अध्याय 12 – हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान (Chapter 12 – Hind Mahasagar Mein Chhota-sa Hindustan) | Class 6 Hindi (Malhar) | NCERT Solutions

हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान – संपूर्ण हल | कक्षा 5 मल्हार
कक्षा 5 · मल्हार · पाठ 12

हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान

लेखक: रामधारी सिंह ‘दिनकर’ (1908–1974) · संपूर्ण प्रश्न-उत्तर हल

नैरोबी के जंगलों में सिंहों से भेंट से लेकर मॉरिशस द्वीप में बसे “छोटे हिंदुस्तान” तक — इस रोचक यात्रा-वृत्तांत के सभी अभ्यासों के विस्तृत उत्तर यहाँ दिए गए हैं।

मॉरिशस द्वीप का समुद्री तट
रामधारी सिंह दिनकर

✒️ लेखक परिचय

राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की रचनाओं में भारत, भारतीय संस्कृति, वीरता, उत्साह और देशप्रेम का भाव प्रमुखता से मिलता है। उन्होंने बच्चों के लिए भी ‘मिर्च का मज़ा’, ‘पढ़क्कू की सूझ’ और ‘सूरज का ब्याह’ जैसी पुस्तकें लिखीं।

📜 पाठ का सार

लेखक अफ्रीका के जंगलों में सिंहों को देखने के बाद मॉरिशस पहुँचते हैं, जहाँ उन्हें अहसास होता है कि भारतीय मूल के लोगों ने अपनी संस्कृति, भाषा और आस्था को जीवित रखते हुए इस द्वीप को एक “छोटा-सा हिंदुस्तान” बना दिया है।

पाठ से पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नों के उत्तर

मेरी समझ से

क-1 हिरण समूह में क्यों खड़े थे?
भागने पर उन्हें सिंह के आक्रमण का डर था
वे भाग चुके हिरणों के लौटने की प्रतीक्षा में थे
वे बीच खड़े असावधान जिराफ की रक्षा कर रहे थे
सिंह उनसे उदासीन थे अतः उन्हें कोई खतरा नहीं था
उत्तर

पाठ के अनुसार, सिंह झुंड का शिकार नहीं करते, बल्कि उस जानवर का शिकार करते हैं जो भागते हुए झुंड से पिछड़ जाता है। हिरनों की सहज प्रवृत्ति उन्हें यह समझा रही थी कि अकेले भागने में ही सबसे ज़्यादा खतरा है — इसलिए वे भागने की बजाय एक साथ समूह में खड़े रहकर खुद को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे थे।

क-2 मॉरिशस छोटे पैमाने पर भारतवर्ष ही है। कैसे?
गन्ने की खेती अधिकतर भारतीयों द्वारा की जाती है
अधिकतर जनसंख्या भारत से जाने वालों की है
सभी भारतवासी परी तालाब पर एकत्रित होते हैं
भारत की बहुत-सी विशेषताएँ वहाँ दिखाई देती हैं
उत्तर

यह सबसे संपूर्ण उत्तर है, क्योंकि मॉरिशस की भारतीयता किसी एक बात तक सीमित नहीं है — वहाँ भारतीय मूल की बड़ी जनसंख्या, भारतीय नामों वाली गलियाँ (कलकत्ता, मद्रास, काशी, बनारस, गोकुल), हिंदू मंदिर व शिवालय, रामायण-पाठ, भोजपुरी भाषा और भारतीय पर्व-त्योहार — यानी भारत की अनेक विशेषताएँ एक साथ वहाँ जीवंत रूप में मौजूद हैं।

अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

पाठ को ध्यान से पढ़ने पर ये उत्तर सीधे लेखक द्वारा दिए गए तर्कों और वर्णन से मेल खाते हैं। बाकी विकल्प अधूरे या भ्रामक हैं — जैसे “सिंह उनसे उदासीन थे” कथन पाठ की उस पंक्ति के विपरीत है जो बताती है कि सिंह हिरनों की नज़र रख रहे थे। सही उत्तर चुनते समय पाठ की मूल पंक्तियों से जाँच करना ज़रूरी है।

