मत बाँधो
सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर · भावार्थ · व्याकरण एवं सृजन
— कविता : महादेवी वर्मा (1907–1987)
✦कविता का भाव (सार)
इस कविता में कवयित्री महादेवी वर्मा सपनों की स्वतंत्रता का संदेश देती हैं। वे कहती हैं कि सपनों के पंख मत काटो और उनकी गति (उड़ान) मत बाँधो। जैसे सुगंध आकाश में उड़ जाती है और बीज को बढ़ने के लिए खुला वातावरण चाहिए, वैसे ही सपनों को भी मुक्ति चाहिए।
सपनों में दो गतियाँ होती हैं — ऊपर उठना (आरोहण) और लौटकर साकार होना (अवरोहण)। यदि सपनों को मुक्त गगन में विचरने दिया जाए, तो वे तारों, मेघों और किरणों से रंग व दीप्ति लेकर धरती पर लौटते हैं और एक सुंदर संसार (‘स्वर्ग’) बनाने की कला सिखाते हैं। इसलिए सपनों को धरती से बाँधकर मत रखो — उन्हें स्वतंत्र उड़ान भरने दो। यही कविता का केंद्रीय भाव है।
नोट — कविता कॉपीराइट के अंतर्गत है, इसलिए यहाँ पूरी कविता दोहराने के बजाय उसका भावार्थ और सभी अभ्यास-प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं।
1मेरी समझ से
(क) सही उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (नीचे ✅ सही उत्तर है।)
यह समूह-चर्चा गतिविधि है — अपने मित्रों को कारण सहित समझाइए कि आपने वह उत्तर क्यों चुना।
2पंक्तियों पर चर्चा
इन पंक्तियों में कवयित्री दो उदाहरण देती हैं — सुगंध (सौरभ) एक बार आकाश में उड़ जाए तो लौटकर नहीं आती, और धूल में गिरा बीज आकाश में नहीं उड़ पाता। इनके माध्यम से वे कहती हैं कि हर वस्तु की अपनी स्वाभाविक गति और दिशा होती है। सपनों की भी अपनी स्वतंत्र उड़ान होती है; यदि उन्हें बाँध दिया जाए या रोक दिया जाए, तो उनकी संभावना (सुगंध की तरह) व्यर्थ चली जाती है। इसलिए सपनों को उनकी सहज स्वतंत्रता देनी चाहिए।
इन पंक्तियों का आशय है कि यदि सपने को मुक्त आकाश में स्वतंत्र विचरण करने दिया जाए, तो वह तारों में मिल जाएगा, मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति (प्रकाश) लेकर और अधिक सुंदर व तेजस्वी होकर धरती पर लौट आएगा। अर्थात् स्वतंत्र सपना ऊँचाइयों को छूकर और भी निखरकर लौटता है और संसार को सौंदर्य व प्रकाश देता है। स्वतंत्रता ही सपनों को सार्थक बनाती है।
3मिलकर करें मिलान
स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 के सही भाव/संदर्भ से मिलान —
| स्तंभ 1 (पंक्ति) | → | स्तंभ 2 (भाव/संदर्भ) |
|---|---|---|
| 1. इन सपनों के पंख न काटो / इन सपनों की गति मत बाँधो! | → | किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, वैसे ही सपनों को बाधित करें तो कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाएँगी। |
| 2. सपनों में दोनों ही गति हैं / उड़कर आँखों में आता है! | → | सपनों में आरोहण और अवरोहण दोनों की विशेषता है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है और व्यवहार में पूरा होता है, तभी वह सच्चाई बनता है। |
| 3. इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! | → | सपनों के उठने (आरोहण) और व्यवहार में वापस आने (अवरोहण) में बाधा न डालें, क्योंकि स्वतंत्रता ही सपनों को साकार करने की कुंजी है। |
