पञ्चदशः पाठः – माधवस्य प्रियम् अङ्गम् (Chapter 15 – Mādhavasya Priyam Aṅgam) | Class 6 Sanskrit (Deepakam) | NCERT Solutions

माधवस्य प्रियम् अङ्गम् — पूर्ण प्रश्नोत्तर समाधान | कक्षा ६ दीपकम्

NCERT · कक्षा ६ · दीपकम् · पञ्चदशः पाठः

माधवस्य प्रियम् अङ्गम्

सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर समाधान — पाठ-आधारित प्रश्न, शब्दार्थ, अभ्यास (१–८), योग्यताविस्तरः तथा परियोजना-कार्य, सरल हिन्दी व्याख्या सहित।

पाठ्यपुस्तक पृष्ठ १५२–१५९ ८ अभ्यास-प्रश्न · पूर्ण हल चित्र + व्याख्या सहित
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Section A · In-text

पाठ-आधारित प्रश्न एवं पाठ-बोधः

कथा-सारः — पाठ का सार Summary of the lesson in simple Hindi

माधवः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गानि पश्यति
माधवः स्वप्ने अपने शरीर के अङ्गों को परस्पर वाद-विवाद करते हुए देखता है।

सारः

माधव नाम का एक बालक था। एक रात स्वप्न में उसने अपने ही शरीर के अङ्गों को देखा। सभी अङ्ग आपस में इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि हममें सबसे श्रेष्ठ कौन है?

पाद ने कहा — मेरे कारण माधव चलता है, इसलिए मैं श्रेष्ठ हूँ। हस्त ने कहा — मेरे कारण वह लिखता है, गृहकार्य करता है और वस्तुएँ लाता है। नयन बोला — मेरे बिना तो वह कुछ देख ही नहीं सकता। कर्ण ने मुस्कुराकर कहा — यदि माधव मार्ग पर वाहनों की ध्वनि न सुने तो दुर्घटना हो सकती है; मेरे ही कारण वह शिक्षक का उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है और सङ्गीत सुनकर आनन्द पाता है। मुख ने कहा — मेरे कारण वह भोजन करता है, भाषण देता है, प्रश्नों के उत्तर देता है; मेरी सहायता से ही उदर को भोजन मिलता है। अन्त में उदर ने कहा — शोर मत करो, चलो माधव से ही पूछते हैं कि श्रेष्ठ कौन है।

माधव ने विचारकर समझाया — मेरे शरीर के सभी अङ्ग मेरे लिए उपकारक हैं। आँखों से देखता हूँ, कानों से सुनता हूँ, मुख से बोलता और खाता हूँ, उदर से पाचन द्वारा शक्ति पाता हूँ और पैरों से चलता हूँ। इसलिए आप सब श्रेष्ठ हैं, आप सब मुझे प्रिय हैं

सन्देशः — शरीर का कोई भी अङ्ग छोटा या बड़ा नहीं होता। सभी अङ्ग मिलकर काम करते हैं, इसलिए सबका समान महत्त्व है। यही बात परिवार, विद्यालय और समाज पर भी लागू होती है — सहयोग ही श्रेष्ठता है।

