पाठ 7: वर्षा-बहार (Varsha-Bahaar) Class 8th Hindi (Malhar) NCERT Solution

वर्षा-बहार — प्रश्न उत्तर | EduGrown
वर्षा का दृश्य
पाठ 7 • मल्हार

वर्षा-बहार

कवि — मुकुटधर पांडेय (1895–1989)

✍️ संपूर्ण प्रश्न-उत्तर 📖 पाठ से + पाठ से आगे 🧩 पहेलियाँ हल सहित
1

पाठ से

कविता पर आधारित अभ्यास प्रश्न

🧠 मेरी समझ से

क (1)
इस कविता में वर्षा ऋतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर कर आता है?
  • दुख और निराशा
  • आनंद और प्रसन्नता
  • भय और चिंता
  • क्रोध और विरोध
व्याख्या

पूरी कविता में वर्षा के आने से प्रकृति और सभी जीव-जंतु प्रसन्न दिखाए गए हैं — मोर नाचते हैं, मेंढक गीत गाते हैं, पपीहे ग्रीष्म का ताप भूलकर प्रसन्न होते हैं और किसान मनहर गीत गाते हैं। कहीं भी दुख, भय या क्रोध का भाव नहीं है, इसलिए मुख्य भाव आनंद और प्रसन्नता है।

क (2)
“नभ में छटा अनूठी” और “घनघोर छा रही है” पंक्तियों का उपयोग वर्षा ऋतु के किस दृश्य को व्यक्त करने के लिए किया गया है?
  • बादलों के घिरने का दृश्य
  • बिजली के गिरने का दृश्य
  • ठंडी हवा के बहने का दृश्य
  • आमोद छा जाने का दृश्य
व्याख्या

‘नभ’ का अर्थ है आकाश। आकाश में अनूठी छटा और ‘घनघोर’ (घने काले बादल) का छाना — यह चारों ओर बादलों के घिर आने के दृश्य का सुंदर वर्णन है।

क (3)
कविता में वर्षा को ‘अनोखी बहार’ कहा गया है क्योंकि— (एक से अधिक उत्तर)
  • कवि वर्षा को विशेष ऋतु मानता है।
  • वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।
  • वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।
  • वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है।
व्याख्या

कवि ने वर्षा को ‘बहार’ (वसंत जैसी शोभा) कहा क्योंकि वर्षा आते ही चारों ओर हरियाली और प्रसन्नता फैल जाती है; सभी जीव-जंतु सक्रिय व प्रसन्न हो उठते हैं, सबको सुख-संतोष मिलता है और यह प्रकृति की एक अद्भुत, अनोखी घटना है।

क (4)
“सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” — इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
  • प्रकृति में सभी जीव-जंतु एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
  • वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
  • बादलों की सुंदरता से ही पृथ्वी की शोभा बढ़ती है।
  • हमें वर्षा ऋतु से जगत की भलाई की प्रेरणा लेनी चाहिए।
व्याख्या

इस पंक्ति का अर्थ है कि संसार की सारी सुंदरता, हरियाली और जीवन वर्षा पर ही निर्भर करते हैं। वर्षा होगी तभी खेत हरे होंगे, तालाब भरेंगे और जीव-जंतु जीवित रहेंगे। अतः वर्षा ही हरियाली व जीवन का मुख्य स्रोत है।

हो सकता है आपके साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
सुझावित उत्तर

मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि इनका समर्थन कविता की पंक्तियाँ स्वयं करती हैं। जैसे — ‘मोर नृत्य’, ‘मेंढक का गीत’, ‘किसान का मनहर गीत’ आनंद व प्रसन्नता की ओर संकेत करते हैं; ‘घनघोर छा रही है’ बादलों के घिरने को बताता है। जहाँ प्रश्न में एक से अधिक विकल्प सही थे, वहाँ मैंने उन सभी को चुना जो कविता के भाव से मेल खाते हैं। मित्रों से चर्चा करने पर पता चलता है कि सोचने के तरीके अलग हो सकते हैं, पर कविता की पंक्तियाँ ही सही उत्तर की कसौटी हैं।

