NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 8- कन्यादान हिंदी|Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 8- कन्यादान

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पृष्ठ संख्या: 51
प्रश्न अभ्यास

1. आपके विचार से माँ ने ऐसा क्यों कहा कि लड़की होना पर लड़की जैसी मत दिखाई देना?

उत्तर

माँ ने ऐसा इसीलिए कहा है क्योंकि वह लड़कियों पर हो रहे शोषण से उसे बचाना चाहती है| कोमलता और शालीनता लड़कियों के गुण होते हैं जिसे माँ बनाकर रखने को कहती है परन्तु साथ ही यह भी कहती है की इतना कमजोर मत बनाना की लोगों का अत्याचार सहन करो चूँकि कमज़ोर लड़कियों का शोषण किया जाता है।

2. ‘आग रोटियाँ सेंकने के लिए है।
     जलने के लिए नहीं’

(क) इन पंक्तियों में समाज में स्त्री की किस स्थिति की ओर संकेत किया गया है?

उत्तर

इन पंक्तियों में समाज द्वारा नारियों पर किए गए अत्याचारों की ओर संकेत किया गया है। वह ससुराल में घर-गृहस्थी का काम संभालती है। सबके लिए रोटियाँ पकाती है फिर भी उसे अत्याचार सहना पड़ता है। उसी अग्नि में उसे जला दिया जाता है। नारी का जीवन कष्टों से भरा होता है।


(ख) माँ ने बेटी को सचेत करना क्यों ज़रूरी समझा?

उत्तर
बेटी अभी सयानी नहीं थी, उसकी उम्र भी कम थी और वह समाज में व्याप्त बुराईयों से अंजान थी। माँ यह नहीं चाहती थी कि उसके साथ जो अन्याय हुए हैं वो सब उसकी बेटी को भी सहना पड़े। इसलिए माँ ने बेटी को सचेत करना ज़रुरी समझा।

3. ‘पाठिका थी वह धुँधले प्रकाश की
कुछ तुकों और कुछ लयबद्ध पंक्तियों की’
इन पंक्तियों को पढ़कर लड़की की जो छवि आपके सामने उभरकर आ रही है उसे शब्दबद्ध कीजिए।
उत्तर

लड़की बहुत भोली-भाली है| माता-पिता के साथ रहकर उसने कभी दुःखों का सामना नहीं किया है| समाज में हो थे घटनाओ से वह अनजान है| उसे लगता है कि उसका आने वाला जीवन भी सुखद सपना ही होगा| आने वाले बाधाओं का उसे ज्ञान नहीं है|


4. माँ को अपनी बेटी ‘अंतिम पूँजी’ क्यों लग रही थी?

उत्तर

माँ अपने बेटी के सबसे निकट होती है| वह अपने सारे सुख-दुःख अपनी बेटी के साथ बाँटती है| वह उसे एक पूँजी की तरह पालती है और संस्कार देती है| माँ का लगाव बेटी साथ बहुत बढ़ जाता है इसलिए उसे विदा करते समय उसे ऐसा लगता है मानो उसका सब कुछ जा रहा हो| उसे अपनी बेटी इतनी ‘अंतिम पूँजी’ के समान लगती है|

5. माँ ने बेटी को क्या-क्या सीख दी?

उत्तर

माँ ने अपनी बेटी को विदा करते समय निम्नलिखित सीख दी –
• माँ ने बेटी को अपनी सुंदरता पर गर्व न करने की और प्रशंसा पर ना रीझने की सीख दी।
• खुद को भोली और कमज़ोर मत दिखाना नहीं तो लोग नाजायज़ फायदा उठाएँगें|
• वस्त्र और आभूषणों के आकर्षण से दूर रहना|
• अत्याचारों के विरुद्ध आवाज़ उठाना और उनसे दुखी होकर आत्महत्या मत करना|

6. आपकी दृष्टि में कन्या के साथ दान की बात करना कहाँ तक उचित है?

उत्तर

कन्या के लिए दान शब्द का प्रयोग अनुचित और अपमानजनक है| दान वस्तुओं का होता है व्यक्तियों का नहीं| बेटी के साथ माँ-पिता का अनन्य संबंध होता है| कन्या की अपनी स्वतंत्रता है| शादी के बाद भी उसका जुड़ाव अपने मायके से बना रहता है|

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Short Summary- पाठ 8- कन्यादान

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 7- छाया मत छूना हिंदी | Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 7- छाया मत छूना

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पृष्ठ संख्या: 47
प्रश्न अभ्यास


1. कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात क्यों कही है?

उत्तर

कवि ने कठिन यथार्थ के पूजन की बात इसलिए कही है क्योंकि यही सत्य है। भूली-बिसरी यादें या भविष्य के सपने मनुष्य को दुखी ही करते हैं, किसी मंजिल तक नहीं ले जाते। मनुष्य को आखिर में वास्तविक सच का सामना करना ही पड़ता है इसलिए उसे पूजन यानी ग्रहण करना चाहिए|


2. भाव स्पष्ट कीजिए -प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है, हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
उत्तर

बड़प्पन का अहसास यानी महान होने का सुख एक झूठा आभास है| जिस तरह हिरण रेगिस्तान में पानी की आस में सूर्य की किरणों की चमक को जल मान उसके पीछे भटकते रहता है, बड़प्पन का अहसास भी ऐसा ही है| जिस तरह हर चाँदनी रात के बाद आमवस्या की काली रात आती है उसी तरह जीवन में सुख-दुःख भी आते जाते रहते हैं| इस सत्य को हमें स्वीकार करना चाहिए|

3. ‘छाया’ शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?
उत्तर
छाया शब्द स्मृतियों के स्मरण के संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है| हमारे जीवन में सुख और दुःख आते जाते रहते हैं| वर्तमान के दुखी समय में पुराने समय के सुखद क्षणों को ज्यादा करने से मन और भी दुखी हो जाता है| इसलिए हमें उन स्मृतियों को भुलाकर वर्तमान के सच्चाई को स्वीकार करना चाहिए|

4. कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे कठिन यथार्थ। कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्टता पैदा हुई?

उत्तर

1. दुख दूना – यहाँ दुख दूना में दूना (विशेषण) शब्द के द्वारा दुख की अधिकता व्यक्त की गई है।
2. जीवित क्षण – यहाँ जीवित (विशेषण) शब्द के द्वारा क्षण को चलयमान अर्थात् उसके जीवंत होने को दिखाया गया है।
3. सुरंग-सुधियाँ – यहाँ सुरंग (विशेषण) शब्द के द्वारा सुधि (यादों) का रंग-बिरंगा होना दर्शाया गया है।
4. एक रात कृष्णा – यहाँ एक कृष्णा (विशेषण) शब्द द्वारा रात की कालिमा अर्थात् अंधकार को दर्शाया गया है।5. शरद रात – यहाँ शरद (विशेषण) शब्द रात की रंगीनी और मोहकता को उजागर कर रहा है।
5. रस बसंत – यहाँ रस (विशेषण) शब्द बसंत को और अधिक रसीला, मनमोहक और मधुर बना रहा है।


5. ‘मृगतृष्णा’ किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?

उत्तर

गर्मी की चिलचिलाती धूप में रेगिस्तान में दूर सूर्य की किरणों द्वारा उत्पन्न चमक से पानी होने का अहसास परन्तु वहाँ पर कुछ नहीं होता| इस भ्रम की स्थिति को ‘मृगतृष्णा’ कहा जाता है। इसका प्रयोग कविता में बड़प्पन के एहसास के अर्थ में हुआ है।

6. ‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले’ यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?

उत्तर

क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?
जो न मिला भूल उसे कर तू भविष्य वरण, इन पंक्तियों में ‘बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले’ का भाव झलकता है।

7. कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

‘छाया मत छूना’ कविता में कवि ने मानव की कामनाओं-लालसाओं के पीछे भागने की प्रवृत्ति को दुखदायी माना है क्योंकिं इसमें अतृप्ति के सिवाय कुछ नहीं मिलता। हम विगत स्मृतियों के सहारे नहीं जी सकते, हमें वर्तमान में जीना है। उन्हें छूकर याद करने से मन में दुख बढ़ जाता है। दुविधाग्रस्त मन:स्थिति व समयानुकूल आचरण न करने से भी जीवन में दुख आ सकता है। व्यक्ति प्रभुता या बड़प्पन में उलझकर स्वयं को दुखी करता है।

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Short Summary- पाठ 7- छाया मत छूना

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 6- यह दंतुरित मुस्कान और फसल हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 6- यह दंतुरित मुस्कान और फसल

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पृष्ठ संख्या: 41
प्रश्न अभ्यास 


1. बच्चे की दंतुरित मुसकान का कवि के मन पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर

बच्चे की दंतुरित मुसकान को देखकर कवि का मन प्रसन्नता से भर उठता है। उन्हें बच्चे की मुस्कान की मनमोहकता देखकर ऐसा लगता है कि यह मृत व्यक्ति में भी जान डाल देगी|

2. बच्चे की मुसकान और एक बड़े व्यक्ति की मुसकान में क्या अंतर है ?

उत्तर

बच्चे तथा बड़े व्यक्ति की मुसकान में निम्नलिखित अंतर होते हैं -• बच्चे की मुसकान सरल और स्वाभाविक होती है वहीं बड़ों की मुसकान में बनावटीपन होता है|
• बच्चे की मुसकान भोली और स्वार्थरहित होती है वहीं बड़ों की मुसकान कुटिल और स्वार्थी होती है|
• बच्चे की मुसकान निष्काम और निश्छल होती है वहीं बड़ों की मुसकान उसकी परिस्थितियाँ के अनुसार तय होती है|

3. कवि ने बच्चे की मुसकान के सौंदर्य को किन-किन बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है ?

