अध्याय 11 – चेतक की वीरता (Chapter 11 – Chetak Ki Veerta) | Class 6 Hindi (Malhar) | NCERT Solutions

चेतक की वीरता — प्रश्न-उत्तर एवं व्याख्या | कक्षा 6 हिंदी (मल्हार) अध्याय 11
कक्षा 6 · हिंदी · मल्हार · अध्याय 11

चेतक की वीरता

हल्दीघाटी के रणक्षेत्र में महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक किस तरह हवा से होड़ लगाता, शत्रुओं के सिरों पर उड़ता और बिना डरे तलवारों के बीच दौड़ता रहा — इसी दृश्य को कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने वीर रस में बाँधा है। नीचे पाठ के हर प्रश्न का सविस्तार उत्तर दिया गया है।

महाराणा प्रताप चेतक पर सवार — पाठ का मूल चित्र
चेतक पर सवार महाराणा प्रताप

कविता एक नज़र में

यह कविता श्यामनारायण पाण्डेय की प्रसिद्ध काव्यकृति ‘हल्दीघाटी’ का एक अंश है, जो सन 1939 में प्रकाशित हुई थी। इसमें कवि हल्दीघाटी के युद्ध का वह क्षण दिखाते हैं जब महाराणा प्रताप का घोड़ा चेतक अपनी बिजली-सी गति, गजब की फुर्ती, स्वामिभक्ति और निडरता से पूरी शत्रु-सेना को स्तब्ध कर देता है। कवि ने चेतक की तुलना कभी हवा से, कभी उमड़ती नदी से तो कभी गरजते वज्रमय बादल से की है।

भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में ‘हल्दीघाटी’ ने स्वतंत्रता सेनानियों में सांस्कृतिक एकता और उत्साह का संचार किया था।

कवि श्यामनारायण पाण्डेय का चित्र

कवि से परिचय — श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) वीर रस की कविताओं के लिए जाने जाते हैं। उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय कृति ‘हल्दीघाटी’ है। ‘चेतक की वीरता’ उसी का एक अंश है।

@edugrown चेतक की चार बड़ी विशेषताएँ 1 वायु-सी गति हवा से भी तेज़ दौड़ — हवा को भी उससे होड़ लगानी पड़ी। 2 गजब की फुर्ती लगाम ज़रा-सी हिली नहीं कि सरपट हवा में उड़ चला। 3 अटूट स्वामिभक्ति राणा की पुतली घूमने से पहले ही उनका भाव समझ जाता। 4 निर्भीकता भालों, ढालों और तलवारों के बीच बिना डरे दौड़ता रहा। @edugrown चेतक की चार बड़ी विशेषताएँ 1 वायु-सी गति हवा से भी तेज़ दौड़ — हवा को भी उससे होड़ लगानी पड़ी। 2 गजब की फुर्ती लगाम ज़रा-सी हिली नहीं कि सरपट हवा में उड़ चला। 3 अटूट स्वामिभक्ति राणा की पुतली घूमने से पहले ही उनका भाव समझ जाता। 4 निर्भीकता भालों, ढालों और तलवारों के बीच बिना डरे दौड़ता रहा।
चित्र 1 — कविता में उभरी चेतक की चार बड़ी विशेषताएँ
अंतःपाठ प्रश्न

पाठ से

मेरी समझ से

2 बहुविकल्पीय + 1 चर्चा
1
प्रश्न (क) 1 · सही उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए

चेतक शत्रुओं की सेना पर किस प्रकार टूट पड़ता था?

  • चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था।
  • चेतक शत्रु की सेना को चारों ओर से घेरकर उस पर टूट पड़ता था।
  • चेतक हाथियों के दल के समान बादल के रूप में शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
  • चेतक नदी के उफान के समान शत्रु की सेना पर टूट पड़ता था।
सही उत्तर एवं व्याख्या
  1. पहले कविता की वह पंक्ति खोजिए जिसमें ‘सेना पर टूटने’ की बात है — “विकराल बज्र-मय बादल-सा, अरि की सेना पर घहर गया।”
  2. शब्दों का अर्थ खोलिए — विकराल = भयंकर, बज्र-मय = वज्र (बिजली) से भरा हुआ, अरि = शत्रु, घहर गया = गरजता हुआ टूट पड़ा।
  3. अब उपमा पहचानिए — कवि ने चेतक की तुलना बादल से की है और उस बादल को वज्रमय कहा है। बादल जब गरजता है तो उससे वज्रपात होता है।
  4. इन दोनों बातों को जोड़िए — चेतक शत्रु-सेना पर बादल की तरह गरजता हुआ आया और वज्रपात बनकर उन पर टूट पड़ा।
  5. अतः पहला विकल्प ही कविता के भाव से पूरी तरह मेल खाता है।
बाकी विकल्प क्यों नहीं
  • घेरकर टूटना — कविता में चेतक की गति और फुर्ती का वर्णन है; सेना को घेरने जैसी किसी व्यूह-रचना का उल्लेख कहीं नहीं है।
  • हाथियों का दल — पूरी कविता में हाथियों की कोई चर्चा ही नहीं आती।
  • नदी का उफान — ‘बढ़ते नद-सा वह लहर गया’ में नदी की उपमा चेतक की लहराती चाल के लिए है, सेना पर टूट पड़ने के लिए नहीं। ‘टूट पड़ने’ के लिए कवि ने बादल-वज्र वाली उपमा चुनी है।
2
प्रश्न (क) 2 · सही उत्तर के सामने तारा (★) बनाइए

‘लेकर सवार उड़ जाता था।’ इस पंक्ति में ‘सवार’ शब्द किसके लिए आया है?

  • चेतक
  • महाराणा प्रताप
  • कवि
  • शत्रु
सही उत्तर एवं व्याख्या
  1. ‘सवार’ का शाब्दिक अर्थ — जो किसी वाहन या पशु पर बैठा हो। यानी यहाँ जो घोड़े की पीठ पर बैठा है।
  2. वाक्य का कर्ता पहचानिए — ‘लेकर सवार उड़ जाता था’ में उड़ने वाला, अर्थात कर्ता, चेतक है।
  3. कर्म पहचानिए — चेतक जिसे ‘लेकर’ उड़ता है, वही सवार है। चेतक स्वयं सवार नहीं हो सकता, क्योंकि वह तो घोड़ा है।
  4. पूरे पाठ का संदर्भ जोड़िए — कविता में चेतक की पीठ पर बैठे वीर महाराणा प्रताप हैं।
  5. अतः ‘सवार’ शब्द महाराणा प्रताप के लिए आया है।
बाकी विकल्प क्यों नहीं
  • चेतक — वह घोड़ा है, सवारी है; सवार नहीं।
  • कवि — कवि तो युद्ध का वर्णन करने वाला है, वह चेतक पर बैठा नहीं है।
  • शत्रु — शत्रु चेतक पर नहीं, अपने-अपने घोड़ों पर थे; चेतक तो उनके सिरों के ऊपर से निकल जाता था।
3
प्रश्न (ख) · तर्कपूर्ण चर्चा

अब अपने मित्रों के साथ तर्कपूर्ण चर्चा कीजिए कि आपने ये ही उत्तर क्यों चुने?

चर्चा के लिए तैयार उत्तर

यह प्रश्न कक्षा में मिलकर करने का है। नीचे दिए तर्क आप अपनी चर्चा में रख सकते हैं —

पहले उत्तर के लिए मेरे तर्क
  • मैंने उत्तर अनुमान से नहीं, बल्कि कविता की पंक्ति से चुना — ‘विकराल बज्र-मय बादल-सा, अरि की सेना पर घहर गया।’
  • इस पंक्ति में तीनों शब्द — बादल, वज्र और घहरना — एक ही चित्र बनाते हैं: गरजते बादल का वज्र बनकर गिरना।
  • जो विकल्प कविता में कहीं है ही नहीं (जैसे हाथी या घेराबंदी), उसे मैंने सीधे हटा दिया।
दूसरे उत्तर के लिए मेरे तर्क
  • कविता का शीर्षक ही ‘चेतक की वीरता’ है और चेतक घोड़ा है — इसलिए घोड़ा ‘सवार’ नहीं हो सकता।
  • ‘लेकर’ शब्द बताता है कि कोई और है जिसे चेतक अपने ऊपर लिए जा रहा है।
  • पूरी कविता में राणा प्रताप ही चेतक के साथ हैं — ‘राणा प्रताप का कोड़ा’, ‘राणा की पुतली फिरी नहीं’ — इसलिए सवार वही हैं।
चर्चा का तरीका