पंक्तियों पर चर्चा

“भारत में बैठे-बैठे हम यह नहीं समझ पाते कि भारतीय संस्कृति कितनी प्राणवती और चिरायु है। किंतु, मॉरिशस जाकर हम अपनी संस्कृति की प्राणवत्ता का ज्ञान आसानी से प्राप्त कर लेते हैं।”
भावार्थ

भारत में रहते हुए हमारे लिए अपनी संस्कृति इतनी सामान्य और रोज़मर्रा की बात होती है कि हम उसकी असली शक्ति, जीवंतता (प्राणवती) और स्थायित्व (चिरायु) को महसूस ही नहीं कर पाते। लेकिन जब हम मॉरिशस जैसे दूर देश में जाकर देखते हैं कि सैकड़ों साल और हज़ारों मील की दूरी के बावजूद भारतीय संस्कृति वहाँ जीवित और फल-फूल रही है, तभी हमें इस बात का सच्चा एहसास होता है कि हमारी संस्कृति कितनी मज़बूत और अमर है।

सोच-विचार के लिए

“नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है।” — नेशनल पार्क और चिड़ियाघर में क्या अंतर है?
उत्तर

चिड़ियाघर में जानवरों को पिंजरों या छोटे बाड़ों में मानव-निर्मित सीमित स्थान में कैद करके रखा जाता है। जबकि नेशनल पार्क एक विशाल प्राकृतिक जंगल होता है, जहाँ जानवर पूरी तरह खुले, स्वतंत्र और प्राकृतिक वातावरण में स्वच्छंद विचरण करते हैं, और पर्यटक सड़कों के ज़रिए गाड़ी में घूमकर उन्हें उनके असली आवास में देखते हैं।

“हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए।” — वे कौन थे और उन्होंने ऐसा क्यों समझ लिया था?
उत्तर

यहाँ ‘वे’ सिंह थे। सिंहों ने मोटरों में बैठे पर्यटकों की ओर एक बार भी नज़र उठाकर नहीं देखा, मानो वे इतने तुच्छ हों कि उनकी नज़र में आने लायक भी न हों। सिंह अपने स्वाभाविक निडर और निश्चिंत स्वभाव में इतने मग्न थे कि उन्होंने मनुष्यों को कोई महत्व ही नहीं दिया — इसीलिए लेखक को यह महसूस हुआ कि उन्हें पेड़-पौधे और खरपतवार जैसी निर्जीव चीज़ों से भी कम आँका गया।

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“मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं।” — पाठ में इस कथन के समर्थन में कौन-सा तर्क दिया गया है?
उत्तर

पाठ के अनुसार, मॉरिशस में ऊख (गन्ने) की खेती और चीनी उद्योग — जो वहाँ का प्रमुख/एकमात्र उद्योग है — की सफलता पूरी तरह भारतीय वंश के लोगों के परिश्रम पर टिकी है। यदि भारतीय लोग वहाँ न गए होते, तो न ऊख की खेती संभव होती और न ही चीनी के कारखाने बढ़ पाते। यही तर्क सिद्ध करता है कि मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं।

“उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।” — भारत से गए लोगों ने मॉरिशस को हिंदुस्तान जैसा कैसे बना दिया?
उत्तर

भारतीयों ने अपनी संस्कृति, धर्म और भाषा को मॉरिशस में जीवंत बनाए रखा — हर गाँव में शिवालय बनवाए, तुलसीकृत रामायण का पाठ व गायन किया, गलियों-मोहल्लों के नाम कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद, बम्बई, काशी, बनारस, गोकुल जैसे भारतीय नामों पर रखे, भोजपुरी भाषा बोली, भारतीय पर्व-त्योहार (जैसे शिवरात्रि) पूरी श्रद्धा से मनाए, और अत्याचार व प्रलोभनों के बावजूद अपने धर्म पर डटे रहे। इन्हीं सब कारणों से यह द्वीप “छोटा-सा हिंदुस्तान” बन गया।

मॉरिशस में एक रंग-बिरंगा हिंदू मंदिर
मॉरिशस में भारतीय शैली का एक रंग-बिरंगा हिंदू मंदिर

