Class 9 Hindi (Ganga) Chapter 1 | Do Bailon Ki Katha | NCERT Solutions दो बैलों की कथा

दो बैलों की कथा — प्रश्न-उत्तर समाधान
गद्य खंड · कक्षा पाठ्यपुस्तक

दो बैलों की कथा

— मुंशी प्रेमचंद
📘 संपूर्ण प्रश्न-उत्तर ✦ विस्तृत व्याख्या 🐂 हीरा & मोती
@edugrown हीरा मोती

हीरा और मोती — मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की कथा के दो नायक

मेरे उत्तर मेरे तर्क

बहुविकल्पीय प्रश्न — सटीक उत्तर एवं कारण
1 कहानी में हीरा और मोती का आपसी संबंध किस गुण को मुख्य रूप से दर्शाता है?
  • (क) प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता
  • (ख) एकता और सहयोग ✔
  • (ग) गर्व और दंभ
  • (घ) विद्रोह और क्रोध
📝 उत्तर एवं तर्क — (ख) एकता और सहयोग

हीरा और मोती पूरी कहानी में एक-दूसरे का साथ निभाते हैं। दोनों मिलकर साँड़ से लड़ते हैं, मोती संकट में हीरा को छोड़कर नहीं भागता और कहता है — “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे हैं।” यही गहरी एकता और सहयोग उनके संबंध की पहचान है, इसलिए (ख) सबसे उपयुक्त है।

2 हीरा-मोती ने नया स्थान स्वीकार क्यों नहीं किया?
  • (क) उन्हें भरपेट भोजन दिया गया।
  • (ख) उन्हें बहुत मोटी रस्सी से बाँधा गया।
  • (ग) मालिक ने बेचा, यह सोचकर उन्हें अपमान लगा। ✔
  • (घ) उन्हें अलग-अलग बाँधा गया।
📝 उत्तर एवं तर्क — (ग)

बैल झूरी से प्रेम करते थे और उसी के घर को अपना घर मानते थे। उन्हें लगा कि मालिक ने उन्हें बेच दिया है — यही बात उनके स्वाभिमान को चोट पहुँचाती है। इसी अपमान-बोध के कारण उन्होंने नाँद में मुँह तक नहीं डाला और नया स्थान अस्वीकार कर दिया।

3 बैलों ने रस्सी तोड़कर घर लौटने का निर्णय क्यों लिया?
  • (क) कष्टों से बचने के लिए
  • (ख) स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए
  • (ग) अभिमान की रक्षा के लिए
  • (घ) अपनापन पाने के लिए ✔
📝 उत्तर एवं तर्क — (घ)

नए घर में उन्हें भोजन और बंधन की चिंता नहीं थी, बल्कि वे झूरी के स्नेह व अपनेपन को खोजते थे। पाठ में आता है — “जिसे उन्होंने अपना घर समझ रखा था, वह आज उनसे छूट गया था।” इसी अपनेपन की तलाश में वे रस्सी तोड़कर झूरी के पास लौटे।

4 गया द्वारा डंडे से मारने पर मोती का आक्रोश किस मानवीय मनोवृत्ति का द्योतक है?
  • (क) स्वाभिमान ✔
  • (ख) अहिंसा
  • (ग) पराधीनता
  • (घ) अन्याय की रक्षा
📝 उत्तर एवं तर्क — (क) स्वाभिमान

झूरी के यहाँ कभी मार न खाने वाले बैलों के लिए गया का अकारण मारना अपमान था। मोती का गुस्सा अपने आहत सम्मान की प्रतिक्रिया है — हल तोड़कर भागना उसके स्वाभिमान का प्रकट रूप है।

5 कहानी में बैलों की ‘मूक-भाषा’ का प्रयोग लेखक ने किस लिए किया?
  • (क) कहानी को रोचक बनाने के लिए
  • (ख) मनुष्य जैसी चेतना दिखाने के लिए ✔
  • (ग) संवादों को छोटा रखने के लिए
  • (घ) कथा में हास्य उत्पन्न करने के लिए
📝 उत्तर एवं तर्क — (ख)

मूक-भाषा के द्वारा लेखक बैलों को विचार, भावना और निर्णय-क्षमता देता है। इससे वे केवल पशु नहीं, बल्कि संवेदनशील, चेतनायुक्त प्राणी बन जाते हैं, जो मनुष्य के समान सोच-समझ रखते हैं।

6 ‘दो बैलों की कथा’ को यदि स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ें, तो हीरा और मोती किसके प्रतीक हो सकते हैं?
  • (क) भारत पर अंग्रेजों के क्रूर और अन्यायपूर्ण शासन के
  • (ख) स्वतंत्रता संग्राम में पशुओं के योगदान के
  • (ग) सत्याग्रह और अहिंसा के आंदोलन के
  • (घ) स्वतंत्रता के लिए भारतीय जनता के संघर्ष के ✔
📝 उत्तर एवं तर्क — (घ)

हीरा-मोती बार-बार बंधन तोड़ते, संघर्ष करते और स्वतंत्रता की ओर बढ़ते हैं — ठीक वैसे ही जैसे गुलामी के विरुद्ध जूझती भारतीय जनता। इसलिए वे स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रही जनता के प्रतीक हैं।

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मेरी समझ मेरे विचार

विस्तृत वर्णनात्मक उत्तर
1 जब बैल नए मालिक के यहाँ गए, तो उन्होंने काम करने से इनकार क्यों कर दिया था?
📝 उत्तर