कः अङ्गः किम् वदति? — कौन-सा अङ्ग क्या कहता है पाठ के संवाद, चित्र सहित

पादः
पादः (पैर) “अहं श्रेष्ठः। मम कारणेन माधवः चलति।” मैं श्रेष्ठ हूँ, क्योंकि मेरे कारण माधव चलता है।
हस्तः
हस्तः (हाथ) “मम कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति, वस्तूनि आनयति च। अतः अहम् एव श्रेष्ठः।” मेरे कारण वह लिखता है, गृहकार्य करता है और वस्तुएँ लाता है — इसलिए मैं ही श्रेष्ठ हूँ।
नयनम्
नयनम् (आँख) “मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम्?” क्या मेरे बिना माधव कुछ भी देख सकता है?
कर्णः
कर्णः (कान) “माधवः यदा मार्गे गच्छति तदा पृष्ठतः यानानां ध्वनिं यदि न शृणोति… तर्हि दुर्घटना भवेत्।” यदि वह सड़क पर पीछे से आते वाहनों की ध्वनि न सुने तो दुर्घटना हो सकती है। मेरे ही कारण वह उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है और सङ्गीत सुनकर आनन्द पाता है।
मुखम्
मुखम् (मुँह) “मम कारणेन भोजनं करोति, भाषणं करोति, प्रश्नस्य उत्तरं वदति। मम साहाय्येन उदरमपि भोजनं प्राप्नोति।” मेरे कारण वह खाता है, बोलता है और उत्तर देता है; मेरी सहायता से ही पेट को भी भोजन मिलता है।
उदरम्
उदरम् (पेट) “भवतु, भवतु, कोलाहलं न कुर्वन्तु। वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः?” बस-बस, शोर मत करो। हम सब माधव से ही पूछ लेते हैं कि श्रेष्ठ कौन है।

पाठ-आधारित प्रश्नोत्तराणि Comprehension questions with answers

१. माधवः कः आसीत्?

माधवनामकः एकः बालकः आसीत्।

माधव नाम का एक बालक था।

२. माधवः स्वप्ने किम् दृष्टवान्?

सः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गानि दृष्टवान्।

उसने स्वप्न में अपने शरीर के अङ्गों को देखा।

३. अङ्गानि किम् कुर्वन्ति स्म?

तानि परस्परं चर्चां कुर्वन्ति स्म।

वे आपस में (कौन श्रेष्ठ है, इस विषय पर) चर्चा कर रहे थे।

४. कस्य कारणेन माधवः चलति?

पादस्य कारणेन माधवः चलति।

पैरों के कारण माधव चलता है।

५. हस्तस्य कारणेन माधवः किं किं करोति?

हस्तस्य कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति, वस्तूनि आनयति च।

हाथ के कारण वह लिखता है, गृहकार्य करता है और वस्तुएँ लाता है।

६. यदि माधवः यानानां ध्वनिं न शृणोति तर्हि किं भवेत्?

तर्हि दुर्घटना भवेत्।

तो दुर्घटना हो सकती है — इसीलिए कान बहुत उपयोगी हैं।

७. माधवः केन ज्ञानं वर्धयति?

सः कर्णाभ्यां शिक्षकस्य उपदेशं श्रुत्वा ज्ञानं वर्धयति।

वह कानों से शिक्षक का उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है।

८. उदरं किम् सूचयति?

उदरं सूचयति — “कोलाहलं न कुर्वन्तु, वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः?”

उदर कहता है — शोर मत करो, हम माधव से ही पूछ लेते हैं कि श्रेष्ठ कौन है।

९. माधवः किम् बोधयति?

“मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति। अतः भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः, भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः।”

माधव समझाता है कि उसके शरीर के सभी अङ्ग उसके लिए उपकारी हैं, इसलिए सभी श्रेष्ठ और सभी प्रिय हैं।

१०. पाठस्य नाम “माधवस्य प्रियम् अङ्गम्” किमर्थम्?

यतः माधवाय सर्वाणि अङ्गानि समानरूपेण प्रियाणि सन्ति — न किमपि एकम् एव प्रियम्।

क्योंकि माधव को कोई एक अङ्ग नहीं, बल्कि सभी अङ्ग समान रूप से प्रिय हैं। यही पाठ का मुख्य भाव है।

माधवः सर्वेभ्यः अङ्गेभ्यः कथयति — भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः
“भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः, भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः।”

