Class 9 Hindi (Ganga) Chapter 6 | Reedh Ki Haddi | NCERT Solutions रीढ़ की हड्डी

रीढ़ की हड्डी — संपूर्ण प्रश्नोत्तर हल | EduGrown
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रीढ़ की हड्डी

एकांकी · संपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं व्याकरण हल · कक्षा गंगा (हिंदी)

जगदीशचंद्र माथुर
लेखक — जगदीशचंद्र माथुर जन्म: 1917, शाहजहाँपुर (उ.प्र.) · निधन: 1978 · हिंदी एकांकी व रंगमंच के सशक्त रचनाकार · रचना-वर्ष 1939
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मेरे उत्तर मेरे तर्क

सटीक उत्तर चुनिए और कारण भी समझिए
1एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है?
  • (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का
  • (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का
  • (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का
  • (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
🧠 तर्क

रीढ़ की हड्डी शरीर को सीधा खड़ा रखती है। यहाँ यह आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। उमा में यह ‘रीढ़’ है — वह निडर होकर अपने स्वाभिमान की बात कहती है; जबकि शंकर में इसका अभाव है (झुकी कमर, कायरता)। एकांकी के अंत में उमा का व्यंग्य भी इसी नैतिक दृढ़ता की कमी को उजागर करता है।

2‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है?
  • (क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर
  • (ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर
  • (ग) विवाह और अशिक्षा पर
  • (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
🧠 तर्क

एकांकी विवाह में कम पढ़ी-लिखी व सुंदर लड़की की माँग, स्त्री-शिक्षा का विरोध, लड़की को बिकाऊ ‘वस्तु’ की तरह आँकना और लेन-देन जैसी सामाजिक कुरीतियों व अनुचित मान्यताओं पर व्यंग्य करती है। यह व्यंग्य किसी एक विषय (केवल विवाह या अशिक्षा) तक सीमित नहीं, इसलिए (घ) सबसे उपयुक्त है।

3“घर जाकर ज़रा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” — यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है?
  • (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता
  • (ख) अनुभव और विवेक की कमी
  • (ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता
  • (घ) उदासीनता और एकाकीपन
🧠 तर्क

यहाँ ‘रीढ़ की हड्डी’ का अर्थ है नैतिक दृढ़ता व साहस। उमा का यह कटाक्ष बताता है कि शंकर में नैतिक साहस नहीं है — वह लड़कियों के होस्टल के पास घूमता पकड़ा गया, झुकी कमर से बैठता है और शर्म से मुँह छिपाकर भाग जाता है। यह उसकी चारित्रिक दुर्बलता है।

4“जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है?
  • (क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना
  • (ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना
  • (ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना
  • (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
🧠 तर्क

उमा के लिए शिक्षा केवल डिग्री, नौकरी या किसी को खुश करने का साधन नहीं है। उसके लिए शिक्षा का असली अर्थ है — आत्मबल, आत्मसम्मान और स्वतंत्र रूप से सोचने व बोलने का साहस। यही कारण है कि वह गोपालप्रसाद के सामने निडर होकर अन्याय का विरोध करती है।

5गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं?
  • (क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं।
  • (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं।
  • (ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं।
  • (घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
🧠 तर्क

रामस्वरूप आधुनिकता का दिखावा करते हैं, पर बेटी की बी.ए. की पढ़ाई छिपाकर उसे ‘सजा-सँवारकर’ पेश करते हैं। गोपालप्रसाद पढ़े-लिखे वकील होकर भी कम पढ़ी-लिखी बहू चाहते हैं। दोनों ही दिखावे और पुरानी रूढ़िवादी परंपरा के शिकार हैं।

6इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यतः कैसी है?
  • (क) औपचारिक और शुष्क
  • (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण
  • (ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक
  • (घ) भावुक और संक्षिप्त
🧠 तर्क

पात्रों के संवाद रोज़मर्रा की सहज बोलचाल जैसे (स्वाभाविक) हैं, और उनमें गहरा व्यंग्य भरा है — जैसे रामस्वरूप की चापलूसी भरी “हँ-हँ-हँ” और उमा का तीखा कटाक्ष। इसलिए संवाद शैली स्वाभाविक व व्यंग्यपूर्ण है।

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मेरी समझ मेरे विचार

चर्चा कीजिए और उत्तर लिखिए
1रामस्वरूप आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए।
✒️ उत्तर

