पाठ 4: पानी रे पानी (Paani Re Paani) Class 7th Hindi (Malhar) NCERT Solution

पानी रे पानी — संपूर्ण हल | EduGrown
कक्षा 5 · हिंदी · मल्हार · पाठ 4

💧 पानी रे पानी — संपूर्ण हल

पाठ के सभी अभ्यास प्रश्नों के विस्तृत, सरल व सीधे उत्तर — चरण दर चरण समझाइश के साथ

📖 निबंध ✍️ पाठ से + पाठ से आगे 💦 अनुपम मिश्र
✍️

लेखक से परिचय

About the author
अनुपम मिश्र का चित्र

अनुपम मिश्र (1948–2016) एक प्रखर लेखक, संपादक, जाने-माने पर्यावरणविद और छायाकार थे। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उन्होंने अनेक प्रयोगात्मक कार्य किए।

उनकी पुस्तक आज भी खरे हैं तालाब सर्वाधिक चर्चित है, जिसका ब्रेल लिपि सहित अनेक भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। साफ माथे का समाज उनकी एक और महत्वपूर्ण पुस्तक है। वे गांधी शांति प्रतिष्ठान से प्रकाशित पत्रिका गांधी मार्ग के संस्थापक-संपादक भी थे।

पहाड़, बादल और बरसात का दृश्य
पहाड़ों पर बरसात और बहती नदी — जल-चक्र की शुरुआत

📘 पाठ से (In-text Questions)

1

मेरी समझ से

Comprehension — MCQs
1हमारा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?
  • नल सूख जाने से।
  • पानी बरसने से।
  • तालाब और झीलों से।
  • बाढ़ आने से।
✅ स्पष्टीकरण
पाठ के अनुसार वर्षा का पानी तालाबों-झीलों में जमा होता है और वहाँ से धीरे-धीरे रिसकर, छनकर ज़मीन के नीचे छिपे जल-भंडार (भूजल) में जा मिलता है। इसलिए वर्षा और तालाब-झील दोनों ही भूजल भंडार को समृद्ध करने में सहायक हैं।
2निम्नलिखित में से कौन-सी बात जल-चक्र से संबंधित है?
  • वर्षा जल का संग्रह करना।
  • समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना।
  • नदियों का समुद्र में जाकर मिलना।
  • बरसात में चारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना।
✅ स्पष्टीकरण
पाठ के अनुसार जल-चक्र की परिभाषा है — “समुद्र से उठी भाप बादल बनकर पानी में बदलती है और फिर…जल की यात्रा एक तरफ से शुरू होकर समुद्र में वापस मिल जाती है।” अतः भाप का बादल बनना और नदियों का समुद्र में मिलना — ये दोनों जल-चक्र के प्रत्यक्ष चरण हैं। वर्षा जल का संग्रह करना मानव-प्रयास (जल संग्रहण) है, प्राकृतिक जल-चक्र का हिस्सा नहीं।
3“इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।” यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?
  • जल-चक्र की अवधारणा को न समझना।
  • आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना।
  • तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना।
  • भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना।
✅ स्पष्टीकरण
पाठ में स्पष्ट लिखा है — “अपने तालाबों को कचरे से पाटकर, भरकर समतल बना दिया…इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है।” तालाबों को नष्ट करना ही वह मूल गलती है, जिसके कारण गर्मियों में नल सूखते हैं और बरसात में बस्तियाँ डूबती हैं।
अब अपने मित्रों के साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
💬 यह एक संवाद-गतिविधि है, इसका कोई निश्चित लिखित उत्तर नहीं है। ऊपर दी गई व्याख्याओं (★ चिह्नित उत्तर) के आधार पर अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कर सकते हैं।
2

मिलकर करें मिलान

Match the terms with their meanings
स्तंभ 1स्तंभ 2 (सही अर्थ)
1. वर्षा जल संग्रहण2. वर्षा के जल को प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से (मानवीय प्रयासों से) धरती में संग्रह करना।
2. जल संकट3. जल की अत्यधिक कमी होना।
3. जल-चक्र4. समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर पानी में बदलना और वर्षा के द्वारा पुनः समुद्र में मिल जाना।
4. भूजल1. जमीन के नीचे छिपा जल भंडार।
3

