अध्याय 3 – पहली बूँद (Chapter 3 – Pehli Boond) | Class 6 Hindi (Malhar) | NCERT Solutions

पहली बूँद — गोपालकृष्ण कौल | प्रश्न-उत्तर | EduGrown
पाठ 3 · हिंदी (मल्हार)

पहली बूँद

वर्षा की पहली बूँद पड़ते ही जागती धरती और खिलती प्रकृति का सुंदर चित्रण करती कविता के सम्पूर्ण प्रश्न-उत्तर — विस्तार व चित्रों सहित।

कवि — गोपालकृष्ण कौल (1923–2007) · बाल साहित्यकार
वर्षा का सुंदर दृश्य
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पाठ से

कविता पर आधारित समझ के प्रश्न

मेरी समझ से · क(1)
कविता में ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ किसके लिए प्रयुक्त हुआ है?
बादल
अंकुर
बूँद
पावस
स्पष्टीकरण

पंक्ति है — “अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अँगड़ाई।” पहली बूँद पड़ते ही धरती से नया अंकुर फूट पड़ता है और वह अँगड़ाई लेकर मानो नए जीवन का संचार करता है। इसलिए ‘नव-जीवन की ले अँगड़ाई’ अंकुर के लिए प्रयुक्त हुआ है।

मेरी समझ से · क(2)
‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर’ में ‘काली पुतली’ है—
बारिश की बूँदें
नगाड़ा
वृद्ध धरती
बादल
स्पष्टीकरण

यहाँ नीले आकाश (अंबर) की तुलना नीली आँखों से और आकाश में तैरते काले बादलों (जलधर) की तुलना आँख की काली पुतली से की गई है। अतः ‘काली पुतली’ बादल के लिए प्रयुक्त है।

मेरी समझ से · ख
अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?
चर्चा हेतु आधार

पहले प्रश्न में ‘अंकुर’ इसलिए चुना क्योंकि कविता में स्पष्ट है कि धरती से अंकुर फूटकर अँगड़ाई लेता है — यानी नया जीवन जागता है।

दूसरे प्रश्न में ‘बादल’ इसलिए चुना क्योंकि आकाश को आँखें और उसमें छाए काले बादलों को पुतली कहा गया है (जलधर = बादल)।

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यह चर्चा-गतिविधि है — कक्षा में अपने-अपने तर्क साझा कीजिए।

मिलकर करें मिलान
कविता की पंक्तियों में रेखांकित शब्दों का उनके भावार्थ से मिलान कीजिए।
कविता की पंक्ति (रेखांकित शब्द)भावार्थ
1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर बादल
2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई मेघ-गर्जना
3. नीले नयनों-सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधर आकाश
4. वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई हरी दूब
क्यों?
  • उड़ता सागर = समुद्र का जल बादल बनकर आकाश में उड़ रहा है → बादल
  • बजा नगाड़े = बादलों की गड़गड़ाहट नगाड़ों-सी → मेघ-गर्जना
  • नीले नयन = नीला अम्बर आँखों-सा → आकाश
  • रोमावलि-सी = धरती के शरीर पर बालों की पंक्ति-सी हरी घास → हरी दूब
पंक्तियों पर चर्चा · 1
“आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर, बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।”
भाव/अर्थ

आकाश में उमड़ते बादल ऐसे लगते हैं मानो समुद्र ही बिजली के सुनहरे पंख लगाकर उड़ रहा हो। बादलों की गड़गड़ाहट नगाड़ों की तरह गूँजकर सोई धरती को जगा रही है और उसमें फिर से नई जवानी (तरुणाई) भर रही है।

पंक्तियों पर चर्चा · 2
“नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई।”
भाव/अर्थ

नीला आकाश आँखों जैसा और उसमें छाए काले बादल उन आँखों की पुतली जैसे प्रतीत होते हैं। ये बादल करुणा से पिघलकर आँसुओं (वर्षा) के रूप में बरसते हैं और धरती की बहुत पुरानी (चिर) प्यास बुझा देते हैं।

सोच-विचार · 1
बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?
उत्तर
  • पहली बूँद पड़ते ही धरती से अंकुर फूट पड़ता है और नए जीवन की अँगड़ाई लेता है।
  • धरती के सूखे अधर (होंठ) मानो अमृत-सी बूँद पाकर तृप्त हो जाते हैं।
  • हरी दूब पुलककर मुस्कुरा उठती है।
  • बूढ़ी/सूखी धरती फिर से हरी-भरी (शस्य-श्यामला) बनने को ललचा उठती है।

इन्हीं सजीव दृश्यों से धरती का हर्ष प्रकट होता है।

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सोच-विचार · 2
कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?
उत्तर

