एक तिनका पाठ सार एक तिनका कविता में कवि ‘हरिऔध’ जी ने हमें कभी भी अहंकार ना करने की सलाह देते हुए कहते है कि एक दिन जब वे अभिमान से तथा अकड़ से भरे हुए अपने घर के छत के
Read Moreकंचा सार वसंत भाग – 1 (Summary of Kancha Vasant) इस कहानी में लेखक श्री टी० पद्मनाभन ने बालजीवन का सुंदर चित्रण किया है| कैसे एक बालक अपने खेलने के सामान बाकी अन्य चीज़ों से ऊपर रखता है और किसी भी
Read Moreरहीम के दोहे सार वसंत भाग – 1 (Summary of Rahim ke Dohe Vasant) कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत।। अर्थ – रहीम कहते हैं कि जब हमारे पास धन-संपत्ति होती है तो
Read Moreअपूर्व अनुभव सार वसंत भाग – 1 (Summary of Apurv Anubhav Vasant) यह कहानी मूलतः जापानी भाषा में लिखा गया है जिसमें तोमोए में पढ़ने वाले तोत्तो-चान तथा यासुकी-चान नामक दो जापानी बच्चों के संघर्ष को दिखाया गया है। यहाँ हरेक बच्चा एक-एक पेड़
Read Moreचिड़िया की बच्ची सार वसंत भाग – 1 (Summary of Chidiya ki Bachchi Vasant) इस कहानी में लेखक श्री जैनेंद्र कुमार ने आज़ादी की महत्ता और मनुष्य के स्वार्थी स्वभाव का वर्णन किया है| माधव दास बहुत ही अमीर व्यक्ति हैं। उन्होंने संगमरमर की आलीशान
Read Moreशाम एक किसान कविता की व्याख्या आकाश का साफ़ा बाँधकर सूरज की चिलम खींचता बैठा है पहाड़, घुटनों पर पड़ी है नही चादर-सी, पास ही दहक रही है पलाश के जंगल की अँगीठी अंधकार दूर पूर्व में सिमटा बैठा है
Read Moreपापा खो गए वसंत भाग – 1 (Summary of Papa Kho Gye Vasant) यह एकांकी लेखक श्री विजय तेंदुलकर जी द्वारा लिखा गया है जिसमें निर्जीव वस्तुओं की पीड़ा का सजीव चित्रण किया गया है और पाठ के द्वारा बच्चों के अपहरण के
Read Moreरक्त और हमारा शरीर वसंत भाग – 1 (Summary of Rakt aur Hmara Sharir Vasant) यह पाठ में लेखक डॉ० यतीश अग्रवाल ने शरीर में रक्त की भूमिका के बारे में बताया है। अनिल अपनी छोटी बहन दिव्या को लेकर जाँच करवाने
Read Moreमिठाईवाला वसंत भाग – 1 (Summary of Mithaiwala Vasant) यह कहानी भगवतीप्रसाद वाजपेयी जिसमें कहानीकार ने एक पिता का बच्चों के प्रति प्रेमभाव को दर्शाया है| किस तरह से एक पिता अपने बच्चों को खोने के बाद अन्य बच्चों में उस ख़ुशी
Read Moreकठपुतली पाठ सार प्रस्तुत कविता ” कठपुतली ” में कवि भवानी प्रसाद मिश्र ने कठपुतलियों के मन की व्यथा को दर्शाया है। ये सभी कठपुतलियाँ धागों में बंधे – बंधे परेशान हो चुकी हैं और इन्हें दूसरों के इशारों पर
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