💧 पानी रे पानी — संपूर्ण हल
पाठ के सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत, सरल व सीधे उत्तर — चरण दर चरण समझाइश के साथ
लेखक से परिचय
About the authorअनुपम मिश्र (1948–2016) एक प्रखर लेखक, संपादक, जाने-माने पर्यावरणविद और छायाकार थे। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उन्होंने अनेक प्रयोगात्मक कार्य किए।
उनकी पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब सर्वाधिक चर्चित है, जिसका ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। साफ माथे का समाज उनकी एक और महत्वपूर्ण पुस्तक है। वे गांधी शांति प्रतिष्ठान से प्रकाशित पत्रिका गांधी मार्ग के संस्थापक-संपादक भी थे।
📘 पाठ से (In-text Questions)
मेरी समझ से
Comprehension — MCQs- ☆नल सूख जाने से।
- ★पानी बरसने से।
- ★तालाब और झीलों से।
- ☆बाढ़ आने से।
- ☆वर्षा जल का संग्रह करना।
- ★समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
- ★नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।
- ☆बरसात में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना।
- ☆जल-चक्र की अवधारणा को न समझना।
- ☆आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना।
- ★तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
- ☆भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना।
मिलकर करें मिलान
Match the terms with their meanings| स्तंभ 1 | → | स्तंभ 2 (सही अर्थ) |
|---|---|---|
| 1. वर्षा जल संग्रहण | → | 2. वर्षा के जल को प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से (मानवीय प्रयासों से) धरती में संग्रह करना। |
| 2. जल संकट | → | 3. जल की अत्यधिक कमी होना। |
| 3. जल-चक्र | → | 4. समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर पानी में बदलना और वर्षा के द्वारा पुनः समुद्र में मिल जाना। |
| 4. भूजल | → | 1. जमीन के नीचे छिपा जल भंडार। |
पंक्तियों पर चर्चा
Discussing key linesइस पाठ से चुनी गई पंक्तियों के भाव—
“पानी आता भी है तो बेवक्त।” — नलों में पानी निश्चित समय पर नहीं, बल्कि कभी देर रात तो कभी बहुत सुबह आता है, जिससे लोगों को अपनी नींद छोड़कर पानी भरना पड़ता है। यह जल-वितरण-व्यवस्था की अनियमितता को दर्शाता है।
“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” — पानी की भारी कमी के कारण कुछ क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है मानो सूखा (अकाल) पड़ गया हो, जिससे लोगों को अत्यंत कष्ट होता है।
“कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।” — बाढ़ के समय पानी हर जगह भर जाने से सामान्य जनजीवन, आवागमन और कामकाज पूरी तरह रुक जाता है।
“अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” — पानी की बहुत अधिक कमी (अकाल) और पानी की बहुत अधिक अधिकता (बाढ़) — दोनों ही असल में जल-चक्र के असंतुलन का परिणाम हैं, इसलिए दोनों समस्याएँ आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं।
सोच-विचार के लिए
Think & answerशीर्षक
Why this title?शब्दों की बात — बात पर बल देना
Emphasis words“हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।” बनाम “हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है।”
- “सोचा तो नहीं होगा शायद, पर इस बारे में पढ़ा जरूर है।” — ‘जरूर’ शब्द दृढ़ता और निश्चितता का भाव जोड़ता है।
- “पानी आता भी है तो बेवक्त।” — ‘भी’ और ‘तो’ दोनों मिलकर विडंबना (यानी पानी आना चाहिए था पर सही समय पर नहीं आता) का भाव उभारते हैं।
- “लो, सब तरफ पानी ही बहने लगता है।” — ‘ही’ शब्द इस बात पर बल देता है कि हर जगह केवल और केवल पानी ही दिखाई देता है, कुछ और नहीं।
- “यह बाढ़ न गाँवों को छोड़ती है और न मुंबई जैसे बड़े शहरों को।” — ‘न…न’ का प्रयोग यह बल देने के लिए किया गया है कि बाढ़ से कोई भी अछूता नहीं रहता।
समानार्थी शब्द
Synonymsनीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाला शब्द लिखिए (शब्द-बादल में से चुनें: सूर्य, मेघ, भास्कर, पवन, वारिद, वायु, दिवाकर, जलद, वाष्प, समीर, दिनकर, नीरद)—
