मैं क्यों लिखता हूँ कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 5 | एमैं क्यों लिखता हूँ Summary | Quick revision Notes ch-5 Kritika | EduGrown

मैं क्यों लिखता हूँ कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 5 | एमैं क्यों लिखता हूँ  Summary | Quick revision Notes ch-5 Kritika | EduGrown

मैं क्यों लिखता हूँ कहानी का सारांश main kyu likhta hu summary class 10 kritika

मैं क्यों लिखता हूँ’ पाठ में लेखक ने अपने लिखने के कारणों के साथ-साथ एक लेखक के प्रेरणा-स्रोतों पर भी प्रकाश डाला है। लेखक के अनुसार लिखे बिना लिखने के कारणों को नहीं जाना जा सकता। वह अपनी आंतरिक व्याकुलता से मुक्ति पाने तथा तटस्थ होकर उसे देखने और पहचानने के लिए लिखता है।

प्रायः प्रत्येक रचनाकार की आत्मानुभूति ही उसे लेखन कार्य के लिए प्रेरित करती है, किंतु कुछ बाहरी दबाव भी होते हैं। ये बाहरी दबाव भी कई बार रचनाकार को लिखने के लिए बाध्य करते हैं। इन बाहरी दबावों में संपादकों का आग्रह, प्रकाशक का तकाजा तथा आर्थिक आवश्यकता आदि प्रमुख हैं। लेखक का मत है कि वह बाहरी दबावों से कम प्रभावित होता है। उसे तो उसकी भीतरी विवशता ही लिखने की ओर प्रेरित करती है। उसका मानना है कि प्रत्यक्ष अनुभव से अनुभूति गहरी चीज है।

एक रचनाकार को अनुभव सामने घटित घटना को देखकर होता है, किंतु अनुभूति संवेदना और कल्पना के द्वारा उस सत्य को भी ग्रहण कर लेती है जो रचनाकार के सामने घटित नहीं हुआ। फिर वह सत्य आत्मा के सामने ज्वलंत प्रकाश में आ जाता है और रचनाकार उसका वर्णन करता है।
लेखक बताता है कि उसके द्वारा लिखी ‘हिरोशिमा’ नामक कविता भी ऐसी ही है। एक बार जब वह जापान गया, तो वहाँ हिरोशिमा में उसने देखा कि एक पत्थर बुरी तरह झुलसा हुआ है और उस पर एक व्यक्ति की लंबी उजली छाया है। विज्ञान का विद्यार्थी होने के कारण उसे रेडियोधर्मी प्रभावों की जानकारी थी। उसे देखकर उसने अनुमान लगाया कि जब हिरोशिमा पर अणु-बम गिराया गया होगा, तो उस समय वह व्यक्ति इस पत्थर के पास खड़ा होगा। अणु-बम के प्रभाव से वह भाप बनकर उड़ गया, किंतु उसकी छाया उस पत्थर पर ही रह गई।

लेखक को उस झुलसे हुए पत्थर ने झकझोर कर रख दिया। वह हिरोशिमा पर गिराए गए अणु-बम की भयानकता की कल्पना करके बहुत दुखी हुआ। उस समय उसे ऐसे लगा, मानो वह उस दु:खद घटना के समय वहाँ मौजूद रहा हो। इस त्रासदी से उसके भीतर जो व्याकुलता पैदा हुई, उसी का परिणाम उसके द्वारा हिरोशिमा पर लिखी कविता थी। लेखक कहता है कि यह कविता ‘हिरोशिमा’ जैसी भी हो, वह उसकी अनुभूति से पैदा हुई थी। यही उसके लिए महत्वपूर्ण था।

Important Link

NCERT Solution – मैं क्यों लिखता हूँ

For Free Video Lectures Click here

Tags

मैं क्यों लिखता हूँ कहानी का सारांश main kyon likhta hun kis vidha ki rachna hai main kyon likhta hun question answer class 10 hindi kritika chapter 5 question answer main kyun likhta hoon ncert solution main kyon likhta hun kis vidha ki rachna hai main kyu likhta hu class 10 ncert solutions मैं क्यों लिखता हूँ के लेखक कौन है class 10 hindi kritika chapter 5 question answer main kyon likhta hun class 10th hindi main likhta hun in english class 10 hindi kritika chapter 4 summary in hindi

Read More

एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 4 | एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! Summary | Quick revision Notes ch-4 Kritika | EduGrown

एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 4 | एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! Summary | Quick revision Notes ch-4 Kritika | EduGrown

Summary of एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा! Class 10th Kritika Notes

Detailed summary

एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!’ पाठ के लेखक शिव प्रसाद ‘मिश्र’ रुद्र हैं। इस पाठ के माध्यम से लेखक ने गाने-बजाने वाले समाज के आत्मिक प्रेम, देश के प्रति असीम प्रेम, विदेशी शासन के प्रति क्षोभ और पराधीनता की जंजीरों को उतार फेंकने की तीव्र लालसा का वर्णन किया है।

दुलारी का शरीर पहलवानों की तरह कसरती था। वह मराठी महिलाओं की तरह धोती लपेट कर कसरत करने के बाद प्याज और हरी मिर्च के साथ चने खाती थी। वह अपने रोजाना के कार्य से खाली ही नहीं हुई थी कि उसके घर के दरवाजे पर किसी ने दस्तक दी। दरवाजा खोलने पर उसने देखा कि टुन्नू बगल में कोई बंडल दबाए खड़ा था। दुलारी ने टुन को डांटते हुए कहा कि उसने उसे यहाँ आने के लिए मना कर रखा था। टुन्नू उसकी डाँट सुनकर सहम गया। वह उसके लिए गांधी आश्रम की खादी से बनी साड़ी लेकर आया था। वह उसे होली के त्योहार पर नई साड़ी देना चाहता था। दुलारी उसे बुरी तरह फटकारती है कि अभी उसकी उम्र नहीं है ऐसे काम करने की। दुलारी टुन्नू की दी हुई धोती उपेक्षापूर्वक उसके पैरों के पास फेंक देती है। टुन्नू की आँखों से कज्जल- मलिन आँसुओं की बूँदैं साड़ी पर टपक पड़ती हैं। वह अपमानित-सा वहाँ से चला जाता है। उसके जाने के बाद दुलारी धोती उठाकर सीने से लगा लेती है और आँसुओं के धब्बों को चूमने लगती है।

दुलारी छह महीने पहले टुन्नू से मिली थी। भादों की तौज पर खोजवाँ बाजार में गाने का कार्यक्रम था। दुलारी गाने में निपुण थी। उसे पद्य में सवाल-जवाब करने की अद्भुत क्षमता थी। बड़े-बड़े शायर भी उसके सामने गाते हुए घबराते थे। खोजवां बाजार वाले उसे अपनी तरफ से खड़ा करके अपनी जीत सुनिश्चित कर चुके थे उसके विपक्ष में उसके सामने सोलह-सत्रह साल का टुन्नू खड़ा था। टुन्नू के पिता यजमानी करके अपने घर का गुजारा करते थे। टुन्नू को आवारों की संगति में शायरी का चस्का लग गया था। उसने भैरोहेला को उस्ताद बनाकर कजली की सुंदर रचना करना सीख लिया था। टुनू ने उस दिन दुलारी से संगीत में मुकाबला किया। दुलारी को भी अपने से बहुत छोटे लड़के से मुकाबला करना अच्छा लग रहा था। मुकाबले में टुन्नू के मुँह से दुलारी की तारीफ़ सुनकर सुंदर के ‘मालिक’ फेंकू सरदार नै हुन् पर लाठी से वार किया। दुलारी ने टुन्तू को उस मार से बचाया था। दुलारी टुन्नू के जाने के बाद उसी के बारे में सोच रही थी। दुनू उसे आज अधिक सभ्य लगा था दुन्नू ने कपड़े भी सलीके से पहने रखे थे। दुलारी हुन की दी हुई साड़ी अपने संदूक में उठाकर रख दी। उसके मन में टुन्नू के लिए कोमल भाव उठ रहे थे। टुन्नू उसके पास कई दिन से आ रहा था वह उसे देखता रहता था और उसकी बातें बड़े ध्यान से सुनता था। दुलारी का यीवन रहा था। टुन्नू पंद्रह-सोलह वर्ष का लड़का था। दुलारी ने दुनिया देख रखी थी। वह समझ गई कि टूनू और उसका संबंध शरीर का न होकर आत्मा का है। वह यह बात टुन्नू के सामने स्वीकार करने से डर रही थी। उसी समय फेंकू सरदार धोतियों का बंडल लेकर दुलारी की कोठरी में आता है। फेंकू सरदार उसे तीज पर बनारसी साड़ी दिलवाने का वायदा करता है। जब दुलारी और फेंकू सरदार बातचीत कर रहे थे उसी समय उसकी गली में से विदेशी वस्त्रों की होली जला वाली टोली निकली। चार लोगों ने एक चादर पकड़ रखी थी जिसमें लोग धोती, कमीज़, कुरता, टोपी आदि डाल गे थे। दुलारी ने भी फेंकू सरदार का दिया मैचेस्टर तथा लंका-शायर की मिलों की बनी बारीक सूत की मखमली किनारेवाली धोतियों का बंडल फैली चादर में डाल दिया। अधिकतर लोग जलाने के लिए पुराने कपड़े फेंक रहे थे। दुलारी को खिड़की से नया बंडल फेंकने पर सबकी नजर उस तरफ उठ गई। जुलूस के पीछे चल रही खुफिया पुलिस के रिपोर्टर अली सगीर ने भी दुलारी को देख लिया था।

