NCERT · कक्षा ६ · दीपकम् · पञ्चदशः पाठः
माधवस्य प्रियम् अङ्गम्
सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर समाधान — पाठ-आधारित प्रश्न, शब्दार्थ, अभ्यास (१–८), योग्यताविस्तरः तथा परियोजना-कार्य, सरल हिन्दी व्याख्या सहित।
Section A · In-text
पाठ-आधारित प्रश्न एवं पाठ-बोधः
कथा-सारः — पाठ का सार Summary of the lesson in simple Hindi
सारः
माधव नाम का एक बालक था। एक रात स्वप्न में उसने अपने ही शरीर के अङ्गों को देखा। सभी अङ्ग आपस में इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि हममें सबसे श्रेष्ठ कौन है?
पाद ने कहा — मेरे कारण माधव चलता है, इसलिए मैं श्रेष्ठ हूँ। हस्त ने कहा — मेरे कारण वह लिखता है, गृहकार्य करता है और वस्तुएँ लाता है। नयन बोला — मेरे बिना तो वह कुछ देख ही नहीं सकता। कर्ण ने मुस्कुराकर कहा — यदि माधव मार्ग पर वाहनों की ध्वनि न सुने तो दुर्घटना हो सकती है; मेरे ही कारण वह शिक्षक का उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है और सङ्गीत सुनकर आनन्द पाता है। मुख ने कहा — मेरे कारण वह भोजन करता है, भाषण देता है, प्रश्नों के उत्तर देता है; मेरी सहायता से ही उदर को भोजन मिलता है। अन्त में उदर ने कहा — शोर मत करो, चलो माधव से ही पूछते हैं कि श्रेष्ठ कौन है।
माधव ने विचारकर समझाया — मेरे शरीर के सभी अङ्ग मेरे लिए उपकारक हैं। आँखों से देखता हूँ, कानों से सुनता हूँ, मुख से बोलता और खाता हूँ, उदर से पाचन द्वारा शक्ति पाता हूँ और पैरों से चलता हूँ। इसलिए आप सब श्रेष्ठ हैं, आप सब मुझे प्रिय हैं।
कः अङ्गः किम् वदति? — कौन-सा अङ्ग क्या कहता है पाठ के संवाद, चित्र सहित
पाठ-आधारित प्रश्नोत्तराणि Comprehension questions with answers
१. माधवः कः आसीत्?
माधवनामकः एकः बालकः आसीत्।
माधव नाम का एक बालक था।
२. माधवः स्वप्ने किम् दृष्टवान्?
सः स्वप्ने स्वशरीरस्य अङ्गानि दृष्टवान्।
उसने स्वप्न में अपने शरीर के अङ्गों को देखा।
३. अङ्गानि किम् कुर्वन्ति स्म?
तानि परस्परं चर्चां कुर्वन्ति स्म।
वे आपस में (कौन श्रेष्ठ है, इस विषय पर) चर्चा कर रहे थे।
४. कस्य कारणेन माधवः चलति?
पादस्य कारणेन माधवः चलति।
पैरों के कारण माधव चलता है।
५. हस्तस्य कारणेन माधवः किं किं करोति?
हस्तस्य कारणेन माधवः लिखति, गृहकार्यं करोति, वस्तूनि आनयति च।
हाथ के कारण वह लिखता है, गृहकार्य करता है और वस्तुएँ लाता है।
६. यदि माधवः यानानां ध्वनिं न शृणोति तर्हि किं भवेत्?
तर्हि दुर्घटना भवेत्।
तो दुर्घटना हो सकती है — इसीलिए कान बहुत उपयोगी हैं।
७. माधवः केन ज्ञानं वर्धयति?
सः कर्णाभ्यां शिक्षकस्य उपदेशं श्रुत्वा ज्ञानं वर्धयति।
वह कानों से शिक्षक का उपदेश सुनकर ज्ञान बढ़ाता है।
८. उदरं किम् सूचयति?
उदरं सूचयति — “कोलाहलं न कुर्वन्तु, वयं सर्वे माधवम् एव पृच्छाम, कः श्रेष्ठः?”
उदर कहता है — शोर मत करो, हम माधव से ही पूछ लेते हैं कि श्रेष्ठ कौन है।
९. माधवः किम् बोधयति?
