NCERT · दीपकम् · कक्षा ६ · संस्कृतम्
प्रथमः पाठः — वयं वर्णमालां पठामः
पाठस्य सर्वेषां प्रश्नानाम् उत्तराणि — पाठ्यगत-प्रश्नाः, अभ्यासः, परियोजनाकार्यं च। हर उत्तर विस्तार से, चित्रों और तालिकाओं के साथ समझाया गया है।
पाठ-सारः — एका दृष्ट्या
Quick concept recap
वर्णाः द्विविधाः भवन्ति — स्वराः, व्यञ्जनानि च।
वर्ण दो प्रकार के होते हैं — स्वर और व्यंजन। स्वरों का उच्चारण स्वतन्त्र रूप से होता है, जबकि व्यंजनों के उच्चारण के लिए किसी स्वर की सहायता आवश्यक होती है।
वर्ण-गणना (step-wise)
- समानाक्षर-स्वराः — अ आ इ ई उ ऊ ऋ ॠ ऌ, तथा सन्ध्यक्षर-स्वराः — ए ऐ ओ औ।
$$9 \;+\; 4 \;=\; 13 \quad \text{(swarah)}$$
- व्यञ्जनानि — स्पर्शाः (५ वर्गाः × ५ वर्णाः), अन्तःस्थाः (य र ल व), ऊष्माणः (श ष स ह)।
$$(5\times 5) \;+\; 4 \;+\; 4 \;=\; 25+4+4 \;=\; 33$$
- अयोगवाहौ — अनुस्वारः (ं) विसर्गः (ः) च।
$$13 \;+\; 33 \;+\; 2 \;=\; \boxed{48}$$
एकैकेन व्यञ्जनेन सह त्रयोदश स्वराः योज्यन्ते, अतः गुणिताक्षराणां संख्या — $$33 \times 13 = 429$$
आस्ये वर्णानां षट् उच्चारण-स्थानानि
नीचे दिए गए बटन दबाइए — उस स्थान से बोले जाने वाले वर्ण चमक उठेंगे।
सर्वेषां वर्णानाम् उच्चारण-स्थानानि — किसी बटन को दबाकर उस स्थान के वर्ण देखिए।
पाठ्यगत प्रश्नाः (Intext)
पुस्तके रिक्तस्थानानि · पृष्ठ ४–२२
गुणिताक्षराणि — क-वर्गः, च-वर्गः (वदामः लिखामः च)
व्यंजन में सभी तेरह स्वरों की मात्राएँ जोड़कर गुणिताक्षर बनाइए।
उत्तरम् — क-वर्गः
| व्यञ्जनम् | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क् | क | का | कि | की | कु | कू | कृ | कॄ | कॢ | के | कै | को | कौ |
| ख् | ख | खा | खि | खी | खु | खू | खृ | खॄ | खॢ | खे | खै | खो | खौ |
| ग् | ग | गा | गि | गी | गु | गू | गृ | गॄ | गॢ | गे | गै | गो | गौ |
| घ् | घ | घा | घि | घी | घु | घू | घृ | घॄ | घॢ | घे | घै | घो | घौ |
| ङ् | ङ | ङा | ङि | ङी | ङु | ङू | ङृ | ङॄ | ङॢ | ङे | ङै | ङो | ङौ |
← तालिका को दायें-बायें खिसकाइए →
उत्तरम् — च-वर्गः
| व्यञ्जनम् | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| च् | च | चा | चि | ची | चु | चू | चृ | चॄ | चॢ | चे | चै | चो | चौ |
| छ् | छ | छा | छि | छी | छु | छू | छृ | छॄ | छॢ | छे | छै | छो | छौ |
| ज् | ज | जा | जि | जी | जु | जू | जृ | जॄ | जॢ | जे | जै | जो | जौ |
| झ् | झ | झा | झि | झी | झु | झू | झृ | झॄ | झॢ | झे | झै | झो | झौ |
| ञ् | ञ | ञा | ञि | ञी | ञु | ञू | ञृ | ञॄ | ञॢ | ञे | ञै | ञो | ञौ |
कथं जायते? व्यञ्जनम् (क्) + स्वरः (आ) = गुणिताक्षरम् (का)। यहाँ क् केवल व्यंजन है और ा ‘आ’ स्वर की मात्रा है।
