Ch-9 आदमी का अनुपात “Aadmi ka anupaa” Class 8th Hindi (Malhar) NCERT Solution

तरुण के स्वप्न — पूर्ण प्रश्नोत्तर हल | सुभाषचंद्र बोस
पाठ 10 · उद्बोधन · मल्हार

तरुण के स्वप्न

नेताजी सुभाषचंद्र बोस का मेदिनीपुर युवक-सम्मेलन (29 दिसंबर, 1929) में दिया गया वह उद्बोधन, जिसमें वे युवाओं को एक स्वाधीन, संपन्न और आदर्श राष्ट्र का स्वप्न उपहारस्वरूप सौंपते हैं।
— सुभाषचंद्र बोस (नेताजी)
“दिल्ली चलो · जय हिंद”
नेताजी सुभाषचंद्र बोस — युवाओं को स्वप्न सौंपते हुए (मेदिनीपुर, 1929)
पाठ से
😊

मेरी समझ से (क)

सही उत्तर के सामने तारा ★ — कुछ के एक से अधिक उत्तर
1“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” — रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
  • सुभाषचंद्र बोस के लिए
  • देश के तरुण वर्ग के लिए
  • चित्तरंजन दास के लिए
  • भारतवासियों के लिए
स्पष्टीकरण

यह उद्बोधन युवक-सम्मेलन में दिया गया है और बोस कहते हैं “हे मेरे तरुण भाइयो!”। देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न के उत्तराधिकारी वे स्वयं तथा वे युवा हैं जिन्हें वे संबोधित कर रहे हैं — अर्थात् ‘हम’ का अभिप्राय देश का तरुण वर्ग है। (व्यापक अर्थ में भारतवासी भी, पर प्रत्यक्ष संबोधन युवाओं को है।)

2स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न किससे साकार होगा?
  • आर्थिक असमानता से
  • स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से
  • श्रम और कर्म की मर्यादा से
  • जातिभेद से
स्पष्टीकरण

बोस के आदर्श समाज में आर्थिक विषमता, जातिभेद और स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकार समाप्त करने हैं। राष्ट्र का स्वप्न श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा से साकार होगा — जहाँ परिश्रम का सम्मान हो और आलसी-अकर्मण्य के लिए स्थान न रहे।

3“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” — ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?
  • हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
  • हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है
  • उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
  • उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है
स्पष्टीकरण

‘उत्तराधिकारी’ का अर्थ है — किसी के बाद उसकी विरासत पाने और आगे बढ़ाने वाला। अतः चित्तरंजन दास के स्वप्न को संजोकर रखना और उसे पूरा करने के लिए स्वयं कर्म करना — दोनों इसमें निहित हैं। केवल चर्चा करना या स्वप्न देखना पर्याप्त नहीं।

4जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब—
  • राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी
  • तरुणों का साहस बढ़ेगा
  • राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
  • राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा
स्पष्टीकरण

जब सबको शिक्षा और उन्नति के समान अवसर मिलेंगे, तो हर व्यक्ति योग्य व कर्मठ बनकर राष्ट्र-निर्माण में योगदान देगा — इससे राष्ट्र की श्रम-शक्ति (उत्पादक क्षमता) में वृद्धि होगी।

आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने होंगे — चर्चा कीजिए कि ये उत्तर ही क्यों चुने।
यह समूह-चर्चा है। ऊपर दिए स्पष्टीकरण आपके तर्क का आधार बनेंगे — प्रत्येक विकल्प को पाठ की पंक्तियों से जोड़कर समझाइए।
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मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 के भाव से जोड़िए
1. “इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते, बैठते, चलते, फिरते… काम-काज करते हैं।”2. हमारी समूची दिनचर्या व आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं।
2. “जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा… भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।”3. जिस देश की योजनाएँ अपने समाज को ध्यान में रखकर बनेंगी, उस देश में किसी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
3. “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।”1. सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर कोई बंधन/सामाजिक दबाव न हो।
स्मरण सूत्र: 1→2, 2→3, 3→1
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पंक्तियों पर चर्चा

इन पंक्तियों का आपको क्या अर्थ समझ आया?
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
आशय

ऐसा समाज जिसमें आर्थिक असमानता न हो — अमीर और गरीब के बीच भारी खाई न हो; सबके पास जीवन-निर्वाह के समान साधन व अवसर हों। यह आर्थिक समानता का आदर्श है।

(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”
आशय

देशबंधु चित्तरंजन दास का स्वाधीन-संपन्न समाज का स्वप्न ही उनकी शक्ति का स्रोत (उत्स) और निरंतर बहने वाले आनंद का झरना (निर्झर) था। उस स्वप्न ने उन्हें ऊर्जा और प्रसन्नता — दोनों दीं।

(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”
आशय

ऐसा समाज जहाँ व्यक्ति राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक व मानसिक — हर दृष्टि से स्वतंत्र हो; किसी भी प्रकार के बंधन, भय या सामाजिक दबाव से मुक्त रहकर सम्मान से जी सके।

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सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः पढ़कर पता लगाकर लिखिए
नेताजी ने किस प्रकार के राष्ट्र-निर्माण का स्वप्न देखा था?
उत्तर

एक नया सर्वांगीण स्वाधीन, संपन्न और आत्मनिर्भर राष्ट्र, जिसमें —

  • व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, समाज के दबाव से न मरे;
  • जातिभेद का स्थान न हो;
  • नारी मुक्त होकर पुरुषों के समान अधिकार पाए;
  • आर्थिक विषमता न हो, सबको शिक्षा व उन्नति का समान अवसर मिले;
  • श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा हो, आलसी-अकर्मण्य के लिए स्थान न रहे;
  • विजातीय (विदेशी) प्रभाव से मुक्त, विश्व के समक्ष आदर्श समाज व राष्ट्र बने।
नेताजी ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता माना?
उत्तर