| वाक्य | रेखांकित शब्द | समानार्थी शब्द (कोई एक) |
|---|---|---|
| (क) सूरज की किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे। | सूरज | सूर्य / भास्कर / दिवाकर / दिनकर |
| (ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर जाता है। | भाप | वाष्प |
| (ग) अचानक बादल गरजने लगे। | बादल | मेघ / जलद / वारिद / नीरद |
| (घ) जल-चक्र में हवा की भी बहुत बड़ी भूमिका है। | हवा | वायु / पवन / समीर |
उपसर्ग
Prefixes“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” — यहाँ ‘अ’ उपसर्ग ‘काल’ शब्द से जुड़कर नया अर्थ (कुसमय, सूखा) देता है। नीचे ‘देश’ शब्द के साथ बने उपसर्ग-शब्द दिए गए हैं—
वाक्य-प्रयोग:
- वह अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव जागरूक रहने वाला एक सुपात्र विद्यार्थी है।
- बिना योग्यता के किसी को ज़िम्मेदारी देना उसे अपात्र व्यक्ति को सौंपने जैसा है।
- अज्ञान के कारण ही लोग अंधविश्वासों में फँस जाते हैं।
- विज्ञान ने मनुष्य के जीवन को बहुत सरल बना दिया है।
📗 पाठ से आगे (Exercise Questions)
आपकी बात
Your take- वर्षा जल संग्रहण (rainwater harvesting) अपनाना।
- तालाबों, झीलों व पोखरों की सफाई करना और उन्हें कचरे से भरने से बचाना।
- पानी का अनावश्यक अपव्यय (जैसे नल खुला छोड़ना) रोकना।
- अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना, जिससे भूजल स्तर बना रहे।
- घर व स्कूल में पानी बचाने के प्रति दूसरों को भी जागरूक करना।
इसका चित्रांकन कुछ इस प्रकार किया जा सकता है: सूर्य (ऊपर कोने में) → उसकी किरणें समुद्र पर पड़ती हैं → समुद्र से उठती भाप (तीर के निशान से ऊपर की ओर) → आकाश में बनते बादल → बादलों से गिरती वर्षा (पहाड़ों पर) → पहाड़ों से बहती नदी → नदी का पुनः समुद्र में मिलना (तीर के निशान से चक्र पूरा करते हुए)।
(सूर्य → समुद्र → भाप → बादल → वर्षा → नदी → समुद्र, यह क्रम चित्र में तीरों से दर्शाइए)
सृजन
Creative response- 💧 पानी है अनमोल, बारी-बारी से भरो, न करो कोई तकरार!
- 💧 मिल-बाँटकर भरें पानी, यही है सच्ची इंसानियत की निशानी।
- 💧 पहले तुम, फिर मैं — साथ रहेंगे तो पानी सबको मिलेगा सही समय पर।
- 💧 झगड़े से नहीं, समझ से बँटेगा पानी — यही है असली सयानापन।
- 💧 आज तुम्हारी बारी, कल मेरी बारी — पानी बचाना है हम सबकी ज़िम्मेदारी।
पानी रे पानी — चित्र-चर्चा
Discuss the 9 daily-life picturesनीचे हमारी दिनचर्या से जुड़ी 9 गतिविधियों के चित्र हैं। इन पर बातचीत कीजिए — कौन-से चित्र पानी के संकट को कम करने में सहायक हैं और कौन-से पानी की गुल्लक को जल्दी खाली कर रहे हैं।
सामान्य उपयोग — तटस्थ
आवश्यक उपयोग — तटस्थ
(जल-उपयोग से सीधा संबंध नहीं)
इस प्रकार, बाल्टी से नहाना, सीमित मात्रा में पौधों को सींचना, तालाब खोदना और पौधरोपण करना — ये सभी पानी बचाने में सहायक हैं, जबकि नलों के पाइप में मोटर लगाना और होज़ पाइप से वाहन धोना — जैसी गतिविधियाँ पानी की गुल्लक को तेज़ी से खाली करती हैं।
सबका पानी
Panel discussion activityविषय: ‘सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले’ — इस पर एक परिचर्चा का आयोजन करें और मुख्य बिंदुओं पर आधारित रिपोर्ट तैयार करें।
- हर मोहल्ले में जल-वितरण का समय निश्चित व समान होना चाहिए।
- नलों में अवैध मोटर लगाने पर रोक लगाई जानी चाहिए।
- सार्वजनिक जलस्रोतों (तालाब, कुआँ) का रख-रखाव और सफाई नियमित होनी चाहिए।
- वर्षा जल संग्रहण को हर घर व स्कूल में अनिवार्य किया जाना चाहिए।
- पानी की बर्बादी रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
दैनिक कार्यों में पानी
Water in daily tasks| कार्य | अनुमानित पानी (बाल्टी में) |
|---|---|
| नहाना | 1–2 बाल्टी |
| कपड़े धोना | 2–3 बाल्टी |
| बर्तन धोना | 1 बाल्टी |
| पीने व खाना बनाने में | 1 बाल्टी |
| सफाई (झाड़ू-पोंछा) | 1 बाल्टी |
पानी बचाने के उपाय: नल खुला न छोड़ना, बाल्टी का उपयोग (शॉवर की बजाय), बर्तन धोते समय नल बंद रखना, बचा पानी पौधों में डालना।
जन-सुविधा के रूप में जल
