Ch-2 दो गौरैया “Do Gauraiya” Class 8th Hindi (Malhar) NCERT Solution

दो गौरैया — प्रश्न-उत्तर | EduGrown
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कक्षा 8 • मल्हार • पाठ 2

दो गौरैया

लेखक — भीष्म साहनी (1915–2003)

हास्य व करुणा से भरी कहानी सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर सरल व विस्तृत व्याख्या
दो गौरैया — आम का पेड़ और घर
आँगन के आम के पेड़ पर तरह-तरह के पक्षी डेरा डाले रहते हैं
भाग 1
📖

पाठ से

कहानी पर आधारित अभ्यास प्रश्न

मेरी समझ से

क-1पिताजी ने कहा कि घर सराय बना हुआ है, क्योंकि—
  • घर की बनावट सराय जैसी बहुत विशाल है
  • घर में विभिन्न पक्षी और जीव-जंतु रहते हैं
  • पिताजी और माँ घर के मालिक नहीं हैं
  • घर में विभिन्न जीव-जंतु आते-जाते रहते हैं
व्याख्या

सराय वह जगह होती है जहाँ यात्री बिना रोक-टोक आते-जाते व ठहरते रहते हैं। पिताजी के घर में भी तोते, कौवे, गौरैया, चूहे, बिल्ली, कबूतर, चमगादड़, छिपकली, चींटियाँ आदि अनेक जीव-जंतु रहते भी हैं और स्वतंत्र रूप से आते-जाते भी रहते हैं, इसलिए उन्होंने घर को सराय कहा।

क-2कहानी में ‘घर के असली मालिक’ किसे कहा गया है?
  • माँ और पिताजी को जिनका वह मकान है
  • लेखक को जिसने यह कहानी लिखी है
  • जीव-जंतुओं को जो उस घर में रहते थे
  • मेहमानों को जो लेखक से मिलने आते थे
व्याख्या

पिताजी कहते हैं कि “हम तो जैसे यहाँ मेहमान हैं, घर के मालिक तो कोई दूसरे ही हैं।” यहाँ ‘दूसरे’ से तात्पर्य उन पक्षियों व जीव-जंतुओं से है जो घर में स्वतंत्र रूप से रहते थे — मानो असली मालिक वही हों।

क-3गौरैयों के प्रति माँ और पिताजी की प्रतिक्रियाएँ कैसी थीं?
  • दोनों ने खुशी से घर में उनका स्वागत किया
  • पिताजी ने उन्हें भगाने की कोशिश की लेकिन माँ ने मना किया
  • दोनों ने मिलकर उन्हें घर से बाहर निकाल दिया
  • माँ ने उन्हें निकालने के लिए कहा लेकिन पिताजी ने घर में रहने दिया
व्याख्या

पूरी कहानी में पिताजी ताली, ‘श…श’, लाठी और कपड़े ठूँसकर गौरैयों को भगाने में लगे रहते हैं, जबकि माँ हँसती, मजाक करती और बार-बार उन्हें न भगाने का संकेत देती हैं।

क-4माँ बार-बार पिताजी की बातों पर मुसकराती और मजाक करती थी। इससे क्या पता चलता है?
  • माँ चाहती थीं कि गौरैयाँ घर से भगाई न जाएँ
  • माँ को पिताजी के प्रयत्न व्यर्थ लगते थे
  • माँ को गौरैयों की गतिविधियों पर हँसी आ जाती थी
  • माँ को दूसरों पर हँसना और उपहास करना अच्छा लगता था
व्याख्या

माँ का हँसना-मजाक करना उनके कोमल व सहानुभूतिपूर्ण हृदय को दर्शाता है — वे मन-ही-मन गौरैयों को घर में रहने देना चाहती थीं और उनकी प्यारी हरकतों पर उन्हें स्वाभाविक हँसी आती थी। (अंत में स्वयं दरवाजे खोलकर उन्होंने यह सिद्ध भी कर दिया।)

क-5कहानी में गौरैयों के बार-बार लौटने को जीवन के किस पहलू से जोड़ा जा सकता है?
  • दूसरों पर निर्भर रहना
  • असफलताओं से हार मान लेना
  • अपने प्रयास को निरंतर जारी रखना
  • संघर्ष को छोड़कर नए रास्ते अपनाना
व्याख्या

