चतुर्थः पाठः – न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम् (Na Labhyate Chet Āmlaṁ Drākṣāphalam) Class 8th Sanskrit (Deepakam) NCERT Solution

न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम् — समाधान | EduGrown
संस्कृतम् · दीपकम् · कक्षा ७

चतुर्थः पाठः — न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम्

कथागीत, अर्थ एवं सम्पूर्ण अभ्यास-समाधान
📗 NCERT · अध्याय 4 · लोमड़ी और खट्टे अंगूर
📖 कथागीत — “एकः शृगालः” (अर्थ सहित)
भाग 1भूखा-प्यासा शृगाल वन में
एकः शृगालः वनं गच्छति।
पिपासया बुभुक्षया वनं गच्छति।
तत्र गच्छति, किमपि न लभते।
इतोऽपि गच्छति, किमपि न लभते।
श्रान्तः जायते, खिन्नः जायते।
किं च करोति? सः किं च करोति?
भूख-प्यास से पीड़ित शृगाल वन की ओर जाता है
भूख-प्यास से पीड़ित शृगाल वन की ओर जाता है
हिन्दी अर्थ — एक लोमड़ी (शृगाल) प्यास और भूख से व्याकुल होकर वन में जाती है। वहाँ इधर-उधर घूमती है पर उसे कुछ भी (खाने-पीने को) नहीं मिलता। वह थक जाती है और दुःखी हो जाती है। अब वह क्या करे?
भाग 2चारों ओर देखना — पसीना और प्यास
वामतः पश्यति, दक्षिणतः पश्यति।
अग्रतः पश्यति, पृष्ठतः पश्यति।
तस्य स्वेदः जायते, तृषा जायते।
किं च पश्यति? सः किं च पश्यति?
थकी, पसीने से भीगी शृगाल इधर-उधर देखती है
थकी, पसीने से भीगी शृगाल इधर-उधर देखती है
हिन्दी अर्थ — लोमड़ी बाईं ओर, दाईं ओर, आगे और पीछे — सब ओर देखती है। उसे पसीना आ जाता है और और भी प्यास लगती है। आखिर वह देखती क्या है?
भाग 3अंगूर की बेल दिखती है
पश्यति द्राक्षालतां, सः पश्यति द्राक्षाफलम्।
उपरि उपरि लतासु दृश्यते च तत्फलम्।
अनुक्षणं तन्मुखे रसः जायते।
किं च करोति? सः किं च करोति?
ऊपर बेल पर लटकते अंगूर
ऊपर बेल पर लटकते अंगूर
अंगूर देखकर शृगाल के मुँह में पानी आ जाता है
अंगूर देखकर शृगाल के मुँह में पानी आ जाता है
हिन्दी अर्थ — तभी लोमड़ी को अंगूर की बेल दिखती है और उस पर लगे अंगूर के फल दिखते हैं। वे फल ऊपर-ही-ऊपर बेल पर लटके दिखाई देते हैं। उन्हें देखते ही उसके मुँह में लार (रस) आ जाती है। अब वह क्या करती है?
भाग 4–5बार-बार उछलना और अंत में हार
एकवारम् उत्पतति, द्विवारम् उत्पतति।
त्रिवारम् उत्पतति, पुनः पुनः उत्पतति।
तस्य स्वेदः जायते, श्रमः जायते।
किं कथयति? सः किं कथयति?