बैलों को लगा कि झूरी ने उन्हें बेच दिया है, जिससे उनके मन में गहरा अपमान और विद्रोह भर गया। गया का व्यवहार रूखा था — वह मारता था और रूखा सूखा भूसा देता था, जबकि झूरी उन्हें फूल की छड़ी से भी नहीं छूता था। इस अपमान और पराये माहौल के कारण उन्होंने विरोध स्वरूप पाँव न उठाने की मानो कसम खा ली और काम करने से इनकार कर दिया। यह उनके स्वाभिमान और स्वतंत्रता-प्रेम का प्रकटीकरण था।

2 बैलों का घर लौट आना कोई साधारण घटना नहीं है। कैसे?
📝 उत्तर

दूर अनजान गाँव से, बिना किसी मार्गदर्शक के, मोटी रस्सियाँ तोड़कर दोनों बैलों का स्वयं अपने घर पहुँच जाना अद्भुत है। यह घटना दर्शाती है कि उनमें अपार प्रेम, स्मृति-शक्ति और स्वतंत्रता की चाह थी। गाँव के बच्चों ने तालियाँ बजाकर स्वागत किया और उन्हें “पशु-वीर” कहकर अभिनंदन-पत्र देने का निश्चय किया।

झूरी का हृदय स्नेह से भर उठा और उसने दौड़कर दोनों को गले लगा लिया। ऐसा वास्तविक जीवन में भी होता है — पालतू पशु अपने स्नेही मालिक से गहरा भावनात्मक संबंध बना लेते हैं और कई बार लंबी दूरी तय करके घर लौट आते हैं। इसलिए यह घटना असाधारण और महत्वपूर्ण है।

3 ‘कभी-कभी संघर्ष करना आवश्यक हो जाता है’ — इस कथन को कहानी के उदाहरणों से सिद्ध कीजिए।
📝 उत्तर

कहानी बार-बार यही संदेश देती है कि अन्याय के विरुद्ध संघर्ष अनिवार्य हो जाता है। उदाहरण —

  • रस्सी तोड़कर भागना: गया के यहाँ अपमान सहने के बजाय बैल बंधन तोड़कर घर लौट आते हैं।
  • हल तोड़ देना: मार खाने पर मोती हल-जुआ सब तोड़ देता है — यह अन्याय का सक्रिय विरोध है।
  • साँड़ से युद्ध: जान जोखिम में डालकर भी दोनों मिलकर लड़ते हैं और विजयी होते हैं।
  • काँजीहाउस की दीवार तोड़ना: भूखे रहकर भी हीरा-मोती दीवार तोड़ते हैं और नौ-दस प्राणियों को मुक्त कराते हैं।

ये सभी प्रसंग सिद्ध करते हैं कि स्वतंत्रता और सम्मान पाने के लिए कभी-कभी संघर्ष करना ही पड़ता है।

4 हीरा एवं मोती ‘स्वतंत्रता’ और ‘अपनापन’ — दोनों में से किस भावना से अधिक प्रेरित थे? कारण सहित लिखिए।
📝 उत्तर

दोनों भावनाएँ साथ-साथ चलती हैं, परंतु अंततः वे ‘अपनापन’ (स्नेह) से अधिक प्रेरित दिखते हैं। आज़ादी का अनुभव करते ही वे मस्ती में उछलते-कूदते हैं, जो स्वतंत्रता-प्रेम दर्शाता है। किंतु भागकर वे कहीं और नहीं, बल्कि झूरी के घर ही लौटते हैं। नीलाम होते समय भी उन्हें झूरी और उस प्यारी लड़की के प्रेम की याद आती है।

स्वतंत्रता मिलने पर भी वे उसका उपयोग अपने स्नेहपूर्ण घर लौटने में करते हैं — इससे स्पष्ट है कि उनके लिए केवल मुक्ति नहीं, बल्कि स्नेहपूर्ण अपनापन सर्वोपरि था।

5 ‘अत्याचार सहना भी अन्याय में भागीदारी है’ — क्या आप इस कथन से सहमत हैं? कारण सहित बताइए।
📝 उत्तर

हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। जब कोई व्यक्ति चुपचाप अत्याचार सहता रहता है, तो वह अत्याचारी को और निर्भय बना देता है तथा अन्याय को बढ़ावा मिलता है। मौन सहनशीलता अप्रत्यक्ष रूप से अन्याय को स्वीकृति दे देती है।

कहानी में हीरा-मोती चुपचाप अत्याचार नहीं सहते — पाँव न उठाने की कसम खाकर, हल तोड़कर और बंधन तोड़कर वे विरोध करते हैं। प्रेमचंद यही दिखाते हैं कि अन्याय का विरोध करना ही उचित मार्ग है। इसलिए अन्याय सहना भी एक प्रकार से उसका साथ देना है।

6 हीरा और मोती अभिन्न मित्र थे। किन-किन घटनाओं के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है? (कम से कम तीन बिंदु)
📝 उत्तर — तीन प्रमुख प्रमाण
  • मूक-भाषा में बातचीत: दोनों आमने-सामने बैठकर मूक-भाषा में विचारों का आदान-प्रदान करते, एक-दूसरे को चाटकर व सूँघकर प्रेम प्रकट करते थे।
  • संकट में साथ: मोती हीरा को विपत्ति में अकेला छोड़कर नहीं भागता — “आज तुम विपत्ति में पड़ गए, तो मैं तुम्हें छोड़कर अलग हो जाऊँ?”
  • मिलकर लड़ना: साँड़ से युद्ध में दोनों ने मिलकर रणनीति बनाई और एक-दूसरे की रक्षा करते हुए विजय पाई।
  • एक-सी दिनचर्या: साथ खाते, साथ उठते-बैठते; एक मुँह हटाता तो दूसरा भी हटा लेता।
7 कहानी में मालकिन और छोटी लड़की — दोनों के व्यवहार की तुलना कीजिए।
📝 उत्तर
आधारमालकिन (झूरी की स्त्री)छोटी लड़की (भैरों की बेटी)
स्वभावकठोर, क्रोधी, स्वार्थीकोमल, स्नेही, दयालु
बैलों के प्रति‘नमक-हराम’ कहकर सूखा भूसा देती हैचुपके से दो रोटियाँ खिलाती है
आरंभिक व्यवहारबैलों को देखकर जल उठती हैबैलों से आत्मीयता रखती है
संकट मेंनाथ डलवाने की सलाह करती हैगराँव खोलकर भागने में मदद करती है

