NCERT · दीपकम् · कक्षा ६ · संस्कृतम्
दशमः पाठः — बुद्धिः सर्वार्थसाधिका
शशक-गजराज-कथा तथा लट्लकारः (वर्तमानकालः) — पाठ्यगत प्रश्न, अभ्यास (१–७), योग्यताविस्तरः एवं परियोजनाकार्यम्, सब उत्तर-सहित।
धातु-रूप यन्त्रम् — लट्लकारः
Present tense form generator
कस्यचिद् धातोः उपरि स्पृशन्तु — तस्य नव रूपाणि पश्यन्तु।
किसी भी धातु को दबाइए — तीन पुरुष × तीन वचन = नौ रूप तुरन्त दिख जाएँगे। यही रूप प्रश्न ४, ५ और परियोजना में काम आएँगे।
क्रियापदं कथं बनता है
ध्यातव्यम्: ‘कृ’ धातु विशेष है — उसके रूप करोति, कुरुतः, कुर्वन्ति इस प्रकार बनते हैं, सामान्य नियम से नहीं।
पाठ्यगत प्रश्नाः (Intext)
पृष्ठ १०६–१०८, १११
एषा कथा किं प्रतिपादयति?
पाठस्य भूमिका — मूलम् एवं अर्थः
संसारे उत्तमजीवनाय बुद्धिपूर्वकः व्यवहारः आवश्यकः भवति। बुद्धिपूर्वकेण व्यवहारेण कठिनम् अपि कार्यं सहजं भवति। विशेषतः स्पर्धायाः समये यदि प्रतिपक्षः अतीव प्रबलः, तर्हि बुद्धिबलेन वयं तं जेतुं शक्नुमः। शरीरबलात् बुद्धिबलस्य महत्त्वं कथम् अधिकम् इति एषा कथा प्रतिपादयति। एतां कथां वयं पठामः।
पाठस्य सारः एकवाक्ये: बुद्धिः सर्वार्थसाधिका — बुद्धि ही सब कार्य सिद्ध करने वाली है।
कथा — शशकाः गजराजः च
पूरी कथा हिन्दी अर्थ के साथ। यही कथा प्रश्न १, २ और ३ का आधार है।
प्रथमः भागः
एकस्मिन् वने एकः नित्यजलपूर्णः महान् सरोवरः अस्ति। कदाचिद् एकं पिपासाकुलं गजयूथं वनान्तरात् तत्र आगच्छति। तस्मिन् सरोवरे ते गजाः स्वेच्छया जलं पीत्वा, स्नात्वा, क्रीडित्वा च सूर्यास्तसमये निर्गच्छन्ति। तस्य च सरोवरस्य तीरे समन्तात् सुकोमलभूमौ बहूनि शशक-बिलानि सन्ति, येषु बहवः शशकाः निवसन्ति। गजानां परिभ्रमणेन तेषु बिलेषु निवसन्तः बहवः शशकाः क्षतविक्षताः भवन्ति, केचन पुनः मृताः अपि भवन्ति। अतः शशकाः भीताः चिन्तामग्नाः च भवन्ति। ते दुःखम् अनुभवन्ति। स्वरक्षार्थं च ते उपायं चिन्तयन्ति।
द्वितीयः भागः
एकस्मिन् दिने सायङ्काले तेषां शशकानां सभा भवति। सर्वे शशकाः स्वमतं प्रकाशयन्ति। परं ते समाधानं न प्राप्नुवन्ति। अन्ते शशकराजः वदति — “अहमेव उपायं चिन्तयामि। अधुना वयं सर्वे स्वगृहं गच्छामः।”