अपने इसी स्वप्न (आदर्श स्वाधीन-संपन्न समाज व राष्ट्र) की प्रतिष्ठा/प्राप्ति को। इस सत्य के लिए वे हर त्याग, हर संकट और प्राण देना भी ‘वह मरण है स्वर्ग समान’ मानते थे। यही स्वप्न उनके क्षुद्र जीवन को सार्थक बनाता है।

“आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” — ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर

क्योंकि राष्ट्र की उन्नति श्रम और कर्म पर निर्भर है। आदर्श समाज में प्रत्येक व्यक्ति को परिश्रम करके अपना और देश का योगदान देना है। आलसी व निकम्मे लोग प्रगति में बाधक बनते हैं, इसलिए कर्मशील समाज में उनके लिए स्थान नहीं — श्रम की मर्यादा बनाए रखने हेतु बोस ने ऐसा कहा।

नेताजी के ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
उत्तर
  • मन लगाकर शिक्षा ग्रहण करे और ईमानदारी से परिश्रम करे।
  • जाति, धर्म, लिंग का भेद मिटाकर समानता व भाईचारा बढ़ाए।
  • नारी का सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करे।
  • आत्मनिर्भर भारत / स्वदेशी को बढ़ावा दे, नवाचार करे।
  • आलस्य व नशे से दूर रहकर समाज-सेवा व पर्यावरण-रक्षा में जुटे।
  • भ्रष्टाचार का विरोध कर देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाए।
UPI स्वाधीन · संपन्न · आत्मनिर्भर भारत
नेताजी का स्वप्न — एक सर्वांगीण स्वाधीन, संपन्न व आत्मनिर्भर राष्ट्र

अनुमान और कल्पना से

“व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो” — बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?
उत्तर
  • राजनीतिक — विदेशी (अंग्रेजी) शासन की गुलामी से।
  • सामाजिक — जातिभेद, ऊँच-नीच, रूढ़ियों व कुप्रथाओं से।
  • आर्थिक — गरीबी और आर्थिक विषमता से।
  • धार्मिक — अंधविश्वास व धार्मिक भेदभाव से।
  • मानसिक/वैचारिक — भय और गुलाम मानसिकता से; तथा स्त्रियों के लिए लैंगिक असमानता से।
नारी के लिए समान अधिकारों की बात बोस को क्यों कहनी पड़ी?
उत्तर

उस समय समाज में नारी को पुरुष के समान अधिकार व अवसर प्राप्त नहीं थे — वह शिक्षा, संपत्ति और निर्णयों में पीछे थी। बोस मानते थे कि समाज के आधे भाग (नारी) की समान भागीदारी के बिना सच्चा सर्वांगीण-स्वाधीन राष्ट्र संभव नहीं; इसीलिए उन्होंने नारी-मुक्ति व समान अधिकार पर विशेष बल दिया।

हमारे समाज में और कौन-से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
उत्तर (संकेत)

दिव्यांगजन, वंचित/पिछड़े व आदिवासी वर्ग, अत्यंत निर्धन परिवार, वृद्धजन, अनाथ व असहाय बच्चे — जिन्हें समानता तक पहुँचने के लिए अतिरिक्त सहयोग, सुविधा व अवसर की आवश्यकता है। (अपने विचार जोड़ें)

संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
उत्तर

उस काल के सामाजिक परिवेश में सार्वजनिक सभाओं/युवक-सम्मेलनों में अधिकतर पुरुष/युवक ही उपस्थित होते थे; स्त्रियों की सार्वजनिक भागीदारी सीमित थी और तत्कालीन भाषा-शैली में ‘भाइयो’ सामान्य संबोधन था। (यह एक विडंबना भी है कि नारी-समानता की बात करने वाले बोस का संबोधन परिस्थितिवश ‘भाइयो’ तक रहा।)

“यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।” — श्रोताओं की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?
उत्तर

युवा वर्ग उत्साह, जोश और प्रेरणा से भर उठा होगा — तालियों की गड़गड़ाहट और ‘जय हिंद’ के नारे गूँजे होंगे। अनेक युवाओं ने इस स्वप्न को अपना ध्येय बनाकर देश-सेवा व स्वतंत्रता-संग्राम में कूदने का संकल्प लिया होगा।

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शीर्षक

इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
उत्तर

क्योंकि यह उद्बोधन तरुणों (युवाओं) को संबोधित है और उनमें एक आदर्श स्वाधीन-संपन्न समाज व राष्ट्र का स्वप्न जगाता है। बोस यही स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप सौंपते हैं ताकि वे उसे साकार करें। इस प्रकार शीर्षक विषय-वस्तु से पूर्णतः मेल खाता है।

कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? क्यों?
सुझाव

जैसे “नए भारत का स्वप्न”, “स्वप्न का उपहार”, “युवाओं के नाम संदेश”, “आदर्श राष्ट्र की कल्पना”। मैं “नए भारत का स्वप्न” रखूँगा क्योंकि यह बोस द्वारा कल्पित स्वाधीन-संपन्न आदर्श राष्ट्र को सीधे दर्शाता है। (आप अपना नाम व तर्क लिखें।)

अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो किन विषयों को शामिल करेंगे, शीर्षक क्या होगा?
संकेत

विषय — शिक्षा का महत्व, अनुशासन व समय-प्रबंधन, स्वच्छता, पर्यावरण-रक्षा, एकता व सहयोग, नशा-मुक्ति। शीर्षक — “हमारा संकल्प” / “बेहतर कल की ओर”। (अपनी पसंद चुनें व कारण लिखें।)

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भाषा की बात

विशेषता/गुण बताने वाले शब्द
भाषण से विशेषता/गुण बताने वाले शब्द ढूँढकर शब्द-समूह पूरा कीजिए।
विशेषता / गुणशब्द
अखंडसत्य
सर्वांगीण / स्वाधीन / संपन्नसमाज
स्वाधीन / आदर्शराष्ट्र
क्षुद्रजीवन
असीमशक्ति
अपारआनंद
आप इन शब्दों के साथ किन विशेषताओं को रखना चाहेंगे और क्यों?
सुझाव

