Chapter 5 गलता लोहा | class11th | Ncert solution For Hindi Aroh

गलता लोहा Class 11 Hindi Aroh NCERT Solutions

गलता लोहा (अभ्यास प्रश्न)

प्रश्न 1. कहानी के उस प्रसंग का उल्लेख करें जिसमें किताबों की विद्या और घन चलाने की विधि का जिक्र आया है?

लेखक ने इस प्रसंग का उल्लेख करके धनराम के किताबी ज्ञान प्राप्त करने में मंदबुद्धि की ओर संकेत किया है। एक बार मास्टर साहब ने धनराम को तेरह का पहाड़ा याद करने के लिए कहा। पूरा दिन याद करने के बाद भी उसे यह पहाड़ा याद नहीं हुआ। मास्टर साहब ने कहा कि “तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है इसमें विद्या का ताप कहाँ लगेगा।” धनराम के पिता की आर्थिक स्थिति धनराम की पढ़ाई कराने की नहीं थी। अतः छोटी सी अवस्था में ही उसे धौंकनी के काम में उलझा दिया। फिर धीरे-धीरे हथौड़े से लेकर घन चलाने की विद्या सिखाने लगा।

प्रश्न 2. धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वंदी क्यों नहीं समझता था?

धनराम और मोहन एक ही कक्षा में पढ़ते थे। धनराम ने अपने सहपाठी मोहन से अपने मास्टर के कहने पर बैंत खाए थे। मोहन कक्षा का सबसे होनहार छात्र व पुरोहित खानदान का बेटा था और धनराम निम्न जाति का था। अतः जातिगत हीनता की भावना बचपन से ही उसके मन में बैठी थी इसलिए वह मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं समझता था।

प्रश्न 3. धनराम को मोहन के किस व्यवहार पर आश्चर्य होता है?

सामान्य तौर पर ब्राह्मण टोली के लोगों का शिल्पकार टोली में उठना-बैठना नहीं होता था। कभी किसी कामकाज के सिलसिले में अगर कोई ब्राह्मण शिल्पकार टोले में आता तो वह खड़े खड़े ही बातचीत करता था। लेकिन मोहन कुछ वर्ष लखनऊ में रहने के बाद शिल्पकार धनराम के पास आकर बहुत लंबे समय तक बैठा, उससे बातचीत की तथा धनराम के साथ भट्टी पर काम भी किया। धनराम को मोहन के इस व्यवहार पर आश्चर्य हुआ।

प्रश्न 4. मोहन के लखनऊ आने के बाद के समय को लेखक ने उसके जीवन का एक नया अध्याय क्यों कहा है?

मोहन के लखनऊ से आने के बाद के समय को लेखक ने उसके जीवन का एक नया अध्याय कहा है क्योंकि लखनऊ में आने का उसका उद्देश्य अधिक से अधिक विद्या प्राप्त करने का था। किंतु वहाँ रमेश ने उसे किसी अच्छे स्कूल में प्रवेश न दिलाकर एक साधारण से स्कूल में उसका नाम लिखवा दिया। वह घर की औरतों और मोहल्ले की औरतों के कामकाज में हाथ बंटाता था। अतः काम के दबाव के कारण लखनऊ आने का उसका उद्देश्य पूरा नहीं हो सका। अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए वह कारखानों व फैक्ट्रियों के चक्कर काटने लगा। इसीलिए लेखक ने उसके जीवन का एक नया अध्याय कहा है।

प्रश्न 5. मास्टर त्रिलोक सिंह के किस कथन को लेखक ने ज़बान की चाबुक कहा है और क्यों?

मास्टर त्रिलोक सिंह ने धनराम पर कटाक्ष करते हुए कहा कि “तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे! विद्या का ताप कहाँ से लगेगा इसमें।” लेखक ने त्रिलोक सिंह के इस कथन को जुबान की चाबुक कहा है। क्योंकि जब मंदबुद्धि धनराम को तेरह का पहाड़ा याद नहीं हुआ। तब उन्होंने इन कठोर शब्दों में धनराम का अपमान किया। परिणाम स्वरूप यह हुआ कि वह पढ़ाई छोड़कर पिता के काम को सीखने लगा। पिता के देहांत के बाद उसने उनका पूरा काम संभाल लिया।

प्रश्न 6.

( 1 ) बिरादरी का यही सहारा होता है।

(क) किसने किससे कहा?

(ख) किस प्रसंग मं कहा?

(ग) किस आशय से कहा?

(घ) क्या कहानी में यह आशय स्पष्ट हुआ है?

उत्तर-

(क) यह वाक्य मोहन के पिता वंशीधर ने बिरादरी के संपन्न युवक रमेश से कहा।

(ख) जब वंशीधर ने मोहन की पढ़ाई के बारे में चिंता व्यक्त की तो रमेश ने उससे सहानुभूति जताई और उन्हें सुझाव दिया कि वे मोहन को उसके साथ ही लखनऊ भेज दें ताकि वह शहर में रहकर अच्छी तरह पढ़-लिख सकेगा।

(ग) यह कथन रमेश के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए कहा गया। बिरादरी के लोग ही एक-दूसरे की मदद करते हैं।

(घ) कहानी में यह आशय स्पष्ट नहीं हुआ। रमेश अपने वायदे को पूरा नहीं कर पाया। वह मोहन को घरेलू नौकर से अधिक नहीं समझता था। उसने व परिवार ने मोहन का खूब शोषण किया और प्रतिभाशाली विद्यार्थी का भविष्य चौपट कर दिया। अंत में उसे बेरोजगार कर घर वापस भेज दिया।?

(2) उसकी आँखों में एक सर्जक की चमक थी-कहानी का यह वाक्य-

(क) किसके लिए कहा गया हैं?

(ख) किस प्रसग में कहा गया हैं?

(ग) यह पात्र-विशेष के किन चारित्रिक पहलुओं को उजागर करता है?

उत्तर-

(क) यह वाक्य मोहन के लिए कहा गया है।

(ख) मोहन धनराम की दुकान पर हँसुवे में धार लगवाने आता है। काम पूरा हो जाने के बाद भी वह वहीं बैठा रहता है। धनराम एक मोटी लोहे की छड़ को गरम करके उसका गोल घेरा बनाने का प्रयास कर रहा होता है, परंतु सफल नहीं हो पा रहा है। मोहन ने अपनी जाति की परवाह न करके हथौड़े से नपी-तुली चोट मारकर उसे सुघड़ गोले का रूप दे दिया। अपने सधे हुए अभ्यस्त हाथों का कमाल के उपरांत उसकी आँखों में सर्जक की चमक थी।

(ग) यह मोहन के जाति-निरपेक्ष व्यवहार को बताता है। वह पुरोहित का पुत्र होने के बाद भी अपने बाल सखा धनराम के आफर पर काम करता है। यह कार्य उसकी बेरोजगारी की दशा को भी व्यक्त करता है। वह अपने मित्र से काम न होता देख उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ा देता है और काम पूरा कर देता है।

गलता लोहा (अति महत्त्वपूर्ण प्रश्न)

प्रश्न 1:

‘गलता लोहा’ कहानी का प्रतिपादय स्पष्ट करें।

उत्तर-

गलता लोहा कहानी में समाज के जातिगत विभाजन पर कई कोणों से टिप्पणी की गई है। यह कहानी लेखक के लेखन में अर्थ की गहराई को दर्शाती है। इस पूरी कहानी में लेखक की कोई मुखर टिप्पणी नहीं है। इसमें एक मेधावी, किंतु निर्धन ब्राहमण युवक मोहन किन परिस्थितियों के चलते उस मनोदशा तक पहुँचता है, जहाँ उसके लिए जातीय अभिमान बेमानी हो जाता है। सामाजिक विधि-निषेधों को ताक पर रखकर वह धनराम लोहार के आफर पर बैठता ही नहीं, उसके काम में भी अपनी कुशलता दिखाता है। मोहन का व्यक्तित्व जातिगत आधार पर निर्मित झूठे भाईचारे की जगह मेहनतकशों के सच्चे भाईचारे के प्रस्तावित करता प्रत होता है मानो लोहा गलकर नया आकार ले रहा हो।

प्रश्न 2:

मोहन के पिता के जीवन-संघर्ष पर टिप्पणी कीजिए।

उत्तर-

मोहन के पिता वंशीधर तिवारी गाँव में पुरोहित का काम करते थे। पूजा-पाठ धार्मिक अनुष्ठान करना करवाना उनका पैतृक पेशा था। वे दूर दूर तक यह कार्य करने जाते थे। इस कार्य से परिवार का गुजारा मुश्किल से होता था। वे अपने हीनहार बेटे को भी नहीं पढ़ा पाए। यजमान उनकी थोड़ी बहुत सहायता कर देते थे।

प्रश्न 3:

कहानी में चित्रित सामाजिक परिस्थितियाँ बताइए।

उत्तर-

कहानी में गाँव के परंपरागत समाज का चित्रण किया गया है। ब्राहमण टोले के लोग स्वयं को श्रेष्ठ समझते थे तथा वे शिल्पकार के टोले में उठते-बैठते नहीं थे। कामकाज के कारण शिल्पकारों के पास जाते थे, परंतु वहाँ बैठते नहीं थे। उनसे बैठने के लिए कहना भी उनकी मर्यादा के विरुद्ध समझा जाता था। मोहन कुछ वर्ष शहर में रहा तथा बेरोजगारी की चोट सही। गाँव में आकर वह इस व्यवस्था को चुनौती देता है।

प्रश्न 4:

वंशीधर को धनराम के शब्द क्यों कचोटते रहे?

उत्तर-

वंशीधर को अपने पुत्र से बड़ी आशाएँ थी। वे उसके अफसर बनकर आने के सपने देखते थे। एक दिन धनराम ने उनसे मोहन के बारे में पूछा तो उन्होंने घास का एक तिनका तोड़कर दाँत खोदते हुए बताया कि उसकी सक्रेटेरियट में नियुक्ति हो गई है। शीघ्र ही वह बड़े पद पर पहुँच जाएगा। धनराम ने उन्हें कहा कि मोहन लला बचपन से ही बड़े बुद्धमान थे। ये शब्द वंशीधर को कचोटते रहे, क्योंकि उन्हें मोहन की वास्तविक स्थिति का पता चल चुका था। लोगों से प्रशंसा सुनकर उन्हें दुःख होता था।

गलता लोहा (पठित गद्यांश)

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

1. लंबे बँटवाले हँसुवे को लेकर वह घर से इस उद्देश्य से निकला था कि अपने खेतों के किनारे उग आई काँटेदार झाड़ियों को काट-छाँटकर साफ़ कर आएगा। बूढे वंशीधर जी के बूते का अब यह सब काम नहीं रहा। यही क्या, जन्म भर जिस पुरोहिताई के बूते पर उन्होंने घर संसार चलाया था, वह भी अब वैसे कहाँ कर पाते हैं। यजमान लोग उनकी निष्ठा और संयम के कारण ही उन पर श्रद्धा रखते हैं लेकिन बुढ़ापे का जर्जर शरीर अब उतना कठिन श्रम और व्रत-उपवास नहीं होल पाता।

प्रश्न

1. मोहन घर से किस उद्देश्य के लिए निकला।

2. वशीधर के लिए कौन सा कार्य कठिन हो गया?

3. यजमान किस पर श्रद्धा रखते हैं तथा क्यों?

उत्तर-

1. मोहन घर से लंबे बँटवाला हँसुआ लेकर निकला। उसका उद्देश्य था कि इससे वह अपने खेतों के किनारे उग आई काँटेदार झाड़ियोंनको काट-छाँटकर साफ़ कर देगा।

2. वंशीधर अब बूढ़ा हो गए थे। वे पुरोहिताई का काम तथा खेती से घर का गुजारा करते थे। अधिक उम्र व जर्जर शरीर के कारण अब वे कठिन श्रम व व्रत उपवास को नहीं कर पाते थे।

3 यजमान वंशीधर पर श्रद्धा रखते हैं। वे उनकी निष्ठा व संयम की प्रशंसा करते हैं और इसी कारण उनका मान-सम्मान करते हैं।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

2. मोहन के प्रति थोड़ी-बहुत ईष्य रहने पर भी धनराम प्रारंभ से ही उसके प्रति स्नेह और आदर का भाव रखता था। इसका एक कारण शायद यह था कि बचपन से ही मन में बैठा दी गई जातिगत हीनता के कारण धनराम ने कभी मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं समझा बल्कि वह इसे मोहन का अधिकार समझता रहा था। बीच-बीच में त्रिलोक सिंह मास्टर का यह कहना कि मोहन एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनकर स्कूल का और उनका नाम ऊँचा करेगा, धनराम के लिए किसी और तरह से सोचने की गुंजाइश ही नहीं रखता था। और धनराम! वह गाँव के दूसरे खेतिहर या मज़दूर परिवारों के लड़कों की तरह किसी प्रकार तीसरे दर्जे तक ही स्कूल का मुँह देख पाया था।

प्रश्न

1. धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वद्वी क्यों नहीं मानता था?

2. त्रिलोक मास्टर ने मोहन के बारे में क्या घोषणा की थी?

3 धनराम की नियति कयौं थे?