अन्यस्मिन् दिवसे रात्रौ सः शशकराजः यूथाधिपस्य गजराजस्य समीपं गच्छति। सः गजराजं कथयति — “हे गजराज! एषः सरोवरः चन्द्रस्य वासस्थानम् अस्ति। वयं शशकाः तस्य प्रजाः स्मः, अत एव सः शशाङ्कः इति नाम्ना प्रसिद्धः। यदा शशकाः जीवन्ति तदा एव चन्द्रः प्रसन्नः भवति।”
गजराजः पृच्छति — “कथम् अहं विश्वासं करोमि? किं सत्यमेव चन्द्रः सरोवरे तिष्ठति?” यदि सरोवरः चन्द्रदेवस्य वासस्थानं तर्हि तत् प्रदर्शयतु। शशकः कथयति — “आम्, चन्द्रस्य दर्शनाय आवाम् अधुना एव सरोवरं प्रति चलावः।”
गजराजः शशकराजेन सह सरोवरस्य समीपं गच्छति। सः जले चन्द्रस्य प्रतिबिम्बं पश्यति, चकितः च भवति। सः भयेन चन्द्रं नमति। ततः सः गजयूथेन सह अन्यत्र गच्छति। सः गजयूथः पुनः कदापि तस्य सरोवरस्य समीपं न आगच्छति। शशकाः तत्र सुखेन तिष्ठन्ति। सत्यम् एव उक्तम् — ‘बुद्धिः सर्वार्थसाधिका’।
वयं शब्दार्थान् जानीमः — मातृभाषया अर्थं लिखन्तु।
शब्दार्थ-तालिका (अन्तिम स्तम्भ भरा हुआ)
| शब्दः | संस्कृत-अर्थः | English | मातृभाषया अर्थः (हिन्दी) |
|---|---|---|---|
| सरोवरः | जलाशयः | Pond / Lake | तालाब |
| गजः | हस्ती | Elephant | हाथी |
| शशकः | शशः | Rabbit | खरगोश |
| मृताः | हताः | Dead | मरे हुए |
| भीताः | भययुक्ताः | Scared | डरे हुए |
| प्रतिबिम्बम् | प्रतिबिम्बम् | Reflection | परछाईं / प्रतिबिम्ब |
| चिन्तामग्नः | चिन्ताकुलः | Worried | चिन्तित |
| शशाङ्कः | चन्द्रः | Moon | चन्द्रमा |
| नाम्ना | नामधेयेन | By name | नाम से |
क्रियापदानां मूलं धातुः अस्ति — कस्य क्रियापदस्य कः धातुः?
यथा — ‘पठति’ इति क्रियापदस्य मूलं ‘पठ्’ इति धातुः अस्ति।
उत्तरम्
| क्रियापदम् | धातुः | अङ्गम् (stem) | अर्थः |
|---|---|---|---|
| निवसन्ति | नि + वस् | वस | रहते हैं |
| भवन्ति | भू | भव | होते हैं |
| गच्छति | गम् | गच्छ् | जाता है |
| प्रकाशयन्ति | प्र + काश् | काशि | प्रकट करते हैं |
| नमति | नम् | नम | नमस्कार करता है |
| तिष्ठन्ति | स्था | तिष्ठ् | ठहरते हैं |
ध्यातव्यम्: कुछ धातुओं का अङ्ग (stem) बदल जाता है — गम् → गच्छ्, स्था → तिष्ठ्, भू → भव्, दृश् → पश्य्। इन्हें याद रखना ज़रूरी है।
लट्लकारः कः? तस्य चिह्नानि कानि?