पंक्तियों पर चर्चा

Discussing key lines

इस पाठ से चुनी गई पंक्तियों के भाव—

✅ अर्थ-विस्तार

“पानी आता भी है तो बेवक्त।” — नलों में पानी निश्चित समय पर नहीं, बल्कि कभी देर रात तो कभी बहुत सुबह आता है, जिससे लोगों को अपनी नींद छोड़कर पानी भरना पड़ता है। यह जल-वितरण-व्यवस्था की अनियमितता को दर्शाता है।

“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” — पानी की भारी कमी के कारण कुछ क्षेत्रों में स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है मानो सूखा (अकाल) पड़ गया हो, जिससे लोगों को अत्यंत कष्ट होता है।

“कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है।” — बाढ़ के समय पानी हर जगह भर जाने से सामान्य जनजीवन, आवागमन और कामकाज पूरी तरह रुक जाता है।

“अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।” — पानी की बहुत अधिक कमी (अकाल) और पानी की बहुत अधिक अधिकता (बाढ़) — दोनों ही असल में जल-चक्र के असंतुलन का परिणाम हैं, इसलिए दोनों समस्याएँ आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं।

4

सोच-विचार के लिए

Think & answer
पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?
✅ उत्तर
जिस प्रकार हम अपनी गुल्लक में धीरे-धीरे पैसे जमा करते हैं और ज़रूरत पड़ने पर उसका उपयोग करते हैं, उसी प्रकार धरती भी वर्षा के पानी को अपने अंदर (तालाबों, झीलों के माध्यम से भूजल भंडार में) धीरे-धीरे संग्रहित करती है। बरसात के बाद पूरे साल हम इसी संचित जल का उपयोग घर, खेत और पाठशाला में करते हैं — इसीलिए धरती को एक विशाल गुल्लक कहा गया है।
जल-चक्र की प्रक्रिया कैसे पूरी होती है?
जल-चक्र दर्शाता पहाड़ी दृश्य — वर्षा, नदी और बिजली उत्पादन
वर्षा से लेकर नदी और उपयोग तक — जल-चक्र का सचित्र दृश्य
✅ उत्तर
सूर्य की गर्मी से समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर उठता है। यह भाप ऊँचाई पर ठंडी होकर बादल का रूप ले लेती है। बादल बरसात के रूप में धरती पर पानी गिराते हैं। यह वर्षा जल नदियों के रूप में बहता हुआ पुनः समुद्र में जा मिलता है। इस प्रकार जल की यह यात्रा — समुद्र → भाप → बादल → वर्षा → नदी → समुद्र — निरंतर चलती रहती है, और इसी को जल-चक्र कहते हैं।
यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
✅ उत्तर
यदि सभी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ, तो हमारा भूजल भंडार भरना बंद हो जाएगा, पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा, खेती पूरी तरह ठप्प हो जाएगी, पेड़-पौधे व जीव-जंतु मुरझाकर नष्ट होने लगेंगे और चारों ओर अकाल जैसी भयानक स्थिति बन जाएगी।
पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है?
✅ उत्तर
क्योंकि रुपयों के बिना जीवन कुछ समय तक चल सकता है, परंतु पानी के बिना मनुष्य, जीव-जंतु और पौधे — किसी का भी जीवित रहना असंभव है। पानी हमारी सबसे बुनियादी आवश्यकता है, इसलिए लेखक कहते हैं कि इस अनमोल वर्षा-जल को रुपयों से भी अधिक कीमती समझकर धरती की गुल्लक (तालाब, झील आदि) में संचित करना चाहिए।
5

शीर्षक

Why this title?
इस पाठ का शीर्षक ‘पानी रे पानी’ दिया गया है। पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा?
✅ उत्तर
‘पानी रे पानी’ शीर्षक में पानी शब्द की पुनरावृत्ति (दो बार प्रयोग) यह दर्शाती है कि पूरा पाठ पानी के इर्द-गिर्द ही घूमता है — कभी उसकी कमी (अकाल) की चिंता में, कभी उसकी अधिकता (बाढ़) की चिंता में। यह पुनरावृत्ति एक भावनात्मक पुकार जैसी भी लगती है, मानो लेखक पानी के महत्व की ओर बार-बार ध्यान खींचना चाहते हों। इसीलिए यह शीर्षक पूरी तरह उपयुक्त है।
आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।
✅ नमूना उत्तर व्यक्तिगत विचार
मैं इस पाठ को “धरती की गुल्लक” नाम देना चाहूँगा/चाहूँगी, क्योंकि पूरा पाठ धरती को एक गुल्लक के रूप में देखने और वर्षा जल को सहेजकर उसमें जमा करने के महत्व पर ही केंद्रित है।
6