उत्तर-

1. धनराम मोहन को अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं मानता था, क्योंकि उसके मन में बचपन से नीची जाति के होने का भाव भर दिया गया था। इसलिए वह मोहन की मार को उसका अधिकार समझता था।

2. त्रिलोक मास्टर ने यह घोषणा की थी कि मोहन एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनकर स्कूल व उनका नाम रोशन करेगा।

3 धनराम गाँव के गरीब तबके से संबंधित था। खेतिहर या मज़दूर परिवारों के बच्चों की तरह वह तीसरी कक्षा तक ही पढ़ पाया। उसके बाद वह परंपरागत काम में लग गया। यही उसकी नियति थी।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

3. धनराम की मंदबुद्ध रही हो या मन में बैठा हुआ इ कि पूरे दिन घोटा लगाने पर भी उसे तेरह का पहाड़ा याद नहीं हो पाया था। छुट्टी के समय जब मास्साब ने उससे दुबारा पहाड़ा सुनाने को कहा तो तीसरी सीढ़ी तक पहुँचते-पहुँचते वह फिर लड़खड़ा गया था। लेकिन इस बार मास्टर त्रिलोक सिंह ने उसके लाए हुए बेंत का उपयोग करने की बजाय ज़बान की चाबुक लगा दी थी, तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?’ अपने थैले से पाँच छह दतियाँ निकालकर उन्होंने धनराम को धार लगा लाने के लिए पकड़ा दी थीं। किताबों की विद्या का ताप लगाने की सामध्य धनराम के पिता की नहीं थी। धनराम हाथ-पैर चलाने लायक हुआ ही था कि बाप ने उसे धौंकनी फेंकने या सान लगाने के कामों में उलझाना शुरू कर दिया और फिर धीरे-धीरे हथौड़े से लेकर घन चलाने की विद्या सिखाने लगा। फर्क इतना ही था कि जहाँ मास्टर त्रिलोक सिंह उसे अपनी पसंद का बेत चुनने की छूट दे देते थे वहाँ गंगाराम इसका चुनाव स्वयं करते थे और ज़रा सी गलती होने पर छड़, बेंत, हत्था जो भी हाथ लग जाता उसी से अपना प्रसाद दे देते। एक दिन गंगाराम अचानक चल बसे तो धनराम ने सहज भाव से उनकी विरासत सँभाल ली और पास-पड़ोस के गाँव वालों को याद नहीं रहा वे कब गंगाराम के आफर को धनराम का आफर कहने लगे थे।

प्रश्न

1. धनराम तेरह का पहाड़ा क्यों नहीं याद कर पाया?

2. ज़बान की चाबुक’ से क्या अभिप्राय है? त्रिलोक सिह ने धनराम को क्या कहा?

3. अध्यापक और लोहार के दड़ देने में क्या अंतर था?

उत्तर-

1. धनराम ने तेरह का पहाड़ा सारे दिन याद किया, परंतु वह इस काम में सफल नहीं हो पाया। इसके दो कारण हो सकते हैं।

(क) धनराम की मंदबुद्ध

(ख) मन में बैठा हुआ पिटाई का डर।

2. इसका अर्थ है-व्यंग्य-वचन। मास्टर साहब ने धनराम को तेरह का पहाड़ा कई बार याद करने को दिया था, परंतु वह कभी याद नहीं कर पाया। उसे कई बार सजा मिली। इस बार उन्होंने उस पर व्यंग्य कसा कि तेरे दिमाग में लोहा भरा है। तुझे पढ़ाई नहीं आएगी।

3. याद न करने पर मास्टर त्रिलोक बच्चे को अपनी पसंद का बेत चुनने की छूट देते थे, जबकि लोहार गंगाराम सज़ा देने का हथियार स्वयं ही चुनते थे। गलती होने पर वे छड़, बेंत, हत्था-जो भी हाथ लगता, उससे सज़ा देते।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

4. औसत दफ़्तरी बड़े बाबू की हैसियत वाले रमेश के लिए सोहन को अपनी भाई-बिरादर बतलाना अपने सम्मान के विरुद्ध जान पड़ता था और उसे घरेलू नौकर से अधिक हैसियत ५ह नहीं देता था, इस बात को मोहन भी समझने लगा था। थोड़ी बहुत हीला हवाली करने के बाद रमेश ने निकट के ही एक साधारण रो रूकुल में उसका नाम लिखवा दिया। लेकिन एकदम नए वातावरण और रात-दिन के काम के बोझ के कारण गाँव का वह मेधावी छात्र शहर के स्कूली जीवन में अपनी कोई पहचान नहीं बना पाया। उसका जीवन एक बंधी बँधाई लीक पर। चलता रहा। साल में एक बार गर्मियों की छुट्टी में गाँव जाने का मौक भी तभी मिलता जब रमेश या उसके घर का कोई प्राणी गाँव जाने वाला होता वरना उन छुट्टयों को भी अगले दरजे की तैयारी के नाम पर उसे शहर में ही गुज़ार देना पड़ता था। अगले दरजे की तैयारी तो बहाना भर थी, सवाल रमेश और उसकी गृहस्थी की सुविधा-असुविधा का था। मोहन ने परिस्थितियों से समझौता कर लिया था, क्योंकि और कोई चारा भी नहीं था। घरवालों को अपनी वास्तविक स्थिति बतलाकर वह दुखी नहीं करना चाहता था। वंशीधर उसके सुनहरे भविष्य के सपने देख रहे थे।

प्रश्न

1. रमेश मोहन को किस हैसियत में रखता था तथा क्यों?

2. मोहन स्कूल में अपनी पहचान क्यों नहीं बना पाया?

3. मोहन ने परिस्थितियों से समझौता कर लिया। कर्यो?

उत्तर-

1. रमेश मोहन को घरेलू नौकर की हैसियत में रखता था। इसका कारण यह था कि रमेश औसत दप्तरी बड़े बाबू की हैसियत का था| अतः वह मोहन को अपना भाई-बिरादर बताकर अपना अपमान नहीं करवाना चाहता था।

2. रमेश ने काफी कहने के बाद मोहन का एक साधारण स्कूल में दाखिला करवा दिया। वह मेधावी था, परंतु घर के अत्यधिक काम और नए वातावरण के कारण वह अपनी प्रतिभा नहीं दिखा पाया। अतः उसकी पहचान स्कूल में नहीं बन पाई।

3. मोहन को पढ़ने के लिए शहर भेजा गया था, परंतु वहाँ पर उसे घरेलू नौकर की तरह रखा गया। उसे अपने घर की दीन दशा का पता था। वह अपनी वास्तविक स्थिति घर वालों को बताकर दुखी नहीं करना चाहता था। अतः उसने परिस्थितियों से समझौता कर लिया।

निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

5. लोहे की एक मोटी छड़ को भट्टी में गलाकर धनराम गोलाई में मोड़ने की कोशिश कर रहा था। एक हाथ से सँडसी पकड़कर जब वह दूसरे हाथ से हथौड़े की चोट मारता तो निहाई पर ठीक घाट में सिरा न फैसने के कारण लोहा उचित ढंग से मुड़ नहीं पा रहा था। मोहन कुछ देर तक उसे काम करते हुए देखता रहा फिर जैसे अपना संकोच त्यागकर उसने दूसरी पकड़ से लोहे को स्थिर कर लिया और धनराम के हाथ से हथौड़ा लेकर नापी-तुली चोट मारते, अभ्यस्त हार्थों से धौंकनी फेंककर लोहे को दुबारा भट्टी में गरम करते और फिर निहाई पर रखकर उसे ठोकते पीटते सुघड़ गोले का रूप दे डाला।

प्रश्न

1. मोहन धनराम के आफर क्यों गया था? उस समय धनराम किस काम में तल्लीन था?

2. धनराम अपने काम में सफल क्यों नहीं हो रहा था?

3. मोहन ने धनराम का अधूरा काम कैसे पूरा किया?

उत्तर-

1. मोहन धनराम के आफर पर अपने हँसुवे की धार तेज़ करवाने के लिए गया था। उस समय धनराम लोहे की एक मोटी छड़ को भट्टी में गलाकर उसे गोलाई में मोड़ने का प्रयास कर रहा था।

2. धनराम अपने काम में इसलिए सफल नहीं हो पा रहा था, क्योंकि वह एक हाथ से सँड़सी पकड़कर दूसरे हाथ से हथौड़े की चोट मारता तो निहाई पर ठीक घाट में सिरा न फैसने का कारण लोहा सही तरीके से नहीं मुड़ रहा था।

3, मोहन कुछ देर तक धनराम के काम को देखता रहा। अचानक वह उठा और दूसरी पकड़ से लोहे को स्थिर करके धनराम का हथौड़ा लेकर नपी तुली चोट की। उसके बाद उसने स्वयं धौंकनी फूककर लोहे को दोबारा भट्टी में गरम किया और फिर निहाई पर रखकर उसे ठोक-पीटकर सुघड़ गोले में बदल दिया।

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Chapter 4 विदाई – संभाषण | class11th | Ncert solution For Hindi Aroh

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 4 – विदाई-संभाषण आरोह भाग-1 हिंदी (Vidai Sambhashan)

अभ्यास

पृष्ठ संख्या:51

पाठ के साथ

1. शिवशंभु की दो गायों की कहानी के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहते हैं?

उत्तर

शिवशंभु की दो गायों के माध्यम से लेखक यह समझाना चाहते हैं कि जिस देश के पशुओं के बिछड़ते समय ऐसी मनोदशा होती है, वहाँ मनुष्यों की कैसी दशा हो सकती, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है| कहानी में दो गायें होती हैं जिनमें से एक बलवान और दूसरी कमजोर थी| वह कभी-कभी अपने सींगों की टक्कर से दूसरी कमजोर गाय को गिरा देती थी| एक दिन बलवान गाय पुरोहित को दे दी गई| उसके जाने के बाद कमजोर गाय दिन भर भूखी रही| उसी प्रकार लॉर्ड कर्जन ने अपने शासन-काल में भले ही भारतवासियों का शोषण किया हो लेकिन उनके जाने का दुःख सबको है|

2. आठ करोड़ प्रजा के गिड़गिड़ाकर विच्छेद न करने की प्रार्थना पर आपने जरा भी ध्यान नहीं दिया- यहाँ किस ऐतिहासिक घटना की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर

लॉर्ड कर्जन ने बंगाल-विभाजन का निर्णय लेकर भारत की एकता को खंडित करने की योजना बनाई| भारतवासियों ने लॉर्ड कर्जन की इस जिद के आगे बहुत विनती की, ताकि यह विभाजन न हो| लेकिन कर्जन ने इसे अनसुना कर दिया और आखिरकार बंगाल-विभाजन होकर रहा| इसी ऐतिहासिक घटना की ओर लेखक ने संकेत किया है|

पृष्ठ संख्या: 52

3. कर्जन को इस्तीफ़ा क्यों देना पड़ गया?

उत्तर

लॉर्ड कर्जन एक फौजी अफसर को अपने इच्छित पद पर नियुक्त करना चाहा, पर ब्रिटिश सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया| इसी गुस्से के कारण उन्होंने पद से इस्तीफ़ा दे दिया और वह स्वीकार भी हो गया|

4. बिचारिये तो, क्या शान आपकी इस देश में थी और अब क्या हो गई! कितने ऊँचे होकर आप कितने नीचे गिरे!- आशय स्पष्ट कीजिए|

उत्तर

लॉर्ड कर्जन भारत के तत्कालीन वायसराय थे| उन्होंने अपने शासन-काल में हर तरह की सुविधाओं का आनंद उठाया था| देश के अमीर तथा संपन्न कहे जाने वाले वर्ग उनके कहे अनुसार चलते थे| वायसराय के पद पर रहते हुए भी उन्होंने जनता की हितों पर कभी ध्यान नहीं दिया और यही उनके पतन का कारण बना| ब्रिटिश सरकार ने उनके इस्तीफे को मंजूरी दी और उन्हें भारत से जाना पड़ा|

5. आपके और यहाँ के निवासियों के बीच में तीसरी शक्ति और भी है- यहाँ तीसरी शक्ति किसे कहा गया है?

उत्तर

यहाँ तीसरी शक्ति ईश्वर को कहा गया है| उसकी शक्ति के आगे न लॉर्ड कर्जन का जोर चल सकता है और न ही भारतवासियों का| उन्हीं के इच्छानुसार दुनिया का संचालन होता है|

पाठ के आस-पास

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1. पाठ का यह अंश शिवशंभु के चिट्ठे से लिया गया है| शिवशंभु नाम की चर्चा पाठ में भी हुई है| बालमुकुंद गुप्त ने इस नाम का उपयोग क्यों किया होगा?

उत्तर

पाठ का यह अंश शिवशंभु के चिट्ठे से लिया गया है| लेखक बालमुकुंद गुप्त ने शिवशंभु नाम का उपयोग लॉर्ड कर्जन तथा अंग्रेजों के शासन काल पोल खोलने के लिए किया है| लेखक ने इस पात्र के जरिये अंग्रेजी शासकों के कुशासन पर व्यंग्य किया है| शिवशंभु एक काल्पनिक पात्र है जिसके माध्यम से लेखक उनकी तानाशाही को सामने लाने का प्रयास किया है|

2. नादिर से बढ़कर आपकी जिद्द है- कर्जन के सन्दर्भ में क्या आपको यह बात सही लगती है? पक्ष या विपक्ष में तर्क दीजिए|

उत्तर

लेखक ने लॉर्ड कर्जन की तुलना नादिर से की है| लेखक के अनुसार नादिर ने जब दिल्ली पर आक्रमण किया था तब उसने वहाँ की पीड़ित जनता की गुहार पर कत्लेआम को उसी समय रोक दिया| लेकिन, लॉर्ड कर्जन ने तो भारतवासियों के बंगाल-विच्छेद न करने की विनती को स्वीकारना तो दूर उसे सुनना तक जरूरी नहीं समझा| इसलिए यहाँ लेखक का कहना उचित है कि ‘नादिर से बढ़कर लॉर्ड कर्जन की जिद्द है’|

3. क्या आँख बंद करके मनमाने हुक्म चलाना और किसी की कुछ न सुनने का नाम ही शासन है?- इन पंक्तियों को ध्यान में रखते हुए शासन क्या है? इस पर चर्चा कीजिए|

उत्तर

लॉर्ड कर्जन ने अपने शासन-काल में प्रजा के हितों को ध्यान में नहीं रखा बल्कि उसने मनमाने हुक्म चलाकर शासन किया था| इस दृष्टिकोण से शासन उसे कहते हैं जिसमें प्रजा की मर्जी के विरूद्ध शासक के जिद्द के अनुसार कानून बनाया जाता हो| जनता के अनुरोध या प्रार्थना सुनने के लिए उन्हें अपने पास भी फटकने न दिया जाता हो|

4. इस पाठ में आए आलिफ़ लैला, अलहदीन, अबुल हसन और बग़दाद के खलीफा के बारे में सूचना एकत्रित कर कक्षा में चर्चा कीजिए|

उत्तर

छात्र स्वयं करें|

भाषा की बात

1. वे दिन-रात यही बात मनाते थे कि जल्द श्रीमान यहाँ से पधारें| सामान्य तौर पर आने के लिए पधारें शब्द का इस्तेमाल किया जाता है| यहाँ पधारें शब्द का क्या अर्थ है?

