कक्षा ८ · संस्कृतम् · दीपकम् · परिशिष्टम् २
शब्दरूपाणि
यह परिशिष्ट संज्ञा, सर्वनाम, संख्यावाची तथा कृदन्त शब्दों के सम्पूर्ण रूप-परिवर्तन (declension) की सन्दर्भ-तालिकाएँ प्रस्तुत करता है — इकारान्त/उकारान्त नपुंसकलिङ्ग से लेकर संख्यावाची शब्दों तक, कुल 24 पूर्ण शब्दरूप-सारणियाँ एक ही स्थान पर।
नपुंसकलिङ्गः: दधि, वारि, मधु
पुंलिङ्गः: मरुत्, राजन्, आत्मन्, विद्वस्
सर्वनाम/संख्या: भवत्, यद्, इदम्, कीदृश, एक-द्वि-त्रि-चतुर्
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प्रत्येक शब्द की सारणी में आठ विभक्तियाँ (प्रथमा से सम्बोधन तक) तथा तीनों वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) दिए गए हैं। जहाँ शब्द तीनों लिङ्गों में प्रयुक्त होता है (जैसे सर्वनाम व संख्यावाची शब्द), वहाँ पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग व नपुंसकलिङ्ग — तीनों की पृथक् सारणियाँ दी गई हैं। सर्वनाम-शब्द (यद्, इदम्) में सम्बोधन-विभक्ति नहीं होती, अतः उनकी सारणी सात पंक्तियों में ही पूर्ण है।
(अ) इकारान्त-/उकारान्त- नपुंसकलिङ्ग शब्दाः
दधि, वारि, मधु — जलवाची/आहारवाची पद
| दधि — इकारान्तः नपुंसकलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | दधि | दधिनी | दधीनि |
| द्वितीया | दधि | दधिनी | दधीनि |
| तृतीया | दध्ना | दधिभ्याम् | दधिभिः |
| चतुर्थी | दध्ने | दधिभ्याम् | दधिभ्यः |
| पञ्चमी | दध्नः | दधिभ्याम् | दधिभ्यः |
| षष्ठी | दध्नः | दध्नोः | दध्नाम् |
| सप्तमी | दध्नि, दधनि | दध्नोः | दधिषु |
| सम्बोधनम् | हे दधि, हे दधे | हे दधिनी | हे दधीनि |
| वारि — इकारान्तः नपुंसकलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | वारि | वारिणी | वारीणि |
| द्वितीया | वारि | वारिणी | वारीणि |
| तृतीया | वारिणा | वारिभ्याम् | वारिभिः |
| चतुर्थी | वारिणे | वारिभ्याम् | वारिभ्यः |
| पञ्चमी | वारिणः | वारिभ्याम् | वारिभ्यः |
| षष्ठी | वारिणः | वारिणोः | वारीणाम् |
| सप्तमी | वारिणि | वारिणोः | वारिषु |
| सम्बोधनम् | हे वारि, हे वारे | हे वारिणी | हे वारीणि |
| मधु — उकारान्तः नपुंसकलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | मधु | मधुनी | मधूनि |
| द्वितीया | मधु | मधुनी | मधूनि |
| तृतीया | मधुना | मधुभ्याम् | मधुभिः |
| चतुर्थी | मधुने | मधुभ्याम् | मधुभ्यः |
| पञ्चमी | मधुनः | मधुभ्याम् | मधुभ्यः |
| षष्ठी | मधुनः | मधुनोः | मधूनाम् |
| सप्तमी | मधुनि | मधुनोः | मधुषु |
| सम्बोधनम् | हे मधु, हे मधो | हे मधुनी | हे मधूनि |
(आ) व्यञ्जनान्त पुंलिङ्ग शब्दाः
मरुत्, राजन्, आत्मन्, विद्वस्
| मरुत् — तकारान्तः पुंलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | मरुत् | मरुतौ | मरुतः |
| द्वितीया | मरुतम् | मरुतौ | मरुतः |
| तृतीया | मरुता | मरुद्भ्याम् | मरुद्भिः |
| चतुर्थी | मरुते | मरुद्भ्याम् | मरुद्भ्यः |
| पञ्चमी | मरुतः | मरुद्भ्याम् | मरुद्भ्यः |
| षष्ठी | मरुतः | मरुतोः | मरुताम् |
| सप्तमी | मरुति | मरुतोः | मरुत्सु |
| सम्बोधनम् | हे मरुत् | हे मरुतौ | हे मरुतः |
| राजन् — नकारान्तः पुंलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | राजा | राजानौ | राजानः |
