Bharat Ki Khoj Class 8 Chapter 5 Summary अरब और मंगोल जब हर्ष उत्तर भारत में शक्तिशाली शासक था उस समय अरब में इस्लाम अपना प्रचार एवं प्रसार कर रहा था। उसे उस समय से भारत आने में 60 वर्ष
Read MoreBharat Ki Khoj Class 8 Chapter 5 Summary अरब और मंगोल-जब हर्ष उत्तर भारत में एक शक्तिशाली शासक थे और विद्वान चीनी चात्री हुआनत्सांग नालंदा में अध्ययन कर रहे थे, उसी समय अरब में इस्लाम अपना रूप ग्रहण कर रहा
Read MoreBharat Ki Khoj Class 8 Chapter 4 Summary गुप्त शासन में राष्ट्रीयता और साम्राज्यवाद- मौर्य शासन की समाप्ति पर शुंग वंश आया। भारतीय और यूनानी संस्कृतियों के मेल से अफगानिस्तान और सरहदी सूबे के क्षेत्र में गांधार की यूनानी बौद्ध
Read Moreसिंधु घाटी सभ्यता सार 1. सिंधु घाटी सभ्यता (3300-1700 ई.पू.) विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। यह हड़प्पा सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानी जाती है। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के
Read MoreBharat Ki Khoj Class 8 Chapter 2 Summary भारत की अतीत की झाँकी नेहरू जी इस पाठ के माध्यम से कहते हैं कि बीते सालों में उनका यह प्रयास रहा है कि वे भारत को समझें और उसके प्रति उनके
Read MoreBharat Ki Khoj Class 8 Chapter 1 Summary अतीत का भार नेहरू जी को बागवानी का शौक था। उन्हें अंग्रेज़ी सरकार द्वारा जिन जेलों में रखा गया वहाँ उन्होंने अपने शौक को पूरा किया। दूसरी जेलों की तरह उन्होंने अहमद
Read Moreटोपी पाठ सार यह कहानी एक गौरैया के जोड़े की है। उन दोनों में बहुत प्रेम था। एक-दूसरे के बगैर वे कोई भी काम नहीं करते थे। एक बार मादा गौरैया ने किसी मनुष्य को कपड़े पहने देखा तो उसकी
Read Moreपाठ का सार – निर्मल जी की इस कहानी के दो प्रमुख पात्र हैं – साँप और बाज़। साँप समुद्र किनारे पत्थरों में बनी अँधेरी गुफ़ा में रहता है। उसे इस बात की ख़ुशी है कि उसे न किसी से कुछ
Read Moreपानी की कहानी पाठ का सारांश Pani ki Kahani Class 8 Summary कहानी की शुरुआत में लेखक ने बताया हैं कि बेर की झाड़ी से मोती-सी चमकती पानी की एक बूँद उनके हाथ में आ गई और उनकी दृष्टि उस बूँद पर
Read Moreसूरदास के पद अर्थ सहित – Surdas Ke Pad Class 8 Explanation (1)मैया, कबहिं बढ़ैगी चोटी?किती बार मोहिं दूध पियत भई, यह अजहूँ है छोटी।तू जो कहति बल बेनी ज्यौं, ह्वै है लाँबी मोटी।काढ़त गुहत न्हवावत जैहै, नागिनी सू भुइँ
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