गौरैयाँ बार-बार भगाए जाने पर भी हार नहीं मानतीं और लौट आती हैं। यह जीवन का यह पहलू सिखाता है कि अपने लक्ष्य के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए — दृढ़ता और लगन से अंततः सफलता मिलती ही है।

हो सकता है आपके साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
आदर्श उत्तर

मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि वे कहानी की घटनाओं व पात्रों के व्यवहार से सीधे मेल खाते हैं — घर में जीव-जंतुओं का आना-जाना ‘सराय’ का भाव देता है, पिताजी भगाते व माँ बचाती हैं, और गौरैयों का बार-बार लौटना दृढ़ प्रयास का प्रतीक है। कुछ साथियों ने “माँ को प्रयत्न व्यर्थ लगते थे” भी चुना होगा, जो आंशिक रूप से ठीक है, पर मुख्य भाव माँ का गौरैयों को बचाना है।

मिलकर करें मिलान

प्रत्येक वाक्य के दो अर्थ दिए गए हैं; नीचे सबसे उपयुक्त अर्थ को हरे रंग में चुना गया है।

1. वह शोर मचता है कि कानों के पर्दे फट जाएँ, पर लोग कहते हैं कि पक्षी गा रहे हैं!
पक्षियों का शोर बहुत तेज होता है, लेकिन लोग उसे संगीत की तरह सराहते हैं।
पिताजी को पक्षियों का चहकना शोर जैसा लगता था लेकिन लोगों को संगीत जैसा।
2. आँगन में आम का पेड़ है। तरह-तरह के पक्षी उस पर डेरा डाले रहते हैं।
आम के पेड़ पर अलग-अलग प्रकार के पक्षी हर समय निवास करते हैं।
पक्षी पेड़ पर तंबू लगाकर रहते हैं जैसे किसी मेले में डेरा डाला जाता है।
3. वह धमा-चौकड़ी मचती है कि हम लोग ठीक तरह से सो भी नहीं पाते।
पिताजी की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के चूहे चैन से सो नहीं पाते।
चूहों की भागदौड़ और शोर इतना होता है कि घर के लोग चैन से सो नहीं पाते।
4. वह समझते हैं कि माँ उनका मजाक उड़ा रही हैं।
पिताजी माँ का मजाक समझ जाते हैं।
पिताजी को भ्रम होने लगता है कि माँ उनकी चेष्टाओं का उपहास कर रही हैं।
5. पिताजी ने लाठी दीवार के साथ टिकाकर रख दी और छाती फैलाए कुर्सी पर आ बैठे।
पिताजी ने लाठी एक ओर रख दी और गर्व से, विजयी मुद्रा में बैठ गए।
पिताजी की छाती और साँस फूलने लगी और उन्होंने लाठी एक ओर रख दी।
6. इतने में रात पड़ गई।
रात किसी भारी चीज की तरह ऊपर से गिर पड़ी।
कहानी की घटनाओं के बीच धीरे-धीरे रात हो गई और अँधेरा छा गया।
7. जब हम लोग नीचे उतरकर आए तो वे फिर से मौजूद थीं और मजे से बैठी मल्हार गा रही थीं।
गौरैयाँ फिर लौट आई थीं और शांत-प्रसन्न भाव से चहचहा रही थीं, जैसे कोई राग गा रही हों।
गौरैयाँ शास्त्रीय संगीत का अभ्यास कर रही थीं और ‘राग मल्हार’ गा रही थीं।

पंक्तियों पर चर्चा

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देते, तो उड़ जातीं। अब तो इन्होंने यहाँ घोंसला बना लिया है।”
भाव

माँ की दूरदर्शिता झलकती है। वे समझ गई थीं कि अब गौरैयों ने घर को अपना घर मान लिया है और घोंसला बना लिया है, इसलिए वे यहाँ से नहीं जाएँगी। यदि घोंसला बनने से पहले ही भगा दिया होता तो वे उड़ जातीं, पर अब अपनेपन का बंधन बन चुका है।