💬 पंक्तियों पर चर्चा

“फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते / करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।”
मोर
वर्षा में नाचता मोर
अर्थ

वर्षा आने पर लाखों पपीहे पक्षी गर्मी की तपन भूलकर प्रसन्नता से इधर-उधर घूम रहे हैं, और वन में सारे मोर वर्षा के आगमन की खुशी में झूम-झूमकर नाच रहे हैं। यह पंक्ति वर्षा से आई पशु-पक्षियों की प्रसन्नता और उल्लास को दर्शाती है।

“चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर / गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।”
अर्थ

हंस कहीं एक सुंदर कतार (पंक्ति) बाँधकर अनुशासित ढंग से चल/उड़ रहे हैं, और वर्षा से प्रसन्न किसान मन को मोह लेने वाले (मनहर) मधुर गीत गा रहे हैं। यह पंक्ति वर्षा से आई खुशहाली, अनुशासन और सामूहिक आनंद का चित्र प्रस्तुत करती है।

🔗 मिलकर करें मिलान

मिलान
स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 के भावार्थ से सही मिलान:
1पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं(2) वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं।
2चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब(6) ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं।
3तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते(1) वर्षा ऋतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं।
4फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते(3) वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं।
5खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है(5) खिले फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुगंध व ताजगी फैला रहे हैं।
6चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर(4) हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता व अनुशासन दर्शाती हैं।
सही जोड़े

1→2,   2→6,   3→1,   4→3,   5→5,   6→4

🤔 सोच-विचार के लिए

कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं और क्यों?
उत्तर

कविता में मालिनें (बागों की स्त्रियाँ), मेंढक और किसान गीत गा रहे हैं।

मालिनें बागों की हरियाली और सुंदरता से प्रसन्न होकर गाती हैं।
मेंढक वर्षा के जल में प्रसन्न होकर टर्र-टर्र रूपी ‘सुगीत’ गाते हैं।
किसान वर्षा से फसल की आशा और खुशी में मनहर गीत गाते हैं।

सभी वर्षा के आगमन के आनंद और उत्साह को व्यक्त करने के लिए गा रहे हैं।

“बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” और “तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते” — इन दो दृश्यों में क्या अंतर और क्या संबंध है?
अंतर

पहली पंक्ति आकाश में घटित होने वाले दृश्य (बिजली चमकना, बादल गरजना) का वर्णन करती है, जबकि दूसरी पंक्ति जल में रहने वाले जलचर जीवों की प्रसन्नता का। एक ‘ऊपर आकाश’ का दृश्य है, दूसरा ‘नीचे जल’ का।

संबंध

दोनों दृश्य वर्षा से ही जुड़े हैं। बादल गरजने और बिजली चमकने के बाद ही वर्षा होती है, और उसी वर्षा से तालाब भरते हैं जिससे जलचर प्रसन्न होते हैं। अर्थात् एक दृश्य वर्षा का कारण/आरंभ है और दूसरा उसका परिणाम — दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है?
उत्तर

इस कविता में मुख्य रूप से वर्षा ऋतु की सुंदरता और उससे प्रकृति तथा सभी जीव-जंतुओं में आई प्रसन्नता का वर्णन है। कवि कहता है कि वर्षा पूरे संसार की शोभा का आधार है — इसी पर हरियाली, जीवन और सबकी खुशियाँ निर्भर हैं। वर्षा को ‘बहार’ (वसंत जैसी अनोखी शोभा) कहकर उसका महत्व दर्शाया गया है।

“खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” — क्या इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता बताना है या कोई अन्य अर्थ भी है?
उत्तर

इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता बताना नहीं है। गुलाब का खिलना और सुगंध फैलाना वर्षा से आई नई ताजगी, प्रसन्नता और जीवन के खिल उठने का प्रतीक है। जैसे गुलाब खिलकर अपनी सुगंध चारों ओर फैलाता है, वैसे ही वर्षा से पूरी प्रकृति में उल्लास और सौंदर्य फैल जाता है। यह पंक्ति खुशी के फैलने का भावात्मक संकेत भी देती है।

सकारात्मक गतिविधियों वाली पंक्तियाँ चुनिए और बताइए कि इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ क्यों रखा गया है?
सकारात्मक गतिविधियाँ

गीत गाना — “बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब”
नृत्य करना — “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे”
गाना — “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे”
सुगंध फैलाना — “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है”
मनहर गीत — “गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर”
प्रसन्न विचरण — “फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते”

शीर्षक क्यों?

‘वर्षा-बहार’ शीर्षक इसलिए रखा गया क्योंकि वर्षा के आने से चारों ओर वसंत (बहार) जैसी सुंदरता, हरियाली और उल्लास छा जाता है। गाना, नाचना, सुगंध फैलना जैसी सभी आनंददायक गतिविधियाँ वर्षा को एक उत्सव जैसा बना देती हैं, इसीलिए कवि ने वर्षा को ‘बहार’ कहकर शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ रखा।

🌈 अनुमान और कल्पना से

वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर

वर्षा न हो तो — खेतों में फसल नहीं उगेगी जिससे अकाल व भुखमरी हो सकती है; नदियाँ, तालाब और कुएँ सूख जाएँगे और पीने के पानी का संकट होगा; धरती की हरियाली समाप्त हो जाएगी; पशु-पक्षियों को भोजन-पानी न मिलने से वे मर सकते हैं या पलायन कर सकते हैं; भीषण गर्मी व सूखे से मनुष्य और जानवर दोनों बीमार पड़ सकते हैं। इस प्रकार वर्षा के बिना सारा जीवन कठिन हो जाएगा।

बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इनका लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है? (अच्छे व बुरे दोनों)
सकारात्मक (अच्छे) प्रभाव

ये वर्षा के आगमन का संकेत हैं जिससे लोग प्रसन्न होते हैं; बच्चे उत्साहित होते हैं; किसान फसल की आशा में खुश होते हैं; वातावरण ठंडा व सुहावना हो जाता है; बिजली गिरने से हवा की नाइट्रोजन मिट्टी में मिलकर उसे उपजाऊ बनाती है।

नकारात्मक (बुरे) प्रभाव

कभी-कभी बिजली गिरने से जान-माल की हानि होती है; तेज गड़गड़ाहट से छोटे बच्चे और पशु डर जाते हैं; भारी वर्षा व बिजली से पेड़, घर और बिजली के उपकरण क्षतिग्रस्त हो सकते हैं; यात्रा व दैनिक कार्यों में कठिनाई होती है।

“करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे” — वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए।
वर्णन

वर्षा आने पर मोर अपने रंग-बिरंगे पंख फैलाकर वन में झूम-झूमकर नाचते हैं। पपीहे ‘पी-पी’ की मीठी बोली बोलते हुए इधर-उधर उड़ते हैं। मेंढक तालाबों में टर्र-टर्र करके मानो गीत गाते हैं। कोयल व अन्य पक्षी चहचहाते हैं; हंस कतार बाँधकर तैरते हैं। सभी जीव पानी में उछलते-कूदते, नहाते और चहकते हुए अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हैं — मानो पूरी प्रकृति वर्षा के स्वागत में उत्सव मना रही हो।

✏️ आपकी रचनाएँ

मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक सुगीत गा रहे हैं — इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।
मेंढक
तालाब किनारे गीत गाता मेंढक
मॉडल वर्णन

