सत्रिया और बिहू नृत्य
पूरे पाठ के सभी प्रश्नों के विस्तृत एवं सरल उत्तर — “पाठ से” तथा “पाठ से आगे” की हर गतिविधि का समाधान, चित्रों सहित।
- वे असम के जीवन के बारे में बहुत-कुछ जानती थीं।
- उन्हें असम, बिहू और सत्रिया नृत्य से बहुत प्रेम था।
- उन्होंने एंजेला को कुछ असमिया शब्द भी सिखाए।
- वे अपने कार्य में सहायता के लिए बेटी को लाई थीं।
कारण: एलेसेंड्रा असम की नृत्य-परंपरा पर डॉक्यूमेंट्री बना रही थीं। यात्रा के दौरान उन्होंने एंजेला को असम की खूबसूरती, बिहू त्योहार, सत्र, सत्रिया नृत्य आदि के बारे में बहुत-सी बातें बताईं। इससे स्पष्ट है कि वे असम के जीवन के बारे में बहुत-कुछ जानती थीं।
बाकी विकल्प गलत हैं — असमिया शब्द अनु ने सिखाए थे (माँ ने नहीं), और एंजेला यात्रा पर सहायता के लिए नहीं, बल्कि छुट्टियों में साथ आई थी।
- अनु के पास खिलौने थे।
- दोनों की आयु एक समान थी।
- दोनों को अंग्रेज़ी भाषा आती थी।
- एंजेला अनु से असमिया भाषा सीखना चाहती थी।
कारण: पाठ में बताया गया है कि उन दोनों की उम्र दस-दस साल थी। समान उम्र के बच्चे स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे की ओर आकर्षित होते हैं और तुरंत मित्र बन जाते हैं। इसलिए एक-दूसरे को देखते ही उनमें अपनापन जाग उठा।
यह एक कक्षा-चर्चा गतिविधि है। ऊपर दिए गए दोनों उत्तर पाठ में लिखी बातों (माँ का असम को जानना, दोनों बच्चों की समान उम्र) पर आधारित हैं। मित्रों के साथ इन्हीं आधारों पर चर्चा कर के अपने चुनाव को पुष्ट कीजिए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 (सही मिलान) | |
|---|---|---|
| 1 | सत्र → | ये असम के मठ हैं। इनकी संख्या पाँच सौ से भी ज्यादा है। ये पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियों के स्थान हैं। सत्रिया नृत्य की उत्पत्ति इन्हीं सत्रों में हुई है। |
| 2 | बोहाग बिहू → | असम में मनाया जाने वाला एक त्योहार। यह असम में नए साल की शुरुआत और बसंत के आगमन का प्रतीक है। |
| 3 | लंदन → | ‘यूनाइटेड किंगडम’ और ‘इंग्लैंड’ की राजधानी। |
| 4 | गुवाहाटी → | भारत के असम राज्य का एक प्राचीन और सबसे बड़ा नगर है। |
| 5 | ब्रिटिश अकादमी → | ‘यूनाइटेड किंगडम’ देश की एक सरकारी संस्था। |
| 6 | बीसवीं शताब्दी → | ग्रेगरी कैलेंडर के अनुसार 1 जनवरी 1901 से 31 दिसंबर 2000 तक का समय। |
अर्थ: असम भारत के पूर्वोत्तर (उत्तर-पूर्व) भाग में स्थित एक राज्य है। यह अपने घने जंगलों और वन्य-प्राणियों (जैसे एक सींग वाला गैंडा), मूँगा रेशम (सिल्क) तथा विशाल चाय-बागानों के लिए पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। प्रकृति की इस समृद्धि के साथ-साथ असम की सांस्कृतिक परंपरा भी बहुत गहरी है — बिहू और सत्रिया जैसे नृत्य यहाँ के जनजीवन का अभिन्न अंग हैं। यानी असम प्राकृतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टियों से बहुत धनी राज्य है।