आरंभ में निर्दयी रहने वाली मालकिन अंत में बदल जाती है और बैलों के लौटने पर स्वयं आकर उनके माथे चूम लेती है। इस प्रकार लड़की का प्रेम तो आरंभ से अंत तक स्थिर रहा, जबकि मालकिन के हृदय में अंततः करुणा जाग उठी।

@edugrown “खोले देती हूँ, चुपके से भाग जाओ…”

रात को वही बालिका हीरा-मोती को दो रोटियाँ खिलाती और उनसे आत्मीयता रखती थी

मेरी कल्पना मेरे अनुमान

कल्पनाशील उत्तर
1 यदि आप वह छोटी लड़की होते, तो बैलों की मदद किस प्रकार करते?
📝 उत्तर (नमूना)

यदि मैं वह छोटी लड़की होती तो सबसे पहले बैलों की भूख मिटाने के लिए चुपके से रोटी, गुड़ और चारा लाकर देती। उन्हें मार से बचाने के लिए बड़ों से प्रार्थना करती कि उन पर अत्याचार न करें। रात में मौका देखकर उनकी रस्सी खोल देती ताकि वे सुरक्षित अपने घर लौट सकें, ठीक वैसे ही जैसे कहानी में लड़की ने गराँव खोलकर उन्हें मुक्त कराया। मैं उन्हें प्रेम और सहारा देकर यह विश्वास दिलाती कि कोई तो है जो उनकी पीड़ा समझता है।

2 “दोनों गधे अभी तक ज्यों-के-त्यों खड़े थे।” — भय और संकोच इंसान को अवसर मिलने पर भी जकड़े रखता है। क्या आप सहमत हैं?
📝 उत्तर

हाँ, मैं सहमत हूँ। दीवार टूटने पर घोड़ियाँ, बकरियाँ और भैंसें भाग गईं, परंतु दोनों गधे डर के मारे वहीं खड़े रहे — “हमें तो डर लगता है, हम यहीं पड़े रहेंगे।” अवसर सामने होने पर भी भय ने उन्हें जकड़े रखा।

यही बात मनुष्यों पर भी लागू होती है। कई बार लोग अच्छे अवसर पाकर भी असफलता या जोखिम के डर से आगे नहीं बढ़ते। मेरे अनुभव में भी कुछ साथी मंच पर बोलने या प्रतियोगिता में भाग लेने का अवसर मिलने पर संकोच के कारण पीछे हट जाते हैं। इसलिए भय-संकोच को त्यागकर साहस से अवसर का उपयोग करना चाहिए।

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मेरे अनुभव मेरे विचार

व्यक्तिगत राय आधारित उत्तर
1 “दोस्तों में घनिष्ठता होते ही धौल-धप्पा होने लगता है। इसके बिना दोस्ती कुछ फुसफुसी, कुछ हल्की-सी रहती है…” — क्या आप सहमत हैं? क्यों?
📝 उत्तर

हाँ, मैं काफी हद तक सहमत हूँ। जब दोस्ती गहरी होती है, तो उसमें हँसी-मजाक, छेड़छाड़ और हल्की नोक-झोंक स्वाभाविक रूप से आ जाती है। यह आपसी विश्वास और निकटता का संकेत है — जैसे हीरा-मोती विनोद के भाव से सींग मिला लिया करते थे।

मेरे अनुभव में भी मेरे जो मित्र सबसे करीब हैं, उन्हीं के साथ सबसे ज्यादा मस्ती-मजाक होती है। औपचारिक और दूरी वाली दोस्ती में यह अपनापन नहीं रहता। इसलिए हल्की छेड़छाड़ दोस्ती को और मजबूत बनाती है — बशर्ते वह स्नेहपूर्ण हो, चोट पहुँचाने वाली नहीं।

2 “गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए।” बनाम “बैरी को ऐसा मारना चाहिए कि फिर न उठे।” — आप किसके साथ हैं — हीरा, मोती या दोनों के? क्यों?
📝 उत्तर

दोनों के विचारों में अपना-अपना सत्य है, परंतु मैं अधिकतर हीरा के साथ हूँ। हीरा करुणा, उदारता और मर्यादा का प्रतीक है — गिरे हुए शत्रु पर वार न करना भारतीय वीरता की उच्च परंपरा है।

परंतु जहाँ शत्रु बार-बार अन्याय करे और सुधरने को तैयार न हो, वहाँ मोती का व्यावहारिक विचार भी सही लगता है कि अन्याय का दृढ़ता से सामना करना चाहिए। इसलिए आदर्श रूप में हीरा का करुणामय मार्ग श्रेष्ठ है, किंतु आत्मरक्षा के समय मोती जैसा साहस भी आवश्यक हो जाता है।

3 “हम और तुम इतने दिनों एक साथ रहे…” — क्या कभी आपने किसी विपत्ति का सामना अपने किसी मित्र या परिजन के साथ मिलकर किया है? बताइए।
📝 उत्तर (नमूना)

