अतिथिदेवो भव
कथा-सारः
राधिका इन दिनों उछल-कूद करते हुए (कूर्दमाना) चलती है, क्योंकि उसके घर नए मेहमान आए हैं — एक बिल्ली (मार्जारी) और उसके चार बच्चे (शावकाः), कुल पाँच। राधिका दिन-रात केवल इन्हीं के बारे में सोचती रहती है। उसने इन चारों शावकों के नाम भी सोचे — तन्वी (सुन्दर व कोमल), मृद्वी (स्पर्श में अत्यंत कोमल), शबलः (चितकबरे रंग का), और भीमः (थोड़ा मोटा)।
राधिका बिल्ली को दूध पिलाती है, बिल्ली प्रसन्नतापूर्वक राधिका को देखती है। जब राधिका बच्चों के पास जाती है तो बिल्ली धीरे-धीरे उसके पीछे-पीछे आती है, परन्तु बच्चे राधिका को देखकर डरते नहीं। दादी (पितामही) राधिका की यह गतिविधियाँ देखकर हँसती हैं।
दादी राधिका से कहती हैं — “अतिथि कब आएँगे, यह हम नहीं जानते, परन्तु जब भी वे आएँ तो उनकी उचित सेवा करनी चाहिए।” राधिका दादी के गले में माला जैसे हाथ डालते हुए पूछती है — “ठीक है, करूँगी, पर क्यों?” दादी उत्तर देती हैं — ‘अतिथिदेवो भव’ — अर्थात् अतिथि को हमारा देवता समझकर उसकी आदरपूर्वक सेवा करनी चाहिए। राधिका पूरे दिन इस मंत्र को बार-बार दोहराती है और अंत में अपने चारों “अतिथियों” (बिल्ली के बच्चों) से वात्सल्यपूर्वक पूछती है — “क्या तुम जानते हो ‘अतिथिदेवो भव’ का अर्थ? तुम भी कहो — ‘अतिथिदेवो भव’।”
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु
अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु
अधोलिखितानां वाक्यानां प्रश्न-सूचक-वाक्यानि लिखन्तु
उत्पीठिकायां (मेज़ पर) किम् अस्ति? किं नास्ति?
रेखाचित्रं दृष्ट्वा उदाहरणानुसारं वाक्यानि लिखन्तु
भोजनशालायां किं किम् अस्ति? — पञ्चभिः वाक्यैः
अधोलिखितेभ्यः वाक्येभ्यः अव्ययपदानि चित्वा लिखन्तु
उदाहरणानुसारं कः कुत्र अस्ति? कुत्र नास्ति?
| पदम् | स्थानम् १ | स्थानम् २ | उत्तरम् |
|---|---|---|---|
| सिंहः | वने | कार्यालये | सिंहः वने अस्ति। कार्यालये नास्ति। |
| छात्रः | आकाशे | विद्यालये | छात्रः आकाशे नास्ति। छात्रः विद्यालये अस्ति। |
| मत्स्यः | समुद्रे | वृक्षे | मत्स्यः समुद्रे अस्ति। वृक्षे नास्ति। |
| मधुरता | मोदके | कषाये | मधुरता मोदके अस्ति। कषाये नास्ति। |
| उष्णता | सूर्ये | चन्द्रे | उष्णता सूर्ये अस्ति। चन्द्रे नास्ति। |
| वानरः | नद्याम् | वृक्षे | वानरः नद्याम् नास्ति। वृक्षे अस्ति। |
| नौका | जले | पर्वते | नौका जले अस्ति। पर्वते नास्ति। |
| अज्ञानम् | पण्डिते | मूर्खे | अज्ञानम् पण्डिते नास्ति। मूर्खे अस्ति। |
| चन्द्रः | अमावस्यायाम् | पूर्णिमायाम् | चन्द्रः अमावस्यायां नास्ति। पूर्णिमायाम् अस्ति। |
| अवकाशः | सोमवासरे | रविवासरे | अवकाशः सोमवासरे नास्ति। रविवासरे अस्ति। |
शब्दार्थाः — Vocabulary Reference