आकाश में काले घने बादल छाए हैं और रिमझिम बारिश हो रही है। हरे-भरे वन में एक मोर अपने सतरंगी पंख पूरे फैलाकर, गर्दन झुका-उठाकर मस्ती से नाच रहा है — बूँदों में उसके पंखों की चमक और भी सुंदर लग रही है। पास ही तालाब किनारे हरी घास पर बैठे मेंढक टर्र-टर्र की आवाज़ में मानो प्यारा गीत गा रहे हैं। मोर का नृत्य और मेंढकों का संगीत मिलकर पूरे वन को एक संगीत-मंच जैसा बना रहे हैं। यह दृश्य देखकर मन आनंद से भर उठता है।

वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए।
मॉडल कहानी — “गाँव में लौटी बहार”

बहुत समय पहले एक गाँव में कई वर्षों से वर्षा नहीं हुई थी। खेत सूख गए, तालाब खाली हो गए और पशु-पक्षी प्यास से व्याकुल थे। गाँव के लोग इंद्रदेव से वर्षा की प्रार्थना करने लगे। एक दिन एक साधु ने कहा कि यदि सभी मिलकर सच्चे मन से मल्हार राग गाएँ तो बादल अवश्य बरसेंगे। बच्चे, बूढ़े और किसान सब इकट्ठा होकर गीत गाने लगे। तभी आकाश में बिजली चमकी, बादल गरजे और झमाझम वर्षा होने लगी। मोर नाचने लगे, मेंढक गाने लगे और पपीहे प्रसन्न हो उठे — ठीक वैसे ही जैसे ‘वर्षा-बहार’ कविता में वर्णित है। गाँव में फिर से हरियाली और खुशहाली लौट आई। इस प्रकार वर्षा ने सबके जीवन में सचमुच ‘बहार’ ला दी।

इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए। उसमें आपने क्या-क्या बनाया है और क्यों?
मॉडल उत्तर

मैंने अपने चित्र में आकाश में काले बादल और चमकती बिजली बनाई क्योंकि ये वर्षा के आने का संकेत हैं। नीचे हरे-भरे पहाड़, बहते झरने और भरा हुआ तालाब बनाया ताकि वर्षा से आई हरियाली दिखे। एक मोर पंख फैलाए नाचता हुआ, तालाब में मेंढक, पेड़ पर पपीहा और खेत में गीत गाता किसान बनाया — क्योंकि कविता में ये सभी वर्षा से प्रसन्न दिखाए गए हैं। छाता लिए बारिश में खेलते बच्चे भी बनाए, जो वर्षा के आनंद को दर्शाते हैं।

🔤 शब्द से जुड़े शब्द

रिक्त स्थान
‘वर्षा’ से जुड़े शब्द (उदाहरण — उत्साह) रिक्त स्थानों में भरिए।
सुझावित शब्द

उत्साह, हरियाली, ठंडक, रिमझिम, बादल, बिजली, झरना, इंद्रधनुष, भीगना, छाता, फसल, तालाब, बरसात, मल्हार, प्रसन्नता, सावन।

रिक्त 7 स्थानों में इनमें से कोई भी चुन सकते हैं — जैसे: हरियाली, ठंडक, बादल, बिजली, रिमझिम, फसल, इंद्रधनुष।

कविता की रचना
इस कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए।
विशेषताएँ

• कविता तुकांत है — प्रत्येक दो पंक्तियों के अंत में तुक मिलता है (है/है, हैं/हैं, सब/अब)।
• कुछ पंक्तियाँ सरल वाक्य हैं (“पानी बरस रहा है”), तो कुछ में शब्द-क्रम उलट-पुलट है (“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब”)।
तत्सम/संस्कृतनिष्ठ शब्दों का प्रयोग — नभ, छटा, जलचर, सौरभ, आमोद, मनहर।
चित्रात्मकता — प्रकृति के दृश्य सजीव रूप में चित्रित हैं।
• ‘वर्षा’ और ‘बहार’ जैसे दो भिन्न ऋतु-नामों को जोड़कर सुंदरता प्रकट की गई है।

🎨 कविता का सौंदर्य

रिक्त स्थान में उपयुक्त (मिलते-जुलते अर्थ वाला) शब्द भरिए और उपयुक्त शब्द पर घेरा बनाइए।
उपयुक्त शब्द