दुलारी ने फेंकू सरदार को उसकी किसी बात पर झाड़ से पीट-पीट कर घर से बाहर निकाल दिया था। जैसे ही फेंक दुलारी के घर से निकला है उसे पुलिस रिपोर्टर मिल जाता है जिसे देखकर वह झेप जाता है। दुलारी के आंगन में रहने वाली सभी स्त्रियाँ इकट्ठी हो जाती हैं। सभी मिलकर दुलारी को शांत करती हैं सब इस बात से हैरान थी कि फेंकू सर दुलारी पर अपना सब कुछ न्योछावर कर रखा था फिर आज उसने उसे क्यों मारा। दुलारी ने कहा कि यदि फेंकू ने उसे रानी बनाकर रखा था तो उसने भी अपनी इज्जत, अपना सम्मान सभी कुछ उसके नाम कर दिया था। एक नारी के सम्मान की कीमत कुछ नहीं है। पैसों से तन खरीदा जा सकता है पर एक औरत का मन नहीं खरीदा जा सकता। उन दोनों के बीच झगड़ा टुन्नू को लेकर हुआ था। सभी स्त्रियाँ बैठी बात कर रही थीं कि झींगुर ने आकर बताया कि टुन्नू महाराज को गोरे सिपाहियों ने मार दिया और लाश भी वे लोग उठाकर ले गए। टुन्नू के मारे जाने का समाचार सुनकर दुलारी की आँखों से अविरल आँसुओं की धारा बह निकली। उसकी पड़ोसिनें भी दुलारी के दिल का हाल जान गई थीं। सभी ने उसके रोने को नाटक समझा। लेकिन दुलारी अपने मन की सच्चाई जानती थी। उसने टुन्नू की दी साधारण खद्दर की धोती पहन ली। वह झींगुर से टुन्नू के शहीदी स्थल का पता पूछकर वहाँ जाने के लिए घर से बाहर निकली। घर से बाहर निकलते ही थाने के मुंशी और फेंकू सरदार ने उसे थाने चलकर अमन सभा के समारोह गाने के लिए कहा।

प्रधान संवाददाता ने शर्मा जी की लाई हुई रिपोर्ट को मेज़ पर पटकते हुए डाँटा और अखबार की रिपोर्टरी छोड़कर चाय की दुकान खोलने के लिए कहा उनके द्वारा लाई रिपोर्ट को उसने अलिफ लैला की कहानी कहा, जिसे प्रकाशित करना वह उचित नहीं समझता। उनकी दी हुई रिपोर्ट को छापने से उसे अपनी अखबार के बंद हो जाने का भय है। इस पर संपादक ने शर्मा जी को रिपोर्ट पढ़ने के लिए कहा। शर्मा जी ने अपनी रिपोर्ट का शीर्षक ‘एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा’ रखा था। उनकी रिपोर्ट के अनुसार “कल छह अप्रैल को नेताओं की अपील पर नगर में पूर्ण हड़ताल रही। खोमचेवाले भी हड़ताल पर थे। सुबह से ही विदेशी वस्त्रों का संग्रह करके उनकी होली जलाने वालों के जुलूस निकलते रहे। उनके साथ प्रसिद्ध कजली गायक टुन्नू भी था। जुलूस टाउन हॉल पहुँच कर समाप्त हो गया। सब जाने लगे तो पुलिस के जमादार अली सगीर ने टुन्नू को गालियाँ दी। टुन्नू के प्रतिवाद करने पर उसे जमादार ने बूट से ठोकर मारी। इससे उसकी पसली में चोट लगी। वह गिर पड़ा और उसके मुँह से खून निकल पड़ा। गोरे सैनिकों ने उसे उठाकर गाड़ी में डाल कर अस्पताल ले जाने के स्थान पर वरुणा में प्रवाहित कर दिया, जिसे संवादादाता ने भी देखा था। इस टुन्नू का दुलारी नाम की गौनहारिन से संबंध था। कल शाम अमन सभा द्वारा टाउन हाल में आयोजित समारोह में, जहाँ जनता का एक भी प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था, दुलारी को नचाया-गवाया गया था। टुन्नू की मृत्यु से दुलारी बहुत उदास थी। उसने खद्दर की साधारण धोती पहन रखी थी। वह उस स्थान पर गाना नहीं चाहती थी, जहाँ आठ घंटे पहले उसके प्रेमी की हत्या कर दी गई थी। फिर भी कुख्यात जमादार अली सगीर के कहने पर उसने दर्दभरे स्वर में ‘एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा, कासों मैं पूछ’ गाया और जिस स्थान पर टुन्नू गिरा था उधर ही नजर जमाए हुए गाती रही। गाते-गाते उसकी आँखों से आंसू बह निकले मानो टुन्नू की लाश को वरुणा में फेंकने से पानी की जो बूँदें छिटकी थीं, वे अब दुलारी की आँखों से बह निकली हैं ।” संपादक महोदय को रिपोर्ट तो सत्य लगी परंतु वे इसे छाप नहीं सकते।

Important Link

NCERT Solution – एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा!

For Free Video Lectures Click here

Tags

Ehi Thaiyan Jhulni Herani Ho Rama   एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा हिंदी Summary एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा पाठ का सार  class 10 hindi kritika chapter 4 summary in hindi एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा का अर्थ  एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा question answer एही ठैयाँ झुलनी हेरानी हो रामा class 10  short summary of chapter ehi thaiya jhulni herani ho rama 

Read More

साना साना हाथ जोड़ि कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 3 | साना साना हाथ जोड़ि Summary | Quick revision Notes ch-3 Kritika | EduGrown

साना साना हाथ जोड़ि कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 3 | साना साना हाथ जोड़ि  Summary | Quick revision Notes ch-3 Kritika | EduGrown

साना साना हाथ जोड़ि पाठ का सार कक्षा 10 Sana Sana Hath Jodiye Summary Class 10 Kritika

मधु कांकरिया जी ने इस पाठ में अपनी सिक्किम की यात्रा का वर्णन किया है। एक बार वे अपनी मित्र के साथ सिक्किम की राजधानी गंगटोक घूमने गयी थीं। वहां से वे यूमधांग, लायुंग और कटाओ गयीं। उन्होंने इस पाठ में सिक्किम की संस्कृति और वहां के लोगों के जीवन का विस्तार से वर्णन किया है। पाठ में हिमालय और उसकी घाटियों का भी सुंदर वर्णन किया गया है। लेखिका वहां की बदलती प्रकृति के साथ अपने को भी बदलता हुआ महसूस करती हैं। वे कभी प्रकृति प्रेमी, कभी एक विद्वान्, संत या दार्शनिक के समान हो जाती हैं। लेखिका पर इस यात्रा का गहरा प्रभाव पड़ा। उन्होंने इस पाठ का नाम, एक नेपाली युवती की बोली हुई प्रार्थना से लिया। साना साना हाथ जोड़ी का अर्थ है – छोटे छोटे हाथ जोड़कर प्रार्थना करती हूँ। इस पाठ में प्रदूषण के बारे में बताया गया है। इसमें हमें सिक्किम के लोगों की कठिनाइयों के बारे में भी पता चलता है।           

In Detail

यह पाठ मधु कांकरिया द्वारा लिखा एक यात्रा वृत्तांत है जिसमें लेखिका ने सिक्किम की राजधानी गैंगटॉक और उसके आगे हिमालय की यात्रा का वर्णन किया है जो शहरों की भागमभाग भरी ज़िं दगी से दूर है| लेखिका गैंगटॉक को मेहनती बादशाहों का शहर बताती हैं क्योंकि वहाँ के सभी लोग बड़े ही मेहनती हैं। वहाँ तारों से भरे आसमान में लेखिका को सम्मोहन महसूस होता है जिसमें वह खो जाती हैं। वह नेपाली युवती द्वारा बताई गई प्रार्थना ‘मेरा सारा जीवन अच्छाइयों को समर्पित हो’ को गाती हैं|

अगले दिन मौसम साफ न होने के कारण लेखिका कंचनजंघा की चोटी तो नहीं देख सकी, परंतु ढेरों खिले फूल देखकर खुश हो जाती हैं। वह उसी दिन गैंगटाॅक से 149 किलोमीटर दूर यूमथांग देखने अपनी सहयात्री मणि और गाइड जितेन नार्गे के साथ रवाना होती हैं। गंगटोक से यूमथांग को निकलते ही लेखिका को एक कतार में लगी सफेद-सफेद बौद्ध पताकाएँ दिखाई देती हैं जो ध्वज की तरह फहरा रही थीं। ये शान्ति और अहिंसा की प्रतीक थीं और उन पताकाओं पर मंत्र लिखे हुए थे। लेखिका के गाइड ने उन्हें बताया कि जब किसी बौद्ध मतावलम्बी की मृत्यु होती है तो उसकी आत्मा की शांति के लिए शहर से दूर किसी भी पवित्र स्थान पर एक सौ आठ श्वेत पताकाएँ फहरा दी जाती हैं। इन्हें उतारा नहीं जाता है, ये खुद नष्ट हो जाती हैं। कई बार नए शुभ कार्य की शुरुआत में भी रंगीन पताकाएँ फहरा दी जाती हैं। जितेन ने बताया कि कवी-लोंग स्टॉक नामक स्थान पर ‘गाइड’ फ़िल्म की शूटिंग हुई थी। आगे चलकर मधु जी को एक कुटिया के भीतर घूमता हुआ चक्र दिखाई दिया जिसे धर्म चक्र या प्रेयर व्हील कहा जाता है। नार्गे ने बताया कि इसे घुमाने से सारे पाप धुल जाते हैं। जैसे-जैसे वे लोग ऊँचाई की ओर बढ़ने लगे, वैसे-वैसे बाजार, लोग और बस्तियाँ आँखों से ओझल होने लगी। घाटियों में देखने पर सबकुछ धुंधला दिखाई दे रहा था। उन्हें हिमालय पल-पल परिवर्तित होते महसूस होता है| वह विशाल लगने लगता है|