हर साथी पहले अपना उत्तर बताए, फिर कविता की वह पंक्ति पढ़कर सुनाए जिससे उसका उत्तर सिद्ध होता है। जिस उत्तर के पक्ष में पंक्ति मिल जाए, वही सही माना जाए — यही तर्कपूर्ण चर्चा है।

पंक्तियों पर चर्चा

भावार्थ
4
प्रश्न (क)

“निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।”

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शब्दार्थ एवं भावार्थ
निर्भीक= निडर, बिना डरे
ढाल= शत्रु सैनिकों का सुरक्षा-कवच, जिसे वे वार रोकने के लिए आगे करते हैं
सरपट= घोड़े की सबसे तेज़ चाल
करवाल= तलवार
भावार्थ

चेतक तनिक भी डरे बिना शत्रु सैनिकों की ढालों के बीच जा घुसा और चमकती तलवारों की भीड़ में भी वह पूरी रफ़्तार से दौड़ता रहा। जहाँ हर ओर से वार हो रहे थे, वहाँ भी वह एक पल के लिए न रुका, न पीछे हटा।

यहाँ क्या ख़ास है
  • भाव — ये पंक्तियाँ चेतक की निर्भीकता और स्वामिभक्ति दोनों दिखाती हैं। वह अपनी जान की परवाह किए बिना राणा को युद्ध के बीचोबीच ले जाता है।
  • ध्वनि — ‘ढालों’ और ‘करवालों’ की तुक तथा ‘सरपट दौड़ा’ की तेज़ ध्वनि से घोड़े की दौड़ का वेग कानों में सुनाई देने लगता है।
  • रस — यह वीर रस का उत्तम उदाहरण है।
5
प्रश्न (ख)

“भाला गिर गया, गिरा निषंग, हय-टापों से खन गया अंग।”

शब्दार्थ एवं भावार्थ
भाला= लंबा नुकीला अस्त्र, जिसे फेंककर या भोंककर चलाया जाता है
निषंग= तरकश, तीर रखने का खोल
हय= घोड़ा
टाप= घोड़े के खुर की चोट
खन गया= खुद गया, छिल गया, घायल हो गया
भावार्थ

चेतक के वेग और आक्रमण के आगे शत्रु सैनिक सँभल ही न सके — किसी के हाथ से भाला छूटकर गिर पड़ा तो किसी का तरकश गिर गया। चेतक की टापों की चोट से उनके शरीर छिल गए और वे घायल होकर गिरने लगे। घोड़े का यह रूप देखकर पूरी शत्रु-सेना दंग रह गई।

यहाँ क्या ख़ास है
  • चित्रात्मकता — कवि हथियारों को गिरते हुए दिखाकर बताते हैं कि शत्रु के हाथ-पाँव फूल गए थे — यह बात सीधे कहने से कहीं अधिक प्रभावी है।
  • गति — छोटे-छोटे वाक्यांश (‘भाला गिर गया’, ‘गिरा निषंग’) युद्ध की तेज़ी और अफ़रा-तफ़री का अनुभव कराते हैं।
  • निष्कर्ष — बिना किसी अस्त्र के, केवल अपनी टापों से चेतक ने शत्रु-सेना में हाहाकार मचा दिया — यही उसकी वीरता है।

मिलकर करें मिलान

5 जोड़े
6
प्रश्न · पंक्तियों को उनके सही भावार्थ से मिलाइए

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें इनके सही भावार्थ से मिलाइए।

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सही मिलान
@edugrown सही जोड़े का नक्शा पंक्ति भावार्थ 1 2 3 4 5 1 2 3 4 5 1→2 · 2→3 · 3→4 · 4→5 · 5→1
चित्र 2 — पंक्ति और भावार्थ का सही जोड़ा
पंक्ति 1

“राणा प्रताप के घोड़े से पड़ गया हवा को पाला था।”

भावार्थ 2

हवा से भी तेज दौड़ने वाला चेतक ऐसे दौड़ लगा रहा था मानो हवा और चेतक में प्रतियोगिता हो रही हो। — ‘पाला पड़ना’ का अर्थ ही है ‘मुकाबला हो जाना’।