उत्तरम्
- कार्यारम्भात् कार्यपरिसमाप्तेः यः कालः, सः वर्तमानकालः उच्यते।
काम शुरू होने से पूरा होने तक का समय वर्तमान काल कहलाता है। - वर्तमान-कालस्य कृते लट्लकारः भवति।
वर्तमान काल के लिए लट्लकार का प्रयोग होता है। - लकारेषु त्रयः पुरुषाः — प्रथमपुरुषः मध्यमपुरुषः उत्तमपुरुषः — एवञ्च त्रीणि वचनानि — एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम् — भवन्ति।
लट्लकारस्य चिह्नानि (प्रत्ययाः)
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | अति | अतः | अन्ति |
| मध्यमपुरुषः | असि | अथः | अथ |
| उत्तमपुरुषः | आमि | आवः | आमः |
उदाहरणम् — ‘पठ्’ धातुः
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पठसि | पठथः | पठथ |
| उत्तमपुरुषः | पठामि | पठावः | पठामः |
पुरुष पहचानने का तरीका: प्रथमपुरुषः = वह / वे (सः, तौ, ते) · मध्यमपुरुषः = तुम (त्वम्, युवाम्, यूयम्) · उत्तमपुरुषः = मैं / हम (अहम्, आवाम्, वयम्)।
वयम् अभ्यासं कुर्मः (Exercise)
प्रश्न १ – ७ · पृष्ठ १०८–१११
पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु —
पाठ के आधार पर उत्तर एक शब्द में लिखिए।
उत्तराणि
| क्रमः | प्रश्नः | उत्तरम् | अर्थः |
|---|---|---|---|
| (क) | सरोवरस्य तीरे सुकोमलभूमौ बिलेषु के निवसन्ति? | शशकाः | खरगोश |
| (ख) | केषां परिभ्रमणेन शशकाः क्षतविक्षताः मृताः च भवन्ति? | गजानाम् | हाथियों के |
| (ग) | शशकराजः कस्य समीपं गच्छति? | गजराजस्य | गजराज के पास |
| (घ) | के स्वमतं प्रकाशयन्ति? | शशकाः | खरगोश |
| (ङ) | कः चन्द्रं नमति? | गजराजः | गजराज |
| (च) | के सुखेन तिष्ठन्ति? | शशकाः | खरगोश |
पूर्णवाक्येन उत्तराणि लिखन्तु —
उत्तराणि
- (क) चन्द्रः कदा प्रसन्नः भवति?
यदा शशकाः जीवन्ति तदा एव चन्द्रः प्रसन्नः भवति।
जब खरगोश जीवित रहते हैं तभी चन्द्रमा प्रसन्न होता है। - (ख) सायङ्काले केषां सभा भवति?
सायङ्काले शशकानां सभा भवति।
शाम को खरगोशों की सभा होती है। - (ग) शशकाः किमर्थम् उपायं चिन्तयन्ति?
शशकाः स्वरक्षार्थम् उपायं चिन्तयन्ति।
खरगोश अपनी रक्षा के लिए उपाय सोचते हैं। - (घ) चन्द्रः केन नाम्ना प्रसिद्धः अस्ति?
चन्द्रः ‘शशाङ्कः’ इति नाम्ना प्रसिद्धः अस्ति।
चन्द्रमा ‘शशाङ्क’ नाम से प्रसिद्ध है। - (ङ) “आम्, चन्द्रस्य दर्शनाय आवाम् अधुना एव सरोवरं प्रति चलावः” इति कः कथयति?