हाँ, एक बार परीक्षा के दौरान मेरा मित्र अचानक बीमार पड़ गया था। मैंने उसकी पढ़ाई में मदद की, अपने नोट्स साझा किए और उसका हौसला बढ़ाया। उसी प्रकार जब मैं एक बार खेल प्रतियोगिता में घबरा गया था, तो उसने मेरा साथ देकर मुझे संभाला। हीरा-मोती की तरह विपत्ति में एक-दूसरे का साथ देने से न केवल समस्या आसान हो गई, बल्कि हमारी मित्रता और भी गहरी हो गई। सच्ची मित्रता विपत्ति में ही परखी जाती है।

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कहानी की पड़ताल — विधा से संवाद

कहानी की रचना & सौंदर्य
कहानी की रचना — तालिका पूर्ति
📝 उत्तर
तत्त्वविवरण
शीर्षक और लेखकदो बैलों की कथा — प्रेमचंद
विषयबैलों के माध्यम से मित्रता, स्वाभिमान, स्वतंत्रता और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष
क्रिया/कार्यबैलों का बिकना, भागकर लौटना, अत्याचार सहना, विद्रोह करना, साँड़ से युद्ध, काँजीहाउस से मुक्ति और घर वापसी
परिवेश/देश-काल और मुख्य विचारग्रामीण भारत, परतंत्रता का काल; मुख्य विचार — स्वतंत्रता सहज नहीं मिलती, उसके लिए संघर्ष करना पड़ता है
चरित्र/पात्रहीरा, मोती (बैल), झूरी, झूरी की स्त्री, गया, छोटी लड़की, दढ़ियल आदि
परिणामबैल अंततः अपने घर झूरी के पास लौट आते हैं; स्वतंत्रता और अपनापन दोनों की विजय होती है
कहानी का सौंदर्य — हर विशेषता के लिए ‘उदाहरण 2’
📝 उत्तर — खोजे गए नए उदाहरण
विशेषताउदाहरण 2 (कहानी से)
चित्रात्मक भाषा“दोनों की आँखों में विद्रोहमय स्नेह झलक रहा है।”
संवादात्मकता“अब तो नहीं सहा जाता, हीरा!” — “क्या करना चाहते हो?”
विरोधाभासदो-दो गाल सूखा भूसा खाकर भी दोनों दुर्बल न होते थे (प्रेम के कारण)
व्यंग्य“ऋषियों-मुनियों के जितने गुण हैं, वे सभी उसमें पराकाष्ठा को पहुँच गए हैं; पर आदमी उसे बेवकूफ कहता है।”
संघर्षहीरा का काँजीहाउस की दीवार सींगों से तोड़ना (बैल बनाम बंधन)
अतिशयोक्ति“एक-एक झटके में रस्सियाँ टूट गईं” / “उसकी टिटकार पर दोनों उड़ने लगते थे”
संदेह/उलझन“दोनों गधे अभी तक खड़े सोच रहे थे कि भागें या न भागें”
कहानी की रचना — प्रारंभ में मिलने वाले संकेत/बिंदु ढूँढ़कर लिखिए।
📝 उत्तर
  • मुख्य विचार का संकेत: आरंभ में गधे और बैल की सहनशीलता तथा सीधेपन की चर्चा — कहानी के केंद्रीय भाव (अन्याय व सहनशीलता) का सूत्र।
  • पात्रों का परिचय: “झूरी के दोनों बैलों के नाम थे हीरा और मोती” — मुख्य पात्र सामने आ जाते हैं।
  • भाषा का संकेत: ‘मूक-भाषा’, ‘बछिया के ताऊ’ जैसे मुहावरेदार और व्यंग्यात्मक शब्द आरंभ में ही शैली का परिचय देते हैं।
  • परिवेश: गाँव, हल, गाड़ी, नाँद आदि से ग्रामीण-कृषक परिवेश स्पष्ट हो जाता है।
🇮🇳

कहानी का समय और समाज

स्वतंत्रता आंदोलन से मिलान
कहानी के वाक्यों का स्वतंत्रता आंदोलन से सही मिलान:
📝 उत्तर — मिलान
1. जोर तो मारता ही जाऊँगा, चाहे कितने ही बंधन पड़ते जाएँ।
6. स्वतंत्रता सेनानी बार-बार जेल गए, फाँसी पर चढ़े, पर संघर्ष छोड़ने को तैयार नहीं हुए।
2. मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।
5. स्वतंत्रता के लिए प्राण देना स्वीकार्य था, पर अंग्रेजों की सेवा में लगना अस्वीकार्य।
3. हमारी जान को कोई जान ही नहीं समझता।
4. दासता के काल में भारतीयों के प्राण, सम्मान और अधिकारों की कोई महत्ता नहीं थी।
4. दोनों मित्रों की आँखों में, रोम-रोम में विद्रोह भरा हुआ था।
2. भारतीय जनता के मन में ब्रिटिश शासन के प्रति विद्रोह धीरे-धीरे गहराता गया।
5. इतना तो हो ही गया कि नौ-दस प्राणियों की जान बच गई। वे सब तो आशीर्वाद देंगे।
1. भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने बलिदान दिया, जिससे लाखों भारतीयों में आजादी की प्रेरणा जगी।
6. साँड़ पूरा हाथी है… पर दोनों मित्र जान हथेलियों पर लेकर लपके।
3. ब्रिटिश साम्राज्य बहुत शक्तिशाली था, फिर भी स्वतंत्रता सेनानियों ने साहसपूर्वक उसका सामना किया।
⚖️

पशुओं के लिए कानून

न्याय, अधिकार और पत्र-लेखन
1 बैलों का काँजीहाउस में बंद होना न्याय और अन्याय — दोनों को दर्शाता है। कैसे?
📝 उत्तर

न्याय की दृष्टि से: काँजीहाउस का उद्देश्य था दूसरों के खेत खाने वाले या अनाथ पशुओं को रोकना, ताकि किसानों की फसल सुरक्षित रहे — यह व्यवस्था (कानून) उचित है।