| द्वितीया | राजानम् | राजानौ | राज्ञः |
| तृतीया | राज्ञा | राजभ्याम् | राजभिः |
| चतुर्थी | राज्ञे | राजभ्याम् | राजभ्यः |
| पञ्चमी | राज्ञः | राजभ्याम् | राजभ्यः |
| षष्ठी | राज्ञः | राज्ञोः | राज्ञाम् |
| सप्तमी | राज्ञि, राजनि | राज्ञोः | राजसु |
| सम्बोधनम् | हे राजन् | हे राजानौ | हे राजानः |
| आत्मन् — नकारान्तः पुंलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | आत्मा | आत्मानौ | आत्मानः |
| द्वितीया | आत्मानम् | आत्मानौ | आत्मनः |
| तृतीया | आत्मना | आत्मभ्याम् | आत्मभिः |
| चतुर्थी | आत्मने | आत्मभ्याम् | आत्मभ्यः |
| पञ्चमी | आत्मनः | आत्मभ्याम् | आत्मभ्यः |
| षष्ठी | आत्मनः | आत्मनोः | आत्मनाम् |
| सप्तमी | आत्मनि | आत्मनोः | आत्मसु |
| सम्बोधनम् | हे आत्मन् | हे आत्मानौ | हे आत्मानः |
| विद्वस् — सकारान्तः पुंलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | विद्वान् | विद्वांसौ | विद्वांसः |
| द्वितीया | विद्वांसम् | विद्वांसौ | विदुषः |
| तृतीया | विदुषा | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भिः |
| चतुर्थी | विदुषे | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भ्यः |
| पञ्चमी | विदुषः | विद्वद्भ्याम् | विद्वद्भ्यः |
| षष्ठी | विदुषः | विदुषोः | विदुषाम् |
| सप्तमी | विदुषि | विदुषोः | विद्वत्सु |
| सम्बोधनम् | हे विद्वन् | हे विद्वांसौ | हे विद्वांसः |
(इ) शतृ-प्रत्ययान्त शब्दाः (वर्तमानकालिक कृदन्त)
गच्छत् / गच्छन्ती — ‘जाता हुआ / जाती हुई’
| गच्छत् — शतृ-प्रत्ययान्तः पुंलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | गच्छन् | गच्छन्तौ | गच्छन्तः |
| द्वितीया | गच्छन्तम् | गच्छन्तौ | गच्छतः |
| तृतीया | गच्छता | गच्छद्भ्याम् | गच्छद्भिः |
| चतुर्थी | गच्छते | गच्छद्भ्याम् | गच्छद्भ्यः |
| पञ्चमी | गच्छतः | गच्छद्भ्याम् | गच्छद्भ्यः |
| षष्ठी | गच्छतः | गच्छतोः | गच्छताम् |
| सप्तमी | गच्छति | गच्छतोः | गच्छत्सु |
| सम्बोधनम् | हे गच्छन् | हे गच्छन्तौ | हे गच्छन्तः |
| गच्छन्ती — शतृ-प्रत्ययान्तः स्त्रीलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | गच्छन्ती | गच्छन्त्यौ | गच्छन्त्यः |
| द्वितीया | गच्छन्तीम् | गच्छन्त्यौ | गच्छन्तीः |
| तृतीया | गच्छन्त्या | गच्छन्तीभ्याम् | गच्छन्तीभिः |
| चतुर्थी | गच्छन्त्यै | गच्छन्तीभ्याम् | गच्छन्तीभ्यः |
| पञ्चमी | गच्छन्त्याः | गच्छन्तीभ्याम् | गच्छन्तीभ्यः |
| षष्ठी | गच्छन्त्याः | गच्छन्त्योः | गच्छन्तीनाम् |
| सप्तमी | गच्छन्त्याम् | गच्छन्त्योः | गच्छन्तीषु |
| सम्बोधनम् | हे गच्छन्ति | हे गच्छन्त्यौ | हे गच्छन्त्यः |
(ई) सर्वनाम-शब्दाः
भवत्/भवती, यद्, इदम्
| भवत् — तकारान्तः पुंलिङ्गः सर्वनाम-शब्दः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | भवान् | भवन्तौ | भवन्तः |
| द्वितीया | भवन्तम् | भवन्तौ | भवतः |
| तृतीया | भवता | भवद्भ्याम् | भवद्भिः |
| चतुर्थी | भवते | भवद्भ्याम् | भवद्भ्यः |
| पञ्चमी | भवतः | भवद्भ्याम् | भवद्भ्यः |
| षष्ठी | भवतः | भवतोः | भवताम् |
| सप्तमी | भवति | भवतोः | भवत्सु |
| सम्बोधनम् | हे भवत् | हे भवन्तौ | हे भवन्तः |
| भवती — ईकारान्तः स्त्रीलिङ्गः सर्वनाम-शब्दः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | भवती | भवत्यौ | भवत्यः |