जैसे — शाश्वत सत्य, समतामूलक समाज, सशक्त राष्ट्र, सार्थक जीवन, अदम्य शक्ति, शुद्ध आनंद। ये विशेषण इन शब्दों के सकारात्मक व आदर्श गुणों को और स्पष्ट करते हैं। (अपने शब्द व कारण लिखें।)

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विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए।
शब्द (स्तंभ 1)विपरीतार्थक (स्तंभ 2)
1. स्वीकारअस्वीकार
2. सार्थकनिरर्थक
3. विषमतासमानता
4. क्षुद्रविशाल / वृहत / विराट / महान
5. संपन्नविपन्न
6. अकर्मण्यकर्मण्य / कर्मठ
7. मरणजीवन
दिए उदाहरण के अनुसार दोनों शब्दों से वाक्य बनाइए।
नमूना वाक्य
  • स्वीकार/अस्वीकार — उसने प्रस्ताव तो स्वीकार किया, पर अनुचित शर्तें अस्वीकार कर दीं।
  • सार्थक/निरर्थक — परिश्रम से जीवन सार्थक बनता है, आलस्य से निरर्थक।
  • विषमता/समानता — समाज में आर्थिक विषमता मिटाकर समानता लानी होगी।
  • क्षुद्र/विशाल — क्षुद्र स्वार्थ त्यागकर विशाल हृदय अपनाओ।
  • संपन्न/विपन्न — संपन्न लोगों को विपन्न वर्ग की सहायता करनी चाहिए।
  • अकर्मण्य/कर्मण्य — समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं, अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।
  • मरण/जीवन — देश के लिए मरण भी सामान्य जीवन से कहीं श्रेष्ठ है।
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आपकी बात

आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं?
संकेत

विद्यालय — स्वच्छ, अनुशासित व सबके लिए समान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। राज्य — सबको रोज़गार, अच्छी सड़कें-अस्पताल-विद्यालय, अपराध-मुक्त। देश — आत्मनिर्भर, भ्रष्टाचार-मुक्त, जहाँ हर नागरिक शिक्षित, सुखी और समान हो। (अपने स्वप्न लिखें।)

स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर
  • संविधान व कानून का पालन तथा अपने कर्तव्यों का निर्वाह।
  • जागरूक नागरिक बनकर मतदान करना।
  • एकता व भाईचारा बनाए रखना; विभाजनकारी ताकतों/अफवाहों का विरोध।
  • राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा और स्वदेशी को बढ़ावा।
  • ईमानदारी, परिश्रम और देश-सेवा की भावना।
पाठ से आगे
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मिलान कीजिए — स्वतंत्रता सेनानी

तथ्यों का नाम से सही मिलान
1. 8 अप्रैल 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली’ में बम; ‘शहीद-ए-आज़म’।भगत सिंह
2. ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापक, बोस के राजनीतिक गुरु।चित्तरंजन दास
3. भूख-हड़ताल, अनशन के 63वें दिन जेल में देहांत।जतिन दास
4. जन्मदिवस पर ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ (2 अक्टूबर)।महात्मा गाँधी
5. नर्मदा तट पर विशाल प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’।सरदार वल्लभभाई पटेल
6. “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता…”।चंद्रशेखर आजाद
इनमें से एक सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। पहचानिए।
उत्तर

चित्तरंजन दास (देशबंधु चित्तरंजन दास) — जिन्हें पाठ में बोस के राजनीतिक गुरु तथा जिनके स्वप्न का उत्तराधिकारी बताया गया है।

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सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास

स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए?
संकेत-उत्तर
  • संविधान — समानता, मौलिक अधिकार, सबको मताधिकार (नारी को भी)।
  • पंचवर्षीय योजनाएँ व बैंकों का राष्ट्रीयकरण; हरित क्रांति।
  • शिक्षा का अधिकार (RTE), सर्व शिक्षा अभियान, छात्रवृत्तियाँ।
  • आरक्षण व पिछड़े-वंचित वर्गों के कल्याण की योजनाएँ।
  • महिला सशक्तीकरण — बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पंचायत आरक्षण।
  • आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत।
  • ISRO/रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (अंतरिक्ष, BrahMos आदि)।
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स्त्री सशक्तीकरण

स्त्रियों को कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
उत्तर (संकेत)
  • पुरुषों के समान मताधिकार व समान वेतन का अधिकार।
  • शिक्षा प्रोत्साहन — बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, निःशुल्क/रियायती शिक्षा व छात्रवृत्ति।
  • मातृत्व अवकाश, संपत्ति में समान अधिकार।
  • पंचायत/स्थानीय निकाय व कई स्थानों पर विधायी आरक्षण।
  • घरेलू हिंसा व कार्यस्थल-उत्पीड़न से सुरक्षा कानून, हेल्पलाइन (1091/181)।
‘आजाद हिंद फौज’ की स्त्रियों की टुकड़ी का नाम व उसकी भूमिका।
उत्तर

टुकड़ी का नाम — रानी झाँसी रेजिमेंट (Rani of Jhansi Regiment), जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया। भूमिका — यह पूर्णतः महिला सैनिकों की टुकड़ी थी जिसने अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संग्राम, युद्ध-प्रशिक्षण व नर्सिंग कार्य किया। यह नारी-शक्ति और स्वतंत्रता-संग्राम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का प्रेरक प्रतीक बनी।

आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी: जिस सेनानी के कार्यों/विचारों से आप प्रभावित हैं, उनका नाम कारण सहित लिखकर रोल-प्ले के रूप में कक्षा में उनके विचार प्रस्तुत कीजिए।
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नारे और स्वतंत्रता सेनानी