‘सेवन सिस्टर्स वॉटर फॉल’ पर जीप रुकती है। सभी लोग वहाँ की सुंदरता को कैमरे में कैद करने लग जाते हैं| झरने का पानी में लेखिका को ऐसा लग रहा था जैसे वह उनके अंदर की सारी बुराईयाँ और दुष्टता को भाकर ले जा रहा हो| रास्ते में प्राकृतिक दृश्य पलपल अपना रंग ऐसे बदल रहे थे जैसे कोई जादू की छड़ी घुमाकर सबकुछ बदल रहा था। थोड़ी देर के लिए जीप ‘थिंक ग्रीन’ लिखे शब्दों के पास रुकी। वहाँ सभी कुछ एक साथ सामने था। लगातार बहते झरने थे, नीचे पूरे वेग से बह रही तिस्ता नदी थी, सामने धुंध थी, ऊपर आसमान में बादल थे और धीरेधीरे हवा चल रही थी, जो आस-पास के वातावरण में खिले फूलों की हँसी चारों ओर बिखेर रही थी। कुछ औरतों की पीठ पर बँधी टोकरियों में बच्चे थे। इतने सुंदर वातावरण में भूख, गरीबी और मौत के निर्मम दृश्य ने लेखिका को सहमा दिया। एक कर्मचारी ने बताया कि ये पहाडिनें पहाड़ी रास्ते को चौड़ा बना रही हैं। कई बार काम करते समय किसी-न-किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है क्योंकि जब पहाड़ों को डायनामाइट से उड़ाया जाता है तो उनके टुकड़े इधर-उधर गिरते हैं। यदि उस समय सावधानी न बरती जाए, तो जानलेवा हादसा घट जाता है। लेखिका को लगता है कि सभी जगह आम जीवन की कहानी एक-सी है।


आगे चलने पर रास्ते में बहुत सारे पहाड़ी स्कूली बच्चे मिलते हैं। जितेन बताता है कि ये बच्चे तीन-साढ़े तीन किलोमीटर की पहाड़ी चढ़ाई चढ़कर स्कूल जाते हैं। ये बच्चे स्कूल से लौटकर अपनी माँ के साथ काम करते हैं। यहाँ का जीवन बहुत कठोर है। जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती जा रही थी, वैसे-वैसे खतरे भी बढ़ते जा रहे थे। रास्ता तंग होता जा रहा था। सरकार की ‘गाड़ी धीरे चलाएँ’ की चेतावनियों के बोर्ड लगे थे। शाम के समय जीप चाय बागानों में से गुजर रही थी। बागानों में कुछ युवतियाँ सिक्किमी परिधान पहने चाय की पत्तियाँ तोड़ रही थीं। चारों ओर इंद्रधनुषी रंग छटा बिखेर रहे थे। यूमथांग पहुंचने से पहले वे लोग लायुंग रुके। लायुंग में लकड़ी से बने छोटे-छोटे घर थे। लेखिका सफ़र की थकान उतारने के लिए तिस्ता नदी के किनारे फैले पत्थरों पर बैठ गई। रात होने पर जितेन के साथ अन्य साथियों ने नाच-गाना शुरू कर दिया था। लेखिका की सहयात्री मणि ने बहुत सुंदर नृत्य किया। लायुंग में अधिकतर लोगों की जीविका का साधन पहाड़ी आलू, धान की खेती और शराब था। लेखिका को वहाँ बर्फ़ देखने की इच्छा थी परंतु वहाँ बर्फ कहीं भी नहीं थी|

एक स्थानीय युवक के अनुसार प्रदूषण के कारण यहाँ स्नोफॉल कम हो गया था। ‘कटाओ’ में बर्फ़ देखने को मिल सकती है। कटाओ’ को भारत का स्विट्जरलैंड कहा जाता है। मणि जिसने स्विट्ज़रलैंड घुमा था ने कहा कि यह स्विट्जरलैंड से भी सुंदर है। कटाओ को अभी तक टूरिस्ट स्पॉट नहीं बनाया गया था, इसलिए यह अब तक अपने प्राकृतिक स्वरूप में था। लायुंग से कटाओ का सफ़र दो घंटे का था। कटाओ का रास्ता खतरनाक था। जितेन अंदाज से गाड़ी चला रहा था। चारों ओर बर्फ से भरे पहाड़ थे। कटाओ पहुँचने पर हल्की -हल्की बर्फ पड़ने लगी थी। सभी सहयात्री वहाँ के वातावरण में फोटो खिंचवा रहे थे। लेखिका वहाँ के वातावरण को अपनी साँसों में समा लेना चाहती थी। उसे लग रहा था कि यहाँ के वातावरण ने ही ऋषियोंमुनियों को वेदों की रचना करने की प्रेरणा दी होगी। ऐसे असीम सौंदर्य को यदि कोई अपराधी भी देख ले, तो वह भी आध्यात्मिक हो जाएगा। मणि के मन में भी दार्शनिकता उभरने लगी थी। वे कहती हैं कि – प्रकृति अपने ढंग से सर्दियों में हमारे लिए पानी इकट्ठा करती है और गर्मियों में ये बर्फ शिलाएँ पिघलकर जलधारा बनकर हम लोगों की प्यास को शांत करती हैं। प्रकृति का यह जल संचय अद्भुत है। इस प्रकार नदियों और हिमशिखरों का हम पर ऋण है।


थोड़ा आगे जाने पर फ़ौजी छावनियाँ दिखाई दी चूँकि यह बॉर्डर एरिया था और थोड़ी ही दूर पर चीन की सीमा थी। लेखिका फ़ौजियों को देखकर उदास हो गई। वैशाख के महीने में भी वहाँ बहुत ठंड थी। वे लोग पौष और माघ की ठंड में किस तरह रहते होंगे? वहाँ जाने का रास्ता भी बहुत खतरनाक था। कटाओं से यूमथांग की ओर जाते हुए प्रियुता और रूडोडेंड्रो ने फूलों की घाटी को भी देखा। यूमथांग कटाओ जैसा सुंदर नहीं था। जितेन ने रास्ते में बताया कि यहाँ पर बंदर का माँस भी खाया जाता है। बंदर का माँस खाने से कैंसर नहीं होता। यूमथांग वापस आकर उन लोगों को वहाँ सब फीका-फीका लग रहा था। पहले सिक्किम स्वतंत्र राज्य था। अब वह भारत का एक हिस्सा बन गया है। इससे वहाँ के लोग बहुत खुश हैं। 


मणि ने बताया कि पहाड़ी कुत्ते केवल चाँदनी रातों में भौंकते हैं। यह सुनकर लेखिका हैरान रह गई। उसे लगा कि पहाड़ी कुत्तों पर भी ज्वारभाटे की तरह पूर्णिमा की चाँदनी का प्रभाव पड़ता है। गुरुनानक के पदचिह्नों वाला एक ऐसा पत्थर दिखाया, जहाँ कभी उनकी थाली से चावल छिटककर बाहर गिर गए थे। खेदुम नाम का एक किलोमीटर का ऐसा क्षेत्र भी दिखाया, जहाँ देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। नार्गे ने पहाड़ियों के पहाड़ों, नदियों, झरनों और वादियों के प्रति पूज्य भाव की भी जानकारी दी। भारतीय आर्मी के कप्तान शेखर दत्ता के सुझाव पर गैंगटाॅक के पर्यटक स्थल बनने और नए रास्तों के साथ नए स्थानों को खोजने के प्रयासों के बारे में भी बताया|

Important Link

NCERT Solution – साना साना हाथ जोड़ि

For Free Video Lectures Click here

Tags

साना साना हाथ जोड़ि का सारांश साना साना हाथ जोड़ि summary साना-साना हाथ जोड़ी Extra Question Answer Summary of साना-साना हाथ जोड़ी Sana Sana Hath Jodi Class 10th Kritika Notes sana sana hath jodi path ka saar साना साना हाथ जोड़ि के प्रश्न उत्तर kritika sana sana hath jodi summary कक्षा 10 हिंदी कृतिका अध्याय 3 के लिए एनसीईआरटी समाधान sana sana hath jodi question answer class 10th sana sana hath jodi sana sana hath jodi question answer class 10th sana sana hath jodi summary sana sana hath jodi meaning sana sana hath jodi sana sana hath jodi writer value based questions of sana sana hath jodi कक्षा 10 कृतिका अध्याय 3 सवाल जवाब गंतोक को ‘मेहनतकश बादशाहों का शहर’ क्यों कहा गया साना साना हाथ जोड़ी पाठ साहित्य की कौन सी विधा में लिखा गया है प्राकृतिक सौंदर्य के अलौकिक आनंद में डूबी लेखिका को कौन-कौन से दृश्य झकझोर गए

