अध्याय 13 – पेड़ की बात (Chapter 13 – Ped Ki Baat) | Class 6 Hindi (Malhar) | NCERT Solutions

पेड़ की बात – संपूर्ण हल | कक्षा 5 मल्हार
कक्षा 5 · मल्हार · पाठ 13

पेड़ की बात

लेखक: जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) · अनुवादक: शंकर सेन · संपूर्ण प्रश्न-उत्तर हल

बीज से अंकुर, अंकुर से वृक्ष, और फिर फूल-फल से नए बीज तक — एक पेड़ की पूरी जीवन-यात्रा को वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु की नज़र से समझने वाले इस पाठ के सभी अभ्यासों के विस्तृत उत्तर यहाँ दिए गए हैं।

अंकुरित होता पौधा, जिस पर पानी की बूँदें गिर रही हैं
जगदीशचंद्र बसु

✒️ लेखक परिचय

प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीशचंद्र बसु का बचपन प्रकृति के अवलोकन में बीता। उन्होंने सिद्ध किया कि पौधों का भी एक निश्चित जीवनचक्र होता है और वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक होते हैं। उन्होंने रेडियो तरंगों से संचार स्थापित करने वाली एक बड़ी वैज्ञानिक खोज भी की थी।

📜 पाठ का सार

यह लेख बीज के अंकुरित होने से लेकर वृक्ष बनने, भोजन ग्रहण करने, प्रकाश की ओर बढ़ने, फूल-फल देने और अंततः संतान (बीज) छोड़कर समाप्त हो जाने तक की पूरी वैज्ञानिक व भावनात्मक यात्रा को सरल भाषा में बताता है।

पाठ से पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नों के उत्तर

मेरी समझ से

क-1 “जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो” — पौधे को कौन-सा भेद पता लग गया?
उसे उल्टा लटकाया गया है
उसे किसी ने सज़ा दी है
बच्चे को गमला रखना नहीं आया
प्रकाश ऊपर से आ रहा है
उत्तर

गमला उल्टा लटकाने पर भी पौधे की पत्तियाँ-डालियाँ मुड़कर ऊपर की ओर (प्रकाश की दिशा में) उठ आईं और जड़ें फिर नीचे की ओर लटक गईं। इससे पता चलता है कि पौधे को यह “भेद” समझ आ गया था कि प्रकाश ऊपर से आ रहा है, और अपने जीवित रहने के लिए उसे प्रकाश की ओर ही बढ़ना है — चाहे उसे कैसे भी रखा जाए।

क-2 पेड़-पौधे जीव-जंतुओं के मित्र कैसे हैं?
हमारे जैसे ही साँस लेते हैं
हमारे जैसे ही भोजन ग्रहण करते हैं
हवा को शुद्ध करके सहायता करते हैं
धरती पर हमारे साथ ही जन्मे हैं
उत्तर

पेड़-पौधे जीव-जंतुओं की साँस से निकलने वाली विषाक्त ‘अंगारक’ वायु (कार्बन डाईऑक्साइड) को सूर्य के प्रकाश की सहायता से सोखकर हवा को शुद्ध कर देते हैं। जो गैस जीव-जंतुओं के लिए ज़हर है, पेड़ उसी का सेवन करके उसे पूर्णतया शुद्ध कर देते हैं — इसीलिए वे जीव-जंतुओं के सच्चे मित्र कहलाते हैं।

अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

पाठ को दोबारा पढ़ने पर स्पष्ट होता है कि ये उत्तर सीधे लेखक द्वारा बताए गए वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित हैं। बाकी विकल्प भ्रामक हैं क्योंकि वे या तो सामान्य ज्ञान पर आधारित अनुमान हैं (जैसे “बच्चे को गमला रखना नहीं आया”) या अधूरी जानकारी देते हैं (जैसे “हमारे जैसे साँस लेते हैं” — यह सत्य तो है पर यह मित्रता का सीधा कारण नहीं बताता)। सही उत्तर चुनते समय हमें पाठ की उन पंक्तियों को खोजना चाहिए जो प्रश्न का सटीक व वैज्ञानिक कारण स्पष्ट करती हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

