबकि सम्मान व्यक्ति की पहचान और आत्म-गौरव से जुड़ा है। सम्मान खो जाने पर अच्छे खान-पान और मनोरंजन में भी मन नहीं लगता — यही कविता कहती है। (यह व्यक्तिगत उत्तर है; आप कारण सहित कोई भी विकल्प चुन सकते हैं।)
- कक्षा में उत्तर देते समय गलत बोल जाने पर सब हँसे।
- खेलते समय अचानक गिर जाने पर।
- नई-नई साइकिल सीखते समय बार-बार गिरना।
- किसी दोस्त का कपड़े उल्टे पहन लेना।
- किसी का मज़ाकिया अंदाज़ में बात करना।
जब हम पर हँसी हो: बुरा लगता है, शर्मिंदगी व लज्जा होती है, कभी गुस्सा भी आता है और आत्मविश्वास घट जाता है।
जब हम किसी पर हँसें: उस समय मज़ा आता है, पर बाद में सोचने पर लगता है कि सामने वाले को दुख पहुँचा होगा — इसलिए पछतावा भी हो सकता है।
- शांति से कहूँगा कि गलती हर किसी से होती है; हँसने के बजाय सही रास्ता बताना बेहतर है।
- पूछूँगा — “यदि यही भूल तुमसे होती और मैं हँसता, तो तुम्हें कैसा लगता?”
- समझाऊँगा कि किसी की भूल पर हँसना नहीं, बल्कि उसकी मदद करनी चाहिए।
- सड़क पार करते समय बिना देखे दौड़ना — दुर्घटना।
- बिना जाँचे किसी अनजान लिंक पर क्लिक करना — ठगी/वायरस।
- गुस्से में जल्दबाजी में कोई कठोर निर्णय लेना — रिश्ते बिगड़ना।
- प्रश्न ठीक से पढ़े बिना उत्तर लिखना — गलत उत्तर।
- बिना हेलमेट जल्दी में बाइक चलाना — चोट व चालान।
| # | संदेश | आप करें (सही कदम) |
|---|---|---|
| 1 | आपका बैंक खाता बंद होने वाला है। | O.T.P. किसी को न दें। तुरंत कॉल काट दें और अपने बैंक से संपर्क करें। |
| 2 | बधाई! आपने 10 लाख की लॉटरी जीती, सत्यापन हेतु ₹5000 भेजें। | संदिग्ध वेबसाइट पर कोई भुगतान न करें। इसे साइबर क्राइम सेल में रिपोर्ट करें। |
| 3 | गलती से ₹1000 रिफंड भेजा है, कृपया वापस भेजें। | किसी अनजान को पैसा न भेजें। बैंक ऐप में लेन-देन जाँचें; पैसा कटा हो तो बैंक को सूचित करें। |
| 4 | सिम बंद होने वाला है, KYC हेतु आधार-पैन की फोटो भेजें। | ऐसे कॉल तुरंत काटें। बैंक से सीधे संपर्क करें; फोन पर आधार/पैन/निजी जानकारी साझा न करें। |
| 5 | 70% तक छूट, ऑफर खत्म होने से पहले यहाँ पेमेंट करें। | संदिग्ध छूट/मुफ्त के झाँसे में न फँसें। ऐसे लिंक पर क्लिक न करें। |
| 6 | “मैं तुम्हारा चाचा हूँ, ट्रेन में फँसा हूँ, ₹5000 भेजो।” | व्यक्ति की पहचान की पुष्टि करें; तुरंत पैसे न भेजें; परिवार के अन्य सदस्यों से बात करें। |
| 7 | यह ऐप डाउनलोड करें और ₹1000 कैशबैक पाएँ। | अनजानी वेबसाइट से ऐप डाउनलोड न करें; रेटिंग जाँचें; संदिग्ध ऐप हटा दें। |
| 8 | मुफ्त गिफ्ट का मौका — लिंक पर क्लिक कर जानकारी दर्ज करें। | संदिग्ध विज्ञापन पर क्लिक न करें; ब्राउज़र में पॉप-अप ब्लॉकर चालू करें। |
| 9 | बिना गारंटी ₹50,000 का ऋण, अभी प्रोसेसिंग फीस भरें। | केवल अधिकृत बैंकों से संपर्क करें; फीस के नाम पर पैसा न भेजें; 1930 पर सूचित करें। |
| 10 | इस लिंक पर क्लिक करें और ₹100 का फ्री मोबाइल रिचार्ज पाएँ। | ऐसी लॉटरी/लालच पर भरोसा न करें; साइबर सेल को सूचित करें। |
| 11 | ATM कार्ड की वैधता समाप्त हो रही, अपडेट हेतु पिन बताएँ। | ATM/पिन की जानकारी किसी को न दें; बैंक के असली हेल्पलाइन पर संपर्क करें; पिन तुरंत बदलें। |
| 12 | पेमेंट फँसा है, रिफंड हेतु यह QR कोड स्कैन करें। | अज्ञात व्यक्ति का भेजा QR कोड स्कैन न करें; संदिग्ध गतिविधि तुरंत बैंक व पुलिस को रिपोर्ट करें। |
- सोशल मीडिया पर झूठा संदेश फैलाना: लोग भ्रमित होते हैं, अफ़वाह फैलती है, और कभी-कभी कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है।
- बिना हेलमेट बाइक चलाना: पुलिस चालान काटती है और दुर्घटना में गंभीर चोट लग सकती है।
- माता-पिता से बिना पूछे ऑनलाइन गेम पर पैसे खर्च करना: आर्थिक नुकसान होता है और विश्वास टूटता है।
इस पंक्ति के तीनों शब्दों में केवल ‘आ’ की मात्रा का बार-बार प्रयोग हुआ है। इसी तरह एक-एक मात्रा वाले वाक्य: “नीली नदी धीमी थी।”, “चींटी चीनी जीम गई।”
विभिन्न मात्राओं के अर्थपूर्ण वाक्य
| मात्रा | वाक्य |
|---|---|
| आ | चाचा काका बाग़ जा। |
| इ | दिनभर किरन खिल। |
| ई | नीली नदी सीधी बही। |
| उ | सुखद धुन सुन। |
| ऊ | फूल-फूल झूम। |
| ऋ | मृग तृण चर। |
| ए | पेड़ पे बेल। |
| ऐ | पैदल सैर कर। |
| ओ | रोज़ ढोल बोल। |
| औ | कौन चौक दौड़? |
इस पाठ में पढ़ी कुंडलिया “बिना बिचारे जो करै…” से मिलती-जुलती एक और कहानी “बिना विचारे करो न काम” आप इस इंटरनेट कड़ी पर सुन सकते हैं:
▶ बिना विचारे — youtube.com/watch?v=9zEP4YEP-rs