माँ, कह एक कहानी
“यशोधरा” काव्य-कृति से लिया गया एक अंश
कवि से परिचय
राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त का जन्म चिरगाँव, झाँसी (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। पंद्रह-सोलह वर्ष की आयु में ही वे कविता रचने लगे थे। आरंभ में ब्रज भाषा में और बाद में आजीवन हिंदी में लेखन करते रहे। स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी रचनाओं ने देशप्रेम की भावना जगाई। उनकी अधिकांश कृतियों में भारत के धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और राष्ट्रीय चेतना के स्वर मिलते हैं। साकेत, भारत-भारती और यशोधरा उनकी प्रसिद्ध काव्य-कृतियाँ हैं। प्रस्तुत कविता में माँ यशोधरा अपने पुत्र राहुल को एक कहानी सुनाती हैं, जो संवाद शैली में रची गई है।
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
माँ अपने बेटे को करुणा और न्याय की कहानी क्यों सुनाती है?
कहानी असल में राहुल के पिता (तात) से जुड़ी है, इसलिए यह उसे अपने परिवार और पूर्वजों के बारे में बताती भी है। लेकिन कहानी के अंत में माँ राहुल से ही निर्णय करने को कहती है — इसका मुख्य उद्देश्य बालक में सही-गलत, न्याय-अन्याय की समझ विकसित करना है।
कविता में घायल पक्षी की कहानी का उपयोग किस लिए किया गया है?
घायल हंस की घटना कविता का केंद्रीय प्रसंग है। एक ओर आखेटक (शिकारी) की क्रूरता है जिसने निर्दोष हंस को तीर से घायल किया, दूसरी ओर राहुल के तात की करुणा है जिन्होंने उस पक्षी की रक्षा की। इस प्रकार कविता करुणा और हिंसा के बीच के द्वंद्व को उभारती है।
कविता के अंत तक पहुँचते-पहुँचते बच्चे को क्या समझ में आने लगता है?
राहुल कहानी सुनकर स्वयं यह निष्कर्ष निकालता है — “कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे?” अर्थात रक्षक को भक्षक पर वरीयता मिलनी चाहिए। इससे स्पष्ट होता है कि उसे यह समझ आ गई कि सच्चा न्याय दयाभाव से युक्त होता है, और सही निर्णय निडरता से ही दिया जा सकता है।
हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
यह एक समूह-चर्चा वाली गतिविधि है, इसलिए इसका कोई निश्चित उत्तर नहीं है। विद्यार्थी अपने साथियों के साथ चर्चा करते हुए यह बता सकते हैं कि उन्होंने ऊपर दिए गए उत्तर कविता की किन पंक्तियों या भावों के आधार पर चुने। जैसे — यदि किसी ने “करुणा और हिंसा के बीच के संघर्ष” को चुना है, तो वह हंस के घायल होने और तात द्वारा उसे बचाने की घटना का हवाला दे सकता है। अलग-अलग उत्तर सही हो सकते हैं यदि वे कविता की पंक्तियों से युक्तिसंगत रूप से जुड़े हों।
मिलकर करें मिलान
माँ, पुत्र और तात (पिता) कौन हैं — इन्हें पहचानकर सुमेलित कीजिए।
| 1. बेटा | → | सिद्धार्थ और यशोधरा के पुत्र राहुल |
| 2. माँ | → | यशोधरा, एक राजकुमारी, सिद्धार्थ की पत्नी |
| 3. तात (पिता) | → | सिद्धार्थ, एक राजकुमार जो बाद में गौतम बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए |
इस कविता में जिस “तात” (पिता) की कहानी सुनाई जा रही है, वे सिद्धार्थ हैं — जो आगे चलकर गौतम बुद्ध के नाम से विख्यात हुए। माँ यशोधरा, सिद्धार्थ की पत्नी हैं, और बेटा राहुल — दोनों की संतान है। इसीलिए कविता में माँ पुत्र को संबोधित करते हुए एक बार “राहुल” नाम से भी पुकारती हैं।
पंक्तियों पर चर्चा
इन पंक्तियों का आपको क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए।
“कोई निरपराध को मारे, तो क्यों अन्य उसे न उबारे? रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी!”