अन्याय की दृष्टि से: वहाँ बंद पशुओं को दिनों तक चारा नहीं दिया जाता, वे भूख से मर जाते हैं और कमजोर होकर गिर पड़ते हैं। निर्दोष प्राणियों को बिना भोजन-पानी के तड़पाना और अंत में बेच देना घोर अमानवीय अन्याय है। इस प्रकार एक ही व्यवस्था में नियम तो सही है, पर उसका क्रूर क्रियान्वयन अन्यायपूर्ण है।

2 यदि आपको अवसर मिले तो आप बैलों की ओर से कौन-कौन से कानूनी अधिकार माँगेंगे?
📝 उत्तर — माँगे जाने वाले अधिकार
  • भोजन एवं स्वच्छ पानी पाने का अधिकार।
  • मार-पीट और क्रूरता से सुरक्षा का अधिकार।
  • उचित आराम तथा अत्यधिक श्रम न कराए जाने का अधिकार।
  • बीमार या घायल होने पर इलाज (पशु-चिकित्सा) का अधिकार।
  • स्वच्छ एवं सुरक्षित रहने की जगह का अधिकार।
  • बिना भोजन के बंद न रखे जाने तथा अकारण न बेचे जाने का अधिकार।
3 हीरा-मोती की ओर से थानाध्यक्ष को शिकायती पत्र लिखिए।
✉️ नमूना पत्र

सेवा में,
थानाध्यक्ष महोदय,
(पुलिस थाना — आपका क्षेत्र)

विषय: हमारे साथ हुए अन्याय एवं क्रूरता की शिकायत।

महोदय,

हमारा नाम हीरा और मोती है। हम झूरी काछी के पालतू बैल हैं। हमारे साथ बहुत अन्याय हुआ है। हमारे मालिक के साले गया ने हमें मारा-पीटा, सूखा भूसा देकर भूखा रखा और अपमानित किया। बाद में काँजीहाउस में बंद कर हमें कई दिनों तक भूखा-प्यासा छोड़ दिया गया, जिससे हम अत्यंत दुर्बल हो गए। अंत में हमें एक कठोर दढ़ियल कसाई के हाथ नीलाम कर दिया गया।

हम निरीह प्राणी हैं और किसी से लड़ाई-झगड़ा नहीं करते, फिर भी हम पर इतना अत्याचार किया गया। आपसे विनम्र निवेदन है कि हम जैसे मूक पशुओं की रक्षा के लिए उचित कार्यवाही करें तथा क्रूरता करने वालों को दंडित करें।

धन्यवाद।
प्रार्थी —
हीरा एवं मोती (झूरी के बैल)

🪔

हमारी धरोहर और संस्कृति

मूल्य, परंपरा एवं कृषि
1 हीरा-मोती कौन-कौन से कार्य कभी नहीं करते थे? (धर्म की रक्षा)
📝 उत्तर — उनके आदर्श
  • गिरे हुए या पराजित शत्रु पर वार नहीं करते थे।
  • स्त्री-जाति (मालकिन) पर सींग नहीं चलाते थे।
  • संकट में अपने मित्र को छोड़कर अकेले नहीं भागते थे।
  • अन्याय करने वाले के यहाँ काम (सेवा) करना स्वीकार नहीं करते थे — “मर जाऊँगा, पर उसके काम तो न आऊँगा।”
  • कायरों की तरह भागना उनका धर्म नहीं था; वे डटकर सामना करते थे।
2 हीरा के ये कथन किन भारतीय मूल्यों की ओर संकेत करते हैं?
📝 उत्तर

“गिरे हुए बैरी पर सींग न चलाना चाहिए” तथा “औरत जात पर सींग चलाना मना है” — ये कथन भारतीय संस्कृति के उच्च मूल्यों की ओर इशारा करते हैं:

  • क्षमा एवं करुणा: असहाय या पराजित पर दया करना।
  • वीरता की मर्यादा: निहत्थे या गिरे हुए पर वार न करना।
  • नारी का सम्मान: स्त्री-जाति की रक्षा एवं आदर।
  • धर्म एवं नैतिकता: कर्तव्य और सही-गलत का विवेक।
3 (क) कृषि के पारंपरिक एवं आधुनिक उपकरण (ख) गाँव-शहर में बैल किन कामों में सहायक
📝 उत्तर (क) — उपकरण
पारंपरिक उपकरणउपयोग
हल (बैल चालित)खेत की जुताई
हँसिया / दरांतीफसल काटना
कुदाल / फावड़ामिट्टी खोदना, निराई
बैलगाड़ीसामान व फसल ढोना
आधुनिक उपकरणउपयोग
ट्रैक्टरजुताई, खेती के कई काम
हार्वेस्टर / थ्रेशरफसल काटना व दाना अलग करना
सीड-ड्रिलबीज बोना
ट्यूबवेल / पंपसिंचाई
📝 उत्तर (ख) — बैल के कार्य

गाँवों में बैल खेत जोतने, सिंचाई के लिए रहट चलाने, अनाज की दँवरी (मँड़ाई) करने तथा बैलगाड़ी से सामान ढोने में सहायक होते हैं। शहरों एवं कस्बों में बैलगाड़ी से माल-ढुलाई, ईंट-रेत आदि की ढुलाई और कई बार मेलों-त्योहारों में सजावटी सवारी में इनका उपयोग होता है। इस प्रकार बैल भारतीय कृषि संस्कृति का अभिन्न अंग हैं।