आधुनिक दिखावा — उन्होंने बेटी उमा को बी.ए. तक पढ़ाया, उसे संगीत व चित्रकारी सिखाई, और स्वयं को सभ्य-शिष्ट दिखाते हैं।

रूढ़िवादी विचार/अंतर्द्वंद्व के उदाहरण —

  • उसी पढ़ी-लिखी बेटी की बी.ए. की पढ़ाई छिपाकर लड़के वालों को ‘मैट्रिक तक पढ़ी’ बताते हैं।
  • “उमा को जैसे हो तैयार कर लो”, “ज़रा करीने से आए” — बेटी को सजा-सँवारकर ‘माल’ की तरह पेश करना; पाउडर लगाने का आग्रह।
  • लड़के वालों की कम-पढ़ी लड़की की माँग पर सहमत होना व चापलूसी करना।
  • उमा के सच बोलने पर “उमा, उमा!” कहकर उसे चुप कराने की चेष्टा।

इस तरह वे समाज की कुरीतियों का विरोध करने का साहस नहीं रखते — वे स्वयं भी ‘रीढ़विहीन’ सिद्ध होते हैं।

2‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है — उनकी पहचान कीजिए।
✒️ उत्तर
  • शंकर के लिए (शारीरिक अर्थ) — उसकी ‘झुकी कमर’ — गोपालप्रसाद कहते हैं “कमर सीधी करके बैठो… शंकर की ‘बैकबोन’…”। यहाँ रीढ़ का सीधा/सामान्य न होना उसकी शारीरिक कमज़ोरी का संकेत है।
  • प्रतीकात्मक अर्थ (उमा का व्यंग्य) — रीढ़ = आत्म-सम्मान व नैतिक दृढ़ता। उमा का अंतिम कटाक्ष बताता है कि शंकर में नैतिक साहस ही नहीं है, जबकि उमा में यह ‘रीढ़’ पूरी तरह मौजूद है।
3“मेरी समझ में तो ये पढ़ाई-लिखाई के जंजाल आते नहीं।” प्रेमा की इस सोच से उस समय की स्त्री-शिक्षा की स्थिति के विषय में क्या पता चलता है?
✒️ उत्तर
  • उस समय स्त्री-शिक्षा को महत्व नहीं दिया जाता था; उसे ‘जंजाल’ या बोझ माना जाता था।
  • लड़कियों के लिए बस ‘आ-ई’, गिनती और ‘स्त्री-सुबोधिनी’ पढ़ लेना ही पर्याप्त समझा जाता था।
  • अधिक पढ़ी-लिखी लड़की को विवाह में अवगुण माना जाता था।
  • स्वयं स्त्रियाँ भी इस रूढ़िवादी सोच में ढली थीं — प्रेमा माँ होकर भी बेटी की पढ़ाई को बोझ मानती है।

अर्थात् उस युग में स्त्री-शिक्षा की घोर उपेक्षा व अभाव था।

4लेखक ने ‘रीढ़ की हड्डी’ शब्द को शीर्षक क्यों चुना होगा? यदि आप दूसरा शीर्षक रखना चाहें तो वह क्या होगा और क्यों?
✒️ उत्तर

‘रीढ़ की हड्डी’ पूरे एकांकी के केंद्रीय भाव — आत्म-सम्मान व नैतिक दृढ़ता — का प्रतीक है। उमा में यह ‘रीढ़’ है, जबकि शंकर व रूढ़िग्रस्त समाज में इसका अभाव। यह शीर्षक प्रतीकात्मक व व्यंग्यपूर्ण है और पाठक को सोचने पर विवश करता है — इसलिए लेखक ने इसे चुना।

वैकल्पिक शीर्षक — “उमा का स्वाभिमान”, “बिकाऊ नहीं!”, या “नारी की पहचान” — क्योंकि ये उमा के आत्मसम्मान, उसके साहस और नारी-गरिमा को सीधे रूप से दर्शाते हैं।