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।”— सुभाषचंद्र बोस (1944)
नारास्वतंत्रता सेनानी
स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।बाल गंगाधर तिलक (लोकमान्य तिलक)
करो या मरोमहात्मा गाँधी
मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगाचंद्रशेखर आजाद
इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबादभगत सिंह
पूर्ण स्वराजपंडित जवाहरलाल नेहरू
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झरोखे से · शब्दार्थ · खोजबीन

झरोखे से — गृह-उद्योग पर नेताजी का पत्र (सार)
सार

मांडले जेल से अनिलचंद्र विश्वास को लिखे पत्र में बोस ने गृह व कुटीर उद्योग पर विचार रखे — बेंत का काम, मिट्टी के खिलौने, और विशेषकर सीप के बटन बनाना (बंगाल के गाँवों में घर-घर, स्त्री-पुरुष फुरसत में करते थे)। उनका मत था कि कम लागत में, थोड़े यंत्रों व कच्चे माल से यह काम शुरू कर गरीब परिवार अपनी आय बढ़ा सकते हैं; समिति सस्ता कच्चा माल जुटाकर तैयार वस्तुएँ बेच सके। यह स्वदेशी व आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का बीज था।

पाठ के कुछ कठिन शब्दों के अर्थ
शब्दअर्थ
उत्तराधिकारीकिसी के बाद उसकी विरासत/संपत्ति पाने वाला, वारिस
उत्सस्रोत, सोता, उद्गम
निर्झरझरना, प्रपात
सर्वांगीणसब अंगों/पक्षों में व्याप्त, चहुँमुखी
स्वाधीनस्वतंत्र, आजाद, अपने ही अधीन
अकर्मण्यकर्म के अयोग्य, आलसी, निकम्मा
क्षुद्रछोटा, तुच्छ
अखंडअटूट, संपूर्ण, बाधारहित
विजातीयभिन्न जाति/वर्ग का, पराया (विदेशी)
खोजबीन/परियोजना: ‘आजाद हिंद फौज’ पर और जानकारी जुटाकर कक्षा में प्रस्तुत कीजिए; तथा 10 महिला व 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र व योगदान की संग्रहिका बनाइए (एक राज्य से एक ही व्यक्ति)।
पढ़ने के लिए: इसी अध्याय-समूह में सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की संगीतात्मक कविता “भारति, जय, विजय करे!” केवल आनंद हेतु दी गई है — इसका विस्तृत अध्ययन आप आगे की कक्षा में करेंगे।
आदमी का अनुपात — पूर्ण प्रश्नोत्तर हल | गिरिजा कुमार माथुर
पाठ 9 · कविता · मल्हार

आदमी का अनुपात

कमरे से ब्रह्मांड तक — कवि मानव के अत्यंत लघु ‘अनुपात’ को विराट सृष्टि के सामने रखकर उसके अहं, ईर्ष्या और कृत्रिम ‘दीवारों’ पर कोमल व्यंग्य करते हैं।
— गिरिजा कुमार माथुर (1919 – 1994)
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कविता का केंद्रीय भाव

संक्षिप्त परिचय

कविता दो व्यक्तियों से आरंभ होकर कमरा → घर → मोहल्ला → नगर → प्रदेश → देश → पृथ्वी → नक्षत्र → ब्रह्मांड तक फैलती है, और दिखाती है कि विराट ब्रह्मांड के सामने मानव कितना सूक्ष्म है। इतना छोटा होकर भी मनुष्य ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा व अविश्वास में लीन रहता है — गिनती से परे ‘दीवारें’ (भेद) खड़ी करता है, स्वयं को दूसरों का स्वामी बताता है, और एक छोटे-से कमरे तक में ‘दो दुनिया’ रच डालता है। कवि क्रोध नहीं, बल्कि करुणा व कोमल व्यंग्य से मनुष्य को उसके छोटेपन का बोध कराते हैं ताकि वह विनम्र बने और दीवारें गिराए।

आदमी कमरा घर नगर देश पृथ्वी ब्रह्मांड आदमी का अनुपात — लघुता से विराटता तक
आदमी → कमरा → घर → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड (सृजन-घ का दृश्य)
पाठ से
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मेरी समझ से (क)

सही उत्तर के सामने तारा ★ — कुछ के एक से अधिक उत्तर
1कविता के अनुसार ब्रह्मांड में मानव का स्थान कैसा है?
  • पृथ्वी पर सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण
  • ब्रह्मांड की तुलना में अत्यंत सूक्ष्म
  • सूर्य, चंद्र आदि सभी नक्षत्रों से बड़ा
  • समस्त प्रकृति पर शासन करने वाला
स्पष्टीकरण

कमरे से ब्रह्मांड तक फैलते क्रम में पृथ्वी ही ‘करोड़ों में एक छोटी’ है — तो मानव उससे भी असंख्य गुना छोटा। अतः ब्रह्मांड की विशालता के सामने मानव का स्थान अत्यंत सूक्ष्म है।

2कविता में मुख्य रूप से किन दो वस्तुओं के अनुपात को दिखाया गया है?
  • पृथ्वी और सूर्य
  • देश और नगर
  • घर और कमरा
  • मानव और ब्रह्मांड
स्पष्टीकरण

शीर्षक ही ‘आदमी का अनुपात’ है और कविता में स्पष्ट कहा गया — ‘यह है अनुपात आदमी का विराट से’। अतः तुलना मानव और ब्रह्मांड (विराट) के बीच है।

3कविता के अनुसार मानव किन भावों और कार्यों में लिप्त रहता है?
  • त्याग, ज्ञान और प्रेम में
  • सेवा और परोपकार में
  • ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा में
  • उदारता, धर्म और न्याय में
स्पष्टीकरण

कविता में सीधे कहा गया है कि इतना छोटा होकर भी आदमी ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा, अविश्वास में लीन रहता है।

4कविता के अनुसार मानव का सबसे बड़ा दोष क्या है?
  • वह अपनी सीमाओं और दुर्बलताओं को नहीं समझता।
  • वह दूसरों पर शासन स्थापित करना चाहता है।
  • वह प्रकृति के साथ तालमेल नहीं बिठा पाता है।
  • वह अपने छोटेपन को भूल अहंकारी हो जाता है।
स्पष्टीकरण