अर्थ: संसार के हर देश और हर संस्कृति में लोग अपने भीतर की खुशी, उत्साह, प्रेम, भक्ति या दुख को शब्दों के साथ-साथ नृत्य और संगीत के माध्यम से भी प्रकट करते हैं। नाच-गाना भावनाओं की एक ऐसी भाषा है जिसे बिना किसी अनुवाद के हर कोई समझ सकता है। इसीलिए फसल कटने की खुशी में बिहू, त्योहारों पर लोकनृत्य और मंदिरों में सत्रिया जैसे नृत्य किए जाते हैं — ये सब मनुष्य की भावनाओं की अभिव्यक्ति ही हैं।
एंजेला पहली बार भारत आई थी और उसने ऐसा रंगीन उत्सव पहले कभी नहीं देखा था, इसलिए उसके मन में कई विचार उमड़ रहे होंगे, जैसे —
• यह उत्सव कितना सुंदर और जीवंत है! • यहाँ के लोग नाच-गाकर अपनी खुशी कैसे बाँट रहे हैं। • क्या मैं भी इस तरह नाच सकती हूँ? • काश, मैं भी अपने घर लंदन में बसंत के आगमन पर ऐसे ही नाचूँ। • भारत की संस्कृति लंदन से कितनी अलग और रोचक है। • माँ का यह काम (डॉक्यूमेंट्री बनाना) कितना ख़ास है।
बिहू का सीधा संबंध खेती-किसानी से है, इसीलिए इसे कृषि-आधारित त्योहार कहा जाता है। असम में यह साल में तीन बार मनाया जाता है और तीनों अवसर खेती के तीन चरणों से जुड़े हैं —
1. सबसे पहले जब किसान बीज बोते हैं (रोंगाली/बोहाग बिहू — बसंत व नववर्ष)।
2. फिर जब वे धान की रोपाई करते हैं (कोंगाली/काटी बिहू)।
3. और अंत में जब खेतों में अनाज तैयार हो जाता है व फसल कट जाती है (भोगाली/माघ बिहू)।
इस प्रकार बिहू फसल के हर पड़ाव की खुशी में मनाया जाता है, इसलिए यह कृषि से जुड़ा त्योहार है।
पाठ में इसके कई उदाहरण मिलते हैं —
• वापस लौटने के बाद भी वह चलते, खाना खाते और खेलते समय भी नृत्य करती रहती थी।
• वह माँ द्वारा रिकॉर्ड की गई सभी रिकॉर्डिंग्स को बार-बार देखती रही।
• उसने अपनी कक्षा में असमी नृत्य की वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ स्वयं नृत्य करके प्रदर्शन किया।
• उसके सहपाठियों और शिक्षकों को उसका यह प्रदर्शन बहुत पसंद आया।
• अब उसके पास अपने मनोरंजन के लिए असम के नृत्य — बिहू और सत्रिया — मौजूद थे।
इन सबसे स्पष्ट है कि भारत से लौटने के बाद भी एंजेला के मन-मस्तिष्क पर असम छाया रहा।
पहले सत्रिया नृत्य केवल सत्रों (मठों) में रहने वाले पुरुष साधुओं तक ही सीमित था। समय बदलने के साथ इसमें ये बड़े बदलाव आए —
• बीसवीं शताब्दी के मध्य में कुछ साधु मठों से बाहर आकर पुरुषों और महिलाओं — दोनों को सत्रिया नृत्य सिखाने लगे।
• शुरू में ऐसे साधुओं को मठों से निकाल दिया गया।
• परंतु आधुनिक दौर में अब महिला सत्रिया कलाकारों का मंच पर नृत्य करना आम बात हो गई है।
इस तरह यह नृत्य मठ की चारदीवारी से निकलकर स्त्री-पुरुष सभी के लिए एक जीवंत मंच-कला बन गया।
यह पाठ एक यात्रा-वृत्तांत जैसा निबंध है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ —
• इसमें वस्तु, घटना और प्रदेश (असम) का रोचक व सरस वर्णन है।
• इसमें एक क्रम है — कहानी लंदन से यात्रा शुरू होने से लेकर वापस लंदन पहुँचने तक के अनुभवों को क्रमबद्ध रूप में बताती है।
• इसमें आम जीवन की बातें हैं — बिहू, सत्रिया नृत्य, मूँगा सिल्क, खिलौने आदि।
