पाँचों प्रमुख लकारों (वर्तमान, भविष्यत्, भूत, आज्ञा, विध्यर्थ) में धातुरूपाणि — परस्मैपदि व आत्मनेपदि दोनों सहित, अन्त में सन्धि-परिचयः
मूल पाठ्यांशः (भूमिका)
संस्कृतभाषायाम् सामान्यतः २००० धातवः सन्ति। तेभ्यः ‘तिङ्’ प्रत्ययान् योजयामः चेत् ते एव तिङन्ताः (अथवा लकाराः) भवन्ति। धातवः त्रिप्रकारकाः भवन्ति — (१) परस्मैपदि-धातवः, (२) आत्मनेपदि-धातवः, (३) उभयपदि-धातवः।
पुरुष-परिचयः
तालिका पठितुं पूर्वं इदं ज्ञातव्यम् — Person की भूमिका (ध्यान दें: संस्कृत में क्रम अंग्रेज़ी से उल्टा है)
प्रथमपुरुषः3rd Personसः/ते/तत् — वह, वे, यह (जिसके बारे में बात हो रही है)
मध्यमपुरुषः2nd Personत्वम्/यूयम् — तुम, तू, आप (जिससे बात कर रहे हैं)
उत्तमपुरुषः1st Personअहम्/वयम् — मैं, हम (स्वयं बोलने वाला)
प्रत्येक धातुरूप-तालिकायां चत्वारः स्तम्भाः सन्ति — पुरुषः, एकवचनम् (एक कर्ता), द्विवचनम् (दो कर्तारः), बहुवचनम् (दो से अधिक कर्तारः)। ‘परस्मैपदि’ रूप स्वयं के अतिरिक्त किसी अन्य के लिए क्रिया दर्शाते हैं, जबकि ‘आत्मनेपदि’ रूप कर्ता स्वयं के लिए क्रिया करने का भाव दर्शाते हैं।
लकार-परिचयः
पाँच लकारों का अर्थ एवं प्रयोग
लट्-लकारःPresentवर्तमानकालः — अभी हो रहा कार्य (जैसे: पठति = वह पढ़ता है)
लृट्-लकारःFutureभविष्यत्कालः — आगे होने वाला कार्य (पठिष्यति = वह पढ़ेगा)
लङ्-लकारःPast (Imperfect)भूतकालः — बीता हुआ कार्य (अपठत् = उसने पढ़ा)
लोट्-लकारःImperativeआज्ञार्थे, प्रार्थनार्थे, निमन्त्रणार्थे (पठतु = वह पढ़े/पढ़े तो)
विधिलिङ्-लकारःOptativeविध्यर्थे, सम्भावनार्थे — चाहिए/सकता है (पठेत् = उसे पढ़ना चाहिए)
१. स्वरसन्धिः२. व्यञ्जनसन्धिः (हल्-सन्धिः)३. विसर्गसन्धिः
स्वरसन्धयः (अच्-सन्धयः) पुनः सप्त प्रकाराः सन्ति —
१. सवर्णदीर्घसन्धिः२. गुणसन्धिः३. वृद्धिसन्धिः४. यण्-सन्धिः५. अयादिसन्धिः६. पूर्वरूपसन्धिः७. प्रकृतिभावसन्धिः
इस परिशिष्ट में प्रथम चतुर्णां (1–4) सन्धीनां सामान्यः परिचयः उदाहरणसहितं प्रदत्तः — शेष तीन (अयादि, पूर्वरूप, प्रकृतिभाव) मूल पाठ्यांश में विस्तारित नहीं हैं।
इस धातु हेतु कोई रूप-तालिका उपलब्ध नहीं है। कृपया अन्य धातु खोजें।
स्रोतः — दीपकम् (संस्कृतम्), कक्षा ७, परिशिष्टम् २ : धातुरूपाणि (पृ. १५६–१६२) । सर्वाणि रूपाणि मूल पाठ्यपुस्तकानुसारेण सत्यापितानि।