मिलकर करें मिलान

स्तंभ 1 के शब्दों का स्तंभ 2 के सही वाक्यों से मिलान कीजिए —

अफ़्रीकायह एशिया के बाद दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप है।
नैरोबीयह अफ़्रीका महाद्वीप के एक देश ‘केन्या’ की राजधानी है।
रक्तचापयह रक्त-वाहिनियों (नसों) में बहते रक्त द्वारा उनकी दीवारों पर डाले गए दबाव का नाम है।
बी.ओ.ए.सी.यह ‘ब्रिटिश ओवरसीज एयरवेज कॉरपोरेशन’ नाम का छोटा रूप है — एक पुरानी विदेशी विमान कंपनी।
भूमध्य रेखायह पृथ्वी के चारों ओर एक काल्पनिक वृत्त है जो पृथ्वी को उत्तरी व दक्षिणी भाग में बाँटता है।
देशान्तर रेखाये ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ हैं, जो उत्तरी ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से मिलाती हैं।
तुलसीदासयह श्रीराम के जीवन पर आधारित अमर ग्रंथ ‘रामचरितमानस’ लिखने वाले कवि का नाम है।
क्रेयोलयह दो भाषाओं के मिलने से बनी नई भाषा का नाम है।
काँवरयह बाँस का एक मज़बूत डंडा होता है, जिसके दोनों सिरों पर बँधी टोकरियों में यात्री गंगाजल आदि भरकर ले जाते हैं।

यात्रा-वृत्तांत की रचना

पाठ को दोबारा पढ़कर इसकी रचना (लिखने की शैली) की विशेषताएँ खोजिए।

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उत्तर — यात्रा-वृत्तांत की विशेषताएँ
  • प्रत्यक्षदर्शी वर्णन: लेखक अपनी आँखों से देखी हर बात को इस तरह बताता है कि पाठक को लगे मानो वे स्वयं वहाँ मौजूद हैं।
  • तिथि व समय का उल्लेख: लेखक स्पष्ट बताता है कि वह किस तारीख़ और किस समय एक जगह से दूसरी जगह पहुँचा (जैसे “15 जुलाई”, “चार बजे शाम”, “रात के दस बजे”)।
  • तुलना व उपमाएँ: जैसे मॉरिशस की तुलना “मोती” और “सितारे” से करना, जिससे भाषा अधिक जीवंत और सुंदर बनती है।
  • दोहराव द्वारा ज़ोर देना: “मॉरिशस वह देश है…” वाक्य को बार-बार दोहराकर लेखक विशेष तथ्यों पर पाठक का ध्यान केंद्रित करता है।
  • व्यक्तिगत भाव व अनुभूति: लेखक अपनी भावनाओं (जैसे रक्तचाप बढ़ने का एहसास, गर्व की अनुभूति) को भी खुलकर बाँटता है।

अनुमान या कल्पना से

मॉरिशस में लोगों ने गली-मोहल्लों के नाम काशी, बनारस, गोकुल जैसे क्यों रखे होंगे?
उत्तर

भारत से गए प्रवासी लोग अपनी मातृभूमि और उसकी पवित्र, प्रिय जगहों को बहुत याद करते थे। नए देश में बसने के बाद भी अपनी जड़ों, संस्कृति और श्रद्धा को ज़िंदा रखने के लिए, तथा अपनी आने वाली पीढ़ियों को भारत से जोड़े रखने के लिए, उन्होंने अपने मोहल्लों के नाम इन पवित्र भारतीय स्थानों पर रखे।

पर्यटकों की लगातार भीड़ का जंगली जानवरों पर क्या प्रभाव पड़ता होगा?
उत्तर

हाँ, इसका स्पष्ट प्रभाव पड़ता है। पाठ में बताया गया है कि बंदर अब पर्यटकों से फल-बिस्कुट पाने की उम्मीद में मोटरों को घेर लेते हैं — यानी वे अपने प्राकृतिक भोजन-तलाश व्यवहार से दूर होते जा रहे हैं। वहीं सिंह इंसानों/मोटरों की उपस्थिति के इतने अभ्यस्त हो गए हैं कि वे उनकी ओर देखते तक नहीं। इस तरह लगातार मानवीय हस्तक्षेप जंगली जानवरों के स्वाभाविक व्यवहार और सतर्कता को बदल देता है।