| शब्दः | अर्थः | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| कूर्दमाना | उच्छलनं कुर्वती | कूदती हुई | Jumping (Female) |
| नूतनाः | नवीनाः | नये | New |
| मिलित्वा | सम्मिल्य | मिलकर | Together |
| अहोरात्रम् | अहर्निशम् | दिन-रात | Day and night |
| छद्याः उपरि | गृहस्य उपरितने भागे | छत के ऊपर | On the roof |
| शावकाः | मार्जारस्य शिशवः | बिल्ली के बच्चे | Kitten |
| मन्दं मन्दम् | शनैः शनैः | धीरे-धीरे | Slowly |
| पृष्ठतः | पृष्ठभागतः | पीछे-पीछे | From the back |
| कार्यकलापान् | गतिविधीन् | गतिविधियों को | Activities |
| दृष्ट्वा | अवलोक्य | देखकर | Having Seen |
| एतादृशाः | एतैः समानाः | इस तरह के | Like these |
| स्थापयन्ती | स्थापनं कुर्वती | डालती हुई | Putting |
| किमर्थम् | किं निमित्तम् | क्यों/किसलिए | Why |
| आदिनम् | सम्पूर्णं दिनम् | दिन भर | Whole day |
| वारं वारम् | पुनः पुनः | बार-बार | Again and again |
गीतम्, अव्यय-लक्षणम्, अभ्यासः
१. गीतम् (मार्जाल-गीतम्)
अत्रैवास्मि आगतोऽस्मि राजगृहादेवम्
मार्जाल! रे मार्जाल! किं दृष्टं तत्र?
तावद्दीर्घः मूषकपुत्रः न हि दृष्टोऽन्यत्र।
२–३. अव्यय-लक्षणम् एवं नियमाः
श्लोकः “सदृशं त्रिषु लिङ्गेषु सर्वासु च विभक्तिषु। वचनेषु च सर्वेषु यन्न व्येति तदव्ययम्॥”
अर्थात् जो शब्द तीनों लिङ्गों (पुं/स्त्री/नपुंसक), सभी विभक्तियों, और सभी वचनों (एक/द्वि/बहु) में समान रूप से रहता है — जिसमें कोई परिवर्तन (व्ययः) नहीं होता — वह अव्ययम् कहलाता है।
उदाहरणम् ‘अत्र’ शब्द को देखें — “अत्र बालकः अस्ति” तथा “अत्र बालकाः सन्ति” — दोनों वाक्यों में ‘अत्र’ पद में वचन-भेद नहीं है। “अत्र गायिका गायति” तथा “अत्र गायकः गायति” में लिङ्ग-भेद नहीं है। “अत्र सुधाखण्डेन लेखनं भवति” तथा “अत्र गृहेषु स्वच्छता भवति” में विभक्ति-भेद नहीं है। अतः ‘अत्र’ एक अव्ययपद है।
मार्गदर्शनम् + स्थान-सूचक शब्दाः
निर्देशाः एवं सहायता
- नामकरण-विमर्शः: राधिका ने बिल्ली के चारों बच्चों के नाम उनके गुण/स्वभाव के अनुसार रखे थे — तन्वी (सुंदर व कोमल शरीर), मृद्वी (स्पर्श में अत्यंत कोमल), शबलः (चितकबरा रंग), भीमः (थोड़ा मोटा शरीर)। अर्थात् नामकरण में उसने प्रत्येक की शारीरिक विशेषता या गुण को आधार बनाया। इसी प्रकार अपने नाम के पीछे के अर्थ/उद्देश्य पर विचार कीजिए — आपके माता-पिता ने आपका नाम किस गुण, आशा, या अर्थ को ध्यान में रखकर रखा, इस पर चर्चा कीजिए और लिखिए।
- विद्यालय-परिसर विवरण: अपने विद्यालय के परिसर में क्या है, क्या नहीं है — इसे संस्कृत में लिखिए (यथा — “विद्यालयपरिसरे उद्यानम् अस्ति। विद्यालयपरिसरे तडागः नास्ति।”) और कक्षा में सुनाइए। नीचे दिए गए स्थान-सूचक शब्दों (उपरि, अधः, समीपे आदि) का उपयोग करें।