बरखा बहार सब के, मन को लुभा रही है (विकल्प: बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि — लय के अनुसार ‘बरखा’ सर्वाधिक उपयुक्त)

गगन में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है (आकाश, गगन, अंबर, व्योम — ‘गगन’ लय में सबसे सहज)

• बिजली चमक रही है, जलधर गरज रहे हैं (मेघ, जलधर, घन, जलद — ‘जलधर’ मात्रा में ‘बादल’ जैसा बैठता है; ‘मेघ’ भी उपयुक्त)

नीर बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं (जल, नीर, सलिल, तोय — ‘नीर’ लय में ‘पानी’ जैसा सटीक)

🔎 (ख) कौन-से शब्द सबसे अधिक साथियों को ‘जँचते’ हैं यह समूह-चर्चा का विषय है — उत्तर व्यक्ति की पसंद और लय की समझ पर निर्भर करता है। प्रायः जो शब्द लय (मात्रा) और अर्थ दोनों में सटीक बैठता है, वही सबको अधिक भाता है।

🏷️ विशेषण

पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान कीजिए।
#पंक्तिविशेषणविशेष्य
1नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही हैअनूठीछटा
2चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदरसुंदरकतार
3मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारेप्यारेसुगीत
4चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सबठंडीहवा
दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए।
मॉडल उत्तर

1. वर्षा → सुहावनी, मूसलाधार
2. पानी → ठंडा, स्वच्छ
3. बादल → काले, घने
4. डालियाँ → हरी, झूमती
5. गुलाब → सुगंधित, लाल

🍃 ऋतु और शब्द

वर्गीकरण
दिए गए शब्दों को उपयुक्त ऋतु के अनुसार तालिका में लिखिए।
चार ऋतुओं वाला वृक्ष
ऋतुओं के अनुसार बदलता वृक्ष

🌸 वसंत ऋतु (मार्च–अप्रैल)

बहार, बयार, हरियाली

☀️ ग्रीष्म ऋतु (मई–जून)

धूप, लू, ताप, तपन, जेठ, आँधी, उमस

🌧️ वर्षा ऋतु (जुलाई–अगस्त)

वृष्टि, झड़ी, सावन, रिमझिम, बादल फटना

🍂 शरद ऋतु (सितंबर–अक्टूबर)

ओस, शीतलता, ठंडक

🌫️ हेमंत ऋतु (नवंबर–दिसंबर)

कोहरा, धुंध, पाला

❄️ शिशिर ऋतु (जनवरी–फरवरी)

जाड़ा, ठिठुरन, हिमपात, कड़ाके की ठंड
📝 कुछ शब्द एक से अधिक ऋतुओं से जुड़ सकते हैं, इसलिए उत्तर में थोड़ा अंतर संभव है।
2

पाठ से आगे

अतिरिक्त प्रश्न, पहेलियाँ व गतिविधियाँ

🗣️ आपकी बात

वर्षा के समय आपके क्षेत्र में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?
उत्तर

आकाश में बादल छा जाते हैं और ठंडी हवा चलती है; चारों ओर हरियाली छा जाती है; सड़कों व गड्ढों में पानी भर जाता है; तालाब-नदियाँ भर जाते हैं; मौसम सुहावना हो जाता है; मेंढक और कीड़े-मकोड़े दिखने लगते हैं; किसान खेतों में बुवाई करते हैं और गीली मिट्टी की सोंधी खुशबू फैल जाती है।

बारिश के चलते स्कूल आने-जाने के अनुभव व किसी रोचक घटना को साझा कीजिए।
मॉडल उत्तर

बारिश में स्कूल जाने के लिए छाता या रेनकोट ले जाना पड़ता है; कभी-कभी हम भीग जाते हैं और रास्ते में पानी भरने से गड्ढों से बचना पड़ता है। रोचक घटना: एक दिन तेज बारिश में मेरा छाता उलट गया और मैं पूरा भीग गया, पर दोस्तों के साथ पानी में छपाक-छपाक करते हुए बहुत मज़ा आया — वह दिन आज भी याद है।

