मीरा के पद
कवयित्री परिचय — मीरा हिंदी की महान कवयित्री, कृष्ण-भक्त और संत थीं। इनकी रचनाएँ आज से लगभग 500 वर्ष पहले रची गईं। बचपन से ही कृष्ण-भक्ति में मगन मीरा ने राजकुमारी होते हुए भी महल त्यागकर संतों का जीवन और तीर्थ-यात्राएँ चुनीं। मंदिरों में भजन-सत्संग करने वाली मीरा के भजन आज भी श्रद्धा और प्रेम से गाए-सुने जाते हैं।
पाठ से
🌸 मेरी समझ से
(क) सटीक उत्तर के सामने ✔ लगाया गया है। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1“बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद में मीरा किनसे विनती कर रही हैं?
- संतों से
- भक्तों से
- वैजंती से
- श्रीकृष्ण से
मीरा “नंदलाल” (नंद के पुत्र श्रीकृष्ण) को अपने नैनों में बसाने की प्रार्थना कर रही हैं — अतः विनती श्रीकृष्ण से है।
2“बसो मेरे नैनन में नंदलाल” पद का मुख्य विषय क्या है?
- प्रेम और भक्ति
- प्रकृति की सुंदरता
- युद्ध और शांति
- ज्ञान और शिक्षा
पूरा पद श्रीकृष्ण के प्रति मीरा के गहन प्रेम और भक्ति-भाव को व्यक्त करता है।
3“बरसे बदरिया सावन की” पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है?
- सर्दी
- गरमी
- वर्षा
- वसंत
“सावन”, “बदरिया”, “झड़ी”, “बूँदन”, “शीतल पवन” — ये सभी वर्षा ऋतु के सूचक हैं।
4“बरसे बदरिया सावन की” पद पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा—
- प्रसन्न हैं।
- दुखी हैं।
- उदास हैं।
- चिंतित हैं।
बादलों की गड़गड़ाहट में मीरा को कृष्ण के आने की “भनक” सुनाई देती है, जिससे उनका मन उमंग व आनंद से भर उठता है।
यह स्वाभाविक है कि समूह के अलग-अलग साथी अलग उत्तर चुनें। अपने मित्रों से चर्चा करके यह समझें कि आपने वह उत्तर क्यों चुना — इससे तर्क करने और दूसरों के दृष्टिकोण को समझने की समझ बढ़ती है।
🧩 मिलकर करें मिलान
पाठ के शब्दों को उनके सही अर्थ/संदर्भ से मिलाइए।
| शब्द | सही अर्थ / संदर्भ |
|---|---|
| 1. नंदलाल | → नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण |
| 2. वैजंती माल | → वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला |
| 3. सावन | → श्रावण का महीना (आषाढ़ के बाद और भाद्रपद से पहले का महीना) |
| 4. गिरधर | → पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण |
💬 पंक्तियों पर चर्चा
(क) “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥”
वर्षा की नन्हीं-नन्हीं फुहारें बरस रही हैं और साथ में ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है। यह दृश्य मन को शीतलता और आनंद से भर देता है — मानो सारा वातावरण मंगलमय हो उठा हो।
(ख) “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल॥”
मीरा कहती हैं कि उनके प्रभु श्रीकृष्ण संतों को सुख देने वाले और अपने भक्तों से अपार स्नेह करने वाले (भक्तवत्सल) गोपाल हैं। इसमें कृष्ण की करुणा और भक्तों के प्रति वात्सल्य झलकता है।
🤔 सोच-विचार के लिए
(क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
- मोहिनी मूरत और साँवली सूरत वाले हैं।
- बड़े-बड़े (विशाल) सुंदर नैन हैं।
- अधरों पर सुधा-रस बरसाती मुरली सजती है।
- छाती पर वैजयंती माला शोभित है।
- कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ व पैरों में मीठे स्वर वाले नूपुर हैं।
- वे संतों को सुख देने वाले और भक्तवत्सल गोपाल हैं।
(ख) दूसरे पद में सावन के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
- सावन की मनभावन बदली बरस रही है।
- चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर आते हैं।
- बिजली चमकती है और वर्षा की झड़ी लग जाती है।
- नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरसती हैं और शीतल पवन सुहावना लगता है।
- यह सब मीरा को कृष्ण के आगमन का मंगल-संदेश जान पड़ता है।
✍️ कविता की रचना (पाठ की विशेषताएँ)
“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई” तथा “मीरा के प्रभु गिरधरनागर” — इन पंक्तियों में मीरा ने अपना नाम जोड़ा है। उस युग के कवि प्रायः रचना के अंत में अपना नाम (भणिता) देते थे।
- प्रत्येक पद के अंत में मीरा ने अपना नाम सम्मिलित किया है।
- पंक्तियाँ छोटी-छोटी और गेय (गाने योग्य) हैं।
- श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग — नंदलाल, गोपाल, गिरधरनागर, हरि।
- ब्रज-राजस्थानी मिश्रित सरल भाषा।
- अनुप्रास और लय के कारण संगीतात्मकता।
- प्रेम, भक्ति और समर्पण का भाव।
🌈 अनुमान और कल्पना से
(क) मान लीजिए बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया — उन्होंने क्या और कैसे कहा होगा?