आकाश (अंबर) को नीली आँखों के समान और बादलों (जलधर) को उन आँखों की काली पुतली के समान बताया गया है। इसके अतिरिक्त आकाश में उमड़ते बादलों को ‘उड़ता सागर’ और उनकी गड़गड़ाहट को ‘नगाड़ों’ के समान बताया गया है।

कविता की रचना
‘आसमान में उड़ता सागर…’ जैसे कल्पनाशील दृश्य कविता में पहचानिए और उन पर चर्चा कीजिए।
कल्पनाशील/मानवीकरण के दृश्य
  • “आसमान में उड़ता सागर” — समुद्र का आकाश में उड़ना।
  • “धरती के सूखे अधरों पर गिरी बूँद” — धरती के होंठ।
  • “हरी दूब पुलकी-मुसकाई” — घास का पुलकना और मुस्कुराना।
  • “बूढ़ी धरती … ललचाई” — धरती का ललचाना।
  • “बजा नगाड़े जगा रहे हैं” — बादलों का नगाड़े बजाना।
  • “करुणा-विगलित अश्रु बहाकर” — बादलों का आँसू बहाना।

इन प्रयोगों में निर्जीव वस्तुओं (धरती, घास, बादल) को सजीव मानव-सा दिखाया गया है — यह मानवीकरण अलंकार है, जो कविता को सुंदर और आनंददायक बनाता है।

शब्द — एक, अर्थ अनेक
‘फूट’ शब्द का प्रयोग ऐसे वाक्यों में कीजिए जहाँ इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकलें।
भिन्न अर्थ · वाक्य
  • अंकुरित होना: वर्षा होते ही बीज से नया अंकुर फूट पड़ा।
  • टूटना: हाथ से गिरकर मिट्टी का घड़ा फूट गया।
  • मतभेद/दरार डालना: अंग्रेज़ों की नीति थी — फूट डालो और राज करो।
  • ज़ोर से रोना: बुरी ख़बर सुनते ही वह फूट-फूटकर रो पड़ा।
  • भेद प्रकट होना: आख़िरकार सारा राज़ फूट ही गया।
अनेक शब्दों के लिए एक शब्द
‘जलधर’ = जल को धारण करने वाला। ‘धर’ से मिलकर बने कुछ शब्द और उनके अर्थ लिखिए।
शब्दअर्थ (…को धारण करने वाला)
जलधरजल धारण करने वाला — बादल / समुद्र
गिरिधरपर्वत धारण करने वाला — श्रीकृष्ण
हलधरहल धारण करने वाला — बलराम
विषधरविष धारण करने वाला — साँप
गदाधरगदा धारण करने वाला — विष्णु
मुरलीधरमुरली धारण करने वाला — श्रीकृष्ण
शशिधरचंद्रमा धारण करने वाला — शिव
वसुंधरारत्न/धन धारण करने वाली — पृथ्वी
शब्द पहेली
दिए गए शब्द-जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजिए।
गा
दू
अं
ड़ा
श्रु
संकेतउत्तर
क. एक प्रकार का वाद्य यंत्रनगाड़ा
ख. आँख के लिए एक अन्य शब्दनयन
ग. जल को धारण करने वालाजलधर
घ. एक प्रकार की घासदूब
ङ. आँसू का समानार्थीअश्रु
च. आसमान का समानार्थी शब्दअंबर
पाठ्यपुस्तक में दिया गया मूल शब्द-जाल।
पाठ्यपुस्तक में दिया गया मूल शब्द-जाल।

संकेत: ‘नयन’ पहली पंक्ति में, ‘नगाड़ा’ पहले खाने में ऊपर से नीचे, ‘जलधर’ अंतिम पंक्ति में, ‘अंबर’ अंतिम खाने में ऊपर से नीचे तथा ‘दूब’ व ‘अश्रु’ बीच की पंक्तियों में मिलेंगे।

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पाठ से आगे

विस्तार, रचनात्मक एवं गतिविधि प्रश्न

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आपकी बात · 1
बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।
आदर्श उत्तर

बारिश आने पर मेरा मन आनंद से भर जाता है। सूखी, तपती धरती पर जब पहली बूँद गिरती है तो मिट्टी की सोंधी महक चारों ओर फैल जाती है। ठंडी हवा, टप-टप गिरती बूँदें और हरियाली देखकर मन नाच उठता है — मुझे कागज़ की नाव चलाना और बारिश में भीगना बहुत अच्छा लगता है।

यह व्यक्तिगत अनुभव है — आप अपने भाव अपने शब्दों में लिखिए।

बारिश में कागज़ की नाव चलाते बच्चे — पहली बूँद का उल्लास।
बारिश में कागज़ की नाव चलाते बच्चे — पहली बूँद का उल्लास।
आपकी बात · 2
आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों?
आदर्श उत्तर