वर्षा ऋतु में आपको क्या-क्या करना अच्छा लगता है और क्या-क्या नहीं कर पाते?
मॉडल उत्तर

अच्छा लगता है: बारिश में भीगना, कागज़ की नाव चलाना, गरम पकौड़े खाना, इंद्रधनुष देखना।
नहीं कर पाते: बाहर मैदान में खेलना, साइकिल चलाना और दूर घूमने जाना कठिन हो जाता है।

बारिश में आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? उन्हें कौन-सी समस्याएँ होती हैं?
उत्तर

सुरक्षा: पक्षी पेड़ों की घनी डालियों, घोंसलों व छज्जों के नीचे छिप जाते हैं; कुत्ते-बिल्ली बरामदे या छत के नीचे शरण लेते हैं; चींटियाँ ऊँचे स्थान पर चली जाती हैं; गाय-भैंस पेड़ या शेड के नीचे खड़े हो जाते हैं।
समस्याएँ: भोजन ढूँढना कठिन हो जाता है; घोंसले बह या गिर सकते हैं; भीगने व ठंड से बीमार पड़ सकते हैं; रहने की जगह डूब सकती है।

वर्षा ऋतु पर आधारित एक छोटी कविता की रचना कीजिए।
मॉडल कविता

रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी,
छत से टपके बूँद सुहानी।
आँगन में कागज़ की नाव,
गली-गली में भरा तलाव।
मोर नाचते, मेंढक गाते,
बच्चे छाता लेकर आते।
अम्मा बनातीं गरम पकौड़े,
खुशियाँ लाई वर्षा की ओर।

🎤 साक्षात्कार

“गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।” — वर्षा में गीत गाते किसान के साक्षात्कार के लिए प्रश्न लिखिए।
सुझावित प्रश्न

1. आपका नाम क्या है और आप कहाँ रहते हैं?
2. आप क्या-क्या फसलें उगाते हैं?
3. वर्षा आने पर आपको कैसा अनुभव होता है?
4. आप काम करते समय गीत क्यों गाते हैं?
5. वर्षा आपकी खेती के लिए क्यों ज़रूरी है?
6. वर्षा कम होने पर आपको किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?

🎭 (ख) समूह में एक सदस्य किसान बने और अन्य सदस्य पत्रकार बनकर ये प्रश्न पूछें — इस साक्षात्कार को अभिनय द्वारा प्रस्तुत कीजिए।

🌦️ वर्षा के दृश्य

वर्षा के उन दृश्यों की सूची बनाइए जिनका उल्लेख इस कविता में नहीं किया गया है।
उत्तर
  • आकाश में इंद्रधनुष
  • बच्चों का कागज़ की नाव चलाना
  • छाते और रेनकोट का प्रयोग
  • सड़कों पर पानी भरना
  • गीली मिट्टी की सोंधी खुशबू
  • ज़मीन से केंचुओं का निकलना
  • छत से पानी टपकना, बिजली गुल होना
वर्षा में बिजली पहले दिखाई देती है या उसकी आवाज़ पहले सुनाई देती है? क्यों?
उत्तर

बिजली की चमक पहले दिखाई देती है, गड़गड़ाहट बाद में सुनाई देती है। इसका कारण यह है कि प्रकाश की गति ध्वनि की गति से बहुत अधिक होती है — प्रकाश की चमक हमारी आँखों तक लगभग तुरंत पहुँच जाती है, जबकि आवाज़ हम तक कुछ देर बाद पहुँचती है।

छोटी गणना (क्यों देर लगती है?)