इति शशकराजः (शशकः) कथयति।
यह खरगोशों का राजा कहता है।
पाठस्य आधारेण पट्टिकातः क्रियापदानि चित्वा वाक्यानि पूरयन्तु —
उत्तराणि
| क्रमः | वाक्यम् | क्रियापदम् | अर्थः |
|---|---|---|---|
| (क) | किं चन्द्रः सरोवरे तिष्ठति? | तिष्ठति | क्या चन्द्रमा तालाब में रहता है? |
| (ख) | सर्वे शशकाः उपायं चिन्तयन्ति। | चिन्तयन्ति | सब खरगोश उपाय सोचते हैं। |
| (ग) | सायंकाले शशकानां सभा भवति। | भवति | शाम को खरगोशों की सभा होती है। |
| (घ) | शशकाः सरोवरस्य तीरे निवसन्ति। | निवसन्ति | खरगोश तालाब के किनारे रहते हैं। |
| (ङ) | सः गजराजं कथयति। | कथयति | वह गजराज से कहता है। |
चुनने का तरीका: कर्ता का वचन देखिए — ‘चन्द्रः’, ‘सभा’, ‘सः’ एकवचन हैं इसलिए -ति वाला रूप; ‘शशकाः’ बहुवचन है इसलिए -न्ति वाला रूप।
उदाहरणानुसारं निम्नलिखितानां पदानां वचनं पुरुषं च लिखन्तु —
उत्तराणि
| पदम् | पुरुषः | वचनम् | धातुः |
|---|---|---|---|
| चिन्तयति | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् (दिया हुआ) | चिन्त् |
| तिष्ठन्ति | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | स्था |
| जीवन्ति | प्रथमपुरुषः | बहुवचनम् | जीव् |
| नमति | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | नम् |
| कथयति | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | कथ् |
| गच्छति | प्रथमपुरुषः | एकवचनम् | गम् |
सङ्केतः: सभी रूप प्रथमपुरुष के हैं। अन्त देखिए — -ति = एकवचन, -तः = द्विवचन, -न्ति = बहुवचन।
उदाहरणानुसारं समुचितैः क्रियापदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
उत्तराणि
| धातुः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुषः |
|---|---|---|---|---|
| गम् | गच्छति | गच्छतः | गच्छन्ति | प्रथम (दिया हुआ) |
| कथ् | कथयति | कथयतः | कथयन्ति | प्रथम |
| स्था | तिष्ठति | तिष्ठतः | तिष्ठन्ति | प्रथम |
| कृ | करोमि | कुर्वः | कुर्मः | उत्तम |
| जीव् | जीवति | जीवतः | जीवन्ति | प्रथम |
| चल् | चलामि | चलावः | चलामः | उत्तम |
बहुत ज़रूरी बात: ‘कृ’ और ‘चल्’ वाली पंक्तियाँ उत्तमपुरुष की हैं, क्योंकि पुस्तक में दिए हुए रूप करोमि, कुर्वः और चलावः उत्तमपुरुष के हैं। इसलिए इनकी शेष खानों में भी उत्तमपुरुष के ही रूप भरे जाएँगे — कुर्मः, चलामि, चलामः। बाकी पंक्तियाँ प्रथमपुरुष की हैं।
चित्रस्य आधारेण पञ्च वाक्यानि लिखन्तु —
चित्र देखकर पाँच वाक्य लिखिए।
उत्तराणि (नमूना-वाक्यानि)
| क्रमः | वाक्यम् | अर्थः |
|---|---|---|
| (क) | अत्र एकः महान् वृक्षः अस्ति। | यहाँ एक बड़ा पेड़ है। |
| (ख) | वृक्षे बहूनि रक्तवर्णानि फलानि सन्ति। | पेड़ पर बहुत-से लाल रंग के फल हैं। |
| (ग) | एकः बालकः वृक्षम् आरोहति। | एक लड़का पेड़ पर चढ़ता है। |
| (घ) | एका बालिका फलानि चिनोति। | एक लड़की फल तोड़ती है। |
