Class 9 Hindi (Ganga) Chapter 7 | Main Aur Mera Desh | NCERT Solutions मैं और मेरा देश

मैं और मेरा देश — प्रश्न-उत्तर समाधान
गद्य खंड · निबंध

मैं और मेरा देश

— कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
📘 संपूर्ण प्रश्न-उत्तर ✦ विस्तृत व्याख्या 🇮🇳 नागरिक एवं राष्ट्र
@edugrown मेरा देश मैं अविभाज्य संबंध

‘मैं और मेरा देश’ — व्यक्ति और राष्ट्र दो अलग नहीं, एक-दूसरे से अटूट रूप से जुड़े हैं

मेरे उत्तर मेरे तर्क

बहुविकल्पीय प्रश्न — सटीक उत्तर एवं कारण
1 “एक दिन आनंद की इस दीवार में दरार पड़ गई” — ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है?
  • (क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
  • (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
  • (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार ✔
  • (घ) सुख-सुविधाओं का अभाव
📝 उत्तर एवं तर्क — (ग)

लेखक स्वयं को घर, पड़ोस और नगर में पूर्ण एवं संतुष्ट मानता था। लाला लाजपत राय के अनुभव ने उसके इसी ‘पूर्णता के भाव’ को तोड़ दिया और अहसास कराया कि देश गुलाम हो तो व्यक्ति अधूरा है। इसलिए ‘दरार’ उसकी पूर्णता के भाव पर हुए प्रहार का प्रतीक है।

2 लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में अपूर्व आनंद आता है?
  • (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का ✔
  • (ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
  • (ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
  • (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
📝 उत्तर एवं तर्क — (क)

लेखक के अनुसार ऐसे प्रश्न ‘बात को खिलने का, आगे बढ़ने का अवसर देते हैं’। अर्थात जो प्रश्न विषय को विस्तार देकर विचारों को आगे बढ़ाते हैं, उनका उत्तर देने में उसे अपूर्व आनंद मिलता है।

3 पराधीनता के दिनों को ‘दीन’ कहा गया है, क्योंकि पराधीन भारत में—
  • (क) मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
  • (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। ✔
  • (ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
  • (घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक थी।
📝 उत्तर एवं तर्क — (ख)

गुलामी की सबसे बड़ी पीड़ा भौतिक अभाव नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और गौरव का हनन है। लालाजी विदेश में संपन्न होकर भी गुलामी के कलंक से लज्जित अनुभव करते थे — इसी कारण उन दिनों को ‘दीन’ कहा गया।

4 मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते, यदि—
  • (क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
  • (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। ✔
  • (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
  • (घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
📝 उत्तर एवं तर्क — (ख)

निबंध का केंद्रीय भाव है कि व्यक्ति का गौरव उसके देश के गौरव से जुड़ा है। चाहे किसी के पास संसार के सब साधन हों, यदि उसका देश गुलाम (अधीन) है तो वे साधन उसे गौरव नहीं दे सकते।

5 “उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है” — ‘गाँठ’ किन दो बातों को बाँधती है?
  • (क) देश और नागरिक ✔
  • (ख) देश और संविधान
  • (ग) देश और विदेश
  • (घ) व्यवसाय और आजीविका
📝 उत्तर एवं तर्क — (क)

दोनों जापान वाली घटनाएँ यही दिखाती हैं कि नागरिक के अच्छे या बुरे कार्य का प्रभाव उसके देश के सम्मान पर पड़ता है। इस प्रकार ‘गाँठ’ देश और नागरिक को आपस में बाँधती है।

6 प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है?
  • (क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
  • (ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
  • (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध ✔
  • (घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
📝 उत्तर एवं तर्क — (ग)

पूरा निबंध इसी विचार के इर्द-गिर्द घूमता है कि ‘मैं और मेरा देश दो अलग चीजें हैं ही नहीं।’ अर्थात इसका मूल भाव व्यक्ति और देश का अटूट अंतर्संबंध है।

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मेरी समझ मेरे विचार

विस्तृत वर्णनात्मक उत्तर
1 स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?
📝 उत्तर