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“एक दिन अंदर नहीं घुस पाएँगी, तो घर छोड़ देंगी।”
भाव

यह पिताजी का हठ और विश्वास है कि यदि गौरैयों को एक दिन भी भीतर न आने दिया जाए, तो वे हार मानकर घर छोड़ देंगी। यह कथन उनके जिद्दी स्वभाव और गौरैयों के प्रति कठोर रवैये को दर्शाता है।

इन पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए—
“किसी को सचमुच बाहर निकालना हो, तो उसका घर तोड़ देना चाहिए।”
भाव

झुँझलाकर पिताजी कहते हैं कि किसी को सच में हटाना हो तो उसका आश्रय (घोंसला) ही नष्ट कर देना चाहिए। यह उनकी हताशा व कठोरता दिखाता है — पर विडंबना यह कि यही घोंसला तोड़ना उनके हृदय-परिवर्तन का कारण बन जाता है, क्योंकि तभी उन्हें भीतर नन्हे बच्चे दिखाई देते हैं।

सोच-विचार के लिए

आपको कहानी का कौन-सा पात्र सबसे अच्छा लगा और क्यों?
आदर्श उत्तर

मुझे माँ का पात्र सबसे अच्छा लगा। वे हँसमुख, समझदार और संवेदनशील हैं। गौरैयों के प्रति उनके मन में प्रेम व करुणा है, इसलिए वे उन्हें भगाने नहीं देतीं और व्यंग्य-विनोद से माहौल को हल्का बनाए रखती हैं। अंत में स्वयं दरवाजे खोलकर उन्होंने अपना कोमल हृदय दिखा दिया। (कुछ विद्यार्थियों को गौरैयाँ भी प्रिय लग सकती हैं, क्योंकि वे अपने प्रयास में अडिग रहती हैं।)

चिड़िया ने घोंसला कहाँ बनाया? वहीं क्यों बनाया होगा?
उत्तर

गौरैयों ने बैठक की छत में लगे पंखे के गोले में घोंसला बनाया। उन्होंने वहीं इसलिए बनाया होगा क्योंकि वह जगह ऊँची, एकांत और सुरक्षित थी — बिल्ली व अन्य शत्रुओं की पहुँच से दूर, जहाँ वे निश्चिंत होकर अंडे दे सकें और बच्चों को पाल सकें।

क्या पशु-पक्षी भी मनुष्यों के समान परिवार और घर का महत्व समझते हैं? कहानी से उदाहरण दीजिए।
गौरैया अपने बच्चों को चुग्गा खिलाते हुए
माँ-बाप गौरैया अपने नन्हे बच्चों को चुग्गा डालते हुए
उत्तर

हाँ, पशु-पक्षी भी परिवार व घर का महत्व समझते हैं। उदाहरण — गौरैयों ने पहले मकान का निरीक्षण किया कि रहने योग्य है या नहीं; फिर घोंसला बनाकर अंडे दिए व बच्चे पाले; बार-बार भगाए जाने पर भी लौट आईं क्योंकि वह उनका घर बन चुका था; और खतरे के बावजूद माँ-बाप अपने बच्चों को चुग्गा डालने लौट आए — यह परिवार के प्रति गहरे प्रेम व कर्तव्य को दर्शाता है।

“अब मैं हार मानने वाला आदमी नहीं हूँ।” — इस कथन से पिताजी के स्वभाव के कौन-से गुण उभरते हैं?
उत्तर

इस कथन से पिताजी के स्वभाव के ये गुण उभरते हैं — दृढ़ निश्चय और हार न मानने की प्रवृत्ति, साथ ही हठ/जिद और स्वाभिमान (अहंकार)। वे एक बार जो ठान लेते हैं उसे पूरा करना चाहते हैं, चाहे कितनी भी कठिनाई आए।

