पहली बूँद
वर्षा की पहली बूँद पड़ते ही जागती धरती और खिलती प्रकृति का सुंदर चित्रण करती कविता के सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर — विस्तार व चित्रों सहित।
पाठ से
कविता पर आधारित समझ के प्रश्न
पंक्ति है — “अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई।” पहली बूँद पड़ते ही धरती से नया अंकुर फूट पड़ता है और वह अँगड़ाई लेकर मानो नए जीवन का संचार करता है। इसलिए ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ अंकुर के लिए प्रयुक्त हुआ है।
यहाँ नीले आकाश (अंबर) की तुलना नीली आँखों से और आकाश में तैरते काले बादलों (जलधर) की तुलना आँख की काली पुतली से की गई है। अतः ‘काली पुतली’ बादल के लिए प्रयुक्त है।
पहले प्रश्न में ‘अंकुर’ इसलिए चुना क्योंकि कविता में स्पष्ट है कि धरती से अंकुर फूटकर अँगड़ाई लेता है — यानी नया जीवन जागता है।
दूसरे प्रश्न में ‘बादल’ इसलिए चुना क्योंकि आकाश को आँखें और उसमें छाए काले बादलों को पुतली कहा गया है (जलधर = बादल)।
यह चर्चा-गतिविधि है — कक्षा में अपने-अपने तर्क साझा कीजिए।
| कविता की पंक्ति (रेखांकित शब्द) | भावार्थ |
|---|---|
| 1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर | → बादल |
| 2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई | → मेघ-गर्जना |
| 3. नीले नयनों-सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधर | → आकाश |
| 4. वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई | → हरी दूब |
- उड़ता सागर = समुद्र का जल बादल बनकर आकाश में उड़ रहा है → बादल।
- बजा नगाड़े = बादलों की गड़गड़ाहट नगाड़ों-सी → मेघ-गर्जना।
- नीले नयन = नीला अम्बर आँखों-सा → आकाश।
- रोमावलि-सी = धरती के शरीर पर बालों की पंक्ति-सी हरी घास → हरी दूब।
आकाश में उमड़ते बादल ऐसे लगते हैं मानो समुद्र ही बिजली के सुनहरे पंख लगाकर उड़ रहा हो। बादलों की गड़गड़ाहट नगाड़ों की तरह गूँजकर सोई धरती को जगा रही है और उसमें फिर से नई जवानी (तरुणाई) भर रही है।
नीला आकाश आँखों जैसा और उसमें छाए काले बादल उन आँखों की पुतली जैसे प्रतीत होते हैं। ये बादल करुणा से पिघलकर आँसुओं (वर्षा) के रूप में बरसते हैं और धरती की बहुत पुरानी (चिर) प्यास बुझा देते हैं।
- पहली बूँद पड़ते ही धरती से अंकुर फूट पड़ता है और नए जीवन की अँगड़ाई लेता है।
- धरती के सूखे अधर (होंठ) मानो अमृत-सी बूँद पाकर तृप्त हो जाते हैं।
- हरी दूब पुलककर मुस्कुरा उठती है।
- बूढ़ी/सूखी धरती फिर से हरी-भरी (शस्य-श्यामला) बनने को ललचा उठती है।
इन्हीं सजीव दृश्यों से धरती का हर्ष प्रकट होता है।
आकाश (अंबर) को नीली आँखों के समान और बादलों (जलधर) को उन आँखों की काली पुतली के समान बताया गया है। इसके अतिरिक्त आकाश में उमड़ते बादलों को ‘उड़ता सागर’ और उनकी गड़गड़ाहट को ‘नगाड़ों’ के समान बताया गया है।
- “आसमान में उड़ता सागर” — समुद्र का आकाश में उड़ना।
- “धरती के सूखे अधरों पर गिरी बूँद” — धरती के होंठ।
- “हरी दूब पुलकी-मुसकाई” — घास का पुलकना और मुस्कुराना।
- “बूढ़ी धरती … ललचाई” — धरती का ललचाना।
- “बजा नगाड़े जगा रहे हैं” — बादलों का नगाड़े बजाना।
- “करुणा-विगलित अश्रु बहाकर” — बादलों का आँसू बहाना।
इन प्रयोगों में निर्जीव वस्तुओं (धरती, घास, बादल) को सजीव मानव-सा दिखाया गया है — यह मानवीकरण अलंकार है, जो कविता को सुंदर और आनंददायक बनाता है।
- अंकुरित होना: वर्षा होते ही बीज से नया अंकुर फूट पड़ा।
- टूटना: हाथ से गिरकर मिट्टी का घड़ा फूट गया।
- मतभेद/दरार डालना: अंग्रेज़ों की नीति थी — फूट डालो और राज करो।