उत्तर

कवि नागर्जुन ने बच्चे की मुसकान के सौन्दर्य को निम्नलिखित बिम्बों के माध्यम से व्यक्त किया है-
• मृतक में भी जान डाल देना ।
• कमल का तालाब छोड़कर झोपड़ी में खिलना ।
• बाँस या बबूल से शेफ़ालिका के फूलों का झड़ना ।
• स्पर्श पाकर पत्थर का पिघलना|
• तिरछी नज़रों से देख कर मुसकाना।

4. भाव स्पष्ट कीजिए –

(क) छोड़कर तालाब मेरी झोपड़ी में खिल रहे जलजात।

उत्तर

धूल से सना शिशु का शरीर और उसकी निश्छल मुसकान कवि को इतना प्रभावित करती है कि उसे लगता है जैसे कोई कमल का फूल तालाब में न खिलकर उनकी झोपडी के अंदर खिल गया हो।

(ख) छू गया तुमसे कि झरने लग पड़े शेफालिका के फूल बाँस था कि बबूल ?

उत्तर

इस पंक्ति का भाव है कि शिशु के स्पर्श मात्र से बबूल और बाँस के पेड़ से शेफालिका के फूल झरने लगते हैं यानी शिशु के स्पर्श में ऐसा जादू है कि कठोर प्रवृत्ति वाले व्यक्तियों का हृदय भी पिघल जाए और आनंद का संचार हो जाए|

रचना और अभिव्यक्ति

5. मुसकान और क्रोध भिन्न-भिन्न भाव हैं। इनकी उपस्थिति से बने वातावरण की भिन्नता का चित्रण कीजिए।

उत्तर

मुसकान अपने मन की प्रसन्नता को प्रकट करने का माध्यम है| व्यक्ति जब ख़ुशी से मुस्कुराता है तो वातावरण में उल्लास भर जाता है और सामने वाले को भी ख़ुशी अनुभव होती है| इससे अपनत्व की भावना जगती है|

क्रोध मन की अप्रसन्नता और विरोध को प्रकट करने का माध्यम है| इससे वातावरण तनावयुक्त हो जाता है| क्रोधी व्यक्ति की अप्रसन्नता से दूसरे भी अशांत हो जाते हैं| इससे हमारे साथ-साथ दूसरों का भी नुकसान होता है|

6. दंतुरित मुसकान से बच्चे की उम्र का अनुमान लगाइए और तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर
बच्चे की उम्र 8 या 9 महीने की रही होगी चूँकि इसी उम्र में बच्चे के दाँत निकलने शुरू होते हैं|

7. बच्चे से कवि की मुलाकात का जो शब्द-चित्र उपस्थित हुआ है उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर

कवि और वह बच्चा दोनों एक-दूसरे पहली बार मिले हैं इसीलिए बच्चा उन्हें एकटक देखता रहता है। बच्चे की मुसकान कवि के हृदय को प्रसन्नता से भर देती है| उन्हें ऐसा लगता है जैसे कमल के फूल तालाब को छोड़कर उसके झोंपड़ें में खिल उठे हैं। उन्हें लगता है कि बच्चा कहीं उन्हें देखते-देखते थक ना जाए इसीलिए वह आँख फेर लेते हैं|

फसल


1. कवि के अनुसार फसल क्या है?
उत्तर
कवि के अनुसार फसल ढेर सारी  नदियों के पानी का जादू, लाखों लोगों के हाथों के स्पर्श की गरिमा तथा भिन्न प्रकार की मिट्टी के गुण, सूर्य की किरणों और वायु की मंद गति का परिणाम है। यानी फसल मनुष्य और प्रकृति दोनों के मिलकर कार्य करने से उपजता है|

2. कविता में फसल उपजाने के लिए आवश्यक तत्वों की बात कही गई है। वे आवश्यक तत्व कौन-कौन से हैं?

उत्तर

कविता में फसल उपजाने के लिए निम्नलिखित आवश्यक तत्वों की बात कही गई है –
• मनुष्य की परिश्रम
• पानी
• मिट्टी
• धूप
• हवा


3. फसल को ‘हाथों के स्पर्श की गरिमा’ और ‘महिमा’ कहकर कवि क्या व्यक्त करना चाहता है?
उत्तर 
कवि ने यहाँ फसल के उपजने को मानव के श्रम से जोड़ा है चूँकि किसानों और मजदूरों द्वारा की गई मेहनत और उनके लग्न के कारण ही फसल का उपजना संभव हो पाता है| इसके बिना प्रकृति के तत्व की सार्थकता फसल उपजाने में व्यर्थ हैं|


4.भाव स्पष्ट कीजिए –
रूपांतर है सूरज की किरणों का
सिमटा हुआ संकोच है हवा की थिरकन का!

उत्तर

इन पंक्तियों में फसल उपजाने में सूरज की किरणों तथा हवा के योगदान को दर्शाया गया है। फसल प्रकृति से अपना भोजन प्राप्त करती है| सूरज की किरणें अपनी ऊष्मा प्रदान कर फसल को पकने में मदद करती हैं तो वहीं हवा की मंद गति फसल के बढ़ने में सहायक हैं|


रचना और अभिव्यक्ति

5. कवि ने फसल को हज़ार-हज़ार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म कहा है –

(क) मिट्टी के गुण-धर्म को आप किस तरह परिभाषित करेंगे?
(ख) वर्तमान जीवन शैली मिट्टी के गुण-धर्म को किस-किस तरह प्रभावित करती है?(ग) मिट्टी द्वारा अपना गुण-धर्म छोड़ने की स्थिति में क्या किसी भी प्रकार के जीवन की कल्पना की जा सकती है?
(घ) मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित करने में हमारी क्या भूमिका हो सकती है?
उत्तर

(क) मिट्टी के गुण-धर्म का मतलब है उसमें मौजूद प्राकृतिक और पोषक तत्व, खनिज पदार्थ जो मिट्टी का रंग और स्वरूप निश्चित करती है। मिट्टी की अधिक उपजाऊ क्षमता से फसल का उत्पाद भी अधिक होता है|

(ख) वर्तमान जीवन-शैली मिट्टी को प्रदूषित कर रही है। उपयोग में लाए जा रहे हैं अनेक प्रकार के रासायनिक तत्व, उर्वरक, कीटनाशक, प्लास्टिक निर्मित वस्तुएँ मिट्टी के मूल स्वरूप को नष्ट कर रही हैं जिसका नकरात्मक प्रभाव फसल पर भी पड़ रहा है|

(ग) अगर मिट्टी ने अपना गुण-धर्म छोड़ दिया तो धरती से हरियाली का, पेड़-पौधे और फ़सल आदि का नामोनिशान मिट जाएगा। इनके अभाव में धरती पर जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती ।

(घ) हम मिट्टी को वृक्षारोपण कर, प्लास्टिक की वस्तुओं का उपयोग बंद कर, कारखानों को सीमित कर, रासायनिक तत्वों का उपयोग काम कर हम मिट्टी के गुण-धर्म को पोषित कर सकते हैं।

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Short Summary- पाठ 6- यह दंतुरित मुस्कान और फसल

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 5- उत्साह और अट नहीं रही हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 5- उत्साह और अट नहीं रही

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उत्साह 
पृष्ठ संख्या: 35

प्रश्न अभ्यास

1. कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के स्थान पर ‘गरजने’ के लिए कहता है, क्यों?

उत्तर

निराला क्रांतिकारी कवि थे| वे समाज में बदलाव लाना चाहते थे इसलिए जनता में चेतना जागृत करने के लिए और जोश जगाने के लिए कवि बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के लिए न कह ‘गरजने’ के लिए कहा है| गरजना शब्द क्रान्ति, बदलाव, विरोध दर्शाता है|

2. कविता का शीर्षक उत्साह क्यों रखा गया है?

उत्तर

कवि ने गीत में बादलों के माध्यम से लोगों में उत्साह का सृजन करने को कहा है| वह लोगों को क्रान्ति लाने के लिए उत्साहित करना चाहते हैं इसलिए कविता का शीर्षक उत्साह रखा गया है|

3. कविता में बादल किन-किन अर्थों की ओर संकेत करता है ?

उत्तर

कविता में बादल निम्नलिखित अर्थों की ओर संकेत करता है –
• पानी बरसा कर सबकी प्यास बुझाता है और सुखी बनाता है|
• गर्जन कर क्रांतिकारी चेतना जागृत करता है|
• नवनिर्माण कर नवजीवन प्रदान करता है| 


4. शब्दों का ऐसा प्रयोग जिससे कविता के किसी खास भाव या दृश्य में ध्वन्यात्मक प्रभाव पैदा हो, नाद-सौंदर्य कहलाता है। उत्साह कविता में ऐसे कौन-से शब्द हैं जिनमें नाद-सौंदर्य मौजूद है, छाँटकर लिखें।
उत्तर
कविता की इन पंक्तियों में नाद-सौंदर्य मौजूद है – 

1. “घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!

2. ललित ललित, काले घुँघराले, बाल कल्पना के-से पाले
3. “विद्युत-छबि उर में”
4. विकल-विकल, उन्मन थे उन्मन


अट नहीं रही


1. छायावाद की एक खास विशेषता है अन्तर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाना। कविता की किन पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है?लिखिए।

उत्तर 
कविता के निम्नलिखित पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है कि प्रस्तुत कविता में अन्तर्मन के भावों का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाया गया है :
आभा फागुन की तन
सट नहीं रही है|
उड़ने को नभ में तुम
पर-पर कर देते हो,
आँख हटाता हूँ तो
हट नहीं रही है| 

2. कवि की आँख फागुन की सुंदरता से क्यों नहीं हट रही है?
उत्तर 
कवि की आँख फागुन की सुंदरता से इसलिए हट नहीं रही है क्योंकि इस महीने में प्रकृति का सौंदर्य अत्यंत मनमोहक होता है| पेड़ों पर हरी और लाल पत्तियाँ लटक रहे हैं| चारों ओर फैली हरियाली और खिले रंग-बिरंगे फूल अपनी सुगंध से मुग्ध कर देते हैं| प्रकृति का नया रंग और सुगंध जीवन में नयी ऊर्जा का संचार करती है|

3. प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन किन रूपों में किया है ?

