चेतक की वीरता
हल्दीघाटी के रणक्षेत्र में महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक किस तरह हवा से होड़ लगाता, शत्रुओं के सिरों पर उड़ता और बिना डरे तलवारों के बीच दौड़ता रहा — इसी दृश्य को कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने वीर रस में बाँधा है। नीचे पाठ के हर प्रश्न का सविस्तार उत्तर दिया गया है।
कविता एक नज़र में
यह कविता श्यामनारायण पाण्डेय की प्रसिद्ध काव्यकृति ‘हल्दीघाटी’ का एक अंश है, जो सन 1939 में प्रकाशित हुई थी। इसमें कवि हल्दीघाटी के युद्ध का वह क्षण दिखाते हैं जब महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक अपनी बिजली-सी गति, गजब की फुर्ती, स्वामिभक्ति और निडरता से पूरी शत्रु-सेना को स्तब्ध कर देता है। कवि ने चेतक की तुलना कभी हवा से, कभी उमड़ती नदी से तो कभी गरजते वज्रमय बादल से की है।
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में ‘हल्दीघाटी’ ने स्वतंत्रता सेनानियों में सांस्कृतिक एकता और उत्साह का संचार किया था।
कवि से परिचय — श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) वीर रस की कविताओं के लिए जाने जाते हैं। उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय कृति ‘हल्दीघाटी’ है। ‘चेतक की वीरता’ उसी का एक अंश है।
पाठ से
मेरी समझ से
2 बहुविकल्पीय + 1 चर्चाचेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?
- ✓चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।★
- ✕चेतक शत्रु की सेना को चारों ओर से घेरकर उस पर टूट पड़ता था।
- ✕चेतक हाथियों के दल के समान बादल के रूप में शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
- ✕चेतक नदी के उफान के समान शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
- पहले कविता की वह पंक्ति खोजिए जिसमें ‘सेना पर टूटने’ की बात है — “विकराल बज्र-मय बादल-सा, अरि की सेना पर घहर गया।”
- शब्दों का अर्थ खोलिए — विकराल = भयंकर, बज्र-मय = वज्र (बिजली) से भरा हुआ, अरि = शत्रु, घहर गया = गरजता हुआ टूट पड़ा।
- अब उपमा पहचानिए — कवि ने चेतक की तुलना बादल से की है और उस बादल को वज्रमय कहा है। बादल जब गरजता है तो उससे वज्रपात होता है।
- इन दोनों बातों को जोड़िए — चेतक शत्रु-सेना पर बादल की तरह गरजता हुआ आया और वज्रपात बनकर उन पर टूट पड़ा।
- अतः पहला विकल्प ही कविता के भाव से पूरी तरह मेल खाता है।
- घेरकर टूटना — कविता में चेतक की गति और फुर्ती का वर्णन है; सेना को घेरने जैसी किसी व्यूह-रचना का उल्लेख कहीं नहीं है।
- हाथियों का दल — पूरी कविता में हाथियों की कोई चर्चा ही नहीं आती।
- नदी का उफान — ‘बढ़ते नद-सा वह लहर गया’ में नदी की उपमा चेतक की लहराती चाल के लिए है, सेना पर टूट पड़ने के लिए नहीं। ‘टूट पड़ने’ के लिए कवि ने बादल-वज्र वाली उपमा चुनी है।
‘लेकर सवार उड़ जाता था।’ इस पंक्ति में ‘सवार’ शब्द किसके लिए आया है?
- ✕चेतक
- ✓महाराणा प्रताप★
- ✕कवि
- ✕शत्रु
- ‘सवार’ का शाब्दिक अर्थ — जो किसी वाहन या पशु पर बैठा हो। यानी यहाँ जो घोड़े की पीठ पर बैठा है।
- वाक्य का कर्ता पहचानिए — ‘लेकर सवार उड़ जाता था’ में उड़ने वाला, अर्थात कर्ता, चेतक है।
- कर्म पहचानिए — चेतक जिसे ‘लेकर’ उड़ता है, वही सवार है। चेतक स्वयं सवार नहीं हो सकता, क्योंकि वह तो घोड़ा है।
- पूरे पाठ का संदर्भ जोड़िए — कविता में चेतक की पीठ पर बैठे वीर महाराणा प्रताप हैं।
- अतः ‘सवार’ शब्द महाराणा प्रताप के लिए आया है।
- चेतक — वह घोड़ा है, सवारी है; सवार नहीं।
- कवि — कवि तो युद्ध का वर्णन करने वाला है, वह चेतक पर बैठा नहीं है।
- शत्रु — शत्रु चेतक पर नहीं, अपने-अपने घोड़ों पर थे; चेतक तो उनके सिरों के ऊपर से निकल जाता था।
अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?