गुणिताक्षराणि — ट-वर्गः, त-वर्गः, प-वर्गः
उत्तरम् — ट-वर्गः
| व्यञ्जनम् | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ट् | ट | टा | टि | टी | टु | टू | टृ | टॄ | टॢ | टे | टै | टो | टौ |
| ठ् | ठ | ठा | ठि | ठी | ठु | ठू | ठृ | ठॄ | ठॢ | ठे | ठै | ठो | ठौ |
| ड् | ड | डा | डि | डी | डु | डू | डृ | डॄ | डॢ | डे | डै | डो | डौ |
| ढ् | ढ | ढा | ढि | ढी | ढु | ढू | ढृ | ढॄ | ढॢ | ढे | ढै | ढो | ढौ |
| ण् | ण | णा | णि | णी | णु | णू | णृ | णॄ | णॢ | णे | णै | णो | णौ |
उत्तरम् — त-वर्गः
| व्यञ्जनम् | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त् | त | ता | ति | ती | तु | तू | तृ | तॄ | तॢ | ते | तै | तो | तौ |
| थ् | थ | था | थि | थी | थु | थू | थृ | थॄ | थॢ | थे | थै | थो | थौ |
| द् | द | दा | दि | दी | दु | दू | दृ | दॄ | दॢ | दे | दै | दो | दौ |
| ध् | ध | धा | धि | धी | धु | धू | धृ | धॄ | धॢ | धे | धै | धो | धौ |
| न् | न | ना | नि | नी | नु | नू | नृ | नॄ | नॢ | ने | नै | नो | नौ |
उत्तरम् — प-वर्गः
| व्यञ्जनम् | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प् | प | पा | पि | पी | पु | पू | पृ | पॄ | पॢ | पे | पै | पो | पौ |
| फ् | फ | फा | फि | फी | फु | फू | फृ | फॄ | फॢ | फे | फै | फो | फौ |
| ब् | ब | बा | बि | बी | बु | बू | बृ | बॄ | बॢ | बे | बै | बो | बौ |
| भ् | भ | भा | भि | भी | भु | भू | भृ | भॄ | भॢ | भे | भै | भो | भौ |
| म् | म | मा | मि | मी | मु | मू | मृ | मॄ | मॢ | मे | मै | मो | मौ |
गुणिताक्षराणि — अन्तःस्थाः, ऊष्म-वर्णाः, अयोगवाहौ च
उत्तरम् — अन्तःस्थाः (य र ल व)
| व्यञ्जनम् | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य् | य | या | यि | यी | यु | यू | यृ | यॄ | यॢ | ये | यै | यो | यौ |
| र् | र | रा | रि | री | रु | रू | रृ | रॄ | रॢ | रे | रै | रो | रौ |
| ल् | ल | ला | लि | ली | लु | लू | लृ | लॄ | लॢ | ले | लै | लो | लौ |
| व् | व | वा | वि | वी | वु | वू | वृ | वॄ | वॢ | वे | वै | वो | वौ |
उत्तरम् — ऊष्म-वर्णाः (श ष स ह)
| व्यञ्जनम् | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श् | श | शा | शि | शी | शु | शू | शृ | शॄ | शॢ | शे | शै | शो | शौ |
| ष् | ष | षा | षि | षी | षु | षू | षृ | षॄ | षॢ | षे | षै | षो | षौ |
| स् | स | सा | सि | सी | सु | सू | सृ | सॄ | सॢ | से | सै | सो | सौ |
| ह् | ह | हा | हि | ही | हु | हू | हृ | हॄ | हॢ | हे | है | हो | हौ |
उत्तरम् — स्वरैः सह अयोगवाहौ