जापानी युवक ने फलों के दाम लेने से इनकार कर दिया और केवल यह आग्रह किया कि स्वामी जी अपने देश जाकर किसी से यह न कहें कि ‘जापान में अच्छे फल नहीं मिलते’। युवक का अपने देश के सम्मान के प्रति यह गहरा प्रेम और निःस्वार्थ देशभक्ति देखकर स्वामी रामतीर्थ मुग्ध (अभिभूत) हो गए। उसने अपने एक छोटे-से कार्य से अपने देश का गौरव असीम रूप से बढ़ा दिया था।

2 जापानी युवक ने फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? उसके व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है?
📝 उत्तर

युवक ने पैसे के बदले केवल यह ‘मूल्य’ माँगा कि स्वामी जी अपने देश लौटकर किसी से यह न कहें कि जापान में अच्छे फल नहीं मिलते — अर्थात उसके देश की निंदा न हो।

इससे उस युवक के व्यक्तित्व की छवि एक स्वाभिमानी, निःस्वार्थ एवं गहन देशभक्त नागरिक की उभरती है, जिसके लिए अपने देश का सम्मान धन से कहीं बढ़कर है। वह सच्चे अर्थों में राष्ट्र-प्रेमी और संवेदनशील है।

3 “मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” — स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
📝 उत्तर

लेखक का तर्क है कि नागरिक और देश एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हैं —

  • व्यक्ति की पहचान उसके घर, पड़ोस, नगर और देश से बनती है।
  • देश की हीनता या गौरव का फल नागरिक को मिलता है, और नागरिक के अच्छे-बुरे कार्य का फल देश को।
  • उदाहरण: जापानी युवक ने अपने सम्मानजनक कार्य से देश का गौरव बढ़ाया; जबकि दूसरे युवक की चोरी से उसके पूरे देश को लांछित होना पड़ा (पुस्तकालय में प्रवेश पर रोक)।

इसलिए जैसे व्यक्ति अपने सम्मान का ध्यान रखता है, वैसे ही देश के सम्मान का ध्यान रखना उसका कर्तव्य है — दोनों एक ही हैं।

@edugrown

जापानी युवक स्वामी रामतीर्थ को ताजे फल भेंट करते हुए — भावना और देश-गौरव की कथा

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मेरे अनुभव मेरे विचार

अनुभव एवं विचार आधारित उत्तर
1 “देश की हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है” — आस-पास के उदाहरणों से भाव स्पष्ट कीजिए।
📝 उत्तर

नागरिक और देश एक-दूसरे से जुड़े हैं, इसलिए नागरिक के कार्य देश की छवि को प्रभावित करते हैं —

  • गौरव बढ़ाने वाले: कोई खिलाड़ी ओलंपिक में पदक जीतकर, कोई वैज्ञानिक नई खोज करके, या कोई सैनिक सीमा पर वीरता दिखाकर देश का सिर ऊँचा करता है।
  • हीनता लाने वाले: विदेश में किसी नागरिक का धोखाधड़ी या अनुशासनहीनता करना, सार्वजनिक स्थलों को गंदा करना, या नियम तोड़ना पूरे देश की छवि को धूमिल करता है।

इस प्रकार हर नागरिक अपने आचरण से देश के मान-सम्मान को बढ़ा या घटा सकता है।

2 “मुझे बहुतों की जरूरत पड़ती थी, मैं भी बहुतों की जरूरत का जवाब था।” (क) दिनचर्या में सहयोग (ख) ‘बहुतों’ में कौन (ग) रचनाकार को किस सहयोग की जरूरत?
📝 उत्तर

(क) दिनचर्या में सहयोग: सुबह से रात तक हम अनेक लोगों पर निर्भर रहते हैं — दूधवाला, सब्जीवाला, किसान, शिक्षक, बस-चालक, सफाईकर्मी आदि से सहयोग लेते हैं; और स्वयं भी अपने परिवार, मित्रों एवं समाज की मदद करते हैं (पढ़ाई में सहायता, घर के काम, आदि)।

