ऐसी भी बातें होती हैं
लता मंगेशकर से साक्षात्कार · संपूर्ण प्रश्नोत्तर एवं व्याकरण हल · कक्षा गंगा (हिंदी)
मेरे उत्तर मेरे तर्क
सटीक उत्तर चुनिए और कारण भी समझिए- (क) अनुशासन और नियम के साथ जीना
- (ख) भय और संशय के साथ जीना
- (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना
- (घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
लता जी कहती हैं कि पिताजी से उन्हें सबसे ज़्यादा “स्वाभिमान से जीने की प्रेरणा” मिली। उन्होंने सिखाया कि अगर कोई बात सही लगे तो उसे करो और किसी के आगे झुकने/हाथ पसारने की ज़रूरत नहीं। यही स्वाभिमान व सच्चाई के साथ जीना है।
- (क) संघर्ष
- (ख) निराशा
- (ग) भौतिकता
- (घ) कर्तव्यनिष्ठा
पिता के निधन के बाद कम उम्र में ही लता जी ने माँ व छोटे भाई-बहनों की देखभाल और घर की पूरी ज़िम्मेदारी उठाई। परिवार की ज़रूरतें पूरी करने के लिए वे दिन-रात मेहनत करती रहीं। परिवार के प्रति यह समर्पण कर्तव्यनिष्ठा का द्योतक है। (संघर्ष इसमें निहित है, पर मूल जीवन-मूल्य कर्तव्य के प्रति निष्ठा है।)
- (क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव
- (ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी
- (ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व
- (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
मंगलागौर में पास-पड़ोस की स्त्रियाँ मिलकर मग्न भाव से गीत गाती व नाचती थीं। यह दर्शाता है कि संगीत केवल मनोरंजन या धर्म तक सीमित नहीं, बल्कि सामाजिक उत्सवों व सामूहिक जीवन का अभिन्न अंग था — अर्थात् संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका।
- (क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है।
- (ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है।
- (ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है।
- (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
इस मराठी कहावत का अर्थ है — “गाँव तो बह जाता है, पर नाम रह जाता है।” अर्थात् शरीर/जीवन नश्वर है, परंतु व्यक्ति का कार्य और नाम (कर्म) अमर रहता है। लता जी कहती हैं कि उनका गाना अमर है, शरीर नहीं — इसी भाव को यह कहावत व्यक्त करती है।
- (क) औपचारिक
- (ख) कामकाजी
- (ग) आत्मीय
- (घ) प्रतिस्पर्धात्मक
लता जी बताती हैं कि कोरस की लड़कियाँ “बिल्कुल मेरे घर जैसी थीं”। वे साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करतीं, एक-दूसरे के घर आना-जाना था, और बहन मीना की शादी में भी वे शामिल हुईं। यह घनिष्ठ, घरेलू व आत्मीय संबंध दर्शाता है।
- (क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं।
- (ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है।
- (ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं।
- (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
लता जी इन चमत्कारों को प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मानतीं, परंतु यह स्वीकार करती हैं कि संगीत में असीम/अपरिमित शक्ति है, जो कुछ अप्रत्याशित रच देती है। उस्ताद अली अकबर खाँ के सरोद का तार सच्चे सुर पर टूट जाने का प्रसंग इसी असीम शक्ति का संकेत है।
- (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की
- (ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध
- (ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति
- (घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