Read More

जॉर्ज पंचम की नाक George Pancham ki Naak कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 2 | जॉर्ज पंचम की नाक George Pancham ki Naak Summary | Quick revision Notes ch-1 Kritika | EduGrown

जॉर्ज पंचम की नाक George Pancham ki Naak Summary class 10 Kritika

लेखक बताता है कि बहुत समय पहले की बात है एलिजाबेथ द्वितीय के भारत आने की चारों तरफ चर्चा थी। दरजी पोशाकों को लेकर परेशान था कि रानी कहाँ क्या पहनेंगी। गुप्तचरों का पहले अंदेशा था कि तहकीकात कर ली जाय । नया जमाना था सो फोटोग्राफरों की फौज तैयार थी। इंग्लैंड के अखबारों की कतरने भारतीय अखबारों में छब रही थीं। सुनने में आया कि रानी के लिए चार सौ पौंड का हल्का नीला सूट बनवाया गया है जो भारत से मंगवाया गया था। रानी एलिजाबेथ की जन्मपत्री और फिलिप के कारनामें छापे गए। लेखक व्यग्य करते हुए कहता है कि अंगरक्षकों, रसोइयों की तो क्या एलिजाबेथ के कुत्तों तक की जीवनियाँ अखबारों में छप गई।

इन दिनों इंग्लैंड की हर खबर भारत में तुरंत आ रही थी। दिल्ली में विचार हो रहा था कि जो इतना महंगा सूट पहन कर आएगी, उनका स्वागत कितना भव्य करना पड़ेगा। किसी के बिना कुछ कहे, बिना कुछ सुने राजधानी सुन्दर, स्वच्छ तथा इमारते सुंदरियों सी सज गई लेखक आगे बताता है कि दिल्ली में किसी चीज की कमी नहीं थी एक चीज को छोड़कर और वह थी लाट से गायब जॉर्ज पंचम की नाक।

लेखक कहता है कि इस नाक के लिए कई दिन आन्दोलन चले थे। कुछ कहते थे कि नाक रहने दी जाए, कुछ हटाने के पक्ष में थे। नाक रखने वाले रात दिन पहरे दे रहे थे। हटाने वाले ताक में थे। लेखक कहता है कि भारत में जगह-जगह ऐसी नाकें थीं और उन्हें हटा-हटा कर अजायबघर पहुंचा दिया गया था। कहीं-कहीं इन शाही नाकों के लिए छापामार युद्ध की स्थिति बन गई थी।
लेखक कहता है कि लाख चौकसी के बावजूद इंडिया गेट के सामने वाले खम्भे से जॉर्ज पंचम की नाक चली गई और रानी पति के राज्य में आए और राजा की नाक न पाए तो इससे बड़ी व्यथा क्या हो सकती है। सभाएँ बुलाई गई, मंत्रणा हुई कि जार्ज की नाक इज्जत का सवाल है। इस अति आवश्यक कार्य के लिए मूर्तिकार को सर्वसम्मति से यह कार्य सौंप दिया गया। मूर्तिकार ने कहा कि नाक तो बन जाएगी पर ऐसा पत्थर लाना होगा।

सभी नेताओं ने पत्थर लाने की बात पर एक दूसरे को ऐसे ताका जैसे यह कार्य अपने से दूसरे पर थोप रहे हों। फिर इस सवाल का हल क्लर्क को सौंप कर हो गया। क्लर्क ने पुरातत्व विभाग की फाइलें चैक की। कुछ हासिल न होने पर काँपते हुए समिति  से माफी मांग ली। सबके चेहरे उतर गए। अब एक और कमेटी तैयार करके यह काम उसे हर हालत में करने का आदेश दिया गया। दूसरी समिति ने फिर मूर्तिकार को बुलाया और मूर्तिकार ने कहा कि भारत में क्या चीज है जो नहीं मिलती। वह हर हाल में यह काम करेगा चाहे पूरा भारत खोजना पड़े। उसकी मेहनत का भाषण तुरंत अखबार में छप गया।मूर्तिकार ऐसे पत्थर की खोज करने गया जिससे लाट पर मूर्ति बनी थी परन्तु उसने निराशाजनक जवाब देते हुए कहा कि नाक विदेशी पत्थर की बनी है। सभापति ने क्रोधित होकर कहा कि कितने बेइज्जती की बात हैं कि भारतीय संस्कृति ने पाश्चात्य संस्कृति पूरी तरह अपना ली। फिर भी पत्थर नहीं मिला। उदास मूर्तिकार अचानक चहककर बोला कि उपाय एक है लेकिन  अखबार वालों तक न पहुँचे। सभापति खुश हुआ। चपरासी ने गुप्त वार्ता के लिए सारे दरवाजे बंद कर दिए। मूर्तिकार झिझकते हुए बोला कि अगर इजाजत हो तो अपने नेताओं की किसी मूर्ति की नाक उतार कर इस पर लगा दी जाएगी। कुछ झिझक के बाद सभापति ने खुशी से स्वीकृति देते हुए इस कार्य को बड़ी होशियारी से अंजाम देने को कहा।

लेखक कहता है कि नाक के लिए मूर्तिकार फिर यात्रा पर चल दिया। वह दिल्ली से बम्बई गया, गुजरात और बंगाल गया. यूपी., मद्रास, मैसूर, केरल आदि पूरे भारत के चप्पे-चप्पे में गया परन्तु सब प्रतिष्ठित देशभक्त नेताओं की नाक जार्ज की नाक से लम्बी थी। यह जवाब पाकर सब फिर क्रोधित हुए। मूर्तिकार ने ढांढस बँधाते हुए कहा कि सन् बयालिस में शहीद हुए बच्चों की नाक शायद ऐसी मिल जाए। परन्तु दुर्भाग्य बच्चों की नाक भी जॉर्ज की नाक से बड़ी थी। मूर्तिकार ने फिर निराश होते हुये जवाब दे दिया।


दिल्ली की तमाम तैयारियां पूरी हो गई परन्तु नेता नाक के लिए परेशान थे। मूर्तिकार पैसों का लालच नहीं छोड़ पा रहा था। उसने एक और उपाय सुझाया कि चालिस करोड़ जनता में से किसी का तो नाक नाप का मिलेगा और इसके लिए आप परेशान न हो क्योंकि नाक की जिम्मेदारी उसकी है। कानाफूसी के बाद उसे इजाजत दे दी गई।

लेखक बताता है कि दूसरे दिन अखबार में सिर्फ इतना छपा कि जॉर्ज को जिंदा नाक लगाई गई है। नाक से पहले हथियार बंद सैनिक तैनात किए गए। तालाब को साफ कर ताजा पानी भरा गया ताकि जिन्दा नाक सूखे नहीं। मूर्तिकार स्वयं अपने बताए हल से परेशान कुछ और समय माँग रहा था। उसने हिदायत अनुसार नाक लगा दी। लेकिन उस दिन अखबार में कोई खबर नहीं आई। न फीता कटा और न उद्घाटन कर कुछ स्वागत समारोह नहीं हुआ। लेखक कहता है कि एक ही तो नाक चाहिए थी फिर इतना गमगीन माहौल क्यों था इसका पता नहीं चला।

Important Link

NCERT Solution – जॉर्ज पंचम की नाक

For Free Video Lectures Click here

Tags

जॉर्ज पंचम की नाक Solutions George pancham ki naak summary george pancham ki naak george pancham ki naak Summary of जॉर्ज पंचम की नाक (George Pancham ki Naak) Class 10th Kritika Notes extra questions george pancham ki naak path ka uddeshya george pancham ki naak ending जॉर्ज पंचम की नाक पाठ के माध्यम से लेखक ने समाज पर क्या व्यंग्य किया है जॉर्ज पंचम की नाक जॉर्ज पंचम तस्वीरें जॉर्ज पंचम की नाक लगाने की परेशानी से भारतीयों की कैसी मानसिकता झलकती है ?