Water as a public utilityपाठ में दिए चित्रों में जल-आपूर्ति के विभिन्न रूप दिखाए गए हैं — घड़ों की कतार लगाकर पानी भरना, पानी के टैंकर से पानी लेना, तालाब/नदी से पानी भरना, सिर पर घड़ा ढोकर पानी लाना, और रेलगाड़ी द्वारा जल आपूर्ति (जल रेल)।
बिन पानी सब सून
Nothing without water- पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, जिससे वर्षा जल सीधे बह जाता है और ज़मीन में नहीं रिसता।
- बोरवेल व नलकूपों से अत्यधिक भूजल दोहन (जैसे मोटर लगाकर अधिक पानी खींचना)।
- ज़मीन का बड़े पैमाने पर कंक्रीटीकरण (सड़कें, इमारतें), जिससे वर्षा जल ज़मीन में नहीं समा पाता।
- जल संग्रहण संरचनाओं (तालाब, बावड़ी) की उपेक्षा और रख-रखाव न होना।
यह भी जानें — वर्षा-जल संग्रहण
Rainwater harvestingवर्षा जल संग्रहण का मूल उद्देश्य है — “जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।” छत पर वर्षा-जल संग्रहण में भवन की छत पर एकत्रित वर्षा जल को पाइप द्वारा भंडारण टंकी में पहुँचाया जाता है (उपयोग से पहले इसे स्वच्छ करना ज़रूरी है)।
सेवा में,
संपादक महोदय,
[समाचार पत्र का नाम]
विषय: वर्षा जल संग्रहण को अनिवार्य बनाए जाने हेतु अनुरोध
महोदय,
मैं आपके सम्मानित समाचार पत्र के माध्यम से यह ध्यान दिलाना चाहता/चाहती हूँ कि हमारे क्षेत्र में अधिकांश घरों और भवनों में वर्षा जल संग्रहण की कोई व्यवस्था नहीं है, जिस कारण बहुमूल्य वर्षा जल व्यर्थ बह जाता है और भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।
मेरा अनुरोध है कि स्थानीय प्रशासन सभी नए और पुराने भवनों में वर्षा जल संग्रहण प्रणाली अनिवार्य करे, तथा इसके लिए नागरिकों को जागरूक भी करे। इससे हम आगामी जल संकट से काफ़ी हद तक बच सकेंगे।
धन्यवाद सहित,
[आपका नाम]
[पता]
आज की पहेली
Word-search — synonyms of water & its sourcesजल के प्राकृतिक स्रोत हैं — वर्षा, नदी, झील और तालाब। दिए गए वर्ग में जल और इन प्राकृतिक स्रोतों के समानार्थी शब्द ढूँढ़िए—
| क | मे | क | ग | ब | पा | ज | र |
| ल | ह | व | नी | न | र | ला | ज |
| अं | बु | स | र | ब | स | श | नी |
| म | न | रो | रि | ल | लि | य | य |
| य | भ | व | थ | ता | ल | श | त |
| ज | वा | र | म | ग | र | पा | टि |
| बा | रि | श | त | प्र | वा | हि | नी |
| व | र | त | रं | गि | णी | ट | ग |
| श्रेणी | समानार्थी शब्द |
|---|---|
| जल | अंबु, वारि |
| वर्षा | बारिश |
| नदी | सरिता, प्रवाहिनी, तरंगिणी |
| झील / तालाब | सरोवर (लंबवत), ताल |
खोजबीन के लिए
Explore — water poems/songsझरोखे से — ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’
Excerpt & shared understandingअनुपम मिश्र के इस अंश में कूड़न किसान और उसके तीन भाइयों की कथा है, जिन्हें एक पारस पत्थर मिलता है, पर राजा उनसे न सोना लेता है न पारस — बल्कि कहता है, “जाओ इससे अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।” आगे चलकर उन चारों भाइयों के नाम पर बने चार विशाल तालाब आज भी मिलते हैं।
- दोनों रचनाएँ तालाबों के महत्व पर ज़ोर देती हैं — जल-संचयन में उनकी भूमिका को उजागर करती हैं।
- दोनों में यह संदेश है कि जल-स्रोतों की रक्षा और रखरखाव समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
- दोनों रचनाओं के लेखक अनुपम मिश्र हैं, इसलिए दोनों में जल-संरक्षण के प्रति गहरी चिंता और आदर का भाव एक जैसा है।
- ‘पानी रे पानी’ जहाँ धरती को गुल्लक कहता है, वहीं दूसरी कथा दिखाती है कि तालाब बनाने वाले असल में उसी गुल्लक को समृद्ध करने वाले ‘महात्मा’ कहलाए।
पढ़ने के लिए — विश्वेश्वरैया
Supplementary readingयह प्रेरक जीवनी-अंश मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (जन्म: 15 सितंबर 1861, मुद्देनाहल्ली, मैसूर) के बचपन की एक बरसाती शाम से शुरू होती है, जब छह वर्षीय बालक विश्वेश्वरैया बहते पानी और प्रकृति की शक्ति को निहारते हुए यह जिज्ञासा करता है कि लोग गरीब क्यों होते हैं और प्रकृति की ऊर्जा का उपयोग कैसे किया जा सकता है।
बचपन से ही जिज्ञासु स्वभाव, निरंतर सीखते रहने का संकल्प और व्यावहारिक सोच के बल पर वे आगे चलकर भारत के एक महान इंजीनियर बने। उनका जीवन-संदेश था — “पहले जानो, फिर करो।”