उत्तर

प्रस्तुत कविता में कवि ने प्रकृति की व्यापकता का वर्णन निम्नलिखित रूपों में किया है –
• पेड़-पौधे नए पत्ते पाकर खिलखिला रहे हैं|
• फूलों की खुशबू वातावरण को सुगन्धित कर रही है|
• डालियाँ कहीं हरी तो कहीं लाल पत्तियों से भर जाती हैं|
• बाग़-बगीचों में चारों ओर हरियाली छा गयी है|
• कवि को प्रकृति के सौंदर्य से आँख हटाना मुश्किल लग रहा है| 


4. फागुन में ऐसा क्या होता है जो बाकी ऋतुओं से भिन्न होता है ?
उत्तर
फागुन में प्रकृति की शोभा अपने चरम पर होती है| पेड़-पौधें नए पत्तों, फल और फूलों से लद जाते हैं, हवा सुगन्धित हो उठती है। आकाश साफ-स्वच्छ होता है। पक्षियों के समूह आकाश में विहार करते दिखाई देते हैं। बाग-बगीचों और पक्षियों में उल्लास भर जाता हैं। इस तरह फागुन का सौंदर्य बाकी ऋतुओं से भिन्न है।


5. इन कविताओं के आधार पर निराला के काव्य-शिल्प की विशेषताएँ बताएँ।

उत्तर

महाकवि सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला’ जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते हैं। उनके काव्य-शिल्प की विशेषताएँ हैं- 
• दोनों कविताओं में प्रकृति चित्रण द्वारा मन के भावों को प्रकट किया गया है|
• मानवीकरण अलंकार का प्रयोग हुआ है| पहली कविता में कवि बादल को गरज-गरज कर बरसने को कह रहे हैं तो दूसरी कविता में कवि फागुन से बात करते हैं|
‘कहीं साँस लेते हो, घर-घर भर देते हो|’
• कविताओं में तत्सम शब्दों का प्रयोग उचित मात्रा में किया गया है|
• गीत-शैली का प्रयोग हुआ है| लयबद्धता साफ़ दिखती है|
• अनुप्रास, रूपक, यमक, उपमा आदि अलंकारों का प्रयोग अच्छे तरीके से किया गया है|

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 4- आत्मकथ्य हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 4- आत्मकथ्य

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पृष्ठ संख्या: 29
प्रश्न अभ्यास 


1. कवि आत्मकथा लिखने से क्यों बचना चाहते हैं ?

उत्तर

कवि आत्मकथा लिखने से इसलिए बचना चाहते हैं क्योंकि उनका जीवन दुखदायी घटनाओं से भरा पड़ा है। अपनी सरलता के कारण उन्होंने कई बार धोखा भी खाया है। वे मज़ाक का कारण नहीं बनाना चाहते| उन्हें लगता है की उनकी आत्मकथा में कुछ रोचक और प्रेरक नहीं है|

2.  आत्मकथा सुनाने के संदर्भ में ‘अभी समय भी नहीं’ कवि ऐसा क्यों कहता है ? 
उत्तर
कवि के अनुसार उन्हें कोई बड़ी उपलब्धि प्राप्त नहीं है| उनका जीवन संघर्षों से भरा पड़ा है| वह अपने अभावग्रस्त जीवन के दुःखों को खुद तक सिमित रखना चाहते हैं| इसलिए कवि कहते हैं उनके आत्मकथा लिखने का अभी समय नहीं हुआ है|
3. स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का क्या आशय है?

उत्तर

स्मृति को ‘पाथेय’ बनाने से कवि का आशय जीवनमार्ग के प्रेरणा से है। कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था, वह उसे कभी प्राप्त नहीं हुआ। इसलिए कवि स्वयं को जीवन-यात्रा से थका हुआ मानता है। जिस प्रकार ‘पाथेय’ यात्रा में यात्री को सहारा देता है, आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है ठीक उसी प्रकार स्वप्न में उसके द्वारा देखे हुए सुख की स्मृति भी कवि को जीवन-मार्ग में आगे बढ़ने का सहारा देती हैं।

4. भाव स्पष्ट कीजिए –

(क) मिला कहाँ वह सुख जिसका मैं स्वप्न देखकर जाग गया।
       आलिंगन में आते-आते मुसक्या कर जो भाग गया।

उत्तर
कवि कहना चाहता है कि जिस प्रेम के कवि सपने देख रहे थे वो उन्हें कभी प्राप्त नहीं हुआ। उनका जीवन हमेशा उस सुख से वंचित ही रहा। सुख उसके बेहद करीब आते-आते उससे दूर चला गया|

(ख) जिसके अरुण कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
       अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।

उत्तर

इन पंक्तियों में कवि ने अपनी प्रेयसी के सौंदर्य का वर्णन किया है| वे कहते हैं कि उनके प्रेयसी के गालों की लालिमा इतनी अधिक है की उषा की लालिमा भी उसके सामने फीकी हैं|

5. ‘उज्ज्वल गाथा कैसे गाऊँ, मधुर चाँदनी रातों की’ – कथन के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?

उत्तर

अपने प्रेयसी के साथ बिताये निजी प्रेम के मधुर और सुख भरे क्षणों को कवि किसी के सामने प्रकट करना नहीं चाहते| चाँदनी रातों में बिताए गए वे सुखदायक क्षण किसी उज्ज्वल गाथा की तरह हैं| इन स्मृतियों को वह औरों को बताकर अपना मज़ाक नहीं उड़ाना चाहते हैं| उन स्मृतियों को वह निजी सम्पत्ति की तरह अपने तक रखना चाहते हैं|

6. ‘आत्मकथ्य’ कविता की काव्यभाषा की विशेषताएँ उदाहरण सहित लिखिए।

उत्तर

‘जयशंकर प्रसाद’ द्वारा रचित कविता ‘आत्मकथ्य’ की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
• कवि ने खड़ी बोली में कोमल शब्दों का प्रयोग किया है|
जिसके अरुण-कपोलों की मतवाली सुन्दर छाया में|
• मानवीकरण शैली जो छायावाद की प्रमुख विशेषता है, का प्रयोग किया गया है|
अरी सरलते तेरी हंसी उड़ाउँ मैं|
• तत्सम शब्दों का प्रयोग प्रमुखता से किया गया है|
इस गंभीर अनंत-नीलिमा में अंसख्य जीवन-इतिहास
• गीत में गेय और छंदबद्ध है|
उसकी स्मृति पाथेय बनी है थके पथिक की पंथा की|

7. कवि ने जो सुख का स्वप्न देखा था उसे कविता में किस रूप में अभिव्यक्त किया है ?

उत्तर

कवि के सुखद स्वप्न में उन्हें अपने प्रेयसी के साथ कुछ क्षण बिताने का मौका मिला| आलिंगन में लेने से पूर्व उनकी प्रेयसी उनसे दूर चली गयी| चाँदनी रात में प्रेयसी के साथ हुई बातें सदा के लिए दुःख में तब्दील हो गयीं|

रचना और अभिव्यक्ति

8. इस कविता के माध्यम से प्रसाद जी के व्यक्त्तित्व की जो झलक मिलती है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर

जयशंकर प्रसाद जी छायावादी काव्य के परवर्तक हैं| उनका जीवन सादगी भरा रहा| उन्होंने अभावग्रस्त जीवन जीया| वे विनम्र स्वभाव के थे| दिखावे नाम की कोई चीज़ उनके जीवन में नहीं रही| उन्होंने धोखे खाये परन्तु अपनी सरलता और भोलापन नहीं छोड़ा| अपनी कमज़ोरियों को वो सबके सामने लाने में वे हिचकते थे चूँकि उन्हें पता था कि ऐसा कर वे उपहास का पात्र बन जाएँगें| वे अपने दुःखों को खुद तक सीमित रखना चाहते थे|

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Short Summary- पाठ 4- आत्मकथ्य

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 3- सवैया कवित्त हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 3- सवैया कवित्त

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पृष्ठ संख्या: 23

प्रश्न अभ्यास 


1. कवि ने ‘श्रीबज्रदूलह’ किसके लिए प्रयुक्त किया है और उन्हें ससांर रूपी मंदिर का दीपक क्यों कहा है?

उत्तर

देव जी ने ‘श्रीबज्रदूलह’ श्री कृष्ण के लिए प्रयुक्त किया है। कवि उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक इसलिए कहा है क्योंकि जिस प्रकार एक दीपक मंदिर में प्रकाश एवं पवित्रता का सूचक है, उसी प्रकार श्रीकृष्ण भी इस संसार-रूपी मंदिर में ईश्वरीय आभा का प्रकाश एवं पवित्रता का संचार करते हैं। उन्हीं से यह संसार प्रकाशित है।

2. पहले सवैये में से उन पंक्तियों को छाँटकर लिखिए जिनमें अनुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है?

उत्तर

अनुप्रास अलंकार
कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई। (कटि किंकिनि कै में ‘क’ वर्ण की आवृत्ति)
साँवरे अंग लसै पट पीत, (पट पीत में ‘प’ वर्ण की आवृत्ति)
हिये हुलसै बनमाल सुहाई। (हिये हुलसै में ‘ह’ वर्ण की आवृत्ति)

रुपक अलंकार
मंद हँसी मुखचंद जुंहाई, जय जग-मंदिर-दीपक सुन्दर। (मुख रूपी चंद्र)
जै जग-मंदिर दीपक सुन्दर| (संसार रूपी मंदिर)

3. निम्नलिखित पंक्तियों का काव्य-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -पाँयनि नूपुर मंजु बजैं, कटि किंकिनि कै धुनि की मधुराई।
साँवरे अंग लसै पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।

उत्तर

इन पंक्तियों में कृष्ण के अंगों एवं आभूषणों की अभूतपूर्व सुंदरता का चित्रण किया गया है। कृष्ण के पैरों की पायल से मधुर ध्वनि बज रही है| कमर में बँधी करधनी की ध्वनि में भी मधुरता है। कृष्ण के साँवले शरीर पर पीले रंग का वस्त्र सुशोभित हो रहा है| उनके गले में विराजमान सुंदर बनमाला की सुंदरता भी अद्भुत है|

शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है जो इसे कोमल औरमधुर बनाता है। कटि किंकिनि, पट पीत, हिये हुलसै में अनुप्रास का प्रयोग है| पंक्तियों में लयात्मकता और संगीतात्मकता है| तत्सम शब्दों का सुन्दर प्रयोग हुआ है|


4. दूसरे कवित्त के आधार पर स्पष्ट करें कि ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से किस प्रकार भिन्न है।