• इसकी भाषा सरल और प्रवाहमयी है, जिससे लगता है मानो हम कोई कहानी पढ़ रहे हों।
• लेखक ने जो कुछ स्वयं देखा-अनुभव किया, उसी का वर्णन किया गया है।
इन्हीं गुणों के कारण यह निबंध सूचना देते हुए भी कहानी की तरह रोचक बना रहता है।
एंजेला और उसका परिवार लंदन से आया था, जहाँ इस तरह का खुला, रंगीन लोक-उत्सव नहीं होता। वे अचंभित इसलिए हुए क्योंकि —
• खुले आसमान के नीचे बरगद के पेड़ तले इतने सारे लोग एक साथ इकट्ठा थे।
• लड़के-लड़कियाँ लाल और बादामी रंग की गहरी डिजाइन वाली सुंदर पोशाकें पहने वाद्ययंत्रों के साथ मस्ती में नाच रहे थे।
• पूरा माहौल रंग-बिरंगा, जीवंत और उत्सव जैसा था, जो उनकी संस्कृति से बिलकुल अलग था।
• लोगों का उत्साह और सामूहिक आनंद देखकर एंजेला को लगा जैसे वह किसी सपनों की दुनिया या टाइम-मशीन में आ गई हो।
यात्रा बहुत जल्दबाजी में बनी थी, फिर भी वे ये तैयारियाँ अवश्य करते —
• हवाई जहाज़ के टिकट और पासपोर्ट-वीज़ा की व्यवस्था।
• भारत व असम के मौसम (अप्रैल) के अनुसार कपड़े पैक करना।
• होटल और गुवाहाटी में ठहरने की बुकिंग।
• डॉक्यूमेंट्री के लिए कैमरा, रिकॉर्डिंग उपकरण आदि साथ लेना।
• एंजेला के स्कूल से एक हफ़्ते की अतिरिक्त छुट्टी की अनुमति लेना।
• ज़रूरी दवाइयाँ, पैसे/मुद्रा और यात्रा की योजना तैयार करना।
बरगद का पेड़ बहुत बड़ा और घनी छाया वाला होता है। बिहू नृत्य के लिए इसके नीचे मंच इसलिए बनाया गया होगा क्योंकि —
• पेड़ की ठंडी छाया में धूप से बचाव होता है और कलाकार व दर्शक आराम से बैठ सकते हैं।
• बरगद के नीचे बड़ी और खुली जगह मिल जाती है, जहाँ बहुत सारे लोग एकत्र हो सकते हैं।
• गाँवों में बरगद का पेड़ प्रायः मिलन-स्थल होता है, जहाँ सामूहिक आयोजन की परंपरा रही है।
• प्रकृति के बीच खुले वातावरण में उत्सव का आनंद और भी बढ़ जाता है।
नृत्य: बिहू नृत्य, सत्रिया नृत्य।
त्योहार / बिहू: बोहाग (रोंगाली) बिहू, माघ (भोगाली) बिहू, काटी (कोंगाली) बिहू।
स्थान: गुवाहाटी, माजुली, मलंग गाँव, सत्र (मठ), दक्षिणापथ सत्र।
भाषा: असमिया।
रेशम / अन्य: मूँगा सिल्क (रेशम), चाय के बागान, वैष्णव मठ।
वे रोंगाली (बोहाग) बिहू के अवसर पर भारत आए थे। पाठ के अनुसार वे जब असम पहुँचे तब अप्रैल का महीना चल रहा था, जो असम में नए साल और बसंत के आगमन का समय होता है — यही रोंगाली/बोहाग बिहू है।
रोंगाली / बोहाग बिहू (अप्रैल): इस समय किसान खेतों में बीज बोते हैं — यह बुआई और नई फसल की शुरुआत का समय है।
कोंगाली / काटी बिहू (अक्तूबर): इस समय किसान खेतों में धान की रोपाई कर चुके होते हैं और फसल की देखभाल कर रहे होते हैं।
भोगाली / माघ बिहू (जनवरी): इस समय खेतों में अनाज तैयार होकर कट चुका होता है; यह फसल-कटाई के बाद भरपूर भोजन और उल्लास का समय है।
यह आपके अपने अनुभव पर आधारित प्रश्न है। ‘बिटिया’, ‘बिट्टो’ की तरह घरों में बच्चों को प्यार से कई नामों से बुलाया जाता है। उदाहरण (नमूना उत्तर): मुझे घर पर प्यार से “गुड्डू / मुन्ना / बबलू / छोटू / राजा बेटा / लाडो” आदि नामों से पुकारा जाता है। आप अपने घर के प्यार भरे नाम यहाँ लिखिए।
