एक टोकरी भर मिट्टी
सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर · व्याख्या · व्याकरण एवं सृजन
— कहानी : माधवराव सप्रे (1871–1926)
✦कहानी का सार (एक झलक)
एक धनी ज़मींदार अपने महल का अहाता बढ़ाने के लिए पास में बसी एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी हड़पना चाहता है। वृद्धा का पति, इकलौता पुत्र और पतोहू — सब उसी झोंपड़ी में चल बसे; अब केवल उसकी पाँच वर्ष की पोती ही उसका सहारा है। वृद्धा झोंपड़ी छोड़ने से इनकार करती है, तो ज़मींदार वकीलों को रिश्वत देकर अदालत के ज़रिए झोंपड़ी पर कब्जा कर उसे निकाल देता है।
कुछ दिनों बाद वृद्धा एक टोकरी लेकर लौटती है और गिड़गिड़ाकर केवल एक टोकरी भर मिट्टी माँगती है — ताकि उसी मिट्टी का चूल्हा बनाकर वह अपनी रूठी पोती को रोटी खिला सके, जिसने घर छूटने के दुख में खाना छोड़ दिया है। ज़मींदार अनुमति दे देता है। वृद्धा टोकरी भरकर ज़मींदार से उसे सिर पर रखवाने को कहती है, पर ज़मींदार एक टोकरी भी नहीं उठा पाता। तब वृद्धा कहती है — “जब एक टोकरी भर मिट्टी आपसे नहीं उठती, तो इस झोंपड़ी की हजारों टोकरियाँ मिट्टी का भार जन्म-भर कैसे उठाएँगे?” यह सुनते ही ज़मींदार की आँखें खुल जाती हैं; वह पश्चाताप करता है, क्षमा माँगता है और झोंपड़ी लौटा देता है।
1मेरी समझ से
(क) सही उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (नीचे ✅ चिह्न सही उत्तर दर्शाता है।)
यह एक समूह-चर्चा गतिविधि है। प्रत्येक विद्यार्थी अपने मित्रों को यह तर्क सहित समझाए कि उसने कोई उत्तर क्यों चुना — इससे एक ही प्रश्न को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखना सीखा जा सकता है।
2मिलकर करें मिलान
(क) प्रत्येक वाक्य के साथ उसका सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष नीचे जोड़ा गया है।
| वाक्य | → | सर्वाधिक उपयुक्त निष्कर्ष |
|---|---|---|
| 1. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | → | वृद्धावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। |
| 2. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से कब्जा कर लिया। | → | ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर कब्जा किया। |
| 3. आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। | → | वृद्धा ने टोकरी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को उसके अन्याय का अनुभव कराया। |
| 4. ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | → | धन और अहंकार ने ज़मींदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। |
| 5. कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी। | → | अपने द्वारा किए अन्याय पर पछताकर ज़मींदार ने क्षमा माँगी। |
| 6. उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? | → | वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। |
| 7. कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लूँ। | → | वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8. उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। | → | झोंपड़ी में प्रवेश करते ही वृद्धा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। |
(ख) अपने मित्रों के उत्तरों से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्कर्ष क्यों चुने — यह सहयोगी गतिविधि है।
3पंक्तियों पर चर्चा
वृद्धा यहाँ मिट्टी को प्रतीक बनाकर ज़मींदार को गहरा संदेश देती है। आशय यह है — जब आप एक छोटी-सी टोकरी भर मिट्टी का बोझ नहीं उठा पाते, तो पूरी झोंपड़ी (अर्थात् एक गरीब का घर, उसकी यादें और उस पर किए गए अन्याय का नैतिक भार) जीवन-भर अपने मन पर कैसे ढो पाएँगे? इन शब्दों ने ज़मींदार की अंतरात्मा को झकझोर दिया और उसकी आँखें खोल दीं।