बादल गरजते हुए मीठे स्वर में कह उठे होंगे — “हे मीरा! अब आँसू पोंछ लो। जिस गिरधर की तुम बरसों से बाट जोह रही हो, वे शीघ्र ही आ रहे हैं। हमारी गड़गड़ाहट उनके आगमन की पदचाप है और यह रिमझिम उनके स्वागत की धुन।” यह संदेश उन्होंने कोमल, स्नेह-भरे और उल्लासपूर्ण ढंग से सुनाया होगा।
(ख) यदि मीरा से बातचीत का अवसर मिले तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और पूछेंगे?
- आपके मन में कृष्ण के प्रति इतना गहरा प्रेम कैसे जागा?
- राजमहल का सुख छोड़कर भक्ति का कठिन मार्ग क्यों चुना?
- विरोध और कठिनाइयों के बीच आपने अपना विश्वास कैसे बनाए रखा?
- आपके भजन आज भी लोगों के हृदय को छू जाते हैं — इसका रहस्य क्या है?
और मैं उनसे कहूँगा/कहूँगी कि आपकी भक्ति और साहस सदियों से लोगों को प्रेरणा देते आ रहे हैं।
🔤 शब्दों के रूप
(क) “मोहनि मूरति साँवरि सूरति…” — यहाँ ‘साँवरि’ के स्थान पर आज प्रायः ‘साँवली’ लिखा-बोला जाता है। नीचे ऐसे ही शब्दों के प्रचलित (आज के) रूप दिए गए हैं:
🕸️ शब्द से जुड़े शब्द
पाठ में से चुनकर श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द (‘मुरली’ नमूने के रूप में दिया गया है):
🔗 पंक्ति से पंक्ति
स्तंभ 1 की पंक्ति को स्तंभ 2 के मिलते-जुलते अर्थ से मिलाइए।
| स्तंभ 1 (पाठ की पंक्ति) | स्तंभ 2 (अर्थ) |
|---|---|
| 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल | होंठों पर सुरीली धुनों से भरी बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है। (2) |
| 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल | कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हैं और पैरों के नूपुर मीठी आवाज़ में बोल रहे हैं। (5) |
| 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल | हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले हो। (4) |
| 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की | सावन में मेरे मन में उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने कृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। (3) |
| 5. उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की | चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। (1) |
✨ कविता का सौंदर्य
“बरसे बदरिया सावन की।” — यहाँ ‘बरसे’ और ‘बदरिया’ दोनों ‘ब’ वर्ण से आरंभ होते हैं, अर्थात् एक ही वर्ण की आवृत्ति हो रही है। इसे अनुप्रास अलंकार कहते हैं, जिससे पंक्ति और भी मधुर बन जाती है।
- मोहनि मूरति — ‘म’ की आवृत्ति
- साँवरि सूरति — ‘स’ की आवृत्ति
- नन्हीं नन्हीं बूँदन — ‘न’ की आवृत्ति
- दामिन दमकै — ‘द’ की आवृत्ति
- उमड़ घुमड़ — ध्वनि-सौंदर्य व लयात्मकता
रूप बदलकर — पद को अनुच्छेद के रूप में:
सावन की बदली चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आ रही है। बिजली चमक रही है और झमाझम वर्षा हो रही है। नन्हीं-नन्हीं बूँदें बरस रही हैं और शीतल हवा मन को सुहावनी लग रही है। इस मनभावन दृश्य में मीरा को अपने प्रिय गिरधर के आने की भनक सुनाई देती है, जिससे उनका मन उमंग और आनंद से भर उठता है।
🗣️ मुहावरे (आँख से जुड़े)