| (ङ) | अपरा बालिका फलं खादति। | दूसरी लड़की फल खाती है। |
अन्यानि वाक्यानि अपि लिख्यन्ते: एकः बालकः भूमौ फलानि गृह्णाति। · पिटके बहूनि फलानि सन्ति। · बालकाः बालिकाः च आनन्देन क्रीडन्ति। — इनमें से कोई भी पाँच वाक्य लिख सकते हैं।
अधोलिखितानां पर्यायपदानां मेलनं कृत्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
पर्यायवाची शब्दों को मिलाइए। (यथा – गजः — हस्ती)
उत्तराणि
| क्रमः | पदम् | → | पर्यायपदम् | अर्थः |
|---|---|---|---|---|
| (क) | गजः | → | हस्ती (दिया हुआ) | हाथी |
| (ख) | पदम् | → | चरणः | पैर |
| (ग) | चन्द्रः | → | शशाङ्कः | चन्द्रमा |
| (घ) | सरोवरः | → | जलाशयः | तालाब |
| (ङ) | प्रजा | → | जनता | प्रजा / जनता |
परियोजनाकार्यम्
पृष्ठ १११
पाठे पठितानां धातुरूपाणां सङ्ग्रहणं कुर्वन्तु। तेषां पुरुषं वचनं च लिखन्तु।
पाठ में आए हुए सभी क्रियापदों को इकट्ठा कीजिए और उनका पुरुष तथा वचन लिखिए।
उत्तरम् — पाठस्य सर्वाणि धातुरूपाणि
| क्रमः | क्रियापदम् | धातुः | पुरुषः | वचनम् | अर्थः |
|---|---|---|---|---|---|
| १ | अस्ति | अस् | प्रथमः | एकवचनम् | है |
| २ | सन्ति | अस् | प्रथमः | बहुवचनम् | हैं |
| ३ | स्मः | अस् | उत्तमः | बहुवचनम् | हम हैं |
| ४ | आगच्छति | आ + गम् | प्रथमः | एकवचनम् | आता है |
| ५ | निर्गच्छन्ति | निर् + गम् | प्रथमः | बहुवचनम् | निकलते हैं |
| ६ | गच्छति | गम् | प्रथमः | एकवचनम् | जाता है |
| ७ | गच्छामः | गम् | उत्तमः | बहुवचनम् | हम जाते हैं |
| ८ | निवसन्ति | नि + वस् | प्रथमः | बहुवचनम् | रहते हैं |
| ९ | भवन्ति | भू | प्रथमः | बहुवचनम् | होते हैं |
| १० | भवति | भू | प्रथमः | एकवचनम् | होता है |
| ११ | अनुभवन्ति | अनु + भू | प्रथमः | बहुवचनम् | अनुभव करते हैं |
| १२ | चिन्तयन्ति | चिन्त् | प्रथमः | बहुवचनम् | सोचते हैं |
| १३ | चिन्तयामि | चिन्त् | उत्तमः | एकवचनम् | मैं सोचता हूँ |
| १४ | प्रकाशयन्ति | प्र + काश् | प्रथमः | बहुवचनम् | प्रकट करते हैं |
| १५ | प्राप्नुवन्ति | प्र + आप् | प्रथमः | बहुवचनम् | प्राप्त करते हैं |
| १६ | वदति | वद् | प्रथमः | एकवचनम् | कहता है |
| १७ | कथयति | कथ् | प्रथमः | एकवचनम् | कहता है |
| १८ | जीवन्ति | जीव् | प्रथमः | बहुवचनम् | जीते हैं |
| १९ | पृच्छति | प्रच्छ् | प्रथमः | एकवचनम् | पूछता है |
| २० | करोमि | कृ | उत्तमः | एकवचनम् | मैं करता हूँ |
| २१ | तिष्ठति | स्था | प्रथमः | एकवचनम् | ठहरता है |
| २२ | तिष्ठन्ति | स्था | प्रथमः | बहुवचनम् | ठहरते हैं |
| २३ | चलावः | चल् | उत्तमः | द्विवचनम् | हम दोनों चलें |
| २४ | पश्यति | दृश् | प्रथमः | एकवचनम् | देखता है |
| २५ | नमति | नम् | प्रथमः | एकवचनम् | प्रणाम करता है |
| २६ | प्रतिपादयति | प्रति + पद् | प्रथमः | एकवचनम् | बताती है |