इस अंश में ज़मींदार के कठोर हृदय के पिघलने का आरंभ दिखता है। पहले वह क्रोधित था, पर वृद्धा की लगातार विनती और गिड़गिड़ाहट देखकर उसमें छिपी मानवीयता जाग उठी — वह किसी नौकर से न कहकर स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़ा। और जब वह एक टोकरी भी न उठा सका, तब उसे अपनी शारीरिक तथा नैतिक सीमा का अनुभव हुआ। यही क्षण उसके हृदय-परिवर्तन की नींव बनता है।
4सोच-विचार के लिए
कहानी की सबसे प्रभावशाली पात्र वृद्धा है। वह गरीब, अनाथ और असहाय है, फिर भी न क्रोध करती है, न झगड़ा। केवल अपने धैर्य, नम्रता और एक छोटे-से प्रतीक (एक टोकरी भर मिट्टी) के बल पर वह शक्तिशाली ज़मींदार की अंतरात्मा जगा देती है और न्याय पा लेती है। उसकी यही शांत नैतिक शक्ति पूरी कहानी को मोड़ देती है, इसलिए वह सबसे प्रभावशाली है।
पोती को अपने घर (झोंपड़ी) से बहुत गहरा लगाव था। जब वह घर छिन गया, तो वह दुखी और रूठ गई और ज़िद करने लगी कि वह अपने ही घर में रोटी खाएगी — “अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँगी।” इसी लगाव और दुख के कारण उसने खाना-पीना छोड़ दिया।
वृद्धा के बार-बार मना करने पर ज़मींदार ने ज़मींदारी चाल चली — उसने “बाल की खाल निकालने वाले” चतुर वकीलों को रिश्वत (थैली गरम) दी और कानूनी दावपेंच से अदालत के ज़रिए झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया तथा वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया।
यहाँ ज़मींदार का सिर हिलाना स्वीकृति या सहमति का संकेत है। इसका अर्थ है — “ठीक है, कहो, जो कहना है।” अर्थात् उसने वृद्धा की विनती सुनने के लिए हामी भर दी।
पहले का व्यवहार — ज़मींदार घमंडी, कठोर और स्वार्थी था; धन के मद में चूर होकर उसने एक असहाय विधवा का घर छीन लिया और उसे बेरहमी से निकाल दिया। नौकरों से काम करवाना उसकी आदत थी।
परिवर्तन — वृद्धा की विनती से उसके मन में दया जागी और वह किसी नौकर के बजाय स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़ा — यहीं से उसमें नम्रता और मानवीयता का आरंभ दिखता है। अंत में वह पश्चाताप कर, क्षमा माँगकर झोंपड़ी लौटा देता है — एक करुण और न्यायप्रिय इंसान बन जाता है।
जब ज़मींदार एक टोकरी भर मिट्टी भी न उठा सका और वृद्धा के मार्मिक शब्द सुने, तो उसकी अंतरात्मा जाग उठी। उसे अपने अन्याय की गंभीरता और उस नैतिक भार का बोध हुआ जिसे वह जीवन-भर नहीं उठा सकता था। इसी पश्चाताप और आत्मग्लानि के कारण उसने क्षमा माँगी और झोंपड़ी लौटा दी।
5अनुमान और कल्पना से
“दादाजी, यह छोटी-सी झोंपड़ी ही तो हमारा पूरा संसार है। इसी में मेरे माता-पिता और परदादा की यादें बसी हैं। इसे लेकर आपको क्या मिलेगा? आपके पास तो इतना बड़ा महल है। कृपया हमारा घर हमें लौटा दीजिए — यही हमारी सबसे बड़ी पूँजी है।”
मैं किसी असहाय विधवा का इकलौता घर कभी न छीनता। यदि मुझे सचमुच ज़मीन की ज़रूरत होती, तो मैं वृद्धा से आदरपूर्वक बात करता, उसे रहने के लिए बेहतर स्थान या उचित मुआवज़ा देता और उसकी सहमति से ही आगे बढ़ता। धन और शक्ति का प्रयोग किसी कमजोर को कुचलने के लिए नहीं, बल्कि उसकी सहायता के लिए करता।
सीधे रूप में — गीली मिट्टी से भरी टोकरी बहुत भारी थी और सुख-सुविधाओं में पला ज़मींदार शारीरिक श्रम का आदी नहीं था।
प्रतीकात्मक रूप में — वह “भार” केवल मिट्टी का नहीं, बल्कि उसके अन्याय और पाप का नैतिक बोझ था, जिसे कोई भी जीवन-भर नहीं उठा सकता। लेखक इसी प्रतीक से कहानी का संदेश देते हैं।
यहाँ मिट्टी केवल मिट्टी नहीं है — वह एक गहरा प्रतीक है। यह मिट्टी वृद्धा के घर, उसकी जीवन-भर की यादों, परिवार की जड़ों और स्वाभिमान का प्रतीक है, साथ ही ज़मींदार द्वारा किए गए अन्याय के नैतिक भार का भी। मिट्टी के बहाने वृद्धा यह कहना चाहती है — “आपने केवल एक झोंपड़ी नहीं, बल्कि एक पूरा जीवन छीना है; क्या इसका बोझ आप सदा उठा पाएँगे?”