राहुल इन पंक्तियों में कहता है कि यदि कोई निर्दोष प्राणी को मार रहा हो, तो दूसरों को उसकी रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। जो रक्षा करने वाला है उसे, मारने वाले (भक्षक) पर वरीयता मिलनी चाहिए — क्योंकि सच्चा न्याय वही है जिसमें दया शामिल हो। अर्थात न्याय केवल कठोर नियमों का पालन नहीं, बल्कि करुणा से युक्त निर्णय है।
“हुआ विवाद सदय-निर्दय में, उभय आग्रही थे स्वविषय में, गई बात तब न्यायालय में, सुनी सभी ने जानी।”
यहाँ बताया गया है कि दयालु व्यक्ति (राहुल के तात, जिन्होंने घायल हंस को बचाया) और निर्दयी व्यक्ति (आखेटक, जो हंस को अपना शिकार मानता था) के बीच झगड़ा हो गया। दोनों अपनी-अपनी बात पर अड़े रहे, इसलिए यह मामला न्यायालय (राजसभा) तक पहुँच गया, जहाँ सब लोगों ने यह विवाद सुना और जाना।
सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए —
आपके विचार से इस कविता में कौन-सी पंक्ति सबसे महत्वपूर्ण है? आप उसे ही सबसे महत्वपूर्ण क्यों मानते हैं?
“न्याय दया का दानी!” — इस पंक्ति को सबसे महत्वपूर्ण माना जा सकता है, क्योंकि यही पूरी कविता का सार है। यह पंक्ति बताती है कि सच्चा न्याय वही है जिसमें दया और करुणा शामिल हो, केवल कठोर नियम या शक्ति का प्रयोग नहीं। कविता की पूरी कहानी इसी भाव की ओर बढ़ती है और अंत में राहुल भी इसी निष्कर्ष पर पहुँचता है। (विद्यार्थी अपनी पसंद की कोई अन्य पंक्ति चुनकर भी उचित कारण दे सकते हैं।)
आखेटक और बच्चे के पिता के बीच तर्क-वितर्क क्यों हुआ था?
उपवन में उड़ रहा एक हंस अचानक तीर से बिंधकर घायल होकर गिर पड़ा। राहुल के तात ने चौंककर उसे उठाया और उसकी देखभाल की, मानो उसे नया जीवन मिल गया हो। तभी वह हंस को मारने वाला आखेटक वहाँ आया और अपने शिकार को अपना अधिकार मानते हुए घायल हंस को माँगने लगा। परंतु तात, जो पहले से ही उस पक्षी के रक्षक बन चुके थे, हंस को लौटाने के लिए तैयार नहीं हुए। इसी कारण दोनों के बीच तर्क-वितर्क और विवाद हो गया, जो अंततः न्यायालय तक जा पहुँचा।
माँ ने पुत्र से “राहुल, तू निर्णय कर इसका” क्यों कहा?
माँ चाहती थी कि राहुल स्वयं सोच-समझकर, अपनी बुद्धि और विवेक का उपयोग करके यह तय करे कि न्याय किसके पक्ष में होना चाहिए — आखेटक के या तात के। इससे राहुल में स्वयं निर्णय लेने, निडर होकर अपनी राय रखने और सही-गलत परखने की क्षमता विकसित होती। कहानी को अधूरा छोड़कर माँ ने यह भी दिखाया कि हर सवाल का जवाब सुनने की बजाय स्वयं सोचकर निकालना अधिक सार्थक होता है।
यदि कहानी में आप उपवन में होते तो घायल हंस की सहायता के लिए क्या करते? आपके अनुसार न्याय कैसे किया जा सकता था?
यदि मैं उपवन में होता, तो घायल हंस को तुरंत उठाकर उसके घाव पर मरहम-पट्टी करता और उसे सुरक्षित स्थान पर आराम करने देता, जैसा राहुल के तात ने किया। न्याय के लिए मैं यह सुझाव देता कि आखेटक को समझाया जाए कि निर्दोष पक्षियों का शिकार करना उचित नहीं है, और घायल हंस को स्वस्थ होने तक तात के पास ही रहने दिया जाए। इस तरह रक्षक (तात) का पक्ष लेना ही सही न्याय होता, क्योंकि रक्षा करने वाला हमेशा नष्ट करने वाले से बेहतर होता है।
कविता में माँ और बेटे के बीच बातचीत से उनके बारे में क्या-क्या पता चलता है?
