Ch-10 तरुण के स्वप्न”Tarun ke swapn” Class 8th Hindi (Malhar) NCERT Solution

तरुण के स्वप्न — पूर्ण प्रश्नोत्तर हल | सुभाषचंद्र बोस
पाठ 10 · उद्बोधन · मल्हार

तरुण के स्वप्न

नेताजी सुभाषचंद्र बोस का मेदिनीपुर युवक-सम्मेलन (29 दिसंबर, 1929) में दिया गया वह उद्बोधन, जिसमें वे युवाओं को एक स्वाधीन, संपन्न और आदर्श राष्ट्र का स्वप्न उपहारस्वरूप सौंपते हैं।
— सुभाषचंद्र बोस (नेताजी)
“दिल्ली चलो · जय हिंद”
नेताजी सुभाषचंद्र बोस — युवाओं को स्वप्न सौंपते हुए (मेदिनीपुर, 1929)
पाठ से
😊

मेरी समझ से (क)

सही उत्तर के सामने तारा ★ — कुछ के एक से अधिक उत्तर
1“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” — रेखांकित शब्द ‘हम’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
  • सुभाषचंद्र बोस के लिए
  • देश के तरुण वर्ग के लिए
  • चित्तरंजन दास के लिए
  • भारतवासियों के लिए
स्पष्टीकरण

यह उद्बोधन युवक-सम्मेलन में दिया गया है और बोस कहते हैं “हे मेरे तरुण भाइयो!”। देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न के उत्तराधिकारी वे स्वयं तथा वे युवा हैं जिन्हें वे संबोधित कर रहे हैं — अर्थात् ‘हम’ का अभिप्राय देश का तरुण वर्ग है। (व्यापक अर्थ में भारतवासी भी, पर प्रत्यक्ष संबोधन युवाओं को है।)

2स्वाधीन राष्ट्र का स्वप्न किससे साकार होगा?
  • आर्थिक असमानता से
  • स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकारों से
  • श्रम और कर्म की मर्यादा से
  • जातिभेद से
स्पष्टीकरण

बोस के आदर्श समाज में आर्थिक विषमता, जातिभेद और स्त्री-पुरुष के भिन्न अधिकार समाप्त करने हैं। राष्ट्र का स्वप्न श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा से साकार होगा — जहाँ परिश्रम का सम्मान हो और आलसी-अकर्मण्य के लिए स्थान न रहे।

3“उनके स्वप्न के उत्तराधिकारी आज हम हैं।” — ‘उत्तराधिकारी’ होने से क्या अभिप्राय है?
  • हमें उनके स्वप्नों को संजोकर रखना है
  • हमें भी उनकी तरह स्वप्न देखने का अधिकार है
  • उनके स्वप्नों को पूरा करने के लिए हमें ही कर्म करना है
  • उनके स्वप्नों पर चर्चा करने का दायित्व हमारा ही है
स्पष्टीकरण

‘उत्तराधिकारी’ का अर्थ है — किसी के बाद उसकी विरासत पाने और आगे बढ़ाने वाला। अतः चित्तरंजन दास के स्वप्न को संजोकर रखना और उसे पूरा करने के लिए स्वयं कर्म करना — दोनों इसमें निहित हैं। केवल चर्चा करना या स्वप्न देखना पर्याप्त नहीं।

4जब प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर प्राप्त होगा तब—
  • राष्ट्र की श्रम-शक्ति बढ़ेगी
  • तरुणों का साहस बढ़ेगा
  • राष्ट्र स्वाधीन बनेगा
  • राष्ट्र स्वप्नदर्शी होगा
स्पष्टीकरण

जब सबको शिक्षा और उन्नति के समान अवसर मिलेंगे, तो हर व्यक्ति योग्य व कर्मठ बनकर राष्ट्र-निर्माण में योगदान देगा — इससे राष्ट्र की श्रम-शक्ति (उत्पादक क्षमता) में वृद्धि होगी।

आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने होंगे — चर्चा कीजिए कि ये उत्तर ही क्यों चुने।
यह समूह-चर्चा है। ऊपर दिए स्पष्टीकरण आपके तर्क का आधार बनेंगे — प्रत्येक विकल्प को पाठ की पंक्तियों से जोड़कर समझाइए।
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मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 की पंक्तियों को स्तंभ 2 के भाव से जोड़िए
1. “इसी स्वप्न की प्रेरणा से हम उठते, बैठते, चलते, फिरते… काम-काज करते हैं।”2. हमारी समूची दिनचर्या व आचार-विचार इसी लक्ष्य (स्वप्न) की प्राप्ति पर केंद्रित हैं।
2. “जो राष्ट्र हमारे स्वदेशी समाज के यंत्र के रूप में काम करेगा… भारतवासियों का अभाव मिटाएगा।”3. जिस देश की योजनाएँ अपने समाज को ध्यान में रखकर बनेंगी, उस देश में किसी प्रकार का अभाव नहीं होगा।
3. “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो तथा समाज के दबाव से वह मरे नहीं।”1. सभी व्यक्तियों को सभी तरह की स्वतंत्रता हो और उस पर कोई बंधन/सामाजिक दबाव न हो।
स्मरण सूत्र: 1→2, 2→3, 3→1
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पंक्तियों पर चर्चा

इन पंक्तियों का आपको क्या अर्थ समझ आया?
(क) “उस समाज में अर्थ की विषमता न हो।”
आशय

ऐसा समाज जिसमें आर्थिक असमानता न हो — अमीर और गरीब के बीच भारी खाई न हो; सबके पास जीवन-निर्वाह के समान साधन व अवसर हों। यह आर्थिक समानता का आदर्श है।

(ख) “वही स्वप्न उनकी शक्ति का उत्स बना और उनके आनंद का निर्झर रहा।”
आशय

देशबंधु चित्तरंजन दास का स्वाधीन-संपन्न समाज का स्वप्न ही उनकी शक्ति का स्रोत (उत्स) और निरंतर बहने वाले आनंद का झरना (निर्झर) था। उस स्वप्न ने उन्हें ऊर्जा और प्रसन्नता — दोनों दीं।

(ग) “उस समाज में व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो।”
आशय

ऐसा समाज जहाँ व्यक्ति राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, धार्मिक व मानसिक — हर दृष्टि से स्वतंत्र हो; किसी भी प्रकार के बंधन, भय या सामाजिक दबाव से मुक्त रहकर सम्मान से जी सके।

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सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः पढ़कर पता लगाकर लिखिए
नेताजी ने किस प्रकार के राष्ट्र-निर्माण का स्वप्न देखा था?
उत्तर

एक नया सर्वांगीण स्वाधीन, संपन्न और आत्मनिर्भर राष्ट्र, जिसमें —

  • व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, समाज के दबाव से न मरे;
  • जातिभेद का स्थान न हो;
  • नारी मुक्त होकर पुरुषों के समान अधिकार पाए;
  • आर्थिक विषमता न हो, सबको शिक्षा व उन्नति का समान अवसर मिले;
  • श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा हो, आलसी-अकर्मण्य के लिए स्थान न रहे;
  • विजातीय (विदेशी) प्रभाव से मुक्त, विश्व के समक्ष आदर्श समाज व राष्ट्र बने।
नेताजी ने किस लक्ष्य की प्राप्ति को अपने जीवन की सार्थकता माना?
उत्तर

अपने इसी स्वप्न (आदर्श स्वाधीन-संपन्न समाज व राष्ट्र) की प्रतिष्ठा/प्राप्ति को। इस सत्य के लिए वे हर त्याग, हर संकट और प्राण देना भी ‘वह मरण है स्वर्ग समान’ मानते थे। यही स्वप्न उनके क्षुद्र जीवन को सार्थक बनाता है।

“आलसी तथा अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं रहेगा” — ऐसा क्यों कहा होगा?
उत्तर