लता जी छोटे घर में भी संतुष्ट हैं (सादगी), संगीत व परिवार के प्रति पूर्णतः समर्पित हैं (समर्पण), और किसी के आगे हाथ न फैलाने का स्वाभिमान रखती हैं (आत्मसम्मान)। अतः (क) सही है। (ख) गलत — वे आत्ममुग्ध नहीं, बल्कि विनम्र व कृतज्ञ हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
चर्चा कीजिए और उत्तर लिखिएपिताजी न तो डाँटते थे, न किसी बात पर मारते थे — वे केवल गंभीरता से देखते थे और बच्चे स्वयं अपनी गलती समझ जाते थे। इससे पता चलता है कि उनका अनुशासन भय पर नहीं, सम्मान व आदर पर टिका था। बच्चों के मन में पिता के प्रति गहरा आदर था, इसलिए बिना डाँटे ही बात समझ में आ जाती थी।
अंत में “अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो” कहना उनके स्नेह को दर्शाता है। इस तरह यह प्रसंग अनुशासन और स्नेह के सुंदर संतुलन का प्रतीक है — अनुशासन कठोरता से नहीं, बल्कि प्रेम व सम्मान से स्थापित होता है।
प्रभाव — पिता से उन्हें स्वाभिमान से जीने, सही बात पर अड़े रहने, किसी से कुछ न माँगने और हर हालात में संतुलित रहने की सीख मिली। संगीत के प्रति समर्पण व कठिन परिश्रम का संस्कार भी पिता से ही आया।
व्यवहार में दिखता है —
- किसी से पैसे/मदद न माँगना और स्वाभिमान से जीना।
- बुरे हालात में भी हिम्मत से परिवार सँभालना।
- जीवनभर संगीत-साधना में डूबे रहना (जैसे पिता डूबे रहते थे)।
- सही बात पर दृढ़ रहना — किसी के आगे न झुकना।
लता जी के लिए ‘नाम आगे बढ़ाना’ केवल अपनी प्रसिद्धि पाना नहीं है। इसमें पिता की विरासत, संस्कार व कला को सम्मानपूर्वक आगे ले जाने का उत्तरदायित्व जुड़ा है। पिता ने जो संगीत-संस्कार और जीवन-मूल्य दिए, उन्हीं पर चलकर उनके आदर्शों को जीवित रखना — यह एक पुत्री का दायित्व है। अतः इसमें गर्व के साथ-साथ कृतज्ञता व ज़िम्मेदारी का गहरा भाव है।
- आत्मीय व घरेलू — कोरस की लड़कियों को वे अपने घर जैसा मानती थीं; उनके साथ ज़मीन पर बैठकर बातें करतीं।
- आदर व कृतज्ञता से भरे — दीवाली पर वे स्वयं सुबह-सुबह अपने सीनियर संगीतकारों (नौशाद आदि) के घर मिठाई लेकर जातीं और उनसे आशीर्वाद माँगतीं।
- स्नेहपूर्ण व स्थायी — उनके सहयोगियों से रिश्ते वर्षों तक बने रहे; मीना की शादी में कोरस के लड़के-लड़कियाँ भी शामिल हुए।
संक्षेप में — लता जी सहयोगियों के साथ सम्मान, अपनापन और सहयोग का भाव रखती थीं।
साक्षात्कार से उभरता व्यक्तित्व
पंक्तियों से झलकते गुण| पंक्ति | झलकते गुण |
|---|---|
| “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।” | एकाग्रता, समर्पण, साधना |
| “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” | दृढ़ता, स्वाभिमान, आत्मविश्वास, स्पष्टवादिता |
| “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।” | विनम्रता, कृतज्ञता |
| “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।” | दार्शनिकता, श्रद्धा |
मेरे प्रश्न
दिए गए उत्तरों से प्रश्न बनाइए- ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच क्या-क्या झलकता था?
- किन लोक पर्वों में स्त्रियाँ मिलकर गीत व नृत्य करती थीं और सौहार्द प्रकट करती थीं?
- लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच सौहार्द का भाव किस रूप में दिखाई देता था?
- पुराने संगीतकारों के संगीत के बारे में लता जी का क्या मानना था?
- तकनीकी प्रगति के बावजूद किसकी सादगी और गहराई अद्वितीय मानी गई?
- लता जी पुराने और आज के संगीत की तुलना में किसे अद्वितीय मानती थीं?
