आखिरी चट्टान तक
विवेकानंद चट्टान पर सूर्योदय — तीन सागरों का संगम-स्थल, कन्याकुमारी
मेरे उत्तर मेरे तर्क
- (क) विवेकानंद चट्टान से
- (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से ✔
- (ग) पच्छिमी क्षितिज से
- (घ) सैंड हिल से
सैंड हिल से अरब सागर की ओर का विस्तार एक ऊँचे टीले की ओट में था। लेखक एक के बाद एक कई टीले पार करता गया और अंततः एक ऊँचे टीले पर पहुँचकर उसने खुला विस्तार देखा, जहाँ सूर्य पानी से थोड़ा ही ऊपर था। उसी ऊँचे टीले पर बैठकर उसने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य देखा।
- (क) मौन हो जाना
- (ख) विस्मित हो जाना ✔
- (ग) भ्रमित हो जाना
- (घ) आशंकित होना
तीनों ओर फैले अनंत जल-विस्तार और प्रकृति की भव्यता को देखकर लेखक इतना विस्मित (अभिभूत) हो गया कि उसे अपने अस्तित्व का बोध ही नहीं रहा। वह स्वयं उस दृश्य का एक हिस्सा बन गया — यह गहन विस्मय की मनःस्थिति है।
- (क) करुणा
- (ख) विनम्रता
- (ग) आत्मीयता
- (घ) संतुष्टि ✔
कई टीले पार करने के अपने प्रयत्न की सफलता पर लेखक को गहरी संतुष्टि और उपलब्धि का भाव हुआ — मानो उसने संसार की सबसे ऊँची चोटी को सबसे पहले फतह किया हो। यह आत्म-संतोष का भाव है।
- (क) बलखाती लहरों का
- (ख) सागर की व्यापकता का ✔
- (ग) सूर्यास्त के दृश्य का
- (घ) पच्छिमी क्षितिज का
तीनों ओर क्षितिज तक केवल पानी-ही-पानी फैला था। यह वाक्य सागर की उस असीम व्यापकता एवं शक्ति को व्यक्त करता है — विस्तार में छिपी शक्ति और शक्ति में छिपा विस्तार दोनों एक साथ।
- (क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
- (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है। ✔
- (ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
- (घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
लेखक केवल भूगोल या दृश्य का वर्णन नहीं करता, बल्कि उन दृश्यों के साथ अपने मन के विस्मय, रोमांच, भय, उदासी और आत्म-चेतना को भी जोड़ता है। इस तरह यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ देता है।
मेरी समझ मेरे विचार
सैंड हिल से सामने का विस्तार तो दिखाई दे रहा था, परंतु अरब सागर की ओर एक और ऊँचा टीला उस विस्तार को ओट में लिए था। लेखक चाहता था कि सूर्यास्त को पूरे खुले विस्तार की पृष्ठभूमि में देखे, बिना किसी रुकावट के। इसी इच्छा से वह आगे बढ़ता गया। उसका मन हर अगले टीले पर यही सोचता रहा कि शायद अब खुला क्षितिज नजर आ जाएगा — यही जिज्ञासा और संपूर्ण दृश्य पाने की चाह उसका मूल कारण थी।
- कन्याकुमारी की लगभग आठ हजार की आबादी में चार-पाँच सौ शिक्षित नवयुवक बेकार थे, जिनमें लगभग सौ ग्रेजुएट थे।
- इन बेरोजगार युवकों का मुख्य काम नौकरियों के लिए अर्ज़ियाँ देना और आपस में बहस करना था।
- एक ग्रेजुएट युवक फोटो-एल्बम बेचता था; अन्य भी छोटे-मोटे काम करते थे। वे ‘सीपियों का गूदा खाते और दार्शनिक सिद्धांतों पर बहस करते’ थे।