शब्दों की बात — बात पर बल देना

Emphasis words

“हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है।” बनाम “हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है।”

दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उसे हटाने से अर्थ में क्या अंतर आया?
✅ उत्तर
दूसरे वाक्य में ‘भी’ शब्द हटाया गया है। ‘भी’ शब्द तुलना और जोड़ने का भाव लाता है — यह बताता है कि जैसे हमारी अपनी गुल्लक होती है, वैसे ही धरती भी एक गुल्लक है। ‘भी’ हटाने पर वाक्य केवल एक सामान्य कथन बनकर रह जाता है, उसमें पहले बताई गई निजी गुल्लक से तुलना का भाव खो जाता है और वाक्य का प्रभाव कमज़ोर पड़ जाता है।
पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं। ऐसे वाक्य चुनकर लिखिए।
✅ उत्तर
  • “सोचा तो नहीं होगा शायद, पर इस बारे में पढ़ा जरूर है।” — ‘जरूर’ शब्द दृढ़ता और निश्चितता का भाव जोड़ता है।
  • “पानी आता भी है तो बेवक्त।” — ‘भी’ और ‘तो’ दोनों मिलकर विडंबना (यानी पानी आना चाहिए था पर सही समय पर नहीं आता) का भाव उभारते हैं।
  • “लो, सब तरफ पानी ही बहने लगता है।” — ‘ही’ शब्द इस बात पर बल देता है कि हर जगह केवल और केवल पानी ही दिखाई देता है, कुछ और नहीं।
  • “यह बाढ़ न गाँवों को छोड़ती है और न मुंबई जैसे बड़े शहरों को।” — ‘न…न’ का प्रयोग यह बल देने के लिए किया गया है कि बाढ़ से कोई भी अछूता नहीं रहता।
7

समानार्थी शब्द

Synonyms

नीचे दिए गए वाक्यों में रेखांकित शब्दों के स्थान पर समान अर्थ देने वाला शब्द लिखिए (शब्द-बादल में से चुनें: सूर्य, मेघ, भास्कर, पवन, वारिद, वायु, दिवाकर, जलद, वाष्प, समीर, दिनकर, नीरद)—

✅ उत्तर
वाक्यरेखांकित शब्दसमानार्थी शब्द (कोई एक)
(क) सूरज की किरणें पड़ते ही फूल खिल उठे।सूरजसूर्य / भास्कर / दिवाकर / दिनकर
(ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर जाता है।भापवाष्प
(ग) अचानक बादल गरजने लगे।बादलमेघ / जलद / वारिद / नीरद
(घ) जल-चक्र में हवा की भी बहुत बड़ी भूमिका है।हवावायु / पवन / समीर
8

उपसर्ग

Prefixes

“देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं।” — यहाँ ‘अ’ उपसर्ग ‘काल’ शब्द से जुड़कर नया अर्थ (कुसमय, सूखा) देता है। नीचे ‘देश’ शब्द के साथ बने उपसर्ग-शब्द दिए गए हैं—

प्र
वि
पर
स्व
देश
प्रदेश
विदेश
परदेश
स्वदेश
अब आप भी उपसर्ग के प्रयोग से ‘पात्र’ और ‘ज्ञान’ शब्दों के साथ नए शब्द बनाकर उनके वाक्यों में प्रयोग कीजिए—
✅ उत्तर
सु
पात्र
सुपात्र
अपात्र
वि
ज्ञान
अज्ञान
विज्ञान

वाक्य-प्रयोग:

  • वह अपने कर्तव्यों के प्रति सदैव जागरूक रहने वाला एक सुपात्र विद्यार्थी है।
  • बिना योग्यता के किसी को ज़िम्मेदारी देना उसे अपात्र व्यक्ति को सौंपने जैसा है।
  • अज्ञान के कारण ही लोग अंधविश्वासों में फँस जाते हैं।
  • विज्ञान ने मनुष्य के जीवन को बहुत सरल बना दिया है।

📗 पाठ से आगे (Exercise Questions)