यह प्रश्न कक्षा में मिलकर करने का है। नीचे दिए तर्क आप अपनी चर्चा में रख सकते हैं —
- मैंने उत्तर अनुमान से नहीं, बल्कि कविता की पंक्ति से चुना — ‘विकराल बज्र-मय बादल-सा, अरि की सेना पर घहर गया।’
- इस पंक्ति में तीनों शब्द — बादल, वज्र और घहरना — एक ही चित्र बनाते हैं: गरजते बादल का वज्र बनकर गिरना।
- जो विकल्प कविता में कहीं है ही नहीं (जैसे हाथी या घेराबंदी), उसे मैंने सीधे हटा दिया।
- कविता का शीर्षक ही ‘चेतक की वीरता’ है और चेतक घोड़ा है — इसलिए घोड़ा ‘सवार’ नहीं हो सकता।
- ‘लेकर’ शब्द बताता है कि कोई और है जिसे चेतक अपने ऊपर लिए जा रहा है।
- पूरी कविता में राणा प्रताप ही चेतक के साथ हैं — ‘राणा प्रताप का कोड़ा’, ‘राणा की पुतली फिरी नहीं’ — इसलिए सवार वही हैं।
हर साथी पहले अपना उत्तर बताए, फिर कविता की वह पंक्ति पढ़कर सुनाए जिससे उसका उत्तर सिद्ध होता है। जिस उत्तर के पक्ष में पंक्ति मिल जाए, वही सही माना जाए — यही तर्कपूर्ण चर्चा है।
पंक्तियों पर चर्चा
भावार्थ“निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।”
चेतक तनिक भी डरे बिना शत्रु सैनिकों की ढालों के बीच जा घुसा और चमकती तलवारों की भीड़ में भी वह पूरी रफ़्तार से दौड़ता रहा। जहाँ हर ओर से वार हो रहे थे, वहाँ भी वह एक पल के लिए न रुका, न पीछे हटा।
- भाव — ये पंक्तियाँ चेतक की निर्भीकता और स्वामिभक्ति दोनों दिखाती हैं। वह अपनी जान की परवाह किए बिना राणा को युद्ध के बीचोबीच ले जाता है।
- ध्वनि — ‘ढालों’ और ‘करवालों’ की तुक तथा ‘सरपट दौड़ा’ की तेज़ ध्वनि से घोड़े की दौड़ का वेग कानों में सुनाई देने लगता है।
- रस — यह वीर रस का उत्तम उदाहरण है।
“भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग।”
चेतक के वेग और आक्रमण के आगे शत्रु सैनिक सँभल ही न सके — किसी के हाथ से भाला छूटकर गिर पड़ा तो किसी का तरकश गिर गया। चेतक की टापों की चोट से उनके शरीर छिल गए और वे घायल होकर गिरने लगे। घोड़े का यह रूप देखकर पूरी शत्रु-सेना दंग रह गई।
- चित्रात्मकता — कवि हथियारों को गिरते हुए दिखाकर बताते हैं कि शत्रु के हाथ-पाँव फूल गए थे — यह बात सीधे कहने से कहीं अधिक प्रभावी है।
- गति — छोटे-छोटे वाक्यांश (‘भाला गिर गया’, ‘गिरा निषंग’) युद्ध की तेज़ी और अफ़रा-तफ़री का अनुभव कराते हैं।
- निष्कर्ष — बिना किसी अस्त्र के, केवल अपनी टापों से चेतक ने शत्रु-सेना में हाहाकार मचा दिया — यही उसकी वीरता है।
मिलकर करें मिलान
5 जोड़ेकविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें इनके सही भावार्थ से मिलाइए।
“राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था।”
हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो। — ‘पाला पड़ना’ का अर्थ ही है ‘मुकाबला हो जाना’।
“वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था।”
शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो। — ‘अरि-मस्तक’ का सीधा अर्थ है शत्रु का सिर।
“जो तनिक हवा से बाग हिली, लेकर सवार उड़ जाता था।”
चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ा-सा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था। — ‘बाग’ का अर्थ है लगाम।
“राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था।”
वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता, अर्थात वह उनका भाव समझ जाता था। — ‘पुतली फिरना’ यानी आँख की पुतली का घूमना।
“विकराल बज्र-मय बादल-सा, अरि की सेना पर घहर गया।”
शत्रु की सेना पर भयानक वज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता। — ‘घहरना’ यानी बादल का गरजते हुए घिर आना।
- हर पंक्ति में से एक कुंजी-शब्द चुनिए — जैसे पंक्ति 1 में ‘हवा’, पंक्ति 2 में ‘आसमान’, पंक्ति 3 में ‘बाग’, पंक्ति 4 में ‘पुतली’, पंक्ति 5 में ‘बादल’।
- अब भावार्थ वाले खाने में वही कुंजी-शब्द या उसका पर्याय ढूँढ़िए — ‘हवा’ का जोड़ा ‘प्रतियोगिता’ वाले भावार्थ से, ‘बाग’ का ‘लगाम’ वाले भावार्थ से बैठ जाएगा।
- जो जोड़े निश्चित हो जाएँ उन्हें पहले काट दीजिए; बचे हुए विकल्प अपने आप सही बैठ जाएँगे।
शीर्षक
सृजनात्मकयह कविता ‘हल्दीघाटी’ शीर्षक काव्य कृति का एक अंश है। यहाँ इसका शीर्षक ‘चेतक की वीरता’ दिया गया है। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों?
यदि मुझे इस अंश को नया शीर्षक देना हो तो मैं ‘रणबाँकुरा चेतक’ रखना चाहूँगा/चाहूँगी। कारण यह है कि पूरी कविता में कहीं भी युद्ध के दाँव-पेच का वर्णन नहीं है — आरंभ से अंत तक केवल एक घोड़े की गति, फुर्ती, समझ और निडरता का चित्र खींचा गया है। ‘रणबाँकुरा’ शब्द का अर्थ ही है ‘रणभूमि का वीर’, और चेतक ने बिना किसी अस्त्र-शस्त्र के, केवल अपनी टापों और वेग से शत्रु-सेना को दंग कर दिया। इसलिए यह शीर्षक कविता के भाव को पूरी तरह समेट लेता है।
- ‘वीर चेतक’ — सरल, सीधा और कविता के केंद्रीय भाव को कहने वाला।
- ‘स्वामिभक्त चेतक’ — क्योंकि राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही वह उनका मन समझकर मुड़ जाता था।
- ‘हवा से होड़’ — क्योंकि कवि ने बार-बार चेतक की गति की तुलना हवा से की है — ‘पड़ गया हवा को पाला था’।
- ‘हल्दीघाटी का घोड़ा’ — यह शीर्षक कविता को उसके ऐतिहासिक प्रसंग से जोड़ देता है।
अच्छा शीर्षक वह होता है जो छोटा हो, आकर्षक हो और पूरी रचना का सार बता दे। ‘चेतक की वीरता’ में तीन ही शब्द हैं, इनमें कविता का नायक (चेतक) और उसका मुख्य गुण (वीरता) दोनों आ जाते हैं। इसीलिए पाठ्यपुस्तक ने यही शीर्षक चुना है।
कविता की रचना
तुकांत शब्दरेखांकित शब्द बोलने-लिखने में थोड़े मिलते-जुलते हैं। इस तरह की तुकांत शैली प्रायः कविता में आती है। इस कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए।
तुकांत शब्द वे शब्द हैं जिनके अंत की ध्वनि आपस में मिलती-जुलती हो, जैसे ‘निराला’ और ‘पाला’। जिस कविता की पंक्तियाँ ऐसे मिलते-जुलते शब्दों पर समाप्त होती हैं, उसे तुकांत कविता कहते हैं। यदि पंक्तियों के अंत में तुक न मिले तो उसे अतुकांत कविता कहते हैं।
कविता के तुकांत शब्द‘चेतक की वीरता’ पूरी तरह तुकांत कविता है। यही तुक इसे गाने योग्य बनाती है और पढ़ते समय घोड़े की टाप जैसी लय पैदा करती है — इसीलिए वीर रस की कविताएँ प्रायः तुकांत ही लिखी जाती हैं।
शब्द के भीतर शब्द
शब्द-खेल‘आसमान’ की तरह कविता में से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर छिपे शब्द खोजिए।
आसमान → आस, समान, मान, सम, आन, नस
शब्द को अक्षरों में तोड़िए (जैसे स + र + प + ट), फिर लगातार आने वाले दो या तीन अक्षरों को जोड़कर देखिए कि कोई अर्थवाला शब्द बनता है या नहीं। ध्यान रहे — अक्षरों का क्रम नहीं बदलना चाहिए।
पाठ से आगे