उस समय स्त्रियाँ, विशेषकर विधवाएँ और वृद्धाएँ, प्रायः अकेली और असुरक्षित रहती थीं। उनके सामने ये चुनौतियाँ थीं — संपत्ति पर अधिकार का अभाव; आर्थिक रूप से दूसरों पर निर्भरता; कानून और न्याय तक सीमित पहुँच; धनी एवं शक्तिशाली लोगों द्वारा शोषण का भय; तथा समाज में आवाज़ उठाने के कम अवसर। इसी कारण ज़मींदार जैसे लोग उनका शोषण कर पाते थे।
✎बदली कहानी
कल्पना कीजिए कि दी गई स्थितियों (यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता / मना कर देता / यदि ज़मींदार एक स्त्री होती / यदि पोती स्वयं झोंपड़ी माँगती आदि) में कहानी कैसे आगे बढ़ती। यह समूह-सृजन गतिविधि है।
नमूना (यदि ज़मींदार मिट्टी देने से मना कर देता) —
यदि ज़मींदार घमंड में मिट्टी देने से भी मना कर देता, तो वृद्धा निराश होकर लौट जाती। पर उसके आँसुओं और गाँव वालों की दबी आवाज़ ज़मींदार के मन को धीरे-धीरे कचोटने लगती। एक रात वह बेचैन हो उठता और अगली सुबह स्वयं वृद्धा के पास जाकर न केवल मिट्टी, बल्कि उसकी पूरी झोंपड़ी लौटा देता — क्योंकि अंतरात्मा की आवाज़ धन से बड़ी होती है।
6‘कि’ और ‘की’ का उपयोग
1. वृद्धा ने कहा कि वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है।
2. वह अपनी पोती की चिंता में दुखी हो गई थी।
3. वृद्धा ने प्रार्थना की कि टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए।
4. पोती हमेशा कहती थी कि वह अपने घर में ही खाना खाएगी।
5. झोंपड़ी की मिट्टी से वृद्धा चूल्हा बनाना चाहती थी।
6. उसे विश्वास था कि मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेगी।
7. वृद्धा की आँखों से आँसुओं की धारा बहने लगी।
8. उसने यह सोचा कि झोंपड़ी से मिट्टी ले जाकर चूल्हा बनाऊँगी।
9. वृद्धा के मन की पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
10. ज़मींदार इतने लज्जित हुए कि टोकरी उठाने की बात मान ली।
11. उस झोंपड़ी की हर दीवार वृद्धा की यादों से भरी थी।
7मुहावरे
“बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया।”
• बाल की खाल निकालना = किसी बात की बहुत बारीकी/नुक्ताचीनी करना।
• थैली गरम करना = रिश्वत देना।
• बाल बाँका न होना — इतनी बड़ी दुर्घटना में भी सैनिक का बाल बाँका न हुआ, वह पूरी तरह सुरक्षित रहा।
• बाल बराबर — कारीगर ने इतनी महीन नक्काशी की कि रेखाएँ बाल बराबर पतली लग रही थीं।
• बाल बराबर फर्क होना — दोनों जुड़वाँ भाइयों के चेहरों में बाल बराबर भी फर्क नहीं था।
• बाल-बाल बचना — तेज़ रफ्तार कार सामने आ गई, पर मोहन बाल-बाल बच गया।
8काल
| भूतकाल (मूल वाक्य) | वर्तमान काल | भविष्य काल |
|---|---|---|
| (क) वह गिड़गिड़ाकर बोली। | वह गिड़गिड़ाकर बोलती है। | वह गिड़गिड़ाकर बोलेगी। |
| (ख) श्रीमान् ने आज्ञा दे दी। | श्रीमान् आज्ञा दे देते हैं। | श्रीमान् आज्ञा दे देंगे। |
| (ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। | उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगती है। | उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगेगी। |
| (घ) ज़मींदार साहब को अहाता बढ़ाने की इच्छा हुई। | ज़मींदार साहब को अहाता बढ़ाने की इच्छा होती है। | ज़मींदार साहब को अहाता बढ़ाने की इच्छा होगी। |