| 4. नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! | → | सपनों को ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको। उन्हें धरती से बाँधकर मत रखो। |
| 5. स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! | → | रचनात्मक और स्वतंत्र विचार समाज को सुंदर, समृद्ध और शांतिपूर्ण बना सकता है। |
संक्षेप में मिलान — 1→3, 2→5, 3→1, 4→2, 5→4 (स्तंभ 2 के क्रमांक के अनुसार)
4सोच-विचार के लिए
ये संबोधन उन सभी लोगों के लिए हैं जो दूसरों के सपनों, कल्पनाओं और स्वतंत्रता पर रोक लगाते हैं — जैसे समाज, बड़े-बुज़ुर्ग, या कोई भी नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति। कवयित्री हर उस व्यक्ति से कहती है कि सपने देखने वालों (विशेषकर बच्चों और युवाओं) की स्वतंत्रता मत छीनो।
क्योंकि गति (स्वतंत्रता) ही सपनों को साकार करती है। यदि सपनों को रोक दिया जाए तो कल्पनाशीलता, नवीनता और संभावनाएँ समाप्त हो जाती हैं — बँधा हुआ सपना मर जाता है। केवल स्वतंत्र सपने ही प्रगति, सृजन और एक सुंदर संसार का निर्माण कर सकते हैं।
सपने असीम होते हैं और हर व्यक्ति के अपने होते हैं; वे साझा होने पर और बड़े बन जाते हैं; वे निराशा में आशा जगाते हैं; और स्वतंत्र मिलने पर ही पूरे होते हैं। सपने अदृश्य होकर भी जीवन को दिशा देते हैं — यही उनकी विशेष शक्ति है।
आरोहण (ऊपर चढ़ना) — कठिन परिश्रम से किसी लक्ष्य की ऊँचाई छूना, जैसे परीक्षा में सफलता पाना या पर्वतारोहण करना। अवरोहण (नीचे आना/लौटना) — सफल होकर वापस आकर अपने ज्ञान-अनुभव को समाज के काम में लगाना, जैसे डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करना। दोनों मिलकर ही किसी सपने को पूर्ण और सार्थक बनाते हैं।
हाँ, सहमत हूँ। सपना पहले मन/आँखों में जन्म लेता है (आरोहण), फिर मेहनत से वास्तविकता बनकर पुनः जीवन में लौट आता है (अवरोहण)। उदाहरण — हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने स्वतंत्र भारत का सपना देखा और संघर्ष करके उसे सच कर दिखाया; वह सपना ‘आँखों में लौटकर’ वास्तविकता बन गया।
5शीर्षक
कविता का शीर्षक ‘मत बाँधो’ है। अन्य उपयुक्त नाम हो सकते हैं — “सपनों को उड़ान दो”, “मुक्त सपने”, या “सपनों की उड़ान”। कारण — ये नाम सीधे कविता के मूल भाव — सपनों की स्वतंत्रता और उड़ान — को व्यक्त करते हैं। (आप अपना चुना नाम व कारण लिखें)
6अनुमान और कल्पना से
(क) नया संसार — मैं अपने संसार में रखूँगा — प्रेम, समानता, स्वतंत्रता, शिक्षा, हरियाली और परस्पर सहयोग; और नहीं रखूँगा — हिंसा, भेदभाव, झूठ और प्रदूषण; क्योंकि सुख और शांति केवल सद्भाव व स्वतंत्रता से आते हैं। (अपने विचार लिखें)
(ख) कौन-सी कला सीखना चाहेंगे — मैं चित्रकला/संगीत/नृत्य/लेखन सीखना चाहूँगा; इससे मेरा मन शांत व रचनात्मक होगा, आत्म-अभिव्यक्ति बढ़ेगी और जीवन में सुंदरता व आनंद आएगा। (अपनी पसंद बताएँ)
(ग) बीते समय में लौटने का अवसर — मैं अपने परिवार व पढ़ाई को अधिक समय देता, किसी के साथ किए गए बुरे व्यवहार को सुधारता, और हर पल का अधिक सदुपयोग करता। (अपना उत्तर लिखें)
(घ) सपने यदि बीज की तरह हों — उन्हें उगने के लिए चाहिए — धूप = मेहनत, पानी = लगन/अभ्यास, उपजाऊ मिट्टी = अवसर एवं सहयोग, और माली = सही मार्गदर्शक/गुरु। इन सबके बिना सपने का बीज पनप नहीं पाता।