वयं शब्दार्थान् जानीमः — शब्दार्थ तालिका पाठ्यपुस्तक पृष्ठ १५४ के सभी शब्दार्थ

शब्दःअर्थः (संस्कृत)हिन्दीEnglish
स्वप्नेस्वप्नसमयेस्वप्न मेंIn dream
स्वशरीरस्यनिजकायस्यअपने शरीर केOf his own body
अङ्गानिअवयवाःअङ्गBody parts
दृष्टवान्अपश्यत्देखाSaw
चर्चाम्आलापम्चर्चा कोDiscussion
श्रेष्ठःउत्तमःश्रेष्ठGreat
अनुक्षणम्सत्वरम्उसी समयInstantly
गृहकार्यम्गृहे पठनकर्मगृहकार्यHomework
मां विनामां विहायमेरे बिनाWithout me
स्मितम्मन्दहासःथोड़ा हँसकरSmile
शक्नोतिसमर्थः भवतिसमर्थ होता हैAble to
मार्गेवर्त्मनिमार्ग मेंOn road
सङ्गीतम्सुन्दरं गीतम्सङ्गीतMusic
साहाय्येनसहायकारणेनसहायता सेWith the help of
प्राप्नोतिप्राप्तं करोतिप्राप्त करता हैGets
सबलाःबलवन्तःबलवान्Strong
भवेत्स्यात्हो सकता/सकती हैMay happen
कोलाहलम्आरवःशोरQuarrel / noise
विचारयतिचिन्तयतिविचार करता हैThinks
बोधयतिज्ञापयतिसमझाता हैAdvises
उपकारकाणिसहायकानिसहायता करने वालेHelpful
शक्तिम्सामर्थ्यम्ताकतStrength

↔ तालिका को दायें-बायें खिसकाकर देखें

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Section B · Exercise

वयम् अभ्यासं कुर्मः — अभ्यास प्रश्नोत्तर

चित्रं दृष्ट्वा अङ्गस्य नाम लिखन्तु— चित्र देखकर अङ्ग का नाम लिखिए।

उत्तराणि

नयनम् — आँख
(क) नयनम् / नेत्रम्आँख · Eye
उदरम् — पेट
(ख) उदरम्पेट · Stomach
पादः — पैर
(ग) पादःपैर · Foot
भुजः — भुजा
(घ) भुजः / बाहुःभुजा · Arm
कर्णः — कान
(ङ) कर्णःकान · Ear
व्याख्या — हर अङ्ग का नाम संस्कृत में लिंग के अनुसार बदलता है: नयनम्, उदरम् नपुंसकलिङ्ग हैं (अन्त में -म्), जबकि पादः, भुजः, कर्णः पुँल्लिङ्ग हैं (अन्त में -ः)। लिखते समय यह चिह्न लगाना न भूलें।

कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारम् अङ्गस्य कार्यं लिखन्तु— कोष्ठक से उचित क्रियापद चुनकर उदाहरण के अनुसार अङ्ग का कार्य लिखिए।

उत्तराणि

यथानयनं — पश्यतिआँख देखने का काम करती है। (दिया हुआ उदाहरण)
(क)मुखम् — वदतिमुख बोलने का कार्य करता है। पाठ में भी आया है — “मुखेन भाषणं करोमि”। चलति पैर का कार्य है, इसलिए वह गलत है।
(ख)पादः — चलतिपैर चलने का कार्य करता है — “मम कारणेन माधवः चलति”।
(ग)कर्णः — शृणोतिकान सुनने का कार्य करता है।
(घ)नासिका — आघ्राणं करोतिनाक सूँघने का कार्य करती है (आघ्राणम् = सूँघना)।
(ङ)जिह्वा — आस्वादनं करोतिजीभ स्वाद लेने का कार्य करती है (आस्वादनम् = चखना)।
स्मरणीयम् — इन सभी वाक्यों में कर्ता एकवचन तथा प्रथमपुरुष है, इसलिए क्रिया में -ति प्रत्यय लगा है — पश्यति, वदति, चलति, शृणोति

कोष्ठकात् समुचितां सङ्ख्यां चित्वा रिक्तस्थानं पूरयन्तु— कोष्ठक से उचित संख्या चुनकर रिक्त स्थान भरिए।