Read More

माता का अँचल कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 1 | माता का अँचल Summary | Quick revision Notes ch-1 Kritika | EduGrown

माता का अँचल कहानी | Kritika Hindi Class 10th | पाठ 1 | माता का अँचल  Summary | Quick revision Notes ch-1 Kritika | EduGrown

Summary of माता का अँचल  |Mata Ka Anchal |Class 10th Kritika Notes

माता का आँचल’ पाठ शिवपूजन सहाय द्वारा लिखा गया है जिसमें लेखक ने माँ के साथ एक अद्भुत लगाव को दर्शाया है| इस पाठ में ग्राम संस्कृति का चित्रण किया गया है|

कथाकार का नाम तारकेश्वर था। पिता अपने साथ ही उसे सुलाते, सुबह उठाते और नहलाते थे। वे पूजा के समय उसे अपने पास बिठाकर शंकर जी जैसा तिलक लगाते जो लेखक को ख़ुशी देती थी| पूजा के बाद पिता जी उसे कंधे पर बिठाकर गंगा में मछलियों को दाना खिलाने के लिए ले जाते थे और रामनाम लिखी पर्चियों में लिपटीं आटे की गोलियाँ गंगा में डालकर लौटते हुए उसे रास्ते में पड़ने वाले पेड़ों की डालों पर झुलाते। घर आकर बाबूजी उन्हें चौके पर बिठाकर अपने हाथों से खाना खिलाया करते थे। मना करने पर उनकी माँ बड़े प्यार से तोता, मैना, कबूतर, हँस, मोर आदि के बनावटी नाम से टुकड़े बनाकर उन्हें खिलाती थीं।

खाना खाकर बाहर जाते हुए माँ उसे झपटकर पकड़ लेती थीं और रोते रहने के बाद भी बालों में तेल डाल कंघी कर देतीं। कुरता-टोपी पहनाकर चोटी गूँथकर फूलदार लट्टू लगा देती थीं।लेखक रोते-रोते बाबूजी की गोद में बाहर आते। बाहर आते ही वे बालकों के झुंड के साथ मौज-मस्ती में डूब जाते थे। वे चबूतरे पर बैठकर तमाशे और नाटक किया करते थे। मिठाइयों की दुकान लगाया करते थे। घरौंदे के खेल में खाने वालों की पंक्ति में आखिरी में चुपके से बैठ जाने पर जब लोगों को खाने से पहले ही उठा दिया जाता, तो वे पूछते कि भोजन फिर कब मिलेगा। किसी दूल्हे के आगे चलती पालकी देखते ही जोर-जोर से चिल्लाने लगते।
एक बार रास्ते में आते हुए लड़को की टोली ने मूसन तिवारी को बुढ़वा बेईमान कहकर चिढ़ा दिया। मूसन तिवारी ने उनको खूब खदेड़ा। जब वे लोग भाग गए तो मूसन तिवारी पाठशाला पहुँच गए। अध्यापक ने लेखक की खूब पिटाई की। यह सुनकर पिताजी पाठशाला दौड़े आए। अध्यापक से विनती कर पिताजी उन्हें घर ले आए। फिर वे रोना-धोना भुलकर अपनी मित्र मंडली के साथ हो गए।

मित्र मंडली के साथ मिलकर लेखक खेतों में चिड़ियों को पकड़ने की कोशिश करने लगे। चिड़ियों के उड़ जाने पर जब एक टीले पर आगे बढ़कर चूहे के बिल में उसने आस-पास का भरा पानी डाला, तो उसमें से एक साँप निकल आया। डर के मारे लुढ़ककर गिरते-पड़ते हुए लेखक लहूलुहान स्थिति में जब घर पहुँचे तो सामने पिता बैठे थे परन्तु पिता के साथ ज्यादा वक़्त बिताने के बावजूद लेखक को अंदर जाकर माँ से लिपटने में अधिक सुरक्षा महसूस हुई। माँ ने घबराते हुए आँचल से उसकी धूल साफ़ की और हल्दी लगाई।

Important Link

NCERT Solution – माता का अँचल

For Free Video Lectures Click here

Tags

माता का आँचल माता का आँचल समरी Summary of माता का अँचल Mata Ka Anchal Class 10th Kritika Notes mata ka anchal important questions mata ka anchal class 10 hindi kritika chapter 1 mata ka aanchal summary mata ka aanchal full chapter mata ka aanchal shirshak ki sarthakta spasht kijiye class 10 hindi kritika chapter 1 question answer माता का आँचल extra question answer कृतिका कक्षा 10 माता का आँचल पाठ का सारांश माता का आँचल कहानी 

Read More

टोपी शुक्ला कहानी | Sanchyan Hindi Class 10th | पाठ 3 | टोपी शुक्ला Summary | Quick revision Notes ch-1 Sanchyan | EduGrown

टोपी शुक्ला कहानी | Sanchyan Hindi Class 10th | पाठ 3 | टोपी शुक्ला Summary | Quick revision Notes ch-1 Sanchyan | EduGrown

Full summary of topi shukla in hindi टोपी शुक्ला Sanchyan Hindi Class 10th

प्रस्तुत पाठ या उपन्यास अंश टोपी शुक्ला , लेखक राही मासूम रज़ा साहब के द्वारा लिखा गया है | लेखक राही साहब ने प्रस्तुत पाठ के माध्यम से बताया है कि बच्चों को जहाँ अपनत्व और प्यार-दुलार मिलता है, वे वहीं रहना पसंद करते हैं | इसीप्रकार टोपी को बचपन में अपने परिवार की नौकरानी और अपने दोस्त की दादी से अपनत्व और प्यार मिलता है | फलस्वरूप, वह उन्हीं लोगों के साथ रहना पसंद करता है | टोपी का एक दोस्त है — इफ़्फ़न | दोनों के घर अलग-अलग थे | दोनों के धर्म भी अलग थे | फिर भी दोनों में अच्छी दोस्ती और प्रेम का रिश्ता कायम था |  

दरअसल टोपी शुक्ला कहानी दो अलग-अलग धर्मों से जुड़े बच्चों की है। इस कहानी में एक बच्चे और एक बूढ़ी दादी के बीच प्यार को दिखाया गया है।

टोपी शुक्ला और इफ़्फ़न एक-दूसरे के बहुत पुराने और गहरे मित्र थे। दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे थे। टोपी शुक्ला हिंदू धर्म को मानता था, वहीं उसके दोस्त इफ़्फ़न और उसकी दादी मुस्लिम धर्म से थे और दोनों के दिलों में प्यार की प्यास थी। लेकिन जब भी टोपी शुक्ला अपने दोस्त इफ़्फ़न के घर जाता था तो वह दादी के पास ही बैठता। इफ़्फ़न की बूढ़ी दादी की मीठी पूरबी बोल उसके मन को बहुत भाता था। दादी पहले रोज टोपी शुक्ला की अम्मी के बारे में पूछती थी और फिर उसे रोज कुछ खाने को देती थीं। टोपी शुक्ला को बूढ़ी दादी का हर शब्द गुड़ की डली सा लगता था। इसीलिए दोनों का रिश्ता बहुत ही खास और गहरा था। इफ़्फ़न की दादी जितना उसे प्यार करती थीं उतना ही टोपी शुक्ला को भी करती थीं, ना ही उससे कम ,ना ही उससे ज्यादा। वहीं एक दिन ऐसा हुआ जब बूढ़ी दादी का मृत्यु हो गया उसके बाद टोपी शुक्ला को ऐसा लगने लगा कि उसकी जिंदगी में दादी का छत्रछाया ही नहीं रहा और उसको अपने दोस्त इफ़्फ़न का घर खाली लगने लगा।

टोपी शुक्ला कहानी | Sanchyan Hindi Class 10th | पाठ 3 | टोपी शुक्ला Summary | Quick revision Notes ch-1 Sanchyan | EduGrown

जल्दी ही इफ्फन के पिता का तबादला हो गया। उस दिन टोपी ने कसम खाई कि आगे से किसी ऐसे लड़के से मित्रता नहीं करेगा, जिसके पिता की नौकरी बदलने वाली हो। इफ्फन के जाने के बाद टोपी अकेला हो गया। उस शहर के अगले कलेक्टर हरिनाम सिंह थे। उनके तीन लड़के थे। तीनों लड़कों में से कोई उसका दोस्त न बन सका। डब्बू बहुत छोटा था। बीलू बहुत बड़ा था। गुड्डू केवल अंग्रेज़ी बोलता था। उनमें से किसी ने टोपी को अपने पास फटकने न दिया। माली और चपरासी टोपी को जानते थे इसलिए वह बँगले में घुस गया। उस समय तीनों लड़के क्रिकेट खेल रहे थे। उनके साथ टोपी का झगड़ा हो गया। डब्बू ने अलसेशियन कुत्ते को टोपी के पीछे लगा दिया। टोपी के पटे में सात सइुयाँ लगीं तो उसे होश आया। फिर उसने कभी कलेक्टर के बँगले का रुख नहीं किया।.