(ङ) बुरे सपनों/विचारों से क्या होता होगा — यदि अच्छे विचार ‘स्वर्ग’ बनाते हैं, तो बुरे विचार घृणा, विनाश और दुख फैलाकर ‘नरक’ जैसा वातावरण बनाते हैं। बचाव — अच्छी संगति, सद्ग्रंथों का अध्ययन, सकारात्मक सोच और बड़ों के मार्गदर्शन से बुरे विचारों से बचा जा सकता है।
(च) यदि सबको सपने पूरे करने की स्वतंत्रता मिले — तो दुनिया अधिक रचनात्मक, खुशहाल और प्रगतिशील होगी। उस दुनिया में महत्वपूर्ण बातें होंगी — समानता, परस्पर सम्मान, समान अवसर, सहयोग और स्वतंत्रता। (अपने विचार लिखें)
(छ) “इन सपनों के पंख न काटो…” — सुझाव, आदेश या प्रार्थना? यह मूलतः एक भावपूर्ण प्रार्थना तथा सुझाव है, जो अपनी दृढ़ता के कारण हल्के आदेश जैसा भी प्रतीत होता है। यह बात समाज के उन सब लोगों/बड़ों से कही जा रही है जो दूसरों के (विशेषकर बच्चों के) सपनों को रोकते या बाँधते हैं।
7कविता की रचना
यह समूह-गतिविधि है। इस कविता में मिलने वाली विशेषताएँ — शब्द-चित्रों की लड़ी (सौरभ, बीज, अग्नि), विपरीतार्थक शब्द (आरोहण/अवरोहण), पुनरुक्ति, समानार्थी शब्द (नभ/गगन, भू/भूमि), प्रश्न-शैली, संबोधन तथा सपनों का मानवीकरण आदि।
| कविता की विशेषता | → | कविता की पंक्ति |
|---|---|---|
| 1. एक-दूसरे के विपरीत अर्थवाले शब्दों का प्रयोग | → | इसका आरोहण मत रोको / इसका अवरोहण मत बाँधो! (आरोहण × अवरोहण) |
| 2. एक ही शब्द का बार-बार प्रयोग (पुनरुक्ति) | → | नभ तक जाने से मत रोको / धरती से इसको मत बाँधो! (‘मत’ की पुनरुक्ति) |
| 3. समानार्थी शब्दों का प्रयोग | → | दीप्ति लिए भू पर आयेगा। … भूमि को सिखलायेगा! (भू = भूमि) |
| 4. प्रश्न पूछा गया है | → | वह नभ में कब उड़ पाता है? |
| 5. संबोधन का प्रयोग | → | इन सपनों के पंख न काटो (किसी को संबोधित करते हुए) |
| 6. सपने को मनुष्य की तरह चित्रित किया गया है (मानवीकरण) | → | स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प / भूमि को सिखलायेगा! (सपना ‘सिखाता’ है) |
संक्षेप में — 1→2, 2→5, 3→6, 4→1, 5→4, 6→3
8शब्दों की बात
• पर्वतारोहियों ने बीस दिन तक पर्वत पर आरोहण कर विजय प्राप्त की।
• नदियाँ विशाल पर्वतों से अवरोहण करते हुए सागर में मिल जाती हैं।
• अंकगणित में बड़ी संख्या से छोटी संख्या की ओर लिखने की प्रक्रिया अवरोहण क्रम कहलाती है।
अपने वाक्य (नमूना) —
• आरोहण — हवाई जहाज़ धीरे-धीरे आकाश में आरोहण करने लगा।
• अवरोहण — साँझ ढलते ही पक्षी पेड़ों की ओर अवरोहण करने लगे।
“वह गगन में कब उड़ पाता है?” / “धूम नभ में मँडराता है।”
समानार्थी शब्द बदलने पर अर्थ वही रहता है, पर पंक्ति की लय (तुक/मात्रा) बनाए रखने के लिए कभी-कभी आगे-पीछे के शब्द भी थोड़े बदलने पड़ सकते हैं।
मत डरो, मत रुको, मत झुको, मत हारो, मत भागो, मत रोओ, मत छोड़ो, मत भूलो।
जोड़ना, कसना, गाँठ लगाना, लपेटना, जकड़ना, नत्थी करना।
वाक्य — माँ ने उपहार को सुंदर रिबन से कसकर बाँध दिया।
• मत → तम (अँधेरा) • कब → बक (बगुला)
(यह खोज-गतिविधि है — ऐसे और शब्द ढूँढ़िए।)
9काल परिवर्तन
| वर्तमान काल | भूतकाल | भविष्य काल |
|---|---|---|