| अयोगवाहः | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ं (अनुस्वारः) | अं | आं | इं | ईं | उं | ऊं | ऋं | ॠं | ऌं | एं | ऐं | ओं | औं |
| ः (विसर्गः) | अः | आः | इः | ईः | उः | ऊः | ऋः | ॠः | ऌः | एः | ऐः | ओः | औः |
उत्तरम् — ‘अयोगवाहानाम्’ योजनम् (क् + स्वरः + ं / ख् + स्वरः + ः)
| योजनम् | अ | आ | इ | ई | उ | ऊ | ऋ | ॠ | ऌ | ए | ऐ | ओ | औ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क् + स्वरः + ं | कं | कां | किं | कीं | कुं | कूं | कृं | कॄं | कॢं | कें | कैं | कों | कौं |
| ख् + स्वरः + ः | खः | खाः | खिः | खीः | खुः | खूः | खृः | खॄः | खॢः | खेः | खैः | खोः | खौः |
ध्यातव्यम्: ‘र्’ इत्यस्य ऋ-ॠ-ऌ-युक्तानि रूपाणि — रृ, रॄ, रॢ — पुस्तके प्रकारान्तरेण अपि लिख्यन्ते (पृष्ठ ९ की टिप्पणी)। तथा ‘ऌ’-वर्णस्य दीर्घः न भवति, सन्ध्यक्षराणां (ए ऐ ओ औ) ह्रस्वः न भवति।
वयं शब्दार्थान् जानीमः — मातृभाषया अर्थं लिखन्तु।
नीचे अन्तिम स्तम्भ (मातृभाषा = हिन्दी) भर दिया गया है।
शब्दार्थ-तालिका
| शब्दः | संस्कृत-अर्थः | English | मातृभाषया अर्थः (हिन्दी) |
|---|---|---|---|
| पित्राज्ञा | पितुः आदेशः | Father’s order | पिता का आदेश |
| लाकृतिः | ‘ऌ’-वर्णस्य आकृतिः | Shape of letter ‘ऌ’ | ‘ऌ’ वर्ण का रूप |
| एकैकः | प्रत्येकम् | Each one | हर एक |
| अजः | छागः | Goat | बकरा |
| वधूः | परिणीता | Married woman | विवाहिता नारी |
| मातॄणम् | मातुः ऋणम् | Indebtedness to Mother | माता का ऋण |
| कॢप्तम् | कल्पितम् | Supposed | माना हुआ |
| ऌकारः | ‘ऌ’-वर्णः | Letter ‘ऌ’ | ‘ऌ’ वर्ण |
| ओम् | प्रणवः | Name of Brahma | एकाक्षर ब्रह्म |
| औषधम् | भेषजम् | Medicine | औषध / दवा |
| जिह्वा | रसना | Tongue | जीभ |
| नामधेयम् | नाम | Name | नाम |
| भगिनी | स्वसा | Sister | बहन |
| भ्राता | अनुजः / अग्रजः | Brother | भाई |
| पितामही | पितुः माता | Paternal Grandmother | दादी |
| पितामहः | पितुः पिता | Paternal Grandfather | दादा |
| मातामही | मातुः माता | Maternal Grandmother | नानी |
| मातामहः | मातुः पिता | Maternal Grandfather | नाना |
| सुश्रीः | कुमारी | Miss | कुमारी |
| श्रीः | लक्ष्मीः, सुन्दरता | Goddess of prosperity | लक्ष्मी, सौन्दर्य |
| उपाधिः | विशिष्टता | Title | विशेषता / उपाधि |
| प्रथम-नाम | मुख्यं नाम | First Name | पहला नाम |
| मध्य-नाम | मध्यवर्त्ति नाम | Middle Name | बीच का नाम |
| अन्त्य-नाम | अन्तिम-नाम | Last Name | अन्तिम नाम |
| कुल-नाम | कुलस्य गोत्रस्य वंशस्य वा नाम | Family Name | कुल, गोत्र या वंश का नाम |
वर्णानाम् उच्चारणं कथं भवति? उच्चारण-स्थानानि कति सन्ति?