पंक्ति 2

“वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर, या आसमान पर घोड़ा था।”

भावार्थ 3

शत्रुओं के सिर के ऊपर से होता हुआ एक छोर से दूसरे छोर पर ऐसे दौड़ता जैसे आसमान में दौड़ रहा हो। — ‘अरि-मस्तक’ का सीधा अर्थ है शत्रु का सिर।

पंक्ति 3

“जो तनिक हवा से बाग हिली, लेकर सवार उड़ जाता था।”

भावार्थ 4

चेतक की फुर्ती ऐसी कि लगाम के थोड़ा-सा हिलते ही सरपट हवा में उड़ने लगता था। — ‘बाग’ का अर्थ है लगाम।

पंक्ति 4

“राणा की पुतली फिरी नहीं, तब तक चेतक मुड़ जाता था।”

भावार्थ 5

वह राणा की पूरी निगाह मुड़ने से पहले ही उस ओर मुड़ जाता, अर्थात वह उनका भाव समझ जाता था। — ‘पुतली फिरना’ यानी आँख की पुतली का घूमना।

पंक्ति 5

“विकराल बज्र-मय बादल-सा, अरि की सेना पर घहर गया।”

भावार्थ 1

शत्रु की सेना पर भयानक वज्रमय बादल बनकर टूट पड़ता और शत्रुओं का नाश करता। — ‘घहरना’ यानी बादल का गरजते हुए घिर आना।

मिलान करने की आसान तरकीब
  1. हर पंक्ति में से एक कुंजी-शब्द चुनिए — जैसे पंक्ति 1 में ‘हवा’, पंक्ति 2 में ‘आसमान’, पंक्ति 3 में ‘बाग’, पंक्ति 4 में ‘पुतली’, पंक्ति 5 में ‘बादल’।
  2. अब भावार्थ वाले खाने में वही कुंजी-शब्द या उसका पर्याय ढूँढ़िए — ‘हवा’ का जोड़ा ‘प्रतियोगिता’ वाले भावार्थ से, ‘बाग’ का ‘लगाम’ वाले भावार्थ से बैठ जाएगा।
  3. जो जोड़े निश्चित हो जाएँ उन्हें पहले काट दीजिए; बचे हुए विकल्प अपने आप सही बैठ जाएँगे।

शीर्षक

सृजनात्मक
7
प्रश्न

यह कविता ‘हल्दीघाटी’ शीर्षक काव्य कृति का एक अंश है। यहाँ इसका शीर्षक ‘चेतक की वीरता’ दिया गया है। आप इसे क्या शीर्षक देना चाहेंगे और क्यों?

उत्तर

यदि मुझे इस अंश को नया शीर्षक देना हो तो मैं ‘रणबाँकुरा चेतक’ रखना चाहूँगा/चाहूँगी। कारण यह है कि पूरी कविता में कहीं भी युद्ध के दाँव-पेच का वर्णन नहीं है — आरंभ से अंत तक केवल एक घोड़े की गति, फुर्ती, समझ और निडरता का चित्र खींचा गया है। ‘रणबाँकुरा’ शब्द का अर्थ ही है ‘रणभूमि का वीर’, और चेतक ने बिना किसी अस्त्र-शस्त्र के, केवल अपनी टापों और वेग से शत्रु-सेना को दंग कर दिया। इसलिए यह शीर्षक कविता के भाव को पूरी तरह समेट लेता है।

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कुछ और उपयुक्त शीर्षक और उनके कारण
  • ‘वीर चेतक’ — सरल, सीधा और कविता के केंद्रीय भाव को कहने वाला।
  • ‘स्वामिभक्त चेतक’ — क्योंकि राणा की आँख की पुतली घूमने से पहले ही वह उनका मन समझकर मुड़ जाता था।
  • ‘हवा से होड़’ — क्योंकि कवि ने बार-बार चेतक की गति की तुलना हवा से की है — ‘पड़ गया हवा को पाला था’।
  • ‘हल्दीघाटी का घोड़ा’ — यह शीर्षक कविता को उसके ऐतिहासिक प्रसंग से जोड़ देता है।
और ‘चेतक की वीरता’ शीर्षक क्यों सबसे उपयुक्त है