9

आपकी बात

Your take
धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो, इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं?
✅ नमूना उत्तर
  • वर्षा जल संग्रहण (rainwater harvesting) अपनाना।
  • तालाबों, झीलों व पोखरों की सफाई करना और उन्हें कचरे से भरने से बचाना।
  • पानी का अनावश्यक अपव्यय (जैसे नल खुला छोड़ना) रोकना।
  • अधिक से अधिक पेड़-पौधे लगाना, जिससे भूजल स्तर बना रहे।
  • घर व स्कूल में पानी बचाने के प्रति दूसरों को भी जागरूक करना।
इस पाठ में एक छोटे-से खंड में जल-चक्र की प्रक्रिया को प्रस्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल-चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें।
✅ उत्तर
वह खंड पाठ के आरंभ में है — “सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें और लो फिर बहती हुई एक नदी…समुद्र से उठी भाप बादल बनकर पानी में बदलती है और फिर…जल की यात्रा एक तरफ से शुरू होकर समुद्र में वापस मिल जाती है।”

इसका चित्रांकन कुछ इस प्रकार किया जा सकता है: सूर्य (ऊपर कोने में) → उसकी किरणें समुद्र पर पड़ती हैं → समुद्र से उठती भाप (तीर के निशान से ऊपर की ओर) → आकाश में बनते बादल → बादलों से गिरती वर्षा (पहाड़ों पर) → पहाड़ों से बहती नदी → नदी का पुनः समुद्र में मिलना (तीर के निशान से चक्र पूरा करते हुए)।
अपने द्वारा बनाए गए जल-चक्र के चित्र का विवरण प्रस्तुत कीजिए।
🎨 यहाँ अपना जल-चक्र का चित्र बनाकर उसका विवरण लिखिए
(सूर्य → समुद्र → भाप → बादल → वर्षा → नदी → समुद्र, यह क्रम चित्र में तीरों से दर्शाइए)
10

सृजन

Creative response
कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर पानी नहीं आया और सार्वजनिक नल पर आप व आपके पड़ोसी दोनों एक साथ पहुँच जाते हैं। बिना विवाद के पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।
✅ नमूना उत्तर
  • 💧 पानी है अनमोल, बारी-बारी से भरो, न करो कोई तकरार!
  • 💧 मिल-बाँटकर भरें पानी, यही है सच्ची इंसानियत की निशानी।
  • 💧 पहले तुम, फिर मैं — साथ रहेंगे तो पानी सबको मिलेगा सही समय पर।
  • 💧 झगड़े से नहीं, समझ से बँटेगा पानी — यही है असली सयानापन।
  • 💧 आज तुम्हारी बारी, कल मेरी बारी — पानी बचाना है हम सबकी ज़िम्मेदारी।
“सूरज, समुद्र, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूँदें और फिर बहती हुई एक नदी और उसके किनारे बसा तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर।” — इस वाक्य से उभरे चित्र को बनाकर रंग भरिए।
🎨 यहाँ सूर्य, समुद्र, बादल, नदी और नदी किनारे बसे गाँव/शहर का चित्र बनाइए
11

पानी रे पानी — चित्र-चर्चा

Discuss the 9 daily-life pictures

नीचे हमारी दिनचर्या से जुड़ी 9 गतिविधियों के चित्र हैं। इन पर बातचीत कीजिए — कौन-से चित्र पानी के संकट को कम करने में सहायक हैं और कौन-से पानी की गुल्लक को जल्दी खाली कर रहे हैं।

पानी से जुड़ी नौ दैनिक गतिविधियों के चित्र
बाल्टी से नहाना, पौधों को सींचना, RO फिल्टर, तालाब खोदना, नल से पानी पीना, हैंडपंप-मोटर, पौधरोपण, स्कूटर धोना, खाली कक्षा
✅ चर्चा — वर्गीकरण
1. बाल्टी से नहानासीमित पानी का उपयोग — सहायक ✅
2. फुहारे से पौधे सींचनाज़रूरत भर पानी — सहायक ✅
3. RO/वाटर प्यूरीफायर
सामान्य उपयोग — तटस्थ
4. तालाब खोदनाजल-संग्रहण बढ़ाता है — बहुत सहायक ✅
5. नल से पानी पीना
आवश्यक उपयोग — तटस्थ
6. हैंडपंप में मोटर लगानाअत्यधिक भूजल दोहन — हानिकारक ⚠️
7. पौधरोपण करनाभूजल स्तर बनाए रखता है — सहायक ✅
8. होज़ पाइप से वाहन धोनाभारी मात्रा में पानी बर्बाद — हानिकारक ⚠️
9. खाली कक्षा
(जल-उपयोग से सीधा संबंध नहीं)