उत्तरम्
ध्वनेः वा वर्णस्य उच्चारणे मुखस्य (Mouth) मुख्या भूमिका भवति। कदाचित् मुखेन सह नासिकायाः (Nose) अपि उपयोगः भवति — यथा ‘अं’, ‘न’, ‘म’, ‘अँ’ इत्यादिषु नासिक्य-वर्णेषु। मुखं नासिका च — उभे अपि आस्ये (Head) भवतः।
- मुखे — पञ्चसु स्थानेषु (कण्ठः, तालु, मूर्धा, दन्तः, ओष्ठः)
- नासिकायाम् — एकस्मिन् स्थाने
- अतः सामान्यतः षट् स्थानानि भवन्ति।
एकस्थानीय-वर्णानां सूची
| स्थानम् | वर्णाः | पाणिनीय-शिक्षा-सूत्रम् |
|---|---|---|
| १. कण्ठः | अ आ · क ख ग घ ङ · ह · विसर्गः (अः) | अकुहविसर्जनीयाः कण्ठ्याः |
| २. तालु | इ ई · च छ ज झ ञ · य · श | इचुयशास्तालव्याः |
| ३. मूर्धा | ऋ ॠ · ट ठ ड ढ ण · र · ष | ऋटुरषा मूर्धन्याः |
| ४. दन्तः | ऌ · त थ द ध न · ल · स | ऌतुलसा दन्त्याः |
| ५. ओष्ठः | उ ऊ · प फ ब भ म | उपूपध्मानीया ओष्ठ्याः |
| ६. नासिका | अनुस्वारः (अं) | अनुस्वारयमा नासिक्याः |
द्विस्थानीय-वर्णाः
| वर्णाः | स्थाने द्वे | सूत्रम् |
|---|---|---|
| ए, ऐ | कण्ठः + तालु | ए ऐ कण्ठतालव्यौ |
| ओ, औ | कण्ठः + ओष्ठः | ओ औ कण्ठोष्ठ्यौ |
| व | दन्तः + ओष्ठः | वकारो दन्त्योष्ठ्यः |
| ङ, ञ, ण, न, म | स्व-स्थानम् + नासिका | ङञणनमाः स्वस्थान-नासिकास्थानाः |
वयम् अभ्यासं कुर्मः (Exercise)
प्रश्न १ – ६ · पृष्ठ ११–१४
कस्य चित्रम्? वदन्तु लिखन्तु च —
यह किसका चित्र है? बोलिए और लिखिए।
उत्तराणि
सङ्केतः: चित्रस्य नाम संस्कृते लिखन्तु — प्रथमं वर्णं ध्यानेन पश्यन्तु। जैसे ‘नासिका’ का पहला वर्ण ‘न’ है, ‘डमरुः’ का ‘ड’ है।
चित्रं पश्यन्तु। पट्टिकातः समुचितान् वर्ण-समूहान् चित्वा रिक्तस्थानानि पूरयन्तु —
चित्र देखिए। पट्टिका (शब्द-पेटी) से उचित वर्ण-समूह चुनकर रिक्त स्थान भरिए।
उत्तराणि
व्याख्या: ये सभी संयुक्त-वर्ण हैं — दो या अधिक व्यंजन मिलकर बनते हैं। जैसे न् + द् + र = न्द्र, क् + ष = क्ष, ङ् + ख = ङ्ख। अनुनासिक व्यंजन (ङ, ञ, ण, न, म) सदा अपने ही वर्ग के व्यंजन से जुड़ता है — इसीलिए ‘क’ के पहले ‘ङ्’, ‘च’ के पहले ‘ञ्’, ‘ड’ के पहले ‘ण्’, ‘त’ के पहले ‘न्’ आया।
प्रथम-वर्णेन पदं वदन्तु लिखन्तु च —
दिए गए पहले वर्ण से आरम्भ होने वाले दो-दो संस्कृत शब्द बोलिए और लिखिए।
उत्तराणि (नमूना-उत्तर)
| वर्णः | पदम् १ | पदम् २ | अर्थः (हिन्दी) |
|---|---|---|---|
| अ | अग्निः | अस्त्रम् | आग · हथियार (पुस्तके दत्तम्) |
| क | कमलम् | कपोतः | कमल · कबूतर |
| च | चन्द्रः | चटकः | चन्द्रमा · गौरैया |
| प | पुस्तकम् | पर्वतः | पुस्तक · पहाड़ |
| र | रथः | रविः | रथ · सूर्य |
| इ | इन्द्रः | इक्षुः | इन्द्र · गन्ना |
| न | नदी | नौका | नदी · नाव (पुस्तके दत्तम्) |
| म | मयूरः | मृगः | मोर · हिरन |
| ह | हस्तः | हरिणः | हाथ · हिरन |
| त | तरुः | तारा | पेड़ · तारा |
| व | वृक्षः | वनम् | पेड़ · जंगल |
| श | शङ्खः | शशकः | शंख · खरगोश |