“बसो मेरे नैनन में नंदलाल” — ‘नैनों/आँखों में बस जाना’ का अर्थ है किसी का ध्यान हर समय मन में बना रहना। नीचे आँख से जुड़े मुहावरे उनके अर्थ व वाक्य-प्रयोग सहित दिए गए हैं:
| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| 1. आँखों का तारा | बहुत प्यारा/प्रिय | छोटा भाई पूरे परिवार की आँखों का तारा है। |
| 2. आँखों पर पर्दा पड़ना | विवेक खो देना, सच न दिखना | लालच में उसकी आँखों पर पर्दा पड़ गया। |
| 3. आँखों के आगे अँधेरा छाना | घबरा जाना, कुछ न सूझना | बुरी खबर सुनते ही उसकी आँखों के आगे अँधेरा छा गया। |
| 4. आँख दिखाना | क्रोध से डराना | छोटे बच्चों को आँख दिखाकर डराना ठीक नहीं। |
| 5. आँख का काँटा | बुरा/खटकने वाला लगना | ईमानदार अफसर बेईमानों की आँख का काँटा बन गया। |
| 6. आँखें फेरना | बेरुखी दिखाना, साथ छोड़ना | बुरे वक्त में मित्र ने भी आँखें फेर लीं। |
| 7. आँख भर आना | भावुक होकर आँसू आना | बेटी की विदाई पर पिता की आँख भर आई। |
| 8. आँखें चुराना | सामना करने से बचना | गलती पकड़े जाने पर वह आँखें चुराने लगा। |
| 9. आँखों से उतारना | सम्मान/प्रेम समाप्त कर देना | एक झूठ ने उसे सबकी आँखों से उतार दिया। |
| 10. आँखों में खटकना | बुरा लगना, अखरना | उसकी तरक्की पड़ोसियों की आँखों में खटकती है। |
🎭 सबकी प्रस्तुति
किसी एक पद को समूह के साथ मिलकर अलग-अलग तरीक़े से कक्षा के सामने प्रस्तुत कीजिए — जैसे गायन (भजन के रूप में सुर-ताल में गाना), भाव-नृत्य (हाव-भाव व मुद्राओं के साथ नृत्य) या सस्वर कविता-पाठ (लय व आरोह-अवरोह के साथ पढ़ना)।
पाठ से आगे
💭 आपकी बात
(क) “बरसे बदरिया सावन की”
1सावन आने पर आपके गाँव/नगर के मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं?
आकाश में काले बादल छा जाते हैं, ठंडी हवाएँ चलने लगती हैं, धरती की तपन शांत हो जाती है। चारों ओर हरियाली छा जाती है, नदी-तालाब भर जाते हैं, मोर नाचने लगते हैं और वातावरण शीतल व सुहावना हो जाता है।
2सावन में किस-किस प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई देती हैं? उन्हें सुनकर कैसा अनुभव होता है?
बादलों की गड़गड़ाहट, बिजली की कड़क, बूँदों के टपकने की रिमझिम, मेंढकों की टर्र-टर्र, पत्तों पर पानी की टप-टप और तेज़ हवा की सरसराहट सुनाई देती है। इन्हें सुनकर मन में उमंग, ताज़गी और कभी-कभी हल्की-सी सिहरन भरी रोमांचक अनुभूति होती है।
3वर्षा ऋतु में कौन-सी गतिविधियाँ/खेल आपको अच्छे लगते हैं?
कागज़ की नाव तैराना, बारिश में भीगना व छप-छप करना, झूला झूलना, पकौड़े व गरम चाय का आनंद लेना, इंद्रधनुष देखना — ये सब वर्षा में बहुत भाते हैं।
4सावन में आपके यहाँ कौन-से त्योहार मनाए जाते हैं? किसी एक का अनुभव बताइए।
सावन में हरियाली तीज, रक्षाबंधन, नाग पंचमी आदि मनाए जाते हैं। रक्षाबंधन पर बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं, मिठाइयाँ बँटती हैं और पूरा परिवार आनंद से एकत्र होता है — यह स्नेह और अपनत्व का त्योहार है।
(ख) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” — मीरा कृष्ण को ‘संतों को सुख देने वाला’ और ‘भक्तों का पालन करने वाला’ कहती हैं।
1क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता और आपको आनंदित करता है?