इसके बाद टोपी ने अपना अकेलापन घर की बूढ़ी नौकरानी सीता से दूर किया। सीता उसे बहुत प्यार करती थी। वह उसका दुख-दर्द समझती थी। घर के सभी सदस्य उसे बेकार समझते थे। घर में सभी के लिए सर्दी में गर्म कपड़े बने, परंतु टोपी को मुन्नी बाबू का उतरा कोट मिला। उसने इसे लेने से इनकार कर दिया। उसने वह कोट घर की नौकरानी केतकी को दे दिया। उसकी इस हरकत पर दादी क्रोधित हो गई। उन्होंने उसे बिना गर्म कपड़े के सर्दी बिताने का आदेश दे दिया।
टोपी नवीं कक्षा में दो बार फेल हो गया था, जिस कारण उसे घर में और अधिक डाँट पड़ने लगी थी। जिस समय वह पढ़ने बैठता था, उसी समय घर के सदस्यों को बाहर से कुछ-न-कुछ मँगवाना होता था। स्कूल में भी उसे अध्यापकों ने सहयोग नहीं दिया। अध्यापकों ने उसके नवीं में लगातार तीन साल फेल होने पर उसे नज़रअंदाज़ कर दिया था। पिछले दर्जे के छात्रों के साथ बैठना उसे अच्छा नहीं लगता था। कोई भी ऐसा नहीं था, जो उसके साथ सहानुभूति रखता; उसे परीक्षा में पास होने के लिए प्रेरित करता। घर और स्कूल में किसी ने भी उससे अपनापन नहीं दिखाया। उसने स्वयं ही मेहनत की और तीसरी श्रेणी में नवीं पास कर ली। उसके नवीं पास करने पर दादी ने कहा कि उसकी रफ्तार अच्छी है। तीसरे वर्ष में तीसरी श्रेणी में पास तो हो गए हो।

Important Link

NCERT Solution – टोपी शुक्ला

For Free Video Lectures Click here

Tags

टोपी शुक्ला टोपी शुक्ला summary Topi Shukla Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 3 टोपी शुक्ला उपन्यास टोपी शुक्ला के प्रश्न उत्तर टोपी शुक्ला के लेखक टोपी शुक्ला का सारांश टोपी शुक्ला class 10 CBSE Class 10 Hindi कक्षा 10 हिंदी जीवन मूल्यों के आधार पर इफ़्फ़न और टोपी शुक्ला के संबंधों की समीक्षा कीजिए NCERT Class 10 Hindi Hindi Lesson Topi Shukla NCERT Solutions Topi Shukla Sanchayan II textbook summary of lesson Topi Shukla Topi Shukla Explanation Class 10 Hindi Topi Shukla explanation टोपी शुक्ला topi shukla class 10th topi shukla question answers topi shukla ncert solutions sanchayan class 10 टोपी शुक्ला की कहानी Class 10 Hindi Topi Shukla explanation topi shukla path ka sandesh 

Read More

सपनों के से दिन कहानी | Sanchyan Hindi Class 10th | पाठ 2 | सपनों के से दिन Summary | Quick revision Notes ch-1 Sanchyan | EduGrown

सपनों के से दिन sapno ke se din class 10 hindi Summary

कहानी सपने के से दिन लेखक गुरदयाल सिंह के बचपन का एक स्मरण है। वो अपने स्कूल के दिनों को याद करते हैं। वह बहुत संपन्न परिवार से न थे। वह ऐसे गाँव से थे जहाँ कुछ ही लड़के पढाई में रूचि रखते थे। कई बच्चे स्कूल कभी जाते ही नहीं या बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते। द्वितीय विश्व युद्ध का जमाना था और उन दिनों चीजें महँगी हुआ करती थी। पढाई की चीजें में जितना दाम लगता उतने में एक सेर घी आ जाता था।  वे अपने परिवार के पहले लड़के थे जो स्कूल जाते थे। वे याद करते हैं की सभी विद्यार्थी स्कूल को कैद समझते और पढ़ने में कुछ ही लड़कों को रूचि होती।  उन्हें अपना खेल कूद याद आता है कि कैसे सभी बच्चे खेलते समय अक्सर ही चोटिल हो जाया करते और इस पर भी इन्हें अपने अपने घरों में मार पड़ती। स्कूल के अलियार के फूल की सुगंध वो आज भी महसूस करते हैं।

पूरे साल में सिर्फ एक दो महीने ही पढ़ाई होती और लंबी छुट्टियाँ पड़ती थी।  छुट्टियों में वे गृहकार्य न कर पूरी छुट्टियाँ खेलने में निकाल देते और शेष कुछ दिनों में जैसे तैसे पूरा करते। स्कूल न जाने का एक बड़ा कारण था मास्टर से पिटाई का भय। उन्हें अक्सर ही शिक्षकों से मार खाना पड़ता। कुछ शिक्षक ऊँची श्रेणी में भी पढ़ाते। उनके हेडमास्टर श्री मदनमोहन शर्मा नरम दिल के थे जो बच्चो को सजा देने में यकीन नहीं रखते थे पर उन्हें याद है अपने पीटी सर प्रीतमचंद जो काफी सख्त थे और स्काउट कराते। वो बच्चो की खाल उधेड़ने को सदा तैयार रहते।  लेखक और उनके साथियों को स्काउट करना बहुत पसंद था। खाकी वर्दी पहने गले में दोरंगे रूमाल लटकाए और नीली पीली झंडियाँ पकड़ कर अभ्यास करना उन्हें उत्साहित करता। ऐसा लगता था मानो एक फ़ौजी हों। मास्टर जी की एक शाबाशी उन्हें एहसास कराती जैसे फ़ौज के सारे तमगे जीत लिए हों। अंग्रेजों के अफ्सर बच्चों को फ़ौज में भर्ती होने को आकर्षित करते पर कुछ ही लड़के थे जो उनके सूट और बूट की लालच में आकर भर्ती होते। मास्टर जी का भारी बूट उन्हें भाता पर घरवाले लाने नहीं देते। इसके बाद भी लेखक और उनके सहपाठी पीटी मास्टर से नफरत करते जिसकी वजह थी उनका उन्हें बुरी तरह पीटना।

जब वे सब चौथी श्रेणी में पढ़ते थे तब पीटी मास्टर उन्हें फ़ारसी पढ़ाते थे जो एक कठिन विषय था। एक शब्दरूप याद करने को उन्हीं ने दिया था जिसे कुछ ही बच्चे याद कर पाए और तब मास्टर साहब ने सबको मुर्गा बनने को कहा। जब हेडमास्टर शर्मा जी ने यह देखा तो बहुत गुस्सा हुए और उन्हें निलंबित करने को एक आदेश पत्र लिख दिया जिसपे शिक्षा विभाग के डायरेक्टर की मंजूरी आवश्यक थी। उसके बाद पीटी मास्टर कभी स्कूल न आए। लेखक को इतना याद है कि सख्त पीटी मास्टर अपने तोतों से मीठी मीठी बातें किया करते थे जो उन्हें हैरान करती थीं।

Important Link

NCERT Solution – सपनों के से दिन

For Free Video Lectures Click here

Tags

सपनों के से दिन ncert solutions सपनों के से दिन ncert solutions सपनों के से दिन पाठ सपनों के से दिन summary सपनों के से दिन extra questions सपनों के से दिन class 10 sanchayan Class 10 सपनों के से दिन sapno ke se din sapno ke se din class 10 sanchayan sapno ke se din solutions sapno ke se din class 10 hindi sapno ke se din summary sapno ke se din hindi class 10 class 10 hindi sapno kay say din explanation sapnon ke se din cbse sanchayan class 10 sapno ke se din summary cbse class 10 hindi Sapnon ke se Din Class 10 Sapnon ke se Din Hindi Sanchayan book class 10 hindi explanation sapno Ke Se Din class 10 sapno Ke Se Din class 10 Bhai ki padhai sapno Ke Se Din class 10 explanation सपनों के से दिन Sapno Ke Se Din class 10 summary Sapnon ke se Din Class 10 ncert books सपनों के से दिन question answer

Read More

हरिहर काका कहानी | Sanchyan Hindi Class 10th | पाठ 1 | हरिहर काका Summary | Quick revision Notes ch-1 Sanchyan | EduGrown

हरिहर काका कहानी | Sanchyan Hindi Class 10th | पाठ 1 | हरिहर काका Summary | Quick revision Notes ch-1 Sanchyan | EduGrown

हरिहर काका कहानी Summary Class 10th

प्रस्तुत पाठ या कहानी हरिहर काका , लेखक मिथिलेश्वर जी के द्वारा लिखित है। इस कहानी में लेखक के द्वारा ग्रामीण परिवेश को चित्रित करते हुए एक वृद्ध व्यक्ति के सादगीयुक्त जीवन को उजागर किया गया है। इस कहानी के मुताबिक उस वृद्ध व्यक्ति के परिवारवाले स्वार्थमय जीवन के भोग-विलास में लगे हुए हैं और उसे अपने जीवन के अंतिम क्षणों में बेबस और लाचार होना पड़ा। 

लेखक का हरिहर काका से परिचय बचपन का है। हरिहर काका उसके पड़ोस में रहते थे। उन्होंने उसे अपने बच्चे की तरह प्यार और दुलार दिया था। वे उससे अपनी कोई भी बात नहीं छिपाते थे। परंतु पिछले कुछ दिनों की घटी घटनाओं के कारण हरिहर काका ने चुप्पी साध ली थी। वे शांत बैठे रहते थे। लेखक के अनुसार उनके पिछले जीवन को जानना अत्यंत आवश्यक है। लेखक का गाँव कस्बाई शहर आरा से चालीस किलोमीटर की दूरी पर है। हसन बाज़ार बस स्टैंड के पास है। गाँव की कुल आबादी ढाई-तीन हजार है। वे लेखक के गाँव के ही रहने वाले हैं।


गाँव में तीन स्थान प्रमुख हैं। एक तालाब, दूसरा पुराना बरगद का वृक्ष और तीसरा ठाकुर जी का विशाल मंदिर जिसे लोग ठाकुरबारी भी कहते हैं। यह मंदिर गाँव वालों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। ठाकुरबारी की स्थापना कब हुई, इसका किसी को विशेष ज्ञान नहीं था। इस संबंध में प्रचलित है कि जब गाँव बसा था, तो उस समय एक संत इस स्थान पर झोंपड़ी बनाकर रहने लगे थे। उस संत ने इस स्थान पर ठाकुर जी की पूजा आरंभ कर दी। लोगों ने धर्म और सेवा भावना से प्रेरित होकर चंदा इकट्ठा करके ठाकुर जी का मंदिर बनवा दिया। उनका मानना है कि यहाँ माँगी गई हर मन्नत ज़रूर पूरी होती है। ठाकुरबारी के पास काफी ज़मीन है। पहले हरिहर काका नियमित रूप से ठाकुरबारी जाते थे, परंतु परिस्थितिवश अब उन्होंने यहाँ आना बंद कर दिया।