सिंहों के आस-पास होने पर भी जिराफ बेवकूफ की तरह क्यों खड़ा रहा होगा?
उत्तर

पाठ के अनुसार, सिंह शिकार सूर्यास्त के बाद करते हैं। चूँकि यह घटना दिन के समय की है, इसलिए जिराफ को तुरंत खतरे का एहसास नहीं हुआ होगा और वह निश्चिंत होकर वहीं खड़ा रहा — मानो उसे पता ही न हो कि खतरा कितना नज़दीक है।

उस झील का नाम ‘परी-तालाब’ क्यों पड़ा होगा?
उत्तर

हिंदुओं ने अपनी लोक-कथाओं और आस्था के अनुसार इस सुंदर व रहस्यमयी झील को परियों से जोड़ दिया होगा — शायद किसी पुरानी लोककथा या झील की असाधारण सुंदरता के कारण लोग यह मानने लगे कि यहाँ परियाँ निवास करती हैं, जिस कारण इसका नाम ‘परी-तालाब’ पड़ गया।

‘परी-तालाब’ का नाम बदलकर ‘गंगा-तालाब’ क्यों रखा गया होगा?
उत्तर

भारतीय मूल के हिंदुओं के लिए गंगा नदी अत्यंत पवित्र और आस्था का प्रतीक है। चूँकि यह झील उनके लिए एक पवित्र तीर्थ स्थान बन चुकी थी (जहाँ शिवरात्रि पर जल भरकर शिवजी को चढ़ाया जाता है), इसलिए उन्होंने इसे अपनी मातृभूमि की पवित्र गंगा से जोड़ते हुए ‘गंगा-तालाब’ नाम दे दिया — ताकि उनकी आस्था और भारतीय जड़ों से यह जुड़ाव और गहरा हो सके।

शब्दों की बात — संज्ञा के स्थान पर

नीचे दिए वाक्यों में सर्वनाम शब्द पहचानिए —
उत्तर

1. “हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, लेकिन गांधी टोपी उस दिन उन्हें भी पहननी पड़ती है।” — सर्वनाम: उन्हें (बच्चों के लिए)

2. “भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने उन्हें भेज दिया था, उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।” — सर्वनाम: वे, उन्हें, उन्होंने (भारतीयों के लिए)

दोनों वाक्यों को सर्वनाम की जगह संज्ञा शब्द लगाकर लिखिए।
उत्तर

1. “हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, लेकिन गांधी टोपी उस दिन बच्चों को भी पहननी पड़ती है।”

2. “भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। भारतीय अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने भारतीयों को भेज दिया था, उस द्वीप को भारतीयों ने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।”

पहचान पाठ के आधार पर

पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर केन्या और मॉरिशस को पहचानिए।

उत्तर — पहचान के सुराग

केन्या: यह अफ़्रीका महाद्वीप में स्थित एक देश है, जिसकी राजधानी नैरोबी है। यह भारत से पश्चिम की ओर, अफ़्रीका के पूर्वी तट पर स्थित है।

मॉरिशस: यह हिंद महासागर में स्थित एक छोटा द्वीप है, जो भूमध्य रेखा से लगभग 20° दक्षिण और देशांतर रेखा 60° के पास (उससे थोड़ा पश्चिम की ओर) बसा है — यानी अफ़्रीका के पूर्व में और भारत के दक्षिण-पश्चिम में हिंद महासागर के भीतर स्थित है।

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अफ़्रीका नैरोबी (केन्या) भारत मॉरिशस हिंद महासागर क्षेत्र — सांकेतिक रेखाचित्र

यह चित्र भौगोलिक दृष्टि से सटीक मानचित्र नहीं, बल्कि पाठ के आधार पर तीनों स्थानों की सापेक्ष स्थिति समझाने वाला एक सांकेतिक रेखाचित्र है। कक्षा में असली एटलस/ग्लोब पर इन्हें ज़रूर खोजिए।