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अलग-अलग और साथ-साथ

चरित्र-विशेषताएँ एवं मूक-भाषा
1 कहानी के आधार पर हीरा और मोती की विशेषताएँ लिखिए।
📝 उत्तर
हीरामोती
शांत और धैर्यवानगुस्सैल और उग्र
अधिक सहनशीलकम सहनशील, जल्दी भड़कने वाला
विवेकशील, सोच-समझकर निर्णय लेने वालासाहसी, निडर एवं जोशीला
करुणामय (गिरे शत्रु पर वार न करने वाला)दृढ़ एवं प्रतिकार करने वाला
संयमी नेता-साभावुक एवं मित्र-प्रेमी (हीरा को नहीं छोड़ता)
2 हीरा-मोती की भिन्न विशेषताएँ एक-दूसरे को कैसे पूरा करती हैं?
📝 उत्तर

हीरा का धैर्य और विवेक मोती के उग्र गुस्से को संभाल लेता है — जब मोती गाड़ी को खाई में गिराना चाहता है, तब हीरा संभाल लेता है। दूसरी ओर मोती का साहस और दृढ़ता हीरा की शांति को कमजोरी नहीं बनने देती — साँड़ से युद्ध और दीवार तोड़ने में मोती का जोश काम आता है।

इस प्रकार एक का धैर्य और दूसरे का साहस मिलकर एक संतुलित, सफल जोड़ी बनाते हैं — दोनों की भिन्नताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं, जैसे किसी अच्छी टीम में होती हैं।

3 भिन्न विशेषताओं वाले सहपाठी से आप कैसा व्यवहार चाहते हैं?
📝 उत्तर (नमूना)

मैं चाहता हूँ कि भिन्न विशेषताओं वाला सहपाठी मेरे विचारों का सम्मान करे, मेरी कमजोरियों का मजाक न उड़ाए और पढ़ाई-खेल में मेरी मदद करे। बदले में मैं भी उसकी विशेषताओं की सराहना करूँगा, उसकी कठिनाई में सहयोग दूँगा और उससे नई बातें सीखूँगा। क्या करें: एक-दूसरे का साथ देना, प्रोत्साहित करना, मिल-बाँटकर काम करना। क्या न करें: ताना मारना, भेदभाव करना या नीचा दिखाना।

4 हीरा और मोती ‘मूक-भाषा’ में किस प्रकार बातें करते होंगे? अनुमान से बताइए।
📝 उत्तर

वे शब्दों के बिना अपने हाव-भाव, चेष्टाओं और स्पर्श से बातें करते होंगे — एक-दूसरे को चाटकर, सूँघकर, सींग मिलाकर, पूँछ हिलाकर, आँखों के इशारों (कनखियों) से और शरीर हिलाकर। सिर झुकाना, धीरे डकारना या पास सटकर बैठना उनके भावों को व्यक्त करता होगा। इन्हीं संकेतों से वे खुशी, दुख, सहमति और योजना एक-दूसरे तक पहुँचाते होंगे।

5 आप बिना शब्दों के संवाद कब-कब करते हैं? उदाहरण लिखिए।
📝 उत्तर — उदाहरण
  • सिर हिलाकर ‘हाँ’ या ‘ना’ कहना।
  • हाथ हिलाकर अभिवादन या विदा करना।
  • मुस्कुराकर खुशी और भौंहें सिकोड़कर नाराजगी जताना।
  • उँगली होंठों पर रखकर ‘चुप रहो’ का इशारा।
  • कक्षा में चुपचाप मित्र की ओर देखकर उत्तर माँगना या आँखों से संकेत देना।
  • हाथ बढ़ाकर मदद माँगना या ताली बजाकर सराहना करना।
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मार्ग खोजेंगे कैसे?

दिशा, सुरक्षा एवं आपदा-निकासी
1 क्या कभी आप रास्ता भूले/भटके हैं? तब आपने मार्ग का पता कैसे लगाया?
📝 उत्तर (नमूना)

हाँ, एक बार किसी मेले में मैं अपने परिवार से बिछड़ गया था। तब मैंने घबराने के बजाय वहीं रुककर आस-पास के परिचित स्थानों को देखा, एक दुकानदार से पता पूछा और सूचना-केंद्र (अनाउंसमेंट काउंटर) की मदद ली। थोड़ी देर में मैं अपने परिवार से मिल गया। इससे मैंने सीखा कि भटकने पर शांत रहकर सही व्यक्ति से सहायता माँगनी चाहिए।

2 कोई व्यक्ति भटक जाए तो सुरक्षित रूप से गंतव्य तक पहुँचने के लिए क्या करे?
📝 उत्तर
  • घबराएँ नहीं, शांत रहकर एक स्थान पर रुक जाएँ।
  • ऑनलाइन मानचित्र (Google Map) या GPS की सहायता लें।
  • निकटतम पुलिस, स्कूल, सरकारी भवन या डाकघर में जाकर मदद माँगें।
  • सड़क पर लगे सूचना-पट और दुकानों के बोर्ड पर लिखे पते देखें।
  • किसी विश्वसनीय व्यक्ति (विद्यार्थी, दुकानदार, पुलिसकर्मी) से रास्ता पूछें।
  • परिवार या पुलिस को फोन करके अपनी स्थिति बताएँ।
3 विद्यालय में आपदा-निकासी मार्ग देखकर अपनी कक्षा का निकटतम सुरक्षित मार्ग पता लगाइए।
📝 उत्तर (गतिविधि)

यह गतिविधि अपने विद्यालय में करें — दीवार पर लगे Evacuation/Fire-Exit मानचित्र को ध्यान से देखें। अपनी कक्षा से बाहर निकलने का सबसे छोटा एवं सुरक्षित रास्ता (आमतौर पर निकटतम सीढ़ी या मुख्य द्वार, जो भीड़भाड़ से दूर हो) पहचानें और उसे एक चित्र के रूप में बनाएँ। आपदा के समय इसी मार्ग से शांति-पूर्वक, पंक्ति में बाहर खुले मैदान (Assembly Point) तक पहुँचना चाहिए।