यह पता लगाने वाली गतिविधि है। अपने माता-पिता या बड़ों से पूछकर लिखिए। उदाहरण: मेरा नाम “अर्जुन” है, जिसका अर्थ है ‘उज्ज्वल / निर्मल’। यह नाम मेरे दादाजी ने रखा था। — आप इसी तरह अपने नाम का अर्थ और नाम रखने वाले का उल्लेख कीजिए।
नमूना उत्तर: मैं अपने मित्रों के साथ मिलकर कई खेल खेलता/खेलती हूँ — जैसे क्रिकेट, कबड्डी, खो-खो, लुका-छिपी, पिट्ठू (सतोलिया), विष-अमृत, आँख-मिचौली, लंगड़ी और साथ ही कैरम व शतरंज जैसे इनडोर खेल। आप अपने पसंदीदा खेल लिखिए।
यह आपके प्रांत से जुड़ा प्रश्न है। उदाहरण:
• मध्य प्रदेश — गौर, करमा, मटकी, फूलपती। • राजस्थान — घूमर, कालबेलिया। • गुजरात — गरबा, डांडिया। • पंजाब — भांगड़ा, गिद्धा। • महाराष्ट्र — लावणी। • उत्तर प्रदेश — कथक। • तमिलनाडु — भरतनाट्यम।
आप अपने प्रांत के नृत्य और अपना पसंदीदा नृत्य लिखिए। (नमूना: “मुझे गरबा करना बहुत पसंद है।”)
पूर्वोत्तर भारत में असम सहित कुल आठ राज्य हैं —
1. अरुणाचल प्रदेश, 2. सिक्किम, 3. मिज़ोरम, 4. मेघालय, 5. त्रिपुरा, 6. नागालैंड, 7. मणिपुर और 8. असम।
इन्हें प्रायः “सात बहनें” (Seven Sisters) और सिक्किम को “भाई” कहा जाता है। अवसर मिले तो इनमें से किसी राज्य की यात्रा अवश्य कीजिए।
नमूना उत्तर: मैं टाइम-मशीन में बैठकर प्राचीन भारत के उस समय में जाना चाहूँगा/चाहूँगी जब नालंदा विश्वविद्यालय अपने चरम पर था, ताकि देख सकूँ कि हज़ारों वर्ष पहले हमारे यहाँ शिक्षा कैसी थी। साथ ही मैं स्वतंत्रता-संग्राम के दौर में जाकर महान सेनानियों को देखना चाहूँगा। (आप अपनी पसंद का समय व स्थान और उसका कारण लिखिए।)
नमूना उत्तर: मैं ऐसी मशीन बनाना चाहूँगा/चाहूँगी जो प्रदूषित हवा और पानी को तुरंत शुद्ध कर दे, ताकि पर्यावरण साफ़ रहे और सभी लोग स्वस्थ जीवन जिएँ। इससे धरती को बीमारियों और प्रदूषण से बचाया जा सकेगा। (आप अपनी कल्पना की वस्तु और उसका उपयोग लिखिए।)
संग्रहालय (म्यूज़ियम) वह स्थान है जहाँ विभिन्न कालों की प्राचीन वस्तुएँ देखने को मिलती हैं, इसलिए कभी-कभी यह यात्रा टाइम-मशीन जैसी लगती है। नमूना उत्तर: मैंने अपने शहर के संग्रहालय की यात्रा की थी, जहाँ मैंने पुराने सिक्के, हथियार, मूर्तियाँ, वस्त्र और चित्र देखे। इससे मुझे बीते युगों के जीवन की झलक मिली। अवसर मिलने पर आप भी किसी संग्रहालय अवश्य जाइए और अपने अनुभव कक्षा में बताइए।
अनु के खिलौने: अनु के खिलौने अनोखे और पारंपरिक थे — जैसे गुड़िया, लकड़ी के खिलौने और नारियल की जटा से बने घर। अनु का पसंदीदा खिलौना लकड़ी का बना तीर-कमान था। ये सब हाथ से बने, प्राकृतिक चीज़ों से बने और असम की संस्कृति से जुड़े थे।
एंजेला के खिलौने: लंदन में एंजेला के खिलौने संभवतः आधुनिक और मशीनों से बने (जैसे प्लास्टिक की गुड़िया, बैटरी वाले/इलेक्ट्रॉनिक खिलौने, कार, वीडियो-गेम आदि) रहे होंगे। इसीलिए अनु के हाथ से बने अनोखे खिलौने एंजेला को बहुत अच्छे और अलग लगे।