पाठ से आगे रचनात्मक व विस्तार गतिविधियाँ

आपकी बात

क्या आपने कभी ऐसा कुछ देखा/सुना/पढ़ा है जिसे आप कभी नहीं भूल सकेंगे?
नमूना उत्तर

हाँ, जब मैंने पहली बार समुद्र किनारे सूर्योदय देखा था, तो वह दृश्य आज भी मेरी आँखों में बसा है — सूरज की सुनहरी किरणें पानी पर चमक रही थीं और चारों तरफ़ सन्नाटा था। ऐसा लगा जैसे प्रकृति खुद बोल रही हो। (विद्यार्थी अपने वास्तविक अनुभव के आधार पर उत्तर लिखें।)

आपने अब तक किन-किन पशु-पक्षियों से ‘मुलाकात’ की है? वह कहाँ हुई थी?
नमूना उत्तर

मैंने चिड़ियाघर में बाघ और हाथी से ‘मुलाकात’ की थी, और एक बार गाँव में दादी के घर पर मोर को नाचते हुए बहुत पास से देखा था। ये दोनों अनुभव मेरे लिए बहुत रोमांचक और यादगार रहे।

आपको किन-किन बातों पर गर्व होता है?
नमूना उत्तर

मुझे अपने देश भारत की विविधता और संस्कृति पर गर्व होता है। मुझे अपने परिवार पर भी गर्व होता है, जिन्होंने मुझे अच्छे संस्कार दिए। साथ ही, मुझे अपने स्कूल की टीम द्वारा जीती गई खेल-प्रतियोगिता पर भी बहुत गर्व है।

कक्षा और घर की भाषाएँ

आप, आपके मित्र और परिजन कौन-कौन सी भाषाएँ बोल-समझ लेते हैं?

नमूना उत्तर
क्रममैंमेरे मित्रमेरे परिजन
1हिंदीहिंदीहिंदी
2अंग्रेज़ीअंग्रेज़ीपंजाबी
3थोड़ी मराठीतमिलअंग्रेज़ी
कुल संख्या2–322–3

अपने मित्रों और परिजनों से बातचीत करके अपनी खुद की तालिका बनाइए — भारत की बहुभाषिकता को समझने का यह एक सुंदर तरीका है।

प्रशंसा या सराहना विभिन्न प्रकार से

जैसे ‘दिनकर’ ने मॉरिशस की सराहना मोती और सितारे से तुलना करके की — वैसे ही हर बार अलग तरीके से सराहना कीजिए।

नमूना उत्तर
नामप्रशंसा/सराहना का वाक्य
स्वयंमैंमैं तो जैसे निरंतर बहने वाली एक जीवंत धारा हूँ, जो कभी थकती नहीं।
परिजनमाँमेरी माँ घर की धुरी है, जिसके इर्द-गिर्द पूरा परिवार सुरक्षित घूमता है।
शिक्षकशिक्षिका जीवे ज्ञान का ऐसा दीपक हैं जो खुद जलकर भी सबका अंधकार दूर करती हैं।
मित्रमेरा दोस्तवह मेरे लिए किसी छाँव वाले पेड़ जैसा है, जो हर मुश्किल में साथ खड़ा रहता है।
पशुहमारा कुत्तावह वफ़ादारी की जीती-जागती मिसाल है।
स्थानहमारा गाँवयह किसी हरे-भरे स्वर्ग के टुकड़े जैसा शांत और सुंदर है।
सब्ज़ीपालकयह छोटे कद की एक ऐसी नायिका है, जो शरीर को भीतर से ताकत देती है।
पेड़बरगदयह सैकड़ों सालों का जीता-जागता इतिहास अपनी शाखाओं में समेटे खड़ा है।

चित्रात्मक सूचना (इंफोग्राफिक्स)

मॉरिशस में भारतीयों के इतिहास पर चित्रात्मक सूचना
पाठ्यपुस्तक में दी गई चित्रात्मक सूचना — “जब मॉरिशस में गूँजा जय हिंद”
इस ‘चित्रात्मक सूचना’ के आधार पर मॉरिशस के बारे में एक अनुच्छेद लिखिए।
नमूना उत्तर