इस प्रकार, बाल्टी से नहाना, सीमित मात्रा में पौधों को सींचना, तालाब खोदना और पौधरोपण करना — ये सभी पानी बचाने में सहायक हैं, जबकि नलों के पाइप में मोटर लगाना और होज़ पाइप से वाहन धोना — जैसी गतिविधियाँ पानी की गुल्लक को तेज़ी से खाली करती हैं।

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सबका पानी

Panel discussion activity

विषय: ‘सभी को अपनी आवश्यकता के अनुसार पर्याप्त पानी कैसे मिले’ — इस पर एक परिचर्चा का आयोजन करें और मुख्य बिंदुओं पर आधारित रिपोर्ट तैयार करें।

✅ नमूना रिपोर्ट-बिंदु
  • हर मोहल्ले में जल-वितरण का समय निश्चित व समान होना चाहिए।
  • नलों में अवैध मोटर लगाने पर रोक लगाई जानी चाहिए।
  • सार्वजनिक जलस्रोतों (तालाब, कुआँ) का रख-रखाव और सफाई नियमित होनी चाहिए।
  • वर्षा जल संग्रहण को हर घर व स्कूल में अनिवार्य किया जाना चाहिए।
  • पानी की बर्बादी रोकने के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।
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दैनिक कार्यों में पानी

Water in daily tasks
अपने घर में पानी के उपयोग से जुड़ी एक तालिका बनाइए — घर के कार्यों में एक दिन में लगभग कितना पानी खर्च होता है? और पानी बचाने के उपाय?
✅ नमूना उत्तर
कार्यअनुमानित पानी (बाल्टी में)
नहाना1–2 बाल्टी
कपड़े धोना2–3 बाल्टी
बर्तन धोना1 बाल्टी
पीने व खाना बनाने में1 बाल्टी
सफाई (झाड़ू-पोंछा)1 बाल्टी

पानी बचाने के उपाय: नल खुला न छोड़ना, बाल्टी का उपयोग (शॉवर की बजाय), बर्तन धोते समय नल बंद रखना, बचा पानी पौधों में डालना।

क्या आपको अपनी आवश्यकतानुसार पानी उपलब्ध हो जाता है? यदि हाँ, तो कैसे? यदि नहीं, तो क्यों?
✅ नमूना उत्तर व्यक्तिगत विचार
हाँ, हमारे घर में सामान्यतः पर्याप्त पानी मिल जाता है क्योंकि हमने एक भंडारण टंकी बनवाई है जिसमें पानी जमा रहता है। हालाँकि गर्मियों में कभी-कभी आपूर्ति अनियमित हो जाती है, तब हमें पानी का उपयोग सोच-समझकर करना पड़ता है।
आपके घर में दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पानी का संचयन कैसे और किन पात्रों में किया जाता है?
✅ नमूना उत्तर
हमारे घर में पानी को टंकी, बड़े ड्रम, घड़े और बाल्टियों में संचित किया जाता है। छत पर बनी पानी की टंकी में मुख्य आपूर्ति जमा होती है, वहीं रसोई में पीने के पानी के लिए अलग से घड़े और बर्तन काम में लिए जाते हैं।
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जन-सुविधा के रूप में जल

Water as a public utility

पाठ में दिए चित्रों में जल-आपूर्ति के विभिन्न रूप दिखाए गए हैं — घड़ों की कतार लगाकर पानी भरना, पानी के टैंकर से पानी लेना, तालाब/नदी से पानी भरना, सिर पर घड़ा ढोकर पानी लाना, और रेलगाड़ी द्वारा जल आपूर्ति (जल रेल)।