(ख) ‘बहुतों’ में सम्मिलित: माता-पिता, शिक्षक, मित्र, पड़ोसी, किसान, मजदूर, दुकानदार, डॉक्टर, सफाईकर्मी, बस-चालक — समाज के सभी वर्ग।

(ग) रचनाकार को आवश्यक सहयोग: उसे समाज से ज्ञान, सेवा, सम्मान एवं सुरक्षा की आवश्यकता पड़ती होगी; और बदले में वह अपने कार्यों, विचारों एवं लेखन से समाज की सेवा करता होगा। इस प्रकार जीवन परस्पर सहयोग पर टिका है।

3 “जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।” (क) हमारे दायित्व (ख) पशु-पक्षियों के संघर्ष (ग) जीवन को युद्ध क्यों (घ) सीमा रक्षकों की तरह हमारे आस-पास कौन?
📝 उत्तर

(क) देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति दायित्व: जैसे युद्ध में लड़ने वालों के साथ रसद पहुँचाने वाले, खेती करने वाले और ‘जय बोलने वाले’ भी महत्वपूर्ण होते हैं, वैसे ही देश के लिए हर नागरिक अपने कर्तव्य निभाकर योगदान दे सकता है — ईमानदारी से काम करना, स्वच्छता रखना, टैक्स देना, नियमों का पालन, सही मतदान, और दूसरों को प्रोत्साहित करना।

(ख) पशु-पक्षियों के संघर्ष: चींटियाँ भोजन जुटाने, चिड़ियाँ घोंसला बनाने और बैल खेतों में काम करते हुए निरंतर संघर्ष करते हैं। (‘दो बैलों की कथा’ के हीरा-मोती भी अन्याय के विरुद्ध संघर्ष करते हैं।) इनका जीवन भी संघर्ष एवं परिश्रम से भरा है।

(ग) जीवन को युद्ध क्यों कहा: क्योंकि जीवन में हर पल चुनौतियों, कठिनाइयों एवं समस्याओं से जूझना पड़ता है। इन्हें धैर्य, परिश्रम और सहयोग से ही पार किया जा सकता है — इसलिए जीवन एक युद्ध है।

(घ) हमारे आस-पास के ‘रक्षक’: शिक्षक, किसान, डॉक्टर, सफाईकर्मी, पुलिस, अग्निशमन कर्मी, डाकिया आदि। इनके प्रति हम सम्मान दिखा सकते हैं, उनके काम में सहयोग कर सकते हैं और उन्हें परेशानी न पहुँचाएँ।

4 “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा…” (क) पास-पड़ोस के संबंध (ख) वर्तमान में परिवर्तन एवं कारण।
📝 उत्तर

(क) पहले के संबंध: पास-पड़ोस के लोगों में आत्मीयता, अपनापन एवं सहयोग का गहरा भाव था। बच्चे साथ खेलते, पड़ोसी एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते और बच्चों को सबका स्नेह-दुलार मिलता था।

(ख) वर्तमान में परिवर्तन एवं कारण: आज पड़ोसी अक्सर एक-दूसरे को जानते तक नहीं। इसके कारण हैं — व्यस्त जीवनशैली, मोबाइल एवं टी.वी. में अधिक समय, फ्लैट-संस्कृति, बढ़ती निजता की चाह, तथा शहरीकरण एवं पलायन। इससे पारस्परिक अपनापन कम होता जा रहा है।

5 “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” — स्वच्छता एवं सौंदर्य बनाए रखने के लिए आप क्या-क्या करते हैं?
📝 उत्तर
  • कूड़ा हमेशा कूड़ेदान में ही डालते हैं; इधर-उधर नहीं फेंकते।
  • घर, विद्यालय, गली एवं सार्वजनिक स्थानों को साफ रखते हैं।
  • ऐतिहासिक एवं सार्वजनिक स्थलों पर नाम नहीं लिखते, न दीवारें गंदी करते हैं।
  • दीवारों पर थूकते नहीं, पौधे लगाते एवं उनकी देखभाल करते हैं।
  • दूसरों को भी स्वच्छता के प्रति जागरूक करते हैं।