उत्तर
वसंत के परंपरागत वर्णन में कवि चारों ओर हरियाली, मौसम की अद्भुत छटा, फूलों का खिलना, शीतल हवाओं का बहना, झूले झूलना, नायक-नायिकाओं का मेल मिलाप आदि को दर्शाते हैं| परन्तु दूसरे कवित्त में ऋतुराज वसंत को कामदेव के बालक के रूप में चित्रित किया गया है| उनके साथ प्रकृति वह सब करती है जैसा एक नन्हे शिशु के साथ किया जाता है| प्रकृति उन्हें वृक्षों को पलना, पत्तों की शय्या, फूलों का वस्त्र, वायु द्वारा झूला झुलाना, मोर, तोते और कोयल द्वारा मनोरंजन करते दिखाया गया है|

5. ‘प्रातहि जगावत गुलाब चटकारी दै’ – इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर 
इस पंक्ति में कवि ने बताया है कि शिशु रूपी वसंत को प्रातःकाल गुलाब चुटकी बजाकर जगाते हैं| सुबह-सुबह फूल खिलते समय जो चट की आवाज आती हैं उसे कवि चुटकी बजना कहते हैं|

6. चाँदनी रात की सुंदरता को कवि ने किन-किन रूपों में देखा है? 
उत्तर

कवि देव चाँदनी रात की सुंदरता को निम्नलिखित रूप में देखते हैं –
• आकाश में फैली चाँदनी को स्फटिक (क्रिस्टल) नामक शिला से बने मंदिर के रूप में देखते हैं|
• चारों ओर फैली चाँदनी को देखकर ऐसा लगता है मानों दही का सागर उमड़ता चला आ रहा हो| 
• पूरे आकाश में फैली चाँदनी को देखकर ऐसा लग रहा है मानों आकाश रूपी आँगन में दूध का झाग फ़ैल गया हो|
• चाँदनी रात रूपी मंदिर में झिलमिलाते तारे ऐसे लग रहे हैं मानो वे सब सजी-धजी युवतियाँ हों जिनकी आभषूणों की आभा मल्लिका फूल के रस से मिली ज्योति की समान है|

7. ‘प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद’ – इस पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताएँ कि इसमें कौन-सा अलंकार है?
उत्तर

कवि को आकाश में चमकता हुआ चन्द्रमा उन्हें प्यारी राधिका के प्रतिबिम्ब के समान प्रतीत हो रहा है। यहाँ राधा को चाँद से श्रेष्ठ बताया गया है और चाँद केवल उनका परछाई मात्र है| इसलिए यहाँ व्यतिरेक अलंकार है, उपमा अलंकार नहीं है।
8. तीसरे कवित्त के आधार पर बताइए कि कवि ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है?

उत्तर

कवि देव ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए स्फटिक शीला से निर्मित मंदिर का, दही के समुद्र का, दूध के झाग का, मोतियों की चमक का और दर्पण की स्वच्छ्ता आदि जैसे उपमानों का प्रयोग किया है।

9. पठित कविताओं के आधार पर कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ बताइए।

उत्तर

रीतिकालीन कवियों में देव को अत्यंत प्रतिभाशाली कवि माना जाता है। देव की काव्यगत विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –
• देवदत्त ब्रज भाषा के सिद्धहस्त कवि हैं चूँकि उनकी भाषा कोमलता और मधुरता पूर्ण रूप से झलकती है।
• छंद का प्रयोग कवित्त एवं सवैया में किया गया है।
• अनेक जगह जैसे कटि किंकिनि, हिय हुलसै आदि में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है|
• तत्सम शब्दों का प्रयोग पंक्तियों को शोभा प्रदान करता है|
• मानवीकरण, उपमा, रूपक आदि अलंकारों का प्रयोग भी अनूठे ढंग से हुआ है|
• उन्होंने प्रकृति का सजीव चित्रण किया है|

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Short Summary- पाठ 3- सवैया कवित्त

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 2- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 2- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

NCERT Solutions for Class 10 will help the students in learning complex topics and problems in an easy way. Class 10 Khsitz NCERT Solutions will help students in understanding the topics in the most simple manner and grasp them easier to perform better. You can study in an organized manner and set a good foundation for your future goals

पृष्ठ संख्या: 14
प्रश्न अभ्यास 


1. परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए?

उत्तर

परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने पर निम्नलिखित तर्क दिए -• श्री राम ने इसे नया और मजबूत समझ कर सिर्फ छुआ था परन्तु धनुष बहुत पुराना और कमजोर होने के कारण हाथ लगाते ही टूट गया|
• बचपन में भी उनलोगों ने कई धनुहियाँ तोड़ी हैं, तब परशुराम क्रोधित नहीं हुए?
• हमें ये धनुष साधारण धनुष लगा|
• इस धनुष के टूटने पर उन्हें कोई लाभ-हानि नहीं दिखती|

2. परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर

राम बहुत शांत और धैर्यवान हैं| परशुराम के क्रोध करने पर राम विनम्रता के साथ कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला कोई उनका दास ही होगा| वे मृदुभाषी होने का परिचय देते हुए अपनी मधुर वाणी से परशुराम के क्रोध को शांत करने का प्रयास करते हैं| अंत में आँखों से संकेत कर लक्ष्मण को शांत रहने को कहते हैं|
दूसरी ओर लक्ष्मण का स्वभाव उग्र है| वह व्यंग्य करते हुए परशुराम को इतनी छोटी सी बात पर हंगामा नहीं करने के लिए कहते हैं| वे परशुराम के क्रोध की चिंता किये बिना अपशब्दों को प्रयोग ना करने को कहते हैं| वह उनके क्रोध को अन्याय समझते हैं इसीलिए पुरजोर विरोध करते हैं|

पृष्ठ संख्या: 15

3. लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।

उत्तर

परशुराम – शिवजी का धनुष तोड़ने का दुस्साहस किसने किया है?
राम – हे नाथ! इस शिवजी के धनुष को तोड़ने वाला अवश्य ही आपका कोई दास ही होगा|
परशुराम – सेवक वह होता है जो सेवा का कार्य करे| किन्तु जो सेवक शत्रु के सामने व्यवहार करे उससे तो लड़ना पड़ेगा| जिसने भी धनुष तोड़ा है वह मेरे लिए दुश्मन है और तुरंत सभा से बाहर चला जाए अन्यथा यहाँ उपस्थित सभी राजा मारे जायेंगें|


4. परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा, निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए -बाल ब्रह्मचारी अति कोही। बिस्वबिदित क्षत्रियकुल द्रोही||
भुजबल भूमि भूप बिनु कीन्ही। बिपुल बार महिदेवन्ह दीन्ही||
सहसबाहुभुज छेदनिहारा। परसु बिलोकु महीपकुमारा||
मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर||

उत्तर

परशुराम ने अपने विषय में ये कहा कि वे बाल ब्रह्मचारी हैं और अतिक्रोधी स्वभाव के हैं। सारा संसार उन्हें क्षत्रियकुल के नाशक के रूप में जानता है। उन्होंने कई बार भुजाओं की ताकत से इस धरती को क्षत्रिय राजाओं से मुक्त किया है और ब्राह्मणों को दान में दिया है| लक्ष्मण वे अपना फरसा दिखाकर कहते हैं कि इस फरसे से उन्होंने सहस्त्रबाहु के बाहों को काट डाला था। इसलिए वह अपने माता-पिता चिंतित ना करे| उनका फरसा गर्भ में पल रहे शिशुओं का नाश कर देता है।

5. लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई?

उत्तर

लक्ष्मण ने वीर योद्धा की निम्नलिखित विशेषताएँ बताई है -• वीर योद्धा स्वयं अपनी वीरता का बखान नहीं करते अपितु दूसरे लोग उसकी वीरता का का बखान करते हैं|
• वे युद्धभूमि में अपनी वीरता का परिचय साहसपूर्वक देते हैं|
• वीर योद्धा शांत, विनम्र, क्षमाशील, धैर्यवान, बुद्धिमान होते हैं|
• वे खुद पर अभिमान नहीं करते हैं|
• वह दूसरों को आदर देते हैं|

6. साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

उत्तर
साहस और शक्ति द्वारा हम अनेक काम पूरा कर सकते हैं| हालांकि इसमें अगर विनम्रता भी जुड़ जाए तो बेहद कारगर साबित होता है| विनम्रता हमें संयमित बनाती है जिससे व्यक्ति को आंतरिक ख़ुशी मिलती है| विनम्रता के भाव से विपक्षी भी उस व्यक्ति का आदर करते हैं| यह व्यक्ति कार्य को और सुगम बनती है|

7. भाव स्पष्ट कीजिए –

(क) बिहसि लखनु बोले मृदु बानी। अहो मुनीसु महाभट मानी||
       पुनि पुनि मोहि देखाव कुठारू। चहत उड़ावन फूँकि पहारू||

उत्तर

इन पंक्तियों में लक्ष्मण अभिमान में चूर परशुराम स्वभाव पर व्यंग्य किया है| लक्ष्मण मुस्कुराते हुए कहते हैं कि आप मुझे बार-बार इस फरसे को दिखाकर डरा रहे हैं| ऐसा लगता है मानो आप फूँक मारकर पहाड़ उड़ाना चाहते हों|

(ख) इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं||
      देखि कुठारु सरासन बाना। मैं कछु कहा सहित अभिमाना||

उत्तर

इन पंक्तियों में लक्ष्मण ने परशुराम के अभिमान को चूर करने के लिए अपनी वीरता को बताया है| वे कहते हैं कि हम कुम्हड़े के कच्चे फल नहीं हैं जो तर्जनी के दिखाने से मुरझा जाता है| यानी वे कमजोर नहीं हैं जो धमकी से भयभीत हो जाएँ| वह यह बात उनके फरसे को देखकर बोल रहे हैं| उन्हें स्वयं पर विश्वास है|

(ग) गाधिसू नु कह हृदय हसि मुनिहि हरियरे सूझ।
     अयमय खाँड़ न ऊखमय अजहुँ न बूझ अबूझ||

उत्तर

इन पंक्तियों में विश्वामित्र मन ही मन मुस्कराते हुए सोच रहे हैं कि परशुराम ने सामन्य क्षत्रियों को युद्ध में हराया है तो इन्हें हरा-ही-हरा नजर आ रहा है| राम-लक्ष्मण को साधारण क्षत्रिय नहीं हैं| परशुराम इन्हें गन्ने की बनी तलवार के समान कमजोर समझ रहे हैं पर असल में ये लोहे की बनी तलवार हैं| परशुराम के अहंकार और क्रोध ने उनकी बुद्धि को अपने वश में ले लिया है|