| द्वितीया | भवतीम् | भवत्यौ | भवतीः |
| तृतीया | भवत्या | भवतीभ्याम् | भवतीभिः |
| चतुर्थी | भवत्यै | भवतीभ्याम् | भवतीभ्यः |
| पञ्चमी | भवत्याः | भवतीभ्याम् | भवतीभ्यः |
| षष्ठी | भवत्याः | भवत्योः | भवतीनाम् |
| सप्तमी | भवत्याम् | भवत्योः | भवतीषु |
| सम्बोधनम् | हे भवति | हे भवत्यौ | हे भवत्यः |
| यद् — दकारान्तः पुंलिङ्गः सर्वनाम-शब्दः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | यः | यौ | ये |
| द्वितीया | यम् | यौ | यान् |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
| यद् — दकारान्तः स्त्रीलिङ्गः सर्वनाम-शब्दः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | या | ये | याः |
| द्वितीया | याम् | ये | याः |
| तृतीया | यया | याभ्याम् | याभिः |
| चतुर्थी | यस्यै | याभ्याम् | याभ्यः |
| पञ्चमी | यस्याः | याभ्याम् | याभ्यः |
| षष्ठी | यस्याः | ययोः | यासाम् |
| सप्तमी | यस्याम् | ययोः | यासु |
| यद् — दकारान्तः नपुंसकलिङ्गः सर्वनाम-शब्दः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | यत् | ये | यानि |
| द्वितीया | यत् | ये | यानि |
| तृतीया | येन | याभ्याम् | यैः |
| चतुर्थी | यस्मै | याभ्याम् | येभ्यः |
| पञ्चमी | यस्मात् | याभ्याम् | येभ्यः |
| षष्ठी | यस्य | ययोः | येषाम् |
| सप्तमी | यस्मिन् | ययोः | येषु |
| इदम् — मकारान्तः पुंलिङ्गः सर्वनाम-शब्दः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | अयम् | इमौ | इमे |
| द्वितीया | इमम् | इमौ | इमान् |
| तृतीया | अनेन | आभ्याम् | एभिः |
| चतुर्थी | अस्मै | आभ्याम् | एभ्यः |
| पञ्चमी | अस्मात् | आभ्याम् | एभ्यः |
| षष्ठी | अस्य | अनयोः | एषाम् |
| सप्तमी | अस्मिन् | अनयोः | एषु |
| इदम् — मकारान्तः स्त्रीलिङ्गः सर्वनाम-शब्दः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | इयम् | इमे | इमाः |
| द्वितीया | इमाम् | इमे | इमाः |
| तृतीया | अनया | आभ्याम् | आभिः |
| चतुर्थी | अस्यै | आभ्याम् | आभ्यः |
| पञ्चमी | अस्याः | आभ्याम् | आभ्यः |
| षष्ठी | अस्याः | अनयोः | आसाम् |
| सप्तमी | अस्याम् | अनयोः | आसु |
| इदम् — मकारान्तः नपुंसकलिङ्गः सर्वनाम-शब्दः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | इदम् | इमे | इमानि |
| द्वितीया | इदम् | इमे | इमानि |
| तृतीया | अनेन | आभ्याम् | एभिः |
| चतुर्थी | अस्मै | आभ्याम् | एभ्यः |
| पञ्चमी | अस्मात् | आभ्याम् | एभ्यः |
| षष्ठी | अस्य | अनयोः | एषाम् |
| सप्तमी | अस्मिन् | अनयोः | एषु |
(उ) विशेषण-सर्वनाम शब्दः — कीदृश
‘कैसा / कैसी / कैसा’ — प्रश्नवाचक विशेषण
| कीदृश — अकारान्तः पुंलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | कीदृशः | कीदृशौ | कीदृशाः |
| द्वितीया | कीदृशम् | कीदृशौ | कीदृशान् |
| तृतीया | कीदृशेन | कीदृशाभ्याम् | कीदृशैः |
| चतुर्थी | कीदृशाय | कीदृशाभ्याम् | कीदृशेभ्यः |
| पञ्चमी | कीदृशात् | कीदृशाभ्याम् | कीदृशेभ्यः |
| षष्ठी | कीदृशस्य | कीदृशयोः | कीदृशानाम् |
| सप्तमी | कीदृशे | कीदृशयोः | कीदृशेषु |
| सम्बोधनम् | कीदृश | कीदृशौ | कीदृशाः |