उत्तर

यहाँ शब्द का प्रयोग लॉर्ड कर्जन के भारत से जाने के लिए किया गया है|

2. पाठ में से कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं, जिनमें भाषा का विशिष्ट प्रयोग (भारतेंदु युगीन हिंदी) हुआ है| उन्हें सामान्य हिंदी में लिखिए|

क. आगे भी इस देश में जो प्रधान शासक आए, अंत में उनको जाना पड़ा|

► पहले भी इस देश में जो प्रधान शासक आए, उन्हें अंत में जाना पड़ा|

ख. आप किस को आए थे और क्या कर चले|

► आप किसलिए आए थे और क्या कर के जा रहे हैं?

ग. उनका रखाया एक आदमी नौकर न रखा|

► उनके रखवाने से एक आदमी नौकर भी न रखा गया|

घ. पर अशीर्वाद करता हूँ कि तू फिर उठे और अपने प्राचीन गौरव और यश को फिर लाभ करे|

► परन्तु मैं आशीर्वाद देता हूँ कि तू फिर उठे और अपने प्राचीन गौरव और यश को फिर से प्राप्त करे|

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Chapter 3 अपू के साथ ढाई साल | class11th | Ncert solution For Hindi Aroh

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 3- अपू के साथ ढाई साल आरोह भाग-1 हिंदी (Apu ke Sath Dhai Saal)

अभ्यास

पृष्ठ संख्या: 41

पाठ के साथ

1. पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक क्यों चला?

उत्तर

पथेर पांचाली फ़िल्म की शूटिंग का काम ढाई साल तक चला क्योंकि लेखक विज्ञापन कंपनी में नौकरी करते थे, जब फ़ुर्सत मिलती थी तब शूटिंग करते थे| पैसों का भी अभाव था जिसके कारण शूटिंग बार-बार रोकनी पड़ती| शूटिंग के बीच में कभी स्थानों और पात्रों को लेकर भी समस्याएँ आती रहतीं थीं|

2. अब अगर हम उस जगह बाकी आधे सीन की शूटिंग करते, तो पहले आधे सीन के साथ उसका मेल कैसे बैठता? उसमें से ‘कंटिन्युइटी‘ नदारद हो जाती – इस कथन के पीछे क्या भाव है?

उत्तर

किसी भी चीज़ में निरंतरता होनी चाहिए ताकि वह स्वाभाविक लगे| पथेर पांचाली फ़िल्म में लेखक ने पहले दिन रेल लाइन के पास काशफूलों से भरा एक मैदान की शूटिंग की| चूँकि सीन बहुत बड़ा था और एक दिन में पूरा करना संभव नहीं था इसलिए सभी लोग आधा भाग चित्रित कर वापस घर चले गए| सात दिन बाद सार टीम और लखक जब वहाँ पहुँचे तब उनलोगों ने काशफूलों को वहाँ नहीं पाया| उन सात दिनों में जानवरों ने सारे काशफूलों को खा लिया था| अगर लेखक उसी दृश्य में शूटिंग कर लेते तो वह पहले के भाग से मेल नहीं खाता और उसकी निरंतरता भंग हो जाती जिससे फ़िल्म में वास्तविकता का अभाव हो जाता|

3. किन दो दृश्यों में दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब अपनाई गई है?

उत्तर

श्रीनिवास और भूलो नामक कुत्ता के पात्र वाले दृश्यों में दर्शक यह पहचान नहीं पाते कि उनकी शूटिंग में कोई तरकीब अपनाई गई है|

भूलो नामक कुत्ता वाला दृश्य – एक दृश्य में अपू खाते-खाते ही कमान से तीर छोड़ता है। उसके बाद खाना छोड़कर तीर वापस लाने के लिए जाता है। सर्वजया बाएँ हाथ में वह थाली और दाहिने हाथ में निवाला लेकर बच्चे के पीछे दौड़ती है, लेकिन बच्चे के भाव देखकर जान जाती है कि वह अब कुछ नहीं खाएगा। भूलो कुत्ता भी खड़ा हो जाता है। उसका ध्यान सर्वजया के हाथ में जो भात की थाली है, उसकी ओर है। इसके बाद वाले शॉट में ऐसा दिखाना था कि सर्वजया थाली में बचा भात एक गमले में डाल देती है, और भूलो वह भात खाता है। लेकिन यह शॉट लेखक उस दिन नहीं ले पाते हैं, क्योंकि सूरज की रोशनी और पैसे दोनों खत्म हो गए थे। छह महीने बाद, फिर से पैसे इकट्ठा होने पर गाँव में उस सीन का बाकी अंश चित्रित करने के लिए लेखक गए परन्तु तब भूलो मर चूका था। फिर भूलो जैसे दिखनेवाले एक कुत्ते के साथ शूटिंग पूरी की गई।

श्रीनिवास वाला दृश्य – श्रीनिवास नामक घूमते मिठाईवाले से मिठाई खरीदने के लिए अपू और दुर्गा के पास पैसे नहीं हैं। वे तो मिठाई खरीद नहीं सकते, इसलिए अपू और दुर्गा उस मिठाईवाले के पीछे-पीछे मुखर्जी के घर के पास जाते हैं। मुखर्जी अमीर आदमी हैं। उनका मिठाई खरीदना देखने में ही अपू और दुर्गा की खुशी है।
इस दृश्य का कुछ अंश चित्रित होने के बाद शूटिंग कुछ महीनों के लिए स्थगित हो गई। पैसे हाथ आने पर फिर जब उस गाँव में शूटिंग करने के लिए लेखक गए, तब खबर मिली कि श्रीनिवास मिठाईवाले की भूमिका जो सज्जन कर रहे थे, उनका देहांत हो गया है। पहले वाले श्रीनिवास का मिलता-जुलता दूसरा आदमी ढूँढ़कर दृश्य का बाकी अंश चित्रित किया।

4. ‘भूलो‘ की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लाया गया? उसने फ़िल्म के किस दृश्य को पूरा किया?

उत्तर

भूलो को गमले में भात खाते वाला दृश्य लेखक को चित्रित करना था परन्तु सूरज की रोशनी खत्म हो चुकी थी और लेखक के पास पैसे भी नहीं थे इसलिए इसके बाद का दृश्य छह महीने बाद फिल्माया गया| तब तक भूलो की मृत्यु हो चुकी थी इसलिए ‘भूलो‘ की जगह दूसरा कुत्ता को लाया गया| उसने गमले में पड़े भात को खाया और उस दृश्य को पूरा किया|

5. फ़िल्म में श्रीनिवास की क्या भूमिका थी और उनसे जुड़े बाकी दृश्यों को उनके गुज़र जाने के बाद किस प्रकार फ़िल्माया गया?

उत्तर

फ़िल्म में श्रीनिवास की भूमिका मिठाई बेचने वाले की थी| श्रीनिवास की भूमिका से संबंधित कुछ अंश शूट होने के बाद कुछ महीनों के लिए शूटिंग स्थगित हो गई| इसी बीच श्रीनिवास की भूमिका निभा रहे व्यक्ति की मृत्यु हो गयी| तब उस पात्र से मिलते-जुलते आदमी की खोज की गयी| लेखक को उसकी जगह जो आदमी मिला, उसकी कद-काठी तो श्रीनिवास से मिलती थी परन्तु चेहरा अलग था| इसलिए बाकी के दृश्यों में उसकी पीठ दिखाकर फ़िल्म पूरा किया गया|

6. बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई और उसका समाधान किस प्रकार हुआ?

उत्तर

पैसों की तंगी के कारण बारिश का दृश्य चित्रित करने में मुश्किल आई| बरसात के दिन आए और गए, लेकिन लेखक के पास पैसे नहीं होने के कारण शूटिंग बंद थी। बारिश दृश्य उन्हें शरद ऋतू में शूट करना था, जिसमें शायद ही कभी बारिश होती है| बारिश के लिए लेखक को अपनी टीम के साथ कई दिनों तक देहात में जाकर बादलों के इंतजार में बैठना पड़ा| काले बादल कई बार आते और चले जाते| कई दिनों के बाद धुआँधार बारिश शुरू हुई और बारिश का दृश्य फ़िल्माया गया।

7. किसी फ़िल्म की शूटिंग करते समय फ़िल्मकार को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता है, उन्हें सूचीबद्ध कीजिए।

उत्तर

• पैसों की समस्या
• पात्रों का चयन
• प्राकृतिक समस्या (बारिश, धूप, ओलावृष्टि आदि)
• पात्रों की मृत्यु या अनुपस्थिति
• शूटिंग के लिए उचित स्थानों की खोज

पाठ के आस-पास

1. तीन प्रसंगों में राय ने कुछ इस तरह की टिप्पणियाँ की हैं कि दर्शक पहचान नहीं पाते कि… या फ़िल्म देखते हुए इस ओर किसी का ध्यान नहीं गया कि… इत्यादि। ये प्रसंग कौन से हैं, चर्चा करें और इसपर भी विचार करें कि शूटिंग के समय की असलियत फ़िल्म को देखते समय कैसे छिप जाती है।

उत्तर

ये प्रसंग हैं –
• भूलो कुत्ते की जगह पर दूसरे कुत्ते को भूलो बनाकर प्रस्तुत करना।
• रेलगाड़ी से धुँआ उठवाने के लिए तीन रेलगाड़ियों का प्रयोग करना।
• श्रीनिवास का पात्र निभाने वाले की मृत्यु के बाद दूसरे व्यक्ति से बचे दृश्य की शूटिंग पूरी करवाना।
• काशफूलों को जानवरों द्वारा खा जाने के बाद अगले मौसम में सीन के बचे दृश्य की शूटिंग पूरी करना।
लेखक की टिप्पणी कि दर्शक द्वारा नहीं पहचाना जाना या ध्यान नहीं दिया जाना बिल्कुल सही है| फ़िल्म की वास्तविकता और शूटिंग के दौरान हुई घटनाओं में अंतर् होता है| फ़िल्मकार कई युक्तियों का इस्तेमाल फ़िल्म निर्माण में करता है ताकि फ़िल्म में निरंतरता बनी रहे| शूटिंग के समय की असलियत फ़िल्म के रोमांच, स्वाभाविकता और निरंतरता के सामने छिप जाती है|

2. मान लीजिए कि आपको अपने विद्यालय पर एक डॉक्यूमैंट्री फ़िल्म बनानी है। इस तरह की फ़िल्म में आप किस तरह के दृश्यों को चित्रित करेंगे? फ़िल्म बनाने से पहले और बनाते समय किन बातों पर ध्यान देंगे?

उत्तर

विद्यालय पर डॉक्यूमैंट्री फ़िल्म बनाने के लिए हमें अपने प्रधानचार्य, शिक्षक, विद्यार्थी आदि की दिन भर की गतिविधियों के दृश्यों को चित्रित करेंगे| उन लोगों से कई सवाल जैसे – शिक्षा का महत्व, पसंदीदा विषय के बारे में पूछेंगे और उन्हें चित्रित करेंगे|
फ़िल्म बनाते समय हमें वास्तविकता और निरंतरता बरकरार रखने होगी| हमें दृश्यों को इस तरह से पेश करना होगा ताकि वे काल्पनिक ना लगे|

3. पथेर पांचाली फ़िल्म में इंदिरा ठाकरून की भूमिका निभाने वाली अस्सी साल की चुन्नीबाला देवी ढाई साल तक काम कर सकीं। यदि आधी फ़िल्म बनने के बाद चुन्नीबाला देवी की अचानक मृत्यु हो जाती तो सत्यजित राय क्या करते? चर्चा करें।

उत्तर

इंदिरा ठाकरून की भूमिका निभाने वाली अस्सी साल की चुन्नीबाला देवी का भी अगर आधी फ़िल्म बनने के बाद अचानक मृत्यु हो जाती तो सत्यजित राय, भूलो और श्रीनिवास की तरह ही उनसे मिलती-जुलती किसी अन्य वृद्धा को खोजते|
सत्यजित राय यह भी कर सकते थे कि चेहरा सामने से ना दिखाकर, पीठ दिखाते| वे कहानी में भी कुछ परिवर्तन कर सकते थे जिससे इंदिरा ठाकरून की भूमिका कम हो जाती|

4. पठित पाठ के आधार पर यह कह पाना कहाँ तक उचित है कि फ़िल्म को सत्यजित राय एक कला-माध्यम के रूप में देखते हैं, व्यावसायिक-माध्यम के रूप में नहीं?