अच्छा शीर्षक वह होता है जो छोटा हो, आकर्षक हो और पूरी रचना का सार बता दे। ‘चेतक की वीरता’ में तीन ही शब्द हैं, इनमें कविता का नायक (चेतक) और उसका मुख्य गुण (वीरता) दोनों आ जाते हैं। इसीलिए पाठ्यपुस्तक ने यही शीर्षक चुना है।

कविता की रचना

तुकांत शब्द
8
प्रश्न

रेखांकित शब्द बोलने-लिखने में थोड़े मिलते-जुलते हैं। इस तरह की तुकांत शैली प्रायः कविता में आती है। इस कविता में आए तुकांत शब्दों की सूची बनाइए।

पहले समझिए

तुकांत शब्द वे शब्द हैं जिनके अंत की ध्वनि आपस में मिलती-जुलती हो, जैसे ‘निराला’ और ‘पाला’। जिस कविता की पंक्तियाँ ऐसे मिलते-जुलते शब्दों पर समाप्त होती हैं, उसे तुकांत कविता कहते हैं। यदि पंक्तियों के अंत में तुक न मिले तो उसे अतुकांत कविता कहते हैं।

कविता के तुकांत शब्द
निरालापाला
कोड़ाघोड़ा
चालोंभालोंढालोंकरवालों
यहाँवहाँजहाँकहाँ
लहरठहरघहर
निषंगअंगदंगरंग
यहींवहींनहीं
ध्यान देने योग्य बात

‘चेतक की वीरता’ पूरी तरह तुकांत कविता है। यही तुक इसे गाने योग्य बनाती है और पढ़ते समय घोड़े की टाप जैसी लय पैदा करती है — इसीलिए वीर रस की कविताएँ प्रायः तुकांत ही लिखी जाती हैं।

शब्द के भीतर शब्द

शब्द-खेल
9
प्रश्न

‘आसमान’ की तरह कविता में से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर छिपे शब्द खोजिए।

पुस्तक में दिया गया उदाहरण

आसमान → आस, समान, मान, सम, आन, नस

मेरे चुने हुए पाँच शब्द
निराला
निरारालाआलारालानि
सरपट
सररपटपटरपसरप
बादल
बाददलबालआदबा
भयानक
भययानआननकभयाअनक
करवाल
कररवावालकरवारवाल
खोजने का तरीका

शब्द को अक्षरों में तोड़िए (जैसे स + र + प + ट), फिर लगातार आने वाले दो या तीन अक्षरों को जोड़कर देखिए कि कोई अर्थवाला शब्द बनता है या नहीं। ध्यान रहे — अक्षरों का क्रम नहीं बदलना चाहिए।


अभ्यास प्रश्न

पाठ से आगे

आपकी बात

2 प्रश्न
10
प्रश्न (क)

‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ — कविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें।

उत्तर — कविता के ऐसे प्रयोग

कवि सीधी बात कहने के बजाय ऐसे चित्रमय और मुहावरेदार प्रयोग करते हैं जिनसे बात मन पर गहरी छाप छोड़ जाए। इस कविता के ऐसे प्रयोग नीचे उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं —

“पड़ गया हवा को पाला था”‘पाला पड़ना’ यानी मुकाबला हो जाना — चेतक की गति ऐसी कि हवा को भी उससे होड़ लगानी पड़ी।
“गिरता न कभी चेतक-तन पर, राणा प्रताप का कोड़ा था”कोड़ा कभी न पड़ना — अर्थात चेतक बिना चाबुक के ही, स्वयं की समझ से तेज़ दौड़ता था।
“या आसमान पर घोड़ा था”दौड़ को उड़ान बता देना — इतनी ऊँची छलाँग कि लगे वह ज़मीन पर नहीं, आसमान पर दौड़ रहा है।
“राणा की पुतली फिरी नहीं”‘पुतली फिरना’ यानी नज़र घुमाना — राणा की नज़र घूमने से भी पहले चेतक मुड़ जाता था।
“उड़ गया भयानक भालों में”दौड़ने के लिए ‘उड़ना’ शब्द — भालों की भीड़ में से पलक झपकते निकल जाना।
“है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं”एक ही साँस में ‘यहाँ’ और ‘वहाँ’ कहकर गति की अकल्पनीय तेज़ी दिखाना।
“बढ़ते नद-सा वह लहर गया”उपमा — चेतक की चाल उमड़ती नदी की लहर जैसी।
“विकराल बज्र-मय बादल-सा … घहर गया”उपमा — शत्रु पर टूटना, मानो गरजता बादल वज्र बनकर गिर पड़ा हो।
“हय-टापों से खन गया अंग”केवल टापों से शत्रु का घायल हो जाना — बिना अस्त्र के भी चेतक की मार।
बातचीत में यह भी कहिए