8. पाठ के आधार पर तुलसी के भाषा सौंदर्य पर दस पंक्तियाँ लिखिए।

उत्तर

• यह काव्यांश तुलसीदास द्वारा लिखित रामचरितमानस के बालकांड से ली गयी जो अवधी भाषा में लिखी गई है। • इसमें तत्सम शब्दों का प्रयोग भरपूर मात्रा में किया गया है|
• इसमें दोहा, छंद, चौपाई का अच्छा प्रयोग किया है।
• भाषा में लयबद्धता है|
• प्रचलित मुहावरे और लोकक्तियाँ ने काव्य को सजीव बनाया है|
• वीर और रौद्र रस का प्रयोग मुख्य से रूप किया गया|
• कहीं-कहीं शांत रस का भी उपयोग हुआ है|
• अनुप्रास, उपमा, रुपक, उत्प्रेक्षा व पुनरुक्ति अलंकार का सुयोजित ढंग से प्रयोग हुआ है|
• व्यंग्यों का प्रयोग अनूठा है|
• प्रसंगानुकूल भाषा का प्रयोग किया गया है|

9. इस पूरे प्रसंग में व्यंग्य का अनूठा सौंदर्य है। उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

तुलसीदास द्वारा रचित परशुराम – लक्ष्मण संवाद मूल रूप से व्यंग्य काव्य है। उदाहरण के लिए –

• बहु धनुही तोरी लरिकाईं।
कबहुँ न असि रिसकीन्हि गोसाईं||

लक्ष्मण परशराम से कहते हैं कि हमने बचपन में भी इस जैसी कई धनुहियाँ तोड़ीं हैं परन्तु तब आप हम पर इतने क्रोधित नहीं हुए|

• मातु पितहि जनि सोचबस करसि महीसकिसोर।
गर्भन्ह के अर्भक दलन परसु मोर अति घोर॥

परशुराम जी क्रोधित होकर लक्ष्मण से कहते हैं कि अरे राजा के बालक! तू अपने माता-पिता के बारे में सोच| यह जो मेरा फरसा बहुत भयानक है, यह गर्भ में पल रहे बच्चों का भी नाश कर देता है|

• अपने मुँह तुम्ह आपनि करनी|
बार अनेक भाँति बहु बरनी||

परशुराम द्वारा की जा रही खुद की बड़ाई को लक्ष्मण अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनाना कहते हैं|

• मिले न कबहूँ सुभट रन गाढ़े|
द्विजदेवता घरहि के बाढ़े||

लक्ष्मण कहते हैं कि आपका सामना कभी योद्धाओं से नहीं हुआ इसीलिए आप घर के शेर हैं|
10. निम्नलिखित पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार पहचान कर लिखिए –
(क) बालकु बोलि बधौं नहि तोही।

अनुप्रास अलंकार – ‘बालकु बोलि बधौं’ में ‘ब’ वर्ण की एक से अधिक बार आवृत्ति हुई है।

(ख) कोटि कुलिस सम बचनु तुम्हारा।

• अनुप्रास अलंकार – कोटि कुलिस में ‘क’ वर्ण की एक से अधिक बार आवृत्ति हुई है।
• उपमा अलंकार – कोटि कुलिस सम बचनु में उपमा अलंकार है चूँकि परशुराम जी के वचनों की तुलना वज्र से की गयी है और वाचक शब्द ‘सम’ का प्रयोग किया गया है|
(ग) तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा।
       बार बार मोहि लागि बोलावा||
• उत्प्रेक्षा अलंकार – ‘काल हाँक जनु लावा’ में उत्प्रेक्षा अलंकार है। यहाँ ‘जनु’ वाचक शब्द है।
• पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार – ‘बार-बार’ में पुनरुक्ति प्रकाश अलंकार है। क्योंकि बार शब्द की दो बार आवृत्ति हुई पर अर्थ भिन्नता नहीं है।
(घ)लखन उतर आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु।
     बढ़त देखि जल सम बचन बोले रघुकुलभानु||
• उपमा अलंकार
→ लक्ष्मण के उत्तर आहुति के समान और वाचक शब्द ‘सरिस’ के कारण ‘आहुति सरिस भृगुबरकोपु कृसानु’ में उपमा अलंकार है।
(ii) जल सम बचन में भी उपमा अलंकार है क्योंकि भगवान राम के मधुर वचन जल के समान कार्य रहे हैं और वाचक शब्द ‘सम’ का प्रयोग हुआ है।
2. रुपक अलंकार – रघुकुलभानु में रुपक अलंकार है चूँकि श्री राम के गुणों की समानता सूर्य से की गई है।

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Short Summary- पाठ 2- राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 1- पद हिंदी |Kshitz class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 1- पद

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पृष्ठ संख्या: 7

प्रश्न अभ्यास 


1. गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?

उत्तर

गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में यह व्यंग्य निहित है कि उद्धव वास्तव में भाग्यवान न होकर अति भाग्यहीन हैं। वे कृष्णरूपी सौन्दर्य तथा प्रेम-रस के सागर के सानिध्य में रहते हुए भी उस असीम आनंद से वंचित हैं। वे प्रेम बंधन में बँधने एवं मन के प्रेम में अनुरक्त होने की सुखद अनुभूति से पूर्णतया अपरिचित हैं।

2. उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?

उत्तर

गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना निम्नलिखित उदाहरणों से की है -• गोपियों ने उद्धव के व्यवहार की तुलना कमल के पत्ते से की है जो जल में रहते हुए भी उससे प्रभावित नहीं होता है|
• वह जल में रखे तेल के मटके के समान हैं, जिस पर जल की एक बूँद भी टिक नहीं पाती।

3. गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं?

उत्तर

गोपियों ने अनेक उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलाहने दिए हैं-
• गोपियाँ उद्धव के व्यवहार को कमल के पत्ते के समान बताती हैं जो पानी में रहकर भी उससे अछूता रहता है यानी वे प्रेम के मूरत कृष्ण के संग रहकर भी उसका अर्थ नहीं जान पाए हैं|
• गोपियाँ उन्हें ‘बड़भागी’ कहती हैं जो कृष्ण के संग रहकर भी प्रेम के बंधनों से मुक्त है| उन्हें प्रेम के मायने नहीं पता हैं|
• वे उद्धव के योग सन्देश को कड़वी ककड़ी के समान बताती हैं जो उनसे नहीं खाई जाती यानी वे उन बातों को नहीं समझ सकतीं|

4. उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया?

उत्तर

गोपियाँ श्रीकृष्ण के आगमन की आशा में बैचैन थीं। वे एक-एक दिन गिन रही थी और अपने तन-मन की व्यथा को चुपचाप सहती हुई कृष्ण के प्रेम रस में डूबी हुई थीं। परन्तु कृष्ण ने स्वयं ना आकर योग का संदेश देने के लिए उद्धव को भेज दिया। विरह की अग्नि में जलती हुई गोपियों को जब उद्धव ने कृष्ण को भूल जाने और योग-साधना करने का उपदेश देना प्रारम्भ किया, तब गोपियों की विरह वेदना और भी बढ़ गयी । इस प्रकार उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरह अग्नि में घी का काम किया।

5. ‘मरजादा न लही’ के माध्यम से कौन-सी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है?

उत्तर

‘मरजादा न लही’ के माध्यम से प्रेम की मर्यादा न रहने की बात की जा रही है। कृष्ण के मथुरा चले जाने पर गोपियाँ उनके वियोग में जल रही थीं। कृष्ण के आने पर ही उनकी विरह-वेदना मिट सकती थी, परन्तु कृष्ण ने स्वयं न आकर उद्धव को योग संदेश के साथ भेज दिया जिसने गोपियों के उनकी मर्यादा का त्याग करने पर आतुर कर दिया है|

6. कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है ?

उत्तर

गोपियों ने कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को विभिन्न प्रकार से दिखाया है-
• गोपियों ने अपनी तुलना उन चीटियों के साथ की है जो गुड़ (श्रीकृष्ण भक्ति) पर आसक्त होकर उससे चिपट जाती है और फिर स्वयं को छुड़ा न पाने के कारण वहीं प्राण त्याग देती है।
• उन्होंने खुद को हारिल पक्षी व श्रीकृष्ण को लकड़ी की भाँति बताया है। जिस प्रकार हारिल पक्षी सदैव अपने पंजे में कोई लकड़ी अथवा तिनका पकड़े रहता है, उसे किसी भी दशा में नहीं छोड़ता। उसी प्रकार गोपियों ने भी मन, कर्म और वचन से कृष्ण को अपने ह्रदय में दृढ़तापूर्वक बसा लिया है।
• वे जागते, सोते स्वप्नावस्था में, दिन-रात कृष्ण-कृष्ण की ही रट लगाती रहती हैं।

7.  गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है ?

उत्तर

गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा ऐसे लोगों को देने की बात कही है जिनका मन चंचल है और इधर-उधर भटकता है। उद्धव अपने योग के संदेश में मन की एकाग्रता का उपदेश देतें हैं, परन्तु गोपियों का मन तो कृष्ण के अनन्य प्रेम में पहले से ही एकाग्र है। इस प्रकार योग-साधना का उपदेश उनके लिए निरर्थक है। योग की आवश्यकता तो उन्हें है जिनका मन स्थिर नहीं हो पाता, इसीलिये गोपियाँ चंचल मन वाले लोगों को योग का उपदेश देने की बात कहती हैं।

8. प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।

उत्तर
गोपियों ने योग साधना को निरर्थक बताया है| उनके अनुसार यह उन लोगों के लिए हैं जिनका मन अस्थिर है परन्तु गोपियों का हृदय तो श्रीकृष्ण के लिए स्थिर है| वे उनकी भक्ति में पूरी तरह से समर्पित हैं| योग ज्ञान उनके लिए कड़वी ककड़ी के समान है जिसे खाना बहुत ही मुश्किल है। यह ज्ञान गोपियों के लिए बिमारी से अधिक कुछ नहीं है|

9. गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए ?