गौरैयों के व्यवहार में कब और कैसा बदलाव आया? यह बदलाव क्यों आया?
उत्तर

आरंभ में गौरैयाँ मजे से गाना गातीं व चहचहाती थीं। पर जब पिताजी बार-बार उन्हें भगाने और घोंसला तोड़ने लगे, तो वे कुछ-कुछ दुबला गईं, काली पड़ गईं और चहकना/गाना बंद करके गुमसुम बैठ गईं। यह बदलाव लगातार भगाए जाने के भय, थकान और अपने बच्चों की चिंता के कारण आया — वे अंडे/बच्चे छोड़कर जा भी नहीं सकती थीं।

गौरैयाँ ने किन-किन स्थानों से घर में प्रवेश किया? सूची बनाइए।
उत्तर — प्रवेश के स्थान
  • सीधे खुले दरवाजों से अंदर घुसकर
  • दरवाजों के नीचे की थोड़ी-थोड़ी खाली जगह से
  • टूटे शीशे वाले रोशनदान से
इस कहानी को कौन सुना रहा है? यह बात कैसे पता चली?
उत्तर

कहानी को घर का बेटा (बालक/लेखक स्वयं) प्रथम पुरुष में सुना रहा है। यह बात आरंभिक पंक्ति “घर में हम तीन ही व्यक्ति रहते हैं— माँ, पिताजी और मैं” तथा “मैं”, “हमारे घर” जैसे शब्दों से और इस प्रसंग से पता चलती है कि पिताजी उसे (बेटे को) दरवाजे बंद करने का आदेश देते हैं।

माँ बार-बार क्यों कह रही होंगी कि गौरैयाँ घर छोड़कर नहीं जाएँगी?
उत्तर

क्योंकि माँ समझ गई थीं कि गौरैयों ने घोंसला बना लिया है और अंडे दे दिए होंगे। एक माँ अपने बच्चों/अंडों को छोड़कर नहीं जा सकती — यह मातृत्व व ममता का स्वाभाविक भाव है, जिसे स्वयं एक माँ होने के नाते वे भली-भाँति समझती थीं।

अनुमान और कल्पना से

कल्पना कीजिए कि जिस घर में आप रहते हैं वहाँ चिड़ियाँ घर बना रही हैं। उन्हें देखकर आप क्या करते?
कल्पनात्मक उत्तर

मैं उन्हें कभी न भगाता। उल्टे उनके लिए दाना-पानी रखता, चुपचाप उनकी प्यारी गतिविधियाँ देखता और बच्चों के निकलने तक उन्हें परेशान न करता। मैं घोंसले की रक्षा करता और बिल्ली आदि से उन्हें बचाता ताकि वे निश्चिंत होकर अपने बच्चे पाल सकें।

मान लीजिए चिड़िया नहीं, बल्कि कोई अन्य प्राणी (चूहा, कुत्ता, मच्छर, बिल्ली, कबूतर, कॉकरोच, तितली, मक्खी) घर में घुस गया है। घर के लोगों का व्यवहार कैसा होगा? क्यों?
उत्तर

व्यवहार प्राणी के स्वभाव व उससे होने वाले लाभ-हानि पर निर्भर करेगा —

तितली/कबूतर जैसे हानिरहित-सुंदर प्राणी हों तो लोग उन्हें न मारकर प्यार से बाहर उड़ा देंगे।
बिल्ली/कुत्ता हो तो कुछ लोग डरेंगे, कुछ दूध-रोटी देकर पुचकारेंगे।
मच्छर, मक्खी, कॉकरोच, चूहा जैसे हानिकारक प्राणी हों तो लोग उन्हें भगाने या मारने का प्रयास करेंगे, क्योंकि वे बीमारी फैलाते व नुकसान पहुँचाते हैं।

“मैं अवाक् उनकी ओर देखता रहा।” — लेखक को विस्मय किसे देखकर हुआ? क्यों?
उत्तर

लेखक को विस्मय घोंसले में से झाँकते नन्हे-नन्हे गौरैया के बच्चों को देखकर हुआ। विस्मय इसलिए हुआ क्योंकि अब तक वे केवल “दो गौरैया” समझते थे, परंतु वहाँ तो बच्चे भी थे — और इसी कारण माँ-गौरैया घर छोड़कर नहीं जा रही थीं। यह दृश्य अप्रत्याशित व हृदय को छू लेने वाला था।