ध्यातव्यम्: इसके अतिरिक्त और भी शब्द सही हैं — जैसे क → कुक्कुटः, कन्दुकम्; च → चषकः, चमसः; प → पत्रम्, पङ्कजम्; व → वायसः, वधूः। बस शब्द का पहला वर्ण वही होना चाहिए।
स्व-परिवारस्य सदस्यानां पूर्ण-नामानि लिखन्तु —
अपने परिवार के सदस्यों के पूरे नाम लिखिए। यह प्रश्न स्वयं करने योग्य है — नीचे नमूना दिया गया है, उसी प्रकार अपने परिवार के नाम भरिए।
नमूना-उत्तरम् (Sample)
| सम्बन्धः | उपाधिः | प्रथम-नाम | मध्य-नाम | अन्त्य-नाम / कुल-नाम |
|---|---|---|---|---|
| माता | श्रीमती | सुनीता | — | शर्मा |
| पिता | श्रीमान् | राजेशः | कुमारः | शर्मा |
| भगिनी | सुश्रीः | अनन्या | — | शर्मा |
| भ्राता | श्रीमान् | अनिकेतः | — | शर्मा |
| पितामही | श्रीमती | कमला | — | शर्मा |
| पितामहः | श्रीमान् | रामप्रसादः | — | शर्मा |
| मातामही | श्रीमती | सरोजा | — | मिश्रा |
| मातामहः | श्रीमान् | गोपालः | — | मिश्रा |
पुस्तक की शर्तें:
* मध्य-नाम हो तभी लिखिए, न हो तो स्थान खाली छोड़ दीजिए।
** केवल प्रथम अक्षर (Initial) मत लिखिए — पूरा नाम लिखिए।
कक्षायाः शिक्षिकाणां शिक्षकाणां च पूर्ण-नामानि लिखन्तु —
अपनी कक्षा के अध्यापक-अध्यापिकाओं के पूरे नाम लिखिए। यह भी स्वयं करने योग्य प्रश्न है।
नमूना-उत्तरम् (Sample)
| उपाधिः | प्रथम-नाम | मध्यम-नाम | अन्त्य-नाम |
|---|---|---|---|
| श्रीमती | मीना | — | वर्मा |
| श्रीमान् | सुरेशः | चन्द्रः | तिवारी |
| सुश्रीः | प्रीति | — | सिंह |
| श्रीमान् | विनोदः | कुमारः | यादव |
| श्रीमती | रेखा | — | जोशी |
मित्राणां पूर्ण-नामानि लिखन्तु —
अपने मित्रों के पूरे नाम लिखिए। यह भी स्वयं करने योग्य प्रश्न है।
नमूना-उत्तरम् (Sample)
| प्रथम-नाम | मध्यम-नाम | अन्त्य-नाम |
|---|---|---|
| आदित्यः | प्रकाशः | गुप्ता |
| रिया | — | अग्रवाल |
| कार्तिकः | — | नायर |
| साक्षी | देवी | पाण्डेय |
| हर्षः | — | देशपाण्डे |
परियोजनाकार्यम्
पृष्ठ २३–२४ · (क) (ख) (ग) (घ)
चित्राणि ध्यानेन पश्यन्तु — कुक्कुटः विरौति।
चित्रों को ध्यान से देखिए और इनकी विशेषता समझकर लिखिए।
उत्तरम् — मात्रा-भेदः (step-wise)
मुर्गे की बाँग में एक ही स्वर ‘उ’ पहले छोटा, फिर लम्बा, फिर और लम्बा खिंचता है। स्वर को बोलने में जितना समय लगता है उसे मात्रा कहते हैं।
- ह्रस्वः — उ · एक-मात्रः। पलक झपकने जितना समय।
$$t(\text{u}) = 1 \ \text{matra}$$
- दीर्घः — ऊ · द्वि-मात्रः। ह्रस्व से दुगुना समय।
$$t(\bar{\text{u}}) = 1 \times 2 = 2 \ \text{matra}$$
- प्लुतः — उ३ · त्रि-मात्रः। ह्रस्व से तिगुना समय। ‘३’ का अंक प्लुत का चिह्न है।
$$t(\text{u}3) = 1 \times 3 = 3 \ \text{matra}$$
- व्यञ्जनम् — अर्ध-मात्रः।
$$t(\text{vyanjana}) = \tfrac{1}{2} \ \text{matra}$$
| ध्वनिः | मात्रा | नाम | हिन्दी |
|---|---|---|---|
| उ | एक-मात्रः | ह्रस्वः | छोटा स्वर |
| उ | एक-मात्रः | ह्रस्वः | छोटा स्वर |