- मछुआरे (मल्लाह) रबड़ के पेड़ के तनों से बनी छोटी नाव चलाते थे।
- स्थानीय युवतियाँ टोकरियों में शंख और मालाएँ बेचती थीं तथा सूर्योदय भी देखती थीं।
इस प्रकार लेखक ने सुंदर प्राकृतिक दृश्य के साथ-साथ वहाँ की बेरोजगारी और संघर्षपूर्ण जन-जीवन की कठोर सच्चाई भी दिखाई।
लेखक खुले विस्तार में सूर्यास्त देखने के लिए थककर भी, एक के बाद एक कई टीले पार करता रहा। आखिरकार जब वह उस ऊँचे टीले पर पहुँचा जहाँ से खुला विस्तार और डूबता सूर्य साफ दिखाई दिया, तो उसकी सारी मेहनत सफल हुई। ‘प्रयत्न की सार्थकता’ का अभिप्राय है कि उसके निरंतर प्रयास का अंततः वांछित परिणाम मिल जाना — यही सफलता उसे गहरी संतुष्टि दे गई।
- तीन सागरों का संगम: अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी का मिलन-स्थल तथा तीनों ओर क्षितिज तक फैला अनंत जल।
- अनोखे रंगों की रेत: समुद्र-तट पर एक-एक इंच पर बदलते कितने ही अनाम रंग — जैसे काली घटा और लाल आँधी को मिलाकर ढाल दिया गया हो।
- सूर्यास्त के बदलते रंग: पानी पर ‘सोना’, फिर ‘लहू’, फिर बैंगनी और अंत में काला पड़ता रंग।
- रेत पर अपने पहले पैरों के निशान: लगा जैसे रेत पहली बार उन निशानों से टूटी हो।
ये दृश्य लेखक के लिए पूर्णतः नए, विस्मयकारी और रोमांचक अनुभव थे।
यह अंश दिखाता है कि शारीरिक थकान के बावजूद लेखक ने अपने लक्ष्य (खुला विस्तार देखने) के लिए हार नहीं मानी।
बढ़ते समुद्र और खतरे के बीच भी लेखक ने धैर्य और साहस बनाए रखा तथा सुरक्षित रास्ता खोज निकाला — यह उसकी मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है।
बढ़ते समुद्र और ऊँची लहरों से बचता हुआ लेखक — यात्रा का रोमांच एवं संघर्ष
यात्रा का वृत्तांत — विधा से संवाद
| तत्त्व | ‘आखिरी चट्टान तक’ में |
|---|---|
| 1. दृश्य-वर्णन | समुद्र, चट्टानें, लहरों, आकाश एवं रंग-बिरंगी रेत का जीवंत चित्रण |
| 2. आत्मानुभूति व भावनाएँ | विस्मय, रोमांच, भय, आत्म-संवेदना; अपने अस्तित्व का बोध; प्रकृति से संवाद |
| 3. सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य | विवेकानंद चट्टान, स्थानीय बेरोजगार युवक, मंदिर एवं अर्घ्य जैसी धार्मिक परंपराएँ |
| 4. जीवन-दर्शन | “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति”, आत्म-चेतना, क्षणभंगुरता व उदासी |
| 5. शैलीगत विशेषताएँ | सजीव-प्रवाहपूर्ण भाषा, दृश्यात्मकता, रूपक-उपमा-प्रतीक, रंगों का भावात्मक प्रयोग |
| 6. रोमांच व संघर्ष | लहरों से संघर्ष, अँधेरे में भटकने का भय, सुरक्षित लौटने की चिंता |
सुझाव: इन्हीं छह बिंदुओं के आधार पर अपनी किसी यात्रा (जैसे किसी पहाड़, नदी, समुद्र या मेले की यात्रा) के अनुभव लिखिए।
| यात्रा-वृत्तांत | स्थान | रचनाकार |
|---|---|---|
| किन्नर देश में | हिमाचल प्रदेश का किन्नौर | राहुल सांकृत्यायन |
| मेरी तिब्बत यात्रा | तिब्बत | राहुल सांकृत्यायन |