माँ (यशोधरा) एक स्नेही, धैर्यवान और शिक्षाप्रद स्वभाव की हैं — वे कहानी के माध्यम से अपने पुत्र में नैतिक समझ विकसित करना चाहती हैं और उसे स्वयं सोचने का अवसर देती हैं। दूसरी ओर, राहुल एक जिज्ञासु, हठी (जिद्दी) पर समझदार बालक है — वह बार-बार माँ से कहानी आगे बढ़ाने को कहता है, ध्यान से सुनता है, और अंत में स्वयं एक सटीक व न्यायपूर्ण निष्कर्ष निकालता है। दोनों के बीच का यह आत्मीय संवाद माँ-बेटे के प्रगाढ़ स्नेह-संबंध को भी दर्शाता है।
अनुमान और कल्पना से
माँ ने अपने बेटे को कहानी सुनाते समय अंत में कहानी को स्वयं पूरा नहीं किया, बल्कि उसी से निर्णय करने के लिए कहा। यदि आप किसी को यह कहानी सुना रहे होते तो कहानी को आगे कैसे बढ़ाते?
यदि मैं यह कहानी सुना रहा होता, तो राहुल के उत्तर के बाद बताता कि राजा (न्यायाधीश) ने भी राहुल जैसा ही न्याय किया — घायल हंस को तात के पास ही रहने दिया गया, क्योंकि रक्षक ने उसकी जान बचाई थी और भक्षक (आखेटक) का उद्देश्य केवल उसे मारना था। इस तरह कहानी का समापन इस संदेश के साथ होता कि सच्चा न्याय सदैव करुणा और दया से प्रेरित होना चाहिए।
मान लीजिए कि कहानी में हंस और तीर चलाने वाले के बीच बातचीत हो रही है। कल्पना से बताइए कि जब उसने हंस को तीर से घायल किया तो उसमें और हंस में क्या-क्या बातचीत हुई होगी? उन्होंने एक-दूसरे को क्या-क्या तर्क दिए होंगे?
हंस: “हे शिकारी, मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा था? मैं तो निश्चिंत होकर आकाश में उड़ रहा था, फिर तुमने मुझे तीर से क्यों घायल किया?”
आखेटक: “मैं एक शिकारी हूँ, पक्षियों का शिकार करना मेरा कार्य और जीविका का साधन है। तुम मेरे लक्ष्य-साधन का प्रमाण हो।”
हंस: “पर क्या तुम्हारी जीविका के लिए मेरा प्राण लेना उचित है? मुझे भी जीने का अधिकार है, जैसा तुम्हें है।”
आखेटक: “यह तो संसार का नियम है — बलवान निर्बल पर विजय पाता है।”
इस प्रकार दोनों के बीच शक्ति और करुणा, आवश्यकता और अधिकार को लेकर तर्क-वितर्क हुआ होगा। (विद्यार्थी अपनी कल्पना से अलग संवाद भी लिख सकते हैं।)
मान लीजिए कि माँ ने जो कहानी सुनाई है, आप भी उसके एक पात्र हैं। आप कौन-सा पात्र बनना चाहेंगे? और क्यों?
मैं “पक्षी को बचाने वाला व्यक्ति” (तात) बनना चाहूँगा/चाहूँगी, क्योंकि यह पात्र करुणा और साहस दोनों का प्रतीक है। एक निर्दोष प्राणी की रक्षा करना और उसके लिए न्याय की लड़ाई लड़ना मुझे सबसे प्रेरणादायक कार्य लगता है। यह भूमिका मुझे यह सिखाती है कि जब भी किसी कमज़ोर पर अन्याय हो, तो हमें निडर होकर उसकी सहायता के लिए आगे आना चाहिए। (विद्यार्थी अपनी पसंद के अनुसार कोई अन्य पात्र चुनकर भी उचित कारण दे सकते हैं।)
संवाद
कविता में दिए गए संवादों को पहचानिए कि कौन-सा कथन किसने कहा है।
कविता में माँ और पुत्र (राहुल) की बातचीत बारी-बारी से चलती है — माँ कहानी का एक अंश सुनाती हैं, राहुल उसे दोहराते हुए प्रश्न पूछता है या आगे बढ़ने का आग्रह करता है, फिर माँ आगे की कहानी सुनाती हैं। नीचे यह क्रम पूरा दिखाया गया है:
पुत्र (राहुल) द्वारा कहे गए कथन
माँ द्वारा कहे गए कथन
शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में प्रकृति से जुड़े शब्द कविता में से चुनकर लिखिए —
कविता में प्रकृति का सुंदर वर्णन हुआ है — उपवन (बगीचा), फूल (“वर्ण वर्ण के फूल खिले थे”), हिम-बिंदु (ओस की बूँदें), सुरभि (सुगंध — “जहाँ सुरभि मनमानी”), पानी (“लहराता था पानी”), खग/हंस (पक्षी) और झोंके (हवा के हल्के झोंके) — ये सभी शब्द प्रकृति से सीधे जुड़े हैं और कविता के वर्णनात्मक सौंदर्य को बढ़ाते हैं।