उत्तर

पठित पाठ के आधार पर यह कहना उचित है कि फ़िल्म को सत्यजित राय एक कला-माध्यम के रूप में देखते हैं, व्यावसायिक-माध्यम के रूप में नहीं क्योंकि:
• उन्होंने अपनी किसी प्रोड्यूसर से पैसा नहीं लगवाया|
• फ़िल्म के हर दृश्य में वास्तविकता लाने का प्रयास करना|
• प्राकृतिक वर्षा और काश के फूलों के लिए इंतज़ार करना|
• फ़िल्म में निरंतरता बरकरार रखना|

भाषा की बात

1. पाठ में कई स्थानों पर तत्सम, तद्भव, क्षेत्रीय सभी प्रकार के शब्द एक साथ सहज भाव से आए हैं। ऐसी भाषा का प्रयोग करते हुए अपनी प्रिय फ़िल्म पर एक अनुच्छेद लिखें।

उत्तर

स्वयं करें

2. हर क्षेत्र में कार्य करने या व्यवहार करने की अपनी निजी या विशिष्ट प्रकार की शब्दावली होती है। जैसे अपू के साथ ढाई साल पाठ में फ़िल्म से जुड़े शब्द शूटिंग, शॉट, सीन आदि। फ़िल्म से जुड़ी शब्दावली में से किन्हीं दस की सूची बनाइए।

उत्तर

निर्देशक, अभिनेता, अभिनेत्री, छायाकार, मेकअप मैन, सीन, शॉट, कट, छायाकार, रिकॉर्डिंग|

3. नीचे दिए गए शब्दों के पर्याय इस पाठ में ढूँढ़िए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए –
इश्तहार, खुशकिस्मती, सीन, वृष्टि, जमा

उत्तर

इश्तहार – विज्ञापन
• अभिनेताओं की तलाश में निर्देशक ने अख़बार में विज्ञापन दिया|

खुशकिस्मती – सौभाग्य
• उस व्यक्ति का सौभाग्य था कि उसे अच्छे निर्देशक के साथ काम करने का मौका मिला|

सीन – दृश्य
• हरे-भरे बाग़ का दृश्य बहुत सुन्दर था|

 वृष्टि – बारिश
• बाहर बहुत ज़ोरों की बारिश हो रही थी|

जमा – इकट्ठा
• उन्होंने धीरे-धीरे कर बहुत सारे पैसे इकठ्ठा कर लिए|

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Chapter 2 मियाँ नसीरुद्दीन | class11th | Ncert solution For Hindi Aroh

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 2- मियाँ नसीरुद्दीन आरोह भाग-1 हिंदी (Miyan Nasiruddin)

अभ्यास

पृष्ठ संख्या 28

पाठ के साथ

1. मियाँ नसीरूद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा जाता है?

उत्तर

मियाँ नसीरूद्दीन छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने के लिए मशहूर हैं| यह उनका खानदानी पेशा है| यह कला उन्होंने अपने पिता से सीखी थी| उनकी रोटियाँ तुनकी पापड़ से भी ज्यादा महीन होती हैं| इसलिए उन्हें नानबाइयों का मसीहा कहा जाता है|

2. लेखिका मियाँ नसीरूद्दीन के पास क्यों गई थी?

उत्तर

लेखिका मियाँ नसीरूद्दीन के पास उनके हुनर को जानने के लिए गई थीं| उन्होंने मियाँ के बारे में बहुत कुछ सुना था| एक पत्रकार होने के नाते वह उनकी कला के बारे में जानकारी प्राप्त कर उन्हें प्रकाशित करना चाहती थीं|

3. बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरूद्दीन की दिलचस्पी क्यों कम होने लगी?

उत्तर

बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरूद्दीन की दिलचस्पी क्यों कम होने लगी क्योंकि मियाँ ने सारी बातें बुजुर्गों के मुँह से सुनी थी| सच्चाई ये थी कि उन्होंने कभी किसी बादशाह के यहाँ काम किया ही नहीं था| तभी तो वो लेखिका के पूछने पर बता नहीं सके कि उन्होंने बादशाह के यहाँ कौन-सी पकवान बनाई थी|

पृष्ठ संख्या: 29

4. मियाँ नसीरूद्दीन के चेहरे पर किसी दबे हुए अंघड़ के आसार देखकर यह मजूमन न छेड़ने का फैसला किया- इसके पहले और बाद के प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे स्पष्ट कीजिए|

उत्तर

लेखिका मियाँ नसीरूद्दीन के खानदान और उनसे संबंधित सभी जानकारी प्राप्त करना चाहती थी| लेकिन मियाँ लेखिका के सवालों से ऊब चुके थे| उन्हें लगता था कि पत्रकार लोग निठल्ले होते हैं| बादशाह वाले प्रसंग में लेखिका के यह पूछने पर कि उन्होंने बादशाह को कौन सी पकवान बना कर खिलाई थी, मियाँ ने बातचीत को टाल दिया| उनकी आवाज में रूखाई आ गई| लेखिका के जब यह पुछा कि कौन से बादशाह के यहाँ काम करते थे, तो मियाँ खीज उठे| उन्होंने अपने कारीगर को आवाज लगाई और बोले- “अरे ओ बब्बन मियाँ, भट्ठी सुलगा लो तो काम से निबटें|” लेखिका उनके बेटे-बेटियों के बारे में पूछना चाहती थीं लेकिन मियाँ के चेहरे में आये भाव से उन्हें समझ में आ गया कि अगर वो इससे ज्यादा कुछ और पूछेंगी तो शायद वो उन्हें जाने के लिए कह देंगे| इसीलिए उन्होंने इस मजूमन को न छेड़ना ही उचित समझा|

5. पाठ में मियाँ नसीरूद्दीन का शब्दचित्र लेखिका ने कैसे खींचा है?

उत्तर

पाठ में मियाँ नसीरूद्दीन का शब्दचित्र लेखिका ने इस प्रकार खींचा है- मौसमों की मार से पका चेहरा, आँखों में काईयाँ भोलापन और पेशानी पर मजे हुए कारीगर के तेवर|

पाठ के आस-पास

1. मियाँ नसीरूद्दीन की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?

उत्तर

इस पाठ में मियाँ नसीरूद्दीन की जो बातें अच्छी लगीं, वो निम्नांकित हैं:

अपने पेशे के प्रति समर्पित| मियाँ नसीरूद्दीन नान बनाने के लिए मशहूर हैं| वे अपने इस पेशे को कला समझकर मन लगाकर सीखते हैं| लेखिका से बातें करते हुए भी वे अपने काम पर से ध्यान नहीं हटाते हैं|

वे अपने साथ काम करने वालों का सम्मान करते हैं| उनको दी जाने वाले वेतन में कभी कोई कटौती करते हैं|

उनका आत्मविश्वास| मियाँ नसीरूद्दीन लेखिका के प्रत्येक प्रश्नों का जवाब दृढ़ता से देते हैं| कभी हिचकिचाते नहीं बल्कि पूरे विश्वास के साथ बात करते हैं|

2. तालीम की तालीम ही बड़ी चीज होती है- यहाँ लेखक ने तालीम शब्द का दो बार प्रयोग क्यों किया गया है? क्या आप दूसरी बार आए तालीम शब्द की जगह कोई अन्य शब्द रख सकते हैं? लिखिए|

उत्तर

यहाँ पहली बार आए तालीम का अर्थ है ‘शिक्षा’ तथा दूसरी बार आए तालीम शब्द का अर्थ है ‘अनुसरण’| इसे इस तरह भी लिखा जा सकता है- तालीम का अनुसरण ही बड़ी चीज होती है|

3. मियाँ नसीरूद्दीन तीसरी पीढ़ी के हैं जिसने अपने खानदानी व्यवसाय को अपनाया| वर्तमान समय में प्रायः लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को नहीं अपना रहे हैं, ऐसा क्यों?

उत्तर

वर्तमान समय में लोगों की मानसिकता थोड़ी अलग होती जा रही है| वे अपने पारंपरिक व्यवसाय को न अपनाकार नौकरी करना पसंद करते हैं| तेजी से बढ़ते शहरीकरण ने लोगों की सोच को भी बदल दिया है| लोग व्यक्तिगत रूप से अपनी पसंद का व्यवसाय या काम करना चाहते हैं| इसलिए प्रायः लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को नहीं अपना रहे हैं|

4. मियाँ कहीं अखबार नवीस तो नहीं हो? यह तो खोजियों की खुराफात है- अखबार की भूमिका को देखते हुए इस पर टिप्पणी करें|

उत्तर

पत्रकारिता के बारे में मियाँ नसीरूद्दीन के विचार दो प्रकार से समझे जा सकते हैं| पहला पक्ष सकारात्मक अर्थ में समझा जा सकता है, जिसमें अखबार की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण है| इसमें अविष्कारों और सूचनाओं को जनता से अवगत कराया जाता है और इससे प्रगति का मार्ग प्रशस्त होता है|

दूसरे पक्ष को नकारात्मक अर्थ में समझा जा सकता है, जिसमें खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर लोगों तक पहुंचाया जाता है| सनसनी तथा खलबली फैलाने वाले समाचारों को छापा जाता है जिससे उनकी लोकप्रियता बढ़े तथा अच्छी बिक्री हो|

पकवानों को जानें

• पाठ में आए रोटियों के अलग-अलग नामों की सूची बनाएँ और इनके बारे में जानकारी प्राप्त करें|

उत्तर

• रूमाली रोटी – यह एक पतली फ्लैटब्रेड है| इसका शुरुआत भारतीय उपमहाद्वीप से हुई| मुख्य रूप से इसको तंदूरी व्यंजनों के साथ खाया जाता है|

• बाकरखानी – यह एक मोटी, मसालेदार फ्लैट-रोटी है| यह बिस्कुट के जैसा होता है जिसका ऊपरी सतह कड़ा होता है|

• शीरमाल – यह रोटी मीठी होती है जिसे मैदे, दूध और शक्कर से बनाया जाता है| इसे ज्यादातर नॉनवेज के साथ खाया जाता है|

• ताफ़तान, बेसनी, खमीरी, गाव, दीदा, गाज़ेबान, तुनकी|

भाषा की बात

1. तीन चार वाक्यों में अनुकूल प्रसंग तैयार कर नीचे दी गए वाक्यों का इस्तेमाल करें|

(क) पंचहजारी अंदाज से सिर हिलाया|

(ख) आँखों के कंचे हम पर फेर दिए|

(ग) आ बैठे उन्हीं के ठीये पर|

उत्तर

एक बार मैंने एक सेठ से इधर-उधर की बातें कर प्रश्न पूछा तो उसने पंचहजारी अंदाज में सिर हिलाया और बार-बार प्रश्न पूछे जाने पर आँखों के कंचे हम पर फेर दिए| बाद में उसने बताया कि उसके सेठ मुनिमचंद के अचानक देहावसान के बाद वारिस न होने के कारण वह आ बैठा उन्हीं के ठीये पर|

2. बिटर-बिटर देखना- यहाँ देखने के एक खास तरीके को प्रकट किया गया है? देखने संबंधी इस प्रकार के चार क्रिया-विशेषणों का प्रयोग कर वाक्य बनाइए|

उत्तर

(क) आँख दिखाना- परीक्षा भवन में छात्र को नक़ल करते देख शिक्षक ने आँखें दिखाई|

(ख) सीधी आँख न देखना- मोहन अपने मित्र को आगे बढ़ते हुए सीधी आँख नहीं देख सकता|

(ग) टुकर-टुकर देखना- एक बच्चा मिठाई की तरफ टुकर-टुकर देख रहा था|

(घ) आँख मारना- उसने आँख मारकर मुझे बुलाया|

3. नीचे दिए वाक्यों में अर्थ पर बल देने के लिए शब्द-क्रम परिवर्तित किया गया है| सामान्यतः इन वाक्यों को किस क्रम में लिखा जाता है? लिखें|

क. मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए|

ख. निकाल देंगे वक्त थोड़ा|

ग. दिमाग में चक्कर काट गई है बात|

घ. रोटी जनाब पकती है आँच से|

उत्तर

क. छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए मियाँ मशहूर हैं|

ख. थोड़ा वक्त निकाल देंगे|

ग. बात दिमाग में चक्कर काट गई है|

घ. जनाब! रोटी आँच से पकती है|

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Chapter 1 नमक का दारोगा | class 11th | Ncert solution for Hindi Aroh

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 1- नमक का दारोगा आरोह भाग-1 हिंदी (Namak ka Daroga)

अभ्यास

पृष्ठ संख्या: 16

पाठ के साथ

1. कहानी का कौन-सा पात्र आपको सर्वाधिक प्रभावित करता है?

उत्तर

कहानी का नायक दारोगा वंशीधर हमें सर्वाधिक प्रभावित करता है जो ईमानदार, आज्ञाकारी, धर्मनिष्ठ तथा कर्मयोगी जैसे गुणों से युक्त एक दारोगा है| वह एक भ्रष्ट समाज में रहता है जहाँ उसके पिता भी बेईमानी की सीख देते हैं| कहानी का एक पात्र पंडित अलोपीदीन दारोगा को खरीदने में असफल रहता है तथा नौकरी से निकाल देता है| लेकिन उसके ईमानदारी के आगे पंडित को भी आखिरकार झुकना पड़ता है| इस प्रकार दारोगा वंशीधर समाज के सामने अपमानित होने के डर से झूठ के सामने कमजोर नहीं पड़ता है|

2. ‘नमक का दारोगा’ कहानी में पंडित अलोपीदीन के व्यक्तित्व के कौन-से दो पहलू (पक्ष) उभरकर आते हैं?