“पेड़-पौधों के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं। ईंधन को जलाने पर जो प्रकाश व ताप बाहर प्रकट होता है, वह सूर्य की ही ऊर्जा है।”
भावार्थ

पेड़-पौधे अपने पूरे जीवनकाल में सूर्य की किरणों (ऊर्जा) को अपने भीतर संचित करते रहते हैं — यह ऊर्जा उनके रेशे-रेशे (हर हिस्से) में समा जाती है। इसीलिए जब हम लकड़ी जैसे ईंधन को जलाते हैं, तो जो रोशनी और गरमी हमें मिलती है, वह असल में सूर्य की ही संचित ऊर्जा होती है, जो पेड़ ने वर्षों पहले सोखकर अपने भीतर सुरक्षित रखी थी।

“मधुमक्खी व तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है। वे दल-बल सहित फूल देखने आती हैं।”
भावार्थ

वृक्षों और मधुमक्खी-तितलियों के बीच युगों-युगों से एक गहरा, आत्मीय रिश्ता (परस्पर सहयोग/mutualism) रहा है। जब पेड़ पर फूल खिलते हैं, तो मधुमक्खियाँ व तितलियाँ झुंड बनाकर (दल-बल सहित) फूलों का रस लेने आती हैं — और इसी क्रम में वे परागकण एक फूल से दूसरे फूल तक पहुँचाकर वृक्ष को नई संतान (बीज) देने में मदद भी करती हैं।

मधुमक्खी फूल पर पराग-कण लेते हुए
मधुमक्खी फूल से पराग-कण एकत्र करते हुए — परागण की प्रक्रिया

मिलकर करें मिलान

वाक्यांशों को उनके सही अर्थ/संदर्भ से मिलाइए —

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बीज का ढक्कन दरक गयाबीज के दोनों दलों में दरार आ गई या फट गए
उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैंसाँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु — कार्बन डाईऑक्साइड
पत्ते सूर्य ऊर्जा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैंसूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं
प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र हैजीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधारशक्ति या महत्वपूर्ण है
जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा होअपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट
इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैंमटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं

सोच-विचार के लिए

बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है?
उत्तर
  • मिट्टी — जिसके भीतर बीज छिपकर सुरक्षित रहता है और जड़ जमाने का आधार पाता है।
  • उपयुक्त ऋतु — सर्दियों के बाद वसंत का आना, जो अंकुरण के लिए अनुकूल वातावरण बनाता है।
  • पानी (वर्षा) — वर्षा की शुरुआत में गिरने वाला पानी बीज के कठोर ढक्कन को नरम कर उसे तोड़ने में मदद करता है।
  • सूर्य का प्रकाश — अंकुर को ऊपर उठने और आगे बढ़ने की दिशा व ऊर्जा देता है।
पौधे अपना भोजन कैसे प्राप्त करते हैं?
उत्तर

पेड़-पौधों के दाँत नहीं होते, इसलिए वे केवल तरल द्रव्य और वायु से भोजन ग्रहण करते हैं —

  • जड़ों द्वारा: मिट्टी में घुले द्रव्य (पानी में घुले पोषक तत्व) को जड़ें सोख लेती हैं, ठीक वैसे ही जैसे पानी डालने पर चीनी घुल जाती है।
  • पत्तों द्वारा: पत्तों में अनगिनत सूक्ष्म मुँह (होंठ) होते हैं, जिनसे वे हवा से ‘अंगारक’ वायु ग्रहण करते हैं और सूर्य की ऊर्जा की मदद से उसे भोजन में बदल लेते हैं।

यदि जड़ों को पानी न मिले, तो पेड़ का भोजन बंद हो जाता है और अंततः पेड़ मर जाता है।

लेख की रचना

जैसे लेखक ने ‘पेड़ की बात’ कही है, वैसे ही किसी एक चीज़ पर लेख लिखिए — जैसे “गेहूँ की बात”।

नमूना लेख — “गेहूँ की बात”