आपकी बात
2 प्रश्न‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ — कविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें।
कवि सीधी बात कहने के बजाय ऐसे चित्रमय और मुहावरेदार प्रयोग करते हैं जिनसे बात मन पर गहरी छाप छोड़ जाए। इस कविता के ऐसे प्रयोग नीचे उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं —
इन प्रयोगों को हटाकर यदि सीधी बात कह दी जाए — जैसे ‘घोड़ा बहुत तेज़ दौड़ता था’ — तो कविता का सारा रोमांच समाप्त हो जाएगा। यही प्रयोग कविता को प्रभावशाली बनाते हैं।
कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए।
यह विचार-विमर्श का प्रश्न है, इसलिए इसका कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं है। चर्चा में दोनों पक्ष रखे जा सकते हैं —
- युद्ध में सबसे अधिक हानि निर्दोष लोगों की होती है — बच्चे अनाथ होते हैं, परिवार उजड़ते हैं।
- जो धन विद्यालय, अस्पताल और सड़कों पर लगना चाहिए, वह हथियारों में चला जाता है।
- युद्ध से खेत, नगर, वन और पशु-पक्षी — सब नष्ट होते हैं। पर्यावरण को होने वाली क्षति वर्षों तक नहीं भरती।
- अधिकांश झगड़े बातचीत, संधि और मध्यस्थता से सुलझाए जा सकते हैं। इसीलिए संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएँ बनी हैं।
- जब कोई दूसरा देश आक्रमण कर दे, तब अपनी भूमि, स्वतंत्रता और लोगों की रक्षा करना आवश्यक हो जाता है — महाराणा प्रताप का संघर्ष इसी आत्मरक्षा का उदाहरण है।
- अन्याय के सामने चुप रह जाना भी अन्याय को बढ़ावा देता है।
युद्ध किसी भी समस्या का पहला उपाय नहीं होना चाहिए, अंतिम उपाय भी तभी, जब आत्मरक्षा के अलावा कोई मार्ग शेष न रहे। सच्ची वीरता केवल लड़ने में नहीं, बल्कि झगड़े को बातचीत से सुलझा लेने में भी है। हमें अपने विद्यालय और मुहल्ले से ही यह आदत शुरू करनी चाहिए — मतभेद हो तो मारपीट नहीं, संवाद।
समानार्थी शब्द
5 समूहयहाँ दिए गए शब्दों में से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानार्थी न हो।
समान अर्थ वाले शब्दों को समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहते हैं, जैसे — हय, अश्व और घोड़ा। हर पंक्ति में तीन शब्द एक ही अर्थ के हैं और एक शब्द अलग अर्थ का है। नीचे लाल घेरे वाला शब्द ही उत्तर है।
हवा, पवन और बयार — तीनों का अर्थ वायु है। अनल का अर्थ है आग। इसलिए यही समानार्थी नहीं है।
रण, युद्ध और समर — तीनों का अर्थ लड़ाई है। तुरंग का अर्थ है घोड़ा। इसलिए यही अलग है।
आसमान, आकाश और गगन — तीनों का अर्थ आकाश है। नभचर का अर्थ है आकाश में उड़ने वाला प्राणी, अर्थात पक्षी। इसलिए यही अलग है।
नद, सरिता और तटिनी — तीनों का अर्थ नदी है। नाद का अर्थ है ध्वनि या गूँज। इसलिए यही अलग है।
करवाल, तलवार और असि — तीनों का अर्थ तलवार है। ढाल वार से बचने का साधन है, वार करने का नहीं। इसलिए यही अलग है।
हर शब्द का अर्थ मन-ही-मन लिखिए। जिन तीन शब्दों के अर्थ एक जैसे निकलें, वे समानार्थी हैं; बचा हुआ चौथा शब्द ही उत्तर है। संदेह हो तो शब्दकोश देखिए — ‘अनल’, ‘तुरंग’ और ‘नाद’ जैसे शब्द तत्सम हैं और प्रायः यहीं भ्रम पैदा करते हैं।
आज की पहेली
बूझो तो जानें · 5नीचे दी गई पाँचों पहेलियाँ बूझिए।
दिन में जगता, रात में सोता, यही मेरी पहचान।।
बाँध गले में लंबी डोर, पकड़ रहा अंबर का छोर।
बोलो, बोलो— मैं हूँ कौन?