@edugrown काँजीहाउस की दीवार टूट रही है

हीरा-मोती दीवार तोड़कर नौ-दस प्राणियों को बंधन से मुक्त कराते हैं — संघर्ष की पराकाष्ठा

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सृजन

रचनात्मक लेखन
1 हीरा या मोती की नजर से डायरी — जिस दिन उन्हें काँजीहाउस ले जाया गया।
📓 नमूना डायरी

आज का दिन हमारे जीवन का सबसे कठिन दिन रहा। सारा दिन भूखे-प्यासे काटने के बाद हमें इस अंधेरे काँजीहाउस में बंद कर दिया गया। यहाँ चारों ओर कमजोर और भूखे जानवर मुर्दों की तरह पड़े हैं। पेट भूख से जल रहा है, शरीर थकान से चूर है और मन में गहरा दुख तथा गुस्सा भरा है।

मेरा प्रिय मित्र मोती भी मेरे साथ है — यही एक सहारा है। हमने आज दीवार तोड़कर भागने की कोशिश की, मार भी खाई, पर हिम्मत नहीं हारी। मुझे विश्वास है कि हमारा झूरी हमें ढूँढ़ता हुआ जरूर आएगा और हमें इस कैद से वापस अपने घर ले जाएगा। हम संघर्ष करते रहेंगे — चाहे जितने बंधन पड़ें!

— हीरा

2 समाचार लेखन — बैलों का काँजीहाउस से भागना।
📰 नमूना समाचार

दो बहादुर बैलों ने तोड़ीं बेड़ियाँ!

(हमारे संवाददाता द्वारा) — स्थानीय गाँव, दिनांक ___

बीती रात स्थानीय काँजीहाउस में बंद दो बैलों — हीरा और मोती — ने अपनी अद्भुत हिम्मत और एकता का परिचय देते हुए कच्ची दीवार तोड़ डाली। कई दिनों से भूखे-प्यासे रखे गए इन बैलों ने न केवल स्वयं स्वतंत्र होने का प्रयास किया, बल्कि वहाँ बंद नौ-दस अन्य निरीह पशुओं को भी बाहर निकाल दिया।

घटना से मुंशी एवं चौकीदारों में खलबली मच गई। ग्रामवासियों ने बैलों की वीरता और मित्रता की प्रशंसा की। इस घटना ने पशुओं के साथ हो रहे क्रूर व्यवहार और काँजीहाउस की अव्यवस्था की ओर सबका ध्यान खींचा है। लोगों ने पशु-अधिकारों की रक्षा की माँग की है।

3 कहानी का नया अंत — यदि बैल वापस न लौटते।
📝 नमूना नया अंत

यदि बैल वापस न लौटते, तो हीरा और मोती भटकते हुए किसी दूर के गाँव में एक बूढ़े, दयालु किसान के पास पहुँचते। वह किसान उन्हें भरपेट चारा देता, प्रेम से रखता और कभी न मारता। दोनों मित्र अब शांति से वहीं रहने लगते और किसान के खेत में मन लगाकर काम करते।

उधर झूरी अपने प्यारे बैलों को न पाकर बहुत उदास हो जाता। वह गाँव-गाँव उन्हें ढूँढ़ता, पर वे न मिलते। समय के साथ झूरी समझ जाता कि स्नेह और सम्मान के बिना कोई पशु भी बँधकर नहीं रहता। इस प्रकार कहानी यह संदेश देती कि प्रेम और स्वतंत्रता ही किसी को सच्चे अर्थों में बाँध सकते हैं।

4 चित्रकथा लेखन — दीवार तोड़ने एवं आजादी के दृश्य के संवाद।
📝 नमूना संवाद (दृश्य-क्रम)
  • चित्र 1 (बंद करना): “हाय! हमें इस काँजीहाउस में कैद कर दिया गया। यहाँ तो खाने को एक तिनका भी नहीं!”
  • चित्र 2 (भागने की योजना): मोती — “अब तो नहीं रहा जाता, हीरा! आओ, दीवार तोड़ डालें।”
  • चित्र 3 (दीवार तोड़ना): हीरा — “जोर लगाओ भाई! एक धक्का और — दीवार गिरने ही वाली है!”
  • चित्र 4 (आजादी): “अब हम आजाद हैं! चलो, सब साथी भी मुक्त हो जाएँ।”
📖

व्याकरण की बात

मेरे शब्द एवं मुहावरे
मेरे शब्द — कहानी से पाँच नए शब्द एवं उनके अर्थ।
📝 उत्तर (शब्द-संपदा से)
शब्दअर्थ
निरापदआपत्ति से रहित, सुरक्षित
विषादउदासी, अवसाद
पराकाष्ठाअंतिम/चरम सीमा
तजरबाअनुभव
उजड्डपनअशिष्टता, उद्दंडता
काँजीहाउसवह बाड़ा जहाँ अनाथ या खेत खाने वाले पशु बंद किए जाते हैं
भाषा गढ़ते मुहावरे — मुहावरे पहचानिए और नए वाक्य बनाइए।
📝 उत्तर
मुहावराअर्थनया वाक्य
दाँतों पसीना आनाबहुत कठिनाई होनाभारी संदूक उठाने में मजदूर के दाँतों पसीना आ गया।
दिल काँप उठनाबहुत भयभीत हो जानाशेर की दहाड़ सुनकर बच्चों के दिल काँप उठे।
जल उठनाक्रोध से भर जानाअपनी निंदा सुनते ही वह जल उठा।
दिल में ऐंठकर रह जानामन मसोसकर चुप रह जानाअपमान सहकर भी वह दिल में ऐंठकर रह गया।
खबर लेनासबक सिखाना / दंड देनाशरारत करने पर शिक्षक ने उसकी खूब खबर ली।
गम खानासहन कर जानाबड़ों के सामने उसने अपमान का गम खा लिया।
ईंट का जवाब पत्थर से देनाकड़ा प्रत्युत्तर देनादुश्मन के हमले का सेना ने ईंट का जवाब पत्थर से दिया।
नौ-दो-ग्यारह होनाभाग जाना / चंपत हो जानापुलिस को देखते ही चोर नौ-दो-ग्यारह हो गया।
मन फीका करनानिराश होनापरिणाम देखकर उसने मन फीका कर लिया।
🎯