बहुत दिनों तक खेत की गीली मिट्टी के नीचे गेहूँ का दाना दबा रहा। धीरे-धीरे उसमें से एक नन्हा हरा अंकुर फूटा और मिट्टी को चीरकर ऊपर की ओर उठ आया। किसान रोज़ पानी देता, और अंकुर धीरे-धीरे एक पतली हरी बाली में बदल गया। जैसे-जैसे सूरज की धूप मिलती गई, बाली सुनहरी होती गई और उसमें छोटे-छोटे दाने भरने लगे। कुछ महीनों बाद जब पूरा खेत सोने जैसा सुनहरा दिखने लगा, तब किसान ने कटाई की — और वही एक दाना अब सैकड़ों नए दानों के रूप में लौट आया, आटा बनकर हमारी रोटी तक का सफ़र तय करने के लिए तैयार!

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विद्यार्थी अपनी पसंद की किसी भी वस्तु — जैसे “चावल की बात”, “आम की बात”, “फूल की बात” आदि पर भी इसी शैली में अपना मौलिक लेख लिख सकते हैं और कक्षा में सबके साथ साझा कर सकते हैं।

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अनुमान या कल्पना से

“इस तरह संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।” — वृक्ष के समाप्त होने के बाद क्या होता है?
उत्तर

वृक्ष के गिरकर समाप्त होने के बाद उसका सूखा हुआ शरीर धीरे-धीरे मिट्टी में सड़-गलकर प्राकृतिक खाद (उर्वरक) में बदल जाता है, जिससे आस-पास की मिट्टी और अधिक उपजाऊ बन जाती है। इसी बीच, वृक्ष द्वारा पहले ही छोड़े गए बीज उपयुक्त समय पर अंकुरित होकर नए पौधों का रूप लेते हैं। इस तरह एक वृक्ष का जीवन समाप्त होने के बाद भी, उसकी संतान (नए वृक्ष) के रूप में जीवन-चक्र निरंतर आगे बढ़ता रहता है।

पेड़-पौधों के बारे में लेखक की रुचि कैसे जागृत हुई होगी?
उत्तर

लेखक जगदीशचंद्र बसु का बचपन प्रकृति के गहन अवलोकन में बीता था — वे शुरू से ही पेड़-पौधों और जीव-जंतुओं से गहरा प्रेम करते थे। बार-बार बारीकी से प्रकृति को देखने, स्वयं छोटे-छोटे प्रयोग करने (जैसे गमले को उल्टा लटकाकर यह जाँचना कि पौधा किस दिशा में बढ़ता है) और जिज्ञासु सवाल पूछते रहने की उनकी आदत ने धीरे-धीरे उनकी रुचि को गहरी वैज्ञानिक खोज में बदल दिया होगा — जिसने अंततः उन्हें यह सिद्ध करने तक पहुँचाया कि पौधों में भी जीवन और संवेदना होती है।

प्रवाह चार्ट बीज से बीज तक की यात्रा का आरेख पूरा कीजिए —
उत्तर
बीज
अंकुर
पौधा
कली
फूल
फल
बीज

अर्थात — बीज मिट्टी में अंकुरित होता है → अंकुर धीरे-धीरे पौधे का रूप लेता है (जड़ व तना विकसित होते हैं) → पौधे पर कली आती है → कली खिलकर फूल बनती है → फूल में परागण के बाद फल लगता है → फल के भीतर नया बीज पककर तैयार होता है — और यात्रा फिर से शुरू हो जाती है।

पाठ से आगे रचनात्मक व विस्तार गतिविधियाँ

मेरे प्रिय

नीचे दी गई तालिका से प्रत्येक के लिए अपनी पसंद के तीन-तीन नाम लिखिए।

नमूना उत्तर
फूलपक्षीवृक्षपुस्तकखेल
गुलाबतोताआमपंचतंत्रक्रिकेट
कमलमोरबरगदचंपककबड्डी
गेंदागौरैयानीमपंचतंत्र की कहानियाँबैडमिंटन

यह सूची हर विद्यार्थी की अपनी पसंद के अनुसार अलग होगी — अपनी खुद की पसंद लिखिए!