“मम शरीरस्य सर्वाणि अङ्गानि मम कृते उपकारकाणि सन्ति। अतः भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः, भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः।”
माधव समझाता है कि उसके शरीर के सभी अङ्ग उसके लिए उपकारी हैं, इसलिए सभी श्रेष्ठ और सभी प्रिय हैं।
१०. पाठस्य नाम “माधवस्य प्रियम् अङ्गम्” किमर्थम्?
यतः माधवाय सर्वाणि अङ्गानि समानरूपेण प्रियाणि सन्ति — न किमपि एकम् एव प्रियम्।
क्योंकि माधव को कोई एक अङ्ग नहीं, बल्कि सभी अङ्ग समान रूप से प्रिय हैं। यही पाठ का मुख्य भाव है।
वयं शब्दार्थान् जानीमः — शब्दार्थ तालिका पाठ्यपुस्तक पृष्ठ १५४ के सभी शब्दार्थ
| शब्दः | अर्थः (संस्कृत) | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| स्वप्ने | स्वप्नसमये | स्वप्न में | In dream |
| स्वशरीरस्य | निजकायस्य | अपने शरीर के | Of his own body |
| अङ्गानि | अवयवाः | अङ्ग | Body parts |
| दृष्टवान् | अपश्यत् | देखा | Saw |
| चर्चाम् | आलापम् | चर्चा को | Discussion |
| श्रेष्ठः | उत्तमः | श्रेष्ठ | Great |
| अनुक्षणम् | सत्वरम् | उसी समय | Instantly |
| गृहकार्यम् | गृहे पठनकर्म | गृहकार्य | Homework |
| मां विना | मां विहाय | मेरे बिना | Without me |
| स्मितम् | मन्दहासः | थोड़ा हँसकर | Smile |
| शक्नोति | समर्थः भवति | समर्थ होता है | Able to |
| मार्गे | वर्त्मनि | मार्ग में | On road |
| सङ्गीतम् | सुन्दरं गीतम् | सङ्गीत | Music |
| साहाय्येन | सहायकारणेन | सहायता से | With the help of |
| प्राप्नोति | प्राप्तं करोति | प्राप्त करता है | Gets |
| सबलाः | बलवन्तः | बलवान् | Strong |
| भवेत् | स्यात् | हो सकता/सकती है | May happen |
| कोलाहलम् | आरवः | शोर | Quarrel / noise |
| विचारयति | चिन्तयति | विचार करता है | Thinks |
| बोधयति | ज्ञापयति | समझाता है | Advises |
| उपकारकाणि | सहायकानि | सहायता करने वाले | Helpful |
| शक्तिम् | सामर्थ्यम् | ताकत | Strength |
↔ तालिका को दायें-बायें खिसकाकर देखें
Section B · Exercise
वयम् अभ्यासं कुर्मः — अभ्यास प्रश्नोत्तर
चित्रं दृष्ट्वा अङ्गस्य नाम लिखन्तु— चित्र देखकर अङ्ग का नाम लिखिए।
उत्तराणि
कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारम् अङ्गस्य कार्यं लिखन्तु— कोष्ठक से उचित क्रियापद चुनकर उदाहरण के अनुसार अङ्ग का कार्य लिखिए।
उत्तराणि
कोष्ठकात् समुचितां सङ्ख्यां चित्वा रिक्तस्थानं पूरयन्तु— कोष्ठक से उचित संख्या चुनकर रिक्त स्थान भरिए।
उत्तराणि — चरण-दर-चरण
$16 + 16 = 32$
संस्कृत में $32$ = द्वात्रिंशत् (द्वा + त्रिंशत् = दो अधिक तीस)। अष्टाविंशतिः = $28$ जो बच्चों के दूध के दाँतों की गिनती नहीं, बल्कि अक्ल-दाढ़ रहित संख्या है — पाठ का अपेक्षित उत्तर $32$ है।