“माँ मदद तो करती नहीं थीं, बैठी हँसे जा रही थीं।” माँ ने पिताजी की सहायता क्यों नहीं की होगी?
उत्तर

माँ हृदय से नहीं चाहती थीं कि गौरैयों को भगाया जाए। उन्हें गौरैयों से लगाव व सहानुभूति थी और पिताजी का यह प्रयास उन्हें व्यर्थ व हास्यास्पद लगता था। इसीलिए वे मदद करने के बजाय हँसती और व्यंग्य करती रहीं।

किसी एक अपरिचित व्यक्ति या प्राणी के व्यवहार को देखकर अनुमान लगाइए कि वह क्या सोच रहा होगा/कैसा होगा। (व्यवहार पर ध्यान दें, रंग-रूप पर नहीं)
आदर्श उत्तर

मेरे मोहल्ले का एक व्यक्ति रोज़ सुबह पार्क की बेंच पर अकेला बैठकर पक्षियों को दाना डालता है और चुपचाप मुसकराता रहता है। उसके इस व्यवहार से मुझे लगता है कि वह एकांतप्रिय, दयालु और प्रकृति-प्रेमी व्यक्ति है — शायद अकेलेपन में पक्षियों के साथ अपनापन ढूँढ़ता है और छोटे जीवों की सेवा में उसे सुकून मिलता है।

सराय और घर में कौन-कौन से अंतर होते होंगे?
उत्तर

सराय

यात्रियों के अस्थायी ठहरने की जगह; कोई भी आता-जाता रहता है; स्थायी मालिक या अपनापन नहीं; थोड़ी देर रुककर लोग चले जाते हैं।

घर

स्थायी निवास; अपनापन, प्रेम व सुरक्षा का स्थान; परिवार मिल-जुलकर रहता है; गहरा लगाव होता है।

पिताजी अपने घर को सराय इसलिए कहते हैं क्योंकि वहाँ अनेक जीव-जंतु बिना रोक-टोक आते-जाते व रहते थे।

संवाद और अभिनय

नीचे दी स्थितियों के लिए कल्पना से संवाद (नमूना):
क — नन्हीं गौरैयाँ

“चीं-चीं! माँ, पिताजी, हम आ गई हैं! तुम कहाँ हो? हमें बहुत भूख लगी है… जल्दी आओ ना!”

ख — घोंसले से झाँकती गौरैयाँ

“अरे देखो! यह आदमी नीचे ताली बजाकर कूद क्यों रहा है? कितना अजीब नाच रहा है! डरने की कोई बात नहीं, यह तो खुद ही थक जाएगा। चलो, मजे से देखते हैं!”

ग — पहली बार घर में प्रवेश पर

“वाह, यह मकान तो कितना सुंदर है! वह पंखे का गोला घोंसले के लिए एकदम सही जगह है — ऊँचा और सुरक्षित। चलो, यहीं अपना घर बनाते हैं!”

घ — माँ-बाप और बच्चे

बच्चे: “माँ, हमें बहुत डर लगा! तुम कहाँ चली गई थीं?” माँ-बाप: “डरो मत बच्चों, हम तुम्हें छोड़कर कहीं नहीं जाएँगे। लो, चुग्गा खाओ। अब यह घर हमारा है।”

🔄 बदली कहानी — मान लीजिए अंडों से बच्चे न निकले होते। कहानी आगे कैसे बढ़ती?
आदर्श उत्तर

यदि घोंसले में बच्चे न होते, तो पिताजी घोंसले को पूरी तरह लाठी में लपेटकर तोड़ देते और गौरैयों को भगाने में सफल हो जाते। हार मानकर गौरैयाँ किसी दूसरी जगह उड़ जातीं। पिताजी स्वयं को विजयी समझकर संतुष्ट होते — परंतु घर की वह मीठी चहचहाहट और संगीत सदा के लिए खो जाते, और घर सूना-सूना व उदास लगने लगता। पिताजी के मन में भी कहीं-न-कहीं एक खालीपन रह जाता।