आज की पहेली — शब्द सीढ़ी

पाठ में आए शब्दों की सीढ़ी पूरी कीजिए — जहाँ हर अगला शब्द पिछले शब्द के अंतिम अक्षर/अंश से जुड़ता है।

उत्तर — शब्द शृंखला
रात तमाम ममता ताप पल्लव वसंत तना नाम मज़बूत तरल लटक कम

हर शब्द पिछले शब्द के अंतिम अक्षर/ध्वनि से शुरू होता है — जैसे “रात” का अंत ‘त’ से ‘तमाम’ शुरू होता है, “तमाम” का अंत ‘म’ से ‘ममता’ शुरू होता है, और यह शृंखला इसी तरह आगे बढ़ती है। ये सभी शब्द सीधे पाठ ‘पेड़ की बात’ में से लिए गए हैं — पाठ में इन्हें रेखांकित करके भी देखा जा सकता है।

खोजबीन के लिए

इंटरनेट कड़ियों की सहायता से जगदीशचंद्र बसु के बारे में और जान-समझ सकते हैं।

संक्षिप्त जानकारी

जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) भारत के एक महान बहुविद वैज्ञानिक थे, जिन्होंने भौतिकी, वनस्पति विज्ञान और विज्ञान-कथा लेखन जैसे विविध क्षेत्रों में योगदान दिया। वे विश्व के पहले वैज्ञानिक थे जिन्होंने यह सिद्ध किया कि पौधों में भी एक जीवनचक्र, संवेदनशीलता और अपने परिवेश के प्रति जागरूकता होती है। उन्होंने सबसे पहले रेडियो तरंगों के माध्यम से बिना तार के संचार (wireless communication) स्थापित करने का प्रयोग भी किया था, जो विज्ञान की एक बड़ी खोज मानी जाती है। विद्यार्थी उनके जीवन व खोजों के बारे में स्कूल पुस्तकालय या शिक्षक की सहायता से अनुमोदित वेबसाइटों पर और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

अंकुरण (प्रायोगिक गतिविधि)

मिट्टी के पात्र में राजमा या चने के 4–5 बीज बोकर, हल्का पानी देकर 3–4 दिन तक अवलोकन कीजिए।

अपेक्षित परिणाम / नमूना अवलोकन
  • पहला-दूसरा दिन: बीज फूलकर नरम हो जाता है, कोई बाहरी बदलाव नहीं दिखता।
  • तीसरा दिन: बीज का ढक्कन दरकता है और एक छोटा सफ़ेद/हल्का हरा अंकुर बाहर झाँकता है।
  • चौथा दिन: अंकुर की लंबाई बढ़ती है, नीचे की ओर हल्की जड़ें दिखने लगती हैं और ऊपर की ओर तना सीधा खड़ा होता दिखता है।
  • यदि गमला किसी खिड़की के पास रखा जाए, तो कुछ दिनों बाद पौधा हल्का-सा प्रकाश की दिशा में मुड़ता हुआ भी दिखाई दे सकता है।

यह एक व्यावहारिक गतिविधि है — अपने घर पर स्वयं यह प्रयोग करके प्रतिदिन के परिवर्तन को अपनी लेखन-पुस्तिका में दर्ज कीजिए।

शब्दों के रूप

मिट्टी की तरह ही पेड़, सर्दी और सूर्य जैसे शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्द लिखिए।

उत्तर

पेड़:

छायादारऊँचाघना फलदारहराभरामज़बूत

सर्दी:

कड़ाके कीहल्कीसुहानी ठिठुरन भरीगुलाबी

सूर्य:

तेज़चमकीलागरम प्रचंडसुनहराउगता हुआ
जड़ सहित पौधा - मिट्टी में जड़ और ऊपर तना-पत्तियाँ
पौधे का जड़ और तना — मिट्टी के भीतर व बाहर के दो भाग
@EDUGROWN ‘पेड़ की बात’ पाठ (कक्षा 5, मल्हार) का यह हल केवल अध्ययन-सहायता हेतु तैयार किया गया है।

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