उत्तर

गोपियों के अनुसार राजा का धर्म है कि वह प्रजा को ना सताए और प्रजा के सुखों का ख्याल रखे|

10. गोपियों को कृष्ण में ऐसे कौन सा परिवर्तन दिखाई दिए जिनके कारण वे अपना मन वापस पा लेने की बात कहती हैं ?

उत्तर

गोपियों को लगता है कि कृष्ण ने अब राजनीति सिख ली है। उनकी बुद्धि पहले से भी अधिक चतुर हो गयी है। पहले वे प्रेम का बदला प्रेम से चुकाते थे, परंतु अब प्रेम की मर्यादा भूलकर योग का संदेश देने लगे हैं। कृष्ण पहले दूसरों के कल्याण के लिए समर्पित रहते थे, परंतु अब अपना भला ही देख रहे हैं। उन्होंने पहले दूसरों के अन्याय से लोगों को मुक्ति दिलाई है, परंतु अब नहीं। श्रीकृष्ण गोपियों से मिलने के बजाय योग के शिक्षा देने के लिए उद्धव को भेज दिए हैं। श्रीकृष्ण के इस कदम से गोपियों के मन और भी आहत हुआ है। कृष्ण में आये इन्ही परिवर्तनों को देखकर गोपियाँ अपनों को श्रीकृष्ण के अनुराग से वापस लेना चाहती है।

11. गोपियों ने अपने वाक्चातुर्य के आधार पर ज्ञानी उद्धव को परास्त कर दिया, उनके वाक्चातुर्य की विशेषताएँ लिखिए?

उत्तर

गोपियों के वाक्चातुर्य की विशेषताएँ इस प्रकार है –
• साहसी – गोपियों पूरी तरह से निडर हैं| वह उद्धव को कोसने से परहेज नहीं करतीं| वह उनके योग साधना के सन्देश को कड़वी ककड़ी और बिमारी बताती हैं|
• व्यंग्यात्मकता – गोपियों ने बड़े ही प्रभावशाली ढंग से व्यंग्य करती हैं| वे उद्धव को ‘बड़भागी’ कहती हैं चूँकि वह श्रीकृष्ण के पास रहकर भी प्रेम से अछूते रहे| यह कहकर वह उद्धव का उपहास करती हैं|
• स्पष्टता – वे स्पष्ट शब्दों में उद्धव को बताती हैं कि वे कृष्ण के प्रेम में पूरी तरह से लीन हैं इसलिए उनके योग सन्देश का उनपर कुछ असर नहीं पड़ने वाला है|

12. संकलित पदों को ध्यान में रखते हुए सूर के भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएँ बताइये।

उत्तर

भ्रमरगीत की मुख्य विशेषताएँ हैं-
• निर्गुण और निराकार भक्ति से ज्यादा सगुण और साकार भक्ति को ज्यादा महत्व दिया गया है|
• योगसाधना का महत्व प्रेम की एकनिष्ठाता के सामने कम है|
• गोपियों विरह वेदना झेल रही हैं|
• गोपियों ने सरलता, मार्मिकता, उपालंभ, व्यगात्म्कथा, तर्कशक्ति आदि के द्वारा उद्धव के ज्ञान योग को तुच्छ सिद्ध किया है।
• गोपियों ने खुद को हारिल पक्षी व श्रीकृष्ण को लकड़ी की भाँति बताकर अनन्य प्रेम का परिचय दिया है|
• अनुप्रास, उपमा, दृष्टांत, रूपक, व्यतिरेक, विभावना, अतिशयोक्ति आदि अनेक अलंकारों का सुन्दर प्रयोग किया है।
• शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा का प्रयोग हुआ है।
• इसमें भी संगीतात्म्कता का गुण सहज ही दृष्टिगत होता है।

रचना और अभिव्यक्ति 


13. गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, आप अपनी कल्पना से और तर्क दीजिए|
उत्तर

गोपियों ने उद्धव के सामने तरह-तरह के तर्क दिए हैं, हम निम्न तर्क दे सकते हैं –
• प्रेम कर विरह की वेदना के साथ योग साधना की शिक्षा देना कहाँ का न्याय है?
• अपनी बात पूरी ना कर पाने वाले कृष्ण एक धोखेबाज हैं|
•  कृष्ण अपने अन्य प्रेम करने वाले सगों को योग साधना का पाठ क्यों नहीं पढ़ाते?

14. उद्धव ज्ञानी थे, नीति की बातें जानते थे; गोपियों के पास ऐसी कौन-सी शक्ति थी जो उनके वाक्चातुर्य में मुखिरत हो उठी?

उत्तर 
गोपियों के पास उनके मन श्री कृष्ण के लिए प्रेम तथा भक्ति की अद्भुत शक्ति थी जिस कारण उद्धव जैसे ज्ञानी को भी उन्होंने अपने तर्कों से हरा दिया|

15. गोपियों ने यह क्यों कहा कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं? क्या आपको गोपियों के इस कथन का विस्तार समकालीन राजनीति में नज़र आता है, स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

गोपियों ने ऐसा इसलिए कहा है क्योंकि श्री कृष्ण ने सीधी उनसे प्रेम को भूलाने की बात ना कर उन्हें उद्धव द्वारा योग संदेश का माध्यम अपनाने को कह रहे हैं|
गोपियों का कथन कि हरि अब राजनीति पढ़ आए हैं, आज की राजनीति में नजर आ रहा है। आज के राजनीति में नेता भी मुद्दों के बारे में साफ़-साफ़ नहीं कहते और मुद्दों को घुमा-फिराकर पेश करते हैं|

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Short Summary- पाठ 1- पद

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 17- कारतूस हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 17- कारतूस

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पृष्ठ संख्या: 133
प्रश्न अभ्यास 
मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –


1. कर्नल कालिंज का खेमा जंगल में क्यों लगा हुआ था?

उत्तर

कर्नल कांलिज ने वज़ीर अली को गिरफ़्तार करने के लिए जंगल में खेमा लगाये हुए था।

2. वज़ीर अली से सिपाही क्यों तंग आ चुके थे?
उत्तर 
वज़ीर अली ने कई वर्षों से अंग्रेज़ों की आँख में धूल झोंककर उनकी नाक में दम कर रखा था। इसलिए वे वज़ीर अली से तंग आ चुके थे।

3. कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए क्यों कहा?

उत्तर

कर्नल ने सवार पर नज़र रखने के लिए इसलिए कहा क्योंकि धूल के उड़ने से उसने अंदाज लगाया कि लोग ज़्यादा हैं और वज़ीर को ढूंढ़ रहे हैं।

4. सवार ने क्यों कहा कि वज़ीर अली की गिरफ़्तारी बहुत मुश्किल है?

उत्तर

सवार खुद वज़ीर अली था जो कि बहुत बहादुर था और शत्रुओं को ललकार रहा था।

लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

1. वज़ीर अली के अफ़साने सुनकर कर्नल को रॉबिनहुड की याद क्यों आ जाती थी?

उत्तर

वज़ीर अली रॉबिनहुड की तरह साहसी, हिम्मतवाला और बहादुर था। वह भी रॉबिनहुड की तरह किसी को भी चकमा देकर भाग जाता था। वह अंग्रेज़ी सरकार की पकड़ में नहीं आ रहा था। कम्पनी के वकील को उसने मार डाला था। उसकी बहादुरी के अफ़साने सुनकर ही कर्नल को रॉबिनहुड की याद आती थी।

2. सआदत अली कौन था? उसने वज़ीर अली की पैदाइश को अपनी मौत क्यों समझा?
उत्तर 
सआदत अली वज़ीर अली का चाचा और नवाब आसिफउदौला का भाई था। जब तक आसिफउदौला के कोई सन्तान नहीं थी,सआदत अली की नवाब बनने की पूरी सम्भावना थी। इसलिए उसे वज़ीर अली की पैदाइश उसकी मौत लगी।

3. सआदत अली को अवध के तख्त पर बिठाने के पीछे कर्नल का क्या मकसद था?

उत्तर

सआदत अली आराम पसंद अंग्रेज़ों का पिट्ठू था। अंग्रेज़ कर्नल को उसे तख्त पर बिठाने का मकसद अवध की धन सम्पत्ति पर अधिकार करना था। उसने अंग्रेज़ों को आधी सम्पत्ति और दस लाख रूपये दिए। इस तरह सआदत अली को गद्दी पर बैठने से उन्हें लाभ ही लाभ था।

4. कंपनी के वकील का कत्ल करने के बाद वज़ीर अली ने अपनी हिफ़ाज़त कैसे की?

उत्तर

कंपनी के वकील की हत्या करने के बाद वज़ीर अली आजमगढ़ भाग गया और वहाँ के नवाब ने उसकी सहायता की और उसे सुरक्षित घागरा पहुँचा दिया। तब से वह वहाँ के जंगलों में रहने लगा।

5. सवार के जाने के बाद कर्नल क्यों हक्का-बक्का रह गया?

उत्तर

बड़ी चतुराई से वजीर अली कारतूस लेने कर्नल के खेमे में सवार बनकर आया था। जाते समय कर्नल ने नाम पूछा तो उसने वज़ीर अली बताया। उसे सामने देखकर कर्नल हक्का-बक्का रह गया।

(ख) निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए −


1. लेफ़्टीनेंट को ऐसा क्यों लगा कि कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई है?
उत्तर 
लेफ़्टीनेंट को जब कर्नल ने बताया कि कंपनी के खिलाफ़ केवल वज़ीर अली ही नहीं बल्कि दक्षिण में टीपू सुल्तान, बंगाल में नवाब का भाई शमसुद्दौला भी है। इन्होंने अफ़गानिस्तान के बादशाह शाहेज़मा को आक्रमण के लिए निमत्रंण दिया है। यह सब देखकर लेफ़्टीनेंट को आभास हुआ कि कंपनी के खिलाफ़ पूरे हिन्दूस्तान में लहर दौड़ गई है।

2. वज़ीर अली ने कंपनी के वकील का कत्ल क्यों किया?