हाँ, मेरी माँ/मेरे शिक्षक ऐसे हैं। वे हर कठिनाई में मेरा साथ देते हैं, मुझे सही राह दिखाते हैं और मेरी छोटी-छोटी सफलताओं पर भी प्रसन्न होते हैं। उनका स्नेह मुझे आत्मविश्वास और आनंद देता है। (आप अपने जीवन के व्यक्ति के अनुसार लिखें।)
2‘नूपुर’ और ‘क्षुद्र घंटिका’ जैसी छोटी बातों से वर्णन — अपने आस-पास के किसी व्यक्ति/वस्तु की छोटी-छोटी बातें लिखिए।
नमूना: मेरी दादी की चाँदी की पायल की हल्की छन-छन, उनके चश्मे की चमक, साड़ी के पल्लू में बँधी चाबी की झंकार और उनकी मुस्कान की झुर्रियाँ — इन छोटी-छोटी बातों से ही उनका पूरा वात्सल्यमय व्यक्तित्व जीवंत हो उठता है।
🌟 विशेषताएँ
“मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।” — इसमें कवयित्री ने श्रीकृष्ण की मोहनी मूरत, साँवली सूरत और विशाल नैनों की बात की है।
(क) श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया?
उनकी मोहिनी मूरत, साँवला रूप, बड़े-बड़े सुंदर नैन, अधरों पर सजी मुरली और मधुर स्वभाव — इन सबने सबसे अधिक आकर्षित किया। (अपनी पसंद अनुसार लिखें।)
(ख) किसी व्यक्ति/वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? क्यों?
मुझे किसी व्यक्ति की सच्चाई और दयालुता सबसे अधिक आकर्षित करती है, क्योंकि ये गुण विश्वास और अपनापन पैदा करते हैं। उदाहरण के लिए, मेरे मित्र की मदद करने की भावना मुझे बहुत प्रिय है।
(ग) अपनी बाह्य और आंतरिक — दोनों प्रकार की विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।
बाह्य विशेषताएँ: लंबा क़द; घुंघराले बाल।
आंतरिक विशेषताएँ: ईमानदारी; धैर्य/सहनशीलता।
(अपनी विशेषताओं के अनुसार लिखें — बाह्य वे जो दिखती हैं, आंतरिक वे जो व्यवहार से प्रकट होती हैं।)
🎶 मधुर ध्वनियाँ
“अधर सुधा रस मुरली राजति… क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥” — इन पंक्तियों में तीन ऐसी वस्तुएँ आई हैं जिनसे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं:
वाद्ययंत्र पहेली — पहचानकर सही चित्र से मिलान:
उत्तर: बाँसुरी
उत्तर: तबला
उत्तर: शहनाई
उत्तर: वीणा
उत्तर: ढोलक
उत्तर: बीन
उत्तर: संतूर
उत्तर: मजीरा
🖼️ चित्र करते हैं बातें
यह मीरा का काँगड़ा शैली में बना सुंदर चित्र है। इसमें मीरा नारंगी वस्त्र पहने, लंबे काले केश खुले छोड़े, तन्मयता से मुरली/तंबूरे में लीन दिखाई देती हैं। नीली पृष्ठभूमि उनकी भक्ति की गहराई और शांति को दर्शाती है। उनके चेहरे का भाव कृष्ण-प्रेम में डूबा, आत्मलीन और परम संतुष्ट प्रतीत होता है — मानो सारा संसार भूलकर वे केवल अपने गिरधर के ध्यान में मग्न हों।
🎵 सावन से जुड़े गीत
सावन में गाए जाने वाले अनेक लोकगीत/झूला-गीत प्रचलित हैं। एक प्रसिद्ध कजरी-भाव का नमूना:
“सावन आयो रे, झूला पड़ि गयो रे,
बदरा घिर आए, मनवा हरषायो रे।”
अपने परिजनों/शिक्षकों की सहायता से अपने क्षेत्र का कोई सावन-गीत, झूला-गीत या कजरी अपनी पुस्तिका में लिखिए और कक्षा-पुस्तिका में जोड़िए।
🔎 खोजबीन (सूरदास)