- ज़ोर से रोना: बुरी ख़बर सुनते ही वह फूट-फूटकर रो पड़ा।
- भेद प्रकट होना: आख़िरकार सारा राज़ फूट ही गया।
| शब्द | अर्थ (…को धारण करने वाला) |
|---|---|
| जलधर | जल धारण करने वाला — बादल / समुद्र |
| गिरिधर | पर्वत धारण करने वाला — श्रीकृष्ण |
| हलधर | हल धारण करने वाला — बलराम |
| विषधर | विष धारण करने वाला — साँप |
| गदाधर | गदा धारण करने वाला — विष्णु |
| मुरलीधर | मुरली धारण करने वाला — श्रीकृष्ण |
| शशिधर | चंद्रमा धारण करने वाला — शिव |
| वसुंधरा | रत्न/धन धारण करने वाली — पृथ्वी |
| संकेत | उत्तर |
|---|---|
| क. एक प्रकार का वाद्य यंत्र | नगाड़ा |
| ख. आँख के लिए एक अन्य शब्द | नयन |
| ग. जल को धारण करने वाला | जलधर |
| घ. एक प्रकार की घास | दूब |
| ङ. आँसू का समानार्थी | अश्रु |
| च. आसमान का समानार्थी शब्द | अंबर |
संकेत: ‘नयन’ पहली पंक्ति में, ‘नगाड़ा’ पहले खाने में ऊपर से नीचे, ‘जलधर’ अंतिम पंक्ति में, ‘अंबर’ अंतिम खाने में ऊपर से नीचे तथा ‘दूब’ व ‘अश्रु’ बीच की पंक्तियों में मिलेंगे।
पाठ से आगे
विस्तार, रचनात्मक एवं गतिविधि प्रश्न
बारिश आने पर मेरा मन आनंद से भर जाता है। सूखी, तपती धरती पर जब पहली बूँद गिरती है तो मिट्टी की सोंधी महक चारों ओर फैल जाती है। ठंडी हवा, टप-टप गिरती बूँदें और हरियाली देखकर मन नाच उठता है — मुझे कागज़ की नाव चलाना और बारिश में भीगना बहुत अच्छा लगता है।
यह व्यक्तिगत अनुभव है — आप अपने भाव अपने शब्दों में लिखिए।
मुझे वर्षा ऋतु सबसे प्रिय है, क्योंकि यह तपती गर्मी से राहत देती है, धरती को हरा-भरा बनाती है और किसानों के लिए खुशहाली लाती है। नदी-तालाब भर जाते हैं, पेड़-पौधे लहलहा उठते हैं और मोर नाचने लगते हैं — यह ऋतु जीवन और उल्लास से भरी होती है।
आप अपनी पसंद की ऋतु (गर्मी/सर्दी/वर्षा/बसंत) और उसका कारण लिख सकते हैं।
“नमस्कार! मैं आपके नगर से सीधे प्रसारण में हूँ। पिछले दो दिनों से लगातार मूसलधार बारिश हो रही है। सड़कों पर पानी भर गया है, यातायात ठप है और लोग घरों में कैद हैं। मौसम विभाग ने अगले दो दिन और सतर्क रहने की चेतावनी दी है…”
इसी शैली में आप गर्मी/सर्दी/बारिश का सजीव वर्णन तैयार करके कक्षा में सुनाइए।
यह रचनात्मक प्रश्न है — आप अपनी कल्पना से चित्र को कोई भी सुंदर व सार्थक नाम दे सकते हैं।
नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक ताल-वाद्य (चोट कर बजाया जाने वाला) है, जैसे — ढोलक, डमरू, डफली आदि। यह प्रायः लोक-उत्सवों और होली जैसे पर्वों के गीतों में बजाया जाता है। नगाड़ों को जोड़े में भी बजाया जाता है, जिसमें एक की ध्वनि पतली और दूसरे की मोटी होती है।
खोजबीन (गतिविधि):
अपने क्षेत्र के उत्सवों में बजने वाले वाद्ययंत्रों (जैसे — ढोल, नगाड़ा, शहनाई, चंग, मंजीरा, हारमोनियम) के बारे में जानकारी एकत्र कीजिए और समूह में चर्चा कीजिए।
बारिश के बाद खिली फिर धूप,
आसमान में सजा अनोखा रूप।
सात रंगों का प्यारा पुल तना,
इंद्रधनुष कितना है सुहाना!
आप श्वेत कागज़ पर लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी — सात रंगों का इंद्रधनुष बनाकर उस पर अपनी मौलिक कविता लिख सकते हैं।
यह कविता पढ़ने के लिए दी गई है। इसमें बादलों की गोद से निकलकर आगे बढ़ी एक नन्ही बूँद बार-बार यही सोचती है कि उसने अपना घर (बादल) क्यों छोड़ा। यह बूँद के मन की दुविधा और आत्म-चिंतन को कोमलता से दर्शाती है।
इस कविता पर कोई प्रश्न नहीं पूछा गया है; यह केवल आनंद व समझ के लिए है।
हिंदी · मल्हार · पाठ 3 : पहली बूँद (गोपालकृष्ण कौल)