$5 \times 2 = 10$
अतः दश ($10$)। ‘हस्तयोः’ द्विवचन (दोनों हाथों में) है, इसलिए दुगुना करना ज़रूरी है।
कोष्ठकात् समुचितं क्रियापदं चित्वा उदाहरणानुसारं शरीराङ्गस्य नाम लिखन्तु— क्रिया देखकर बताइए कि वह कार्य कौन-सा अङ्ग करता है।
उत्तराणि
पट्टिकातः शब्दान् चित्वा यथायोग्यं गणेषु लिखन्तु— पट्टिका के शब्दों को उचित समूह (मुख / हस्त / पाद) में लिखिए।
उत्तराणि — तीन गणाः
१. मुखमण्डलम् (शिरः)
- ललाटम् माथा · Forehead
- नयनम् आँख · Eye
- नासिका नाक · Nose
- कपोलः गाल · Cheek
- चिबुकम् ठोड़ी · Chin
२. हस्तः / भुजः
- स्कन्धः कंधा · Shoulder
- भुजः भुजा · Arm
- कूर्परः कोहनी · Elbow
- मणिबन्धः कलाई · Wrist
- हस्तः हाथ · Hand
३. पादः
- ऊरुः जाँघ · Thigh
- जानु घुटना · Knee
- जङ्घा पिंडली · Shank
कोष्ठकात् समुचितं पदं चित्वा वाक्यानि रचयन्तु— कोष्ठक से सही पद चुनकर वाक्य बनाइए।
उत्तराणि
एकवचन → -एन / -या (मुखेन, हस्तेन, नासिकया) · द्विवचन → -आभ्याम् (पादाभ्याम्, कर्णाभ्याम्, नयनाभ्याम्) · बहुवचन → -ैः (अङ्गुलिभिः, नखैः)।
पट्टिकातः समुचितं शरीराङ्गं चित्वा भगिनी कुत्र किं धरति इति सूचयन्तु— बहन कौन-सा आभूषण शरीर के किस अङ्ग पर धारण करती है, लिखिए।
उत्तराणि
| वाक्यम् | स्थानम् (उत्तर) | अर्थः |
|---|---|---|
| भगिनी … पादुकाद्वयं धरति। | पादयोः | दोनों पैरों में चप्पल पहनती है। |
| भगिनी … मुद्रिकां धरति। | अङ्गुल्यां | उँगली में अँगूठी पहनती है। |
| भगिनी … मालां धरति। | कण्ठे | गले में माला पहनती है। |
| भगिनी … उपनेत्रं धरति। | नेत्रयोः | आँखों पर चश्मा लगाती है। |
| भगिनी … ओष्ठरागं धरति। | ओष्ठयोः | होंठों पर लिपस्टिक लगाती है। |
| भगिनी … कङ्कणानि धरति। | हस्तयोः | हाथों में चूड़ियाँ पहनती है। |
| भगिनी … घटीयन्त्रं धरति। | वामहस्ते | बाएँ हाथ में घड़ी पहनती है। |
| भगिनी … कुण्डलद्वयं धरति। | कर्णयोः | दोनों कानों में कुण्डल पहनती है। |
| भगिनी … कुङ्कुमं धरति। | ललाटे | माथे पर कुंकुम लगाती है। |
| भगिनी … कज्जलं धरति। | नयनयोः | आँखों में काजल लगाती है। |
↔ तालिका को दायें-बायें खिसकाकर देखें
चित्र-सङ्केतः
↔ चित्र को दायें-बायें खिसकाकर पूरा देखें
एकवचन → -ए (कण्ठे, ललाटे, वामहस्ते) · द्विवचन → -योः (पादयोः, नेत्रयोः, ओष्ठयोः, हस्तयोः, कर्णयोः, नयनयोः) · स्त्रीलिङ्ग एकवचन → -आम् (अङ्गुल्याम्)।
उपनेत्रम् (चश्मा) आँखों पर टिकता है — नेत्रयोः; कज्जलम् (काजल) आँखों के भीतर लगता है — नयनयोः। दोनों का अर्थ आँख ही है, पर पट्टिका में दोनों शब्द दिए हैं इसलिए एक-एक का प्रयोग करें।
वाक्यं शुद्धम् अशुद्धं वा इति सूचयन्तु— बताइए कि वाक्य शुद्ध है या अशुद्ध।
उत्तराणि
योग्यताविस्तरः — शरीराङ्गानां नामानि शरीर के सभी अङ्गों के संस्कृत नाम (पृष्ठ १५८)