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एकांकी की पड़ताल

विधा से संवाद — दस बिंदुओं के उदाहरण
✒️ उत्तर
बिंदुउदाहरण
1. एकांकी का नामरीढ़ की हड्डी
2. लेखक का नामजगदीशचंद्र माथुर
3. पात्रउमा, रामस्वरूप (बाबू), प्रेमा, शंकर, गोपालप्रसाद, रतन
4. परिवेश/देश-कालसन् 1939 के आसपास का भारतीय मध्यवर्गीय घर; एक मामूली ढंग से सजा कमरा
5. रंग-निर्देश/मंच-निर्देश“(मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा… तख्त का दूसरा सिरा रतन ने पकड़ रखा है।)”
6. संवाद-निर्देशसंवाद के बीच कोष्ठक में — “(जरा तेज आवाज़ में)”, “(हल्की लेकिन मजबूत आवाज़ में)”, “(चौंककर खड़े हो जाते हैं)”
7. समस्याकम पढ़ी-लिखी व सुंदर लड़की की माँग तथा स्त्री-शिक्षा का विरोध — उमा का विवाह तय करना
8. संवादगोपालप्रसाद-रामस्वरूप की बातचीत तथा अंत में उमा का निर्भीक विरोध
9. मुख्य विचारनारी-शिक्षा का महत्व व नारी का आत्म-सम्मान; रूढ़िवादी सोच पर प्रहार
10. समाधान/परिणामउमा निडर होकर सच कह देती है; गोपालप्रसाद व शंकर अपमानित होकर लौट जाते हैं; रिश्ता टूट जाता है — उमा के स्वाभिमान की जीत
चाय की मेज़ पर बातचीत का दृश्य
रामस्वरूप, गोपालप्रसाद व शंकर — विवाह की ‘बातचीत’ का दृश्य

रंग-निर्देश का महत्व — आरंभिक रंग-निर्देश एकांकी की पृष्ठभूमि रचते हैं और पाठक/निर्देशक को स्थान, परिवेश व सामाजिक स्थिति की सटीक जानकारी देते हैं। मंचन के समय निर्देशक देश-काल के अनुसार मंच-सज्जा, प्रकाश व वस्त्रों में आवश्यक परिवर्तन कर सकता है। (गतिविधि) समूह बनाकर किसी एक दृश्य का चुनाव करके उचित हाव-भाव सहित कक्षा में अभिनय कीजिए।

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मेरी टिप्पणी

उमा के व्यंग्य पर एक संक्षिप्त टिप्पणी
✒️ नमूना टिप्पणी

उमा का यह वाक्य — “आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं… बैकबोन!” — पूरे एकांकी का सबसे सशक्त व्यंग्य है। यह केवल शंकर की झुकी कमर पर ही कटाक्ष नहीं, बल्कि उसके नैतिक साहस के अभाव पर तीखी चोट है। जो लड़का लड़कियों के होस्टल के पास ताक-झाँक करता पकड़ा गया और शर्म से मुँह छिपाकर भागा, वही अब एक पढ़ी-लिखी लड़की को ‘तौलने’ आया है। उमा का यह कथन नारी के आत्मसम्मान की घोषणा है और दिखावटी, रूढ़िवादी समाज के दोहरे चरित्र को बेनकाब कर देता है। संक्षिप्त होते हुए भी यह टिप्पणी पाठक के मन पर गहरी छाप छोड़ती है।

⚖️

तुलना और विचार

1एकांकी में वे पंक्तियाँ खोजिए जहाँ लड़कियों व लड़कों के प्रति भिन्न-भिन्न दृष्टि व्यक्त हुई है। आप इस भिन्नता को कैसे समझते हैं?
✒️ उत्तर

भिन्न दृष्टि वाली पंक्तियाँ —

  • “मर्दों का काम तो है ही पढ़ना और काबिल होना।”
  • “कुछ बातें दुनिया में ऐसी हैं जो सिर्फ मर्दों के लिए हैं — और ऊँची तालीम भी ऐसी चीजों में से एक है।”
  • “मोर के पंख होते हैं, मोरनी के नहीं; शेर के बाल होते हैं, शेरनी के नहीं।”
  • “हमें ज़्यादा पढ़ी-लिखी लड़की नहीं चाहिए… हद से हद मैट्रिक-पास होनी चाहिए।”

मेरी समझ — ये पंक्तियाँ उस समय के लैंगिक भेदभाव को दर्शाती हैं, जहाँ पुरुष को श्रेष्ठ व शिक्षा का अधिकारी और स्त्री को केवल घर व सुंदरता तक सीमित माना जाता था। यह सोच पूर्णतः अनुचित व अन्यायपूर्ण है — शिक्षा व अवसर पर हर व्यक्ति का, स्त्री-पुरुष दोनों का, समान अधिकार है।