| आखिरी चट्टान तक | कन्याकुमारी (तमिलनाडु) | मोहन राकेश |
| अरे यायावर रहेगा याद | विभिन्न यात्राएँ | अज्ञेय (सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन) |
| चीड़ों पर चाँदनी | हिमालयी क्षेत्र | निर्मल वर्मा |
सुझाव: पुस्तकालय एवं शिक्षक की सहायता से और भी यात्रा-वृत्तांत खोजकर सूची बढ़ाएँ।
मेरे देश की धरती
भारत के मुख्य भूमि वाले 9 तटवर्ती राज्य हैं —
| तट | राज्य |
|---|---|
| पश्चिमी तट (अरब सागर) | गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल |
| पूर्वी तट (बंगाल की खाड़ी) | तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल |
इनके अतिरिक्त तटवर्ती केंद्रशासित प्रदेश — दमन-दीव, पुडुचेरी, लक्षद्वीप तथा अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह। इन्हें भारत के मानचित्र पर उनकी स्थिति के अनुसार चिह्नित कीजिए।
| पर्यटन स्थल | राज्य | क्षेत्र | जलवायु | अनुकूल समय |
|---|---|---|---|---|
| कन्याकुमारी | तमिलनाडु | समुद्री | गर्म-आर्द्र | अक्टूबर–मार्च |
| शिमला | हिमाचल प्रदेश | पर्वतीय | ठंडी | मार्च–जून |
| गोवा | गोवा | समुद्री | गर्म-आर्द्र | नवंबर–फरवरी |
| जयपुर | राजस्थान | मैदानी/मरुस्थल | शुष्क | अक्टूबर–मार्च |
आप अपनी रुचि के अनुसार इस सूची में और स्थान जोड़ सकते हैं।
कन्याकुमारी भारत के तमिलनाडु राज्य का दक्षिणतम तटीय शहर है, जहाँ अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी — तीनों मिलते हैं। यहाँ का परिवेश समुद्री है — नारियल के झुरमुट, रंग-बिरंगी रेत, चट्टानें और सुंदर सूर्योदय-सूर्यास्त। प्रमुख पर्यटन स्थल हैं — विवेकानंद रॉक मेमोरियल, कुमारी अम्मन मंदिर और तिरुवल्लुवर प्रतिमा। यहाँ का जन-जीवन मछली पकड़ने, पर्यटन और हस्तशिल्प (शंख-माला) पर आधारित है।
भिन्नता (नमूना): यदि मैं किसी मैदानी या पर्वतीय क्षेत्र में रहता हूँ तो वहाँ समुद्र नहीं होगा; जलवायु, भोजन, भाषा और रोजगार के साधन भी कन्याकुमारी से भिन्न होंगे। अपने राज्य/शहर की स्थिति के अनुसार यह तुलना स्वयं लिखें।
कन्याकुमारी भारत की मुख्य भूमि (mainland) का दक्षिणतम बिंदु है। परंतु यदि द्वीपों सहित संपूर्ण भारत की बात करें, तो भारत का दक्षिणतम बिंदु ‘इंदिरा पॉइंट’ है, जो अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के ग्रेट निकोबार द्वीप पर स्थित है। इस प्रकार ‘आखिरी चट्टान’ मुख्य भूमि का छोर है, जबकि देश का वास्तविक दक्षिणतम छोर इंदिरा पॉइंट है।
स्वामी विवेकानंद की स्मृति में 1970 में बनी विवेकानंद रॉक मेमोरियल के पास वाली चट्टान पर तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की विशाल प्रतिमा (लगभग 133 फुट ऊँची) स्थापित की गई, जिसका अनावरण सन् 2000 में हुआ। अब यह दोनों स्मारक मिलकर कन्याकुमारी की पहचान बन गए हैं और देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। इस प्रकार चट्टान का स्वरूप पहले से कहीं अधिक भव्य एवं विस्तृत हो गया है।