✅ चर्चा — विवरण
ये सभी चित्र बताते हैं कि कई क्षेत्रों में लोगों को पानी के लिए कितना संघर्ष करना पड़ता है — कहीं घंटों कतार में खड़े रहना पड़ता है, कहीं पानी के टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता है, तो कहीं दूर-दराज़ तालाब या नदी से सिर पर घड़ा ढोकर पानी लाना पड़ता है। कुछ जगहों पर स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि विशेष जल-रेल चलाकर पानी पहुँचाना पड़ता है। यह दर्शाता है कि पानी अब एक सामान्य वस्तु न रहकर एक बहुमूल्य, सीमित जन-सुविधा बन गया है, जिसे सहेजकर उपयोग करना अत्यंत आवश्यक है।
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बिन पानी सब सून

Nothing without water
भूजल स्तर कम होने के तालाबों में कचरा फेंकने के अलावा और क्या-क्या कारण हो सकते हैं?
✅ नमूना उत्तर
  • पेड़ों की अंधाधुंध कटाई, जिससे वर्षा जल सीधे बह जाता है और ज़मीन में नहीं रिसता।
  • बोरवेल व नलकूपों से अत्यधिक भूजल दोहन (जैसे मोटर लगाकर अधिक पानी खींचना)।
  • ज़मीन का बड़े पैमाने पर कंक्रीटीकरण (सड़कें, इमारतें), जिससे वर्षा जल ज़मीन में नहीं समा पाता।
  • जल संग्रहण संरचनाओं (तालाब, बावड़ी) की उपेक्षा और रख-रखाव न होना।
भूजल स्तर की कमी से हमें आजकल किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?
✅ नमूना उत्तर
गर्मियों में नल व हैंडपंप सूख जाते हैं, पीने के पानी की भारी कमी हो जाती है, खेती के लिए सिंचाई का पानी नहीं मिलता, पानी के लिए दूर तक जाना पड़ता है या महँगे टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ता है, और कई क्षेत्रों में अकाल जैसी स्थिति बन जाती है।
आपके विद्यालय, गाँव या शहर के स्थानीय प्रशासन द्वारा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
✅ नमूना उत्तर व्यक्तिगत विचार
हमारे क्षेत्र में स्थानीय प्रशासन द्वारा वर्षा जल संग्रहण को भवनों में अनिवार्य किया गया है, पुराने तालाबों की सफाई व गहरीकरण करवाया जा रहा है, और सड़कों के किनारे सोक-पिट (जल-अवशोषण गड्ढे) बनाए जा रहे हैं जिससे वर्षा का पानी ज़मीन में रिस सके।
16

यह भी जानें — वर्षा-जल संग्रहण

Rainwater harvesting

वर्षा जल संग्रहण का मूल उद्देश्य है — “जल जहाँ गिरे वहीं एकत्र कीजिए।” छत पर वर्षा-जल संग्रहण में भवन की छत पर एकत्रित वर्षा जल को पाइप द्वारा भंडारण टंकी में पहुँचाया जाता है (उपयोग से पहले इसे स्वच्छ करना ज़रूरी है)।

अपने घर/विद्यालय/मुहल्ले में वर्षा जल संग्रहण की कोई विधि अपनाई जा रही है या नहीं, पता लगाइए। यदि नहीं, तो समाचार पत्र के संपादक को एक पत्र लिखिए।
✅ नमूना पत्र
नमूना उत्तर

सेवा में,
संपादक महोदय,
[समाचार पत्र का नाम]

विषय: वर्षा जल संग्रहण को अनिवार्य बनाए जाने हेतु अनुरोध

महोदय,
मैं आपके सम्मानित समाचार पत्र के माध्यम से यह ध्यान दिलाना चाहता/चाहती हूँ कि हमारे क्षेत्र में अधिकांश घरों और भवनों में वर्षा जल संग्रहण की कोई व्यवस्था नहीं है, जिस कारण बहुमूल्य वर्षा जल व्यर्थ बह जाता है और भूजल स्तर लगातार गिर रहा है।

मेरा अनुरोध है कि स्थानीय प्रशासन सभी नए और पुराने भवनों में वर्षा जल संग्रहण प्रणाली अनिवार्य करे, तथा इसके लिए नागरिकों को जागरूक भी करे। इससे हम आगामी जल संकट से काफ़ी हद तक बच सकेंगे।

धन्यवाद सहित,
[आपका नाम]
[पता]

17

आज की पहेली

Word-search — synonyms of water & its sources

जल के प्राकृतिक स्रोत हैं — वर्षा, नदी, झील और तालाब। दिए गए वर्ग में जल और इन प्राकृतिक स्रोतों के समानार्थी शब्द ढूँढ़िए—