क्योंकि राष्ट्र की उन्नति श्रम और कर्म पर निर्भर है। आदर्श समाज में प्रत्येक व्यक्ति को परिश्रम करके अपना और देश का योगदान देना है। आलसी व निकम्मे लोग प्रगति में बाधक बनते हैं, इसलिए कर्मशील समाज में उनके लिए स्थान नहीं — श्रम की मर्यादा बनाए रखने हेतु बोस ने ऐसा कहा।

नेताजी के ध्येय को पूरा करने के लिए आज की युवा पीढ़ी क्या-क्या कर सकती है?
उत्तर
  • मन लगाकर शिक्षा ग्रहण करे और ईमानदारी से परिश्रम करे।
  • जाति, धर्म, लिंग का भेद मिटाकर समानता व भाईचारा बढ़ाए।
  • नारी का सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करे।
  • आत्मनिर्भर भारत / स्वदेशी को बढ़ावा दे, नवाचार करे।
  • आलस्य व नशे से दूर रहकर समाज-सेवा व पर्यावरण-रक्षा में जुटे।
  • भ्रष्टाचार का विरोध कर देश के विकास में सक्रिय भागीदारी निभाए।
UPI स्वाधीन · संपन्न · आत्मनिर्भर भारत
नेताजी का स्वप्न — एक सर्वांगीण स्वाधीन, संपन्न व आत्मनिर्भर राष्ट्र

अनुमान और कल्पना से

“व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो” — बोस ने किन-किन दृष्टियों से मुक्ति की बात की होगी?
उत्तर
  • राजनीतिक — विदेशी (अंग्रेजी) शासन की गुलामी से।
  • सामाजिक — जातिभेद, ऊँच-नीच, रूढ़ियों व कुप्रथाओं से।
  • आर्थिक — गरीबी और आर्थिक विषमता से।
  • धार्मिक — अंधविश्वास व धार्मिक भेदभाव से।
  • मानसिक/वैचारिक — भय और गुलाम मानसिकता से; तथा स्त्रियों के लिए लैंगिक असमानता से।
नारी के लिए समान अधिकारों की बात बोस को क्यों कहनी पड़ी?
उत्तर

उस समय समाज में नारी को पुरुष के समान अधिकार व अवसर प्राप्त नहीं थे — वह शिक्षा, संपत्ति और निर्णयों में पीछे थी। बोस मानते थे कि समाज के आधे भाग (नारी) की समान भागीदारी के बिना सच्चा सर्वांगीण-स्वाधीन राष्ट्र संभव नहीं; इसीलिए उन्होंने नारी-मुक्ति व समान अधिकार पर विशेष बल दिया।

हमारे समाज में और कौन-से लोग हैं जिन्हें विशेष अधिकार दिए जाने की आवश्यकता है?
उत्तर (संकेत)

दिव्यांगजन, वंचित/पिछड़े व आदिवासी वर्ग, अत्यंत निर्धन परिवार, वृद्धजन, अनाथ व असहाय बच्चे — जिन्हें समानता तक पहुँचने के लिए अतिरिक्त सहयोग, सुविधा व अवसर की आवश्यकता है। (अपने विचार जोड़ें)

संबोधन केवल ‘भाइयो’ शब्द तक ही क्यों सीमित रहा होगा?
उत्तर

उस काल के सामाजिक परिवेश में सार्वजनिक सभाओं/युवक-सम्मेलनों में अधिकतर पुरुष/युवक ही उपस्थित होते थे; स्त्रियों की सार्वजनिक भागीदारी सीमित थी और तत्कालीन भाषा-शैली में ‘भाइयो’ सामान्य संबोधन था। (यह एक विडंबना भी है कि नारी-समानता की बात करने वाले बोस का संबोधन परिस्थितिवश ‘भाइयो’ तक रहा।)

“यह स्वप्न मैं तुम्हें उपहारस्वरूप देता हूँ— स्वीकार करो।” — श्रोताओं की क्या प्रतिक्रिया रही होगी?
उत्तर