गतिविधियाँ

गीत, भाषण, शीर्षक एवं भाषा संगम
1 (क) हीरा-मोती की प्रशंसा में गीत (ख) अभिनंदन-पत्र
🎵 नमूना गीत

हीरा-मोती वीर निराले,
बंधन तोड़ बढ़े मतवाले।
दूर देश से लौट के आए,
सच्ची मित्रता हमें सिखाए॥

अन्याय से जो कभी न डरते,
भूखे रहकर भी संघर्ष करते।
प्रेम और साहस की मूरत,
धन्य हो तुम, ओ पशु-वीर सूरत॥

📜 नमूना अभिनंदन-पत्र

प्रिय हीरा एवं मोती,

हमारी बाल-सभा आप दोनों का हार्दिक अभिनंदन करती है। आपने अपने अदम्य साहस, गहरी मित्रता और स्वाभिमान से सबका मन मोह लिया। अन्याय के विरुद्ध आपका संघर्ष और एक-दूसरे के प्रति आपका प्रेम हम सबके लिए प्रेरणा है। आप सच्चे ‘पशु-वीर’ हैं। हम आपके दीर्घ एवं सुखी जीवन की कामना करते हैं।

— बाल-सभा की ओर से

2 बाल-सभा में भाषण — विषय: ‘पशुओं के अधिकार’।
🎤 नमूना भाषण

आदरणीय अध्यक्ष महोदय, गुरुजनों एवं मेरे प्यारे साथियो!

आज मैं ‘पशुओं के अधिकार’ विषय पर अपने विचार रखना चाहता हूँ। पशु भी हमारी तरह जीवित प्राणी हैं — उन्हें भूख, दर्द और प्रेम का अनुभव होता है। ‘दो बैलों की कथा’ के हीरा-मोती हमें यही सिखाते हैं कि पशुओं के साथ भी संवेदना और न्याय का व्यवहार होना चाहिए।

पशुओं को भरपेट भोजन, स्वच्छ पानी, सुरक्षित स्थान और क्रूरता से रक्षा का अधिकार मिलना चाहिए। हमें उन्हें न मारना चाहिए, न अत्यधिक काम कराना चाहिए और न ही भूखा रखना चाहिए। आइए, हम सब प्रण लें कि पशुओं के प्रति दया और सम्मान का भाव रखेंगे।

जय हिंद! धन्यवाद।

3 कहानी के पाँच भागों के उपयुक्त शीर्षक।
📝 नमूना शीर्षक
  • भाग 1: बिछड़ाव और पहली वापसी
  • भाग 2: अपमान, विद्रोह और लड़की का स्नेह
  • भाग 3: साँड़ से वीरतापूर्ण युद्ध
  • भाग 4: काँजीहाउस की कैद और संघर्ष
  • भाग 5: नीलामी और घर की अंतिम वापसी
4 मेरी पहेली — दिए गए उत्तरों के लिए पहेलियाँ।
🧩 नमूना पहेलियाँ
  • हीरा: शांत-धैर्यवान वह बैल कौन, संभाले गाड़ी मोती के साथ? — (हीरा)
  • झूरी: जिसने पाला बैलों को प्रेम से, गले लगाया लौट आने पर? — (झूरी)
  • मोती: गुस्सैल पर साहसी, साँड़ से जो भिड़ जाए? — (मोती)
  • गया: झूरी का साला जो बैलों पर अत्याचार ढाए? — (गया)
  • रस्सी: गले में बँधी जिसे बैल चबाकर तोड़ें? — (रस्सी)
  • रोटी: रात को लड़की जो प्रेम से खिलाए? — (रोटी)
  • मटर: भूखे बैल जिस हरे खेत में चरें? — (मटर)
  • बैल: हल-गाड़ी खींचे, सींगों वाला सीधा प्राणी? — (बैल)
5 भाषा संगम — विभिन्न भाषाओं में ‘बैल’ शब्द।
📝 उत्तर

संविधान की आठवीं अनुसूची की कुछ भाषाओं में ‘बैल’ — हिंदी: बैल; संस्कृत: वृषभः; पंजाबी: बल्द; उर्दू: बैल; कश्मीरी: दोंद; सिंधी: ढ़गो; मराठी: बैल; गुजराती: बळद; नेपाली: गोरु; बांग्ला: बलद; असमिया: षाँड़; मणिपुरी: शन लाबा; ओड़िआ: बलद; तेलुगु: एद्दु; तमिल: एरिदु/काळैमाहु; मलयालम: काळ; कन्नड़: एत्तु।

संकेत: ऊपर दिया गया वाक्य “कभी-कभी अड़ियल बैल भी देखने में आता है।” को अपनी मातृभाषा में भी लिखकर अभ्यास कीजिए। अधिक जानकारी के लिए — shabd.education.gov.in/lexicon.jsp

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© दो बैलों की कथा — प्रेमचंद · प्रश्न-उत्तर समाधान · @edugrown

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