उत्तर

पंडित अलोपीदीन उस इलाके का प्रतिष्ठित जमींदार है| कहानी में उसके व्यक्तित्व के दो पहलू (पक्ष) उभरकर आते हैं|

पहला पक्ष निंदनीय है| जब वह दारोगा को रिश्वत देने की कोशिश करता है, जिससे उसके भ्रष्ट व्यक्तित्व का पता चलता है| वह आरोपों से मुक्त होने के लिए कई छल प्रपंचों का सहारा लेता है जिससे उसके चालाक व्यक्तित्व का भी पता चलता है|

दूसरा पक्ष प्रशंसनीय है| जब पंडित अलोपीदीन को दारोगा को नौकरी से निकलवा देने पर पछतावा होता है और वो वापस उनसे अपनी सारी जायदाद का स्थायी मेनेजर बनने की विनती करता है| उसकी आँखों से सद्भावना झलकती है|

3. कहानी के लगभग सभी पात्र समाज की किसी-न-किसी सच्चाई को उजागर करते हैं| निम्नलिखित पात्रों के सन्दर्भ में पाठ के उस अंश को उद्धृत करते हुए बताइए कि वह समाज की किस सच्चाई को उजागर करते हैं?
(क) वृद्ध मुंशी 
(ख) वकील 
(ग) शहर की भीड़

उत्तर

(क) वृद्ध मुंशी- “नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान देना, यह तो पीर की मजार है| निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए| ऐसा काम ढूँढना जहाँ कुछ ऊपरी आय हो| मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है…………….

इस उद्धरण में वृद्ध पिता समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहराई को व्यक्त करता है| घर की आर्थिक दशा इतनी दयनीय है कि वे अपने बेटे को भी रिश्वतखोरी का मार्ग अपनाने की सीख देते हैं| वे उसे नौकरी ढूंढने जाने से पहले ऊपरी आमदनी के फायदे समझाते हैं|

(ख) वकील- “वकीलों ने यह फैसला सुना और उछल पड़े|” इस कहानी में वकील पंडित अलोपीदीन के आज्ञापालक तथा गुलाम थे| यहाँ न्यायिक व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की झलक दिखाई पड़ती है|

(ग) शहर की भीड़- “जिसे देखिए, वही पंडितजी के इस व्यवहार को पर टीका-टिप्पणी कर रहा था, निंदा की बौछारें हो रही थीं, मानों संसार से अब पापी का पाप कट गया| पानी को दूध के नाम से बेचने वाला ग्वाला, कल्पित रोजनामचे भरनेवाले अधिकारी वर्ग, रेल में बिना टिकट सफ़र करने वाले बाबु लोग, जाली दस्तावेज बनाने वाले सेठ और साहूकार, यह सब-के-सब देवताओं की भांति गर्दन चला रहे थे……|”

प्रस्तुत उद्धरण से पता चलता है कि सब-के-सब भ्रष्टाचार में लिप्त हैं लेकिन तमाशा देखने के लिए आतुर रहते हैं| पंडित अलोपीदीन के गिरफ्तार होने पर शहर की भीड़ टीका-टिप्पणी करने में पीछे नहीं रहती जबकि वो स्वयं गलत हैं| इससे समाज की संवेदनहीनता का पता चलता है|

4. निम्न पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए- नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर की मजार है| निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए| ऐसा काम ढूँढना जहाँ कुछ ऊपरी आय हो| मासिक वेतन तो पूर्णमासी का चाँद है जो एक दिन दिखाई देता है और घटते-घटते लुप्त हो जाता है| ऊपरी आय बहता हुआ स्रोत है जिससे सदैव प्यास बुझती है| वेतन मनुष्य देता है, इसी से उसमें वृद्धि नहीं होती| ऊपरी आमदनी ईश्वर देता है, इसी से उसकी बरकत होती है, तुम स्वयं विद्वान हो, तुम्हें क्या समझाऊँ|

(क) यह किसकी उक्ति है?
(ख) मासिक वेतन को पूर्णमासी का चाँद क्यों कहा गया है?
(ग) क्या आप एक पिता के इस वक्तव्य से सहमत हैं?

उत्तर

(क) यह उक्ति दारोगा वंशीधर के वृद्ध पिता की है|

(ख) जिस प्रकार पूर्णमासी का चाँद धीरे-धीरे घटता जाता है उसी प्रकार मासिक वेतन महीने के पहले दिन मिलता है तथा जरूरतों को पूरा करते-करते कम होता जाता है| पूर्णमासी का चाँद धीरे-धीरे लुप्त हो जाता है, उसी प्रकार महीने के अंत तक मासिक वेतन पूरी तरह समाप्त हो जाता है|

(ग) नहीं, मैं एक पिता के इस वक्तव्य से असहमत हूँ| ऊपरी आय या रिश्वत लेना गलत बात है| जितनी ख़ुशी इमानदारी से नौकरी करने में मिलती है उतनी ख़ुशी अधिक पाने की लालसा में ऊपरी आमदनी से नहीं मिलती|

5. ‘नमक का दारोगा’ कहानी के कोई दो अन्य शीर्षक बताते हुए उसके आधार को भी स्पष्ट कीजिए|

उत्तर

(i) धन के ऊपर धर्म की जीत- इस कहानी के अंत में आखिरकार, पंडित अलोपीदीन को अपनी गलती पर पछतावा होता है और वह स्वयं वंशीधर के पास चलकर आता है| उसे अपनी पूरी जायदाद का स्थायी मैनेजर बना देता है| इस प्रकार धन पर धर्म की जीत होती है|

(ii) धर्मनिष्ठ दारोगा- यह कहानी पूरी तरह से दारोगा वंशीधर पर आधारित है, जो अपने कार्य के प्रति ईमानदार तथा कर्तव्यनिष्ठ है| वह पूरी इमानदारी से अपने कर्तव्य को निभाता है|

6. कहानी के अंत में अलोपीदीन के वंशीधर को मैनेजर नियुक्त करने के पीछे क्या कारण हो सकते हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए| आप इस कहानी का अंत किस प्रकार करते?

उत्तर

चूंकि पंडित अलोपीदीन स्वयं एक भ्रष्ट, बेईमान तथा लालची व्यक्ति था| उसने आजतक रिश्वत देकर अपने गलत कार्यों को अंजाम दिया था| एक वंशीधर ही ऐसा व्यक्ति था जिसे वह अपने धन के बल पर खरीद नहीं पाया| दारोगा के इस व्यक्तित्व से प्रभावित होकर उसने उसे अपना मैनेजर नियुक्त किया|

मैं इस कहानी का अंत भी इसी प्रकार करता/करती|

पाठ के आस-पास

1. दारोगा वंशीधर गैर-कानूनी कार्यों की वजह से पंडित अलोपीदीन को गिरफ्तार करता है लेकिन कहानी के अंत में इसी पंडित अलोपीदीन की सहृदयता पर मुग्ध होकर उसके यहाँ मैनेजर की नौकरी को तैयार हो जाता है| आपके विचार से वंशीधर का ऐसा करना उचित था? आप उसकी जगह होते तो क्या करते?

उत्तर

वंशीधर का पंडित अलोपीदीन की सहृदयता पर मुग्ध होकर उसके यहाँ मैनेजर की नौकरी के लिए तैयार होना कहीं से भी उचित नहीं जान पड़ता है| वंशीधर एक ईमानदार दारोगा था| वह चाहता तो अलोपीदीन द्वारा प्रस्तावित नौकरी के आग्रह को ठुकरा सकता था| मैं उसके जगह होती/होता तो ऐसी नौकरी कभी नहीं स्वीकार करता/करती| पंडित अलोपीदीन के काले धन का मैनेजर बनकर मैं अपने स्वाभिमान को ठेस नहीं पहुँचाती/पहुंचाता|

2. नमक विभाग के दारोगा पद के लिए बड़ों बड़ों का जी ललचाता था| वर्तमान समाज में ऐसा कौन-सा पद होगा जिसे पाने के लिए लोग लालायित रहते होंगे और क्यों?

उत्तर

वर्तमान समाज में सरकारी विभाग में कई ऐसे पद हैं जिसे पाने के लिए लोग लालायित रहते हैं| जैसे आयकर, बिक्रीकर, आयात-निर्यात विभाग, इनके उदाहरण हैं जहाँ अभी भी रिश्वत जैसी बुराइयाँ व्याप्त है| यहं मासिक आमदनी से अधिक ऊपरी आमदनी का महत्व है|

3. अपने अनुभवों के आधार पर बताइए कि जब आपके तर्कों ने आपके भ्रम को पुष्ट किया हो|

उत्तर

समाज के ऊंचे तबके के बुद्धिजीवी कहे जाने वाले लोगों को देखकर लगता था कि वे बड़े पदों पर ईमानदारी के साथ कार्य करते हैं| उनकी बड़ी-बड़ी बातों को सुनकर मुझे भ्रम होता था कि वे जैसा बोलते हैं शायद वैसा करते भी हैं| परंतु एक बार मैंने अपने ऐसे ही करीबी मित्र को जो समाज की भलाई तथा भ्रष्टाचार मुक्त समाज की स्थापना की बातें करते हुए सुना था, उसे ही इस भ्रष्टाचार में लिप्त देखा| इस अनुभव के बाद मेरा भ्रम टूट गया|

4. पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया| वृद्ध मुंशी जी द्वारा यह बात एक विशिष्ट सन्दर्भ में कही गई थी| अपने निजी अनुभवों के आधार पर बताइए-

(क) जब आपको पढ़ना-लिखना व्यर्थ लगा हो|

(ख) जब आपको पढ़ना-लिखना सार्थक लगा हो|

(ग) ‘पढ़ना-लिखना’ को किस अर्थ में प्रयुक्त किया होगा:

साक्षरता अथवा शिक्षा? (क्या आप इन दोनों को समान मानते हैं?)

उत्तर

(क) जब पूरी तरह शिक्षा ग्रहण करने के बाद भी मुझे अपने योग्यता के लायक नौकरी नहीं मिली तो लगा कि मेरा पढ़ना-लिखना व्यर्थ है|

(ख) मैंने अपनी शिक्षा का उपयोग गरीब बच्चों को पढ़ाकर उन्हें साक्षर बनाने में किया तो मुझे मेरा पढ़ना-लिखना सार्थक लगा|

(ग) ‘पढ़ना-लिखना’ को शिक्षा के अर्थ में प्रयुक्त किया गया होगा| शिक्षा और साक्षरता दोनों का अर्थ समान नहीं है| साक्षरता का अर्थ है साक्षर होना अर्थात पढ़ने और लिखने की क्षमता से संपन्न होना| जबकि शिक्षा का अर्थ है पढ़-लिख कर विषय की गहराई समझना अथवा योग्यता प्राप्त करना|

5. लडकियाँ हैं, वह घास-फूस की तरह बढ़ती चली जाती हैं| यह वाक्य समाज में लड़कियों की स्थिति की किस वास्तविकता को प्रकट करता है?

उत्तर

इस वाक्य से समाज की संकीर्ण सोच का पता चलता है, जहाँ लड़कियों को बोझ समझा जाता है| उन्हें पढ़ाने के स्थान पर घर के कामों में लगा दिया जाता है| समाज में लड़कियों का जन्म लेना अभिशाप तो माना ही जाता है लेकिन उनके बड़े होते ही विवाह की चिंता सताने लगती है|

6. इसीलिए नहीं कि अलोपीदीन ने क्यों यह कर्म किया बल्कि इसलिए कि वह कानून के पंजे में कैसे आए| ऐसा मनुष्य जिसके पास असाध्य करने वाला धन और अनन्य वाचालता हो, वह क्यों कानून के पंजे में आए| प्रत्येक मनुष्य अनसे सहानुभूति प्रकट करता था- अपने आस-पास अलोपीदीन जैसे व्यक्तियों को देखकर आपकी क्या प्रतिक्रिया क्या होगी? लिखें|

उत्तर

अलोपीदीन जैसे व्यक्तियों को देखकर मुझे ऐसा लगता है कि समाज में भ्रष्टाचार फैलाने वालों की कमी नहीं है| ऐसे लोग ही होते हैं जो कानून और न्याय व्यवस्था को आसानी से अपने पक्ष में ले आते हैं| कानून से खिलवाड़ करना इनकी आदत होती है| ये भी लगता है कि वंशीधर जैसे ईमानदार लोगों की कमी क्यों है जो ऐसे भ्रष्टाचारियों को सबक सिखा सकते हैं|

समझाइए तो जरा

1. नौकरी में ओहदे की ओर ध्यान मत देना, यह तो पीर की मजार है| निगाह चढ़ावे और चादर पर रखनी चाहिए|

उत्तर

इस कहानी में प्रस्तुत पंक्तियाँ वंशीधर के वृद्ध पिता के द्वारा कही गई हैं| इन पंक्तियों के द्वारा समाज के लोगों की सोच पर कटाक्ष किया गया है| ऐसा समाज जहाँ योग्यता के बल पर मिले पद को उसमें हो रहे आमदनी के कारण महत्व दिया जाता है| केवल मासिक वेतन को ही नहीं बल्कि ऊपरी आमदनी को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है|

2. इस विस्तृत संसार में उनके लिए धैर्य अपना मित्र, बुद्धि पथ-प्रदर्शक और आत्मावलंबन ही अपना सहायक था|