इस प्रकार हम देश के ‘सौंदर्य-बोध’ की रक्षा कर सकते हैं।

6 देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या न करें?
📝 उत्तर
क्या करें ✔क्या न करें ✘
देश के कानून एवं नियमों का पालन करेंसार्वजनिक स्थलों को गंदा न करें
स्वच्छता एवं अनुशासन बनाए रखेंविदेश में देश की निंदा न करें
सही व्यक्ति को मतदान देंअफवाहें या नकारात्मक चर्चा न फैलाएँ
राष्ट्रीय प्रतीकों एवं धरोहरों का सम्मान करेंदूसरे देशों के सामने अपने देश को हीन सिद्ध न करें
ईमानदारी एवं अच्छे आचरण से देश का गौरव बढ़ाएँकुरुचिपूर्ण व्यवहार से सौंदर्य-बोध को ठेस न पहुँचाएँ

इन बिंदुओं पर समूह में चर्चा करके प्रातःकालीन सभा में पढ़कर सुनाएँ।

मेरे प्रश्न

प्रश्न-निर्माण
दिए गए अंश को पढ़कर तीन प्रश्न बनाइए — (नागरिक एवं देश की प्रगति पर)
📝 उत्तर (नमूना तीन प्रश्न)
  • क्या देश की प्रगति में केवल संपन्न व्यक्ति ही योगदान दे सकते हैं?
  • नागरिक के गलत कार्य का देश की छवि पर क्या प्रभाव पड़ता है?
  • देश की सुरक्षा एवं संपन्नता में सभी नागरिक किस प्रकार योगदान देते हैं?
उदाहरण-प्रश्नों का मिलान: (क) “रचनाकार को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है?” — यह दिए गए अंश से सीधे संबंधित है। (ख) “आपको किस तरह के प्रश्नों को बूझना रोचक लगता है?” — यह आपके व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा प्रश्न है।
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विधा से संवाद

निबंध की विशेषताएँ
1 निबंध की विशेषताओं के संदर्भ इस निबंध से खोजकर लिखिए।
📝 उत्तर
विशेषतानिबंध से संदर्भ
विषय-केंद्रीयतापूरा निबंध ‘व्यक्ति और देश के अटूट संबंध’ इस एक विषय पर केंद्रित है
वैयक्तिकतालेखक ‘मैं’ शैली में अपने निजी अनुभव एवं भाव व्यक्त करता है
विचार-प्रधानता एवं भावनात्मकतानागरिक के कर्तव्य-अधिकार के विचार के साथ देशप्रेम की भावना
सजीवता/चित्रात्मकतालालाजी, जापानी युवक, कमालपाशा आदि के सजीव प्रसंग
तार्किकता‘अकेला चना भी भाड़ फोड़ सकता है’ जैसे तर्कों से बात सिद्ध करना
प्रेरणात्मकताहर नागरिक देश के लिए कुछ कर सकता है — यह प्रेरणा
संक्षिप्तता एवं स्पष्टताछोटी-छोटी कहानियों से बड़ी बात स्पष्ट करना
साहित्यिक सौंदर्यमुहावरे, उपमा, प्रतीक (दीवार में दरार, भूकंप) का प्रयोग
2 इस निबंध की प्रश्नोत्तर शैली के अतिरिक्त अन्य विशेषताएँ छाँटकर लिखिए।
📝 उत्तर
  • संवादात्मक/प्रश्नोत्तर शैली: पूरा निबंध एक काल्पनिक श्रोता से प्रश्न-उत्तर के रूप में चलता है, जो इसे जीवंत बनाता है।
  • दृष्टांत (कहानियों) का प्रयोग: स्वामी रामतीर्थ, जापानी युवक, कमालपाशा एवं किसान की खाट की घटनाएँ।
  • मुहावरों एवं कहावतों का प्रयोग: ‘अकेला चना क्या भाड़ फोड़े’, ‘भामाशाह की तरह’ आदि।
  • प्रतीकों का प्रयोग: ‘दीवार में दरार’, ‘मानसिक भूकंप’, ‘शल्य की बात’।
  • सहज, प्रवाहपूर्ण एवं आत्मीय भाषा।
3 दिए गए विषयों में से किन पर निबंध लिखना चाहेंगे? कारण सहित।
📝 उत्तर (नमूना)