साल 1834 में 2 नवंबर को ‘एटलस’ नाम का जहाज़ भारतीय मज़दूरों को लेकर मॉरिशस पहुँचा था, जिसकी याद में वहाँ हर साल यह दिन ‘अप्रवासी दिवस’ (इंडियन अराइवल डे) के रूप में मनाया जाता है। ब्रिटिश शासकों ने गन्ने के खेतों में काम करने के लिए भारतीय मज़दूरों को मॉरिशस भेजा था, जिनमें से अधिकतर बिहार के थे, हालाँकि तमिल, तेलुगु और मराठी भाषी लोगों की संख्या भी काफ़ी थी। आज मॉरिशस में भारतीय मूल के लोगों की आबादी देश की कुल जनसंख्या के 68% से भी ज़्यादा है। यही कारण है कि मॉरिशस की संस्कृति में भोजपुरी गीतों और हिंदी फ़िल्मों का खास योगदान है। मॉरिशस के पहले प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम भी भारतीय मूल के ही थे — यह दिखाता है कि भारतीय समुदाय ने वहाँ की राजनीति, संस्कृति और अर्थव्यवस्था में कितनी गहरी जड़ें जमाई हैं।

अपनी पसंद के किसी विषय पर एक चित्रात्मक सूचना बनाइए।
मार्गदर्शन

यह एक रचनात्मक गतिविधि है। अपने विद्यालय, किसी विशेष दिवस, या अपने जीवन की किसी खास घटना को विषय चुनकर एक कागज़ पर मुख्य शीर्षक लिखें, फिर 3–5 छोटे-छोटे तथ्य या आँकड़े चित्रों/चिह्नों के साथ सजाकर लिखें — जैसे कि इस पाठ की चित्रात्मक सूचना में किया गया है। इसे रंगों, चित्रों और बहुत कम शब्दों में आकर्षक बनाना ही इस गतिविधि की जान है। यह काम कंप्यूटर, मोबाइल ऐप या हाथ से बनाकर, दोनों तरह से किया जा सकता है।

हस्ताक्षर

अपनी पहचान प्रकट करने के लिए अपने नाम को एक खास, स्थिर शैली में लिखना ही हस्ताक्षर कहलाता है।

मार्गदर्शन

यह एक व्यक्तिगत गतिविधि है। अपना पूरा नाम किसी कागज़ पर 5 बार एक जैसी शैली में लिखने का अभ्यास कीजिए। ध्यान रखें कि आपके हस्ताक्षर हर बार लगभग एक जैसे ही दिखें, क्योंकि भविष्य में विद्यालय, बैंक और अन्य आधिकारिक कार्यों में यही हस्ताक्षर आपकी पहचान का प्रमाण बनेंगे।

पत्र

‘दिनकर’ द्वारा चतुर्वेदी जी को लिखे पत्र को पढ़कर प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

उत्तर

(क) पत्र किसने लिखा है? — यह पत्र रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है।

(ख) पत्र किसे लिखा गया है? — यह पत्र चतुर्वेदी जी को लिखा गया है।

(ग) पत्र किस तिथि को लिखा गया है? — यह पत्र 8-7-67 (8 जुलाई, 1967) को लिखा गया है।

(घ) पत्र किस स्थान से लिखा गया है? — यह पत्र नई दिल्ली (सफ़दरजंग लेन) से लिखा गया है।

(ङ) पत्र पाने वाले के नाम से पहले किस शब्द का प्रयोग किया गया है? — “मान्यवर” शब्द का प्रयोग किया गया है (मान्यवर चतुर्वेदी जी)।

(च) पत्र-लेखक ने अपने नाम से पहले अपने लिए क्या शब्द लिखा है? — “आपका” शब्द लिखा है (आपका दिनकर)।

उलझन सुलझाओ

जहाज़ नैरोबी से 4 बजे उड़ा, 5 घंटे बाद 9 बजे मॉरिशस पहुँचना चाहिए था, पर पहुँचा लगभग 10 बजे। क्यों?
उत्तर