हस्तशिल्प कौशल
- शिल्प का नाम: जैसे — मिट्टी के बर्तन / बाँस की टोकरियाँ / चूड़ियाँ / शंख-माला आदि।
- कब से कार्य कर रहे हैं: प्रायः पीढ़ी-दर-पीढ़ी (खानदानी पेशा)।
- प्रशिक्षण: अधिकांश ने यह कला अपने परिवार के बड़ों से सीखी होती है।
- महिलाओं की साझेदारी: घर की महिलाएँ रंगाई, सजावट एवं बिक्री में सहयोग देती हैं।
- सामग्री, तकनीक, लागत व विपणन: स्थानीय कच्चा माल, हाथ की तकनीक, कम लागत; मेलों/स्थानीय बाजार में बिक्री।
- संस्थागत प्रशिक्षण: कुछ ने सरकारी हस्तकला केंद्रों से औपचारिक प्रशिक्षण भी लिया होता है।
- कारीगर अपने उत्पाद सीधे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बेच सकते हैं, जिससे बड़ा बाजार मिल जाता है।
- बिचौलिए हटने से कारीगरों को उचित मूल्य एवं अधिक लाभ मिलता है।
- देश-विदेश के ग्राहक तक पहुँच होने से माँग एवं आय दोनों बढ़ती हैं।
- घर बैठे ऑर्डर लेने-भेजने से समय और परिवहन की बचत होती है।
- पारंपरिक कलाओं को नई पहचान एवं संरक्षण मिलता है।
सरकार कारीगरों को प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता एवं ऋण उपलब्ध कराती है; हस्तशिल्प मेलों एवं प्रदर्शनियों का आयोजन करती है; ऑनलाइन बिक्री के लिए मंच उपलब्ध कराती है; तथा कारीगरों को पहचान-पत्र, बीमा एवं पेंशन जैसी सुविधाएँ देती है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’ तथा विभिन्न कौशल-विकास योजनाओं के माध्यम से भी पारंपरिक हस्तकला एवं कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहन दिया जाता है। इस विषय पर कक्षा में चर्चा कीजिए।
मिलकर चलें
- दृष्टिबाधित साथियों को नए स्थानों पर मार्ग पहचानने में कठिनाई।
- चलने-फिरने में अक्षम साथियों को सीढ़ियों, ऊबड़-खाबड़ रास्तों एवं वाहनों में चढ़ने-उतरने में परेशानी।
- श्रवणबाधित साथियों को घोषणाएँ सुनने एवं दिशा-निर्देश समझने में दिक्कत।
- शौचालय, बैठने एवं विश्राम की सुलभ (accessible) सुविधाओं का अभाव।
- भीड़भाड़ में अलग हो जाने या असुरक्षित महसूस करने का भय।
- व्हीलचेयर, रैंप एवं लिफ्ट जैसी सुलभ सुविधाओं का प्रबंध।
- दृष्टिबाधित साथियों के लिए ब्रेल संकेत, स्पर्श-नक्शे एवं साथ चलने वाला सहायक।
- श्रवणबाधित साथियों के लिए लिखित/दृश्य निर्देश एवं सांकेतिक भाषा की सहायता।
- यात्रा की पहले से योजना बनाना तथा विश्राम-स्थलों का चयन।
- एक साथी की जिम्मेदारी तय करना जो उनके साथ रहे और सहयोग करे।
- धैर्य, संवेदनशीलता एवं सम्मानपूर्ण व्यवहार सबसे आवश्यक है।
अपने द्वारा दिए गए सुझावों को विद्यालय के विशेष शिक्षा शिक्षक को दिखाइए और उनकी राय लीजिए कि वे कितने प्रभावी हैं तथा उनमें क्या सुधार हो सकता है। फिर कक्षा के विशेष आवश्यकता वाले साथियों से भी बात करके उनकी वास्तविक आवश्यकताएँ समझिए। इससे आपके सुझाव और अधिक व्यावहारिक एवं उपयोगी बन जाएँगे, तथा सहयोग एवं समानता का भाव विकसित होगा।