मैं ‘मेरा भारत मेरा गौरव’ विषय पर निबंध लिखना चाहूँगा, क्योंकि यह ‘मैं और मेरा देश’ निबंध के देशप्रेम के भाव से जुड़ा है और इसमें मैं अपने देश की संस्कृति, उपलब्धियों एवं अपने कर्तव्यों पर अपने विचार रख सकता हूँ।

दूसरा रुचिकर विषय ‘गागर में सागर’ है, क्योंकि यह एक रोचक लोकोक्ति है जिसमें कम शब्दों में गहरी बात कहने के महत्व को समझाया जा सकता है। (आप अपनी रुचि के अनुसार कोई भी विषय कारण सहित चुन सकते हैं।)

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चुनाव एवं आपके अनुभव

मतदान, उम्मीदवार एवं अनुभव
1 जब आपके क्षेत्र में चुनाव प्रक्रिया शुरू होती है तो किस तरह की गतिविधियाँ होती हैं?
📝 उत्तर
  • उम्मीदवार घर-घर जाकर प्रचार करते एवं वोट माँगते हैं।
  • रैलियाँ, सभाएँ, पोस्टर, बैनर एवं नारे लगते हैं।
  • मतदाता-सूची बनती है तथा मतदान केंद्र स्थापित किए जाते हैं।
  • ‘मतदान अवश्य करें’ के जागरूकता अभियान चलते हैं।
  • नियत दिन लोग मतदान केंद्रों पर जाकर अपना मत देते हैं।
2 एक अच्छे उम्मीदवार में क्या-क्या गुण होने चाहिए?
📝 उत्तर
  • ईमानदार, सत्यनिष्ठ एवं चरित्रवान।
  • जनता की समस्याओं को समझने एवं हल करने वाला, सेवा-भावी।
  • शिक्षित, योग्य एवं सूझबूझ वाला।
  • निष्पक्ष, सबको समान मानने वाला (जाति/धर्म से ऊपर)।
  • साहसी, कर्तव्यनिष्ठ एवं अपने वादों को निभाने वाला।
3 चुनाव से जुड़ा अपना कोई अनुभव लिखिए (जैसे कक्षा प्रतिनिधि का चुनाव)।
📝 उत्तर (नमूना)

हमारी कक्षा में कक्षा-प्रतिनिधि (मॉनिटर) का चुनाव हुआ था। दो विद्यार्थियों ने अपना नाम दिया और दोनों ने कक्षा के सामने अपनी योजनाएँ बताईं। सभी विद्यार्थियों ने पर्ची पर अपना मत लिखकर डाला। मतगणना के बाद जो विद्यार्थी ईमानदार एवं सबकी मदद करने वाला था, वह अधिक मतों से जीता। इससे मैंने सीखा कि सही व्यक्ति को सोच-समझकर मत देना कितना महत्वपूर्ण है।

4 यदि आप किसी सभा/क्लब के चुनाव में उम्मीदवार हों तो आपके क्या-क्या मुद्दे होंगे?
📝 उत्तर (नमूना मुद्दे)
  • स्वच्छता एवं हरियाली बढ़ाना।
  • पुस्तकालय एवं खेल-सुविधाओं का विस्तार।
  • सभी सदस्यों की समस्याओं को निष्पक्षता से सुनना एवं हल करना।
  • विभिन्न गतिविधियों (वाद-विवाद, खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम) का आयोजन।
  • कमजोर एवं विशेष आवश्यकता वाले सदस्यों की सहायता।
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सृजन

पत्र, विज्ञापन एवं रचनात्मक कार्य
1 हमारा पुस्तकालय — पुस्तकें खराब होने के कारण, उपाय एवं नियम।
📝 उत्तर