| (ङ) उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और झोंपड़ी वापस दे दी। | वे वृद्धा से क्षमा माँगते हैं और झोंपड़ी वापस दे देते हैं। | वे वृद्धा से क्षमा माँगेंगे और झोंपड़ी वापस दे देंगे। |
9वचन की पहचान
(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। (एकवचन)
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर बोली। (एकवचन)
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी थी।
(ङ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले आई।
(च) झोंपड़ी में बसी पुरानी यादें वृद्धा को रुला गईं। (‘यादें’ बहुवचन → गईं)
(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए हैं।
10कहानी की रचना
यह समूह-गतिविधि है। कहानी में मिलने वाली विशेषताएँ — अधूरी छोड़ी गई बात (‘…’), प्रश्नात्मक शैली, मार्मिक भाव, सजीव संवाद, नाटकीय दृश्य, स्पष्ट चरित्र-चित्रण आदि — मित्रों के साथ मिलकर खोजिए।
| कहानी की विशेषता | कहानी से उदाहरण |
|---|---|
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली | “आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती… उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे?” — ऐसा प्रश्न जो पाठक को सोचने पर विवश कर दे। |
| 2. वर्णनात्मकता | “किसी श्रीमान् ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की झोंपड़ी थी।” — स्थान और परिस्थिति का सजीव चित्रण। |
| 3. भावात्मकता | “वहाँ जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।” — करुणा और पीड़ा का गहरा भाव। |
| 4. संवादात्मकता | “महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ…” — संवादों से कहानी आगे बढ़ती है। |
| 5. नाटकीयता | “ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्ति के बाहर है।” — नाटक जैसा प्रभावशाली दृश्य। |
| 6. चरित्र चित्रण | “ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे।” — पात्र का स्वभाव स्पष्ट करता है। |
11शब्दकोश का उपयोग
कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त अर्थ नीचे रेखांकित/चुना गया है।
| वाक्य · रेखांकित शब्द | कहानी के अनुसार सही अर्थ |
|---|---|
| 1. श्रीमान् के सब प्रयत्न निष्फल हुए। | पुरुषों के नाम के पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द। |
| 2. पतोहू एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी। | लड़की (बालिका)। |
| 3. अपने महल का अहाता बढ़ाने की इच्छा हुई। | राजा या रईस के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान, प्रासाद। |
| 4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी। | बहुत अधिक समय। |
| 5. यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | सहारा (आश्रय देनेवाला, पालन करनेवाला)। |
12भावों की पहचान
| पंक्ति | → | भाववाचक संज्ञा |
|---|---|---|
| 1. वह लज्जित होकर कहने लगे— ‘नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।’ | → | लज्जा / पछतावा |
| 2. वृद्धा के उपर्युक्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गईं। | → | बोध / आत्मज्ञान |
| 3. उनके मन में कुछ दया आ गई। | → | करुणा / दया |
| 4. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | → | आस्था / विश्वास |