इन प्रयोगों को हटाकर यदि सीधी बात कह दी जाए — जैसे ‘घोड़ा बहुत तेज़ दौड़ता था’ — तो कविता का सारा रोमांच समाप्त हो जाएगा। यही प्रयोग कविता को प्रभावशाली बनाते हैं।

11
प्रश्न (ख) · आपस में बात कीजिए

कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए।

चर्चा के लिए तैयार उत्तर

यह विचार-विमर्श का प्रश्न है, इसलिए इसका कोई एक ‘सही’ उत्तर नहीं है। चर्चा में दोनों पक्ष रखे जा सकते हैं —

इस कथन के पक्ष में तर्क
  • युद्ध में सबसे अधिक हानि निर्दोष लोगों की होती है — बच्चे अनाथ होते हैं, परिवार उजड़ते हैं।
  • जो धन विद्यालय, अस्पताल और सड़कों पर लगना चाहिए, वह हथियारों में चला जाता है।
  • युद्ध से खेत, नगर, वन और पशु-पक्षी — सब नष्ट होते हैं। पर्यावरण को होने वाली क्षति वर्षों तक नहीं भरती।
  • अधिकांश झगड़े बातचीत, संधि और मध्यस्थता से सुलझाए जा सकते हैं। इसीलिए संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाएँ बनी हैं।
दूसरा पक्ष भी सुनिए
  • जब कोई दूसरा देश आक्रमण कर दे, तब अपनी भूमि, स्वतंत्रता और लोगों की रक्षा करना आवश्यक हो जाता है — महाराणा प्रताप का संघर्ष इसी आत्मरक्षा का उदाहरण है।
  • अन्याय के सामने चुप रह जाना भी अन्याय को बढ़ावा देता है।
मेरा निष्कर्ष

युद्ध किसी भी समस्या का पहला उपाय नहीं होना चाहिए, अंतिम उपाय भी तभी, जब आत्मरक्षा के अलावा कोई मार्ग शेष न रहे। सच्ची वीरता केवल लड़ने में नहीं, बल्कि झगड़े को बातचीत से सुलझा लेने में भी है। हमें अपने विद्यालय और मुहल्ले से ही यह आदत शुरू करनी चाहिए — मतभेद हो तो मारपीट नहीं, संवाद।

समानार्थी शब्द

5 समूह
12
प्रश्न

यहाँ दिए गए शब्दों में से उस शब्द पर घेरा बनाइए जो समानार्थी न हो।

समान अर्थ वाले शब्दों को समानार्थी या पर्यायवाची शब्द कहते हैं, जैसे — हय, अश्व और घोड़ा। हर पंक्ति में तीन शब्द एक ही अर्थ के हैं और एक शब्द अलग अर्थ का है। नीचे लाल घेरे वाला शब्द ही उत्तर है।

@edugrown कौन-सा शब्द समानार्थी नहीं है? 12345 हवा अनल पवन बयार रण तुरंग युद्ध समर आसमान आकाश गगन नभचर नद नाद सरिता तटिनी करवाल तलवार असि ढाल लाल घेरे वाला शब्द बाकी तीनों का समानार्थी नहीं है।
चित्र 3 — हर पंक्ति का ‘बाहरी’ शब्द
उत्तर एवं कारण
पंक्ति 1
हवाअनलपवनबयार

हवा, पवन और बयार — तीनों का अर्थ वायु है। अनल का अर्थ है आग। इसलिए यही समानार्थी नहीं है।

पंक्ति 2
रणतुरंगयुद्धसमर

रण, युद्ध और समर — तीनों का अर्थ लड़ाई है। तुरंग का अर्थ है घोड़ा। इसलिए यही अलग है।

पंक्ति 3
आसमानआकाशगगननभचर

आसमान, आकाश और गगन — तीनों का अर्थ आकाश है। नभचर का अर्थ है आकाश में उड़ने वाला प्राणी, अर्थात पक्षी। इसलिए यही अलग है।