कहने के ढंग / क्रिया विशेषण

किसी कार्य के ढंग को बताने वाले शब्द ‘क्रिया विशेषण’ कहलाते हैं (जैसे — खिलखिलाकर)। नीचे दिए शब्दों से वाक्य बनाइए।
वाक्य
झिड़ककरअध्यापक ने शरारती बच्चे को झिड़ककर चुप करा दिया।
गंभीरता सेडॉक्टर ने गंभीरता से रोगी को पूरा आराम करने की सलाह दी।
गुस्से मेंवह गुस्से में दरवाजा पटककर बाहर चला गया।
धीरे सेउसने धीरे से दरवाजा खोला ताकि कोई जाग न जाए।
फुसफुसाते हुएदोनों मित्र कक्षा में फुसफुसाते हुए बातें कर रहे थे।
चिल्लाकरबच्चा डर के मारे जोर से चिल्लाकर रो पड़ा।

घर के प्राणी

लेखक ने प्राणियों का वर्णन ऐसे किया जैसे वे मनुष्यों की तरह व्यवहार करते हों। सूची बनाइए कि वे कौन-कौन से काम करते थे।
लड़का और बिल्ली
घर में झाँकने वाली बिल्ली
सूची
बिल्ली‘फिर आऊँगी’ कहकर चली जाती है; मन हो तो अंदर आकर दूध पी जाती है।
चूहेरात-भर धमा-चौकड़ी मचाते, बर्तन गिराते, डिब्बे खोलते, प्याले तोड़ते; एक अँगीठी के पीछे (सर्दी से बचने) तो दूसरा टंकी पर (गरमी से बचने) बैठता।
कबूतरदिन-भर ‘गुटर-गूँ गुटर-गूँ’ का संगीत सुनाते रहते हैं (मानो गाना गा रहे हों)।
चमगादड़शाम होते ही पर फैलाकर कमरों के आर-पार ‘कसरत’ करते हैं।
गौरैयाँमकान का ‘निरीक्षण’ करतीं, घोंसले में बिछावन बिछातीं, सामान लातीं और मजे से गाना गातीं।

हेर-फेर मात्रा का

एक मात्रा के अंतर से शब्द का अर्थ बदल जाता है। इन शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाइए।
वाक्य
नाचनाचानचा
उसका नाच सबको पसंद आया। • बच्चा खुशी से नाचा। • मदारी ने बंदर को नचा दिया।
हारहराहारा
टीम की हार हो गई। • पेड़ हरा-भरा है। • वह कुश्ती में हारा
पितापीता
मेरे पिता शिक्षक हैं। • बच्चा दूध पीता है।
चूकचुक
एक छोटी-सी चूक से काम बिगड़ गया। • मटके का पानी चुक गया।
नीचानीचे
उसने शर्म से सिर नीचा कर लिया। • किताब मेज़ के नीचे है।
सहसासाहस
सहसा बिजली चमक उठी। • उसने साहस से शेर का सामना किया।

वाद-विवाद

विषय — “माँ चिड़ियों को घर से निकालना चाहती थीं।”

पक्ष में (हाँ)

माँ ने कई बार निकालने के तरीके सुझाए — “एक दरवाजा खुला छोड़ो, बाकी बंद कर दो”, “पंखा चला देते तो उड़ जातीं”। इससे लगता है वे भी गौरैयों को निकालने में रुचि रखती थीं।

विपक्ष में (नहीं)

वास्तव में माँ गौरैयों से प्रेम करती थीं। उन्होंने पिताजी के प्रयासों का मजाक उड़ाया, मदद नहीं की, बार-बार कहा “ये नहीं जाएँगी”, और अंत में स्वयं सभी दरवाजे खोल दिए — स्पष्ट है माँ नहीं चाहती थीं कि गौरैयाँ भगाई जाएँ।
निष्कर्ष: कहानी के साक्ष्य विपक्ष को अधिक प्रबल बनाते हैं — माँ का मन गौरैयों के साथ था।