मनुष्य ब्रह्मांड के सामने अपनी लघुता/सीमाएँ भूलकर अहंकारी हो जाता है — ‘अपने को दूजे का स्वामी बताता है’। इसलिए अपने छोटेपन को भूल अहंकारी बनना (व अपनी सीमाओं को न समझना) ही उसका सबसे बड़ा दोष है।

समूह में चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने।
यह समूह-गतिविधि है — हर विकल्प को कविता की पंक्तियों से जोड़कर अपना तर्क प्रस्तुत कीजिए।
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पंक्तियों पर चर्चा

इन पंक्तियों का अर्थ
(क) “अनगिन नक्षत्रों में / पृथ्वी एक छोटी / करोड़ों में एक ही।”
आशय

असंख्य नक्षत्रों (तारों) के बीच पृथ्वी एक बहुत छोटा-सा ग्रह है — करोड़ों ग्रहों में से बस एक। यह पृथ्वी (और उस पर रहने वाले मानव) की अल्पता को दर्शाता है।

(ख) “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है / अपने को दूजे का स्वामी बताता है।”
आशय

मनुष्य अनगिनत (असंख्य) कृत्रिम दीवारें — जाति, धर्म, ऊँच-नीच, भेदभाव — खड़ी करता रहता है और अहंकार में स्वयं को दूसरों का मालिक घोषित करता है। यह उसके भेदभाव व अहं पर व्यंग्य है।

(ग) “देशों की कौन कहे / एक कमरे में / दो दुनिया रचाता है।”
आशय

देशों के बीच भेद तो दूर की बात, मनुष्य की संकीर्णता ऐसी है कि वह एक छोटे-से कमरे तक में ‘दो दुनिया’ (मतभेद/अलगाव) रच डालता है — यानी जहाँ साथ रहना है वहाँ भी फूट डाल देता है।

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मिलकर करें मिलान

पंक्ति ↔ सही अर्थ
1. संख्यातीत शंख सी दीवारें3. मनुष्य द्वारा खींची गई कृत्रिम सीमाएँ
2. पृथ्वी एक छोटी, करोड़ों में एक5. पृथ्वी की अल्पता और अनोखेपन की ओर संकेत
3. ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ, घृणा6. मनुष्य की नकारात्मक भावनाएँ
4. दो व्यक्ति कमरे में / कमरे से छोटे2. आदमी के संकुचित होने का प्रतीक
5. परिधि नभ गंगा की1. ब्रह्मांड की विशालता का प्रतीक
6. एक कमरे में दो दुनिया रचाता4. सीमित स्थान में भी भेद और अलगाव की प्रवृत्ति
स्मरण सूत्र: 1→3, 2→5, 3→6, 4→2, 5→1, 6→4
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अनुपात — विराटता के लिए गुण

मानव को ‘ब्रह्मांड जैसा विस्तार’ पाने हेतु आवश्यक गुण
चुनने योग्य (सकारात्मक) गुण
सहअस्तित्वविस्तारसौहार्दविविधता विशालतासंतुलनसमावेशितास्वतंत्रता सहनशीलताशांति
त्यागने योग्य (नकारात्मक) प्रवृत्तियाँ
वर्चस्वईर्ष्यासत्तासीमाबद्धता विरोधलघुताअहंकारमतभेद स्वार्थअविश्वास

क्यों: सहअस्तित्व, सौहार्द, सहनशीलता व समावेशिता मनुष्य के हृदय को विशाल बनाते हैं और दीवारें गिराते हैं — इन्हीं गुणों से वह संकुचित ‘कमरे’ से निकलकर ‘ब्रह्मांड जैसा विस्तार’ पा सकता है। (अपने चुने गुणों का कारण साझा कीजिए।)

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सोच-विचार के लिए

मानव किन कारणों से स्वयं को सीमाओं में बाँधता चला जाता है?
उत्तर

अहं, ईर्ष्या, स्वार्थ, घृणा और अविश्वास के कारण। वह दूसरों को अपने से अलग व छोटा मानता है, स्वयं को श्रेष्ठ/स्वामी समझता है — इसी संकीर्ण सोच से जाति, धर्म, ऊँच-नीच की कृत्रिम ‘दीवारें’ खड़ी करता चला जाता है।

एक पंक्ति दीवार पर लिखनी हो जो प्रतिदिन प्रेरित करे — कौन-सी और क्यों?
सुझाव

करोड़ों में एक ही” (पृथ्वी) — यह प्रतिदिन याद दिलाएगा कि हमारी यह धरती कितनी अनोखी व दुर्लभ है, इसे सहेजना और सबके साथ मिल-जुलकर रहना हमारा कर्तव्य है। (आप अपनी पसंद की पंक्ति व कारण लिख सकते हैं।)

कवि ने कमियों की ओर ध्यान दिलाया पर क्रोध नहीं दिखाया। भाव कैसा लगा — व्यंग्य, करुणा, चिंता या कुछ और? क्यों?
उत्तर

इस कविता का भाव कोमल व्यंग्य के साथ करुणा व चिंता का है। कवि मनुष्य को नीचा नहीं दिखाते, बल्कि स्नेहपूर्वक उसके अहं व संकीर्णता पर हलका व्यंग्य करते हुए चिंता प्रकट करते हैं कि इतना छोटा होकर भी वह भेद क्यों फैलाता है — उद्देश्य सुधार है, निंदा नहीं।

‘दीवारें उठाना’ केवल ईंट-पत्थर का काम है या कुछ और भी?
उत्तर

यहाँ ‘दीवारें उठाना’ प्रतीकात्मक है — इसका अर्थ ईंट-पत्थर की दीवार नहीं, बल्कि मन में बनाई गई भेद की दीवारें — जाति, धर्म, अमीर-गरीब, ऊँच-नीच, स्वार्थ व अविश्वास से उपजी दूरियाँ, जो मनुष्यों को आपस में बाँट देती हैं।