ऐसा समय-क्षेत्र (टाइम ज़ोन) के अंतर के कारण हुआ। पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, इसलिए जो स्थान अधिक पूर्व में होते हैं, वहाँ घड़ी का समय आगे (ज़्यादा) होता है। मॉरिशस, केन्या (नैरोबी) से पूर्व दिशा में स्थित है, इसलिए मॉरिशस का स्थानीय समय नैरोबी से लगभग 1 घंटा आगे है। इसी वजह से 5 घंटे की उड़ान के बावजूद, स्थानीय घड़ी के अनुसार जहाज़ रात के करीब 10 बजे पहुँचा हुआ दिखा, न कि ठीक 9 बजे।

दी गई घड़ियों के अनुसार समय संबंधी प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
भारत में घड़ी
भारत में घड़ी
मॉरिशस में घड़ी
मॉरिशस में घड़ी
उत्तर — समय का गणित

अपनी पुस्तक में दी गई घड़ियों की सुइयों को ध्यान से देखकर पहले भारत और मॉरिशस का सही समय नोट कीजिए। इसके बाद नीचे दिए तथ्य के आधार पर शेष प्रश्नों को हल कीजिए —

  • भारत का मानक समय (IST) ग्रीनविच समय से 5 घंटे 30 मिनट आगे है, जबकि मॉरिशस का समय ग्रीनविच से 4 घंटे आगे है।
  • इसलिए मॉरिशस और भारत के समय में सदैव 1 घंटा 30 मिनट का अंतर रहता है, और मॉरिशस भारत से पीछे (कम समय पर) रहता है।
  • चूँकि भारत, मॉरिशस से पूर्व की दिशा में पड़ता है, इसलिए सूर्योदय सदैव भारत में पहले होगा।
  • जिस समय भारत में दोपहर के ठीक 12 बजे होंगे, उस समय मॉरिशस की घड़ियाँ सुबह 10 बजकर 30 मिनट दिखा रही होंगी (12:00 − 1:30 = 10:30)।

इसी 1 घंटा 30 मिनट के नियम को लगाकर अपनी पुस्तक की घड़ियों में दिखाए गए ठीक समय के आधार पर बाकी उप-प्रश्नों (भारत में समय, मॉरिशस में समय, दोनों समय का अंतर) के सटीक उत्तर स्वयं जाँच व लिख सकते हैं।

आज की पहेली

कोडेड वाक्य: “येला मालथ येला घौलश।” — संकेत: क ← ख (अर्थात प्रत्येक व्यंजन को वर्णमाला में उससे ठीक पहले वाले व्यंजन से बदल दीजिए)

उत्तर — कूट-भाषा (cipher) कैसे खुलती है

इस पहेली में हर व्यंजन को हिंदी वर्णमाला के क्रम (क ख ग घ ङ च छ ज झ ञ ट ठ ड ढ ण त थ द ध न प फ ब भ म य र ल व श ष स ह) में ठीक अगले व्यंजन से बदल दिया गया है — यानी असली अक्षर पाने के लिए हमें कोडेड अक्षर से एक कदम पीछे जाना है (जैसा संकेत “क ← ख” में दिखाया गया है)। मात्राएँ (े, ा, ौ आदि) वैसी ही रहती हैं।

येला
→ मेरा
मालथ
→ भारत
येला
→ मेरा
घौलश
→ गौरव

“मेरा भारत, मेरा गौरव।”

यह वाक्य इस पूरे पाठ की भावना को भी बहुत खूबसूरती से दर्शाता है — जैसे मॉरिशस में बसे भारतीयों ने अपनी मातृभूमि पर गर्व करते हुए उसे “छोटा-सा हिंदुस्तान” बना डाला।

खोजबीन के लिए

पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से निम्न रचनाओं को पढ़ें, देखें व समझें —

सुझाई गई रचनाएँ
  • चाँद का कुर्ता
  • मिर्च का मज़ा
  • राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जीवनी
  • हिमालय के पर्वतीय प्रदेश की मनोरम यात्रा

विद्यार्थी अपने विद्यालय के पुस्तकालय या पाठ्यपुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड को स्कैन करके इन रोचक रचनाओं को पढ़ सकते हैं और दिनकर जी के जीवन के बारे में और अधिक जान सकते हैं।

@EDUGROWN ‘हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान’ पाठ (कक्षा 5, मल्हार) का यह हल केवल अध्ययन-सहायता हेतु तैयार किया गया है।

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