हिन्दी Notes Class 11 Chapter 20 Hindi आओ, मिलकर बचाएँ कविता का सारांश इस कविता में दोनों पक्षों का यथार्थ चित्रण हुआ है। बृहतर संदर्भ में यह कविता समाज में उन चीजों को बचाने की बात करती है जिनका होना
Read Moreहिन्दी Notes Class 11 Chapter 19 Hindi सबसे खतरनाक व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न 1. मेहनत की लूट सबसे खतरनाक नहीं होतीपुलिस की मार सबसे खतरनाक नहीं होतीगद्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे खतरनाक नहीं होतीबैठे-बिठाए पकड़ जाना-बुरा तो हैंसहमी-सी चुप में
Read Moreहिन्दी Notes Class 11 Hindi Chapter 18 हे भूख! मत मचल व्याख्या एवं अर्थग्रहण संबंधी प्रश्न 1. हो भूख ! मत मचलप्यास, तड़प मत हेहे नींद! मत सताक्रोध, मचा मत उथल-पुथलहे मोह! पाश अपने ढील लोभ, मत ललचामद ! मत
Read Moreहिन्दी Notes Class 11 Hindi Chapter 17 गजल कविता का सारांश ‘साये में धूप‘ गजल संग्रह से यह गजल ली गई है। गजल का कोई शीर्षक नहीं दिया जाता, अत: यहाँ भी उसे शीर्षक न देकर केवल गजल कह दिया
Read Moreपाठ का सारांश ‘चपा काल-काल अच्छर नहीं चीन्हती’ कविता धरती संग्रह में संकलित है। यह पलायन के लोक अनुभवों को मार्मिकता से अभिव्यक्त करती है। इसमें ‘अक्षरों’ के लिए ‘काले-काले’ विशेषण का प्रयोग किया गया है जो एक ओर शिक्षा-व्यवस्था
Read Moreहिन्दी Notes Class 11 Chapter 15 Hindi घर की याद कविता का सारांश इस कविता में घर के मर्म का उद्घघाटन है। कवि को जेल-प्रवास के दौरान घर से विस्थापन की पीड़ा सालती है। कवि के स्मृति-संसार में उसके परिजन
Read Moreहिंदी Notes Class 11 Hindi Chapter 14 वे आँखें कविता का सारांश यह कविता पंत जी के प्रगतिशील दौर की कविता है। इसमें विकास की विरोधाभासी अवधारणाओं पर करारा प्रहार किया गया है। युग-युग से शोषण के शिकार किसान का
Read Moreहिन्दी Notes Class 11 Hindi Chapter 13 पथिक पाठ का साराशा ‘पथिक’ कविता में दुनिया के दुखों से विरक्त काव्य नायक पथिक की प्रकृति के सौंदर्य पर मुग्ध होकर वहीं बसने की इच्छा का वर्णन किया है। यहाँ वह किसी
Read Moreहिन्दी Notes Class 11 Hindi Chapter 12 मीरा के पद पाठ का सारांश पहले पद में मीरा ने कृष्ण के प्रति अपनी अनन्यता व्यक्त की है तथा व्यर्थ के कार्यों में व्यस्त लोगों के प्रति दुख प्रकट किया है। वे
Read Moreहिन्दी Notes Class 11 Chapter 11 Hindi कबीर के पद पाठ का सारांश पहले पद में कबीर ने परमात्मा को सृष्टि के कण-कण में देखा है, ज्योति रूप में स्वीकारा है तथा उसकी व्याप्ति चराचर संसार में दिखाई है। इसी
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