सहयोग/सहिष्णुता जैसी सकारात्मक प्रवृत्तियाँ अधिक प्रभावी — उदाहरण देकर बताइए कि इनसे समाज में कैसे परिवर्तन आए?
उदाहरण
  • स्वच्छता अभियान/आपदा-राहत — लोग मिलकर सहयोग करें तो बाढ़/भूकंप जैसी आपदाओं में अनगिनत जानें बचती हैं।
  • सहिष्णुता से विविध धर्म-संस्कृति के लोग शांति से साथ रहते हैं — भारत की एकता-में-विविधता इसका प्रमाण है।
  • श्रमदान/सामुदायिक कार्य से गाँवों में तालाब, सड़कें, विद्यालय बने — अकेले संभव नहीं था।

इसके विपरीत ईर्ष्या-घृणा केवल झगड़े व विनाश लाती हैं।

अनुमान और कल्पना

एक दिन पूरे ब्रह्मांड को नियंत्रित करें — मानव की कौन-सी आदतें बदलेंगे? क्यों?
उत्तर (संकेत)

मैं मनुष्य की ईर्ष्या, स्वार्थ, घृणा, अहंकार व भेदभाव की आदतें बदलूँगा — ताकि वह प्रेम, सहयोग व समानता से रहे, युद्ध-झगड़े बंद हों और पृथ्वी सुंदर-शांत बने। प्रदूषण फैलाने की आदत भी बदलूँगा। (अपने उत्तर लिखें।)

अंतरिक्ष यात्री बनकर दूसरे भाग में जाएँ तो किस स्थान को सबसे अधिक याद करेंगे? क्यों?
उत्तर (संकेत)

अपने घर को — क्योंकि वहाँ परिवार का प्यार, माँ का बनाया खाना और अपनापन है; तथा अपनी पृथ्वी को, जो ‘करोड़ों में एक ही’ है। (व्यक्तिगत उत्तर लिखें।)

कल्पनात्मक यात्रा-वृत्तांत — सभी सीमाओं को पार कर बच्चा कहाँ तक जाएगा, क्या देखेगा?
नमूना आरंभ

“मैं अपने कमरे से निकलकर बादलों के ऊपर उड़ चला… नगर, देश और फिर नीली पृथ्वी एक छोटे-से गोले-सी दिखने लगी। चंद्रमा को पार कर मैं तारों के बीच पहुँचा, जहाँ असंख्य रंग-बिरंगे ग्रह घूम रहे थे…” (अपनी कल्पना से आगे बढ़ाएँ।)

अनुच्छेद — “मैं ब्रह्मांड में एक… हूँ।”
नमूना

“मैं ब्रह्मांड में एक नन्हा-सा कण हूँ — असंख्य तारों और ग्रहों के बीच एक सूक्ष्म बिंदु। फिर भी मेरे भीतर सोचने, प्रेम करने और सृजन करने की शक्ति है। इसी कारण छोटा होकर भी मेरा अस्तित्व अनमोल है, और मुझे अहं छोड़कर विनम्रता से जीना चाहिए।” (अपने शब्दों में लिखें।)

दूसरे संसार से संदेश — पृथ्वी के किसी व्यक्ति की आवश्यकता — किसे भेजेंगे? क्यों?
उत्तर (संकेत)

ऐसे व्यक्ति को जो दयालु, समझदार व शांतिप्रिय हो (जैसे कोई वैज्ञानिक, शिक्षक या डॉक्टर) — ताकि वह पृथ्वी का अच्छा प्रतिनिधित्व करे, मेल-मिलाप बढ़ाए और सहयोग से समस्या हल करे। (अपना उत्तर व कारण लिखें।)

एक दिन के लिए ईर्ष्या, अहं, स्वार्थ समाप्त हो जाएँ तो समाज में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर

झगड़े, धोखा व भेदभाव रुक जाएँगे; लोग एक-दूसरे की सहायता करेंगे, सब बराबरी से रहेंगे, अपराध घटेंगे और चारों ओर प्रेम, विश्वास व शांति का वातावरण बनेगा।

पोस्टर — ‘विराटता व लघुता’ तथा ‘मनुष्य का भ्रम’ — कौन-से चित्र, प्रतीक, शब्द?
सुझाव

चित्र: विशाल तारों-भरे आकाश में एक नन्हा मानव। प्रतीक: छोटा बिंदु ⟷ बड़ी आकाशगंगा; टूटती हुई दीवार। शब्द: “करोड़ों में एक — फिर भी अनोखा”, “दीवारें गिराओ, हृदय बढ़ाओ”।

शब्द से जुड़े शब्द — ‘सृष्टि’ व ‘पृथ्वी’ से जुड़े शब्द
उदाहरण

सृष्टि → जगत, संसार, ब्रह्मांड, प्रकृति, रचना, जीव-जंतु, नक्षत्र।
पृथ्वी → धरती, भूमि, वसुधा, धरा, ग्रह, संसार, जमीन।

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सृजन

कमरे से ब्रह्मांड तक का विस्तार — माइंड-मैप/सीढ़ी; “मैं इस चित्र में कहाँ हूँ और क्यों?”
संकेत

सीढ़ीनुमा क्रम बनाइए: कमरा → घर (पास-पड़ोस की विशेष बात) → नगर (कोई प्रसिद्ध स्थान) → देश (विविधता) → पृथ्वी → ब्रह्मांड। नीचे लिखें — “मैं इस चित्र में सबसे नीचे/छोटे स्तर पर हूँ, क्योंकि विराट सृष्टि के सामने मैं एक छोटा-सा अंश हूँ।” (ऊपर दिया गया रेखाचित्र इसका नमूना है।)