| वह नभ में कब उड़ पाता है? | वह नभ में कब उड़ पाया? | वह नभ में कब उड़ पाएगा? |
| फिर वह लौट कहाँ आता है? | फिर वह लौट कहाँ आया? | फिर वह लौट कहाँ आएगा? |
| अग्नि सदा धरती पर जलती है। | अग्नि सदा धरती पर जली। | अग्नि सदा धरती पर जलेगी। |
| धूम गगन में मँडराता है। | धूम गगन में मँडराया। | धूम गगन में मँडराएगा। |
| उड़कर आँखों में आता है। | उड़कर आँखों में आया। | उड़कर आँखों में आएगा। |
10शब्दकोश से (‘शिल्प’ से जुड़े शब्द)
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| 1. शिल्पकार / शिल्पी / शिल्पजीवी | हाथ से वस्तुएँ बनाने वाला कारीगर या कलाकार; दस्तकार। |
| 2. शिल्पकला | हाथ से सुंदर वस्तुएँ बनाने की कला; हस्तकला, कारीगरी। |
| 3. शिल्पकौशल | शिल्प/कारीगरी में निपुणता या दक्षता; हुनर। |
| 4. शिल्पगृह / शिल्पगेह | वह स्थान या घर जहाँ शिल्प-कार्य किया जाता है; कार्यशाला। |
| 5. शिल्पविद्या | शिल्प/कारीगरी की विद्या या ज्ञान; हस्तकला सीखने की विद्या। |
| 6. शिल्पशाला / शिल्पालय | शिल्प-कार्य की शाला; कार्यशाला (वर्कशॉप)। |
11आपकी बात
(क) ‘बाँधने’ का प्रयोग — गाँठ बाँधना, रस्सी/जूते के फीते बाँधना, उपहार बाँधना, पशु को बाँधना, सिर पर पट्टी बाँधना, समय/नियम में बँधना, वचन में बँधना, मन को एक जगह बाँधना (एकाग्र करना)।
(ख) सुखद स्थान बनाने के प्रयास (सूची) — सफाई रखना; पेड़-पौधे लगाना; सबसे प्रेम व सम्मान से बात करना; बड़ों व छोटों की मदद करना; झगड़ा न करना; मिल-जुलकर रहना; पानी-बिजली जैसे संसाधन बचाना। (अपनी सूची बनाएँ)
(ग) दूसरों की सहायता करने वाला सपना — मेरा सपना है डॉक्टर/शिक्षक बनकर गरीबों का मुफ्त इलाज करना / वंचित बच्चों को निःशुल्क पढ़ाना, ताकि मेरा सपना दूसरों के जीवन को भी बेहतर बना सके। (अपना सपना बताएँ)
12चर्चा-परिचर्चा
“किसी एक का देखा सपना बहुत-से लोगों का सपना बन जाता है” — जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का स्वतंत्र भारत का सपना सबका सपना बन गया। साथियों से चर्चा कीजिए कि आपके कौन-से सपने (जैसे — स्वच्छ पर्यावरण, सबको शिक्षा) हैं जिन्हें पूरा करने के लिए आप दूसरों को भी जोड़ना चाहेंगे। (समूह गतिविधि)
13सृजन
नियम — “रोको मत, जाने दो” = बिना रोके जाने दिया जाए। “रोको, मत जाने दो” = जाने से रोका जाए। चित्रों के अनुसार उपयुक्त वाक्य व शीर्षक (नमूना) —
| चित्र | उपयुक्त वाक्य · शीर्षक |
|---|---|
| बच्चे/राहगीर सड़क पार कर रहे हैं | “रोको, मत जाने दो” (वाहन रोको) · शीर्षक — सुरक्षित राह |
| ‘यह बाघ विचरण क्षेत्र है’ का बोर्ड | “रोको, मत जाने दो” (वन में जाने से रोको) · शीर्षक — वन्य-जीव क्षेत्र |
| सैनिक कर्तव्य पर जाने को तैयार | “रोको मत, जाने दो” (कर्तव्य पर जाने दो) · शीर्षक — कर्तव्य की राह |
| महिला मतदान केंद्र की ओर | “रोको मत, जाने दो” (वोट देने दो) · शीर्षक — मेरा वोट, मेरा अधिकार |
| एम्बुलेंस के लिए यातायात | “रोको मत, जाने दो” (एम्बुलेंस जाने दो) · शीर्षक — जीवन की राह |
इन सपनों के पंख न काटो
इन सपनों की गति मत बाँधो।
उड़ने दो इनको नभ-नभ में,
हर मन में आशा-दीप जलाओ।
जो टूटे, उसको फिर जोड़ो,
हर बच्चे का सपना सँवारो!