| 5. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | → | विनम्रता / विनय |
| 6. अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी। | → | ममता / स्नेह |
| 7. ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | → | अहंकार / घमंड |
| 8. उस झोंपड़ी में उसका मन ऐसा लग गया कि बिना मरे वहाँ से निकलना ही नहीं चाहती थी। | → | जुड़ाव / मोह |
| 9. पूर्वस्थिति की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | → | दुख / पीड़ा |
| 10. वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी पर कब्जा कर लिया। | → | क्रूरता / अन्याय |
13वाक्य विस्तार
प्रत्येक वाक्य को कहानी के अनुसार लगभग 15–20 शब्दों में बढ़ाया गया है। (नमूना)
1. एक झोंपड़ी थी। → ज़मींदार के विशाल महल के ठीक पास एक गरीब, अनाथ वृद्धा की छोटी-सी, टूटी-फूटी झोंपड़ी थी, जिसमें उसकी जीवन-भर की यादें बसी हुई थीं।
2. श्रीमान् टहल रहे थे। → एक दिन श्रीमान् ज़मींदार अपनी हड़पी हुई उसी झोंपड़ी के आस-पास घमंड भरे कदमों से टहल रहे थे और नौकरों को काम बता रहे थे।
3. वह खाने लगेगी। → वृद्धा को पूरा विश्वास था कि अपने पुराने घर की मिट्टी का चूल्हा देखकर उसकी रूठी हुई पोती फिर से प्रेम से रोटी खाने लगेगी।
4. वृद्धा भीतर गई। → हाथ में खाली टोकरी लिए वृद्धा धीरे-धीरे अपनी छूटी हुई झोंपड़ी के भीतर गई और पुरानी यादों में डूबकर रोने लगी।
5. आगे बढ़े। → किसी नौकर से न कहकर ज़मींदार साहब स्वयं, मन में दया लिए, वृद्धा की टोकरी उठाने के लिए धीरे से आगे बढ़े।
14संवाद फोन पर
15पोती की भावनाएँ
सेवा में,
श्रीमान् जिलाधिकारी महोदय, [जिला का नाम]।
विषय — हमारी झोंपड़ी वापस दिलाने हेतु प्रार्थना-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं एक गरीब परिवार की बालिका हूँ। मेरी दादी और मैं एक छोटी-सी झोंपड़ी में रहते थे, जो हमारा एकमात्र घर और सहारा है। पास के ज़मींदार ने अपने धन और प्रभाव के बल पर कानूनी दावपेंच से वह झोंपड़ी हमसे छीन ली है और हमें बेघर कर दिया है।
उसी घर में मेरे माता-पिता की यादें बसी हैं। उसके बिना मेरा मन कहीं नहीं लगता। आपसे विनम्र प्रार्थना है कि न्याय करते हुए हमारी झोंपड़ी हमें वापस दिलाने की कृपा करें।
सधन्यवाद।
आपकी प्रार्थी —
[पोती का नाम], दिनांक — ____
10 मई — आज भी हमारी झोंपड़ी हमें नहीं मिली। दादी सारा दिन उदास रहीं। मुझे अपना वह आँगन, वह दीवार, सब याद आता है। मैंने ठान लिया है — जब तक अपने घर नहीं लौटेंगे, मैं खाना नहीं खाऊँगी।
12 मई — आज दादी एक टोकरी लेकर ज़मींदार के पास गई थीं। शाम को लौटीं तो उनके चेहरे पर मुस्कान थी। बोलीं — “बेटी, हमारा घर हमें वापस मिल गया!” मेरी आँखों में आँसू आ गए, पर ये खुशी के थे। आज मैंने भरपेट रोटी खाई। 🙏
16आपकी बात
(क) घर से लगाव — मुझे अपने घर से बहुत लगाव है। उसके आँगन, छत और हर कोने से मेरी बचपन की यादें जुड़ी हैं। घर से दूर जाने पर मन उदास हो जाता है। (अपना अनुभव लिखें)
(ख) किसी वस्तु/व्यक्ति/स्थान से लगाव — मुझे अपनी पुरानी साइकिल/किताब/दादी से इतना लगाव था कि उसे छोड़ना बहुत कठिन लगा था… (अपना अनुभव साझा करें)