उत्तराणि — चरण-दर-चरण

(क)मम एकम् शिरः अस्ति। कारण: शरीर में सिर एक ही होता है → संख्या $1$। ‘शिरः’ नपुंसकलिङ्ग एकवचन है, इसलिए विशेषण भी नपुंसक एकवचन एकम् होगा। क्रिया अस्ति (एकवचन) इसकी पुष्टि करती है।
(ख)मम द्वौ पादौ स्तः। कारण: पैर दो होते हैं → $2$। ‘पादौ’ द्विवचन रूप है और क्रिया स्तः भी द्विवचन है, अतः संख्या भी द्विवचन द्वौ ही आएगी। त्रयः ($3$) व पञ्च ($5$) बहुवचन हैं — असंगत।
(ग)मम बहवः केशाः सन्ति। कारण: बाल गिने नहीं जा सकते, अतः निश्चित संख्या ($10$ या $8$) उपयुक्त नहीं। ‘बहवः’ का अर्थ है बहुत सारे। क्रिया सन्ति बहुवचन है।
(घ)मम द्वात्रिंशत् दन्ताः सन्ति। गणना: ऊपरी जबड़े में $16$ + निचले जबड़े में $16$ →
$16 + 16 = 32$
संस्कृत में $32$ = द्वात्रिंशत् (द्वा + त्रिंशत् = दो अधिक तीस)। अष्टाविंशतिः = $28$ जो बच्चों के दूध के दाँतों की गिनती नहीं, बल्कि अक्ल-दाढ़ रहित संख्या है — पाठ का अपेक्षित उत्तर $32$ है।
(ङ)मम हस्तयोः दश अङ्गुल्यः सन्ति। गणना: एक हाथ में $5$ उँगलियाँ, दो हाथ →
$5 \times 2 = 10$
अतः दश ($10$)। ‘हस्तयोः’ द्विवचन (दोनों हाथों में) है, इसलिए दुगुना करना ज़रूरी है।
सङ्ख्या-स्मरण: एकम् $=1$ · द्वौ $=2$ · त्रयः $=3$ · चत्वारः $=4$ · पञ्च $=5$ · अष्ट $=8$ · दश $=10$ · अष्टाविंशतिः $=28$ · द्वात्रिंशत् $=32$ · पञ्चदश $=15$

कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारं शरीराङ्गस्य नाम लिखन्तु— क्रिया देखकर बताइए कि वह कार्य कौन-सा अङ्ग करता है।

उत्तराणि

यथापश्यति — नयनम्देखने का कार्य आँख करती है। (उदाहरण)
(क)शृणोति — कर्णःसुनने का कार्य कान करता है। गुल्फः = टखना, चिबुकम् = ठोड़ी — ये सुन नहीं सकते।
(ख)धावति — पादद्वयम्दौड़ने के लिए दोनों पैर चाहिए। ‘पादद्वयम्’ = पाद + द्वयम् = दो पैर।
(ग)नमति — शिरःझुकने (प्रणाम करने) का कार्य सिर करता है। कूर्परः = कोहनी, जङ्घा = पिंडली।
(घ)सूचयति — अङ्गुलीइशारा करने का कार्य उँगली (तर्जनी) करती है। ‘सूचयति’ = संकेत करना।
(ङ)लिखति — हस्तःलिखने का कार्य हाथ करता है — पाठ में भी “मम कारणेन माधवः लिखति” आया है। मणिबन्धः = कलाई, कटिः = कमर।

पट्टिकातः शब्दान् चित्वा यथायोग्यं गणेषु लिखन्तु— पट्टिका के शब्दों को उचित समूह (मुख / हस्त / पाद) में लिखिए।

पट्टिका: नासिका · मणिबन्धः · चिबुकम् · कूर्परः · हस्तः · मणिबन्धः · कपोलः · भुजः · ललाटम् · स्कन्धः · जङ्घा · नयनम् · जानु · ऊरुः

उत्तराणि — तीन गणाः

मुखमण्डलम् — face

१. मुखमण्डलम् (शिरः)

  • ललाटम् माथा · Forehead
  • नयनम् आँख · Eye
  • नासिका नाक · Nose
  • कपोलः गाल · Cheek
  • चिबुकम् ठोड़ी · Chin
हस्तः — arm

२. हस्तः / भुजः

  • स्कन्धः कंधा · Shoulder
  • भुजः भुजा · Arm
  • कूर्परः कोहनी · Elbow
  • मणिबन्धः कलाई · Wrist
  • हस्तः हाथ · Hand
पादः — leg