मुझे वर्षा ऋतु सबसे प्रिय है, क्योंकि यह तपती गर्मी से राहत देती है, धरती को हरा-भरा बनाती है और किसानों के लिए खुशहाली लाती है। नदी-तालाब भर जाते हैं, पेड़-पौधे लहलहा उठते हैं और मोर नाचने लगते हैं — यह ऋतु जीवन और उल्लास से भरी होती है।

आप अपनी पसंद की ऋतु (गर्मी/सर्दी/वर्षा/बसंत) और उसका कारण लिख सकते हैं।

समाचार माध्यमों से
अत्यधिक गर्मी, सर्दी या बारिश में आपने जो स्थिति देखी है, उसका ‘आँखों देखा हाल’ अपनी कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
गतिविधि · नमूना

“नमस्कार! मैं आपके नगर से सीधे प्रसारण में हूँ। पिछले दो दिनों से लगातार मूसलधार बारिश हो रही है। सड़कों पर पानी भर गया है, यातायात ठप है और लोग घरों में कैद हैं। मौसम विभाग ने अगले दो दिन और सतर्क रहने की चेतावनी दी है…”

इसी शैली में आप गर्मी/सर्दी/बारिश का सजीव वर्णन तैयार करके कक्षा में सुनाइए।

सृजन
नाम देना भी सृजन है। नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और इसे एक नाम दीजिए।
रेगिस्तान की सूखी रेत में खिला हरा पौधा और श्वेत पुष्प।
रेगिस्तान की सूखी रेत में खिला हरा पौधा और श्वेत पुष्प।
कुछ सुझाए नाम
बंजर में बहाररेत का फूलसूखे में सृजनमरुस्थल की मुस्कानजीवन की जिजीविषा

यह रचनात्मक प्रश्न है — आप अपनी कल्पना से चित्र को कोई भी सुंदर व सार्थक नाम दे सकते हैं।

इन्हें भी जानें · खोजबीन
नगाड़ा और अन्य वाद्ययंत्रों के बारे में जानिए — आपके यहाँ उत्सवों में कौन-से वाद्ययंत्र बजाए जाते हैं?
नगाड़ा बजाता कलाकार — भारत का पारंपरिक ताल-वाद्य।
नगाड़ा बजाता कलाकार — भारत का पारंपरिक ताल-वाद्य।
जानकारी

नगाड़ा भारत का एक पारंपरिक ताल-वाद्य (चोट कर बजाया जाने वाला) है, जैसे — ढोलक, डमरू, डफली आदि। यह प्रायः लोक-उत्सवों और होली जैसे पर्वों के गीतों में बजाया जाता है। नगाड़ों को जोड़े में भी बजाया जाता है, जिसमें एक की ध्वनि पतली और दूसरे की मोटी होती है।

खोजबीन (गतिविधि):

अपने क्षेत्र के उत्सवों में बजने वाले वाद्ययंत्रों (जैसे — ढोल, नगाड़ा, शहनाई, चंग, मंजीरा, हारमोनियम) के बारे में जानकारी एकत्र कीजिए और समूह में चर्चा कीजिए।

आइए इंद्रधनुष बनाएँ
एक सुंदर इंद्रधनुष बनाइए, उस पर एक छोटी-सी कविता लिखिए और उसे कोई प्यारा-सा नाम दीजिए।
नमूना (नाम — “सतरंगी पुल”)

बारिश के बाद खिली फिर धूप,
आसमान में सजा अनोखा रूप।
सात रंगों का प्यारा पुल तना,
इंद्रधनुष कितना है सुहाना!

आप श्वेत कागज़ पर लाल, नारंगी, पीला, हरा, नीला, जामुनी और बैंगनी — सात रंगों का इंद्रधनुष बनाकर उस पर अपनी मौलिक कविता लिख सकते हैं।

झरोखे से · एक बूँद
‘एक बूँद’ — अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की कविता (पठन हेतु)।
भाव

यह कविता पढ़ने के लिए दी गई है। इसमें बादलों की गोद से निकलकर आगे बढ़ी एक नन्ही बूँद बार-बार यही सोचती है कि उसने अपना घर (बादल) क्यों छोड़ा। यह बूँद के मन की दुविधा और आत्म-चिंतन को कोमलता से दर्शाती है।

इस कविता पर कोई प्रश्न नहीं पूछा गया है; यह केवल आनंद व समझ के लिए है।

तैयार किया गया — @edugrown
हिंदी · मल्हार · पाठ 3 : पहली बूँद (गोपालकृष्ण कौल)

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