मेरे अनुभव मेरे विचार
अपने अनुभव के आधार पर — नमूना उत्तरएक बार कक्षा में मेरे कुछ साथी एक कमज़ोर विद्यार्थी का मज़ाक उड़ा रहे थे। सभी हँस रहे थे, पर मुझे यह गलत लगा। मैंने अकेले ही उसका पक्ष लिया और साथियों को रोका, भले कुछ देर के लिए वे मुझसे नाराज़ हुए। बाद में उन्हें भी अपनी गलती समझ आई। उस दिन मुझे लगा कि सही बात पर अकेले खड़ा होना कठिन ज़रूर है, पर आत्मसंतोष देता है।
मेरे परिवार में बड़ों का सम्मान करना, झूठ न बोलना और भोजन व्यर्थ न करना — ये बातें बचपन से सिखाई गई हैं। अब ये मेरी आदत बन चुकी हैं; कोई याद न दिलाए, फिर भी मैं इनका पालन स्वतः करता/करती हूँ।
हमारे घर में दीवाली विशेष उत्साह से मनाई जाती है। हम कई दिन पहले से घर की सफाई व सजावट करते हैं, रंगोली बनाते हैं, दीये जलाते हैं और लक्ष्मी-पूजन करते हैं। पूरा परिवार मिलकर मिठाइयाँ बनाता है और पड़ोसियों के साथ बाँटता है। यह पर्व हमें एकजुटता व आभार का संदेश देता है।
(आप अपने घर के पर्व — होली, ईद, क्रिसमस, पोंगल, बिहू आदि — का वर्णन कर सकते हैं।)
- पहले त्योहारों पर घर-घर मिलकर पारंपरिक लोकगीत गाए जाते थे; अब रिकॉर्डेड/फ़िल्मी गाने अधिक बजते हैं।
- मिठाइयाँ घर पर बनती थीं; अब अधिकतर बाज़ार से खरीदी जाती हैं।
- लोग आमने-सामने मिलकर बधाई देते थे; अब बहुत-सी शुभकामनाएँ फ़ोन/संदेश से दी जाती हैं।
- संयुक्त परिवार के बड़े आयोजन छोटे होते जा रहे हैं।
विषयों से संवाद
कल्पना व सहयोगसन् 1942 में पिता के निधन के बाद मात्र 13 वर्ष की आयु में लता जी ने परिवार की पूरी ज़िम्मेदारी उठाई — ऐसे समय में, जब स्त्रियों का फ़िल्मों में काम करना अच्छा नहीं माना जाता था। ऐसे दिन की चुनौतियाँ —
- भोजन — लगातार रिकॉर्डिंग के कारण समय पर खाना न मिलना, भूखे रहकर काम करना।
- यात्रा-भाड़ा — कम आय में एक स्टूडियो से दूसरे तक आने-जाने का खर्च जुटाना।
- सुरक्षा — कम उम्र की लड़की का अकेले देर रात तक आना-जाना — सुरक्षा की चिंता।
- थकान — सुबह से रात तक भागदौड़ से शारीरिक व मानसिक थकान।
- सामाजिक दबाव — समाज की नकारात्मक सोच का सामना और परिवार चलाने का बोझ।
फिर भी लता जी ने सारा ध्यान अपने गायन व परिवार पर केंद्रित रखा — यही उनकी दृढ़ता है।
- विद्यालय — वार्षिकोत्सव, खेल-टीम, समूह-परियोजना, सफाई अभियान।
- घर — त्योहार की तैयारी, बड़े आयोजन/शादी में मिल-जुलकर काम।
- पड़ोस/समुदाय — सामूहिक पूजा, वृक्षारोपण, रक्तदान शिविर, आपदा में सहायता।
जैसे कोरस मिलकर गीत को सुंदर बनाता है, वैसे ही सामूहिक प्रयास से कोई भी कार्य सरल व सफल होता है।
साक्षात्कार की पड़ताल
विधा से संवाद| मुख्य बिंदु | साक्षात्कार से पंक्ति/संकेत |
|---|---|
| नाम (दोनों पक्ष) | साक्षात्कारकर्ता — यतीन्द्र मिश्र; जिनका साक्षात्कार लिया गया — लता मंगेशकर |
| आमंत्रण, स्वागत व परिचय | “दीदी, आपके संगीत की अप्रतिम यात्रा पर बातचीत शुरू करते हैं…” |
| प्रश्नोत्तर | हर “यतीन्द्र मिश्र:” के प्रश्न और “लता मंगेशकर:” के उत्तर |
| भावनात्मक वातावरण | “(हँसते हुए)”, “(खिलखिलाकर हँसती हैं)” जैसे कोष्ठक-संकेत |