प्रकृति की ओर · अनुभव · चर्चा
| आधार | सूर्योदय | सूर्यास्त |
|---|---|---|
| समय एवं भाव | नई शुरुआत, आशा एवं उत्साह | दिन का अंत, शांति एवं हल्की उदासी |
| रंग | लाली धीरे-धीरे फैलकर उजाला बनती है | सुनहरा रंग धीरे-धीरे लाल, बैंगनी, फिर अंधकार में बदलता है |
| वातावरण | पक्षियों की चहचहाहट, ठंडी ताजी हवा | शांत, ठहराव-भरा, घरों की ओर लौटता जीवन |
सूर्योदय जहाँ जीवन में नई ऊर्जा भरता है, वहीं सूर्यास्त मन को शांति और चिंतन की ओर ले जाता है। दोनों ही दृश्य प्रकृति की अनुपम सुंदरता का अनुभव कराते हैं। एक दिन प्रातः जल्दी उठकर सूर्योदय और शाम को सूर्यास्त देखकर अपना अनुभव स्वयं भी लिखिए।
यात्रा-वृत्तांत के छह तत्त्वों (दृश्य-वर्णन, आत्मानुभूति, सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य, जीवन-दर्शन, शैली, रोमांच-संघर्ष) को ध्यान में रखकर अपने किसी घूमे हुए प्रिय स्थान — जैसे किसी पहाड़, झील, समुद्र-तट या ऐतिहासिक स्थल — का सजीव यात्रा-संस्मरण लिखिए। उसमें वहाँ के दृश्य, अपनी भावनाएँ और रोचक अनुभव शामिल कीजिए।
“एक लहर मेरे पैरों को भिगो गई तो सहसा मुझे खतरे का एहसास हुआ” — ऐसी अप्रत्याशित स्थितियों में व्यक्ति में निम्न गुण आवश्यक हैं —
- धैर्य एवं संयम: घबराने के बजाय शांत रहकर सोचना।
- साहस: भय पर काबू पाकर निर्णय लेना।
- सूझबूझ एवं त्वरित निर्णय: सुरक्षित रास्ता तुरंत चुनना।
- आत्मविश्वास एवं हार न मानने की प्रवृत्ति।
‘यात्राएँ हमें समृद्ध करती हैं’ — इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए और अपने अनुभव साझा कीजिए।
व्याकरण की बात
| वाक्य | क्रिया-विशेषण | क्रिया (जिसकी विशेषता) |
|---|---|---|
| मैं जल्दी-जल्दी चलने लगा। (उदाहरण) | जल्दी-जल्दी | ‘चलने लगा’ क्रिया की विशेषता (रीतिवाचक) |
| (क) बल खाती लहरें रास्ते की नुकीली चट्टानों से कटती हुई आती थीं। | कटती हुई | ‘आती थीं’ क्रिया की विशेषता (रीतिवाचक — किस प्रकार आती थीं) |
| (ख) यात्रियों की कितनी ही टोलियाँ उस दिशा में जा रही थीं। | उस दिशा में | ‘जा रही थीं’ क्रिया की विशेषता (स्थानवाचक — किस ओर जा रही थीं) |
| (ग) मैं देर तक भारत के स्थल-भाग की आखिरी चट्टान को देखता रहा। | देर तक | ‘देखता रहा’ क्रिया की विशेषता (कालवाचक — कितनी देर देखता रहा) |
याद रखें: जैसे विशेषण संज्ञा/सर्वनाम की विशेषता बताते हैं, वैसे ही क्रिया-विशेषण क्रिया की विशेषता बताते हैं (रीति, स्थान, काल, परिमाण आदि)।
आओ नए वाक्य बनाएँ
| शब्द | अर्थ | नया वाक्य |
|---|---|---|
| क्षितिज | जहाँ धरती और आकाश मिलते दिखते हैं; दृष्टि-सीमा | सूरज क्षितिज पर डूबते ही आकाश लाल हो गया। |
| झुरमुट | पास-पास उगे पेड़-झाड़ों का समूह | बच्चे आम के झुरमुट में छिपकर खेल रहे थे। |