हरिहर काका के चार भाई हैं। सभी विवाहित हैं। उनके बच्चे भी बड़े हैं। हरिहर काका ने दो शादियाँ की थीं, परंतु उन्हें बच्चे नहीं हुए थे। उनकी दोनों पत्नियाँ भी जल्दी स्वर्ग सिधार गई थीं। हरिहर काका ने तीसरी शादी बढ़ती उम्र और धार्मिक संस्कारों के कारण नहीं की थी। वे अपने भाइयों के साथ रहने लगे थे। वे अपने भाइयों के परिवार के साथ ही रहते हैं। हरिहर काका के पास कुल साठ बीघे खेत हैं। प्रत्येक भाई के हिस्से 15 बीघे खेत हैं। परिवार के लोग खेती-बाड़ी पर ही निर्भर हैं। भाइयों ने अपनी पत्नियों को हरिहर काका की अच्छी प्रकार सेवा करने के लिए कहा है। कुछ समय तक तो वे भली-भाँति उनकी सेवा करती रहीं, परंतु बाद में न कर सकीं।


एक समय ऐसा आया जब घर में कोई उन्हें पानी देने वाला भी नहीं था। बचा हुआ भोजन उनकी थाली में परोसा जाने लगा। उस दिन उनकी सहनशक्ति समाप्त हो गई, जब हरिहर काका के भतीजे का मित्र शहर से गाँव आया। उसके लिए तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए गए। काका ने सोचा कि उन्हें भी स्वादिष्ट व्यंजन खाने को मिलेंगे, परंतु ऐसा नहीं हुआ। उनको वही रूखा-सूखा भोजन परोसा गया। हरिहर काका आग बबूला हो गए। उन्होंने थाली उठाकर आँगन में फेंक दी और बहुओं को खरी-खोटी सुनाने लगे। ठाकुरबारी के पुजारी उस समय मंदिर के कार्य के लिए दालान में ही उपस्थित थे। उन्होंने मंदिर पहुंचकर इस घटना की सूचना महंत को दी।


महंत ने इसे शुभ संकेत समझा और सारे लोग हरिहर काका के घर की तरफ निकल पड़े। महंत काका को समझाकर ठाकुरबारी ले आए। उन्होंने संसार की निंदा शुरू कर दी और दुनिया को स्वार्थी कहने लगे तथा ईश्वर की महिमा का गुणगान करने लगे। महंत ने हरिहर काका को समझाया कि अपनी ज़मीन मंदिर के नाम लिख दो जिससे तुम्हें बैकुंठ की प्राप्ति होगी तथा लोग तुम्हें हमेशा याद करेंगे। हरिहर काका उनकी बातें ध्यान से सुनते रहे। वे दुविधा में पड़ गए। अब उन्हें कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। महंत ने ठाकुरबारी में ही उनके रहने तथा खाने-पीने की उचित व्यवस्था करवा दी।जैसे ही इस घटना की सूचना उनके भाइयों को लगी, वैसे ही वे उन्हें मनाने के लिए फिर ठाकुरबारी पहुँचे। पर वे उन्हें घर वापस लाने में सफल न हो सके। पर अगले ही दिन वे ठाकुरबारी पहुँचे और काका के पाँव पकड़कर रोने लगे। उनसे अपने दुर्व्यवहार के लिए माफ़ी माँगने लगे। हरिहर काका का दिल पसीज गया। वे घर वापस आ गए। अब काका की बहुत सेवा होने लगी। उन्हें जिस किसी वस्तु की इच्छा होती तो आवाज़ लगा देते और वस्तु उन्हें तुरंत मिल जाती। गाँव में काका की चर्चा होने लगी। घर के सदस्य जमीन अपने नाम लिखवाने का प्रयत्न करने लगे, परंतु हरिहर काका के समक्ष अनेक ऐसे उदाहरण थे जिन्होंने जीते-जी अपनी ज़मीन अपने रिश्तेदारों के नाम लिख दी थी और बाद में पछताते रहे। महंत भी मौका देखते ही उनके पास आ जाते और उन्हें समझाते रहते। 


कुछ समय बाद महंत जी की चिंताएँ बढ़ने लगीं। वे इस कार्य का उपाय सोचने लगे। एक दिन योजना बनाकर महंत ने अपने आदमियों को भाला, गंडासा और बंदूक से लैस करके काका का अपहरण करवा दिया। हरिहर काका के भाइयों एवं गाँव के लोगों को जब खबर लगी, तब वे ठाकुरबारी जा पहुंचे। उन्होंने मंदिर का दरवाज़ा खुलवाने का प्रयत्न किया, पर वे असफल रहे। तब उन्होंने पुलिस को बुला लिया। मंदिर के अंदर महंत एवं उसके आदमियों ने काका से ज़बरदस्ती कुछ सादे कागजों पर अंगूठे के निशान ले लिए। काका महंत के इस रूप को देखकर हैरान हो गए। पुलिस ने बहुत मुश्किल से मंदिर का दरवाजा खुलवाया, परंतु उन्हें अंदर कोई हलचल दिखाई नहीं दी। तभी एक कमरे से धक्का मारने की आवाज़ आई। पुलिस ने ताला तोड़कर देखा तो काका रस्सियों से बँधे मिले। उनके मुँह में कपड़ा ठूसा हुआ था। उन्हें बंधन से मुक्त करवाकर उनके भाई उन्हें घर ले गए।


अब उनका बहुत ध्यान रखा जाने लगा। दो-तीन लोग रात में उन्हें घेर कर सोते थे। जब वे गाँव में जाते तब भी हथियारों से लैस दो-तीन व्यक्ति उनके साथ जाते थे। उन पर फिर से दबाव डाला जाने लगा कि वे अपनी ज़मीन अपने भाइयों के नाम कर दें। जब एक दिन उनकी सहनशक्ति ने जवाब दे दिया तब उन्होंने भी भयानक रूप धारण कर लिया। उन्होंने काका को धमकाते हुए कहा कि सीधे तरीके से तुम हमारे नाम ज़मीन कर दो, नहीं तो मार कर यहीं घर में ही गाड़ देंगे और गाँव वालों को पता भी नहीं चलेगा। हरिहर काका ने जब साफ़ इनकार कर दिया तो उनके भाइयों ने उन्हें मारना शुरू कर दिया। हरिहर काका अपनी रक्षा के लिए चिल्लाने लगे। भाइयों ने उनके मुँह में कपड़ा ठूस दिया।
उनके चिल्लाने की आवाज़ सुनकर गाँव वाले इकट्ठा होने लगे। महंत तक भी खबर पहुँच गई। वह पुलिस लेकर वहाँ आ पहुँचा। पुलिस ने काका को बंधनमुक्त करवाकर उनका बयान लिया। काका ने बताया कि मेरे भाइयों ने ज़बरदस्ती इन कागज़ों पर मेरे अँगूठे के निशान लिए हैं। उनकी दशा देखकर मालूम हो रहा था कि उनकी पिटाई हुई है।


अब हरिहर काका ने पुलिस से सुरक्षा की माँग की। अब वे घर से अलग रह रहे हैं। उन्होंने अपनी सेवा के लिए एक नौकर रख लिया। दो-चार पुलिसकर्मी उन्हें सुरक्षा दे रहे हैं और उनके पैसे पर मौज कर रहे हैं। एक नेताजी ने उनके समक्ष प्रस्ताव रखा कि वे ज़मीन पर ‘उच्च विद्यालय’ खोल दें, पर काका ने इनकार कर दिया।
 गाँव में अफ़वाहों का बाजार गर्म हो रहा है। लोग सोचते हैं कि काका की मृत्यु के बाद महंत साधुओं एवं संतों को बुलाकर ज़मीन पर कब्जा कर लेगा। अब काका गूंगेपन का शिकार हो गए हैं। वे रिक्त आँखों से आकाश की ओर ताकते रहते हैं।

Important Link

NCERT Solution – हरिहर काका

For Free Video Lectures Click here

Read More

For Anne Gregory Quick revision Notes | Class 10th Poem | English | For Anne Gregory Summary in English & Hindi Language

For Anne Gregory Quick revision Notes | Class 10th Poem FootPrints Without Feet | English | For Anne Gregory Summary in English & Hindi Language

For Anne Gregory Summary in English

William Butler Yeats wrote many love poems. For Anne Gregory’ is one of the best and beautiful poems by him. This poem is in the form of a conversation between a speaker, who may be the poet himself, or Anne’s lover or friend and maybe Anne Gregory herself. The other speakers may be in the belief that the young man loves Anne for her external beauty.  But here the speaker (maybe Anne Gregory) says that external beauty is not the real, and therefore young man should love her for herself only.

In this poem, the poet is presenting the description of a lover’s love for a woman. The lover may like the yellow colour of the woman’s hair. But he does not like her ramparts, means here the hair around the ear. So, the lady does not approve of his love. She wishes such a lover who loves her based on her internal qualities and not by the external and physical look. She says that her yellow hair is a temporary entity. Therefore, she may dye them into another colour like brown or black or carrot soon. And hence in this way, she may get her true love due to her internal beauty.