कारण: पुस्तकों को असावधानी से उपयोग करना, पन्ने मोड़ना/फाड़ना, पेन से निशान लगाना, गंदे हाथों से छूना तथा लापरवाही से रखना।

उपाय: पुस्तकों को सावधानी से पढ़ें, उन पर कुछ न लिखें, समय पर लौटाएँ, साफ हाथों से छुएँ एवं उन्हें संभालकर रखें। दूसरों को भी जागरूक करें।

पुस्तकालय के नियम (एवं उनका पालन क्यों): शांति बनाए रखना, पुस्तकें समय पर लौटाना, उन्हें साफ-सुथरा रखना — इन नियमों का पालन इसलिए आवश्यक है ताकि पुस्तकें सुरक्षित रहें और सभी पाठक उनका लाभ उठा सकें। यह देश के ‘सौंदर्य-बोध’ एवं सार्वजनिक संपत्ति के सम्मान से भी जुड़ा है।

2 ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने हेतु प्रधानाध्यापक को पत्र।
✉️ नमूना पत्र

सेवा में,
प्रधानाध्यापक महोदय,
(विद्यालय का नाम एवं पता)

विषय: दृष्टिबाधित सहपाठियों के लिए ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने हेतु प्रार्थना-पत्र।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि हमारे विद्यालय के पुस्तकालय में अनेक रोचक एवं ज्ञानवर्धक पुस्तकें हैं, परंतु हमारे दृष्टिबाधित सहपाठी इन्हें स्वयं पढ़कर आनंद नहीं उठा पाते। यदि विद्यालय में ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवा दी जाएँ, तो वे भी स्वतंत्र रूप से पढ़कर ज्ञान प्राप्त कर सकेंगे और आत्मनिर्भर बनेंगे।

अतः आपसे विनम्र अनुरोध है कि शीघ्र ही ब्रेल लिपि में पुस्तकें मँगवाने की कृपा करें। हम सब आपके आभारी रहेंगे।

धन्यवाद।
आपका आज्ञाकारी छात्र,
(नाम एवं कक्षा)

3 कृतज्ञता ज्ञापन — विभिन्न योगदानकर्ताओं (सैनिक, शिक्षक, किसान आदि) के लिए।
📝 नमूना कृतज्ञता ज्ञापन

हम अपने देश के उन सभी सेवकों के प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं, जिनके अमूल्य योगदान से हमारा जीवन सुरक्षित एवं समृद्ध बनता है —

सीमा पर डटे सैनिकों के, जो अपने प्राणों की आहुति देकर देश की रक्षा करते हैं; अन्न उपजाने वाले किसानों के; ज्ञान का दीप जलाने वाले शिक्षकों के; देश का निर्माण करने वाले श्रमिकों, वैज्ञानिकों एवं अभियंताओं के; तथा समाज को सुंदर बनाने वाले कलाकारों के। इन सबके निःस्वार्थ परिश्रम एवं समर्पण को हम सादर नमन करते हैं और इनके योगदान के लिए हृदय से आभार प्रकट करते हैं।

4 ‘ठीक मनुष्य को अपना मत दें’ — योग्य उम्मीदवार चुनने हेतु आकर्षक विज्ञापन बनाइए।
📰 नमूना विज्ञापन

🗳️ मेरा वोट — मेरा अधिकार, मेरा कर्तव्य! 🗳️

मतदान करते समय सोचें — ‘ठीक मनुष्य को अपना मत दें’

✦ जाति-धर्म नहीं, योग्यता एवं ईमानदारी देखें।
✦ लालच एवं झूठे नारों में न आएँ।
✦ सोच-समझकर सही उम्मीदवार चुनें।

सही मत = मजबूत देश। अवश्य मतदान करें!