(यह विद्यार्थी द्वारा रची गई मौलिक पंक्तियाँ हैं — आप अपनी कल्पना से और जोड़ सकते हैं।)
सेवा में,
प्रधानाचार्य महोदय, [विद्यालय का नाम]।
विषय — मेरा खोया हुआ सपना ढूँढ़ने हेतु।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि कल से मेरा एक सुंदर सपना कहीं खो गया है — यह सपना था ‘एक हरा-भरा, सबके लिए समान विद्यालय बनाने का’। न जाने परीक्षा के दबाव और भागदौड़ में यह कहाँ छूट गया। इसकी पहचान है — यह रंग-बिरंगा, उड़ने वाला और सबको प्रेरणा देने वाला है।
आपसे प्रार्थना है कि इसे ढूँढ़ने में मेरी सहायता करें और मुझे फिर से खुलकर सपने देखने का अवसर दें।
आपका आज्ञाकारी विद्यार्थी —
[नाम], कक्षा — ____, दिनांक — ____
14वाद-विवाद
विषय — “व्यक्ति को बाँध सकते हैं, उसकी कल्पना और विचारों को नहीं।”
पक्ष में (समूह 2 — स्वतंत्र विचार महत्वपूर्ण):
• शरीर को बंदी बनाया जा सकता है, पर मन और विचार स्वतंत्र रहते हैं — कारागार में रहकर भी अनेक महापुरुषों ने महान विचार दिए।
• स्वतंत्र कल्पना ही आविष्कार, कला और प्रगति की जननी है।
• विचारों को रोकना असंभव है; वे सीमाओं को पार कर जाते हैं।
विपक्ष में (समूह 1 — कुछ नियंत्रण आवश्यक):
• पूर्ण अनियंत्रित विचार कभी-कभी गलत दिशा में भी जा सकते हैं, इसलिए मार्गदर्शन ज़रूरी है।
• समाज में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने के लिए विचारों को सही दिशा देना आवश्यक है।
(ख) वाद-विवाद के बाद विद्यार्थी अपने अनुभव पर एक अनुच्छेद भी लिख सकते हैं।
15देखना-सुनना-समझना…
• वर्षा की बूँदों का — उनके हाथ पर पानी की बूँदें गिराकर, बारिश की आवाज़ सुनाकर और भीगी मिट्टी की महक सुँघाकर।
• धुएँ के उड़ने का — धुएँ की गंध सुँघाकर, उसकी गर्मी व हवा का स्पर्श कराकर, और शब्दों से वर्णन (कमेंट्री) करके।
• खेल के रोमांच का — खेल की सजीव कमेंट्री सुनाकर, दर्शकों के शोर व उत्साह को महसूस कराकर, और हाथों से इशारों द्वारा समझाकर।
(ख) मूक अभिनय द्वारा कविता का भाव — यह ‘कल्पना’ व ‘आकांक्षा’ दलों के बीच खेली जाने वाली गतिविधि है।
16आपदा प्रबंधन
(क) क्या करेंगे यदि —
• आग लग जाए — घबराएँ नहीं, तुरंत सुरक्षित बाहर निकलें, धुएँ से बचने के लिए झुककर चलें, दमकल (101) को सूचित करें, छोटी आग को पानी/कंबल से बुझाएँ।
• बाढ़ आ जाए — ऊँचे व सुरक्षित स्थान पर जाएँ, बिजली के स्विच बंद कर दें, साफ पानी व भोजन साथ रखें, प्रशासन/आपातकालीन सेवा (108) को सूचित करें।