युवा वर्ग उत्साह, जोश और प्रेरणा से भर उठा होगा — तालियों की गड़गड़ाहट और ‘जय हिंद’ के नारे गूँजे होंगे। अनेक युवाओं ने इस स्वप्न को अपना ध्येय बनाकर देश-सेवा व स्वतंत्रता-संग्राम में कूदने का संकल्प लिया होगा।

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शीर्षक

इसे ‘तरुण के स्वप्न’ शीर्षक क्यों दिया गया होगा?
उत्तर

क्योंकि यह उद्बोधन तरुणों (युवाओं) को संबोधित है और उनमें एक आदर्श स्वाधीन-संपन्न समाज व राष्ट्र का स्वप्न जगाता है। बोस यही स्वप्न युवाओं को उपहारस्वरूप सौंपते हैं ताकि वे उसे साकार करें। इस प्रकार शीर्षक विषय-वस्तु से पूर्णतः मेल खाता है।

कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? क्यों?
सुझाव

जैसे “नए भारत का स्वप्न”, “स्वप्न का उपहार”, “युवाओं के नाम संदेश”, “आदर्श राष्ट्र की कल्पना”। मैं “नए भारत का स्वप्न” रखूँगा क्योंकि यह बोस द्वारा कल्पित स्वाधीन-संपन्न आदर्श राष्ट्र को सीधे दर्शाता है। (आप अपना नाम व तर्क लिखें।)

अपनी कक्षा को संबोधित करने का अवसर मिले तो किन विषयों को शामिल करेंगे, शीर्षक क्या होगा?
संकेत

विषय — शिक्षा का महत्व, अनुशासन व समय-प्रबंधन, स्वच्छता, पर्यावरण-रक्षा, एकता व सहयोग, नशा-मुक्ति। शीर्षक — “हमारा संकल्प” / “बेहतर कल की ओर”। (अपनी पसंद चुनें व कारण लिखें।)

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भाषा की बात

विशेषता/गुण बताने वाले शब्द
भाषण से विशेषता/गुण बताने वाले शब्द ढूँढकर शब्द-समूह पूरा कीजिए।
विशेषता / गुणशब्द
अखंडसत्य
सर्वांगीण / स्वाधीन / संपन्नसमाज
स्वाधीन / आदर्शराष्ट्र
क्षुद्रजीवन
असीमशक्ति
अपारआनंद
आप इन शब्दों के साथ किन विशेषताओं को रखना चाहेंगे और क्यों?
सुझाव

जैसे — शाश्वत सत्य, समतामूलक समाज, सशक्त राष्ट्र, सार्थक जीवन, अदम्य शक्ति, शुद्ध आनंद। ये विशेषण इन शब्दों के सकारात्मक व आदर्श गुणों को और स्पष्ट करते हैं। (अपने शब्द व कारण लिखें।)

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विपरीतार्थक शब्द और उनके प्रयोग

विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए।
शब्द (स्तंभ 1)विपरीतार्थक (स्तंभ 2)
1. स्वीकारअस्वीकार
2. सार्थकनिरर्थक
3. विषमतासमानता
4. क्षुद्रविशाल / वृहत / विराट / महान
5. संपन्नविपन्न
6. अकर्मण्यकर्मण्य / कर्मठ
7. मरणजीवन
दिए उदाहरण के अनुसार दोनों शब्दों से वाक्य बनाइए।
नमूना वाक्य
  • स्वीकार/अस्वीकार — उसने प्रस्ताव तो स्वीकार किया, पर अनुचित शर्तें अस्वीकार कर दीं।
  • सार्थक/निरर्थक — परिश्रम से जीवन सार्थक बनता है, आलस्य से निरर्थक।
  • विषमता/समानता — समाज में आर्थिक विषमता मिटाकर समानता लानी होगी।
  • क्षुद्र/विशाल — क्षुद्र स्वार्थ त्यागकर विशाल हृदय अपनाओ।
  • संपन्न/विपन्न — संपन्न लोगों को विपन्न वर्ग की सहायता करनी चाहिए।
  • अकर्मण्य/कर्मण्य — समाज की उन्नति अकर्मण्य नहीं, अपितु कर्मण्य व्यक्तियों पर निर्भर है।
  • मरण/जीवन — देश के लिए मरण भी सामान्य जीवन से कहीं श्रेष्ठ है।
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आपकी बात