प्रकाश की गति \( \approx 3\times10^{8}\ \text{मीटर/सेकंड} \) और ध्वनि की गति \( \approx 343\ \text{मीटर/सेकंड} \)।

यदि बिजली हमसे \(1\) किमी \((1000\text{ मी})\) दूर गिरे, तो आवाज़ पहुँचने में लगने वाला समय:

\( t = \dfrac{\text{दूरी}}{\text{ध्वनि की गति}} = \dfrac{1000}{343} \approx 2.9\ \text{सेकंड} \)

अर्थात् चमक दिखने के लगभग 3 सेकंड बाद हमें गड़गड़ाहट सुनाई देती है। इसी से यह भी अनुमान लगाया जा सकता है कि बिजली कितनी दूर गिरी।

वर्षा से पहले और वर्षा के बाद किसी पेड़ या पौधे में आपको कौन-कौन से अंतर दिखाई दिए?
उत्तर

वर्षा से पहले: पत्ते धूल से भरे, मुरझाए व सूखे दिखते हैं; पेड़ थका-थका और बेजान लगता है।
वर्षा के बाद: पत्ते धुलकर चमकदार, हरे-भरे व ताज़ा हो जाते हैं; नई कोंपलें फूटती हैं; फूल-कलियाँ खिल उठती हैं और पेड़ अधिक जीवंत व हरा-भरा दिखता है।

“चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर” — आपने किन-किन को पंक्तिबद्ध चलते हुए देखा है?
कतार में तैरते हंस
कतार बाँधे हंस
उत्तर

चींटियाँ कतार में चलती हैं; स्कूल में बच्चे लाइन बनाकर चलते हैं; सैनिक परेड में पंक्तिबद्ध चलते हैं; सड़क पर गाड़ियाँ एक कतार में चलती हैं; हंस व बत्तख कतार बाँधकर तैरते हैं; रेल के डिब्बे एक पंक्ति में जुड़े रहते हैं।

🔊 वर्षा में ध्वनियाँ

वर्षा के दृश्यों में कौन-कौन सी ध्वनियाँ सुनाई देती होंगी?
उत्तर

बादलों की गड़गड़ाहट (गड़-गड़), बारिश की रिमझिम (टप-टप, छम-छम), मेंढक की टर्र-टर्र, मोर की केका (पेहाँ-पेहाँ), पपीहे की ‘पी-पी’, हवा की सरसराहट, झरनों का कल-कल और पानी में छपाक-छपाक। इन ध्वनियों की नकल कक्षा में करके सुनाई जा सकती है।

“मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” — आपके विचार से बेसुरी ध्वनियाँ भी कब-कब अच्छी लगने लगती हैं?
उत्तर

जब कोई ध्वनि किसी खुशी, अपनेपन या प्रकृति से जुड़ी हो, तब बेसुरी आवाज़ें भी प्यारी लगने लगती हैं। जैसे — मेंढक की टर्र-टर्र वर्षा की खुशी में सुरीली लगती है; छोटे बच्चे का तुतलाना और माँ की लोरी भले सुर में न हो, फिर भी प्यारी लगती है; किसी अपने के गाए बेसुरे गीत में प्रेम झलकता है। असल में भाव और संदर्भ ही ध्वनि को सुंदर बना देते हैं।

🌟 सृजन

आमोद
‘आमोद’ (आनंद) से जुड़े विभिन्न दृश्यों का एक-एक अनुच्छेद में वर्णन कीजिए।
उदाहरण — मित्रों संग खेलना

शाम का समय था, मैदान में मेरे सभी मित्र इकट्ठा थे। हम सब मिलकर खो-खो और कबड्डी खेल रहे थे। किसी की हँसी, किसी की जीत की खुशी और सबका शोर मिलकर वातावरण को आनंद से भर रहा था। खेलते-खेलते पसीना आ गया, पर मन में एक अनोखी प्रसन्नता थी। दोस्तों के साथ बिताया वह समय सच्चे ‘आमोद’ यानी आनंद से भरा हुआ था।