कहानी की रचना

कहानी की कुछ विशेषताएँ और उनके उदाहरण (कहानी में से चुनकर):
1. कल्पना से बढ़ा-चढ़ाकर कहना
“जो भी पक्षी पहाड़ियों-घाटियों पर से उड़ता हुआ दिल्ली पहुँचता है… जैसे हमारे घर का पता लिखवाकर लाया हो।”
2. हास्य / हँसी-मज़ाक
“चिड़ियाँ पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?” तथा “चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
3. सोचा कुछ और, हुआ कुछ और
पिताजी ने सोचा गौरैयों को आसानी से भगा देंगे, पर वे बार-बार लौटतीं; घोंसला तोड़ने पर भीतर बच्चे निकल आए और पिताजी का मन ही बदल गया।
4. दूसरों के मन के भावों का अनुमान
“उन्हें पिताजी का नाचना जैसे बहुत पसंद आ रहा था।” / “मकान का निरीक्षण कर रही हैं कि रहने योग्य है या नहीं।”
5. कही बात उसी के शब्दों में लिखना
संवाद ज्यों-के-त्यों — “देखता हूँ ये कैसे यहाँ रहती हैं!” (पिताजी) / “अब तो ये नहीं उड़ेंगी।” (माँ)
6. किसी कार्य को कोई अन्य नाम देना
गौरैयों के चहकने को “मल्हार गाना/गाना गाना”, घोंसले के तिनकों को “झालर टाँगना”, कबूतर के बोलने को “संगीत” कहना।
7. सीधे बताए बिना संवाद लिखना
“इसमें हँसने की क्या बात है?” — बार-बार “पिताजी ने कहा/माँ ने कहा” दोहराए बिना ही बातचीत आगे बढ़ती है।
भाग 2
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पाठ से आगे

विस्तार / सृजनात्मक प्रश्न

आपकी बात

आपने अपने घर के आस-पास पक्षियों को क्या-क्या करते देखा है? उनके व्यवहार में कौन-कौन से भाव दिखाई देते हैं?
आदर्श उत्तर

मैंने पक्षियों को घोंसला बनाते, दाना चुगते, चहचहाते, बच्चों को चुग्गा खिलाते, आपस में लड़ते, नहाते और उड़ान भरते देखा है। उनके व्यवहार में मुझे प्रेम, ममता, सतर्कता, खुशी, भय और आपसी सहयोग जैसे भाव दिखाई देते हैं।

कहानी के अंत में पिताजी गौरैयों का घर में रहना स्वीकार कर लेते हैं। क्या आप भी कोई स्थान या वस्तु किसी अन्य के साथ साझा करते हैं? साझेदारी में समस्या आने पर कैसे हल करते हैं?
आदर्श उत्तर

हाँ, मैं अपने भाई के साथ कमरा, किताबें और खिलौने साझा करता हूँ। कभी-कभी किसी चीज़ को लेकर मतभेद हो जाता है, पर हम बारी-बारी से उपयोग करके या आपस में बातचीत व समझौते से समस्या हल कर लेते हैं। साझेदारी से प्रेम व सहयोग की भावना बढ़ती है।

क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि किसी को देखकर या किसी से मिलकर आपका दृष्टिकोण बदल गया हो?
आदर्श उत्तर

हाँ। पहले मैं अपनी कक्षा के एक नए सहपाठी को घमंडी समझता था और उससे दूर रहता था। पर एक दिन उसने बिना कहे मेरी पढ़ाई में मदद की और बहुत विनम्रता से बात की — तब मुझे एहसास हुआ कि वह तो बहुत अच्छा व मददगार है। इस तरह उससे मिलकर मेरा दृष्टिकोण पूरी तरह बदल गया

🪺 चिड़ियों का घोंसला
गतिविधि (नमूना)

यह अवलोकन-गतिविधि है — आस-पास घोंसले देखकर तालिका भरनी है। सावधानी: घोंसलों को हाथ न लगाएँ। नमूना प्रविष्टि —

कहाँ देखाआम के पेड़ की डाल पर
किससे बनासूखी घास, तिनके व रुई
खाली / नहींनहीं — दो अंडे थे
किस पक्षी कागौरैया का
🎵 मल्हार
जानकारी

‘मल्हार’ भारतीय शास्त्रीय संगीत का एक प्रसिद्ध राग है, जो वर्षा ऋतु से जुड़ा है। आपकी हिंदी पाठ्यपुस्तक का नाम मल्हार भी इसी राग के नाम पर रखा गया है। कहानी में गौरैयों के मधुर चहचहाने को ही ‘मल्हार गाना’ कहा गया है।