आप अपने विद्यालय, राज्य और देश के बारे में कैसे स्वप्न देखते हैं?
संकेत

विद्यालय — स्वच्छ, अनुशासित व सबके लिए समान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा। राज्य — सबको रोज़गार, अच्छी सड़कें-अस्पताल-विद्यालय, अपराध-मुक्त। देश — आत्मनिर्भर, भ्रष्टाचार-मुक्त, जहाँ हर नागरिक शिक्षित, सुखी और समान हो। (अपने स्वप्न लिखें।)

स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम अपने स्तर पर क्या-क्या कर सकते हैं?
उत्तर
  • संविधान व कानून का पालन तथा अपने कर्तव्यों का निर्वाह।
  • जागरूक नागरिक बनकर मतदान करना।
  • एकता व भाईचारा बनाए रखना; विभाजनकारी ताकतों/अफवाहों का विरोध।
  • राष्ट्रीय संपत्ति की रक्षा और स्वदेशी को बढ़ावा।
  • ईमानदारी, परिश्रम और देश-सेवा की भावना।
पाठ से आगे
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मिलान कीजिए — स्वतंत्रता सेनानी

तथ्यों का नाम से सही मिलान
1. 8 अप्रैल 1929 को ‘सेंट्रल असेंबली’ में बम; ‘शहीद-ए-आज़म’।भगत सिंह
2. ‘स्वराज पार्टी’ के संस्थापक, बोस के राजनीतिक गुरु।चित्तरंजन दास
3. भूख-हड़ताल, अनशन के 63वें दिन जेल में देहांत।जतिन दास
4. जन्मदिवस पर ‘अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ (2 अक्टूबर)।महात्मा गाँधी
5. नर्मदा तट पर विशाल प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’।सरदार वल्लभभाई पटेल
6. “मेरा नाम आजाद है, पिता का नाम स्वतंत्रता…”।चंद्रशेखर आजाद
इनमें से एक सेनानी का नाम ‘तरुण के स्वप्न’ पाठ में भी आया है। पहचानिए।
उत्तर

चित्तरंजन दास (देशबंधु चित्तरंजन दास) — जिन्हें पाठ में बोस के राजनीतिक गुरु तथा जिनके स्वप्न का उत्तराधिकारी बताया गया है।

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सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज के लिए प्रयास

स्वतंत्रता-प्राप्ति के पश्चात इस दिशा में क्या-क्या उल्लेखनीय प्रयत्न किए गए?
संकेत-उत्तर
  • संविधान — समानता, मौलिक अधिकार, सबको मताधिकार (नारी को भी)।
  • पंचवर्षीय योजनाएँ व बैंकों का राष्ट्रीयकरण; हरित क्रांति।
  • शिक्षा का अधिकार (RTE), सर्व शिक्षा अभियान, छात्रवृत्तियाँ।
  • आरक्षण व पिछड़े-वंचित वर्गों के कल्याण की योजनाएँ।
  • महिला सशक्तीकरण — बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पंचायत आरक्षण।
  • आत्मनिर्भर भारत, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्वच्छ भारत।
  • ISRO/रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता (अंतरिक्ष, BrahMos आदि)।
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स्त्री सशक्तीकरण