पंक्ति 4
नदनादसरितातटिनी

नद, सरिता और तटिनी — तीनों का अर्थ नदी है। नाद का अर्थ है ध्वनि या गूँज। इसलिए यही अलग है।

पंक्ति 5
करवालतलवारअसिढाल

करवाल, तलवार और असि — तीनों का अर्थ तलवार है। ढाल वार से बचने का साधन है, वार करने का नहीं। इसलिए यही अलग है।

पहचानने की तरकीब

हर शब्द का अर्थ मन-ही-मन लिखिए। जिन तीन शब्दों के अर्थ एक जैसे निकलें, वे समानार्थी हैं; बचा हुआ चौथा शब्द ही उत्तर है। संदेह हो तो शब्दकोश देखिए — ‘अनल’, ‘तुरंग’ और ‘नाद’ जैसे शब्द तत्सम हैं और प्रायः यहीं भ्रम पैदा करते हैं।

आज की पहेली

बूझो तो जानें · 5
13
प्रश्न · बूझो तो जानें

नीचे दी गई पाँचों पहेलियाँ बूझिए।

पाँचों पहेलियों के उत्तर
1. तीन अक्षर का मेरा नाम, उल्टा सीधा एक समान।
दिन में जगता, रात में सोता, यही मेरी पहचान।।
नयन‘नयन’ यानी आँख। इसमें तीन अक्षर हैं — न + य + न। उल्टा पढ़िए तो भी ‘नयन’ ही बनता है, इसलिए यह ‘उल्टा सीधा एक समान’ है। आँखें दिन में खुली रहती हैं और रात में सो जाती हैं।
2. एक पक्षी ऐसा अलबेला, बिना पंख उड़ रहा अकेला।
बाँध गले में लंबी डोर, पकड़ रहा अंबर का छोर।
पतंगपतंग आकाश में पक्षी की तरह उड़ती है, पर उसके पंख नहीं होते। उसमें बँधी लंबी डोर ही ‘गले की डोर’ है और वह ऊपर उठकर ‘अंबर (आकाश) का छोर’ छूती दिखती है।
3. रात में हूँ दिन में नहीं, दीये के नीचे हूँ ऊपर नहीं।
बोलो, बोलो— मैं हूँ कौन?
अँधेराअँधेरा रात में होता है, दिन में नहीं। और यह कहावत तो प्रसिद्ध ही है — ‘दीपक तले अँधेरा’, अर्थात दीये की लौ ऊपर उजाला करती है पर ठीक उसके नीचे छाया, यानी अँधेरा रहता है।
4. मुझमें समाया फल, फूल और मिठाई।
सबके मुँह में आया पानी मेरे भाई।
रसफल में रस होता है, फूल में भी रस होता है और मिठाई भी रस से भरी होती है। इन तीनों का नाम सुनते ही मुँह में पानी आ जाता है — इसलिए उत्तर ‘रस’ है।
5. सड़क है पर गाड़ी नहीं, जंगल है पर पेड़ नहीं।
शहर है पर घर नहीं, समंदर है पर पानी नहीं।
नक्शानक्शे (मानचित्र) में सड़कें, जंगल, शहर और समुद्र — सब बने होते हैं, पर वे केवल चिह्न और रेखाएँ हैं। इसलिए वहाँ न असली गाड़ी चलती है, न पेड़ उगते हैं, न घर होते हैं और न पानी होता है।

खोजबीन के लिए

2 परियोजना कार्य
14
प्रश्न 1

महाराणा प्रताप कौन थे? उनके बारे में इंटरनेट या पुस्तकालय से जानकारी प्राप्त करके लिखिए।

उत्तर

महाराणा प्रताप मेवाड़ (आज के राजस्थान) के सिसोदिया राजवंश के वीर शासक थे। भारतीय इतिहास में वे अपने अदम्य स्वाभिमान और स्वतंत्रता-प्रेम के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने जीवन भर मुगल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार नहीं की।