😄 हास्य-व्यंग्य
क — हँसी आने वाले वाक्य
  • “चिड़ियाँ पूछ रही हैं कि यह आदमी कौन है और नाच क्यों रहा है?”
  • “अब बाकी दो हजार भी निकल जाएँगे!”
  • “तुम तो बड़े समझदार हो जी, सभी दरवाजे खुले हैं और तुम गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो।”
  • “चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
ख — इनमें ‘व्यंग्य’ (✓)
  • ✓ “चूहों को तो निकाल नहीं पाए, अब चिड़ियों को निकालेंगे!”
  • ✓ “तुम तो बड़े समझदार हो जी… गौरैयों को बाहर निकाल रहे हो।”
  • ✓ “अब बाकी दो हजार भी निकल जाएँगे!”
व्यंग्य = हँसी-मज़ाक या उपहास के माध्यम से किसी कमी/विडंबना को उजागर करना — बात सीधे न कहकर उलटे या संकेत में कही जाती है।

आज की पहेली

नीचे दी चित्र-पहेली में बिल्ली को चूहे तक पहुँचाइए।
भूलभुलैया — बिल्ली को चूहे तक पहुँचाइए
उलझे रास्तों में से सही लकीर पकड़कर बिल्ली (बाएँ नीचे) को चूहे (दाएँ ऊपर) तक पहुँचाएँ
हल कैसे करें

यह एक भूलभुलैया (maze) है। बिल्ली से शुरू करके अँगुली या पेंसिल से एक रेखा पर चलते जाइए; जहाँ रास्ता बंद मिले वहाँ से लौटकर दूसरी राह लीजिए। इसी तरह बिना रुके चलती हुई लकीर को पकड़कर आप चूहे तक पहुँच जाएँगे। (यह स्वयं करके देखने वाली रोचक गतिविधि है।)

झरोखे से · साझी समझ

विश्व गौरैया दिवस और गौरैयों का घटता अस्तित्व
विश्व गौरैया दिवस — 20 मार्च
विश्व गौरैया दिवस — 20 मार्च
सारांश

कभी हर जगह बहुतायत में मिलने वाली घरेलू गौरैया अब दुर्लभ होती जा रही है। इन नन्हे पक्षियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने और इनकी रक्षा के लिए भारत सरकार ने हर साल 20 मार्च को ‘विश्व गौरैया दिवस’ घोषित किया है। हिंदी में ‘गौरैया’, तमिल में ‘कुरुवी’ और उर्दू में ‘चिरिया’ कहलाने वाली यह चिड़िया पीढ़ियों से हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा रही है।

घटने के कारण — सीसा-रहित पेट्रोल से बनने वाले ज़हरीले यौगिक उन कीटों को नुकसान पहुँचाते हैं जिन पर गौरैया का भोजन निर्भर है; शहरीकरण ने उनके प्राकृतिक घोंसले के स्थान छीन लिए हैं; और आधुनिक इमारतों में घोंसला बनाने की जगह ही नहीं बचती।

साझी समझ: यह कहानी और गौरैया दिवस मिलकर हमें सिखाते हैं कि छोटे जीवों के प्रति दया रखें और उनके आवास की रक्षा करें।
📚 पढ़ने के लिए — ‘मित्रलाभ’ (पंचतंत्र)
भीष्म साहनी
लेखक — भीष्म साहनी (1915–2003)
कथा-सार व सीख

कौआ (लघुपतनक), चूहा (हिरण्यक), कछुआ (मन्थरक) और हिरन (चित्रांग) की गहरी मित्रता हो जाती है। जब-जब इनमें से कोई व्याध (शिकारी) के जाल में फँसता है, तब चारों मित्र मिलकर बुद्धि व सहयोग से एक-दूसरे को बचा लेते हैं।

सीख — “मित्रता में बड़ी शक्ति है; हमें अपने मित्रों की सहायता के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए।” यह कहानी हमारे प्रसिद्ध नीति-ग्रंथ पंचतंत्र से ली गई है।

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