| कीदृशी — ईकारान्तः स्त्रीलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | कीदृशी | कीदृश्यौ | कीदृश्यः |
| द्वितीया | कीदृशीम् | कीदृश्यौ | कीदृशीः |
| तृतीया | कीदृश्या | कीदृशीभ्याम् | कीदृशीभिः |
| चतुर्थी | कीदृश्यै | कीदृशीभ्याम् | कीदृशीभ्यः |
| पञ्चमी | कीदृश्याः | कीदृशीभ्याम् | कीदृशीभ्यः |
| षष्ठी | कीदृश्याः | कीदृश्योः | कीदृशीनाम् |
| सप्तमी | कीदृश्याम् | कीदृश्योः | कीदृशीषु |
| सम्बोधनम् | कीदृशि | कीदृश्यौ | कीदृश्यः |
| कीदृश — अकारान्तः नपुंसकलिङ्गः |
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| प्रथमा | कीदृशम् | कीदृशे | कीदृशानि |
| द्वितीया | कीदृशम् | कीदृशे | कीदृशानि |
| तृतीया | कीदृशेन | कीदृशाभ्याम् | कीदृशैः |
| चतुर्थी | कीदृशाय | कीदृशाभ्याम् | कीदृशेभ्यः |
| पञ्चमी | कीदृशात् | कीदृशाभ्याम् | कीदृशेभ्यः |
| षष्ठी | कीदृशस्य | कीदृशयोः | कीदृशानाम् |
| सप्तमी | कीदृशे | कीदृशयोः | कीदृशेषु |
| सम्बोधनम् | कीदृश | कीदृशे | कीदृशानि |
(ऊ) संख्यावाचि-शब्दरूपाणि
एक, द्वि, त्रि, चतुर् — त्रिषु लिङ्गेषु
| एक — अकारान्तः नित्यैकवचनान्तः (त्रिषु लिङ्गेषु) |
| विभक्तिः | पुंलिङ्गः एकवचनम् | स्त्रीलिङ्गः एकवचनम् | नपुंसकलिङ्गः एकवचनम् |
| प्रथमा | एकः | एका | एकम् |
| द्वितीया | एकम् | एकाम् | एकम् |
| तृतीया | एकेन | एकया | एकेन |
| चतुर्थी | एकस्मै | एकस्यै | एकस्मै |
| पञ्चमी | एकस्मात् | एकस्याः | एकस्मात् |
| षष्ठी | एकस्य | एकस्याः | एकस्य |
| सप्तमी | एकस्मिन् | एकस्याम् | एकस्मिन् |
| द्वि — इकारान्तः नित्यद्विवचनान्तः (त्रिषु लिङ्गेषु) |
| विभक्तिः | पुंलिङ्गः द्विवचनम् | स्त्रीलिङ्गः द्विवचनम् | नपुंसकलिङ्गः द्विवचनम् |
| प्रथमा | द्वौ | द्वे | द्वे |
| द्वितीया | द्वौ | द्वे | द्वे |
| तृतीया | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| चतुर्थी | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| पञ्चमी | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् | द्वाभ्याम् |
| षष्ठी | द्वयोः | द्वयोः | द्वयोः |
| सप्तमी | द्वयोः | द्वयोः | द्वयोः |
| त्रि — नित्यबहुवचनान्तः (त्रिषु लिङ्गेषु) |
| विभक्तिः | पुंलिङ्गः बहुवचनम् | स्त्रीलिङ्गः बहुवचनम् | नपुंसकलिङ्गः बहुवचनम् |
| प्रथमा | त्रयः | तिस्रः | त्रीणि |
| द्वितीया | त्रीन् | तिस्रः | त्रीणि |
| तृतीया | त्रिभिः | तिसृभिः | त्रिभिः |
| चतुर्थी | त्रिभ्यः | तिसृभ्यः | त्रिभ्यः |
| पञ्चमी | त्रिभ्यः | तिसृभ्यः | त्रिभ्यः |
| षष्ठी | त्रयाणाम् | तिसृणाम् | त्रयाणाम् |
| सप्तमी | त्रिषु | तिसृषु | त्रिषु |
| चतुर् — नित्यबहुवचनान्तः (त्रिषु लिङ्गेषु) |
| विभक्तिः | पुंलिङ्गः बहुवचनम् | स्त्रीलिङ्गः बहुवचनम् | नपुंसकलिङ्गः बहुवचनम् |
| प्रथमा | चत्वारः | चतस्रः | चत्वारि |
| द्वितीया | चतुरः | चतस्रः | चत्वारि |
| तृतीया | चतुर्भिः | चतसृभिः | चतुर्भिः |
| चतुर्थी | चतुर्भ्यः | चतसृभ्यः | चतुर्भ्यः |
| पञ्चमी | चतुर्भ्यः | चतसृभ्यः | चतुर्भ्यः |
| षष्ठी | चतुर्णाम् | चतसृणाम् | चतुर्णाम् |
| सप्तमी | चतुर्षु | चतसृषु | चतुर्षु |
Prepared for Class 8 Sanskrit (Dipakam) · Appendix 2 — शब्दरूपाणि · Reference compiled from NCERT textbook content · @EDUGROWN