| ढलान | नीचे की ओर झुकी हुई भूमि | पहाड़ की ढलान पर फिसलकर लड़का गिर पड़ा। |
| श्रृंखला | लगातार जुड़ी हुई कड़ी/पंक्ति, सिलसिला | दूर तक पर्वतों की एक लंबी श्रृंखला फैली थी। |
| बीहड़ | ऊबड़-खाबड़, विकट एवं वीरान | डाकू बीहड़ इलाकों में छिपे रहते थे। |
गतिविधियाँ, झरोखे से एवं खोजबीन
यदि हमारी भाषा एक-दूसरे से अलग हो, तो मैं हाव-भाव और संकेतों (sign language) का प्रयोग करूँगा — हाथ से दिशा दिखाना, सिर हिलाकर हाँ/ना कहना आदि। मैं मोबाइल के अनुवाद ऐप (Google Translate) या नक्शे की मदद लूँगा। यदि कोई वस्तु या स्थान बताना हो तो उसका चित्र बनाकर या दिखाकर समझाऊँगा। मुस्कुराहट और धैर्यपूर्ण व्यवहार से उस यात्री को सहज महसूस कराऊँगा और किसी ऐसे व्यक्ति को ढूँढ़ूँगा जो दोनों भाषाएँ जानता हो।
✦ पधारो म्हारे देश ✦
आकर्षक शीर्षक: अपने क्षेत्र का नाम एवं नारा।
प्रमुख स्थल: ऐतिहासिक/धार्मिक/प्राकृतिक स्थलों की सूची एवं संक्षिप्त परिचय।
विशेषताएँ: स्थानीय भोजन, मेले-त्योहार, हस्तकला।
घूमने का अनुकूल समय एवं पहुँचने के साधन।
आकर्षक चित्र एवं रंग जोड़कर ब्रोशर सजाएँ।
‘झरोखे से’ खंड में हिंदी के प्रसिद्ध रचनाकार निर्मल वर्मा के कुंभ मेले पर आधारित यात्रा-वृत्तांत का एक अंश दिया गया है। इसमें लेखक प्रयाग (इलाहाबाद) में महुँ-अँधेरे की कुंभ-नगरी, पूर्णिमा के चाँद, स्लीपिंग बैग, आश्रम, चौकीदार और संगम जाते श्रद्धालुओं का सजीव एवं संवेदनशील चित्रण करता है। यह अंश दिखाता है कि यात्रा-वृत्तांत में दृश्य के साथ-साथ लेखक की भीतरी अनुभूतियाँ भी कैसे घुली रहती हैं।
सुझाव: यह पूरा यात्रा-वृत्तांत पुस्तकालय/इंटरनेट से ढूँढ़कर पढ़िए।
‘आखिरी चट्टान’ को विवेकानंद चट्टान भी कहा जाता है, क्योंकि यहीं स्वामी विवेकानंद ने ध्यान-समाधि लगाई थी। युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस 12 जनवरी को भारत में ‘राष्ट्रीय युवा दिवस’ तथा ‘राष्ट्रीय युवा सप्ताह’ मनाया जाता है, जिसके अंतर्गत प्रतिवर्ष ‘राष्ट्रीय युवा महोत्सव’ आयोजित होता है।
स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो की विश्व धर्म संसद में भारत एवं हिंदू दर्शन का प्रतिनिधित्व किया, ‘रामकृष्ण मिशन’ की स्थापना की और युवाओं को आत्मविश्वास, सेवा एवं राष्ट्र-निर्माण की प्रेरणा दी। उनके जीवन एवं कार्यों के बारे में पुस्तकालय/इंटरनेट से और जानकारी एकत्र करके कक्षा में चर्चा कीजिए।
संविधान की आठवीं अनुसूची की कुछ भाषाओं में ‘नाव’ — हिंदी: नाव; संस्कृत: नौ/नौका; पंजाबी: बेड़ी; उर्दू: किश्ती/नाव; कश्मीरी: नाव; सिंधी: बेड़ी/किश्ती; मराठी: होड़ी/नाव; गुजराती: नाव/होडी; कोंकणी: बहड़ी; नेपाली: नाउ/नौका/डुड़्रा; बांग्ला: नाओ/नौका; असमिया: नाओ; मणिपुरी: हि; ओड़िआ: नौका/नाआ; तेलुगु: पडव/नाव; तमिल: ओडम्; मलयालम: तोणि; कन्नड़: दोणि।
© आखिरी चट्टान तक — मोहन राकेश · प्रश्न-उत्तर समाधान · @edugrown