पंक्ति से पंक्ति
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में मिलती-जुलती पंक्तियों को मिलाइए —
| 1. कहती है मुझसे यह चेटी | → | यह सेविका मुझसे यह कहती है। |
| 2. तू है हठी मानधन मेरे | → | हे मेरे पुत्र, तू बहुत हठ करता है। |
| 3. झलमल कर हिम-बिंदु झिले थे | → | हिम-कण / ओस की बूँदें झिलमिला रही थीं। |
| 4. गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से | → | तेज धार वाले तीर से घायल होकर गिर गया। |
| 5. हुआ विवाद सदय-निर्दय में | → | दयालु और निर्दयी व्यक्ति में झगड़ा हुआ। |
| 6. कह दे निर्भय, जय हो जिसका। | → | तू बिना डरे कह दे कि जीत किसकी होनी चाहिए। |
| 7. तूने गुनी कहानी। | → | तूने कहानी को समझ लिया है। |
| 8. उभय आग्रही थे स्वविषय में | → | दोनों ही अपनी-अपनी बात पर अड़े हुए थे। |
| 9. तब उसने, जो था खगभक्षी– हठ करने की ठानी। | → | तब उस तीर चलाने वाले ने हठ करने का निश्चय कर लिया। |
| 10. रक्षक पर भक्षक को वारे, न्याय दया का दानी! | → | न्याय में दया सम्मिलित होती है, न्याय मारने वाले के स्थान पर बचाने वाले का पक्ष लेता है। |
कविता की रचना
पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद (गद्य) के रूप में लिखिए।
उदाहरण (पाठ्यपुस्तक से):
“सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे,” → “सुनो! आपके पिता एक उपवन में बहुत सवेरे भ्रमण किया करते थे…”
मूल पद: “गाते थे खग कल कल स्वर से, सहसा एक हंस ऊपर से, गिरा, बिद्ध होकर खर-शर से, हुई पक्ष की हानी!”
गद्य रूप: “पक्षी मधुर स्वर में गीत गा रहे थे, तभी अचानक एक हंस ऊपर से किसी तेज धार वाले तीर से घायल होकर नीचे गिर पड़ा, और उसके पंख को गहरी क्षति पहुँची।”
कविता में विराम चिह्न
(क) नीचे कविता का एक अंश बिना विराम चिह्नों के दिया गया है। इसमें उपयुक्त स्थानों पर विराम चिह्न लगाइए —
“राहुल, तू निर्णय कर इसका–
न्याय पक्ष लेता है किसका?
कह दे निर्भय, जय हो जिसका।
सुन लूँ तेरी बानी।”
“माँ, मेरी क्या बानी?
मैं सुन रहा कहानी।
कोई निरपराध को मारे,
तो क्यों अन्य उसे न उबारे?
रक्षक पर भक्षक को वारे,
न्याय दया का दानी!”
“न्याय दया का दानी?
तूने गुनी कहानी।”
अल्प विराम ( , ) — थोड़ा रुकने के लिए, पूर्ण विराम ( । ) — वाक्य समाप्ति पर, प्रश्नवाचक चिह्न ( ? ) — प्रश्न पूछने पर, विस्मयादिबोधक चिह्न ( ! ) — आश्चर्य या भाव प्रकट करने पर, और उद्धरण चिह्न ( ” ” ) — यह दिखाने के लिए कि कौन-सी पंक्ति माँ ने कही और कौन-सी पुत्र ने।
(ख) अब विराम चिह्नों का ध्यान रखते हुए कविता को अपने समूह में सुनाइए। — (यह एक मौखिक अभ्यास गतिविधि है, इसे कक्षा में साथियों के साथ करें।)
आपकी बात
“सुन, उपवन में बड़े सबेरे, तात भ्रमण करते थे तेरे,” — आप या आपके परिजन भ्रमण के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं? और क्यों?
मेरे परिवार के लोग प्रायः सुबह-सवेरे पास के पार्क या बगीचे में टहलने जाते हैं। कभी-कभी हम छुट्टी के दिन नदी किनारे या पहाड़ी क्षेत्र में भी घूमने जाते हैं। भ्रमण से मन को ताज़गी मिलती है, स्वास्थ्य अच्छा रहता है और प्रकृति के करीब रहने का अवसर मिलता है। (विद्यार्थी अपने स्वयं के अनुभव के आधार पर उत्तर लिखें।)
इस पाठ में एक माँ अपने पुत्र को कहानी सुना रही है। आप किस-किस से कहानी सुनते हैं या थे? आप किसको और कौन-सी कहानी सुनाते हैं?