आम्लं द्राक्षाफलम्, आम्लं द्राक्षाफलम्।
इत्येवं कथयति, सः पलायते॥
बार-बार उछलकर भी अंगूर न मिलने पर लोमड़ी भाग जाती है
बार-बार उछलकर भी अंगूर न मिलने पर लोमड़ी भाग जाती है
हिन्दी अर्थ — लोमड़ी एक बार, दो बार, तीन बार — बार-बार ऊपर उछलती है, पर अंगूर तक नहीं पहुँच पाती। उसे पसीना आ जाता है, थकान हो जाती है। अंत में वह कहती है — “अंगूर खट्टे हैं, अंगूर खट्टे हैं” — और यही कहती हुई वहाँ से भाग जाती है।
🦊 सीख — जो वस्तु हमें नहीं मिलती, उसमें दोष निकालना कमज़ोरी है। असफलता को स्वीकारने के बजाय बहाना बनाना उचित नहीं।
योग्यता‑विस्तरःपरिश्रम एवं दृढ़ता के दो श्लोक
प्रारभ्यते न खलु विघ्नभयेन नीचैः
प्रारभ्य विघ्नविहता विरमन्ति मध्याः।
विघ्नैः पुनः पुनरपि प्रतिहन्यमानाः
प्रारभ्य चोत्तमजनाः न परित्यजन्ति॥
अर्थ — नीच (कमज़ोर मनोबल वाले) लोग विघ्न के भय से काम आरंभ ही नहीं करते। मध्यम लोग काम शुरू तो करते हैं, पर विघ्न आने पर बीच में छोड़ देते हैं। किन्तु उत्तम लोग बार-बार विघ्नों से टकराने पर भी आरंभ किया हुआ कार्य कभी नहीं छोड़ते।
गच्छन् पिपीलको याति योजनानां शतान्यपि।
अगच्छन् वैनतेयोऽपि पदमेकं न गच्छति॥
अर्थ — निरंतर चलती हुई एक छोटी-सी चींटी भी सैकड़ों योजन की दूरी तय कर लेती है, जबकि न चलने वाला गरुड़ (वैनतेय) भी एक कदम आगे नहीं बढ़ पाता। तात्पर्य — निरंतर प्रयास ही सफलता का मूल है।
✍️ अभ्यासः — वयम् अभ्यासं कुर्मः
प्रश्न 1 “एकः शृगालः” इति गीतस्य साभिनयं कक्षायां गानं कुर्वन्तु।
🎵 यह एक क्रियाकलाप है — “एकः शृगालः” गीत को कक्षा में अभिनय (हाव-भाव) के साथ गाइए। ऊपर दिए गीत-भागों को लय में गाकर लोमड़ी के भूखा-प्यासा घूमना, अंगूर देखना, उछलना और भाग जाना — अभिनय द्वारा दिखाइए।
प्रश्न 2 अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन पदद्वयेन वा उत्तरं लिखन्तु।
(नीचे दिए प्रश्नों के उत्तर एक या दो शब्दों में लिखिए।)
(क) कः वनं गच्छति?
उत्तरम् — शृगालः
(ख) शृगालः कां पश्यति?
उत्तरम् — द्राक्षालताम्
(ग) शृगालस्य मुखे किं जायते?
उत्तरम् — रसः (लाला)।
(घ) द्राक्षालतायां शृगालः किं पश्यति?
उत्तरम् — द्राक्षाफलम्
(ङ) द्राक्षाफलं कुत्र दृश्यते?
उत्तरम् — उपरि उपरि लतासु
(च) किं शृगालः पुनः पुनः उत्पतति?
उत्तरम् — आम् आम् ✓
(छ) किं शृगालः द्राक्षाफलं प्राप्नोति?
उत्तरम् — न ✗
प्रश्न 3 अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु।
(निम्न प्रश्नों के उत्तर पूरे वाक्य में लिखिए।)
(क) शृगालः कथं वनं गच्छति?
उत्तरम् — शृगालः पिपासया बुभुक्षया च (पीड़ितः सन्) वनं गच्छति।
(ख) वनं गत्वा शृगालस्य किं जायते?
उत्तरम् — वनं गत्वा शृगालः श्रान्तः खिन्नः च जायते, तस्य स्वेदः तृषा च जायते
(ग) शृगालः द्राक्षाफलं कुत्र पश्यति?
उत्तरम् — शृगालः द्राक्षाफलं उपरि उपरि (द्राक्षा)लतासु पश्यति।
(घ) द्राक्षाफलं दृष्ट्वा कस्य मुखे रसः जायते?
उत्तरम् — द्राक्षाफलं दृष्ट्वा शृगालस्य मुखे रसः जायते।
(ङ) अन्ते शृगालः किं वदति?
उत्तरम् — अन्ते शृगालः “आम्लं द्राक्षाफलम्” इति वदति।
व्याकरण अत्र इदम् अवधेयम् — आत्मनेपद, लट्-लकारः (धातु ‘लभ्’)
पाठ में आए जायते, लभते, पलायते जैसे क्रियापद आत्मनेपद के हैं। इनका लट्-लकार रूप इस प्रकार बनता है —
पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःलभतेलभेतेलभन्ते
मध्यमपुरुषःलभसेलभेथेलभध्वे
उत्तमपुरुषःलभेलभावहेलभामहे
💡 आत्मनेपद प्रत्यय — ते · एते · अन्ते (प्रथम), से · एथे · ध्वे (मध्यम), ए · आवहे · आमहे (उत्तम)।
प्रश्न 4 उपरि प्रदत्तां मञ्जूषां दृष्ट्वा रिक्तस्थानेषु उचितक्रियापदानि लिखन्तु।
(दी गई सारणी देखकर रिक्त स्थानों में उचित क्रियापद भरिए।) रंगीन खाने = भरे गए उत्तर।

(क) धातु — वन्द्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमःवन्दतेवन्देतेवन्दन्ते
मध्यमःवन्दसेवन्देथेवन्दध्वे
उत्तमःवन्देवन्दावहेवन्दामहे