| उत्तर देने की शैली का संकेत | “जी, ज़रूर। आप पूछिए, मैं आपके प्रश्नों का जवाब देने के लिए तैयार हूँ।” |
| विचार और उदाहरण | रहमान/जतिन-ललित वाला काल्पनिक प्रश्न; सरोद का तार टूटने का उदाहरण |
| संस्मरण | बचपन में फ़िल्मों की नकल; नौशाद साहब के घर दीवाली पर मिठाई पहुँचाना |
| समापन | “आज मुझे लगता है कि हे प्रभु!… यही प्रार्थना है।” |
यह आत्मीय बातचीत है, औपचारिक संवाद नहीं। तर्क —
- औपचारिक संवाद में उत्तर रटे-रटाए व सतर्क होते हैं, जबकि यहाँ लता जी अपने निजी अनुभव खुलकर बाँटने को तत्पर हैं।
- “जी, ज़रूर”, “आपका बेहद शुक्रिया”, बीच-बीच में हँसी, और बचपन के संस्मरण — ये सब घरेलू, सहज व अपनेपन भरे वातावरण का संकेत देते हैं।
- वे साक्षात्कारकर्ता के माध्यम से अपने प्रशंसकों के प्रति आभार भी जताती हैं — जो भावनात्मक जुड़ाव दर्शाता है।
आपका साक्षात्कार
कल्पना कीजिए कि आप वहाँ उपस्थित हैं- “आपका सबसे प्रिय गीत कौन-सा है और क्यों?” — उनकी निजी पसंद व उससे जुड़ी भावना जानने के लिए।
- “नए गायकों को आप क्या सलाह देना चाहेंगी?” — उनकी सीख आने वाली पीढ़ी के काम आए।
- “संगीत के अलावा आपको खाली समय में क्या करना पसंद है?” — उनके व्यक्तित्व का दूसरा पहलू जानने के लिए।
- “किसी गीत को रिकॉर्ड करने से पहले आप उसकी तैयारी कैसे करती थीं?” — उनकी साधना व कार्य-पद्धति समझने के लिए।
शास्त्रीय संगीत
संगीत से जुड़े शब्दों के अर्थ| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| राग | स्वरों का विशिष्ट, नियमबद्ध संयोजन जो एक विशेष भाव/रस उत्पन्न करता है | राग यमन, राग भैरव, राग जयजयवंती |
| सुर (स्वर) | संगीत की मूल ध्वनि; संगीत का आधार | सात स्वर — सा, रे, ग, म, प, ध, नि |
| बंदिश | किसी राग में शब्द, स्वर व ताल से बँधी हुई रचना | ख़याल या ध्रुपद की बंदिश |
| अभंग | मराठी भक्ति-काव्य/गीत (मुख्यतः विट्ठल-भक्ति) | संत तुकाराम व ज्ञानेश्वर के अभंग |
| सोहर | बच्चे के जन्म पर गाया जाने वाला मंगलगीत | श्रीराम/श्रीकृष्ण के जन्म के सोहर |
| फाग | फाल्गुन/होली में गाया जाने वाला लोकगीत | ब्रज के होली के फाग |
| बधावा | शुभ अवसर (जन्म/विवाह) पर गाया जाने वाला बधाई-गीत | विवाह व जन्मोत्सव के बधावा |
क्षेत्रीय गीत (गतिविधि) — अपने घर में पूछकर अपने क्षेत्र का कोई पर्व-गीत (जैसे छठ गीत, सोहर, बन्ना-बन्नी, बिहू गीत आदि) अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
साइबर सुरक्षा
AI से आवाज़ बदलकर होने वाली ठगी से बचाव- किसी अनजान कॉल पर पैसे, OTP या बैंक/निजी जानकारी कभी न दें — भले आवाज़ परिचित लगे।
- संदेह होने पर कॉल काटकर उस व्यक्ति को उसके सही/ज्ञात नंबर पर वापस कॉल करके सत्यापन करें।
- परिवार में एक गुप्त ‘सुरक्षा शब्द/कोड’ तय करें, ताकि आपात स्थिति में पहचान हो सके।
- सोशल मीडिया पर अपनी आवाज़, वीडियो व निजी जानकारी सोच-समझकर ही साझा करें।
- लालच भरे या डर पैदा करने वाले संदेशों से सावधान रहें — जल्दबाज़ी में निर्णय न लें।
- ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत करें।
हम ऐसे भी बोलते हैं