उत्तर

प्रस्तुत पंक्ति कहानी के नायक दारोगा वंशीधर के लिए कही गई हैं| यह समाज में रह रहे उनलोगों के लिए है जो भ्रष्टाचार जैसी कुरीतियों से प्रभावित नहीं होते| वे ईमानदारी, स्वावलंबन तथा धैर्य से जीवन व्यतीत करने में विश्वास रखते हैं|

3. तर्क ने भ्रम को पुष्ट किया|

उत्तर

एक रात वंशीधर की नींद गाड़ियों की खड़खड़ाहट से खुल जाती है| उन्हें लगता है कि इतनी रात को कोई गाड़ियों को पुल के पार क्यों ले जा रहा है? उन्हें संदेह हुआ कि जरूर कोई गैरकानूनी समान ले जाया जा रहा है| उनके मन में हुए भ्रम ने तर्क के स्तर पर सोचना शुरू किया कि जरूर कुछ गलत हो रहा है और आखिरकार उनका तर्क सही निकला|

4. न्याय और नीति सब लक्ष्मी के ही खिलौने हैं इन्हें वह जैसे चाहती है नचाती है|

उत्तर

प्रस्तुत पंक्ति द्वारा न्याय व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार को दर्शाया गया है| जिस न्याय व्यवस्था में धन के बल पर न्याय किया जाता हो वहाँ एक दोषी अपने आरोपों से आसानी से मुक्त हो जाता है| जहाँ धन का बल हो या पक्षपात हो वहाँ न्याय की कल्पना भी नहीं की जा सकती|

5. दुनिया सोती थी, पर दुनिया की जीभ जागती थी|

उत्तर

उस रात जब अलोपीदीन को गिरफ्तार किया गया, लोग सो रहे थे| लेकिन उसकी गिरफ्तारी की खबर अगले दिन सुबह होने तक पूरे शहर में फ़ैल गई| इससे यही पता चलता है कि लोगों को रात्रिकाल में भी निंदनीय बातों की जानकारी होने में देर नहीं लगती|

6. खेद ऐसी समझ पर! पढ़ना-लिखना सब अकारथ गया|

उत्तर

लेखक द्वारा लिखी गई इन पंक्तियों से समाज के उन लोगों पर कटाक्ष किया गया है जो पढाई को धन अर्जित करने का साधन समझते हैं| जब वंशीधर को नौकरी से निकाल दिया जाता है तो उनके वृद्ध पिता को लगा कि पढाई-लिखाई व्यर्थ चला गया| उनके अनुसार वंशीधर को पढ़ाना-लिखाना बेकार हो गया क्योंकि वह दुनियादारी नहीं समझ सका|

7. धर्म ने धन को पैरों तले कुचल डाला|

उत्तर

यहाँ धन और धर्म को क्रमशः सद्वृति और असद्वृति, बुराई और अच्छाई, सत्य और असत्य के रूप में भी समझा जा सकता है| कहानी के अंत में जब अलोपीदीन को अपनी गलती का एहसास होता है और वो वंशीधर को अपनी पूरी जायदाद का मैनेजर बना देता है तब ऐसा प्रतीत होता है कि सच्चाई और धर्म के आगे धन की हमेशा पराजय होती है| अलोपीदीन आजतक किसी के आगे सर नहीं झुकाया था लेकिन वंशीधर की सच्चाई और ईमानदारी ने उसे परास्त कर दिया|

8. न्याय के मैदान में धर्म और धन में युद्ध ठन गया|

उत्तर

जब अदालत में अलोपीदीन को दोषी के रूप में पेश किया गया तब वकीलों की सेना अपने तर्क से उन्हें निर्दोष सिद्ध करने में एकजुट हो गई| आरोपों को गलत प्रमाणों द्वारा झूठा साबित किया जाने लगा| उल्टा वंशीधर पर ही उद्दंडता तथा विचारहीनता का आरोप मढ़ दिया गया जो इमानदारी और सत्य के बल पर अदालत में खड़े थे| गवाहों को खरीद लिया गया था| धन के बल पर न्याय पक्षपाती हो गया और अखिरकार दोषी को निर्दोष करार दे दिया गया|

भाषा की बात

1. भाषा की चित्रात्मकता, लोकोक्तियों और मुहावरों के जानदार उपयोग तथा हिंदी-उर्दू के साझा रूप एवं बोलचाल की भाषा के लिहाज से यह कहानी अद्भुत है| कहानी में से ऐसे उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी बताइए कि इनके प्रयोग से किस तरह कहानी का कथ्य अधिक असरदार बना है?

उत्तर

भाषा की चित्रात्मकता

• वकीलों का फैसला सुनकर उछल पड़ना,
• अलोपीदीन का मुस्कुराते हुए बाहर आना ,
• चपरासियों का झुक-झुक कर सलाम करना,
• लहरों ने अदालत की नींव हिला दी,
• वंशीधर पर व्यंग्य बाणों की बौछार,
• अलोपीदीन का सजे-धजे रथ पर सवार होकर सोते जागते चले जाना।

लोकोक्तियों और मुहावरों का प्रयोग

• कगारे का वृक्ष
• दाँव पर पाना
• निगाह में बांध लेना
• जन्म भर की कमाई
• शूल उठाना
• ठिकाना न होना
• इज्जत धूल में मिलना
• कातर दृष्टि से देखना
• मस्जिद में दीया जलाना
• सिर पीट लेना
• सीधे मुँह बात न करना
• मन का मैल मिटना
• आँखे डबडबाना
• हाथ मलना
• मुँह में कालिख लाना
• मुँह छिपाना
• सिर-माथे पर लेना

हिंदी उर्दू का साझा रूप

• बेगरज को दाँव पर पाना जरा कठिन है|
• इन बातों को निगाहों में बाँध लो|

बोल चाल की भाषा

• ‘कौन पंडित अलोपीदीन? दातागंज के’
• ‘बाबू साहब ऐसा न कीजिए, हम मिट जाएँगे|’
• ‘क्या करें, लड़का अभागा कपूत है|’

उपरोक्त सभी विशेषताओं के कारण भाषा में सजीवता एवं रोचकता आ गई है| इससे कहानी कल्पित कथा न लगकर वास्तविक घटना प्रतीत होती है|

2. कहानी में मासिक वेतन के लिए किन-किन विशेषणों का प्रयोग किया गया है? इसके लिए आप अपनी ओर से दो-दो और विशेषण बताइए| साथ ही विशेषणों के आधार को तर्क सहित पुष्ट कीजिए|

उत्तर

कहानी में मासिक वेतन के लिए पूर्णमासी का चाँद, मनुष्य की देन जैसे विशेषणों का प्रयोग किया गया है|

चार दिन की चाँदनी- वेतन मिलने के बाद कुछ दिन तक सभी जरूरतें पूरी की जाती हैं और कुछ दिन बाद सारे खर्च हो जाते हैं|

खून-पसीने की कमाई- यह पूरे महीने भर की मेहनत की कमाई होती है|

3. दी गई विशिष्ट अभिव्यक्तियों एक निश्चित संदर्भ में निश्चित अर्थ देती हैं| संदर्भ बदलते ही अर्थ भी परिवर्तित हो जाता है| अब आप किसी अन्य संदर्भ में इन भाषिक अभिव्यक्तियों का प्रयोग करते हुए समझाइए|

उत्तर

(क) बाबूजी आशीर्वाद !
• बाबूजी आपके आशीर्वाद के बिना मुझे किसी काम में सफलता नहीं मिलती|

(ख) सरकारी हुक्म!

• सरकारी हुक्म तो मानना ही पड़ेगा|
• मुझे सरकारी हुक्म मिला है|

(ग) दातागंज के!

• में दातागंज का रहने वाला हूँ|
• पंडित अलोपीदीन दातागंज के निवासी थे|

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Chapter 19 धूमिल | class 11th | Ncert solution for Hindi Antra

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 19 – धूमिल

1. घर एक परिवार है, परिवार में पाँच सदस्य हैं, किंतु कवि पाँच सदस्य नहीं उन्हें पाँच जोड़ी आँखें क्यों मानता है।

उत्तर

कवि परिवार के पाँच सदस्य नहीं मानकर पाँच जोड़ी आँखें इसलिए मानते हैं क्योंकि गरीबी के कारण वे पाँचों परस्पर खुलकर संवाद नहीं करते। उनके समस्त रिश्तों-नातों, स्नेह और अपनत्व के बीच गरीबी की दीवार खड़ी हो गई है। बस वे आँखों के माध्यम से ही एक-दूसरे से जुड़ें हुए हैं।

2. ‘पत्नी की आँखें आँखें नहीं हाथ हैं, जो मुझे थामे हुए हैं’ से कवि का क्या अभिप्राय है?

उत्तर

पत्नी की आँखों से कवि को हिम्मत मिलती है। मेरी पत्नी की आँखें उन दो हाथों के समान हैं जो प्रत्येक परेशानी में मेरा सहारा बनी हुई हैं और मुझे बिखरने-टूटने से बचाती हैं। 

3. ‘वैसे हम स्वजन हैं, करीब है ……….. क्योंकि हम पेशेवर गरीब हैं’ से कवि का क्या आशय है? अगर अमीर होते तो क्या स्वजन और करीब नहीं होते?

उत्तर

इस कथन के माध्यम से कवि स्पष्ट करता है कि निस्संदेह वे स्वजन हैं, एक-दूसरे की भावनाओं को अच्छी तरह से समझते हैं और करीब हैं परन्तु वे अत्यधिक गरीब हैं जिसके कारण उनके पारिवारिक संबंधों में बिखराव और खटास सी आ गयी है। वे अपने हृदय के सुख-दुख को भी ठीक से एक-दूसरे से कह नहीं पाते। इसलिए उनके संबंध वास्तव में होकर भी नहीं होने जैसे हैं।

4. ‘रिश्ते हैं; लेकिन खुलते नहीं’ – कवि के सामने ऐसी कौन सी विवशता है जिससे आपसी रिश्ते भी नहीं खुलते हैं?

उत्तर

इस पंक्ति का अर्थ है कि परिवार के सभी सदस्य आपस में एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं किंतु गरीबी के कारण अपने प्यार को प्रकट नहीं कर पाते हैं। उनके हृदयों में गरीबी ने अलगाव की दीवारें खड़ी कर दी हैं इसलिए वे एक-दूसरे को मन की बातें नहीं बता पाते|

5. निम्नलिखित का काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए –

(क) माँ की आँखें पड़ाव से पहले ही तीर्थ यात्रा की बस के दो पंचर पहिए हैं।

उत्तर

कवि ने ‘पड़ाव से पहले ही तीर्थ यात्रा की बस के दो पंचर पहिए’ प्रतीक माँ की आँखों के लिए प्रयोग किया है।कवि कहते हैं कि माँ की यह इच्छा है कि वह मृत्यु से पहले तीर्थ-यात्रा कर ले परन्तु पैसे की कमी के कारण उनका यह सपना उसी प्रकार अधूरा प्रतीत हो रहा है जिस प्रकार बस के टायर पंचर हो जाने पर वह आगे नहीं बढ़ पाती है, अपने पड़ाव यानी मंजिल तक नहीं पहुँच पाती है। भाषा सहज, सरल और भावपूर्ण है। लाक्षणिकता और प्रतीकात्मकता विद्यमान है।मुक्त छंद है।

(ख) पिता की आँखें लोहसाँय की ठंडी शलाखें हैं।

उत्तर

कवि ने ‘लोहसाँय की ठंडी सलाखें’ प्रतीक पिता की आँखों के लिए प्रतीक रूप में प्रयुक्त किया है। कवि अपने घर में पैसे की कमी की विषय में बताते हुए कहते हैं कि पिता की आँखें सपना देखती हैं, किंतु जिस प्रकार लोहे के औजार बनाने वाली भट्टी में ठंडी शलाखें कुछ नया निर्माण नहीं कर पातीं, उसी प्रकार उनके सपने भी अधूरे रह जाते हैं। उनमें अब नए निर्माण की क्षमता चुक गई है। भाषा सहज, सरल और भावपूर्ण है। लाक्षणिकता एवं प्रतीकात्मकता विद्यमान है। मुक्त छंद है।

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Chapter 18 श्रीकांत वर्मा | class 11th | Ncert solution for Hindi Antra

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 18 – श्रीकांत वर्मा

1. मगध के माध्यम से ‘हस्तक्षेप’ कविता किस व्यवस्था की ओर इशारा कर रही है?

उत्तर

हस्तक्षेप कविता मगध के बहाने आज के जनतांत्रिक प्रणाली में सत्तासीन लोगों की निरंकुशता की ओर इशारा कर रही है|

2. व्यवस्था को ‘निरंकुश’ प्रवृत्ति से बचाए रखने के लिए उसमें ‘हस्तक्षेप’ जरूरी है – कविता को दृष्टि में रखते हुए अपना मत दीजिए।

उत्तर

व्यवस्था को ‘निरंकुश’ प्रवृत्ति से बचाए रखने तथा व्यवस्था को लोकप्रिय एवं न्यायपूर्ण बनाने के लिए ‘हस्तक्षेप’ जरूरी है क्योंकि यदि व्यवस्था एक बार निरंकुश हो गई तो नागरिक अपने अधिकारों की रक्षा नहीं कर सकेंगें| जनता के हस्तक्षेप से शासन पर अंकुश लगाया जा सकता है|

3. मगध निवासी किसी भी प्रकार से शासन व्यवस्था में हस्तक्षेप करने से क्यों कतराते हैं?