(ग) पश्चाताप का उदाहरण — एक बार मेरे मित्र ने गुस्से में किसी को कठोर शब्द कहे, बाद में पछताया और क्षमा माँगी; इससे उनकी दोस्ती और गहरी हो गई। (अपना उदाहरण लिखें)
(घ) मेरा अनुभव — एक बार मैंने गुस्से में अपने छोटे भाई को डाँट दिया, बाद में बहुत पछताया। फिर मैंने उससे क्षमा माँगी और उसके साथ खेला। इससे मैंने सीखा कि क्रोध में किया काम प्रायः पछतावा देता है। (अपना अनुभव लिखें)
17न्याय और समता
(क) ऐसे अन्याय के उदाहरण समाज में देखने/सुनने को मिलते हैं — किसी कमजोर की ज़मीन हड़पना, मज़दूरों को कम मजदूरी देना, बच्चों से काम करवाना आदि। (अपना देखा/सुना उदाहरण बताएँ)
(ख) ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए — सच्चाई के साथ खड़े रहें, पीड़ित का साथ दें, बड़ों/अधिकारियों को सूचित करें, और कानूनी सहायता (शिकायत पोर्टल, जनसुनवाई) का उपयोग करें। आस-पास के लोग मिलकर आवाज़ उठाएँ तो अन्याय रुक सकता है।
(ग) “सच्ची शक्ति दया और न्याय में है।” — विचार
सच्ची शक्ति बल या धन में नहीं, बल्कि दया और न्याय में है। ज़मींदार के पास धन और सत्ता थी, पर वह एक टोकरी मिट्टी तक न उठा सका; वहीं असहाय वृद्धा ने अपनी करुणा और सच्चाई के बल पर उसका हृदय बदल दिया। जो शक्ति दूसरों को कुचलती है वह क्षणिक है, पर जो दया और न्याय करती है वही स्थायी और महान है। इसलिए हमें अपनी शक्ति का प्रयोग सदा दया और न्याय के लिए करना चाहिए।
18घर-घर की कहानी
यह खोजबीन गतिविधि है — अपने घर के बड़े-बुज़ुर्गों से साक्षात्कार लीजिए कि घर कब और कैसे बना, उसमें आने के पीछे क्या कहानी है, और कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए।
मेरी दैनंदिनी (नमूना आरंभ) —
2 मई — आज दादी घर पर आईं तो बहुत परेशान थीं। मैंने बहुत पूछा। उन्होंने बताया कि यह घर मेरे परदादा ने अपनी मेहनत की कमाई से बनवाया था…
19न्याय और करुणा से जुड़ी सहायता
कहानी के प्रसंग को ध्यान में रखते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया की जानकारी रखना ज़रूरी है। कुछ उपयोगी सरकारी सुविधाएँ —
• सार्वजनिक शिकायत सुविधा (CPGRAMS) — केंद्र/राज्य सरकार के किसी भी विभाग से जुड़ी शिकायत, भारत की 22 भाषाओं में दर्ज की जा सकती है।
https://pgportal.gov.in
• जनसुनवाई — राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों की ऑनलाइन शिकायत सुविधा।
https://jansunwai.up.nic.in/
• सामाजिक सुरक्षा कल्याण योजनाएँ — सरकारी कल्याण-योजनाओं की जानकारी।
https://eshram.gov.in/hi/social-security-welfare-schemes
इन सुविधाओं के बारे में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए।
20आज की पहेली
अक्षरों से बने सार्थक शब्द (सभी कहानी से जुड़े हैं) —
| क्रम | उत्तर |
|---|---|
| 1. ट, क, र, ई, ओ | टोकरी |
| 2. य, आ, द | दया |
| 3. ई, ल, व, क | वकील |
| 4. झ, ओ, ई, प, ड़, अं | झोंपड़ी |
| 5. ज, द, आ, म, ई, र, अं | ज़मींदार |
| 6. त, आ, इ, औ, क, ल | इकलौता |
21खोजबीन के लिए
हमारे देश में हजारों वर्षों से कहानियाँ कही-सुनी जाती रही हैं। ऐसी ही एक अद्भुत पुस्तक है — हितोपदेश, जो आज भी मनोरंजन और ज्ञान के लिए पढ़ी जाती है। अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़िए और उसकी कोई एक कहानी कक्षा में सुनाइए। (यह वाचन एवं प्रस्तुति गतिविधि है)