बिना बोले संवादहाँ, मेरी माँ/मेरे पिता ऐसे ही हैं। कक्षा में या मेहमानों के सामने यदि मैं कुछ गलत करने लगूँ, तो वे केवल एक गंभीर नज़र डाल देते हैं और मैं तुरंत समझ जाता/जाती हूँ। इसी तरह मेरे एक मित्र से आँखों-आँखों में ही बहुत कुछ कह दिया जाता है। यह बिना शब्दों का संवाद गहरे आपसी समझ व विश्वास को दर्शाता है।
मैं धैर्य रखूँगा/रखूँगी और ध्यान से उसके हाव-भाव व संकेत समझने की जिज्ञासा दिखाऊँगा। बीच में टोके बिना पूरा संकेत समझूँगा और ज़रूरत पड़ने पर मैं भी इशारों या लिखकर उत्तर दूँगा। उसकी भावनाओं को समानुभूति से ग्रहण करूँगा, ताकि उसे यह न लगे कि वह कुछ कम कर पा रहा है।
सृजन
कल्पना व रचनात्मक लेखनदिनांक: …… (कल्पित — मुंबई, 1949)
आज का दिन अविस्मरणीय रहा! टाइम मशीन से मैं मुंबई के एक पुराने स्टूडियो पहुँचा/पहुँची। लता जी सादी सफ़ेद किनारी वाली साड़ी में, दो चोटियों के साथ बिल्कुल सरल दिखीं। उन्होंने मुस्कुराकर स्वागत किया।
स्टूडियो में पुराने ढंग के बड़े माइक और साधारण उपकरण थे। मैंने देखा कि रिकॉर्डिंग के लिए उन्हें माइक से दूर खड़े होकर, धीरे-धीरे चलकर स्वर का उतार-चढ़ाव देना पड़ता था — तकनीक तब बहुत विकसित नहीं थी। फिर भी उनकी आवाज़ में गज़ब की मिठास थी।
दोपहर में सादा भोजन — दाल, चावल, सब्ज़ी और घर की बनी रोटी — मिला। लता जी ने अपने परिवार और पिता के संस्कारों की बातें बड़े प्रेम से सुनाईं। शाम को रागदारी संगीत की एक छोटी बैठक हुई, जिसमें मैं मंत्रमुग्ध होकर बैठा रहा। यह दिन मेरे लिए जीवनभर की प्रेरणा बन गया।
लता जी का यह संदेश पढ़कर मन भर आता है। उनकी विनम्रता देखिए — इतनी महान होकर भी वे सारी प्रसिद्धि को लोगों के प्यार का प्रतिफल मानती हैं। उनके शब्द सिखाते हैं कि शरीर नश्वर है, पर सच्चे कर्म और मधुर स्वर अमर रहते हैं। उनकी आवाज़ आज भी करोड़ों लोगों की सुबह सँवारती है और सदियों तक दिलों में गूँजती रहेगी। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सादगी, परिश्रम और स्वाभिमान से जिया गया जीवन ही असली अमरता है। ऐसी विभूति को मेरा शत-शत नमन।
व्याकरण — मुहावरे
‘हाथ’ से जुड़े मुहावरे व वाक्य-प्रयोग| मुहावरा | अर्थ | वाक्य-प्रयोग |
|---|---|---|
| हाथ में आना | प्राप्त होना | कड़ी मेहनत के बाद यह सुनहरा अवसर मेरे हाथ में आया। |
| हाथ का मैल होना | तुच्छ/महत्वहीन होना | धन तो हाथ का मैल है, असली पूँजी तो ईमानदारी है। |
| हाथ से हाथ मिलाना | सहयोग करना, मित्रता करना | दोनों मित्रों ने मिलकर काम करने के लिए हाथ से हाथ मिलाया। |
| हाथ साफ करना | चोरी कर लेना/चुपके से ले लेना | भीड़ में जेबकतरे ने उसके बटुए पर हाथ साफ कर दिया। |
| हाथ से निकल जाना | अवसर या नियंत्रण खो देना | देर करने से अच्छा मौका हाथ से निकल गया। |
| हाथ धो बैठना | किसी वस्तु को सदा के लिए खो देना | लापरवाही के कारण वह अपनी नौकरी से हाथ धो बैठा। |
हमारी भाषाएँ
कहावत व सेतु-चित्रमराठी कहावत — “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” = गाँव तो बह जाता है, पर नाम रह जाता है। (भाव — व्यक्ति का काम/नाम अमर रहता है।)