३. पादः

  • ऊरुः जाँघ · Thigh
  • जानु घुटना · Knee
  • जङ्घा पिंडली · Shank
ध्यान दें — पट्टिका में मणिबन्धः दो बार छपा है; दोनों बार उसका स्थान हाथ ही है, अतः वह दूसरे गण में ही आएगा। ऊपर से नीचे का क्रम याद रखें — ललाटम् → नयनम् → नासिका → कपोलः → चिबुकम् (चेहरा), स्कन्धः → भुजः → कूर्परः → मणिबन्धः → हस्तः (हाथ), ऊरुः → जानु → जङ्घा (पैर)।

कोष्ठकात् समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि रचयन्तु— कोष्ठक से सही पद चुनकर वाक्य बनाइए।

उत्तराणि

(क)अहं मुखेन गायनं करोमि।गाना मुँह से गाया जाता है। मुख + तृतीया एकवचन = मुखेन।
(ख)अहं पादाभ्यां धावनं करोमि।दौड़ने में दोनों पैर लगते हैं। पाद + तृतीया द्विवचन = पादाभ्याम्।
(ग)अहं नासिकया आघ्राणं करोमि।सूँघना नाक से होता है। नासिका (स्त्रीलिङ्ग) + तृतीया एकवचन = नासिकया।
(घ)अहं कर्णाभ्याम् श्रवणं करोमि।सुनने में दोनों कान लगते हैं। कर्ण + तृतीया द्विवचन = कर्णाभ्याम्।
(ङ)अहं मुखेन भोजनं करोमि।भोजन मुँह से किया जाता है। पाठ की पंक्ति — “मुखेन भाषणं करोमि भोजनं करोमि च”।
व्याकरण-सूत्र: जिस अङ्ग की सहायता से काम होता है, वह करण कहलाता है और उसमें तृतीया विभक्ति लगती है (करणे तृतीया)।
एकवचन → -एन / -या (मुखेन, हस्तेन, नासिकया)  ·  द्विवचन → -आभ्याम् (पादाभ्याम्, कर्णाभ्याम्, नयनाभ्याम्)  ·  बहुवचन → -ैः (अङ्गुलिभिः, नखैः)।

पट्टिकातः समुचितं शरीराङ्गं चित्वा भगिनी कुत्र किं धरति इति सूचयन्तु— बहन कौन-सा आभूषण शरीर के किस अङ्ग पर धारण करती है, लिखिए।

उत्तराणि

वाक्यम्स्थानम् (उत्तर)अर्थः
भगिनी … पादुकाद्वयं धरति।पादयोःदोनों पैरों में चप्पल पहनती है।
भगिनी … मुद्रिकां धरति।अङ्गुल्यांउँगली में अँगूठी पहनती है।
भगिनी … मालां धरति।कण्ठेगले में माला पहनती है।
भगिनी … उपनेत्रं धरति।नेत्रयोःआँखों पर चश्मा लगाती है।
भगिनी … ओष्ठरागं धरति।ओष्ठयोःहोंठों पर लिपस्टिक लगाती है।
भगिनी … कङ्कणानि धरति।हस्तयोःहाथों में चूड़ियाँ पहनती है।
भगिनी … घटीयन्त्रं धरति।वामहस्तेबाएँ हाथ में घड़ी पहनती है।
भगिनी … कुण्डलद्वयं धरति।कर्णयोःदोनों कानों में कुण्डल पहनती है।
भगिनी … कुङ्कुमं धरति।ललाटेमाथे पर कुंकुम लगाती है।
भगिनी … कज्जलं धरति।नयनयोःआँखों में काजल लगाती है।

↔ तालिका को दायें-बायें खिसकाकर देखें

चित्र-सङ्केतः

@edugrown @edugrown कर्णयोः — कुण्डलद्वयम् कण्ठे — माला हस्तयोः — कङ्कणानि पादयोः — पादुकाद्वयम् ललाटे — कुङ्कुमम् नेत्रयोः — उपनेत्रम् नयनयोः — कज्जलम् ओष्ठयोः — ओष्ठरागः वामहस्ते — घटीयन्त्रम् अङ्गुल्यां — मुद्रिका