उत्तर

मगध निवासी हस्तक्षेप से इसलिए कतराते हैं क्योंकि उन्हें यह डर रहता है कि कहीं इस व्यवस्था के खिलाफ आवाज़ उठाने में वह अकेला न रह जाए और सत्तासीन लोगों की नज़र में ना आ जाए और उसके साथ बुरा व्यवहार न हो|

4. ‘मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं’ – के आधार पर मगध की स्थिति का अपने शब्दों में वर्णन कीजिए।

उत्तर

मगध में निरंकुशता लगातार बढ़ती जा रही है जिसके कारण जनता परेशान है। लोगो की आवाजों को दबा दिया जाता है। अत्याचारों को सहते-सहते उनकी सहनशीलता जवाब दे गई है। लोग अब निरंकुश शासन व्यवस्था के विरुद्ध दबी जुबान में बोलने भी लगे हैं। यही कारण है कि अब कहा जाने लगा है ‘मगध अब कहने को मगध है, रहने को नहीं।’

5. मुर्दे का हस्तक्षेप क्या प्रश्न खड़ा करता है? प्रश्न की सार्थकता को कविता के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

मगध में निरंकुशता लगातार बढ़ती जा रही है। लोग अपनी बात कहने से डरते हैं। वे अत्याचार सहने को मजबूर हैं| मुर्दे का हस्तक्षेप यह बताता है कि व्यक्ति इतना प्रताड़ित हो चुका है की उसे अब किसी बात का डर नहीं रहा है| वह औरों से पूछना चाहता है कि मनुष्य क्यों डर रहा है|

6. ‘मगध को बनाए रखना है, तो, मगध में शांति रहनी ही चाहिए’ – भाव स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

कवि कहते हैं राजनेता आम आदमी को गुमराह करते हैं कि वह शांति बनाए रखने के लिए वे सत्तासीन लोगों के विरोध में एक शब्द भी न कहे। यदि कहीं से भी कोई आवाज़ आई, तो यह जनतांत्रिक व्यवस्था के लिए अशांति का कारण बन जाएगी।

7. ‘हस्तक्षेप’ कविता सत्ता की क्रूरता और उसके कारण पैदा होनेवाले प्रतिरोध की कविता है – स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

मगध को इस कविता में निरंकुशता का प्रतीक दिखाया गया है| सत्तासीन लोगों के अत्याचारों और क्रूरता के कारण आम आदमी दुखी और पीड़ित है परन्तु किसी भी व्यक्ति में सत्तासीन लोगों के विरोध का साहस नहीं है| वे आँख मूँदकर इस अन्यायपूर्ण व्यवस्था को ही सच समझ कर जी रहे हैं|

8. निम्नलिखित लाक्षणिक प्रयोगों को स्पष्ट कीजिए-

(क) कोई छींकता तक नहीं

उत्तर

लोग शासन व्यवस्था के अत्याचारों से परेशान हैं लेकिन फिर भी किसी में इतना साहस नहीं है कि वे सत्तासीन लोगों के खिलाफ आवाज़ उठाएँ|

(ख) कोई चीखता तक नहीं

उत्तर

इस पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहता है कि निरंकुश शासन में लोग अत्याचार के विरुद्ध अपनी जुबान तक नहीं खोलना चाहते हैं।

(ग) कोई टोकता तक नहीं

उत्तर

निरंकुश शासन में लोगों पर अत्याचार होते हैं परन्तु कोई सत्ता से सवाल नहीं पूछता है, जबकि लोकतंत्र के लिए हस्तक्षेप आवश्यक है।

9. निम्नलिखित पद्यांशों की संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए –


(क) मगध को बनाए रखना है, तो ………… मगध है, तो शांति है

उत्तर

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ श्रीकांत वर्मा द्वारा रचित कविता ‘हस्तक्षेप’ से ली गई है। इसमें कवि मगध की शासन व्यवस्था का व्यवहार दर्शाता है।

व्याख्या – लोकतान्त्रिक अव्यवस्था पर कवि व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि सत्ताधारियों की अत्याचारों से आम लोग इतने भयभीत है कि वह इनके सामने आवाज़ उठाने का साहस नहीं जुटा पाती है। आम लोग को राजनेता गुमराह करते हैं वह शांति बनाए रखने के लिए वे सत्तासीन लोगों के विरोध में एक शब्द भी न कहे यानी जनतांत्रिक व्यवस्था के विरोध में कुछ भी नहीं कहना है।

(ख) मगध में व्यवस्था रहनी ही चाहिए ………… क्या कहेंगे लोग?

उत्तर

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ श्रीकांत वर्मा द्वारा रचित कविता ‘हस्तक्षेप’ से ली गई है। इसमें कवि मगध की शासन व्यवस्था का फैलाया हुआ डर दिखाता है।

व्याख्या –

शासन व्यवस्था कहती है कि मगध में शांति बनाए रखने के लिए व्यवस्था का होना आवश्यक है। निरंकुश राष्ट्र में किसी के ऊपर कितना भी अत्याचार क्यों न हो, वह चीख नहीं सकता क्योंकि इससे वहाँ की शांति व्यवस्था खतरे में पड़ जाएगी। मगध जैसे शक्तिशाली राष्ट्र में यदि व्यवस्था नहीं रही तो बदनामी होगी।

(ग) जब कोई नहीं करता ………… मनुष्य क्यों मरता है?

उत्तर

संदर्भ – प्रस्तुत पंक्तियाँ श्रीकांत वर्मा द्वारा रचित कविता ‘हस्तक्षेप’ से ली गई है। इस पंक्ति पर कवि मुर्दे के माध्यम से लोगों को चेताता है कि हस्तक्षेप करना आवश्यक होता है।

व्याख्या – मगध के लोग शासन व्यवस्था के अन्याय तथा अत्याचार से परेशान हैं। एक साधारण एवं सबसे कमजोर यानी मरे हुए के समान व्यक्ति उसका विरोध करता है। से अब किसी बात का डर नहीं रहा है| वह औरों से पूछना चाहता है कि मनुष्य क्यों डर रहा है|

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Chapter 17 नागार्जुन | class 11th | Ncert solution for Hindi Antra

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 17 – नागार्जुन

1. इस कविता में बादलों के सौंदर्य चित्रण के अतिरिक्त और किन दृश्यों का चित्रण किया गया है?

उत्तर

इस कविता में कवि ने बादलों के सौंदर्य चित्रण के अतिरिक्त ओस की बूंदों को कमलों पर गिरने के दृश्य, अनेक छोटी-बड़ी सुंदर झीलों-झरनों, झीलों में तैरते हंसों, हिमालय में पर्वत श्रेणियों, चकवा-चकवी के प्रेम वर्णन, कस्तूरी मृग द्वारा सुगंध की खोज में इधर-उधर भागने और किन्नर-किन्नरियों द्वारा मस्ती के माहौल में सुरापान करने का चित्रण किया है।

2. प्रणय-कलह से कवि का क्या तात्पर्य है?

उत्तर

प्रणय-कलह से कवि का तात्पर्य है प्रेम भरा झगड़ा| जब प्रेमी और प्रेमिका अलग-अलग होते हैं तो उन्हें विरह-वेदना में दिन व्यतीत करने पड़ते हैं परंतु जब वे एक बार फिर मिलते हैं तो वे प्यार व्यक्त करने के साथ-साथ एक-दूसरे के प्रति गुस्सा भी प्रकट करते हैं। कविता में चकवा-चकवी के मध्य यह प्रणय-कलह दर्शाया गया है।

3. कस्तूरी मृग के अपने पर ही चिढ़ने के क्या कारण हैं?

उत्तर

कस्तूरी मृग पूरा जीवन कस्तूरी के गंध के पीछे भागते रहता है। उसे पता ही नहीं होता है कि वह गंध तो उसकी नाभि में पायी जाने वाली कस्तूरी से आ रही है। जब वह ढूँढ़-ढूँढ़कर थक जाता है, तो उसे अपने पर ही चिढ़ हो जाती है।

4. बादलों का वर्णन करते हुए कवि को कालिदास की याद क्यों आती है?

उत्तर

बादलों का वर्णन करते हुए कवि को कालिदास की याद इसलिए आती है क्योंकि कालिदास द्वारा रचित खंडकाव्य ‘मेघदूत’ में यक्ष ने बादलों को अपना संदेश देकर दूत के रूप में अपनी पत्नी के पास भेजा था। अपने संदेश का उत्तर पाने की आशा में वह बड़ी अधीरता से बादलों की ओर देखता रहता था।

5. कवि ने ‘महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते देखा है’ क्यों कहा है?

उत्तर

कवि ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि उसने शीत ऋतु को तेज़ हवाओं में बादलों को आपस में टकरा-टकराकर गरजते और बरसते हुए देखा है। कवि को ऐसा लगता था कि मानो तेज़ तूफान में बड़े-बड़े बादल आपस में टकराकर बरस रहे हैं।

6. ‘बादल को घिरते देखा है’ पंक्ति को बार-बार दोहराए जाने से कविता में क्या सौंदर्य आया है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर

‘बादल को घिरते देखा है’ पंक्ति को बार-बार दोहराए जाने से कविता में प्रभावोत्पादकता उत्पन्न हो गई है। इससे हिमालय पर्वत पर छाए हुए बादलों का सौंदर्य बढ़ गया है। इससे कविता का मूलभाव भी स्पष्ट हो जाता है।

7. निम्नलिखित का भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) निशा काल से चिर-अभिशापित / बेबस उस चकवा-चकई का
बंद हुआ क्रंदन, फिर उनमें / उस महान सरवर के तीरे

शैवालों की हरी दरी पर / प्रणय-कलह छिड़ते देखा है।

उत्तर

इन पंक्तियों में कवि ने चकवा और चकई के दुःखों को व्यक्त किया है| चकवा और चकवी को मिले श्राप के अनुसार चकवा-चकवी रात में एक साथ नहीं रहते। अपनी इस विवशता पर वे दोनों रातभर चीख-चीखकर विलाप करते हैं। अब प्रात:काल होने पर उनका मिलन हो गया है। उन्होंने विलाप करना बंद कर दिया है। कवि ने उन्हें सरोवर की काई रूपी हरी-दरी पर प्रेम भरी छेड़-छाड़ करते देखा है।

(ख) अलख नाभि से उठनेवाले / निज के ही उन्मादक परिमल-

के पीछे धावित हो-होकर / तरल तरुण कस्तूरी मृग को

अपने पर चिढ़ते देखा है।

उत्तर

इन पंक्तियों में कवि ने कस्तूरी हिरण के परेशानी को व्यक्त किया है। कस्तूरी मृग पूरा जीवन कस्तूरी गंध के पीछे भागता रहता है। उसे इस सत्य का पता ही नहीं होता है कि वह गंध तो उसकी नाभि में व्याप्त कस्तूरी से आती है। जब वह ढूँढ़-ढूँढ़कर थक जाता है, तो उसे अपने पर ही चिढ़ हो जाती है। वह अपनी असमर्थता के कारण परेशान हो उठता है।

8. संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए-

(क) छोटे-छोटे मोती जैसे …………… कमलों पर गिरते देखा है।

उत्तर

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘अंतरा भाग-1’ में संकलित ‘बादल को घिरते देखा है’ नामक कविता से ली गई हैं। प्रस्तुत पंक्तियों में कवि ने वर्षा में पर्वतीय प्रदेश में बादलों के घिरने का मोहक वर्णन किया है।

व्याख्या: कवि ने बादलों से घिरे हुए सफेद और उज्ज्वल पर्वतों की चोटियों को देखा। कवि को बर्फ से ढके हुए पर्वतों पर ओस के छोटे-छोटे कण मोती के समान लग रहे हैं। फिर ये ओस की बूंदें मानसरोवर झील में खिले सुंदर कमलों के पत्तों पर गिरती हैं।

(ख) समतल देशों से आ-आकर …………… हंसों को तिरते देखा है।

उत्तर

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘अंतरा भाग-1’ में संकलित ‘बादल को घिरते देखा है’ नामक कविता से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने हिमालय पर्वत पर स्थित नीले जल वाली झीलों का मनोहारी वर्णन किया है।

व्याख्या: ऊँचे हिमालय पर्वत की श्रृंखलाओं पर छोटी-बड़ी कई झीलें हैं। इन झीलों का पानी श्याम और नीले रंग का दिखाई देता है। जब समतल देशों में वर्षा ऋतु में गर्मी पड़ती है तो उमस पैदा हो जाती है । इसी उमस से बचने के लिए ये पक्षी हिमालय की झीलों की ओर चले जाते हैं| हंस झील में खिले कमलों की नाल में कड़वे एवं मीठे तंतुओं को खाते हैं। कवि एक बार फिर कहते हैं कि मैंने इन पक्षियों के साथ हंसों को भी झीलों में तैरते देखा है।

(ग) ऋतु वसंत का सुप्रभात था …………… अगल-बगल स्वर्णिम शिखर थे।

उत्तर

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘अंतरा भाग-1’ में संकलित ‘बादल को घिरते देखा है’ नामक कविता से ली गई हैं। इन पंक्तियों में कवि ने वसंत ऋतु में प्रातःकाल के समय सूर्य की सुनहरी किरणों के पर्वत शिखरों पर पड़ने वाले प्रभाव का वर्णन किया है।

व्याख्या: यह वसंत ऋतु की सुहावनी सुबह थी। धीमी-धीमी सुगंधित वायु चल रही थी। उदित होते सूर्य की सुनहरी किरणें बर्फ से ढकी चोटियों पर पड़ रही थीं, जिसके कारण वे चोटियाँ सुनहरी लग रही थीं। उनका उस समय का सौंदर्य मन को लुभाने वाला था।

(घ) ढूँढा बहुत परंतु लगा क्या …………… जाने दो, वह कवि-कल्पित था।

उत्तर

प्रसंग: प्रस्तुत पंक्तियाँ ‘अंतरा भाग-1’ में संकलित ‘बादल को घिरते देखा है’ नामक कविता से ली गई हैं। इसमें कवि कालिदास द्वारा मेघदूत में वर्णित स्थानों को ढूँढ़ रहा है।

व्याख्या: कवि कहता है कि कालिदास ने मेघदूत रचना में व्याप्त अलकापुरी का उल्लेख किया है। इसमें उन्होंने यक्ष और यक्षिणी का वर्णन किया है जिन्हें शाप के कारण अलग रहना पड़ता है। तब यक्ष वर्षा ऋतु में मेघ को दूत बनाकर यक्षिणी के पास अपना संदेश भेजता है। कवि कहते हैं कि वह कौन-सा स्थान होगा, जहाँ मेघ रूपी दूत बरस पड़ा होगा। कवि कहता है कि मैंने बहुत ढूँढ़ा पर असफलता हाथ लगी है। अतः इसे जाने देते हैं शायद यह कवि की कल्पना मात्र थी।

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Chapter 16 नरेंद्र शर्मा | class 11th | Ncert solution for Hindi Antra

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 16 – नरेंद्र शर्मा

प्रश्न अभ्यास

1. कविता के आधार पर बताइए कि कवि की दृष्टि में बाहर का अँधेरा भीतरी दुःस्वप्नों से अधिक भयावह क्यों है?