बचपन में मैं अपनी दादी और नानी से परियों, राजा-रानी और पंचतंत्र की कहानियाँ सुनता/सुनती था/थी। अब मैं अपने छोटे भाई-बहन या पड़ोस के बच्चों को पंचतंत्र और अकबर-बीरबल की रोचक कहानियाँ सुनाता/सुनाती हूँ, जिनसे उन्हें सीख भी मिलती है। (विद्यार्थी अपने अनुभव के अनुसार लिखें।)
माँ ने कहानी सुनाने के बीच में एक प्रश्न पूछ लिया था। क्या कहानी सुनाने के बीच में प्रश्न पूछना सही है? क्यों?
हाँ, कहानी सुनाने के बीच प्रश्न पूछना उचित है। इससे सुनने वाला ध्यान से कहानी सुनता है, उसकी जिज्ञासा बनी रहती है और वह कहानी की घटनाओं को गहराई से समझ पाता है। इस कविता में भी माँ द्वारा बीच-बीच में पूछे गए प्रश्नों (“राहुल, तू निर्णय कर इसका”) ने राहुल को स्वयं सोचने और निष्कर्ष निकालने के लिए प्रेरित किया, जिससे कहानी केवल सुनने की वस्तु न रहकर सीखने का माध्यम बन गई।
कविता में बालक अपनी माँ से बार-बार ‘वही’ कहानी सुनने की हठ करता है। क्या आपका भी कभी कोई कहानी बार-बार सुनने का मन करता है? अगर हाँ, तो वह कौन-सी कहानी है और क्यों?
हाँ, मुझे भी अपनी दादी से “चतुर खरगोश और शेर” की कहानी बार-बार सुनना अच्छा लगता था, क्योंकि उसमें छोटे खरगोश की चतुराई देखकर मुझे बहुत आनंद आता था और हर बार सुनने पर मुझे कुछ नया समझ आता था। पसंदीदा कहानियाँ बार-बार सुनने से हमें सुरक्षा और अपनेपन का एहसास होता है। (विद्यार्थी अपनी पसंदीदा कहानी के आधार पर उत्तर लिखें।)
निर्णय करें
“राहुल, तू निर्णय कर इसका–” नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। बताइए कि इन स्थितियों में आप क्या करेंगे?
सुनी कहानी
अपने घर या आस-पास सुनी-सुनाई जाने वाली किसी लोककथा को लिखकर कक्षा में सुनाइए।
यह एक व्यक्तिगत व सामूहिक गतिविधि है। विद्यार्थी अपने घर के बड़े-बुज़ुर्गों से सुनी हुई किसी लोककथा (जैसे “चालाक सियार”, “ईमानदार लकड़हारा”, या क्षेत्रीय भाषा की कोई पारंपरिक कथा) को अपनी भाषा में लिखें और कक्षा में सुनाएँ। कक्षा की सभी लोककथाओं को मिलाकर एक पुस्तिका तैयार की जा सकती है और उसे पुस्तकालय में रखा जा सकता है। ध्यान रखें कि कहानी संक्षिप्त, स्पष्ट और शिक्षाप्रद हो।
आज की पहेली
इनके उत्तर आपको कविता में से मिल जाएँगे। पहेलियाँ बूझिए —
पहेली 1
माँ ही अपनी नानी की बेटी है, अपने मामा की बहन है, अपने पिता की पत्नी (भार्या) है, और अपने चाचा की भाभी है — ये सभी रिश्ते एक ही व्यक्ति यानी “माँ” पर लागू होते हैं, जैसा कविता के आरंभ में भी संकेत मिलता है।
पहेली 2
यह पहेली एक पक्षी का वर्णन करती है जो आकाश में उड़ता है, पंख फैलाकर सैर करता है, और उसके दो पंख व दो पैर होते हैं — यह विवरण कविता में वर्णित हंस से मेल खाता है, जो उपवन में उड़ते समय तीर से घायल हुआ था।
पहेली 3
यह पहेली “सुरभि” अर्थात सुगंध की बात कर रही है, जो बगीचों में फूलों के बीच बसती है और हवा में घुल-मिलकर फैलती है। कविता की पंक्ति “जहाँ, सुरभि मनमानी” में भी इसी शब्द का प्रयोग हुआ है।