5 स्वच्छता और आचरण — देश के सौंदर्य को आघात पहुँचाने वाले और कौन-से आचरण?
📝 उत्तर
  • ऐतिहासिक/सार्वजनिक स्थलों पर अपना नाम या संदेश लिखना।
  • दीवारों, सीढ़ियों एवं कोनों में थूकना या पान-तंबाकू की पीक डालना।
  • सड़कों, पार्कों एवं नदियों में कूड़ा फेंकना।
  • दीवारों पर पोस्टर चिपकाना एवं स्मारकों को नुकसान पहुँचाना।
  • शोर मचाना एवं सार्वजनिक संपत्ति को क्षति पहुँचाना।

इन आचरणों से देश के ‘सौंदर्य-बोध’ एवं संस्कृति को आघात लगता है। इस विषय पर अभिभावकों एवं शिक्षकों के साथ चर्चा कीजिए।

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व्याकरण की बात

संदर्भ में शब्द, शब्द-युग्म, उपसर्ग-प्रत्यय
संदर्भ में शब्द — ऐसे अन्य शब्द छाँटिए जो संदर्भ के अनुसार भिन्न-भिन्न अर्थ देते हों।
📝 उत्तर (उदाहरण)
शब्दभिन्न-भिन्न अर्थ (संदर्भ अनुसार)
सिरशरीर का अंग / ‘सिर ऊँचा करना’ (सम्मान) / ‘सिर पर चढ़ना’ (शह देना)
हाथशरीर का अंग / ‘हाथ बँटाना’ (मदद) / ‘हाथ से निकलना’ (खोना)
आँखदेखने का अंग / ‘आँख दिखाना’ (डराना) / ‘आँख का तारा’ (प्रिय)
सोनाएक धातु (gold) / ‘सोना’ (नींद लेना)
मुँहशरीर का अंग / ‘मुँह की खाना’ (हार) / ‘मुँह फेरना’ (उपेक्षा)
मिलते-जुलते भाव वाले एवं पुनरुक्त शब्द-युग्म निबंध से छाँटकर लिखिए।
📝 उत्तर
प्रकारनिबंध से शब्द-युग्म
मिलते-जुलते अर्थ वाले (समानार्थक/सजातीय)ममता-दुलार, भरा-पूरा, घूम-फिर, खेल-तमाशे, ब्याह-शादियाँ, तीज-त्योहार, दाल-रोटी, मोती-हीरे
पुनरुक्त (एक ही शब्द दोहराना)छोटी-छोटी, बड़ी-बड़ी, पूरा-पूरा, धीरे-धीरे, खील-खील, चलते-चलते
शब्दों की कड़ियाँ/श्रृंखला — उपसर्ग, मूल शब्द एवं प्रत्यय पहचानिए।
📝 उत्तर
शब्दउपसर्गमूल शब्दप्रत्यय
अपूर्णता (उदाहरण)पूर्णता
अलौकिकलोकइक
निरक्षरतानिर्अक्षरता
सम्मानितसम्मानइत
अनावश्यकअन्आवश्यक
अपमानितअपमानइत
अभिमानीअभिमान
🪔

भाषा संगम · झरोखे से · खोजबीन

भाषाएँ, लाला लाजपत राय एवं स्वामी रामतीर्थ
गतिविधि — ‘देश मात्र एक भौगोलिक सीमा क्षेत्र नहीं है।’
📝 उत्तर (परिचर्चा-बिंदु)

देश केवल भूमि का टुकड़ा या सीमा-रेखा नहीं है, बल्कि वह वहाँ के लोगों, संस्कृति, भाषा, परंपराओं, मूल्यों एवं भावनाओं का समूह है। देश से जुड़ाव का अर्थ है उसके नागरिकों, संस्कृति एवं गौरव से प्रेम। इन बिंदुओं पर परिचर्चा करके रिपोर्ट तैयार कीजिए और पावर-पॉइंट या चार्ट के माध्यम से कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।

भाषा संगम — विभिन्न भारतीय भाषाओं में ‘देश’।
📝 उत्तर

संविधान की आठवीं अनुसूची की कुछ भाषाओं में ‘देश’ — हिंदी: देश; संस्कृत: देशः/क्षेत्रम्; पंजाबी: देस/देश; उर्दू: ख़ित्ता/इलाक़ा; कश्मीरी: दीश/मुलॅख; सिंधी: देशु/देसु; मराठी: देश; गुजराती: देश/प्रदेश; कोंकणी: देश; नेपाली: देश/मुलुक/राष्ट्र; बांग्ला: प्रदेश/अञ्चल/राज्य; असमिया: देश/राज्य/प्रदेश; मणिपुरी: लैबाक/मफम/लम; ओड़िआ: देश/राज्य/अंचल; तेलुगु: प्रदेशम्; तमिल: इडम्/पिरदेशम्; मलयालम: देशम्; कन्नड़: देश।