मीरा की तरह सूरदास भी श्रीकृष्ण के परम भक्त थे। वे अष्टछाप के प्रमुख कवि और कृष्ण की बाल-लीलाओं (वात्सल्य रस) के अद्वितीय गायक माने जाते हैं। उनकी कुछ प्रसिद्ध रचनाएँ ढूँढ़कर कक्षा में सुनाई जा सकती हैं, जैसे — “मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो”, “चरन कमल बंदौ हरि राई”। पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता लीजिए।
🧠 आज की पहेली
पाठ के शब्दों की अंतिम ध्वनि से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द (शब्द-वर्ग में से):
| शब्द | समान ध्वनि वाला शब्द |
|---|---|
| 1. मूरति | सूरति |
| 2. सावन | आवन |
| 3. उमड़ | घुमड़ |
| 4. नागर | नगर |
| 5. नंदलाल | गोपाल |
🌐 खोजबीन के लिए (लिंक)
कवयित्री मीरा के बारे में और जानने के लिए (NCERT/प्रसार भारती):
- मीरा — youtube.com/watch?v=KWKtPM8c-PA
- मीरा के भजन — youtube.com/watch?v=86Z-AA2vBQM
- मीराबाई — youtube.com/watch?v=O2GsmVi37sA
- मीरा के भजन — एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी — youtube.com/watch?v=EhhOcNJXJeI
- मीरा फ़िल्म 1945 (भाग एक) — youtube.com/watch?v=O05QUww2u7Q
- मेरे तो गिरधर गोपाल — youtube.com/watch?v=P8q9-cJK0dg
अतिरिक्त पठन
🦢 स्वामिभक्त सुमुख (कथा-सार)
पुराने समय में महिंसक राज्य के राजा सकुल के शासनकाल में चित्रकूट पर्वत की गुफा में हंसों का बड़ा झुंड रहता था। उनके राजा थे मरालदेव और मंत्री सुमुख। एक दिन हंस भोजन की खोज में एक भव्य कमल-सरोवर की ओर उड़ चले, जहाँ शिकारी का जाल बिछा था। सरोवर पर उतरते ही राजा मरालदेव के पैर जाल में फँस गए।
ख़तरे का संकेत मिलते ही बाक़ी हंस उड़ गए, पर मंत्री सुमुख ने अपने राजा को नहीं छोड़ा। उसने कहा — “मैं अपनी जान देकर भी आपको बंधन से छुड़ाऊँगा; संकट की इस घड़ी में आपके साथ रहना मेरा परम कर्तव्य है।” जब आखेटक (शिकारी) आया, तो सुमुख ने विनम्रता किंतु दृढ़ता से बात करके उसका हृदय बदल दिया — “राजा को छोड़ दो और बदले में मुझे पकड़ लो।”
सुमुख की स्वामिभक्ति से प्रभावित होकर शिकारी ने दोनों को मुक्त कर दिया और राजा के घावों को धोकर साफ़ किया। कृतज्ञ हंस शिकारी को राजा सकुल के पास ले गए, ताकि उसे पुरस्कार मिले। राजा सकुल ने हंसों का सम्मान किया और शिकारी को घर, रथ, सोना तथा एक लाख की आय देकर पुरस्कृत किया। अंत में मरालदेव और सुमुख अपने झुंड में लौट आए।
सच्ची स्वामिभक्ति, निष्ठा, साहस और विनम्रता कठिन-से-कठिन परिस्थिति को भी बदल सकती है। कोमल परंतु दृढ़ वाणी से हृदय-परिवर्तन संभव है।
🇮🇳 विजयी विश्व तिरंगा प्यारा
यह श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ द्वारा रचित प्रसिद्ध झंडा-गीत है। इसमें राष्ट्रध्वज तिरंगे के प्रति प्रेम, देशभक्ति, बलिदान और स्वतंत्रता की भावना व्यक्त हुई है — “झंडा ऊँचा रहे हमारा।” यह गीत वीरों को प्रेरित करता है कि देश-धर्म पर सर्वस्व न्योछावर करके तिरंगे की शान बनाए रखें।