उत्तर

कवि ने भीतर के दुःस्वप्नों से भयावह समाज में व्याप्त कुव्यवस्था एवं कुरीतियों के अंधकार को माना है क्योंकि अंतर्मन का दुख तो उनका निजी दुख है, उनसे केवल एक व्यक्ति दुखी होता है, परंतु समाज की पीड़ाएँ समाज में चेतना का विकास नहीं होने देतीं| कवि का मन बेचैन है कि सुख और समृद्धि की सुबह कब होगी।

2. अंदर का भय कवि के नयनों को सुनहली भोर का अनुभव क्यों नहीं होने दे रहा है?

उत्तर

अंदर का भय कवि के नयनों को सुनहली भोर का अनुभव इसलिए नहीं होने दे रहा है क्योंकि उसे लगता है कि जैसे ही सुनहली भोर की शुरुआत होगी, उसके अंदर का भय उसे फिर से सताने लगेगा और वह चैन से नहीं रह पाएगा।

3. कवि को किस प्रकार की आस रातभर भटकाती है और क्यों?

उत्तर

कवि को यह आस रातभर भटकाती है कि एक-न-एक दिन उसके जीवन में आशा की किरण अवश्य फूटेगी। वह चाहता है कि जल्दी प्रकाश फैल जाए।

4. कवि चेतन से फिर जड़ होने की बात क्यों कहता है?

उत्तर

कवि चेतन से जड़ होने की बात इसलिए कहता है क्योंकि चेतन मनुष्य पर सांसारिक वातावरण अपना प्रभाव डालता है। उसे बाहर का अँधकार भयभीत करता है। इनसे बचने के लिए कवी जड़ होना चाहता है| कुछ समय के लिए उसे भय दूर रहेगा| इस तरह उसे सुबह का इंतज़ार करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

5. अंधकार भरी धरती पर ज्योति चकफेरी क्यों देती है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

कवि संसार में व्याप्त विसंगतियों रूपी अंधकार को दूर करना चाहते हैं। वह कहते हैं जब तक इस धरती पर अंधकार है तब तक ज्योति अंधकार को दूर करने के लिए चारों ओर घूमती रहेगी यानी कवि धरती के अंधकार को दूर करने में लगे हुए हैं और जब तक यह अंधकार दूर नहीं होगा, वह इस कार्य में लगे रहेंगें|

6. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) आती नहीं उषा, बस केवल
आने की आहट आती है!

उत्तर

कवि को अपने जीवन और समाज में केवल अंधकार दिखाई दे रहा है। वह अपने जीवन में कुछ अच्छा होने की आशा कर रहे हैं। परन्तु ऐसा होता नहीं है इसलिए कवि का मन जीवन की निराशा में जूझता रहता है।

(ख) करवट नहीं बदलता है तम,
मन उतावलेपन में अक्षम!

उत्तर

इन पंक्तियों में कवि का आशय है कि जब जीवन में दुख रूपी अंधकार का साम्राज्य छा जाता है तो फिर लगने लगता है कि यह खत्म होगा| वह इस स्थिति से निपटने में खुद को असमर्थ पाते हैं इस कारण वह कुछ भी सोचने-समझने में अक्षम हैं।

7. जागृति नहीं अनिद्रा मेरी,
नहीं गई भव-निशा अँधेरी!
उक्त पंक्तियों में ‘जागृति’, ‘अनिद्रा’ और ‘भव-निशा अँधेरी’ से कवि का सामाजिक संदर्भों में क्या अभिप्राय है?

उत्तर

सामाजिक संदर्भों में ‘जागृति’ से अभिप्राय क्रान्ति का है| ‘भव-निशा अँधेरी’ का अर्थ समाज में व्याप्त रूढ़ियों से है जो लोगों के दुःखों का कारण बन गयी हैं| ‘अनिद्रा’ से आशय है सोने का| लोग समाज में व्याप्त इस अन्धकार को मिटाने का प्रयास नहीं कर रहे हैं जो नाश का कारण बानी हुई है|

8. ‘अंतर्नयनों के आगे से शिला न तम की हट पाती है’ पंक्ति में ‘अंतर्नयन’ और ‘तम की शिला’ से कवि का क्या तात्पर्य है?

उत्तर

‘अंतर्नयनों के आगे से शिला न तम की हट पाती है’ पंक्ति में अंतर्नयनों से कवि का तात्पर्य  ज्ञान चक्षुओं से तथा अंधकार की शिला से तात्पर्य अज्ञानता के पर्दे से है। जब तक मन में ज्ञान का प्रकाश नहीं फैलेगा, तब तक जीवन में चेतना नहीं आएगी।

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Chapter 15 महादेवी वर्मा | class 11th | Ncert solution for Hindi Antra

NCERT Solutions for Class 11th: पाठ 15 – महादेवी वर्मा

प्रश्न-अभ्यास

जाग तुझको दूर जाना

1. ‘जाग तुझको दूर जाना’ कविता में कवयित्री मानव को किन विपरीत स्थितियों में आगे बढ़ने के लिए उत्साहित कर रही है?

उत्तर

इस कविता में कवयित्री मानव को आँधी, तूफ़ान, भूकंप की चिंता न करते हुए सांसारिक माया-मोह के बंधनों को त्यागकर, समस्त सुखों, भोग-विलासों को छोड़कर, समस्त कष्टों को भूलकर और कठिनाइयों का सामना करते हुए निरंतर अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ते रहने की प्रेरणा दे रही हैं।

2 कवयित्री किस मोहपूर्ण बंधन से मुक्त होकर मानव को जागृति का संदेश दे रही है?

उत्तर

कवयित्री मानव का सांसारिक मायामोह, सुख-सुविधाओं, भोग-विलास, नाते-रिश्ते आदि के बंधनों से मुक्त होकर निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहने के लिए मानव को जागृति का संदेश दे रही है।

3. ‘जाग तुझको दूर जाना’ स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित एक जागरण गीत है। इस कथन के आधार पर कविता की मूल संवेदना को लिखिए।

उत्तर

महादेवी वर्मा द्वारा रचित कविता ‘जाग तुझको दूर जाना’ में स्वतंत्रता आंदोलन की परिस्थितियों का वर्णन किया गया है। इस कविता में कवयित्री ने देश के लोगों से कहा कि वह कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़कर स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लें| इसके लिए उन्हें सांसारिक मोह-माया को त्यागना होगा इस लिए वे इसकी चिंता ना करें| वे मंज़िल की ओर चलते रहें यानी स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए कदम उठाते रहे|

4. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए-


(क) विश्व का क्रंदन” …………………………अपने लिए कारा बनाना!

उत्तर

कवयित्री भारतीयों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए जागृति करते हुए कहती है कि जब देश पराधीनता की पीड़ा को झेल रहा है तो ऐसे में व्यक्तिगत सुखों को भोगने की इच्छा नहीं करनी चाहिए क्योंकि व्यक्तिगत सुख तभी अच्छे लगते हैं जब हमारे आसपास कोई दुखी न हो। यहाँ देश प्रेम की भावना प्रकट होती है। संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग है। अनुप्रास, पुनरुक्तिप्रकाश तथा स्वरमैत्री अलंकार विद्यमान हैं।वीर रस और ओज गुण विद्यमान हैं।

(ख) कह न ठंडी साँस …………………………सजेगा आज पानी।

उत्तर

कवयित्री भारतीयों को स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए जागृति करते हुए कहती है कि स्वतंत्रता के मार्ग में आने वाली निराशा भरी कहानी को भूल जाना चाहिए| योद्धा की आँखों में आँसू तभी अच्छे लगते हैं जब पराजय के बाद भी मन में युद्ध करने का जोश हो। हारे हुए योद्धा के आँसू आँखों की शोभा नहीं बढ़ाते। संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग है। दूसरी पंक्ति में विरोधाभास अलंकार है। करुण रस एवं प्रसाद गुण विद्यमान हैं।

(ग) है तुझे अंगार-शय्या ………………………… कलियाँ बिछाना!

उत्तर

कवयित्री ने कठिन-से-कठिन परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने तथा परेशानियों, कष्टों से न घबराने की प्रेरणा दी गई है। संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली का प्रयोग है। ‘अंगार शैय्या’ में प्रतीकात्मक प्रयोग है।

5. कवयित्री ने स्वाधीनता के मार्ग में आनेवाली कठिनाइयों को इंगित कर मुनष्य के भीतर किन गुणों का विस्तार करना चाहा है? कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

इस कविता में कवयित्री ने साहस, धैर्य जैसे गुणों का विस्तार करना चाहा है| उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थतियों में भी मनुष्य को अपना साहस नहीं छोड़ना चाहिए और मजबूती से उसका सामना करना चाहिए| साथ ही मनुष्यों को सांसारिक सुखों का त्याग कर मंज़िल की ओर अग्रसर रहना चाहिए| कवयित्री ने मनुष्य के भीतर के आलस्य त्यागकर और मन को शांत और स्थिर रखकर अपने उद्देश्य की पूर्ति में लग जाने को कहा है|

सब आँखों के आँसू उजले

6. महादेवी वर्मा ने ‘आँसू’ के लिए ‘उजले’ विशेषण का प्रयोग किस संदर्भ में किया है और क्यों?

उत्तर

कवयित्री ने ‘आँसू’ के लिए ‘उजले’ विशेषण का प्रयोग स्वप्न अर्थात् आशा और सत्य के संदर्भ में किया है क्योंकि सभी आँखों के सपने उजले होते हैं और सभी में सत्य पलता है अर्थात् आशापूर्ण भविष्य के सपनों में ही सत्य पलता है, जो हमेशा उज्ज्वल होता है।

7. सपनों को सत्य रूप में ढालने के लिए कवयित्री ने किन यथार्थपूर्ण स्थितियों का सामना करने को कहा है?

उत्तर

कवयित्री का मानना है कि सपनों को सत्य रूप में ढालने के लिए मनुष्य को जीवन में आनेवाली कठिनाइयों, सुख-दुखों आदि का साहसपूर्वक सामना करना चाहिए और किसी भी स्थिति में घबराना नहीं चाहिए।

8. निम्नलिखित पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए-

(क) आलोक लुटाता वह ………………………… कब फूल जला?

उत्तर

कवयित्री का मानना है कि परमात्मा ही इस संसार के प्राणियों को सुख दुख देता है। कभी वह संसार को सूर्य के प्रकाश से तो कभी फूलों को सुगंध से भर देता है। दोनों ही संसार में आनंद बिखेरते हैं परंतु ये सब कब और कैसे होगा यह उस परमात्मा पर ही निर्भर करता है।

(ख) नभ तारक-सा……………..हीरक पिघला?

उत्तर

कवयित्री कहती है कि सूर्य के अस्त होते ही वातावरण अंधकारमय हो जाता है फलस्वरूप दिन का सूर्य रूपी सत्य रात को चाँद-सितारे बनकर आकाश को चूमता प्रतीत होता है। यानी हर मनुष्य अपने हिसाब से जी रहे हैं| हीरा तराशे जाने की अनेक कठिनाइयाँ सहने से भी नहीं डरता। सोना आग में तपकर और अधिक चमकीला बन जाता है। फिर भी सोने ने न तो कभी हीरे की तरह अनमोल बनने के लिए टूटना या छुरे से तराशा जाना स्वीकार किया और न कभी हीरे ने सोने की-सी चमक प्राप्त करने के लिए आग में तपना स्वीकार किया।

9. काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए। संसृति के प्रति पग में मेरी एकाकी प्राण चला!

उत्तर

इन पंक्तियों में कवयित्री कहती हैं कि इस दुखी संसार में सुख-दुख एकाकार होकर मेरे प्राण अकेले चले जा रहे हैं अर्थात मेरे जीवन का अंत होनेवाला है और मैंने यह जान लिया है कि जीवन के प्रत्येक स्वप्न में सत्य समाहित होता है। ‘प्रति पग’ तथा ‘जलते खिलते बढ़ते’ में अन्त्यानुप्रास अलंकार है। भाषा तत्सम प्रधान, लाक्षणिक एवं प्रतीकात्मक है। उद्बोधनात्मक शैली है। गेयता का गुण विद्यमान है।

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