मेपा
नीला
अंबुनी
रोरिलि
ता
वापाटि
बारिप्रवाहिनी
रंगिणी
🟧 अंबु (जल) 🟦 वारि (जल) 🟩 बारिश (वर्षा) 🟪 प्रवाहिनी (नदी) 🟪 सरिता (नदी) — तिरछे 🟨 ताल (तालाब) 🟢 तरंगिणी (नदी)
✅ मिले हुए शब्द
श्रेणीसमानार्थी शब्द
जलअंबु, वारि
वर्षाबारिश
नदीसरिता, प्रवाहिनी, तरंगिणी
झील / तालाबसरोवर (लंबवत), ताल
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खोजबीन के लिए

Explore — water poems/songs
🔎 यह एक अन्वेषण-गतिविधि है — पानी से संबंधित गीत/कविताओं का संकलन कर, अपने परिजनों, शिक्षक, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
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झरोखे से — ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’

Excerpt & shared understanding

अनुपम मिश्र के इस अंश में कूड़न किसान और उसके तीन भाइयों की कथा है, जिन्हें एक पारस पत्थर मिलता है, पर राजा उनसे न सोना लेता है न पारस — बल्कि कहता है, “जाओ इससे अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।” आगे चलकर उन चारों भाइयों के नाम पर बने चार विशाल तालाब आज भी मिलते हैं।

गाँव में लोग पानी भरते हुए — पानी का दैनिक जीवन में महत्व
गाँव में पानी भरते और घरेलू कामों में जुटे लोग
‘पानी रे पानी’ और ‘पाल के किनारे रखा इतिहास’ में आपको कौन-कौन सी बातें समान लगीं?
✅ उत्तर — साझी समझ
  • दोनों रचनाएँ तालाबों के महत्व पर ज़ोर देती हैं — जल-संचयन में उनकी भूमिका को उजागर करती हैं।
  • दोनों में यह संदेश है कि जल-स्रोतों की रक्षा और रखरखाव समाज की सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
  • दोनों रचनाओं के लेखक अनुपम मिश्र हैं, इसलिए दोनों में जल-संरक्षण के प्रति गहरी चिंता और आदर का भाव एक जैसा है।
  • ‘पानी रे पानी’ जहाँ धरती को गुल्लक कहता है, वहीं दूसरी कथा दिखाती है कि तालाब बनाने वाले असल में उसी गुल्लक को समृद्ध करने वाले ‘महात्मा’ कहलाए।
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पढ़ने के लिए — विश्वेश्वरैया

Supplementary reading
मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया का चित्र

यह प्रेरक जीवनी-अंश मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया (जन्म: 15 सितंबर 1861, मुद्देनाहल्ली, मैसूर) के बचपन की एक बरसाती शाम से शुरू होती है, जब छह वर्षीय बालक विश्वेश्वरैया बहते पानी और प्रकृति की शक्ति को निहारते हुए यह जिज्ञासा करता है कि लोग गरीब क्यों होते हैं और प्रकृति की ऊर्जा का उपयोग कैसे किया जा सकता है।

बचपन से ही जिज्ञासु स्वभाव, निरंतर सीखते रहने का संकल्प और व्यावहारिक सोच के बल पर वे आगे चलकर भारत के एक महान इंजीनियर बने। उनका जीवन-संदेश था — “पहले जानो, फिर करो।”

✅ मुख्य सीख
यह प्रेरक कथा बताती है कि सच्चा ज्ञान जिज्ञासा और निरंतर प्रश्न पूछने से मिलता है। विश्वेश्वरैया ने बचपन से ही प्रकृति, समाज और गरीबी जैसे गूढ़ विषयों पर सवाल उठाए और उनके उत्तर ढूँढ़ने के लिए जीवन भर एक ‘छात्र’ बने रहने का संकल्प लिया — यही उनकी महानता की कुंजी थी। यह कहानी विद्यार्थियों को जिज्ञासु बने रहने और कड़ी मेहनत से अपने सपने पूरे करने की प्रेरणा देती है।
📚 यह हल-पत्रक “पानी रे पानी” (कक्षा 5, हिंदी — मल्हार, पाठ 4) पर आधारित है, केवल अध्ययन-सहायता हेतु तैयार किया गया है।

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