उत्तर

वज़ीर अली को उसके नवाबी पद से हटा दिया गया और बनारस भेज दिया गया। फिर कलकत्ता बुलाया तो वज़ीर अली ने कंपनी के वकील, जोकि बनारस में रहता था, उससे शिकायत की परन्तु उसने शिकायत सुनने की जगह खरीखोटी सुनाई। इस पर वज़ीर अली को गुस्सा आ गया और उसने वकील का कत्ल कर दिया।

3. सवार ने कर्नल से कारतूस कैसे हासिल किए?

उत्तर
सवार वज़ीर अली अकेला ही घोड़े पर सवार होकर अंग्रेज़ों के खेमे में पहुँच गया और कर्नल को दिखाया कि वह भी वज़ीर अली के खिलाफ़ है। उसने कर्नल से अकेले में मिलने के लिए कहा। कर्नल मान गया और वज़ीर अली के दस कारतूस माँगने पर उसने दे दिए। इस तरह सवार ने कर्नल से कारतूस हासिल किए।

4. वज़ीर अली एक जाँबाज़ सिपाही था, कैसे? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

वज़ीर अली को अंग्रेज़ों ने अवध के तख्ते से हटा दिया पर उसने हिम्मत नहीं हारी। वज़ीफे की रकम में मुश्किल डालने वाले कंपनी के वकील की भी हत्या कर दी। अंग्रेज़ों को महीनों दौड़ाता रहा परन्तु फिर भी हाथ नहीं आया। अंग्रेज़ों के खेमे में अकेले ही पहुँच गया,कारतूस भी ले आया और अपना सही नाम भी बता गया। इस तरह वह एक जाँबाज़ सिपाही था।

पृष्ठ संख्या: 134

(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए −


1. मुट्ठीभर आदमी और इतना दमखम।

उत्तर

इस पंक्ति में वज़ीर अली के साहस और वीरता का परिचय है। वह थोड़े से सैनिकों के साथ जंगल में रह रहा था। अंग्रेज़ों की पूरी फ़ौज उसका पीछा कर रही थी फिर भी उसे पकड़ नहीं पा रही थी।

2. गर्द तो ऐसे उड़ रही है जैसे कि पूरा एक काफ़िला चला आ रहा हो मगर मुझे तो एक ही सवार नज़र आता है।

उत्तर

यह कथन लेफ़्टीनेंट का है। जब वज़ीर अली अंग्रेज़ों के खेमे में अकेला ही आ रहा था परन्तु इतनी तेज़ी से आ रहा था, इतनी धूल उड़ रही थी कि मानों कई सैनिक आ रहे हो, पूरा एक काफ़िला आ रहा हो। लेफ़्टीनेंट कहता है सैनिक तो एक ही नज़र आ रहा है।

भाषा अध्यन

1. निम्नलिखित शब्दों का एक-एक पर्याय लिखिए −
खिलाफ़, पाक, उम्मीद, हासिल, कामयाब, वजीफ़ा, नफ़रत, हमला, इंतेज़ार, मुमकिन।

उत्तर

खिलाफ़विरूद्ध
पाकपवित्र
उम्मीदआशा
हासिलप्राप्त
कामयाबसफल
वजीफ़ाछात्रवृति
नफ़रतघृणा
हमलाआक्रमण
इंतेज़ारप्रतीक्षा
मुमकिनसंभव

2. निम्नलिखित मुहावरों का अपने वाक्यों में प्रयोग कीजिए −
आँखों में धूल झोंकना, कूट-कूट कर भरना, काम तमाम कर देना, जान बख्श देना, हक्का बक्का रह जाना।

उत्तर

(क) आँखों में धूल झोंकना −चोर ने पुलिस के आँखों में धूल झोंककर चोरी कर ली।
(ख) कूट-कूट कर भरना − झाँसी की रानी में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी।
(ग) काम तमाम कर देना − बिल्ली ने चूहे का काम तमाम कर दिया।
(घ) जान बख्श देना − देश के दुशमनों की जान नहीं बख्शनी चाहिए।
(ङ) हक्का-बक्का रह जाना − अचानक चाचाजी को सामने देखकर सब हक्के-बक्के रह गए।

3. कारक वाक्य में संज्ञा या सर्वनाम का क्रिया के साथ संबंध बताता है। निम्नलिखित वाक्यों में कारकों को रेखांकित कर उनके नाम लिखिए −

(क) जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है।
(ख) कंपनी के खिलाफ़ सारे हिंदुस्तान में एक लहर दौड़ गई।
(ग) वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया।
(घ) फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।
(ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था।

उत्तर

(क) जंगल की ज़िंदगी बड़ी खतरनाक होती है।
संबंध कारक
(ख) कंपनी के खिलाफ़ सारे हिन्दुस्तान में एक लहर दौड़ गई।
संबंध कारक, अधिकरण कारक
(ग) वज़ीर को उसके पद से हटा दिया गया।
कर्म कारक, अपादान कारक
(घ) फ़ौज के लिए कारतूस की आवश्यकता थी।
सप्रंदान कारक, संबंध कारक
(ङ) सिपाही घोड़े पर सवार था।
अधिकरण कारक

4. नीचे दिए गए वाक्यों में ‘ने’ लगाकर उन्हें दुबारा लिखिए − (क) घोड़ा पानी पी रहा था।
(ख) बच्चे दशहरे का मेला देखने गए।
(ग) रॉबिनहुड गरीबों की मदद करता था।
(घ) देशभर के लोग उसकी प्रशंसा कर रहे थे।

उत्तर

(क) घोड़े ने पानी पिया। (ख) बच्चों ने दशहरे का मेला देखा।
(ग) रॉबिनहुड ने गरीबों की मद्द की।
(घ) देशभर के लोगों ने उसकी प्रशंसा की।

पृष्ठ संख्या: 135

5. निम्नलिखित वाक्यों में उचित विराम-चिह्न लगाइए − (क) कर्नल ने कहा सिपाहियों इस पर नज़र रखो ये किस तरफ़ जा रहा है
(ख) सवार ने पूछा आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है इतने लावलश्कर की क्या ज़रूरत है
(ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बाते कर रहे थे चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे एक व्यक्ति कह रहा था दुशमन कभी भी हमला कर सकता है

उत्तर

(क) कर्नल ने कहा, “सिपाहियों इस पर नज़र रखो ये किस तरफ़ जा रहा है?”
(ख) सवार ने पूछा, “आपने इस मकाम पर क्यों खेमा डाला है? इतने लावलशकर की क्या ज़रूरत है?”
(ग) खेमे के अंदर दो व्यक्ति बैठे बातें कर रहे थे। चाँदनी छिटकी हुई थी और बाहर सिपाही पहरा दे रहे थे। एक व्यक्ति कह रहा था, “दुश्मन कभी भी हमला कर सकता है।”

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Short Summary- पाठ 17- कारतूस

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NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 16- पतझर में टूटी पत्तियाँ हिंदी |Sparsh class 10 |EduGrown

NCERT Solutions for Class 10th: पाठ 16- पतझर में टूटी पत्तियाँ

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पृष्ठ संख्या: 122
प्रश्न अभ्यास 
मौखिक 
निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए –


1. शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?

उत्तर

शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नही की जाती अगर इसी में थोड़ा-सा ताँबा मिला दिया जाए तो यह गिन्नी बन जाता है। ऐसा करने से सोने की मजबूती और चमक दोनों बढ़ जाती है। 

2. प्रेक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?

उत्तर

जो लोग आदर्श बनते हैं और व्यवहार के समय उन्हीं आर्दशों को तोड़ मरोड़ कर अवसर का लाभ उठाते हैं, उन्हें प्रेक्टिकल आइडियालिस्ट कहते हैं।

3. पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?

उत्तर

जिसमें लाभ हानि सोचने की गुजांइश नहीं होती है उसे शुद्ध आदर्श कहते हैं।

4. लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात क्यों कही है?

उत्तर

जापानी लोग उन्नति की होड़ में सबसे आगे हैं। वे महीने का काम एक दिन में करने का सोचते हैं। इसलिए लेखक ने जापानियों के दिमाग में स्पीड का इंजन लगने की बात कही है।

5. जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?

उत्तर

जापानी में चाय पीने की विधि को चा-नो-यू कहते हैं।

6. जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?

उत्तर

जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, वहाँ की सजावट पारम्परिक होती है। वहाँ अत्यन्त शांति और गरीमा के साथ चाय पिलाई जाती है। शांति उस स्थान की मुख्य विशेषता है।


लिखित

(क) निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (25-30 शब्दों में) लिखिए −

1. शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?

उत्तर

शुद्ध सोने में किसी प्रकार की मिलावट नहीं की जा सकती। ताँबे से सोना मजबूत हो जाता है परन्तु शुद्धता समाप्त हो जाती है। इसी प्रकार व्यवहारिकता में शुद्ध आर्दश समाप्त हो जाते हैं। सही भाग में व्यवहारिकता को मिलाया जाता है तो ठीक रहता है।

2. चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?

उत्तर

चाजीन द्वारा अतिथियों का उठकर स्वागत करना, आराम से अँगीठी सुलगाना, चायदानी रखना, चाय के बर्तन लाना, तौलिए सेपोछ कर चाय डालना आदि सभी क्रियाएँ गरिमापूर्ण, अच्छे व सहज ढंग से कीं।

3. टी-सेरेमनी में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?

उत्तर

इसमें केवल तीन आदमियों को प्रवेश दिया जाता था क्योंकि भाग-दौड़ की ज़िदंगी से दूर भूत-भविष्य की चिंता छोड़कर शांतिमय वातावरण में कुछ समय बिताना इस जगह का उद्देश्य होता है।

4. चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?

उत्तर

चाय पीने के बाद लेखक ने महसूस किया कि उसका दिमाग सुन्न होता जा रहा है, उसकी सोचने की शक्ति धीरे-धीरे मंद हो रही है। इससे सन्नाटे की आवाज भी सुनाई देने लगी। उसे लगा कि भूत-भविष्य दोनों का चिंतन न करके वर्तमान में जी रहा हो। उसे बहुत सुख मिलने लगा।

(ख) निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए –

1. गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए?