2उमा खुलकर अपने अधिकार व विचार व्यक्त करती है। इससे उसके व्यक्तित्व के विषय में क्या पता चलता है? ये विशेषताएँ कैसे आई होंगी?
✒️ उत्तर
उमा गोपालप्रसाद व शंकर को करारा जवाब देते हुए
उमा का निर्भीक विरोध — स्वाभिमान की जीत

उमा के व्यक्तित्व की विशेषताएँ —

आत्म-सम्मानीनिडर/साहसीस्पष्टवादीस्वतंत्र विचार वालीशिक्षित व आत्मविश्वासीअन्याय की विरोधी

ये विशेषताएँ कैसे आईं —

  • शिक्षा — कॉलेज/बी.ए. की शिक्षा से उसे आत्मबल व सोचने-समझने की स्वतंत्रता मिली।
  • परिवार — पिता ने उसे पढ़ाया-लिखाया, जिससे उसमें आत्मनिर्भर सोच विकसित हुई।
  • आत्म-गौरव — स्वयं को बिकाऊ ‘वस्तु’ की तरह आँके जाने पर अन्याय सहने से इनकार करने का साहस।
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एकांकी का विस्तार

सृजन
1अंत में रतन कहता है — “बाबूजी, मक्खन…” और परदा गिर जाता है। लेखक ने इस संवाद से अंत क्यों किया होगा?
✒️ उत्तर

यह एक हास्य-व्यंग्य भरा नाटकीय अंत है। पूरे तनावपूर्ण व गंभीर क्षण के ठीक बाद रतन का ‘मक्खन’ लेकर आना एक करारा कटाक्ष है — जिस ‘मक्खन’ (अर्थात् दिखावे व आडंबर) के पीछे रामस्वरूप ने इतनी मेहनत की थी, वह अब पूरी तरह बेमानी हो चुका है। यह अंत दिखावटी समाज पर तीखी चोट करता है और दर्शक को हँसी के साथ-साथ सोचने पर भी छोड़ देता है। ऐसा अप्रत्याशित अंत नाटकीय प्रभाव को और गहरा कर देता है।

2यदि परदा दोबारा उठ जाए तो अगला दृश्य क्या होगा? अनुमान लगाइए और लिखिए।
✒️ नमूना अनुमान

परदा उठने पर दिखता है — रामस्वरूप कुर्सी पर बैठे हैं, चेहरे पर पछतावा। प्रेमा रोती हुई उमा को सीने से लगाती है, पर उमा शांत व दृढ़ है। थोड़ी देर बाद रामस्वरूप उठते हैं और बेटी के पास आकर भावुक होकर कहते हैं कि उन्होंने उसे ‘तौलने’ की भूल की — आज उसके स्वाभिमान ने उन्हें सच्चाई का आईना दिखा दिया है। उमा मुस्कुराकर कहती है कि वह अब किसी ‘खरीदार’ की प्रतीक्षा नहीं करेगी, बल्कि अपनी शिक्षा व योग्यता के बल पर आत्मनिर्भर बनेगी और अपने जैसे विचारों वाले जीवनसाथी का ही चुनाव करेगी। माता-पिता गर्व से सिर हिलाते हैं — और इस बार परदा एक नई आशा के साथ गिरता है।

🔡

व्याकरण — मेरे शब्द

नए शब्द, अनुमानित अर्थ व कोशगत अर्थ
✒️ नमूना (एकांकी से चुने पाँच शब्द)
शब्दवाक्य-प्रयोगकोशगत अर्थ
अधेड़दरवाज़े से एक अधेड़ उम्र के सज्जन भीतर आए।आधी/ढलती उम्र का
दकियानूसीउनके दकियानूसी विचार आज के समाज से मेल नहीं खाते।पुराने विचारों वाला, पुराना
फितरतीवह फितरती आदमी हर बात में चालाकी ढूँढ़ लेता है।चालबाज, प्रकृतिगत
तकल्लुफ़आप मेरे घर में तकल्लुफ़ न कीजिए, यह तो अपना ही घर है।बनावट, औपचारिक शिष्टाचार
निहायतयह काम निहायत ज़रूरी है, इसे टाला नहीं जा सकता।अत्यधिक, बहुत ज़्यादा

आप एकांकी से अपने पाँच नए शब्द चुनकर, पहले उनके अनुमानित अर्थ और फिर शब्दकोश से सही अर्थ अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।