मातृभाषा (हिंदी) कहावत व अर्थ — “अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।” → हिंदी अर्थ: समय निकल जाने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं।
अनुवाद के बाद बदलाव — कहावतें अपनी भाषा की लय, तुक और लोक-स्वाद में रची होती हैं; अनुवाद में मूल अर्थ तो रहता है, पर उसकी काव्यात्मक मिठास और स्थानीय अपनापन कुछ कम हो जाता है।
| हिंदी | समान/मिलते-जुलते शब्द | मराठी |
|---|---|---|
| संगीत | संगीत | संगीत |
| नाम | नाव | नाव |
| गाँव | गाव | गाव |
| राग | राग | राग |
| माँ | आई | आई |
आप अपने क्षेत्र की भाषा (तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि) के समान-अर्थ शब्दों से अपना सेतु-चित्र बना सकते हैं।
भाषा संगम
‘संगीत’ शब्द विभिन्न भारतीय भाषाओं में| भाषा | शब्द | भाषा | शब्द |
|---|---|---|---|
| हिंदी | संगीत | नेपाली | संगीत |
| संस्कृत | सङ्गीतम् | बांग्ला | संगीत |
| पंजाबी | संगीत | असमिया | संगीत |
| उर्दू | मूसीकी, मौसिकी | मणिपुरी | ईशै |
| कश्मीरी | मूसीकी, संगीत | ओड़िआ | संगीत |
| सिंधी | संगीत | तेलुगु | संगीतमु |
| मराठी | संगीत कला | तमिल | संगीतम्, इशै |
| गुजराती | संगीतकळा | मलयालम | संगीतम् |
| कोंकणी | संगीत | कन्नड़ | संगीत |
अन्य भाषाओं में — अंग्रेज़ी: Music। आप ‘संगीत’ का शब्द व यह वाक्य अपनी मातृभाषा में भी लिखिए: “उस दिन घर में संगीत की सभा होती थी।”
गतिविधियाँ
पोस्टर, भाषा-वृक्ष व समय-रेखा- ‘नाम रह जाता है…’ पोस्टर — ऊपर बड़े अक्षरों में यह वाक्य लिखें; नीचे विभिन्न भाषाओं में ‘नाम’ शब्द (नाव, नालो, नांउ, मिङ्, पेरु, नामम्) सजाएँ और कक्षा में प्रतिज्ञा लें — ‘हम हर भाषा का सम्मान करेंगे।’
- भाषा-वृक्ष — पेड़ की जड़ में ‘भारतीय संस्कृति’; तने व शाखाओं पर हिंदी, मराठी, तमिल, बांग्ला, गुजराती आदि; हर शाखा पर उस भाषा का एक प्यारा शब्द जोड़ें।
- समाचार बुलेटिन — हिंदी, अंग्रेज़ी व एक क्षेत्रीय भाषा में ‘कला जो जोड़ती है, बाँटती नहीं’ विषय पर छोटा बुलेटिन बनाएँ।
- भाषाई स्मृति पोटली — परिवार में बोली जाने वाली भाषाओं के पाँच शब्द कार्ड पर लिखकर पोटली में सजाएँ।
- स्वर-कोलाज — लता जी के प्रेरक वाक्यों व गीतों के शीर्षकों का चित्रमय कोलाज बनाएँ।
खोजबीन
लता मंगेशकर से जान-पहचान- भारत रत्न (2001) — देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
- दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (1989) — सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान।
- पद्म भूषण (1969) व पद्म विभूषण (1999)।
- राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ पार्श्व-गायिका, कई बार)।
- अनेक फ़िल्मफेयर पुरस्कार (लाइफ़टाइम अचीवमेंट सहित)।
- लीजन ऑफ ऑनर (फ्रांस, 2007) — फ्रांस का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
- ‘महाराष्ट्र भूषण’ व अनेक अन्य राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मान।
2 & 3. इंटरनेट की सहायता से उनकी किसी फ़िल्म व गीत (जैसे देशभक्ति गीत ‘ऐ मेरे वतन के लोगो’) को देख-सुनकर अपने विचार लिखिए कि वह आपको कैसा लगा और क्यों।