Then the poet says that only God loves we all humans on the bases of our soul and internal qualities and but our body and physical features. Undoubtedly, only selfless love is true, and God only gives true love.

Poet is of the view that most people love others only because they attract them by physical qualities. Thus, the complexion of the skin and the colour of the hair may be more important for us than the ‘real’ worth of the person. It means we rarely love people ‘for themselves alone’.

Even the beautiful Anne Gregory does not want to be liked or loved for her external beauty or her rare qualities of her beautiful yellow hair. Shallow minded people only adore physical beauty. But rather we should look for spiritual beauty before falling in love with a lady. Physical beauty is just an illusion and momentary. Unfortunately, most of the people are merely attracted by the colour of the skin and hair.

For Anne Gregory Summary in Hindi class 10

For Anne Gregory Summary in Hindi

विलियम बटलर यीट्स ने कई प्रेम कविताएँ लिखीं। ऐनी ग्रेगरी के लिए ‘उनके द्वारा सर्वश्रेष्ठ और सुंदर कविताओं में से एक है। यह कविता एक वक्ता के बीच बातचीत के रूप में है, जो स्वयं कवि हो सकता है, या ऐनी का प्रेमी या दोस्त और शायद ऐनी ग्रेग स्वयं भी। अन्य वक्ता इस विश्वास में हो सकते हैं कि युवक ऐनी को उसकी बाहरी सुंदरता से प्यार करता है। & nbsp; लेकिन यहाँ वक्ता (शायद ऐनी ग्रेगरी) का कहना है कि बाहरी सुंदरता वास्तविक नहीं है, और इसलिए युवा को केवल उसके लिए खुद से प्यार करना चाहिए।

इस कविता में, कवि एक महिला के लिए प्रेमी के प्रेम का वर्णन प्रस्तुत कर रहा है। प्रेमी को महिला के बालों का पीला रंग पसंद आ सकता है। लेकिन वह उसके प्राचीर को पसंद नहीं करता है, यहां कान के चारों ओर बाल हैं। इसलिए, महिला अपने प्यार को स्वीकार नहीं करती है। वह ऐसे प्रेमी की कामना करती है जो उसे उसके आंतरिक गुणों के आधार पर प्यार करे न कि बाहरी और शारीरिक रूप से। वह कहती है कि उसके पीले बाल एक अस्थायी संस्था है। इसलिए, वह जल्द ही उन्हें भूरे या काले या गाजर जैसे दूसरे रंग में रंग सकती है। और इस तरह, वह अपने आंतरिक सौंदर्य के कारण अपना सच्चा प्यार पा सकती है।

तब कवि कहता है कि केवल भगवान ही हम सभी मनुष्यों से अपनी आत्मा और आंतरिक गुणों के आधार पर प्यार करते हैं लेकिन हमारे शरीर और भौतिक सुविधाओं से। निस्संदेह, केवल निःस्वार्थ प्रेम ही सच्चा है, और परमेश्वर केवल सच्चा प्रेम देता है।

कवि का विचार है कि अधिकांश लोग दूसरों से केवल इसलिए प्यार करते हैं क्योंकि वे उन्हें भौतिक गुणों से आकर्षित करते हैं। इस प्रकार, व्यक्ति की color वास्तविक ’कीमत की तुलना में त्वचा का रंग और बालों का रंग हमारे लिए अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। इसका मतलब है कि हम शायद ही कभी लोगों को ‘अपने लिए’ पसंद करते हैं।

यहां तक ​​कि सुंदर ऐनी ग्रेगरी अपनी बाहरी सुंदरता या उसके सुंदर पीले बालों के दुर्लभ गुणों के लिए पसंद या प्यार नहीं करना चाहती। उथले दिमाग वाले लोग केवल शारीरिक सुंदरता को मानते हैं। लेकिन इसके बजाय हमें एक महिला के प्यार में पड़ने से पहले आध्यात्मिक सुंदरता की तलाश करनी चाहिए। शारीरिक सुंदरता सिर्फ एक भ्रम और क्षणिक है। दुर्भाग्य से, अधिकांश लोग केवल त्वचा और बालों के रंग से आकर्षित होते हैं।

Important Link

NCERT Solution – For Anne Gregory

For Free Video Lectures Click here

Read More

The Tale of Custard the Dragon Quick revision Notes | Class 10th Poem | English | The Tale of Custard the DragonSummary in English & Hindi Language

The Tale of Custard the Dragon Quick revision Notes | Class 10th Poem FootPrints Without Feet | English | The Tale of Custard the DragonSummary in English & Hindi Language

About the Poet

Frederic Ogden Nash (1902-1971) was an American poet was an American poet famous for his light verse. He was known as the producer of humorous poetry. He received Sarah Josepha Hale Award in 1964.

The Tale of Custard the Dragon Summary in English

It is a narrative poem which describes a little girl Belinda and her pets. Her pets are a black kitten called Ink, a grey mouse named Blink, a yellow dog named Mustard and a coward dragon called Custard. The dragon has dragger like sharp nails, sharp teeth and spikes on his scales. All her pets consider themselves to be brave. They all use to sit on a red wagon and make fun of the dragon who is assumed to be a coward. A pirate enters the house all of a sudden having pistols in both hands. He is holding sword in his teeth. Belinda gets extremely frightened and cries for help.

But all the pets flee away and hide themselves. But Custard comes forward full of bravery. He fights with the pirate and swallows him. This shows that Custard is not a coward. All other pets are cowards. But, other pets start saying that they are brave and two or three times braver than the dragon. However., the reality is now clear. Indeed, the dragon is only brave while all others are simply cowards.

The Tale of Custard the Dragon Summary in Hindi class 10

The Tale of Custard the Dragon Summary in Hindi

फ्रेडरिक ओग्डेन नैश एक अमेरिकी कवि हैं, जो अपनी हल्की कविता के लिए प्रसिद्ध हैं। वे हास्य कविता के निर्माता के रूप में प्रसिद्ध थे। उन्होंने यह कविता po द टेल ऑफ कस्टर्ड द ड्रैगन ’एक गाथागीत की शैली में लिखी है जिसका अर्थ है एक कहानी। गाथागीत साहस या वीरता के किस्से सुनाते हैं। इस तरह का एक हास्य गीत एक पैरोडी के साथ समाप्त हो रहा है।

बेलिंडा एक छोटे से सफेद घर में रहती थी, जिसमें उसके चार पालतू जानवर एक काले बिल्ली का बच्चा, एक ग्रे माउस, एक पीला कुत्ता और एक छोटा अजगर और एक लाल वैगन भी था। छोटे काले बिल्ली के बच्चे का नाम इंक था, छोटा ग्रे माउस ब्लिंक था, और छोटा पीला कुत्ता सरसों था। बू, अजगर एक कायर था, और बेलिंडा ने उसे कस्टर्ड कहा। कस्टर्ड ड्रैगन के बड़े तेज दांत थे, और उसके ऊपर स्पाइक्स और नीचे तराजू थे। उसका मुंह चिमनी के समान था, और नाक चिमनी के रूप में थी। इसके अलावा, वह अपने पैर की उंगलियों पर खंजर था।

बेलिंडा खुद को भालू से भरे बैरल के रूप में बहादुर मानती थीं। इंक और ब्लिंक सीढ़ियों से शेरों का पीछा करने में सक्षम थे। सरसों एक गुस्सैल बाघ की तरह बहादुर था। दूसरी ओर, कस्टर्ड ने हमेशा सबसे कमजोर के रूप में काम किया। बेलिंडा ने हमेशा कस्टर्ड को बेरहमी से गुदगुदाया। अन्य पालतू जानवरों ने व्यंग्यात्मक रूप से उन्हें पेरिवल कहा है जिसका अर्थ है राजा आर्थर का दरबार जो पवित्र कंघी बनानेवाले की रेती की मांग करता है।

जब भी कस्टर्ड उनके लिए एक सुरक्षित पिंजरा चाहता था, बेलिंडा और ब्लिंक ने उनके दिल की सामग्री को गिग्ड किया। इतना ही नहीं, इंक और मस्टर्ड ने उससे पूछा कि वह कितनी छोटी थी कि वह हर छोटी-बड़ी चीज से डरती थी।

एक बार, वे दोनों हाथों में बंदूकों और अपने दांतों के बीच एक चाकू के साथ एक समुद्री डाकू का सामना किया। देखते ही देखते समुद्री डाकू बेलिंडा मदद के लिए चिल्लाने लगी। फिर सभी जानवर छिप गए। केवल कस्टर्ड ने समुद्री डाकू के साथ लड़ाई की और उसे अपने एकल काटने में खा लिया। जैसे ही कस्टर्ड ने सभी को बचाया, सभी ने उन्हें धन्यवाद दिया। लेकिन अंत में, उन्होंने महसूस किया कि वे डरपोक थे, क्योंकि वे डरपोक थे। इसलिए, उन सभी ने अचानक यह कहना शुरू कर दिया कि वे उससे अधिक बहादुर हैं और इसलिए स्थिति को बहुत बेहतर तरीके से संभाल सकते थे।

Important Link

NCERT Solution – The Tale of Custard the Dragon

For Free Video Lectures Click here

Read More