कहानी ‘ब्रह्मांड में मानव’ का आरंभ कैसे करेंगे?
नमूना आरंभ

“अनगिनत तारों से भरे इस विशाल ब्रह्मांड के एक कोने में, एक छोटे-से नीले ग्रह पर रहता था मानव — इतना छोटा कि ब्रह्मांड उसे देख भी न पाता, फिर भी सपनों से इतना बड़ा कि वह तारों तक पहुँचना चाहता था…” (आगे बढ़ाइए।)

‘एक कमरे में दो दुनिया रचाता है’ — बिना दीवार वाली दुनिया कैसी होगी?
वर्णन

बिना दीवार की दुनिया में कोई जाति-धर्म, अमीर-गरीब या ऊँच-नीच का भेद न होगा। सब एक-दूसरे पर विश्वास करेंगे, मिल-बाँटकर रहेंगे, झगड़े-युद्ध न होंगे — चारों ओर खुलापन, प्रेम और शांति होगी।

चित्र शृंखला — आदमी → कमरा → घर → पड़ोसी क्षेत्र → नगर → देश → पृथ्वी → ब्रह्मांड (आकार-अनुपात)।
ऊपर दिया गया रेखाचित्र इसी क्रम व घटते-बढ़ते अनुपात को दर्शाता है — आप इसे रंगों के साथ अपनी कॉपी में बना सकते हैं।
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कविता की रचना

निदेशक चिह्न व विशेषताएँ
निदेशक चिह्न ( — ): यह विराम चिह्न किसी बात को आगे बढ़ाने/स्पष्ट करने, ठहराव देने और महत्वपूर्ण विचार की ओर पाठक का ध्यान खींचने के लिए प्रयोग होता है। ‘कमरे से छोटे—’ में यह सोचने पर विवश करता है।
कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर
  • बहुत छोटी-छोटी पंक्तियाँ; अधिकतर पंक्तियों का अंतिम शब्द ‘में’।
  • छोटे से बड़े की ओर बढ़ता शब्द-दोहराव (कमरा→घर→मोहल्ला→नगर…)।
  • प्रश्न शैली व कोमल व्यंग्य; अतिशयोक्ति (संख्यातीत शंख)।
  • सरल भाषा, फिर भी गहरा भाव; प्रतीकों का प्रयोग (दीवार, दो दुनिया)।
विशेषताओं का पंक्तियों से मिलान कीजिए।
1. सरल वाक्य के शब्दों को विशेष क्रम में लगाया गयाकमरा है घर में
2. मुहावरे का प्रयोगसंख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है (‘दीवारें उठाना’)
3. छोटे से बड़े की ओर विस्तार हेतु शब्द-दोहरावकमरा है घर में, घर है मोहल्ले में, मोहल्ला नगर में…
4. प्रश्न शैली में व्यंग्यदेशों की कौन कहे, एक कमरे में दो दुनिया रचाता है
5. अतिशयोक्ति से भरा कथनयह है अनुपात आदमी का विराट से
6. मानव के अहंकार पर तीखा व्यंग्यअपने को दूजे का स्वामी बताता है
नोट: “संख्यातीत शंख सी दीवारें उठाता है” में ‘दीवारें उठाना’ मुहावरा है, साथ ही ‘शंख’ (विशाल संख्या) के कारण इसमें अतिशयोक्ति का पुट भी झलकता है — इसलिए कुछ पाठक इसे अतिशयोक्ति से भी जोड़ते हैं।
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कविता का सौंदर्य

कविता में ब्रह्मांड की विशालता को किन-किन प्रकारों से व्यक्त किया गया है? पहचानिए।
उत्तर
  • कमरे से ब्रह्मांड तक का क्रमिक विस्तार (कमरा→घर→…→ब्रह्मांड)।
  • अनगिन नक्षत्र’, ‘लाखों ब्रह्मांड’, ‘हर ब्रह्मांड में कितनी ही पृथ्वियाँ’ जैसी असीमता।
  • परिधि नभ गंगा की’ — आकाशगंगा की अपार परिधि।
  • करोड़ों में एक ही पृथ्वी’ — संख्या के माध्यम से विराटता बनाम लघुता।
कविता में मानव के लिए आई क्रियाओं की जगह नई क्रियाएँ रखकर कविता रचिए।
नमूना (नई क्रियाओं के साथ)

“… ऊँची-ऊँची दीवारें खड़ी करता है / अपने को सबसे बड़ा समझता है / एक आँगन में / कई बँटवारे बना डालता है।” (आप अपनी क्रियाएँ चुनकर रचना कीजिए।)

पाठ से आगे
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विशेषण और विशेष्य

पंक्तियों में पहचानिए
पंक्तिविशेषणविशेष्य
1. दो व्यक्ति कमरे मेंदोव्यक्ति
2. अनगिन नक्षत्रों मेंअनगिननक्षत्रों
3. लाखों ब्रह्मांडों मेंलाखोंब्रह्मांडों
4. अपना एक ब्रह्मांडएक (अपना)ब्रह्मांड
5. संख्यातीत शंख सीसंख्यातीतशंख
6. एक कमरे मेंएककमरे
7. दो दुनिया रचाता हैदोदुनिया
आपके शब्द (दो शब्दों से नया शब्द): जैसे ‘नभ-गंगा’ — वैसे ही — नभ-मंडल, ज्योति-कण, सूर्य-किरण, जल-धारा, मेघ-गर्जन, गिरि-शिखर।
आपके प्रश्न (उदाहरण): ब्रह्मांड कितना बड़ा है? तारे कैसे बनते हैं? क्या और ग्रहों पर जीवन है? पृथ्वी जैसा कोई और ग्रह है?
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आपकी बात

कोई ऐसी स्थिति बताइए जहाँ ‘अनुपात’ बिगड़ गया हो।
उदाहरण

परीक्षा के समय पढ़ाई का बोझ अधिक और समय कम होना; या एक व्यक्ति पर बहुत-सा काम और सहायता के लिए कोई नहीं — यहाँ काम और समय/संसाधन का अनुपात बिगड़ जाता है।