✍️ इसी प्रकार अन्य दृश्यों — किसी प्रिय पुस्तक को पढ़ना, कोई कार्य सफलतापूर्वक पूरा करना, समुद्र किनारे शांत सवेरा या शाम, सर्दियों का पहला हिमपात — पर भी अपने अनुभव के आधार पर एक-एक अनुच्छेद लिखिए।
गीत
वर्षा से जुड़े गीत व लोकगीत ढूँढ़कर लिखिए।
गतिविधि

हमारे देश में वर्षा के आगमन पर अनेक लोकगीत गाए जाते हैं — जैसे कजरी, मल्हार और सावन के गीत। अपने परिजनों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से ऐसे गीत एकत्र कीजिए और सभी समूहों के गीतों को मिलाकर ‘वर्षा-गीतों की एक पुस्तिका’ तैयार कीजिए।

🧩 आज की पहेली — हल सहित

सूरज

1. जाने कैसा मौसम आया, सूरज ने सबको झुलसाया। आम पकें तो रस ढलके, समय कौन-सा ये झलके?

✔ ग्रीष्म ऋतु
फसल

2. हवा में ठंडक बढ़ती जाए, धूप सुहानी सबको भाए। नई फसल खेतों में लाए, बूझो कौन-सा मौसम आए?

✔ शरद ऋतु
बरसता बादल

3. पानी बरसे, बादल गरजे, धरती का हर कोना हरसे। नदियाँ नाले भरे हर ओर, बूझो किसका है ये जोर?

✔ वर्षा ऋतु
खिले फूल

4. फूल खिले, हर पक्षी गाए, चारों ओर हरियाली छाए। बागों में खुशबू छा जाए, बूझो ऋतु ये क्या कहलाए?

✔ वसंत ऋतु
सर्दी

5. बर्फ गिरे, सर्दी बढ़ जाए, ऊनी कपड़े सबको भाए। धुंध की चादर लाए रात, बूझो किस ऋतु की बात?

✔ शिशिर ऋतु
पत्ते गिरता पेड़

6. पत्ता-पत्ता गिरता जाए, सूनी डाली बहुत सताए। पेड़ करें खुद को तैयार, कौन-सी ऋतु का है ये सार?

✔ हेमंत ऋतु

🪟 झरोखे से — ‘ग्रीष्म’ का भावार्थ

भावार्थ
मुकुटधर पांडेय की एक अन्य कविता ‘ग्रीष्म’ के अंश का भावार्थ।
भावार्थ

वसंत के दिन बीत गए और ज्येष्ठ (जेठ) का महीना आ गया। सूर्य की किरणों का ताप पूरे संसार को व्यथित (परेशान) करने लगा। धरती धूप से जलने लगी और सभी चर-अचर जीव-जंतु बेहाल हो गए। सूर्य के प्रचंड ताप से वन-बाग झुलस गए तथा नदियाँ, तालाब, नाले और कुएँ सूख गए। गाँवों में मानो आग-सी लग गई हो — चारों ओर चिंता बढ़ गई और स्त्री-पुरुष सभी भय व व्याकुलता में जीने लगे।

यह कविता ग्रीष्म ऋतु की कठोरता का वर्णन करती है, जो ‘वर्षा-बहार’ के आनंददायी भाव के ठीक विपरीत है — इसी विपरीतता से वर्षा का महत्व और अधिक स्पष्ट होता है।

साझी समझ
इस कविता पर अपने साथियों के साथ विचार-विमर्श कीजिए।
सुझाव

समूह में चर्चा कीजिए कि ‘वर्षा-बहार’ और ‘ग्रीष्म’ दोनों कविताओं में ऋतुओं का चित्रण कैसे अलग है, और वर्षा किस प्रकार सभी जीवों के जीवन में खुशी लाती है।

खोजबीन
ऋतुओं से जुड़े संदर्भ (NCERT द्वारा सुझाए गए वीडियो-लिंक):

🌦️ वर्षा-बहार — समाप्त

सभी ‘पाठ से’ और ‘पाठ से आगे’ प्रश्नों के उत्तर पूर्ण हुए। पढ़ाई की शुभकामनाएँ!

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