(ख) धातु — पलाय्

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमःपलायतेपलायेतेपलायन्ते
मध्यमःपलायसेपलायेथेपलायध्वे
उत्तमःपलायेपलायावहेपलायामहे

(ग) धातु — जन् (जायते)

पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमःजायतेजायेतेजायन्ते
मध्यमःजायसेजायेथेजायध्वे
उत्तमःजायेजायावहेजायामहे
प्रश्न 5 एकवचनरूपं दृष्ट्वा द्विवचन-बहुवचनरूपाणि लिखन्तु।
(एकवचन रूप देखकर उसी पुरुष के द्विवचन व बहुवचन रूप लिखिए।)
धातुःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
कम्प्कम्पतेकम्पेतेकम्पन्ते
वर्ध्वर्धतेवर्धेतेवर्धन्ते
वृत्वर्तसेवर्तेथेवर्तध्वे
प्र+काश्प्रकाशतेप्रकाशेतेप्रकाशन्ते
वन्द्वन्देवन्दावहेवन्दामहे
याच्याचतेयाचेतेयाचन्ते
लज्ज्लज्जसेलज्जेथेलज्जध्वे
वीक्ष्वीक्षतेवीक्षेतेवीक्षन्ते
सेव्सेवेसेवावहेसेवामहे
वन्द्वन्दसेवन्देथेवन्दध्वे
शुभ्शोभतेशोभेतेशोभन्ते
🎨 रंगीन = भरे गए उत्तर, धूसर = पहले से दिए गए।
प्रश्न 6 उदाहरणानुसारं वाक्यद्वयं लिखन्तु।
(उदाहरण के अनुसार एकवचन व बहुवचन कर्ता के दो-दो वाक्य बनाइए।) यथा — शत्रुः पलायते · चोराः पलायन्ते
एकवचन वाक्यम्बहुवचन वाक्यम्
(क) वृक्षः वर्धतेबालाः वर्धन्ते
(ख) छात्रः वन्दतेभक्ताः वन्दन्ते
(ग) वैद्यः वीक्षतेप्रेक्षकाः वीक्षन्ते
(घ) कर्मचारी सेवतेमहिलाः सेवन्ते
(ङ) वृक्षः कम्पतेरुग्णाः कम्पन्ते
प्रश्न 7 उदाहरणं दृष्ट्वा वाक्यानि उचितरूपैः पूरयन्तु।
(कोष्ठक की धातु का उचित रूप लगाकर वाक्य पूरे कीजिए।)
(क) शुनकं दृष्ट्वा बालकस्य भयं (जाय्)
उत्तरम् — शुनकं दृष्ट्वा बालकस्य भयं जायते(उदाहरण)
(ख) मूषकः मार्जारं दृष्ट्वा (पलाय्)
उत्तरम् — मूषकः मार्जारं दृष्ट्वा पलायते
(ग) रात्रिकाले मार्गदीपाः (प्रकाश्)
उत्तरम् — रात्रिकाले मार्गदीपाः प्रकाशन्ते
(घ) अहं देवं (वन्द्)
उत्तरम् — अहं देवं वन्दे
(ङ) त्वं किमर्थं (लज्ज्)
उत्तरम् — त्वं किमर्थं लज्जसे?
(च) वयं देशं (सेव्)
उत्तरम् — वयं देशं सेवामहे
परियोजना परियोजनाकार्यम् एवं कार्यकलापः
📝 परियोजनाकार्यम्
जीवन में कभी-कभी अभीष्ट (मनचाही) वस्तु नहीं मिलती, लक्ष्य पूरा नहीं होता — ऐसे समय आप क्या करते हैं और क्या सोचते हैं, इसे संस्कृत/मातृभाषा में प्रसंग सहित लिखिए।
💡 सुझाव — निराश न होकर बार-बार प्रयास करना, नया उपाय सोचना, धैर्य रखना — इन भावों को लिखें। कथा की लोमड़ी के विपरीत, हार मानने के बजाय दृढ़ता दिखाने का उदाहरण दें।
🎯 कार्यकलापः — “मुखेन द्राक्षाफलस्य ग्रहणम्”
रस्सी पर अंगूर या कोई मीठा फल बाँधकर, उसे ऊपर-नीचे करते हुए मुँह से पकड़ने की खेल-प्रतियोगिता कराइए — ठीक कथा की तरह!
मुँह से अंगूर पकड़ने का खेल — कक्षा गतिविधि
मुँह से अंगूर पकड़ने का खेल — कक्षा गतिविधि
@edugrown — न लभ्यते चेत् आम्लं द्राक्षाफलम् · सम्पूर्ण समाधान ✨

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