| ऊ | द्वि-मात्रः | दीर्घः | लम्बा स्वर |
| उ३ | त्रि-मात्रः | प्लुतः | बहुत लम्बा (खिंचा हुआ) स्वर |
चाषस्तु वदते मात्रां द्विमात्रं त्वेव वायसः।
शिखी रौति त्रिमात्रं तु नकुलस्त्वर्धमात्रकम्॥
यह पाणिनीय-शिक्षा का श्लोक है, जो मात्रा-भेद को पशु-पक्षियों की आवाज़ से समझाता है।
उत्तरम् — श्लोकस्य अर्थः
| जीवः | प्रकारः | ध्वनिः | तुलना |
|---|---|---|---|
| १. चाषः (नीलकण्ठः) | पक्षी | एक-मात्रं ध्वनिं करोति | ह्रस्व-स्वरः इव |
| २. वायसः (काकः) | पक्षी | द्वि-मात्रं ध्वनिं करोति | दीर्घ-स्वरः इव |
| ३. शिखी (मयूरः) | पक्षी | त्रि-मात्रं ध्वनिं करोति | प्लुत-स्वरः इव |
| ४. नकुलः | पशुः | अर्ध-मात्रं ध्वनिं करोति | व्यञ्जनम् इव |
नामान्त्याक्षरी क्रीडा
कक्षा को दो दलों में बाँटकर खेला जाने वाला नाम-अन्त्याक्षरी खेल।
उत्तरम् — क्रीडायाः नियमाः
- शिक्षकः/शिक्षिका छात्रान् द्वयोः समूहयोः विभजति — प्रथम-गणः, द्वितीय-गणः।
- प्रथम-गणस्य छात्रः/छात्रा उत्थाय स्व-नामधेयं वदति।
- द्वितीय-गणस्य छात्रः तस्य नाम्नः अन्तिमं व्यञ्जन-वर्णं (विसर्गं विहाय) गृहीत्वा तेन वर्णेन आरभ्यमाणम् अन्यत् नाम वदति।
- पुनः प्रथम-गणस्य छात्रः उस नाम के अन्तिम व्यंजन से नया नाम बोलता है। एवं क्रमशः क्रीडा प्रचलति।
उदाहरणम् (नमूना-क्रीडा)
| क्रमः | गणः | उक्तं नाम | अन्तिमः व्यञ्जन-वर्णः | अग्रिमं नाम |
|---|---|---|---|---|
| १ | प्रथमः | रमेशः | श् (विसर्गं विहाय) | → शिवानी |
| २ | द्वितीयः | शिवानी | न् | → नरेशः |
| ३ | प्रथमः | नरेशः | श् | → शारदा |
| ४ | द्वितीयः | शारदा | द् | → दीपकः |
| ५ | प्रथमः | दीपकः | क् | → कमला |
ध्यातव्यम्: विसर्ग (ः) को नहीं गिनते। ‘रमेशः’ में विसर्ग हटाने पर अन्तिम व्यंजन ‘श्’ बचता है, इसलिए अगला नाम ‘श’ से आरम्भ होगा।
उच्चारण-स्थानानां पाणिनीय-शिक्षा-सूत्राणि
उत्तरम् — सूत्राणि तेषाम् अर्थश्च
| सूत्रम् | वर्णाः | उच्चारण-स्थानम् |
|---|---|---|
| अकुहविसर्जनीयाः कण्ठ्याः | अ आ · क ख ग घ ङ · ह · विसर्गः (अः) | कण्ठ-स्थाने भवति |
| इचुयशास् तालव्याः | इ ई · च छ ज झ ञ · य · श | तालु-स्थाने भवति |
| ऋटुरषा मूर्धन्याः | ऋ ॠ · ट ठ ड ढ ण · र · ष | मूर्ध-स्थाने भवति |
| ऌतुलसा दन्त्याः | ऌ · त थ द ध न · ल · स | दन्त-स्थाने भवति |
| उपूपध्मानीया ओष्ठ्याः | उ ऊ · प फ ब भ म · [उपध्मानीयः] | ओष्ठ-स्थाने भवति |
| ङञणनमाः स्वस्थान-नासिकास्थानाः | ङ · ञ · ण · न · म | अपने स्थान के साथ नासिका-स्थान में भी |
| ए ऐ कण्ठतालव्यौ | ए · ऐ | कण्ठ + तालु — दोनों में |
| ओ औ कण्ठोष्ठ्यौ | ओ · औ | कण्ठ + ओष्ठ — दोनों में |
| वकारो दन्त्योष्ठ्यः | व | दन्त + ओष्ठ — दोनों में |
| अनुस्वारयमा नासिक्याः | अनुस्वारः (अं) · [यमाः] | नासिका-स्थाने भवति |
टिप्पणी: ‘उपध्मानीयः’ तथा ‘यमाः’ विशिष्ट अतिरिक्त अयोगवाह-वर्ण हैं। सामान्य संस्कृत-भाषा में इनका प्रयोग प्रायः नहीं दिखता।