↔ चित्र को दायें-बायें खिसकाकर पूरा देखें

व्याकरण-सूत्र: ‘कहाँ’ का उत्तर देने वाले पद में सप्तमी विभक्ति लगती है (अधिकरणे सप्तमी)।
एकवचन → -ए (कण्ठे, ललाटे, वामहस्ते)  ·  द्विवचन → -योः (पादयोः, नेत्रयोः, ओष्ठयोः, हस्तयोः, कर्णयोः, नयनयोः)  ·  स्त्रीलिङ्ग एकवचन → -आम् (अङ्गुल्याम्)।
उपनेत्रम् (चश्मा) आँखों पर टिकता है — नेत्रयोः; कज्जलम् (काजल) आँखों के भीतर लगता है — नयनयोः। दोनों का अर्थ आँख ही है, पर पट्टिका में दोनों शब्द दिए हैं इसलिए एक-एक का प्रयोग करें।

वाक्यं शुद्धम् अशुद्धं वा इति सूचयन्तु— बताइए कि वाक्य शुद्ध है या अशुद्ध।

उत्तराणि

(क)अहं कर्णाभ्यां भोजनं करोमि। — अशुद्धम् कान से भोजन नहीं किया जाता। शुद्ध वाक्य: अहं मुखेन भोजनं करोमि।
(ख)अहं नासिकाद्वारा श्वासं स्वीकरोमि। — शुद्धम् साँस नाक से ही ली जाती है — वाक्य पूर्णतः सही है।
(ग)अहम् अङ्गुष्ठैः गणनां करोमि। — अशुद्धम् गिनती अँगूठों से नहीं, उँगलियों से की जाती है; साथ ही अँगूठे केवल दो होते हैं, इसलिए बहुवचन ‘अङ्गुष्ठैः’ भी असंगत है। शुद्ध वाक्य: अहम् अङ्गुलिभिः गणनां करोमि।
(घ)अहं नयनाभ्यां श्रवणं करोमि। — अशुद्धम् आँखों से सुना नहीं जाता। शुद्ध वाक्य: अहं कर्णाभ्यां श्रवणं करोमि। (आँखों से तो — अहं नयनाभ्यां पश्यामि।)
(ङ)अहं हस्तेन कार्यं करोमि। — शुद्धम् काम हाथ से ही किया जाता है — वाक्य सही है।
परीक्षा-सूत्र: ऐसे प्रश्नों में पहले देखिए कि कार्य और अङ्ग का मेल है या नहीं; फिर देखिए कि वचन (एक/द्वि/बहु) सही है या नहीं। दोनों ठीक हों तभी वाक्य शुद्ध है।

योग्यताविस्तरः — शरीराङ्गानां नामानि शरीर के सभी अङ्गों के संस्कृत नाम (पृष्ठ १५८)

शरीराङ्गानां नामानि — चिह्नित चित्र
पाठ्यपुस्तक का चिह्नित चित्र — इसी को देखकर परियोजना-कार्य बनाइए।
संस्कृतम्हिन्दीEnglish
केशाःबालHair
ललाटम्माथाForehead
भ्रूःभौंहEyebrow
नेत्रम् / नयनम्आँखEye
नासिकानाकNose
कर्णःकानEar
कपोलःगालCheek
मुखम्मुँहMouth / Face
चिबुकम्ठोड़ीChin
ग्रीवागरदनNeck
कण्ठःगलाThroat
स्कन्धःकंधाShoulder
भुजःभुजाArm
वक्षःस्थलम्छातीChest
स्तनःस्तनBreast
कफोणिः / कूर्परःकोहनीElbow
मणिबन्धःकलाईWrist
हस्तःहाथHand
अङ्गुष्ठःअँगूठाThumb
अङ्गुल्यःउँगलियाँFingers
उदरम्पेटStomach
नाभिःनाभिNavel
कटिःकमरWaist
ऊरुःजाँघThigh
जानुघुटनाKnee
जङ्घापिंडलीShank
गुल्फःटखनाAnkle
पादःपैरFoot
पार्ष्णिःएड़ीHeel
पादाङ्गुष्ठःपैर का अँगूठाBig toe
नखाःनाखूनNails