महाराणा प्रताप की अश्वारोही प्रतिमा — पाठ में दिया गया चित्र
चेतक पर सवार महाराणा प्रताप की प्रतिमा
जन्म9 मई 1540, कुंभलगढ़ दुर्ग, मेवाड़
माता-पितामहाराणा उदयसिंह द्वितीय और महारानी जयवंता बाई
राज्याभिषेकसन 1572 में, मेवाड़ के महाराणा बने
प्रसिद्ध युद्धहल्दीघाटी का युद्ध — 18 जून 1576
प्रिय घोड़ाचेतक, जिसने घायल होकर भी उन्हें युद्धभूमि से सुरक्षित निकाला
देहावसान19 जनवरी 1597, चावंड (मेवाड़)
जीवन की मुख्य बातें
  • हल्दीघाटी का युद्ध — अकबर की विशाल सेना का नेतृत्व राजा मानसिंह कर रहे थे। महाराणा प्रताप की सेना संख्या में बहुत छोटी थी, फिर भी उन्होंने डटकर मुकाबला किया। इसी युद्ध में उनके घोड़े चेतक ने अद्भुत वीरता दिखाई।
  • चेतक का बलिदान — बुरी तरह घायल होने पर भी चेतक महाराणा को पीठ पर लिए हुए नाला पार कर गया और उन्हें सुरक्षित पहुँचाकर ही उसने प्राण त्यागे।
  • वनवास और संघर्ष — हार के बाद भी उन्होंने आत्मसमर्पण नहीं किया। वे वर्षों जंगलों में रहे, घास की रोटी तक खाई, पर स्वाधीनता का संकल्प नहीं छोड़ा।
  • भामाशाह का सहयोग — उनके मंत्री भामाशाह ने अपनी सारी संपत्ति देकर सेना फिर से खड़ी करने में सहायता की।
  • पुनः विजय — सन 1582 के दिवेर युद्ध में उन्होंने विजय पाई और धीरे-धीरे मेवाड़ का अधिकांश भाग वापस जीत लिया।
  • भील साथी — जंगलों में रहने वाले भील समुदाय ने उनका पूरा साथ दिया, इसीलिए मेवाड़ के राजचिह्न में एक ओर राजपूत और दूसरी ओर भील योद्धा दिखाया जाता है।
हमें उनसे क्या सीखना चाहिए

महाराणा प्रताप हमें सिखाते हैं कि साधन कम हों तो भी आत्मसम्मान से समझौता नहीं करना चाहिए, और कठिनाई के दिनों में भी अपने संकल्प पर टिके रहना ही सच्ची वीरता है।

15
प्रश्न 2

इस कविता में चेतक एक ‘घोड़ा’ है। पशु-पक्षियों पर आधारित पाँच रचनाओं को खोजिए और अपनी कक्षा की दीवार-पत्रिका पर लगाइए।

उत्तर — पाँच रचनाएँ
1
दो बैलों की कथाप्रेमचंद — हीरा और मोती नाम के दो बैलों की मित्रता, स्वाभिमान और स्वतंत्रता की कहानी।
2
गिल्लूमहादेवी वर्मा — एक नन्ही गिलहरी और लेखिका के बीच के अनोखे स्नेह का संस्मरण।
3
नीलकंठमहादेवी वर्मा — मोर-मोरनी नीलकंठ और राधा पर लिखा हुआ हृदयस्पर्शी रेखाचित्र।
4
गौरामहादेवी वर्मा — गौरा नाम की गाय के प्रति लेखिका के ममत्व का चित्रण।
5
पंचतंत्र की कहानियाँविष्णु शर्मा — शेर, सियार, कौआ, कछुआ जैसे पशु-पक्षियों के माध्यम से दी गई नीति-कथाएँ।
दीवार-पत्रिका कैसे सजाएँ
  • हर रचना के लिए एक अलग चार्ट-पेपर लीजिए — ऊपर रचना का नाम, नीचे लेखक का नाम बड़े अक्षरों में लिखिए।
  • उस पशु या पक्षी का चित्र बनाइए या चिपकाइए, और रचना का दो-तीन पंक्ति का सार अपने शब्दों में लिखिए।
  • अंत में एक पंक्ति यह भी जोड़िए — ‘इस रचना से मैंने क्या सीखा’।
  • चाहें तो इसी पाठ की ‘चेतक की वीरता’ को भी छठी रचना के रूप में जोड़ सकते हैं, क्योंकि यह भी एक पशु — घोड़े — पर आधारित है।

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