| संस्कृतम् | हिन्दी | English |
|---|---|---|
| केशाः | बाल | Hair |
| ललाटम् | माथा | Forehead |
| भ्रूः | भौंह | Eyebrow |
| नेत्रम् / नयनम् | आँख | Eye |
| नासिका | नाक | Nose |
| कर्णः | कान | Ear |
| कपोलः | गाल | Cheek |
| मुखम् | मुँह | Mouth / Face |
| चिबुकम् | ठोड़ी | Chin |
| ग्रीवा | गरदन | Neck |
| कण्ठः | गला | Throat |
| स्कन्धः | कंधा | Shoulder |
| भुजः | भुजा | Arm |
| वक्षःस्थलम् | छाती | Chest |
| स्तनः | स्तन | Breast |
| कफोणिः / कूर्परः | कोहनी | Elbow |
| मणिबन्धः | कलाई | Wrist |
| हस्तः | हाथ | Hand |
| अङ्गुष्ठः | अँगूठा | Thumb |
| अङ्गुल्यः | उँगलियाँ | Fingers |
| उदरम् | पेट | Stomach |
| नाभिः | नाभि | Navel |
| कटिः | कमर | Waist |
| ऊरुः | जाँघ | Thigh |
| जानु | घुटना | Knee |
| जङ्घा | पिंडली | Shank |
| गुल्फः | टखना | Ankle |
| पादः | पैर | Foot |
| पार्ष्णिः | एड़ी | Heel |
| पादाङ्गुष्ठः | पैर का अँगूठा | Big toe |
| नखाः | नाखून | Nails |
↔ तालिका को दायें-बायें खिसकाकर देखें
गतिविधि-कार्यम् एवं परियोजनाकार्यम् कक्षा-गतिविधि और प्रोजेक्ट कार्य — कैसे करें
गतिविधि-कार्यम्
कक्षायां सर्वे छात्राः शिक्षकस्य मार्गदर्शनेन अस्य पाठस्य नाट्याभिनयं कुर्वन्तु।
कैसे करें: कक्षा में सात विद्यार्थी चुनें — एक माधवः बने और शेष पादः, हस्तः, नयनम्, कर्णः, मुखम्, उदरम् बनें। हर पात्र गत्ते पर अपने अङ्ग का चित्र बनाकर गले में लटका ले। माधव चारपाई पर सोने का अभिनय करे, बाकी अङ्ग बारी-बारी आकर पाठ के अपने संवाद बोलें। अन्त में माधव उठकर कहे — “भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः, भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः।” और सब मिलकर ताली बजाएँ।
परियोजनाकार्यम्
योग्यताविस्तरभागे विद्यमानं चित्रं स्फोरकपत्रे रचयित्वा अङ्गानां नामानि लिखन्तु।
कैसे करें: एक चार्ट पेपर (स्फोरकपत्र) लीजिए और ऊपर दिए गए योग्यताविस्तर वाले चित्र जैसा मानव-आकृति बनाइए। फिर—
मधुराष्टकम् — पठन्तु स्मरन्तु च
पाठ के अन्त में (पृष्ठ १५९) श्रीवल्लभाचार्य रचित मधुराष्टकम् दिया गया है — आठ श्लोकों का यह स्तोत्र है, जिसके हर श्लोक का अन्त एक ही पंक्ति से होता है, जिसका भाव है — “मधुरता के स्वामी (श्रीकृष्ण) का सब कुछ मधुर है।”
इस पाठ से सम्बन्ध: इसमें भी शरीर के अङ्गों के नाम आते हैं — अधरम् (होंठ), वदनम् (मुख), नयनम् (आँख), हृदयम् (हृदय), पाणिः (हाथ), पादौ (दोनों पैर)। इसलिए इसे कण्ठस्थ करने से अङ्गों के संस्कृत नाम अपने-आप याद हो जाते हैं। पूरा पाठ अपनी पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ १५९ पर पढ़कर लयबद्ध रूप से याद कीजिए।
भवन्तः सर्वेऽपि श्रेष्ठाः · भवन्तः सर्वेऽपि मम प्रियाः