स्त्रियों को कौन-कौन से विशेषाधिकार राज्य की ओर से दिए गए हैं?
उत्तर (संकेत)
  • पुरुषों के समान मताधिकार व समान वेतन का अधिकार।
  • शिक्षा प्रोत्साहन — बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, निःशुल्क/रियायती शिक्षा व छात्रवृत्ति।
  • मातृत्व अवकाश, संपत्ति में समान अधिकार।
  • पंचायत/स्थानीय निकाय व कई स्थानों पर विधायी आरक्षण।
  • घरेलू हिंसा व कार्यस्थल-उत्पीड़न से सुरक्षा कानून, हेल्पलाइन (1091/181)।
‘आजाद हिंद फौज’ की स्त्रियों की टुकड़ी का नाम व उसकी भूमिका।
उत्तर

टुकड़ी का नाम — रानी झाँसी रेजिमेंट (Rani of Jhansi Regiment), जिसका नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी सहगल ने किया। भूमिका — यह पूर्णतः महिला सैनिकों की टुकड़ी थी जिसने अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र संग्राम, युद्ध-प्रशिक्षण व नर्सिंग कार्य किया। यह नारी-शक्ति और स्वतंत्रता-संग्राम में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी का प्रेरक प्रतीक बनी।

आपके प्रिय स्वतंत्रता सेनानी: जिस सेनानी के कार्यों/विचारों से आप प्रभावित हैं, उनका नाम कारण सहित लिखकर रोल-प्ले के रूप में कक्षा में उनके विचार प्रस्तुत कीजिए।
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नारे और स्वतंत्रता सेनानी

“तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूँगा।”— सुभाषचंद्र बोस (1944)
नारास्वतंत्रता सेनानी
स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।बाल गंगाधर तिलक (लोकमान्य तिलक)
करो या मरोमहात्मा गाँधी
मैं आजाद हूँ, आजाद रहूँगा और आजाद ही मरूँगाचंद्रशेखर आजाद
इंकलाब जिंदाबाद, साम्राज्यवाद मुर्दाबादभगत सिंह
पूर्ण स्वराजपंडित जवाहरलाल नेहरू
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झरोखे से · शब्दार्थ · खोजबीन

झरोखे से — गृह-उद्योग पर नेताजी का पत्र (सार)
सार

मांडले जेल से अनिलचंद्र विश्वास को लिखे पत्र में बोस ने गृह व कुटीर उद्योग पर विचार रखे — बेंत का काम, मिट्टी के खिलौने, और विशेषकर सीप के बटन बनाना (बंगाल के गाँवों में घर-घर, स्त्री-पुरुष फुरसत में करते थे)। उनका मत था कि कम लागत में, थोड़े यंत्रों व कच्चे माल से यह काम शुरू कर गरीब परिवार अपनी आय बढ़ा सकते हैं; समिति सस्ता कच्चा माल जुटाकर तैयार वस्तुएँ बेच सके। यह स्वदेशी व आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था का बीज था।

पाठ के कुछ कठिन शब्दों के अर्थ
शब्दअर्थ
उत्तराधिकारीकिसी के बाद उसकी विरासत/संपत्ति पाने वाला, वारिस
उत्सस्रोत, सोता, उद्गम
निर्झरझरना, प्रपात
सर्वांगीणसब अंगों/पक्षों में व्याप्त, चहुँमुखी
स्वाधीनस्वतंत्र, आजाद, अपने ही अधीन
अकर्मण्यकर्म के अयोग्य, आलसी, निकम्मा
क्षुद्रछोटा, तुच्छ
अखंडअटूट, संपूर्ण, बाधारहित
विजातीयभिन्न जाति/वर्ग का, पराया (विदेशी)
खोजबीन/परियोजना: ‘आजाद हिंद फौज’ पर और जानकारी जुटाकर कक्षा में प्रस्तुत कीजिए; तथा 10 महिला व 10 पुरुष स्वतंत्रता सेनानियों के चित्र व योगदान की संग्रहिका बनाइए (एक राज्य से एक ही व्यक्ति)।
पढ़ने के लिए: इसी अध्याय-समूह में सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की संगीतात्मक कविता “भारति, जय, विजय करे!” केवल आनंद हेतु दी गई है — इसका विस्तृत अध्ययन आप आगे की कक्षा में करेंगे।

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