• भूकंप आ जाए — मज़बूत मेज़ के नीचे छिपें (झुको–ढको–थामो), खुले स्थान पर जाएँ, लिफ्ट का प्रयोग न करें, इमारत व पेड़ों से दूर रहें।
(ख) “मैं आपदा के समय क्या करूँगा/करूँगी?” — इस पर एक सूची या चित्र-आधारित योजना बनाइए।
17शिल्प (मिलान)
(क) शिल्प-कार्य का सही अर्थ से मिलान —
| शिल्प-कार्य | → | अर्थ / व्याख्या |
|---|---|---|
| 1. काष्ठ शिल्प | → | लकड़ी से वस्तुएँ, खिलौने, मूर्तियाँ बनाना। |
| 2. मृत्तिका शिल्प | → | मिट्टी से बर्तन, दीये, मूर्तियाँ व सजावटी चीज़ें बनाना। |
| 3. धातु शिल्प | → | ताँबा, पीतल, लोहे से दीपक, मूर्तियाँ, थालियाँ बनाना। |
| 4. काँच शिल्प | → | काँच से झूमर, सजावटी वस्तुएँ व रंगीन खिड़कियाँ बनाना। |
| 5. वस्त्र शिल्प | → | कपड़ों पर कढ़ाई, बुनाई, छपाई, बंधेज आदि सजावटी कार्य। |
| 6. कागज शिल्प | → | कागज से खिलौने, सजावट, लिफाफे व पेपर मेशी बनाना। |
| 7. पत्थर शिल्प | → | संगमरमर या अन्य पत्थरों से मूर्तियाँ बनाना, मंदिरों की सजावट। |
| 8. चमड़ा शिल्प | → | चमड़े से जूते, बेल्ट, बैग व उपयोगी वस्तुएँ बनाना। |
| 9. बाँस और बेंत शिल्प | → | बाँस व बेंत से टोकरियाँ, कुर्सियाँ, चटाई, पंखे बनाना। |
| 10. मोती एवं आभूषण शिल्प | → | रंग-बिरंगे मोतियों से हार, कंगन, झुमके बनाना। |
| 11. लाख शिल्प | → | लाख से चूड़ियाँ, खिलौने, डिब्बे व सजावटी वस्तुएँ बनाना। |
| 12. शीशा शिल्प | → | कपड़ों या सजावट में शीशे जोड़ना/जड़ाई करना। |
| 13. चित्रकला शिल्प | → | पारंपरिक चित्रकलाओं (मधुबनी, गोंड, वरली) से कलाकृतियाँ बनाना। |
| 14. नक्काशी शिल्प | → | लकड़ी, पत्थर या धातु पर बारीक खुदाई द्वारा डिज़ाइन बनाना। |
(ख) हस्तशिल्प से जुड़े किसी स्थान/कार्यशाला का भ्रमण कर रिपोर्ट बनाइए, अथवा राष्ट्रीय हस्तशिल्प संग्रहालय की वेबसाइट देखिए — https://nationalcraftsmuseum.nic.in/
18झरोखे से · साझी समझ · खोजबीन
झरोखे से — इसी पाठ के अंत में महादेवी वर्मा की कहानी ‘गिल्लू’ का एक अंश दिया गया है, जिसमें वे अपनी पाली हुई एक गिलहरी (गिल्लू) के साथ अपने स्नेहपूर्ण संबंध का वर्णन करती हैं — कैसे वह उनकी थाली में बैठकर एक-एक चावल उठाकर खाता और काजू उसका प्रिय भोजन था।
साझी समझ — ‘गिल्लू’ कहानी को पुस्तकालय से ढूँढ़कर पूरी पढ़िए और साथियों के साथ चर्चा कीजिए। (पठन गतिविधि)
खोजबीन के लिए — महादेवी वर्मा और उनकी रचनाओं को इन वीडियो/लिंक के माध्यम से जाना जा सकता है (पाठ में दिए गए) — महादेवी वर्मा का जीवन व लेखन, ‘बारहमासा’, तथा ‘गिल्लू’ पर आधारित NCERT वीडियो।