↔ तालिका को दायें-बायें खिसकाकर देखें

गतिविधि-कार्यम् एवं परियोजनाकार्यम् कक्षा-गतिविधि और प्रोजेक्ट कार्य — कैसे करें

गतिविधि-कार्यम्

कक्षायां सर्वे छात्राः शिक्षकस्य मार्गदर्शनेन अस्य पाठस्य नाट्याभिनयं कुर्वन्तु।

कैसे करें: कक्षा में सात विद्यार्थी चुनें — एक माधवः बने और शेष पादः, हस्तः, नयनम्, कर्णः, मुखम्, उदरम् बनें। हर पात्र गत्ते पर अपने अङ्ग का चित्र बनाकर गले में लटका ले। माधव चारपाई पर सोने का अभिनय करे, बाकी अङ्ग बारी-बारी आकर पाठ के अपने संवाद बोलें। अन्त में माधव उठकर कहे — “भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः, भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः।” और सब मिलकर ताली बजाएँ।

संवाद-सूची (रटने के लिए): पादः → “अहं श्रेष्ठः, मम कारणेन माधवः चलति।” · हस्तः → “मम कारणेन माधवः लिखति।” · नयनम् → “मां विना माधवः किमपि द्रष्टुं शक्नोति किम्?” · कर्णः → “मम कारणेन सः शृणोति।” · मुखम् → “मम कारणेन सः भोजनं करोति।” · उदरम् → “कोलाहलं न कुर्वन्तु।”

परियोजनाकार्यम्

योग्यताविस्तरभागे विद्यमानं चित्रं स्फोरकपत्रे रचयित्वा अङ्गानां नामानि लिखन्तु।

कैसे करें: एक चार्ट पेपर (स्फोरकपत्र) लीजिए और ऊपर दिए गए योग्यताविस्तर वाले चित्र जैसा मानव-आकृति बनाइए। फिर—

१.पेंसिल से हल्की आकृति बनाकर बाद में गहरी रेखा खींचिए।
२.सिर से पैर तक क्रम में बिंदु लगाइए — केशाः, ललाटम्, भ्रूः, नेत्रम्, नासिका, कर्णः, मुखम्, ग्रीवा …
३.हर बिंदु से बाहर की ओर रेखा खींचकर संस्कृत नाम लिखिए; चाहें तो कोष्ठक में हिन्दी अर्थ भी लिखें।
४.बाईं ओर के नाम बाईं तरफ़ और दाईं ओर के नाम दाईं तरफ़ रखें ताकि रेखाएँ आपस में न उलझें।
५.शीर्षक लिखिए — “शरीराङ्गानां नामानि” और नीचे अपना नाम व कक्षा।

मधुराष्टकम् — पठन्तु स्मरन्तु च

पाठ के अन्त में (पृष्ठ १५९) श्रीवल्लभाचार्य रचित मधुराष्टकम् दिया गया है — आठ श्लोकों का यह स्तोत्र है, जिसके हर श्लोक का अन्त एक ही पंक्ति से होता है, जिसका भाव है — “मधुरता के स्वामी (श्रीकृष्ण) का सब कुछ मधुर है।”

इस पाठ से सम्बन्ध: इसमें भी शरीर के अङ्गों के नाम आते हैं — अधरम् (होंठ), वदनम् (मुख), नयनम् (आँख), हृदयम् (हृदय), पाणिः (हाथ), पादौ (दोनों पैर)। इसलिए इसे कण्ठस्थ करने से अङ्गों के संस्कृत नाम अपने-आप याद हो जाते हैं। पूरा पाठ अपनी पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ १५९ पर पढ़कर लयबद्ध रूप से याद कीजिए।


भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः · भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः

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