उत्तर

गाँधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी। यह आन्दोलन व्यावहारिकता को आदर्शों के स्वर पर चढ़ाकर चलाया गया। इन्होंने कई आन्दोलन चलाए − भारत छोड़ो आन्दोलन, दांडी मार्च, सत्याग्रह, असहयोग आन्दोलन आदि। उनके साथ भारत की सारी जनता थी। उन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलकर पूर्ण स्वराज की स्थापना की। भारतीयों ने भी अपने नेता के नेतृत्व में अपना भरपूर सहयोग दिया और हमें आज़ादी मिली।

2. आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रांसगिकता स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

ईमानदारी, सत्य, अहिंसा, परोपकार, परहित, कावरता, सहिष्णुता आदि ऐसे शाश्वत मूल्य हैं जिनकी प्रांसगिकता आज भी है। इनकी आज भी उतनी ही ज़रूरत है जितनी पहले थी। आज के समाज को सत्य अहिंसा की अत्यन्त आवश्यक है। इन्हीं मूल्यों पर संसार नैतिक आचरण करता है। यदि हम आज भी परोपकार, जीवदया, ईमानदारी के मार्ग पर चलें तो समाज को विघटन से बचाया जा सकता है।

4. शुद्ध सोने में ताबे की मिलावट या ताँबें में सोना, गाँधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है?स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

गाँधीजी ने जीवन भर सत्य और अहिंसा का पालन किया। वे आदर्शों को उंचाई तक ले जाते हैं अर्थात वे सोने में ताँबा मिलाकर उसकी कीमत कम नही करते थे बल्कि ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ा देते थे। गाँधीजी व्यवहारिकता की कीमत जानते थे। इसीलिए वे अपना विलक्षण आदर्श चला सके। लेकिन अपने आदर्शों को व्यावहारिकता के स्वर पर उतरने नहीं देते थे।

5. गिरगिट कहानी में आपने समाज में व्याप्त अवसरानुसार अपने व्यवहार को पल-पल में बदल डालने की एक बानगी देखी। इस पाठ के अंश ‘गिन्नी का सोना’ का संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘अवसरवादिता’ और ‘व्यवहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्व है?

उत्तर

गिरगिट कहानी में स्वार्थी इंस्पेक्टर पल-पल बदलता है। वह अवसर के अनुसार अपना व्यवहार बदल लेता है। ‘गिन्नी का सोना’ कहानी  में इस बात पर बल दिया गया है कि आदर्श शुद्ध सोने के समान हैं। इसमें व्यवाहिरकता का ताँबा मिलाकर उपयोगी बनाया जा सकता है। केवल व्यवहारवादी लोग गुणवान लोगों को भी पीछे छोड़कर आगे बढ़ जाते हैं। यदि समाज का हर व्यक्ति आदर्शों को छोड़कर आगे बढ़ें तो समाज विनाश की ओर जा सकता है। समाज की उन्नति सही मायने में वहीं मानी जा सकती है जहाँ नैतिकता का विकास,जीवन के मूल्यों का विकास हो।

पृष्ठ संख्या: 123

6. लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर 
लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के कारण बताएँ हैं कि मनुष्य चलता नहीं दौड़ता है, बोलता नहीं बकता है, एक महीने का काम एक दिन में करना चाहता है, दिमाग हज़ार गुना अधिक गति से दौड़ता है। अतरू तनाव बढ़ जाता है। मानसिक रोगों का प्रमुख कारण प्रतिस्पर्धा के कारण दिमाग का अनियंत्रित गति से कार्य करना है।

7. लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

लेखक के अनुसार सत्य वर्तमान है। उसी में जीना चाहिए। हम अक्सर या तो गुजरे हुए दिनों की बातों में उलझे रहते हैं या भविष्य के सपने देखते हैं। इस तरह भूत या भविष्य काल में जीते हैं। असल में दोनों काल मिथ्या हैं। वर्तमान ही सत्य है उसी में जीना चाहिए।


(ग) निम्नलिखित का आशय स्पष्ट कीजिए –

1. समाज के पास अगर शाश्वत मुल्यों जैसा कुछ है तो वह आर्दशवादी लोगों का ही दिया हुआ है।

उत्तर

आदर्शवादी लोग समाज को आदर्श रूप में रखने वाली राह बताते हैं। व्यवहारिक आदर्शवाद वास्तव में व्यवहारिकता ही है। उसमें आदर्शवाद कहीं नहीं होता है।

2. जब व्यवहारिकता का बखान होने लगता है तब प्रेक्टिकल आइडियालिस्टों के जीवन से आदर्श धीरे-धीरे पीछे हटने लगते हैं और उनकी व्यवहारिक सूझ-बूझ ही आगे आने लगती है?

उत्तर

जहाँ व्यवहारिकता होती है वहां आदर्श टिक नही पाते। वास्तव में व्यवहारिकता ही अवसरवादिता का दूसरा नाम है।
3. हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है। यहाँ कोई चलता नहीं बल्कि दौड़ता है। कोई बोलता नहीं, बकता है। हम जब अकेले पड़ते हैं तब अपने आपसे लगातार बड़बड़ाते रहते हैं।

उत्तर

जीवन की भाग-दौड़, व्यस्तता तथा आगे निकलने की होड़ ने लोगों का चैन छीन लिया है। हर व्यक्ति अपने जीवन में अधिक पाने की होड़ में भाग रहा है। इससे तनाव व निराशा बढ़ रही है।

4. सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं कि उसकी हर भंगिमा से लगता था मानो जयजयवंती के सुर गूँज रहे हों। 

उत्तर

चाय परोसने वाले ने बहुत ही सलीके से काम किया। झुककर प्रणाम करना, बरतन पौंछना, चाय डालना सभी धीरज और सुंदरता से किए मानो कोई कलाकार बड़े ही सुर में गीत गा रहा हो।

भाषा अध्यन

1. नीचे दिए गए शब्दों का वाक्यों में प्रयोग किजिए −व्यावहारिकता, आदर्श, सूझबूझ, विलक्षण, शाश्वत

उत्तर

(क) व्यावहारिकता − दादाजी की व्यावहारिकता सीखने योग्य है।
(ख) आदर्श − आज के युग में गाँधी जैसे आदर्शवादिता की ज़रूरत है।
(ग) सूझबूझ − उसकी सूझबूझ ने आज मेरी जान बचाई।
(घ) विलक्षण − महेश की अपने विषय में विलक्षण प्रतिभा है।
(ङ) शाश्वत − सत्य, अहिंसा मानव जीवन के शाश्वत नियम हैं।

2. नीचे दिए गए द्वंद्व समास का विग्रह कीजिए −

(क)माता-पिता=……………….
(ख)पाप-पुण्य=……………….
(ग)सुख-दुख=……………….
(घ)रात-दिन=……………….
(ङ)अन्न-जल=……………….
(च)घर-बाहर=……………….
(छ)देश-विदेश=……………….

उत्तर

(क)माता-पिता=माता और पिता
(ख)पाप-पुण्य=पाप और पुण्य
(ग)सुख-दुख=सुख और दुख
(घ)रात-दिन=रात और दिन
(ङ)अन्न-जल=अन्न और जल
(च)घर-बाहर=घर और बाहर
(छ)देश-विदेश=देश और विदेश

3. नीचे दिए गए विशेषण शब्दों से भाववाचक संज्ञा बनाइए −

(क)सफल=……………..
(ख)विलक्षण=……………..
(ग)व्यावहारिक=……………..
(घ)सजग=……………..
(ङ)आर्दशवादी=……………..
(च)शुद्ध=……………..

उत्तर

(क)सफल=सफलता
(ख)विलक्षण=विलक्षणता
(ग)व्यावहारिक=व्यावहारिकता
(घ)सजग=सजगता
(ङ)आर्दशवादी=आर्दशवादिता
(च)शुद्ध=शुद्धता

पृष्ठ संख्या: 124

4. नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए और शब्द के अर्थ को समझिए − शुद्ध सोना अलग है।
बहुत रात हो गई अब हमें सोना चाहिए।
ऊपर दिए गए वाक्यों में ‘सोना’ का क्या अर्थ है? पहले वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है धातु ‘स्वर्ण’। दुसरे वाक्य में ‘सोना’ का अर्थ है ‘सोना’ नामक क्रिया। अलग-अलग संदर्भों में ये शब्द अलग अर्थ देते हैं अथवा एक शब्द के कई अर्थ होते हैं। ऐसे शब्द अनेकार्थी शब्द कहलाते हैं। नीचे दिए गए शब्दों के भिन्न-भिन्न अर्थ स्पष्ट करने के लिए उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए −
उत्तर, कर, अंक, नग

उत्तर

(क)उत्तरमैंने सभी प्रश्नों के उत्तर लिख लिए हैं।
तुम्हें उत्तर दिशा में जाना है।
(ख)करहमने सभी कर चुका दिए हैं।
मंत्री जी ने अपने कर कमलों से दीप प्रज्ज्वलित किया।
(ग)अंकराम के परीक्षा में अच्छे अंक आए हैं।
बच्चा अपनी माँ की अंक में बैठा है।
(घ)नगहीरा एक कीमती नग है।
हिमालय एक बड़ा नग है।

5. नीचे दिए गए वाक्यों को संयुक्त वाक्य में बदलकर लिखिए − (क) 1. अँगीठी सुलगायी।
2. उस पर चायदानी रखी।
(ख) 1. चाय तैयार हुई।
2. उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) 1. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया।
2. तौलिये से बरतन साफ़ किए।

उत्तर

(क) अँगीठी सुलगायी और उसपर चायदानी रखी।
(ख) चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।
(ग) बगल के कमरे में जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिए से बरतन साफ़ किए।

6. नीचे दिए गए वाक्यों से मिश्र वाक्य बनाइए − (क) 1. चाय पीने की यह एक विधि है।
2. जापानी में उसे चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) 1. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था।
2. उसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) 1. चाय तैयार हुई।
2. उसने वह प्यालों में भरी।
3. फिर वे प्याले हमारे सामने रख दिए।

उत्तर

(क) यह चाय पीने की एक विधि है जिसे जापानी चा-नो-यू कहते हैं।
(ख) बाहर बेढब सा एक मिट्टी का बरतन था जिसमें पानी भरा हुआ था।
(ग) जब चाय तैयार हुई तो उसने प्यालों में भरकर हमारे सामने रख दी।

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Short Summary- पाठ 16- पतझर में टूटी पत्तियाँ

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