संकेत: वाक्य “मैं अपने देश का नागरिक हूँ” को अपनी मातृभाषा में भी लिखकर अभ्यास कीजिए। (स्रोत — shabd.education.gov.in/lexicon.jsp)
झरोखे से — लाला लाजपत राय के विचार एवं खोजबीन (स्वामी रामतीर्थ)।
📝 उत्तर

लाला लाजपत राय के विचार:

  • आत्मनिर्भरता: प्रगति का अर्थ है स्वतंत्रता की ओर बढ़ना। जैसे ही पर-निर्भरता बढ़ती है, स्वतंत्रता दूर हो जाती है। इसलिए आत्मनिर्भरता एवं आत्मविश्वास की आदत डालनी चाहिए — किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि पुरुषार्थ की भावना से।
  • अधिकारों की रक्षा: हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है कि वह तन-मन-धन से अपने जन्मसिद्ध अधिकारों की रक्षा करे। जितनी जल्दी हम इस जिम्मेदारी को समझेंगे, उतनी ही जल्दी स्वराज्य प्राप्त कर सकेंगे।

खोजबीन (स्वामी रामतीर्थ): स्वामी रामतीर्थ एक महान संत, विद्वान एवं देशभक्त थे, जिन्होंने वेदांत-दर्शन का प्रचार किया तथा अमेरिका एवं जापान की यात्राएँ कीं। उनके जीवन एवं विचारों के बारे में पुस्तकालय/इंटरनेट से और जानकारी एकत्र करके सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।

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साथ-साथ पढ़ें: निर्मल जीत सिंह सेखों

परम वीर चक्र विजेता — पूरक पाठ
@edugrown
पाठ-सार एवं प्रेरणा
📝 संक्षिप्त परिचय

फ्लाइंग ऑफिसर निर्मल जीत सिंह सेखों का जन्म 17 जुलाई 1945 को पंजाब के लुधियाना के पास हुआ था। बचपन से ही वायुयानों के प्रति आकर्षित सेखों ने भारतीय वायुसेना में शामिल होकर लड़ाकू विमान ‘नैट’ उड़ाने में निपुणता प्राप्त की।

सन् 1971 के भारत-पाक युद्ध में 14 दिसंबर को, श्रीनगर हवाई क्षेत्र पर पाकिस्तानी सेबर जेट विमानों ने हमला किया। अपनी जान की परवाह किए बिना सेखों अकेले ही नैट विमान लेकर उड़ पड़े और छह दुश्मन विमानों से वीरतापूर्वक भिड़ गए। उन्होंने कई दुश्मन विमानों को क्षति पहुँचाई, परंतु अंत में अधिक संख्या के सामने उनका विमान ध्वस्त हो गया और मात्र 26 वर्ष की आयु में वे वीरगति को प्राप्त हुए।

उनकी इस असाधारण वीरता के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान ‘परम वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया। भारतीय वायुसेना के वे एकमात्र परमवीर चक्र विजेता हैं। उनके सम्मान में डाक टिकट एवं विशेष डाक आवरण जारी किए गए तथा पालम (नई दिल्ली) के एयरफोर्स म्यूजियम में नैट विमान के साथ उनकी प्रतिमा स्थापित है।

प्रेरणा: यह पाठ हमें सिखाता है कि सच्चा नागरिक वही है जो ‘मैं और मेरा देश’ को एक मानकर, देश के सम्मान एवं रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटता। सेखों का जीवन विषम परिस्थितियों में भी कर्तव्य-निष्ठा एवं वीरता का अमर उदाहरण है।

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© मैं और मेरा देश — कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ · प्रश्न-उत्तर समाधान · @edugrown

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