सबके मुँह में आया पानी मेरे भाई।
शहर है पर घर नहीं, समंदर है पर पानी नहीं।
खोजबीन के लिए
2 परियोजना कार्यमहाराणा प्रताप कौन थे? उनके बारे में इंटरनेट या पुस्तकालय से जानकारी प्राप्त करके लिखिए।
महाराणा प्रताप मेवाड़ (आज के राजस्थान) के सिसोदिया राजवंश के वीर शासक थे। भारतीय इतिहास में वे अपने अदम्य स्वाभिमान और स्वतंत्रता-प्रेम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जीवन भर मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की।
- हल्दीघाटी का युद्ध — अकबर की विशाल सेना का नेतृत्व राजा मानसिंह कर रहे थे। महाराणा प्रताप की सेना संख्या में बहुत छोटी थी, फिर भी उन्होंने डटकर मुकाबला किया। इसी युद्ध में उनके घोड़े चेतक ने अद्भुत वीरता दिखाई।
- चेतक का बलिदान — बुरी तरह घायल होने पर भी चेतक महाराणा को पीठ पर लिए हुए नाला पार कर गया और उन्हें सुरक्षित पहुँचाकर ही उसने प्राण त्यागे।
- वनवास और संघर्ष — हार के बाद भी उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया। वे वर्षों जंगलों में रहे, घास की रोटी तक खाई, पर स्वाधीनता का संकल्प नहीं छोड़ा।
- भामाशाह का सहयोग — उनके मंत्री भामाशाह ने अपनी सारी संपत्ति देकर सेना फिर से खड़ी करने में सहायता की।
- पुनः विजय — सन 1582 के दिवेर युद्ध में उन्होंने विजय पाई और धीरे-धीरे मेवाड़ का अधिकांश भाग वापस जीत लिया।
- भील साथी — जंगलों में रहने वाले भील समुदाय ने उनका पूरा साथ दिया, इसीलिए मेवाड़ के राजचिह्न में एक ओर राजपूत और दूसरी ओर भील योद्धा दिखाया जाता है।
महाराणा प्रताप हमें सिखाते हैं कि साधन कम हों तो भी आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहिए, और कठिनाई के दिनों में भी अपने संकल्प पर टिके रहना ही सच्ची वीरता है।
इस कविता में चेतक एक ‘घोड़ा’ है। पशु-पक्षियों पर आधारित पाँच रचनाओं को खोजिए और अपनी कक्षा की दीवार-पत्रिका पर लगाइए।
- हर रचना के लिए एक अलग चार्ट-पेपर लीजिए — ऊपर रचना का नाम, नीचे लेखक का नाम बड़े अक्षरों में लिखिए।
- उस पशु या पक्षी का चित्र बनाइए या चिपकाइए, और रचना का दो-तीन पंक्ति का सार अपने शब्दों में लिखिए।
- अंत में एक पंक्ति यह भी जोड़िए — ‘इस रचना से मैंने क्या सीखा’।
- चाहें तो इसी पाठ की ‘चेतक की वीरता’ को भी छठी रचना के रूप में जोड़ सकते हैं, क्योंकि यह भी एक पशु — घोड़े — पर आधारित है।