| २७ | पठामः | पठ् | उत्तमः | बहुवचनम् | हम पढ़ते हैं |
| २८ | शक्नुमः | शक् | उत्तमः | बहुवचनम् | हम सकते हैं |
← तालिका को दायें-बायें खिसकाइए →
ध्यातव्यम्: पूरे पाठ में मध्यमपुरुष का एक भी रूप नहीं है, क्योंकि कथा में कोई ‘त्वम्’ (तुम) को सम्बोधित करके क्रिया नहीं बोली गई। तथा ‘प्रदर्शयतु’ रूप लोट्लकार (आज्ञा) का है, लट्लकार का नहीं — इसलिए ऊपर की सूची में नहीं लिया गया।
पाठस्य सर्वेषां धातूनां पूर्ण-रूपाणि (लट्लकारः)
परियोजना और प्रश्न ५ के लिए — पाठ के हर धातु के नौ-नौ रूप एक साथ।
धातु-रूप-कोशः
| धातुः | पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|---|
| पठ् पढ़ना | प्रथमपुरुषः | पठति | पठतः | पठन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पठसि | पठथः | पठथ | |
| उत्तमपुरुषः | पठामि | पठावः | पठामः | |
| गम् जाना | प्रथमपुरुषः | गच्छति | गच्छतः | गच्छन्ति |
| मध्यमपुरुषः | गच्छसि | गच्छथः | गच्छथ | |
| उत्तमपुरुषः | गच्छामि | गच्छावः | गच्छामः | |
| स्था ठहरना | प्रथमपुरुषः | तिष्ठति | तिष्ठतः | तिष्ठन्ति |
| मध्यमपुरुषः | तिष्ठसि | तिष्ठथः | तिष्ठथ | |
| उत्तमपुरुषः | तिष्ठामि | तिष्ठावः | तिष्ठामः | |
| भू होना | प्रथमपुरुषः | भवति | भवतः | भवन्ति |
| मध्यमपुरुषः | भवसि | भवथः | भवथ | |
| उत्तमपुरुषः | भवामि | भवावः | भवामः | |
| वस् रहना | प्रथमपुरुषः | वसति | वसतः | वसन्ति |
| मध्यमपुरुषः | वससि | वसथः | वसथ | |
| उत्तमपुरुषः | वसामि | वसावः | वसामः | |
| नम् नमस्कार करना | प्रथमपुरुषः | नमति | नमतः | नमन्ति |
| मध्यमपुरुषः | नमसि | नमथः | नमथ | |
| उत्तमपुरुषः | नमामि | नमावः | नमामः | |
| जीव् जीना | प्रथमपुरुषः | जीवति | जीवतः | जीवन्ति |
| मध्यमपुरुषः | जीवसि | जीवथः | जीवथ | |
| उत्तमपुरुषः | जीवामि | जीवावः | जीवामः | |
| चल् चलना | प्रथमपुरुषः | चलति | चलतः | चलन्ति |
| मध्यमपुरुषः | चलसि | चलथः | चलथ | |
| उत्तमपुरुषः | चलामि | चलावः | चलामः | |
| कथ् कहना | प्रथमपुरुषः | कथयति | कथयतः | कथयन्ति |
| मध्यमपुरुषः | कथयसि | कथयथः | कथयथ | |
| उत्तमपुरुषः | कथयामि | कथयावः | कथयामः | |
| चिन्त् सोचना | प्रथमपुरुषः | चिन्तयति | चिन्तयतः | चिन्तयन्ति |
| मध्यमपुरुषः | चिन्तयसि | चिन्तयथः | चिन्तयथ | |
| उत्तमपुरुषः | चिन्तयामि | चिन्तयावः | चिन्तयामः | |
| दृश् देखना | प्रथमपुरुषः | पश्यति | पश्यतः | पश्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | पश्यसि | पश्यथः | पश्यथ | |
| उत्तमपुरुषः | पश्यामि | पश्यावः | पश्यामः | |
| कृ करना | प्रथमपुरुषः | करोति | कुरुतः | कुर्वन्ति |
| मध्यमपुरुषः | करोषि | कुरुथः | कुरुथ | |
| उत्तमपुरुषः | करोमि | कुर्वः | कुर्मः |
← तालिका को दायें-बायें खिसकाइए →