परिवार/विद्यालय/मोहल्ले में ‘विराटता’ (विशाल दृष्टिकोण) कैसे लाएँ?
उपाय
  • किसी को अनदेखा न करना, सबको साथ लेकर चलना।
  • जरूरतमंद की सहायता करना, भेदभाव न करना।
  • दूसरों की बात धैर्य से सुनना व सहनशीलता रखना।
  • छोटी-छोटी बातों पर झगड़ने के बजाय मिल-जुलकर हल निकालना।
‘करोड़ों में एक ही पृथ्वी’ — भाव; पृथ्वी को सुरक्षित रखने के उपाय?
उत्तर

भाव — हमारी पृथ्वी अत्यंत दुर्लभ व अनमोल है, इसे सहेजना हमारा कर्तव्य है। उपाय: पेड़ लगाना, जल व बिजली बचाना, प्लास्टिक कम करना, प्रदूषण रोकना, स्वच्छता रखना और जीव-जंतुओं की रक्षा करना।

‘अपने को दूजे का स्वामी बताने’ से बचने के लिए कौन-से गुण प्रबल करेंगे?
उत्तर

विनम्रता, सहानुभूति, समानता का भाव, सहयोग और सम्मान — इन गुणों को प्रबल करूँगा ताकि मैं किसी को स्वयं से छोटा या अधीन न समझूँ।

अपने जीवन की तीन ‘दीवारों’ (डर, संकोच आदि) को कैसे तोड़ेंगे? समाज की दीवारें गिराने में कैसे सहायता?
उत्तर (संकेत)

मेरी दीवारें — मंच पर बोलने का डर, नए लोगों से संकोच, असफलता का भय। योजना: छोटे-छोटे कदमों से अभ्यास, आत्मविश्वास बढ़ाना, बड़ों से मार्गदर्शन। समाज में भी जाति/धर्म/भेदभाव की दीवारें होती हैं — हम सबसे समान व्यवहार करके, मेल-जोल बढ़ाकर और भेदभाव का विरोध करके उन्हें गिराने में सहायता कर सकते हैं।

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संख्यातीत शंख

भारतीय संख्या प्रणाली — चरणबद्ध हल (KaTeX)
‘शंख’ का अर्थ — 100 पद्म की संख्या, अर्थात् $10^{17}$।
1जिस संख्या में 15 शून्य होते हैं, उसे क्या कहते हैं?
$$\text{15 शून्य} \Rightarrow 1\underbrace{000\ldots0}_{15} = 10^{15} = \textbf{पद्म}$$
2महाशंख में कितने शून्य होते हैं?
$$\text{महाशंख} = 10^{19} \Rightarrow \textbf{19 शून्य}$$
3एक लाख में कितने हजार होते हैं?
$$\frac{1{,}00{,}000}{1{,}000} = \frac{10^{5}}{10^{3}} = 10^{2} = \textbf{100 हजार}$$
4तालिका के अनुसार सबसे छोटी और सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?
$$\text{सबसे छोटी} = \text{एक (इकाई)} = 10^{0} = 1$$ $$\text{सबसे बड़ी} = \text{महाशंख} = 10^{19}$$
5दस करोड़ और एक अरब को जोड़ने पर कौन-सी संख्या आएगी?
$$\text{दस करोड़} = 10^{8} = 10{,}00{,}00{,}000$$ $$\text{एक अरब} = 10^{9} = 1{,}00{,}00{,}00{,}000$$ $$10{,}00{,}00{,}000 + 1{,}00{,}00{,}00{,}000 = 1{,}10{,}00{,}00{,}000$$ $$= \textbf{एक अरब दस करोड}$$
समावेशन व समानता: जैसे पृथ्वी असंख्य नक्षत्रों में एक छोटा-सा ग्रह है, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति — चाहे उसका जेंडर, आय, रूप-रंग या क्षमता कैसी भी हो — समाज का महत्वपूर्ण भाग है, और सबको समान अवसर मिलने चाहिए।
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झरोखे · कवि-परिचय · खोजबीन

कवि-परिचय — गिरिजा कुमार माथुर
परिचय

जन्म — मध्य प्रदेश के अशोक नगर जनपद में (1919–1994)। आकाशवाणी में अनेक महत्वपूर्ण पदों पर रहे। कविताओं के साथ नाटक, गीत, कहानी व निबंध भी लिखे। प्रमुख कृतियाँ — मंजीर, नाश और निर्माण, धूप के धान, शिलापंख चमकीले, मैं वक्त के हूँ सामने। प्रसिद्ध भावांतर गीत ‘होंगे कामयाब’ के रचयिता।

झरोखे से — गीत ‘होंगे कामयाब’ (परिचय)
सार

यह विश्वप्रसिद्ध गीत “We Shall Overcome” का हिंदी भावांतर (भावानुवाद) है। इसका मूल भाव है — आशा, एकता, निर्भयता और दृढ़ विश्वास कि मिलकर, हाथों में हाथ डालकर चलने से हम एक दिन अवश्य सफल होंगे और चारों ओर शांति होगी। (कॉपीराइट कारणों से यहाँ गीत की पंक्तियाँ नहीं दी जा रहीं — इसका आनंद पुस्तक/अधिकृत स्रोत में लीजिए।)

साझी समझ व खोजबीन: गिरिजा कुमार माथुर की अन्य रचनाएँ पुस्तकालय/इंटरनेट पर पढ़कर कक्षा में साझा कीजिए। ‘ब्रह्मांड और पृथ्वी’, ‘कल्पना चावला’, ‘सुनीता विलियम्स’, ‘मंगलयान’ तथा ‘हम होंगे कामयाब’ से जुड़े वीडियो/जानकारी खोजकर देखिए। (पाठ में दिए गए YouTube लिंक का उपयोग कीजिए।)
आज की पहेली: “कौन-सा अंतरिक्ष यान किस ग्रह पर जाएगा” वाली भूल-भुलैया (maze) पुस्तक के चित्र में रेखाएँ देखकर हल कीजिए — हर यान की रेखा को आँख से उसके ग्रह तक मिलाइए।

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