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भाषा में मुहावरे

मुहावरे पहचानिए व नए वाक्य बनाइए
✒️ उत्तर
मुहावराअर्थनया वाक्य
भीगी बिल्ली की तरहडरा-सहमा/दबा हुआअध्यापक के सामने शरारती छात्र भीगी बिल्ली की तरह बैठा रहा।
मुँह फुलानानाराज़ होना, रूठनाज़रा-सी बात पर वह मुँह फुलाकर बैठ गई।
किस मर्ज की दवा होनाकिसी काम का न होना (व्यंग्य)जब तुम मदद ही नहीं कर सकते, तो तुम किस मर्ज की दवा हो?
सिर चढ़ानाअधिक लाड़ देकर बिगाड़नामाता-पिता ने बच्चे को इतना सिर चढ़ा रखा है कि वह किसी की नहीं सुनता।
सब-कुछ उगलनासारा भेद/राज़ खोल देनापुलिस के पूछते ही चोर ने सब-कुछ उगल दिया।
काँटों में घसीटनासंकोच/शर्मिंदगी में डालनाइतनी तारीफ़ करके आपने तो मुझे काँटों में घसीट दिया।
इज्जत उतारनाअपमानित करनाभरी सभा में किसी की इज्जत उतारना उचित नहीं।
मुँह छिपाकर भागनाशर्म के मारे भाग जानाचोरी पकड़ी जाने पर वह मुँह छिपाकर भाग गया।
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संदर्भ में शब्द

“बाप सेर है तो लड़का सवा सेर।”
✒️ उत्तर

एकांकी में यह कहावत नकारात्मक अर्थ में आई है (पिता-पुत्र दोनों ही रूढ़िवादी)। इसका सकारात्मक प्रयोग भी हो सकता है —

“पिता प्रसिद्ध डॉक्टर हैं और उनका बेटा उनसे भी अधिक प्रतिभाशाली निकला — सच ही कहा है, बाप सेर तो बेटा सवा सेर!”

अर्थ — जब पुत्र अपने योग्य पिता से भी बढ़कर गुणी या होनहार निकले।

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आप भी संवाददाता

गतिविधि — मार्गदर्शन
✒️ नमूना संकेत

1. उमा का साक्षात्कार — आप संवाददाता बनकर उमा से पूछ सकते हैं: “आपने भरी महफ़िल में सच कहने का साहस कैसे जुटाया?”, “शिक्षा ने आपको क्या दिया?”, “आप युवा लड़कियों को क्या संदेश देना चाहेंगी?” — उमा निडरता व आत्मसम्मान से उत्तर देगी। इसी तरह रामस्वरूप व प्रेमा से उनके पछतावे पर, गोपालप्रसाद से उनकी सोच पर सवाल किए जा सकते हैं।

2. जीवंत प्रसारण (लाइव रिपोर्ट) — “नमस्कार दर्शकों! मैं उमा जी के घर से बोल रहा/रही हूँ। अभी-अभी यहाँ एक रिश्ते की बातचीत बेहद नाटकीय मोड़ पर पहुँची — एक पढ़ी-लिखी, स्वाभिमानी लड़की ने रूढ़िवादी सोच को करारा जवाब दिया है…” — इस तरह घटनाक्रम का सजीव वर्णन कीजिए।

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भाषा संगम

‘मक्खन’ शब्द विभिन्न भारतीय भाषाओं में
✒️ ‘मक्खन’ शब्द — भाषावार
भाषाशब्दभाषाशब्द
हिंदीमक्खननेपालीनौनी, माखन
संस्कृतनवनीतम्बांग्लामाखन, ननी
पंजाबीमक्खणअसमियामाखन
उर्दूमक्खनमणिपुरीमाखोन
कश्मीरीठॅन्यओड़िआलहुणी, मक्खन
सिंधीमखणुतेलुगुवॆन्नै
मराठीलोणीतमिलवॆर्ण्णय्
गुजरातीमाखण, नवनीतमलयालमवेण्ण
कोंकणीलोणीकन्नड़वेण्णे

अन्य भाषाओं में — अंग्रेज़ी: Butter। आप ‘मक्खन’ का शब्द व यह वाक्य अपनी मातृभाषा में भी लिखिए: “मक्खन वाले की दुकान दूर है।”

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खोजबीन

और जानने के लिए
📎 संदर्भ-कड़ियाँ

एकांकी विधा तथा ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी को और गहराई से समझने के लिए इन कड़ियों का उपयोग कीजिए —

इन्हें देख-समझकर एकांकी के मंचन, संवाद-शैली व पात्रों के हाव-भाव पर ध्यान दीजिए।

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