नमूना उत्तर: मैं घर पर गुड़िया, गेंद, कार, ब्लॉक्स (बिल्डिंग सेट), लट्टू, कंचे, पहेली (पज़ल), साइकिल और कैरम आदि से खेलता/खेलती रहा/रही हूँ। आप अपने खिलौनों के नाम लिखिए।
नमूना उत्तर: मेरे यहाँ हाथ से बने कई खिलौने मिलते हैं — जैसे मिट्टी के जानवर व बर्तन, लकड़ी के घोड़े-हाथी, कपड़े की गुड़िया, बाँस की बाँसुरी व सीटी, कागज़ की नाव-हवाई जहाज़ और गन्ने/नारियल की पत्तियों से बने खिलौने। ये प्रायः त्योहारों व मेलों में मिलते हैं।
यह एक करके-सीखने वाली गतिविधि है। उदाहरण — कागज़ की नाव: एक चौकोर कागज़ लें → बीच से मोड़ें → दोनों कोनों को त्रिकोण की तरह मोड़ें → नीचे की पट्टियों को ऊपर मोड़ें → किनारों को खोलकर नाव का आकार दें। इसी तरह मिट्टी से जानवर या कपड़े की गुड़िया भी बनाकर दिखाई जा सकती है। अपना बनाया खिलौना कक्षा में लाकर बनाने की विधि सबको बताइए।
केंज़िंग्टन, लंदन दिनांक: __ / __ / ____ प्रिय सखी अनु, सस्नेह नमस्ते! मैं लंदन सकुशल पहुँच गई हूँ, पर सच कहूँ तो मेरा मन अब भी असम में ही अटका हुआ है। तुम्हारे साथ बिताए वे दिन मुझे बहुत याद आ रहे हैं — बरगद के पेड़ के नीचे रंग-बिरंगा बिहू नृत्य, सत्रिया कलाकारों का सुंदर अभिनय और तुम्हारे वे अनोखे लकड़ी के खिलौने! मैंने यहाँ अपनी कक्षा में असम के नृत्य का प्रदर्शन किया तो सबको बहुत पसंद आया। तुमने मुझे जो असमिया शब्द सिखाए, उन्हें मैं अब भी दोहराती हूँ। भारत की वह गर्मजोशी और अपनापन मुझे यहाँ बहुत याद आता है। तुम मुझे अपना हाल ज़रूर लिखना। अवसर मिला तो मैं फिर असम आऊँगी। तुम्हारी सखी, एंजेला
नमूना उत्तर: मुझे प्रेमचंद के सम्मान में जारी डाक-टिकट सबसे अच्छा लगा, क्योंकि वे हिंदी-उर्दू के महान कहानीकार व उपन्यासकार थे और उनकी कहानियाँ मुझे बहुत प्रिय हैं। (आप अपने पसंदीदा लेखक का टिकट और उसका कारण लिखिए — जैसे महादेवी वर्मा, सुमित्रानंदन पंत, रामधारी सिंह ‘दिनकर’ आदि।)
इन डाक-टिकटों पर सामान्यतः यह जानकारी मिलती है —
• लेखक का चित्र (तस्वीर)।
• लेखक का नाम (हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों में)।
• लेखक के जन्म व मृत्यु का वर्ष।
• टिकट का मूल्य तथा “भारत / INDIA” शब्द।
नमूना उत्तर: मुझे यह जानकारी सबसे अच्छी लगी कि मूँगा सिल्क पूरे विश्व में केवल असम और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में ही तैयार होता है और इसे ‘ड्राई क्लीन’ की ज़रूरत नहीं होती — घर पर धोने पर हर बार इसका निखार बढ़ता जाता है। एक साड़ी औसतन 50 वर्ष तक खराब नहीं होती। यह प्रकृति का असम को दिया अनमोल व अद्वितीय उपहार है, इसीलिए यह बात मुझे सबसे रोचक लगी।
• असम-बिहू लोकगीत • सत्रिया नृत्य • मणिपुरी नृत्य • भारत के लोक नृत्य • पूर्वोत्तर राज्यों के लोक नृत्य • भाषा संगम असमिया • मुकोली बिहू।
इन विषयों पर वीडियो व लेख खोजकर देखने से असम की समृद्ध नृत्य व संगीत-परंपरा को और गहराई से समझा जा सकता है।
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